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Public Politics:नवी मुंबई मनपा चुनाव में दल-बदल करने वाले उम्मीदवारों को जनता ने नकारा

नवी मुंबई मनपा चुनाव: दल-बदल कर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को जनता ने नकारा, अवसरवाद पर पड़ा भारी जनादेश
नवी मुंबई मनपा चुनाव: दल-बदल कर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को जनता ने नकारा, अवसरवाद पर पड़ा भारी जनादेश
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पार्टी बदलकर टिकट लेने की रणनीति उलटी पड़ी, अधिकांश उम्मीदवारों को हार

नवी मुंबई: नवी मुंबई महानगरपालिका (मनपा) चुनाव से पहले बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने अपनी पुरानी पार्टी की निष्ठा छोड़कर दूसरे दलों से चुनाव लड़ने का रास्ता चुना। चुनाव की पूर्व संध्या पर टिकट पाने के लिए किया गया यह राजनीतिक दल-बदल इस बार मतदाताओं को रास नहीं आया। चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया कि जनता ने ऐसे राजनीतिक अवसरवाद को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

चुनाव नतीजों में यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि अंतिम समय में पार्टी बदलने वाले अधिकांश उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा। मतदाताओं ने विचारधारा में अचानक आए इस बदलाव को स्वीकार नहीं किया और ऐसे उम्मीदवारों को समर्थन देने से इनकार कर दिया।


ऐरोली में मढ़वी परिवार को बड़ा झटका

दल-बदल से सबसे बड़ा झटका ऐरोली विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला। मनोहर उर्फ एम. के. मढ़वी, जो नवी मुंबई में शिवसेना (ठाकरे गुट) के प्रमुख नेतृत्व के रूप में पहचाने जाते थे, आचार संहिता लागू होने के कुछ ही दिनों के भीतर अपने परिवार के साथ शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए थे।

हालांकि, चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे। इस चुनाव में:

  • एम. के. मढ़वी
  • उनकी पत्नी विनया मढ़वी (वार्ड 5D)
  • बहू तेजश्री करण मढ़वी (वार्ड 5A)

तीनों को ही हार का सामना करना पड़ा, जिससे यह संकेत मिला कि मतदाताओं ने परिवार सहित किए गए दल-बदल को स्वीकार नहीं किया।


भाजपा में शामिल हुए विठ्ठल मोरे के बेटे को भी हार

इसी तरह, नवी मुंबई से शिवसेना (ठाकरे गुट) के वरिष्ठ नेता विठ्ठल मोरे ने नामांकन की अंतिम तिथि से ठीक एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया था। यह कदम उन्होंने अपने बेटे के लिए टिकट सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया था।

हालांकि, उनके बेटे अवधूत मोरे (वार्ड 17D) को भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, जिससे यह साफ हुआ कि केवल पार्टी बदलकर टिकट हासिल करना मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर सका।


सानपाड़ा में भी नहीं चला दल-बदल का दांव

सानपाड़ा मंडल में भी इसी तरह का नतीजा देखने को मिला। पूर्व पार्षद सोमनाथ वास्कर (वार्ड 19A) और उनकी पत्नी कोमल वास्कर (वार्ड 19B) ने शिवसेना (ठाकरे गुट) छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में प्रवेश किया था।

लेकिन दोनों को ही अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिला और चुनाव परिणाम उनके खिलाफ रहे।


मतदाताओं का स्पष्ट संदेश

नवी मुंबई मनपा चुनाव के नतीजों ने यह साफ संदेश दिया है कि मतदाता सिद्धांत और निष्ठा को महत्व देते हैं। अंतिम समय में पार्टी बदलने वाले उम्मीदवारों को जनता ने नकार दिया और यह साबित कर दिया कि केवल सत्ता या टिकट की राजनीति के लिए किया गया दल-बदल अब स्वीकार्य नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परिणाम भविष्य के चुनावों में राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

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