Public Land Namaz: सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर Allahabad High Court के हालिया फैसले का समर्थन सामने आया है। Maulana Shahabuddin Rizvi Barelvi समेत कई धर्मगुरुओं और नेताओं ने इसे कानून और शरीयत—दोनों के लिहाज से सही बताया है।
धर्मगुरुओं का समर्थन
Maulana Shahabuddin Rizvi Barelvi ने कहा कि इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार ऐसी जगह पर नमाज नहीं पढ़नी चाहिए जहां विवाद या आपत्ति की संभावना हो। उनका मानना है कि शांति और सहमति सबसे जरूरी है।
कोर्ट का स्पष्ट रुख
Allahabad High Court ने अपने फैसले में कहा कि निजी संपत्ति पर कभी-कभार धार्मिक प्रार्थना की जा सकती है, लेकिन सार्वजनिक जमीन का नियमित या विशेष धार्मिक उपयोग नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि राज्य की जिम्मेदारी है कि सभी को सार्वजनिक जमीन तक समान पहुंच मिले।
याचिका खारिज
हाई कोर्ट ने असीन नाम के व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी, जिसमें संभल जिले में सार्वजनिक जमीन पर नमाज के लिए अनुमति और सुरक्षा की मांग की गई थी। अदालत ने इसे नियमों के खिलाफ माना।
इकबाल अंसारी की प्रतिक्रिया
Iqbal Ansari ने कहा कि नमाज के लिए मस्जिदें मौजूद हैं, इसलिए सार्वजनिक जमीन का इस्तेमाल जरूरी नहीं है। उन्होंने अदालत के फैसले का सम्मान करने की अपील की।
शरीयत का हवाला
शाही मुख्य मुफ्ती Maulana Chaudhary Ifrahim Hussain ने भी फैसले को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि नमाज के लिए साफ और विवाद-मुक्त स्थान जरूरी है, और सार्वजनिक जगहों पर कब्जा करना न कानूनन सही है, न धार्मिक रूप से।
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अयोध्या से समर्थन
Girish Pati Tripathi ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियां नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के रुख का हवाला देते हुए फैसले का स्वागत किया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता Hussain Dalwai ने भी फैसले को उचित बताया। हालांकि उन्होंने कहा कि ईद जैसे मौकों पर अस्थायी रूप से सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल अलग परिस्थिति हो सकती है, जैसा अन्य धर्मों में भी होता है।

