Shramjeevi Sanghatana Protest: आजादी के इतने वर्षों बाद भी आदिवासी समाज के कई परिवार आधार कार्ड, राशन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र और जाति प्रमाणपत्र जैसी मूलभूत दस्तावेजी सुविधाओं से वंचित हैं। इसी मुद्दे को लेकर श्रमजीवी संगठन की ओर से भिवंडी तहसीलदार कार्यालय के बाहर जोरदार धरना आंदोलन किया गया।
लगातार पत्र-व्यवहार और शिकायतों के बावजूद प्रशासन द्वारा ठोस कार्रवाई न किए जाने से नाराज कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने तहसील कार्यालय के बाहर कड़कती धूप में बैठकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। आंदोलन का नेतृत्व जिला उपाध्यक्ष सागर देसक ने किया।
धरने में प्रकाश राउत, जया पारधी, गुलाब म्हसकर, जयेश पाटिल, विश्वनाथ पासारी और तानाजी लहांगे सहित बड़ी संख्या में श्रमजीवी संगठन के कार्यकर्ता शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक प्रभावित परिवारों को आवश्यक प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
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जिला उपाध्यक्ष सागर दसक ने आरोप लगाया कि कई आदिवासी और कातकरी परिवारों के पास जन्म प्रमाणपत्र तक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में आधार कार्ड और राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती, जिसके कारण ये परिवार सरकारी योजनाओं और नागरिक सुविधाओं से पूरी तरह वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसे परिवारों के लिए विशेष शिविर आयोजित कर तत्काल पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए, ताकि जरूरतमंद लोगों को उनके मूलभूत अधिकार मिल सकें। आंदोलनकारियों का कहना था कि दस्तावेजों के अभाव में गरीब और आदिवासी परिवार शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं के लाभ से लगातार दूर होते जा रहे हैं।
धरना प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक पीड़ित परिवारों को आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य आवश्यक प्रमाणपत्र नहीं सौंपे जाते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

