Shramjeevi Sanghatana Protests: भिवंडी तालुका के गोमतारा किला से देपोली मार्ग पर जिला योजना समिति के माध्यम से लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कंक्रीट सड़क की गुणवत्ता को लेकर श्रमजीवी संगठन ने तीव्र विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने भादवड स्थित सार्वजनिक निर्माण विभाग (लोनिवि) कार्यालय पर मोर्चा निकालकर धरना दिया और सड़क निर्माण में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की।
जानकारी के अनुसार, पिळंझे ग्राम पंचायत के अंतर्गत देपोली से गोमतारा किला मार्ग पर स्थित भवरपाडा, नंबरपाडा और खरमपाडा जैसे आदिवासी बस्तियों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2022-23 में जिला योजना समिति के माध्यम से दो करोड़ रुपये की निधि मंजूर की गई थी।
श्रमजीवी संगठन का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा सड़क निर्माण कार्य अत्यंत निम्न गुणवत्ता का किया गया है। इस संबंध में स्थानीय ग्रामीणों और संगठन की ओर से 16 मार्च को सार्वजनिक निर्माण विभाग को लिखित शिकायत भी दी गई थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने न तो स्थल निरीक्षण किया और न ही तकनीकी जांच कर कोई कार्रवाई की।
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व श्रमजीवी संगठन के तालुका सचिव विश्वनाथ पासारी, उपाध्यक्ष चंद्रकांत रायत, महापोली गुट अध्यक्ष दयानंद पाटील सहित तानाजी लहांगे, सुरेश ठाकरे, दशरथ गवळी, किशोर पाटील, विठ्ठल पस्टे, निलेश शेलार, भीमाबाई पवार और सुनीताबाई भवर ने किया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सड़क निर्माण शुरू करते समय नियमानुसार परियोजना की जानकारी, स्वीकृत निधि और कार्य विवरण दर्शाने वाला सूचना फलक नहीं लगाया गया। इसके अलावा सड़क निर्माण के दौरान आवश्यक रोलर कॉम्पैक्शन नहीं किया गया और सीमेंट कंक्रीट सड़क पर निर्धारित मानकों के अनुसार पानी का छिड़काव भी नहीं किया गया।
संगठन का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही सड़क पर कई स्थानों पर बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। सड़क किनारे बनाई गई नालियां भी निम्न गुणवत्ता की सामग्री के कारण टूटने और ध्वस्त होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। कई जगहों पर सड़क की मोटाई स्वीकृत अनुमान (एस्टीमेट) से कम होने का आरोप भी लगाया गया है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका व्यक्त की गई है।
श्रमजीवी संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है तथा संबंधित ठेकेदार को संरक्षण दिया जा रहा है। संगठन ने मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की तत्काल निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए, ठेकेदार का भुगतान रोका जाए तथा निर्धारित मानकों और स्वीकृत बजट के अनुसार सड़क का पुनर्निर्माण कराया जाए। साथ ही, कार्य की निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।

