Washim Custodial Death Case: महाराष्ट्र के वाशिम जिले में वर्ष 2011 के चर्चित हिरासत में मौत मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए रिसोड पुलिस थाने के तत्कालीन प्रभारी अधिकारी माधव मणिकराव धांडे सहित 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।
अदालत ने दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों में से चार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी अलग से सजा सुनाई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ (Concurrent) चलेंगी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, बेग्या पवार और एक अन्य व्यक्ति को 9 मई 2011 को एक आपराधिक मामले की जांच के सिलसिले में रिसोड पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। आरोप है कि हिरासत के दौरान बेग्या पवार के साथ गंभीर मारपीट की गई, जिससे उनके शरीर पर 43 चोटों के निशान पाए गए। अगले दिन अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों ने पुलिस पर हिरासत में बेरहमी से मारपीट कर हत्या करने का आरोप लगाया था। मामले ने व्यापक जनाक्रोश पैदा किया, जिसके बाद जांच महाराष्ट्र सीआईडी को सौंप दी गई। सीआईडी ने चिकित्सीय साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया।
अपर सत्र न्यायाधीश जे.पी. झापटे ने सभी नौ आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत हत्या, स्वीकारोक्ति कराने के लिए गंभीर चोट पहुंचाने, आपराधिक साजिश और साझा आपराधिक मंशा जैसे आरोपों में दोषी ठहराया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 47 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला महाराष्ट्र में हिरासत में मौत के मामलों में पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराने वाले सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित निर्णयों में से एक माना जा रहा है।

