Category: Maharashtra

  • Mumbai Mayor Election: मेयर पद महिला के लिए आरक्षित होते ही बदले सियासी समीकरण

    Mumbai Mayor Election: मेयर पद महिला के लिए आरक्षित होते ही बदले सियासी समीकरण

    बीएमसी में भाजपा की छह महिला पार्षदें रेस में, तेजस्वी घोसालकर बाहर

    मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मेयर पद के लिए लॉटरी सिस्टम से आरक्षण तय होते ही राजनीतिक तस्वीर साफ हो गई है। इस बार मेयर की कुर्सी महिला आरक्षण में जाने के बाद सत्ता समीकरण तेजी से बदल गए हैं। सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर अब छह प्रमुख महिला पार्षदों के नामों पर गंभीर मंथन शुरू हो गया है, जिन्हें इस प्रतिष्ठित पद का दावेदार माना जा रहा है।

    लंबे समय से मेयर पद को लेकर जारी सस्पेंस उस वक्त खत्म हुआ जब आरक्षण प्रक्रिया में यह पद महिला के लिए सुरक्षित घोषित कर दिया गया। इसके साथ ही भाजपा खेमे में संभावित नामों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया। हालांकि सबसे चौंकाने वाला घटनाक्रम यह रहा कि चुनाव नतीजों के बाद से मेयर पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे तेजस्वी घोसालकर अब इस दौड़ से बाहर हो गए हैं। घोसालकर ने चुनाव से ठीक पहले अविभाजित शिवसेना छोड़कर भाजपा का दामन थामा था और वार्ड नंबर 2 से जीत दर्ज की थी, लेकिन ताजा राजनीतिक समीकरणों में उनका नाम रेस से बाहर होना कई विश्लेषकों को हैरान कर रहा है।

    भाजपा की ओर से ये छह नाम चर्चा में

    महिला आरक्षण के बाद भाजपा में अब जिन छह महिला पार्षदों को मेयर पद के लिए सबसे आगे माना जा रहा है, उनमें से अलका केरकर (वार्ड 98): तीन बार की पार्षद और पूर्व उपमहापौर रह चुकी हैं। पार्टी के कोर ग्रुप में मजबूत पकड़ के कारण उन्हें सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

    हर्षिता नार्वेकर (वार्ड 225): महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर की रिश्तेदार होने के कारण राजनीतिक प्रभाव रखती हैं।

    रितू तावडे (वार्ड 132): पार्टी नेतृत्व का भरोसा इस नाम पर भी माना जा रहा है।

    राजश्री शिरवडकर (वार्ड 172): संगठन में सक्रिय भूमिका के चलते प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।

    शीतल गंभीर (वार्ड 190): हालिया जीत के बाद उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।

    आशा मराठे (वार्ड 152): जमीनी पकड़ और संगठनात्मक सक्रियता के कारण चर्चा में हैं।

    महायुति की मजबूत स्थिति

    बीएमसी चुनाव नतीजों में भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के गठबंधन महायुति ने शानदार प्रदर्शन किया है। 16 जनवरी को घोषित परिणामों में महायुति को कुल 118 सीटें मिलीं, जिनमें भाजपा के 89 और शिवसेना के 29 पार्षद शामिल हैं। बहुमत का यह आंकड़ा भाजपा को मेयर पद पर अपना उम्मीदवार बैठाने की मजबूत स्थिति में खड़ा करता है। वहीं उद्धव ठाकरे गुट को 65 सीटों पर संतोष करना पड़ा है।

    अब राजनीतिक हलकों की निगाहें दिल्ली और राज्य नेतृत्व पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि इन छह महिला नामों में से किसके सिर पर मुंबई के मेयर का ताज सजता है।

  • Mumbai Security: बलॉर्ड पियर-फोर्ट  इलाके में अवैध गैरेज और पार्किंग से बढ़ता खतरा

    Mumbai Security: बलॉर्ड पियर-फोर्ट इलाके में अवैध गैरेज और पार्किंग से बढ़ता खतरा

    मुंबई। मुंबई के सबसे संवेदनशील इलाकों में शुमार फोर्ट क्षेत्र में अवैध गैरेज और गैरकानूनी पार्किंग का जाल अब शहर की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। बजू कोटक मार्ग, आर. कामानी रोड समेत आसपास की कई गलियों में सार्वजनिक सड़कों को अवैध रूप से कार रिपेयरिंग वर्कशॉप और पार्किंग में तब्दील कर दिया गया है। यह स्थिति न सिर्फ ट्रैफिक व्यवस्था को बाधित कर रही है, बल्कि भविष्य में आपराधिक और देशद्रोही गतिविधियों को भी खुला न्योता दे सकती है।

    संवेदनशील इलाका, सुरक्षा मानकों की अनदेखी

    फोर्ट क्षेत्र में मंत्रालय, बॉम्बे हाईकोर्ट, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और पोर्ट ट्रस्ट जैसे देश के अत्यंत महत्वपूर्ण संस्थान स्थित हैं। इसके बावजूद यहां सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
    गौरतलब है कि मुंबई पहले भी इसी क्षेत्र के आसपास आतंकी और देशद्रोही घटनाओं का दंश झेल चुकी है। ऐसे में मौजूदा हालात प्रशासन की लापरवाही को उजागर करते हैं।

    हर गली में अवैध गैरेज का जाल

    स्थानीय नागरिकों के अनुसार बजू कोटक मार्ग, आर. कामानी रोड और आसपास की गलियों में खुलेआम अवैध कार और बाइक रिपेयरिंग गैरेज संचालित हो रहे हैं।
    सार्वजनिक सड़कों पर दिनदहाड़े गाड़ियां खड़ी कर मरम्मत, ऑयल चेंज और लंबे समय तक पार्किंग की जा रही है, जो कानून का सीधा उल्लंघन है।

    अवैध पार्किंग बना सुरक्षा के लिए सीधा खतरा

    बिना किसी जांच के लंबे समय तक खड़ी रहने वाली गाड़ियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
    विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी गाड़ियों का इस्तेमाल—

    • संदिग्ध वस्तुएं, विस्फोटक या हथियार छिपाने में
    • रेकी (टोह लेने) के लिए
    • अपराध के बाद फरार होने के साधन के रूप में
      किया जा सकता है। यह स्थिति अपराधियों और देशद्रोही तत्वों को आसान कवर उपलब्ध कराती है।

    पुलिस और BMC की भूमिका पर सवाल

    चौंकाने वाली बात यह है कि कई अवैध गैरेज ट्रैफिक चौकी और पुलिस स्टेशन के बेहद करीब चल रहे हैं। इसके बावजूद न तो नियमित कार्रवाई हो रही है और न ही कोई स्थायी समाधान नजर आता है।
    अब तक की कार्रवाई सिर्फ नाममात्र के जुर्मानों तक सीमित रही है, जिससे अवैध गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

    मामला केवल ट्रैफिक नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का

    यह मुद्दा सिर्फ अतिक्रमण या ट्रैफिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

    जनहित में स्पष्ट मांग

    स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि—

    • फोर्ट इलाके में अवैध गैरेजों की तत्काल पहचान कर उन्हें हटाया जाए
    • बिना अनुमति खड़ी सभी गाड़ियों की गहन जांच कर जब्ती की जाए
    • जिम्मेदार पुलिस और मुंबई महानगरपालिका (BMC) अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए

    इस खबर को प्रकाशित करने का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि मुंबई की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो और किसी भी आपराधिक या देशद्रोही तत्व को शहर में गलत गतिविधियों का मौका न मिले।
    खबर का असर

    खबर सामने आने के बाद संबंधित ट्रैफिक पुलिस ने PSI संदीप सोनावाने के नेतृत्व में अवैध रूप से खड़ी गाड़ियों और सड़क पर कब्जा कर चलाए जा रहे गैरेजों पर कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान अवैध पार्किंग और सड़क पर कब्जा करने वाले गैरेज व वाहन मालिकों पर मात्र ₹1200-₹1200 का जुर्माना लगाया गया और गाड़ियां हटाई गईं।

    हालांकि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतनी मामूली कार्रवाई से अवैध गतिविधियों पर रोक लगना मुश्किल है। लोगों के अनुसार, जब तक सख्त और स्थायी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक अवैध गैरेज और पार्किंग का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

  • KDMC Politics: कल्याण-डोंबिवली में मनसे का रुख बदला, भाजपा ने बताया 2019 के ‘विश्वासघात’ का नतीजा

    KDMC Politics: कल्याण-डोंबिवली में मनसे का रुख बदला, भाजपा ने बताया 2019 के ‘विश्वासघात’ का नतीजा

    मुंबई। भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को दावा किया कि कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) द्वारा शिवसेना (शिंदे गुट) को समर्थन दिया जाना, 2019 में उद्धव ठाकरे द्वारा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से किए गए ‘विश्वासघात’ का परिणाम है। भाजपा का कहना है कि अब राजनीतिक फैसलों का असर जमीन पर दिखाई देने लगा है।

    राज्य भाजपा के मीडिया प्रभारी नवनाथ बान ने आरोप लगाया कि शिवसेना (उबाठा) ने मनसे को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि 2017 की तुलना में इस बार मुंबई में मनसे के पार्षदों की संख्या कम हुई है, जबकि शिवसेना (उबाठा) के साथ गठबंधन के बावजूद पार्टी को अपेक्षित लाभ नहीं मिला।

    बान ने संकेत दिया कि कल्याण-डोंबिवली में बना नया राजनीतिक समीकरण अन्य नगर निकायों में भी दोहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जनता अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को विकास के प्रतीक के रूप में देख रही है।

    गौरतलब है कि बुधवार को मनसे के पांच पार्षदों ने भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को केडीएमसी में समर्थन देने की घोषणा की। इसे शिवसेना (उबाठा) के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, खासकर तब जब दोनों दलों ने हाल ही में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) का चुनाव एक साथ लड़ा था।

    भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में नवनाथ बान ने कहा कि 2019 में भाजपा के साथ चुनाव लड़ने के बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद के लिए देवेंद्र फडणवीस से विश्वासघात किया था। अब उसी का परिणाम कल्याण-डोंबिवली में दिखाई दे रहा है।

    इस बीच शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत ने दावा किया कि केडीएमसी में हुए घटनाक्रम से राज ठाकरे नाराज़ हैं, क्योंकि यह मनसे का आधिकारिक फैसला नहीं था। हालांकि मनसे नेता बाला नंदगांवकर ने कहा कि यह स्थानीय स्तर पर बनी सहमति का नतीजा है।

    संजय राउत के बयान पर पलटवार करते हुए बान ने कहा कि जिन नेताओं ने खुद राजनीतिक नैतिकता को ताक पर रखा, उन्हें दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना (उबाठा) जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।

    भाजपा नेता ने दावा किया कि मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, नवी मुंबई समेत राज्य के कई हिस्सों में महायुति को स्पष्ट जनादेश मिला है। साथ ही उन्होंने कुछ धार्मिक नेताओं को लेकर राउत की हालिया टिप्पणियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि शिवसेना (उबाठा) की संतों के प्रति चिंता चुनावी हार के बाद ही सामने आई है, जबकि सत्ता में रहते हुए 2020 में पालघर में दो साधुओं की हत्या के समय पार्टी चुप्पी साधे रही।

  • सत्ता के लिए सब तैयार(Maharashtra Politics): जनता का पैसा, सत्ता का खेल

    सत्ता के लिए सब तैयार(Maharashtra Politics): जनता का पैसा, सत्ता का खेल

    अंबरनाथ, कल्याण-डोंबिवली, उल्हासनगर या अचलपुर हर जगह सिर्फ समझौता, जनता की जमी हुई मेहनत पर राजनीति खेल

    मुंबई/अमरावती: राजनीतिक सिद्धांत और वैचारिक मजबूती को ताक पर रखकर, महाराष्ट्र की सभी प्रमुख और क्षेत्रीय पार्टियां केवल सत्ता की कुर्सी पाने के लिए गठजोड़ करती नजर आ रही हैं। चाहे वह अंबरनाथ नगरपालिका हो, कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका, उल्हासनगर महानगरपालिका, या अचलपुर नगर परिषद, हर जगह सिर्फ समझौते और गठबंधन ही देखने को मिल रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन गठबंधनों का मुख्य उद्देश्य जनता के टैक्स से चलने वाली सरकारी मशीनरी पर नियंत्रण और संसाधनों का निजी स्वार्थ के लिए उपयोग है। भाजपा, कांग्रेस या क्षेत्रीय पार्टियां—कोई भी पीछे नहीं है, और हर कोई सत्ता के लिए साफ-सुथरी राजनीति छोड़कर, केवल अपने फायदे के लिए किसी भी छल-कपट या समझौते को तैयार है।

    हालिया उदाहरण:

    -कल्याण-डोंबिवली में मनसे के पांच पार्षदों ने भाजपा-शिंदे गठबंधन को समर्थन दिया, जबकि उद्धव गुट की शिवसेना (उबाठा) हार का सामना कर रही थी।

    -अचलपुर नगर परिषद में भाजपा, एआईएमआईएम और कांग्रेस ने तालमेल कर समिति अध्यक्ष निर्विरोध चुने, स्थानीय विधायक तक को इसमें विश्वास में नहीं लिया गया।

    -अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता पाने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने हाथ मिलाया, जिसके बाद कई पार्षदों के पार्टी बदलने की खबरें सामने आईं।

    जनता का पैसा, सत्ता का खेल

    विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के गठबंधन सिर्फ और सिर्फ जनता के टैक्स और सरकारी फंड का निजीकरण सुनिश्चित करने के लिए बनाए जा रहे हैं। किसी भी नैतिक या विकास-उन्मुख एजेंडे की कोई परवाह नहीं।

    सावधान!

    लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों और जनता की मेहनत के पैसों को इस तरह राजनीतिक गठजोड़ के लिए हथियार बनाने की प्रवृत्ति, सख्त जनजागरूकता और सतर्कता की मांग करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जनता और मीडिया ने इस दिशा में ध्यान नहीं दिया, तो यह गठबंधन केवल सत्ता की कुर्सी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले बनकर रह जाएंगे।

  • Mumbai BMC News: मुंबई में शिवसेना कॉरपोरेटर्स के लिए विशेष ट्रेनिंग कैंप, एकनाथ शिंदे देंगे मार्गदर्शन

    आर. एस. नेटवर्क

    मुंबई | मुंबई महानगरपालिका चुनाव में जीत हासिल करने वाले शिवसेना के 29 नवनिर्वाचित कॉरपोरेटर्स के लिए मुंबई में एक विशेष ट्रेनिंग कैंप का आयोजन किया गया है। यह जानकारी युवा सेना के जनरल सेक्रेटरी और कॉरपोरेटर अमेय घोले ने दी।अमेय घोले ने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर के दौरान शिवसेना के मुख्य नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कॉरपोरेटर्स को मुंबई महानगरपालिका की कार्यप्रणाली, प्रमुख विकास योजनाओं और आगामी पांच वर्षों के रोडमैप पर विस्तृत मार्गदर्शन देंगे। इसके साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेता वार्ड स्तर पर प्रभावी ढंग से कार्य करने के तरीकों की भी जानकारी देंगे।यह तीन दिवसीय ट्रेनिंग कैंप मुंबई के होटल ताज लैंड्स एंड में आयोजित किया जा रहा है। घोले ने कहा कि चुनाव परिणाम घोषित होने के अगले ही दिन से शिवसेना के कॉरपोरेटर्स ने जनहित के कार्यों की शुरुआत कर दी है, ताकि जनता द्वारा जताए गए विश्वास पर खरा उतरा जा सके।उन्होंने यह भी बताया कि राज्यभर में शिवसेना के कुल 397 कॉरपोरेटर्स निर्वाचित हुए हैं, जो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में जनता के भरोसे और पार्टी की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।मुंबई के महापौर पद को लेकर घोले ने स्पष्ट किया कि यह पद ग्रैंड अलायंस के खाते में जाएगा और इस संबंध में अंतिम निर्णय पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।

  • Fraud Voter Name 2026: कालबादेवी के रामवाड़ी में मतदाता सूची में बड़ा फर्जीवाड़ा, एक व्यक्ति के दो नाम और दो फोटो से मचा हड़कंप

    मतदाता सूची में गड़बड़ी पर विपक्ष सख्त हो, चुप्पी टूटी नहीं तो लोकतंत्र पर खतरा: पार्टियों को चेतावनी

    आर.एस. नेटवर्क। अश्विनीकुमार

    मुंबई | कालबादेवी के रामवाड़ी स्थित प्रभु सुंदर बिल्डिंग, वार्ड क्रमांक 222 में मतदाता सूची को लेकर सामने आई गंभीर अनियमितताओं ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप है कि एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग नाम और दो अलग-अलग फोटो के आधार पर दो मतदाता दर्ज किए गए हैं। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में राजनीतिक हलचल मच गई है और नागरिकों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।


    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह महज़ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया खेल प्रतीत होता है, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है। प्रभु सुंदर बिल्डिंग में रहने वाले एक व्यक्ति, जिसका नाम बदले हुए रूप में रुद्रेश बताया जा रहा है, से इलाके के लोगों की नियमित मुलाकात होती रहती है। रविवार को जब कुछ नागरिक उनके घर पहुंचे, तो जानकारी मिली कि भाजपा उम्मीदवार रीता मकवाना की ओर से मतदाता पर्चियों का वितरण किया जा रहा था। संबंधित बिल्डिंग के लिए कुल चार शीट की मतदाता पर्चियां तैयार की गई थीं।


    जब इन शीट्स की गहन जांच की गई, तो चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आईं। एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज पाया गया। एक जगह पिता के नाम की जगह मां का नाम दर्ज था, तो दूसरी जगह पिता का नाम लिखा गया था। इतना ही नहीं, एक स्थान पर कमरे का नंबर 61 दर्शाया गया, जबकि दूसरी जगह वही व्यक्ति कमरे नंबर 6 में दर्ज मिला। दोनों प्रविष्टियों में अलग-अलग फोटो लगाए गए थे, जिससे दो अलग मतदाताओं का आभास पैदा किया गया।


    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस प्रकार की त्रुटियां यह साफ़ संकेत देती हैं कि मतदाता सूची तैयार करने में या तो घोर लापरवाही बरती गई है या फिर जानबूझकर गड़बड़ी की गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस मतदाता सूची के निर्माण पर चुनाव आयोग करोड़ों रुपये खर्च करता है, उसमें ऐसी गंभीर चूक कैसे संभव है। लोगों को आशंका है कि यह मामला केवल इसी एक बिल्डिंग तक सीमित नहीं, बल्कि शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के फर्जी और डुप्लिकेट मतदाता तैयार किए गए हो सकते हैं।
    इस प्रकरण के सामने आने के बाद विपक्षी दलों कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और वंचित बहुजन आघाड़ी से तत्काल और आक्रामक भूमिका निभाने की मांग तेज़ हो गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि अब भी विपक्ष चुप्पी साधे रहता है, तो आने वाले चुनावों में लोकतंत्र के साथ बड़ा खिलवाड़ होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
    स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि फर्जी आधार कार्ड के सहारे फर्जी मतदान कराया जा सकता है और अलग-अलग इमारतों में इस तरह के डुप्लिकेट मतदाता खड़े किए जा सकते हैं। नागरिकों ने चुनाव आयोग से मांग की है कि तत्काल आधार कार्ड की सत्यता जांचने के लिए सख्त और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए, ताकि डुप्लिकेट और फर्जी आधार के जरिए किसी अन्य के नाम पर मतदान कराने की साजिश को समय रहते रोका जा सके।
    यह मामला न केवल सत्ताधारी दलों के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है, बल्कि चुनाव आयोग(Mumbai Election 2026) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक तूफान बन सकता है।

  • Mahanagar Palika 2026: ‘सात संकल्प, नई शुरुआत’, पिंपरी-चिंचवड़ के लिए अजित पवार का घोषणापत्र जारी

    Mahanagar Palika 2026: ‘सात संकल्प, नई शुरुआत’, पिंपरी-चिंचवड़ के लिए अजित पवार का घोषणापत्र जारी

    पिंपरी-चिंचवड़: नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री अजितदादा पवार ने पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका चुनाव के लिए पार्टी का घोषणापत्र ‘सात संकल्प, एक नई शुरुआत’ के नारे के साथ जारी किया। इस घोषणापत्र में शहर की बुनियादी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए विकास का स्पष्ट रोडमैप पेश किया गया है।

    घोषणापत्र में रोज़ाना जलापूर्ति, बेहतर सड़कें, ट्रैफिक प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और पारदर्शी विकास योजना जैसे मुद्दों पर ठोस वादे किए गए हैं। पार्टी का दावा है कि यह घोषणापत्र छह महीने के ऑन-ग्राउंड सर्वे, वार्ड-स्तरीय संवाद और नागरिकों से सीधी बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। इस दौरान नागरिकों की प्रमुख मांगों नियमित पानी की आपूर्ति, तेज़ और सुरक्षित परिवहन, स्वच्छ वातावरण, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और प्रत्यक्ष आर्थिक राहत को घोषणापत्र में प्राथमिकता दी गई है।

    सात प्रमुख संकल्प

    • रोज़ाना स्वच्छ जलापूर्ति
      हर घर में तय समय पर हाई-प्रेशर नल से पानी, टैंकर निर्भरता खत्म करना, लीकेज-फ्री पाइपलाइन, नदियों का पुनर्जीवन और बाढ़ नियंत्रण के उपाय।
    • ट्रैफिक-फ्री और गड्ढा-मुक्त पीसीएमसी
      सड़कों की समयबद्ध मरम्मत, गुणवत्ता की ज़िम्मेदारी ठेकेदारों पर, डिजिटल शिकायत प्रणाली, मेट्रो रूट और फ्लाईओवर परियोजनाओं की पारदर्शी निगरानी।
    • देश का सबसे स्वच्छ शहर
      100% कचरा पृथक्करण, वैज्ञानिक निपटान, ज़ीरो लैंडफिल और स्वच्छता के लिए हाउसिंग सोसाइटियों की सक्रिय भागीदारी।
    • सस्ते और हाई-टेक हेल्थकेयर सेंटर
      बड़े अस्पताल, नए मेडिकल संस्थान, 100 सब-अर्बन क्लिनिक, किफायती जांच और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए मजबूत स्वास्थ्य सुविधाएं।
      -पारदर्शी विकास योजना (DP)
      मौजूदा ड्राफ्ट डीपी को रद्द कर नागरिकों की भागीदारी से नई योजना, कानूनी घरों की सुरक्षा और विस्थापन के बजाय पुनर्वास पर ज़ोर।
    • पीसीएमसी मॉडल स्कूल
      100 आधुनिक नगर निगम स्कूल-राष्ट्रीय मानकों की शिक्षा, आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षित शिक्षक और निःशुल्क सुविधाएं।
      -सीधी राहत और ज़िम्मेदार शासन
      मुफ़्त मेट्रो-बस यात्रा, छोटे घर मालिकों को प्रॉपर्टी टैक्स में छूट, छात्रों को टैबलेट, महिलाओं के लिए बिना ब्याज ऋण योजना तथा खेल-संस्कृति को प्रोत्साहन।

    -एक्शन-ओरिएंटेड विज़न डॉक्यूमेंट
    अजित पवार ने कहा कि ये सात संकल्प छत्रपति शिवाजी महाराज के लोककल्याणकारी शासन, छत्रपति शाहू महाराज के सामाजिक न्याय, महात्मा फुले के शिक्षा-समानता के विचार और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के समता सिद्धांत से प्रेरित हैं। बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबावों के बीच यह घोषणापत्र नागरिकों को सीधी राहत, मजबूत बुनियादी ढांचा और आत्मनिर्भर शहर की दिशा में ले जाने का संकल्प दर्शाता है। एनसीपी का यह घोषणापत्र नारों से अधिक एक्शन-ओरिएंटेड विज़न डॉक्यूमेंट के रूप में पेश किया गया है।

  • Election Commission 2026: बीजेपी ने यूपी से मंगाए नेता और प्रचार गाड़ियाँ, चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर उठे गंभीर सवाल

    Election Commission 2026: बीजेपी ने यूपी से मंगाए नेता और प्रचार गाड़ियाँ, चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर उठे गंभीर सवाल

    मुंबई | विशेष प्रतिनिधि
    महाराष्ट्र में चुनावी ज़मीन कमजोर पड़ते ही भारतीय जनता पार्टी ने प्रचार के लिए उत्तर प्रदेश से नेताओं, प्रचार गाड़ियों और सामग्री का आयात शुरू कर दिया है। जिस ईडी–सीबीआई के डर के सहारे भाजपा उत्तर भारत में राजनीतिक बढ़त बनाती रही, वही दबाव की राजनीति महाराष्ट्र में कारगर नहीं हो पा रही है। नतीजतन अब भाजपा को प्रचार के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त वाहन तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे, और मजबूरी में यूपी से गाड़ियाँ मंगाई जा रही हैं।


    सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन सभी प्रचार वाहनों की जानकारी चुनाव आयोग को दी गई है? या फिर भाजपा चुनाव आयोग की आंखों में धूल झोंककर बाहरी राज्यों से संसाधन लाकर खुलेआम आचार संहिता की धज्जियाँ उड़ा रही है?
    जानकारों के मुताबिक, चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार हर प्रचार वाहन, उसका नंबर, मालिकाना हक, खर्च और उपयोग की पूरी जानकारी आयोग के पास दर्ज होना अनिवार्य है। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि महाराष्ट्र की सड़कों पर यूपी नंबर की प्रचार गाड़ियाँ धड़ल्ले से घूम रही हैं, जिनका न तो स्थानीय स्तर पर कोई लेखा-जोखा दिख रहा है और न ही सार्वजनिक रूप से उनकी अनुमति स्पष्ट है।


    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा को महाराष्ट्र में जनाधार की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर भारतीय वोट बैंक को साधने के लिए बाहरी चेहरों को मैदान में उतारा जा रहा है, लेकिन यह प्रयास भी स्थानीय मतदाताओं को रास नहीं आ रहा। सवाल उठता है कि जब महाराष्ट्र में भाजपा के पास पर्याप्त संगठनात्मक ताकत और संसाधन हैं, तो प्रचार के लिए दूसरे राज्य पर निर्भरता क्यों?
    विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग भाजपा के मामले में चयनात्मक चुप्पी साधे हुए है। आम उम्मीदवारों और छोटे दलों पर सख्ती से नियम लागू किए जाते हैं, लेकिन सत्ताधारी दल द्वारा नियमों के संभावित उल्लंघन पर आयोग की निष्क्रियता लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
    – अब मांग उठ रही है कि चुनाव आयोग यह स्पष्ट करे कि
    – महाराष्ट्र में भाजपा के लिए कितनी प्रचार गाड़ियाँ पंजीकृत हैं?
    – यूपी से आई गाड़ियों की अनुमति किस आधार पर दी गई?
    – उनके खर्च का लेखा-जोखा किस खाते में दर्ज है?
    अगर इन सवालों के जवाब नहीं दिए गए, तो यह साफ माना जाएगा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर आंच आई है। लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ वोट से नहीं, नियमों की समानता से भी लड़े जाते हैं—और यही कसौटी आज भाजपा और चुनाव आयोग दोनों के सामने खड़ी है।

  • Bangladesh-Rohingya Matter: बांग्लादेशी–रोहिंग्या मुद्दे पर कांग्रेस का हमला, फडणवीस से मांगे ठोस आंकड़े

    Bangladesh-Rohingya Matter: बांग्लादेशी–रोहिंग्या मुद्दे पर कांग्रेस का हमला, फडणवीस से मांगे ठोस आंकड़े

    मुंबई। महाराष्ट्र में बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मुद्दे पर दावे नहीं, बल्कि प्रमाण देने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस ने कहा है कि अगर सरकार ने वाकई राज्य में अवैध प्रवासियों की “सबसे अधिक संख्या” की पहचान कर ली है, तो उसके स्पष्ट और सार्वजनिक आंकड़े सामने रखे जाएं।

    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने फडणवीस पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “सपनों का सौदागर” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार हकीकत से ज्यादा भविष्य के वादों और घोषणाओं पर निर्भर है। सावंत ने कहा कि मुंबई को बाढ़-मुक्त करने, ईस्टर्न फ्रीवे को ठाणे से जोड़ने और एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था जैसे बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन ज़मीन पर नतीजे नज़र नहीं आते।

    बीएमसी चुनाव से पहले बांग्लादेशी-रोहिंग्या मुद्दे को उठाने को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर राजनीतिक फायदे का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि डर और भ्रम की राजनीति के बजाय सरकार को अपने दावों की सच्चाई आंकड़ों के साथ जनता के सामने रखनी चाहिए।

  • Pakistan Bangladesh Politics: ओवैसी के बयान पर भड़के देवकीनंदन ठाकुर, पाकिस्तान–बांग्लादेश को लेकर कर दी ‘भविष्यवाणी’

    Pakistan Bangladesh Politics: ओवैसी के बयान पर भड़के देवकीनंदन ठाकुर, पाकिस्तान–बांग्लादेश को लेकर कर दी ‘भविष्यवाणी’

    New Delhi: हिजाब को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर सियासी और धार्मिक हलकों में घमासान मच गया है। कथावाचक और धार्मिक नेता देवकीनंदन ठाकुर ने ओवैसी पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि अगर उनका सपना है कि भारत में हिजाब पहनने वाली महिला प्रधानमंत्री बने, तो “हमारा भी सपना है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में तिलक और भगवा वस्त्र पहनने वाले लोग सत्ता में आएं।”

    देवकीनंदन ठाकुर ने इसे विचारधाराओं की टक्कर बताते हुए कहा कि जैसे ओवैसी भविष्य की कल्पना कर रहे हैं, वैसे ही सनातन समाज भी अपनी आकांक्षाएं रखता है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    ओवैसी के बयान पर बीजेपी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। बीजेपी सांसद अनिल बोंडे ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए कहा कि ओवैसी “आधा सच” बोल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई मुस्लिम महिलाएं हिजाब को मजबूरी मानती हैं और ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी गुलामी पसंद नहीं करता।

    गौरतलब है कि ओवैसी ने सोलापुर की जनसभा में भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा था कि भारत में कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है और भविष्य में हिजाब पहनने वाली महिला भी इस पद तक पहुंचेगी। इसी बयान ने अब सियासी आग में घी डालने का काम किया है।