KDMC Politics: कल्याण-डोंबिवली में मनसे का रुख बदला, भाजपा ने बताया 2019 के ‘विश्वासघात’ का नतीजा

कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में मनसे ने भाजपा का समर्थन किया

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मुंबई। भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को दावा किया कि कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) द्वारा शिवसेना (शिंदे गुट) को समर्थन दिया जाना, 2019 में उद्धव ठाकरे द्वारा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से किए गए ‘विश्वासघात’ का परिणाम है। भाजपा का कहना है कि अब राजनीतिक फैसलों का असर जमीन पर दिखाई देने लगा है।

राज्य भाजपा के मीडिया प्रभारी नवनाथ बान ने आरोप लगाया कि शिवसेना (उबाठा) ने मनसे को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि 2017 की तुलना में इस बार मुंबई में मनसे के पार्षदों की संख्या कम हुई है, जबकि शिवसेना (उबाठा) के साथ गठबंधन के बावजूद पार्टी को अपेक्षित लाभ नहीं मिला।

बान ने संकेत दिया कि कल्याण-डोंबिवली में बना नया राजनीतिक समीकरण अन्य नगर निकायों में भी दोहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जनता अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को विकास के प्रतीक के रूप में देख रही है।

गौरतलब है कि बुधवार को मनसे के पांच पार्षदों ने भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को केडीएमसी में समर्थन देने की घोषणा की। इसे शिवसेना (उबाठा) के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, खासकर तब जब दोनों दलों ने हाल ही में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) का चुनाव एक साथ लड़ा था।

भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में नवनाथ बान ने कहा कि 2019 में भाजपा के साथ चुनाव लड़ने के बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद के लिए देवेंद्र फडणवीस से विश्वासघात किया था। अब उसी का परिणाम कल्याण-डोंबिवली में दिखाई दे रहा है।

इस बीच शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत ने दावा किया कि केडीएमसी में हुए घटनाक्रम से राज ठाकरे नाराज़ हैं, क्योंकि यह मनसे का आधिकारिक फैसला नहीं था। हालांकि मनसे नेता बाला नंदगांवकर ने कहा कि यह स्थानीय स्तर पर बनी सहमति का नतीजा है।

संजय राउत के बयान पर पलटवार करते हुए बान ने कहा कि जिन नेताओं ने खुद राजनीतिक नैतिकता को ताक पर रखा, उन्हें दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना (उबाठा) जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।

भाजपा नेता ने दावा किया कि मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, नवी मुंबई समेत राज्य के कई हिस्सों में महायुति को स्पष्ट जनादेश मिला है। साथ ही उन्होंने कुछ धार्मिक नेताओं को लेकर राउत की हालिया टिप्पणियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि शिवसेना (उबाठा) की संतों के प्रति चिंता चुनावी हार के बाद ही सामने आई है, जबकि सत्ता में रहते हुए 2020 में पालघर में दो साधुओं की हत्या के समय पार्टी चुप्पी साधे रही।

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