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  • Bhajan Sandhya: बोरीवली में 3 मार्च को होगा भव्य ‘भजन जामिंग’ कार्यक्रमराधे माँ रहेंगी प्रमुख आकर्षण

    Bhajan Sandhya: बोरीवली में 3 मार्च को होगा भव्य ‘भजन जामिंग’ कार्यक्रमराधे माँ रहेंगी प्रमुख आकर्षण

    मुंबई: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के पावन अवसर पर 3 मार्च 2026 को मुंबई के बोरीवली (पूर्व) स्थित देविपाड़ा मैदान में एक भव्य ‘भजन जामिंग’(Bhajan jamming) कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन शाम 4 बजे से प्रारंभ होगा।

    कार्यक्रम में श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण के रूप में राधे माँ की उपस्थिति रहेगी। आयोजन में भक्ति संगीत और भजनों की संगीतमय प्रस्तुति के साथ भक्तिमय माहौल बनाया जाएगा।इस अवसर पर कई प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहेंगी, जिनमें मनोज तिवारी , शेखर जायसवाल और प्रसिद्ध भजन गायक कन्हैया मित्तल शामिल हैं। आयोजकों के अनुसार, यह कार्यक्रम भक्तों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति रस में डूबने का विशेष अवसर होगा।

    कार्यक्रम का आयोजन देविपाड़ा मैदान, देविपाड़ा मेट्रो स्टेशन के सामने, बोरीवली (पूर्व), मुंबई – 400066 में किया जाएगा। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से सपरिवार उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।पास एवं अन्य जानकारी के लिए सेवादार टल्ली बाबा से मो. 98209 69020 पर संपर्क कर सकते हैं।

  • Illegal extortion: महंगाई और बेरोजगारी के दौर में स्व-रोजगार करने वालों पर मनपा की ‘मार’!

    Illegal extortion: महंगाई और बेरोजगारी के दौर में स्व-रोजगार करने वालों पर मनपा की ‘मार’!

    प्रभाग 10 में फेरीवालों से 90 रुपये की कथित अवैध वसूली, ठेकेदार पर FIR की मांग

    आर. एस. नेटवर्क। प्रेम चौबे

    नालासोपारा: वसई-विरार शहर महानगरपालिका(VVMC) के प्रभाग क्रमांक 10 क्षेत्र में फेरीवालों से प्रति व्यक्ति 90 रुपये की कथित जबरन वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यह वसूली ठेकेदार कैलाश यादव के माध्यम से की जा रही है। स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को अवैध, अन्यायपूर्ण और गरीबों के हक पर डाका बताया जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी (Unemployed) की मार झेल रहे छोटे फेरीवाले अपनी रोजी-रोटी के लिए सड़कों पर छोटे-मोटे सामान बेचकर परिवार चला रहे हैं। ऐसे समय में प्रति व्यक्ति 90 रुपये की वसूली उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, तब जो लोग स्व-रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहे हैं, उनके रास्ते में ही बाधाएं खड़ी की जा रही हैं।

    प्रभाग 10 के नगरसेवक किशोर पाटिल ने इस मामले में कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि गरीब फेरीवालों से इस प्रकार की वसूली सीधे तौर पर उनकी आजीविका पर हमला है। “जब देश और प्रदेश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बनी हुई है, तब महानगरपालिका को रोजगार सृजन पर ध्यान देना चाहिए, न कि स्व-रोजगार कर रहे लोगों से वसूली कर उन्हें परेशान करना चाहिए,” उन्होंने कहा।

    इस संबंध में तुलिंज पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत(Complain) दर्ज कराई गई है। शिकायत में ठेकेदार कैलाश यादव के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही यह भी मांग उठाई गई है कि जब तक वसई-विरार शहर महानगरपालिका की महासभा में इस विषय पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक उक्त वसूली पूरी तरह बंद रखी जाए।

    नगरसेवक किशोर पाटिल ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध वसूली (Illegal extortion) पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र में जनआक्रोश फैल सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फेरीवालों के साथ हो रहे अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन भी किया जाएगा।

    स्थानीय फेरीवालों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में पहले ही कमाई सीमित है। ऊपर से इस प्रकार की कथित वसूली उनके लिए दोहरी मार साबित हो रही है। सवाल यह उठ रहा है कि जब महानगरपालिका रोजगार उपलब्ध कराने में असफल साबित हो रही है, तो क्या स्व-रोजगार कर रहे गरीबों को भी चैन से काम करने का अधिकार नहीं है?

    मामले ने अब राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है और देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कार्रवाई करता है।

  • Sharmila Takes Charge in Presence Eknath: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शर्मिला पिंपलोलकर ने संभाला ठाणे मेयर का कार्यभार

    Sharmila Takes Charge in Presence Eknath: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शर्मिला पिंपलोलकर ने संभाला ठाणे मेयर का कार्यभार

    ठाणे: ठाणे महानगरपालिका में नवनिर्वाचित मेयर शर्मिला रोहित पिंपलोलकर(Sharmila Pimplolker) ने आज औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे(Eknath Shinde) विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    गौरतलब है कि 3 फरवरी को मनपा के मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए चुनाव संपन्न हुआ था। इसमें शिवसेना की शर्मिला पिंपलोलकर निर्विरोध मेयर चुनी गईं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के कृष्णा दादू पाटिल को डिप्टी मेयर पद की जिम्मेदारी मिली।

    पदभार ग्रहण समारोह के दौरान महानगरपालिका आयुक्त सौरभ राव भी मौजूद रहे। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मेयर शर्मिला पिंपलोलकर, डिप्टी मेयर कृष्णा दादू पाटिल तथा शिवसेना के गटनेता पवन कदम का स्वागत करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं दीं।

    इस अवसर पर नवनिर्वाचित नगरसेवक और नगरसेविकाएं भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। समारोह का माहौल उत्साहपूर्ण रहा।

    नई महापौर से शहर के विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • Lamborghini Accident Kanpur: 10 करोड़ की लैंबॉर्गिनी का कहर: VIP रोड पर रफ्तार बनी आफत, शिवम मिश्रा गिरफ्तार

    Lamborghini Accident Kanpur: 10 करोड़ की लैंबॉर्गिनी का कहर: VIP रोड पर रफ्तार बनी आफत, शिवम मिश्रा गिरफ्तार

    कानपुर (Kanpur): उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए हाई-प्रोफाइल लैंबॉर्गिनी हादसे (Lamborghini Accident) ने शहर को झकझोर दिया है। तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। रविवार दोपहर वीआईपी रोड पर हुई इस सनसनीखेज घटना में कई लोग घायल हो गए थे।

    पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, 35 वर्षीय आरोपी शिवम मिश्रा को मेडिकल परीक्षण के बाद अदालत में पेश किया गया। हादसा उस समय हुआ जब करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की लैंबॉर्गिनी रेवुएल्टो ग्वालटोली इलाके में अनियंत्रित होकर पैदल चलने वालों और खड़े वाहनों से टकरा गई।

    https://epaper.rashtriyaswabhimaan.com/view/501/rashtriya-swabhimaan

    फर्राटे से फुटपाथ तक

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शिवम मिश्रा अपनी लग्जरी कार से ग्रीन पार्क की ओर जा रहे थे। रिंग वाले चौराहे के पास अचानक कार बेकाबू हो गई। पहले सड़क किनारे खड़ी ऑटो और बुलेट मोटरसाइकिल को टक्कर मारी, फिर फुटपाथ पर चढ़ गई।

    इस हादसे में 18 वर्षीय ई-रिक्शा चालक मोहम्मद तौफीक समेत कई लोग घायल हुए। बुलेट सवार विशाल त्रिपाठी और सोनू त्रिपाठी भी जख्मी बताए जा रहे हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    ड्राइवर बदलने की कोशिश, पुलिस ने किया खारिज

    मामले में नया मोड़ तब आया जब मोहन नामक एक व्यक्ति ने खुद को कार का ड्राइवर बताते हुए दावा किया कि हादसे के समय शिवम कार नहीं चला रहे थे। हालांकि, पुलिस ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने स्पष्ट कहा कि जांच में मिले साक्ष्यों से साबित हुआ है कि दुर्घटना के समय शिवम मिश्रा ही कार चला रहे थे।

    घायल तौफीक ने मामले में शिकायत दर्ज कराई है, हालांकि आरोपी पक्ष के वकील ने दावा किया कि पीड़ित कानूनी कार्रवाई के इच्छुक नहीं थे।

    बाउंसरों की एंट्री और नंबर प्लेट तोड़ने का आरोप

    हादसे के बाद घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लैंबॉर्गिनी के पीछे चल रही कार से आए सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को हटाने की कोशिश की। चालक को बाहर निकालने के लिए कार का शीशा तोड़ा गया और उसे निजी अस्पताल ले जाया गया।

    कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि कार मालिक की पहचान छिपाने के लिए नंबर प्लेट तोड़ने का प्रयास किया गया। पुलिस ने लक्जरी कार को जब्त कर ग्वालटोली थाने पहुंचा दिया है।

    ‘दौरा’ आने का दावा भी जांच के घेरे में

    आरोपी पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि चालक को अचानक दौरा आने के कारण हादसा हुआ। हालांकि, पुलिस ने कहा है कि इस दावे की भी मेडिकल और तकनीकी जांच की जा रही है।

  • CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns: क्या ट्रांसफर रोकने के लिए सीएसएमटी पार्सल में कार्यरत शैलेन्द्र पंडित ने शिकायत को बनाया हथियार?

    CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns: क्या ट्रांसफर रोकने के लिए सीएसएमटी पार्सल में कार्यरत शैलेन्द्र पंडित ने शिकायत को बनाया हथियार?

    ” विजिलेंस पर दबाव डालने की कोशिश या प्रशासन को खुली चुनौती!”–सीएसएमटी पार्सल प्रकरण ने उठाया सवाल

    सीएसएमटी पार्सल विभाग में स्थानांतरण के बाद जीआरपी शिकायत से मचा बवाल, विजिलेंस कार्रवाई और प्रशासनिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल
    सीएसएमटी पार्सल विभाग में स्थानांतरण के बाद जीआरपी शिकायत से मचा बवाल, विजिलेंस कार्रवाई और प्रशासनिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल

    मुंबई: मध्य रेलवे के मुंबई डिवीजन(CR Mumbai Division) स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के पार्सल विभाग में सामने आया विवाद अब एक कर्मचारी के स्थानांतरण से कहीं आगे बढ़ चुका है। यह मामला रेलवे की प्रशासनिक पारदर्शिता, विजिलेंस तंत्र की स्वतंत्रता और शिकायत प्रणाली के संभावित दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दों को केंद्र में ले आया है।

    सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस की अनुशंसा के आधार पर सीएसएमटी पार्सल सीबीएस बैच इंचार्ज शैलेन्द्र पंडित का स्थानांतरण सीएसएमटी से शिवुड़–दारावे स्टेशन किया गया। लेकिन स्थानांतरण आदेश जारी (CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns) होने के तुरंत बाद 11 फरवरी 2026 को सीएसएमटी जीआरपी में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराए जाने से पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    https://epaper.rashtriyaswabhimaan.com/view/501/rashtriya-swabhimaan

    जीआरपी में प्रस्तुत शिकायत(Complain) में मुंबई डिवीजन के सीनियर डीसीएम डॉ. शिवराज मानसपुरे, मध्य रेलवे के डिप्टी सीवीओ (ट्रैफिक) प्रदीप हिरडे तथा चीफ विजिलेंस इंस्पेक्टर सुमित दूधे के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। रेलवे के जानकार अधिकारियों का कहना है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के तुरंत बाद इस प्रकार की शिकायत दर्ज होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इससे यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि कहीं यह कदम विभागीय कार्रवाई को प्रभावित करने या दबाव बनाने की रणनीति तो नहीं।

    पहले से दर्ज थीं अनियमितताएँ

    • दस्तावेजों के अनुसार, संबंधित कर्मचारी की कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में भी आपत्तियाँ दर्ज की जा चुकी थीं।
    • 23 अप्रैल 2025 को निरीक्षण में अनियमितता दर्ज होने की बात सामने आई।
    • 25 जून 2025 को ड्यूटी से अनुपस्थित पाए जाने का उल्लेख रिकॉर्ड में है।
    • ड्यूटी मस्टर में नाम का कॉलम खाली छोड़ने और बाद में हस्ताक्षर करने की प्रवृत्ति भी नोट की गई।
    • 3 अगस्त 2025 को सीआरबी निरीक्षण के दौरान अनुपस्थिति के बाद चेतावनी जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    इन्हीं तथ्यों के आधार पर चार्जशीट और बाद में स्थानांतरण आदेश जारी किए जाने की बात कही जा रही है।

    एसोसिएशन की मान्यता पर भी प्रश्न

    मामले का एक और संवेदनशील पहलू यह है कि शिकायत पत्र ‘ऑल इंडिया एससी एंड एसटी रेलवे एम्प्लॉइज एसोसिएशन’ के नाम से प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, रेलवे के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार संबंधित संगठन की रेलवे बोर्ड से मान्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि संगठन की वैधता संदिग्ध पाई जाती है, तो यह मामला फर्जी संगठन के नाम पर दबाव बनाने तक जा सकता है।

    क्या शिकायत तंत्र बन रहा है ‘ढाल’?

    रेलवे के भीतर अब यह चर्चा तेज है कि क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए शिकायत प्रणाली का उपयोग एक ‘ढाल’ के रूप में किया गया। यदि हर विभागीय जांच या स्थानांतरण के बाद इसी तरह की रणनीति अपनाई जाती है, तो निष्पक्ष कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के लिए भय और असुरक्षा का वातावरण बन सकता है।

    एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि यदि जांच एजेंसियों और विजिलेंस अधिकारियों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाएगा, तो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करना कठिन हो जाएगा। यह केवल एक कर्मचारी बनाम प्रशासन का मामला नहीं, बल्कि संस्थागत व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है।

    रेलवे प्रशासन के लिए चेतावनी संकेत

    यह प्रकरण रेलवे के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। यदि विजिलेंस की अनुशंसा पर की गई कार्रवाई को शिकायतों के माध्यम से दबाने की प्रवृत्ति बढ़ती है, तो भविष्य में ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है।

    रेलवे को चाहिए कि:

    • शिकायत की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराए।
    • विजिलेंस कार्रवाई के तथ्यों को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करे (नियमों के दायरे में)।
    • एसोसिएशन की मान्यता की सत्यता की जांच कर स्पष्ट स्थिति सामने लाए।
    • ईमानदार अधिकारियों को संस्थागत संरक्षण प्रदान करे।

    यदि समय रहते स्पष्ट और दृढ़ रुख नहीं अपनाया गया, तो यह मामला भविष्य में अनुशासनात्मक प्रक्रिया को कमजोर करने वाली मिसाल बन सकता है।

    अब सबकी निगाहें रेलवे बोर्ड और मध्य रेलवे के शीर्ष प्रशासन पर टिकी हैं कि वे संस्थागत साख को मजबूत करते हैं या यह प्रकरण भी फाइलों में सिमट कर रह जाता है।

  • Vande Bharat 2026 : “वंदे मातरम्” बनाम बेरोज़गारी: क्या राष्ट्रवाद असली मुद्दों पर पर्दा डाल रहा है?

    Vande Bharat 2026 : “वंदे मातरम्” बनाम बेरोज़गारी: क्या राष्ट्रवाद असली मुद्दों पर पर्दा डाल रहा है?

    अश्विनी कुमार दुबे

    नई दिल्ली।
    भारत में देशभक्ति सिर्फ एक भावना नहीं, बल्कि जनमानस की पहचान है। “वंदे मातरम्”(Vande Mataram 2026) और “भारत माता की जय” जैसे उद्घोष स्वतंत्रता संग्राम की विरासत हैं। लेकिन आज एक गंभीर सवाल उठ रहा है—
    क्या राष्ट्रवाद के नारों का इस्तेमाल जनता की रोज़मर्रा की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए किया जा रहा है?


    नारा बनाम नौकरियाँ: बहस का केंद्र

    देश का युवा पूछ रहा है—

    • नौकरी कहाँ है?
    • भर्ती परीक्षाएँ समय पर क्यों नहीं हो रहीं?
    • पेपर लीक क्यों रुक नहीं रहा?

    मध्यम वर्ग पूछ रहा है—

    • महंगाई पर नियंत्रण कब होगा?
    • टैक्स और EMI के बीच राहत कहाँ है?

    किसान पूछ रहा है—

    • लागत से कम दाम क्यों मिल रहा है?
    • MSP पर कानूनी गारंटी क्यों नहीं?

    लेकिन सार्वजनिक विमर्श में इन सवालों से ज्यादा चर्चा राष्ट्रवाद, धार्मिक पहचान और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की दिखाई देती है। यही विरोधाभास बहस को जन्म देता है।


    राष्ट्रवाद: भावना या राजनीतिक रणनीति?

    राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि भावनात्मक मुद्दे—

    • राष्ट्रवाद
    • धार्मिक प्रतीक
    • सीमा और सुरक्षा
    • ऐतिहासिक विवाद

    —अक्सर चुनावी विमर्श में प्रमुखता पा जाते हैं, क्योंकि वे तेज प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं।

    आलोचकों का आरोप है कि जब आर्थिक या प्रशासनिक सवालों पर दबाव बढ़ता है, तो भावनात्मक मुद्दों को प्राथमिकता दी जाती है।

    वहीं सरकार और समर्थकों का तर्क है कि राष्ट्रवाद और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना है कि राष्ट्रीय गौरव, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान भी उतने ही महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जितने रोज़गार और महंगाई।


    बेरोज़गारी और महंगाई: आंकड़ों की हकीकत

    • विभिन्न रिपोर्टों में युवाओं में बेरोज़गारी दर चिंता का विषय बताई जाती रही है।
    • भर्ती परीक्षाओं में देरी और पेपर लीक की घटनाएँ कई राज्यों में सुर्खियाँ बनी हैं।
    • महंगाई, विशेषकर खाद्य और ईंधन की कीमतें, घरेलू बजट पर असर डाल रही हैं।

    यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की बड़ी आबादी युवा है, और रोजगार सृजन सरकारों के लिए केंद्रीय चुनौती बना हुआ है।


    मीडिया की भूमिका पर भी सवाल

    एक वर्ग का आरोप है कि मुख्यधारा मीडिया में बहसें अक्सर राष्ट्रवाद और राजनीतिक टकराव पर केंद्रित रहती हैं, जबकि रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं।

    हालाँकि, मीडिया संस्थानों का पक्ष है कि वे वही दिखाते हैं जो दर्शक देखना चाहते हैं और जो राजनीतिक रूप से प्रासंगिक होता है।


    असली राष्ट्रवाद क्या है?

    राष्ट्रवाद का अर्थ सिर्फ नारे नहीं, बल्कि नागरिकों का जीवन स्तर भी है।
    अगर राष्ट्र सशक्त है, तो—

    • युवा को अवसर मिलना चाहिए
    • किसान को सम्मानजनक आय मिलनी चाहिए
    • शिक्षा और स्वास्थ्य सुलभ होने चाहिए
    • महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए

    देशभक्ति और जवाबदेही एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। लोकतंत्र में सवाल पूछना अधिकार है, और जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी।


    “वंदे मातरम्” का सम्मान, राजनीतिक हथियार नहीं

    “वंदे मातरम्” भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का गौरवशाली प्रतीक है।
    इसका सम्मान तब और सार्थक होगा जब:

    • देश का युवा आत्मनिर्भर बने
    • किसान कर्ज और संकट से मुक्त हो
    • गरीब भूखा न सोए
    • मध्यम वर्ग आर्थिक असुरक्षा से बाहर निकले

    नारा तब ताकत बनता है, जब उसके पीछे ठोस नीति और परिणाम हों।


    निष्कर्ष: शोर नहीं, समाधान चाहिए

    देश को राष्ट्रवाद बनाम रोज़गार की बहस में उलझने की बजाय दोनों के बीच संतुलन चाहिए।

    • भावनात्मक मुद्दे अपनी जगह
    • आर्थिक और सामाजिक मुद्दे अपनी जगह

    आखिरकार लोकतंत्र में नागरिकों का अधिकार है कि वे पूछें—
    विकास कहाँ है? रोजगार कब मिलेगा? महंगाई कब घटेगी?

    देशभक्ति का अर्थ सिर्फ उद्घोष नहीं, बल्कि जवाबदेह शासन भी है और यही किसी भी लोकतंत्र की असली ताकत होती है।

  • INDIA-US Agro Trade Deal: क्या अमेरिका के साथ कृषि समझौता भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” साबित होगा?

    INDIA-US Agro Trade Deal: क्या अमेरिका के साथ कृषि समझौता भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” साबित होगा?

    मोदी सरकार की एग्री-डील पर उठते सवाल और हकीकत

    भारत और अमेरिका के बीच कृषि क्षेत्र (INDIA-US Agro Trade Deal) में बढ़ते सहयोग और संभावित व्यापारिक समझौतों को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्ष के कुछ नेताओं और किसान संगठनों का आरोप है कि यह समझौता भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ है और “किसानों के डेथ वारंट” पर हस्ताक्षर जैसा कदम है।

    लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है? आइए विस्तार से समझते हैं।


    कृषि समझौते की पृष्ठभूमि

    भारत और अमेरिका के बीच कृषि व्यापार पहले से ही जारी है। भारत अमेरिका से बादाम, सेब, दालें और कृषि तकनीक आयात करता है, जबकि अमेरिका को चावल, मसाले, समुद्री उत्पाद और कुछ कृषि उत्पाद निर्यात करता है।

    हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच:

    • कृषि बाजारों को खोलने,
    • टैरिफ कम करने,
    • जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों के आयात,
    • डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के व्यापार
      को लेकर चर्चा तेज हुई है।

    इसी संदर्भ में प्रस्तावित या चर्चित “कृषि डील” को लेकर किसानों में आशंकाएँ पैदा हुई हैं।


    किसानों की प्रमुख चिंताएँ

    1. सस्ते आयात का खतरा

    अमेरिका में कृषि बड़े पैमाने पर, अत्याधुनिक तकनीक और भारी सरकारी सब्सिडी के सहारे की जाती है। यदि भारतीय बाजार अमेरिकी गेहूं, मक्का, सोयाबीन या डेयरी उत्पादों के लिए खुलता है, तो:

    • भारतीय किसानों को मूल्य प्रतिस्पर्धा में भारी नुकसान हो सकता है
    • एमएसपी व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है
    • छोटे और सीमांत किसान बाजार से बाहर हो सकते हैं

    2. जीएम फसलों का मुद्दा

    अमेरिका जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों का बड़ा उत्पादक है। यदि ऐसे उत्पाद भारत में व्यापक रूप से आयात होते हैं, तो:

    • जैव विविधता पर असर पड़ सकता है
    • पारंपरिक बीजों और स्थानीय खेती पर संकट आ सकता है
    • बीज कंपनियों की निर्भरता बढ़ सकती है

    3. डेयरी सेक्टर पर दबाव

    भारत का डेयरी क्षेत्र मुख्यतः छोटे किसानों और सहकारी मॉडल (जैसे अमूल) पर आधारित है। अमेरिकी डेयरी उत्पादों को अनुमति मिलने से लाखों दुग्ध उत्पादकों की आय पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


    सरकार का पक्ष क्या है?

    सरकार का कहना है कि:

    • कोई भी समझौता भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करते हुए ही किया जाएगा।
    • निर्यात के नए अवसर खुलेंगे, जिससे किसानों को वैश्विक बाजार मिलेगा।
    • कृषि तकनीक, कोल्ड स्टोरेज, सप्लाई चेन और प्रोसेसिंग में निवेश बढ़ेगा।
    • भारत को उच्च गुणवत्ता वाले बीज और तकनीकी सहयोग मिलेगा।

    सरकार यह भी तर्क देती है कि वैश्विक व्यापार से अलग रहकर भारत कृषि क्षेत्र को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी नहीं बना सकता।


    “डेथ वारंट” वाली राजनीति

    “डेथ वारंट” जैसे शब्द राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं। विपक्ष इसे 2020 के कृषि कानूनों की याद से जोड़ता है, जब बड़े कॉर्पोरेट और विदेशी कंपनियों के प्रवेश को लेकर व्यापक किसान आंदोलन हुआ था।

    आलोचकों का कहना है कि:

    • यह समझौता धीरे-धीरे कृषि बाजार को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए खोल देगा
    • एमएसपी कानूनी गारंटी से ध्यान हटाया जा रहा है
    • आत्मनिर्भर कृषि मॉडल कमजोर होगा

    वहीं समर्थकों का दावा है कि:

    • भारतीय किसान अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं
    • निर्यात-आधारित कृषि से आय दोगुनी करने का लक्ष्य मजबूत होगा

    वास्तविक खतरा कहाँ है?

    सवाल यह नहीं है कि अमेरिका के साथ समझौता हो या न हो। असली मुद्दा यह है कि:

    • क्या भारतीय किसानों को बराबर की सब्सिडी और सुरक्षा मिलेगी?
    • क्या एमएसपी और सार्वजनिक खरीद प्रणाली बरकरार रहेगी?
    • क्या छोटे किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी?

    यदि सुरक्षा उपायों के बिना बाजार पूरी तरह खोल दिया गया, तो छोटे किसानों पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन यदि समझौता संतुलित शर्तों और चरणबद्ध तरीके से लागू हुआ, तो यह अवसर भी बन सकता है।

  • Vande Mataram 150 yrs Celebration: आधिकारिक कार्यक्रमों में अब 3 मिनट 10 सेकंड का “वंदे मातरम्” अनिवार्य, सरकार ने जारी किया नया प्रोटोकॉल

    Vande Mataram 150 yrs Celebration: आधिकारिक कार्यक्रमों में अब 3 मिनट 10 सेकंड का “वंदे मातरम्” अनिवार्य, सरकार ने जारी किया नया प्रोटोकॉल

    वंदे मातरम् का छह अंतरों वाला संस्करण, जिसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के गायन और वादन को लेकर एक नया आधिकारिक प्रोटोकॉल जारी किया है। अब सभी सरकारी एवं आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम्(Vande Mataram) का छह अंतरों वाला संस्करण, जिसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है, अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।

    वंदे मातरम्

    छंद 1

    वन्दे मातरम्।
    सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
    शस्यश्यामलां मातरम्।
    शुभ्रज्योत्स्ना-पुलकित-यामिनीम्,
    फुल्ल-कुसुमित-द्रुम-दल-शोभिनीम्,
    सुहासिनीं सुमधुर-भाषिणीम्,
    सुखदां वरदां मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 2

    वन्दे मातरम्।
    कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले,
    कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खर-करवाले,
    अबला केन मा एत बले?
    बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं,
    रिपुदलवारिणीं मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 3

    वन्दे मातरम्।
    तुमि विद्या, तुमि धर्म,
    तुमि हृदि, तुमि मर्म,
    त्वं हि प्राणाः शरीरे।
    बाहुते तुमि मा शक्ति,
    हृदये तुमि मा भक्ति,
    तोमारई प्रतिमा गढ़ि
    मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 4

    वन्दे मातरम्।
    त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
    कमला कमलदलविहारिणी,
    वाणी विद्यादायिनी।
    नमामि त्वाम्।
    नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम्,
    सुजलां सुफलां मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 5

    वन्दे मातरम्।
    श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्,
    धरणीं भरणीं मातरम्,
    शत्रुदलवारिणीं मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 6

    वन्दे मातरम्।
    त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति,
    त्वं हि शक्ति मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।

    यह नियम राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अवसरों, राष्ट्रपति के आगमन, उनके भाषणों अथवा राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में लागू होगा।

    इसके साथ ही राज्यों के राज्यपालों के आगमन तथा उनके संबोधन से पूर्व और पश्चात भी इसी निर्धारित संस्करण और समय-सीमा का पालन करना आवश्यक होगा।

    सरकार के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति में एकरूपता, गरिमा और प्रोटोकॉल की स्पष्टता सुनिश्चित करना है।


    अब तय समय-सीमा के भीतर ही होगा गायन

    नए निर्देशों के अनुसार, सभी सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का गायन या वादन निर्धारित 3 मिनट 10 सेकंड की अवधि के भीतर ही किया जाएगा। इससे पहले विभिन्न आयोजनों में इसकी अवधि और प्रस्तुति शैली में भिन्नता देखने को मिलती थी।

    सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में उठाया गया है।


    क्या “वंदे मातरम्” शुरू में सिर्फ बंगाल का गीत था?

    कुछ इतिहासकारों और विचारकों का मत है कि “वंदे मातरम्” प्रारंभ में पूरे भारत का राष्ट्रगीत नहीं था, बल्कि यह बंगाल की सांस्कृतिक चेतना से उपजा एक साहित्यिक गीत था।

    इस गीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अत्यंत संस्कृतनिष्ठ बंगाली भाषा में की थी। इसे पहली बार 7 नवंबर 1875 को ‘बंगदर्शन’ पत्रिका में प्रकाशित किया गया। बाद में 1882 में प्रकाशित उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में यह गीत शामिल किया गया।

    हालांकि, जो गीत मातृभूमि की स्तुति के रूप में साहित्यिक अभिव्यक्ति था, वही आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम की धड़कन बन गया।

    स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान:

    • क्रांतिकारी इसे संघर्ष से पहले फुसफुसाकर गाते थे,
    • विद्यार्थी विरोध प्रदर्शनों में इसे स्वर देते थे,
    • और यह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध राष्ट्रभावना का प्रतीक बन गया।

    राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता

    भारत का राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” है, जिसका अर्थ है — “हे मातृभूमि, मैं तुम्हें नमन करता हूँ।”

    1950 में संविधान सभा ने इसे “राष्ट्रीय गीत” का दर्जा दिया। हालांकि राष्ट्रगान “जन गण मन” है, लेकिन वंदे मातरम् को समान सम्मान प्रदान किया गया है।

    यह गीत भारत को एक हरित, समृद्ध और पालन-पोषण करने वाली मां के रूप में चित्रित करता है —
    सुजलां, सुफलां, मलयज-शीतलाम्…

    आज इस ऐतिहासिक गीत की रचना को लगभग 150 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।


    एकरूपता बनाम बहस

    जहाँ सरकार इसे प्रोटोकॉल स्पष्टता और राष्ट्रीय सम्मान से जोड़कर देख रही है, वहीं कुछ वर्गों में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों को लेकर बहस भी समय-समय पर उठती रही है।

    फिर भी इसमें कोई संदेह नहीं कि “वंदे मातरम्” भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक अमिट प्रतीक रहा है और आज भी राष्ट्रभावना से गहराई से जुड़ा हुआ है।

  • Parliament Budget Session: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, विपक्ष का आरोप– ‘बोलने से रोका जा रहा’

    Parliament Budget Session: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, विपक्ष का आरोप– ‘बोलने से रोका जा रहा’

    नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इंडिया ब्लॉक ने स्पीकर को हटाने से संबंधित प्रस्ताव का नोटिस दाखिल किया है, जिस पर 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। यह प्रस्ताव नियम 94(सी) के तहत दिया गया है, जिसमें 100 से अधिक सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है।

    कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि विपक्ष ने संविधान में अपना पूर्ण विश्वास जताया है। उन्होंने कहा, “माननीय अध्यक्ष महोदय के प्रति हमारा व्यक्तिगत सम्मान है, लेकिन यह बेहद दुखद है कि विपक्षी सांसदों को सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाने के अवसरों से लगातार रोका जा रहा है। कई वर्षों बाद स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। यह कोई सामान्य कदम नहीं, बल्कि असाधारण परिस्थितियों में उठाया गया असाधारण निर्णय है।”

    स्पीकर ने सचिवालय को प्रस्ताव की जांच के निर्देश दिए(Parliament Budget Session)

    सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को लेकर लोकसभा सचिवालय को निर्देश दिए हैं कि नियमों के तहत इसकी जांच कर आगे की कार्रवाई की जाए।

    हालांकि, इस प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। टीएमसी नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी संसद को सुचारू रूप से चलने देने के पक्ष में है, इसलिए उन्होंने इस प्रस्ताव से दूरी बनाए रखी है।

    इमरान मसूद का तीखा बयान

    इस बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का सदन के बाहर दिया गया बयान भी चर्चा में है। उन्होंने कहा,
    “तो मारते हमें। आप गुंडे हैं न। आप साबित कर रहे हो कि बोलने नहीं देते। लो, अभी यहीं मार लो हमें। सांसदों को बाहर निकाल दिया गया है। आपकी गुंडागर्दी चल रही है, चलाइए। लेकिन लोकतंत्र में गुंडागर्दी की कोई जगह नहीं होती। यह सब इतिहास में दर्ज होगा।”

    इन सांसदों ने दिया प्रस्ताव

    स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सांसद गौरव गोगोई, के. सुरेश और मोहम्मद जावेद द्वारा दिया गया है। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष तरीके से नहीं चलाई जा रही और विपक्षी सांसदों को लगातार बोलने से रोका जा रहा है।

    राजनीतिक मायने

    राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाना अपने आप में दुर्लभ घटना है। इससे संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव और गतिरोध की स्थिति और स्पष्ट होती है।

  • BJP–NCP political deal: सीएम फडणवीस का अचानक दिल्ली दौरा, सियासी हलचल तेज; सुनेत्रा पवार भी जाएंगी दिल्ली

    BJP–NCP political deal: सीएम फडणवीस का अचानक दिल्ली दौरा, सियासी हलचल तेज; सुनेत्रा पवार भी जाएंगी दिल्ली

    मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सोमवार (9 फरवरी) देर रात अचानक दिल्ली पहुंचने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ने दिल्ली में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और इसके बाद मंगलवार तड़के मुंबई लौट आए। इस गोपनीय दौरे को मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

    राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खास तौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विलय को लेकर चर्चाएं तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस संबंध में महायुति के सहयोगी दलों के साथ बातचीत का दौर शुरू हो चुका है।

    फडणवीस के बाद सुनेत्रा पवार का दिल्ली दौरा

    मुख्यमंत्री के अचानक दिल्ली दौरे के तुरंत बाद अब दिवंगत अजित पवार की पत्नी और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के दिल्ली जाने की जानकारी सामने आई है। सुनेत्रा पवार मंगलवार (10 फरवरी) शाम 6:45 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगी।

    उपमुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, वह बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार भेंट करेंगी। उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद यह उनकी पहली औपचारिक दिल्ली यात्रा बताई जा रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री फडणवीस के देर रात किए गए गोपनीय दौरे के बाद सुनेत्रा पवार की इस यात्रा को राजनीतिक रूप से खास महत्व दिया जा रहा है।

    इस दौरे के दौरान एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और पार्टी के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल भी सुनेत्रा पवार के साथ दिल्ली में मौजूद रहेंगे।

    सीएम देवेंद्र फडणवीस के अचानक दिल्ली दौरे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज, सुनेत्रा पवार की दिल्ली यात्रा को भी खास माना जा रहा है।
    सीएम देवेंद्र फडणवीस के अचानक दिल्ली दौरे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज, सुनेत्रा पवार की दिल्ली यात्रा को भी खास माना जा रहा है।

    जिला परिषद चुनावों में बीजेपी पहले, एनसीपी दूसरे नंबर पर

    इसी बीच महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न हुए 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनावों के नतीजों ने भी सियासी समीकरणों को नई दिशा दी है। इन चुनावों में बीजेपी पहले स्थान पर रही, जबकि अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दूसरे नंबर पर रही।

    इन चुनावों में जिला परिषद की 731 और पंचायत समितियों की 1462 सीटों के लिए मतदान हुआ था।
    जिला परिषद की 731 सीटों में से बीजेपी ने सबसे ज्यादा 233 सीटें जीतीं। इसके बाद अजित पवार गुट की एनसीपी को 167 और शिंदे गुट की शिवसेना को 162 सीटें मिलीं। महायुति ने कुल मिलाकर 731 में से 562 सीटों पर जीत दर्ज की है।

    वहीं, विपक्षी महाविकास आघाड़ी को करारा झटका लगा है। कांग्रेस को 56, शरद पवार गुट को 26 और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना को 43 सीटें मिली हैं। इस तरह एमवीए को कुल मिलाकर सिर्फ 125 सीटों से संतोष करना पड़ा।

    आने वाले दिनों में बड़े सियासी संकेत(BJP–NCP political deal)

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री का अचानक दिल्ली दौरा, उसके तुरंत बाद सुनेत्रा पवार की प्रस्तावित यात्रा और हालिया चुनावी नतीजे—ये सभी घटनाएं महाराष्ट्र में आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक फैसलों की ओर इशारा कर रही हैं।