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  • Bharat Ratna:सावरकर को भारत रत्न की मांग पर चंद्रशेखर आजाद का तंज, बोले– ‘भागवत सरकार के मालिक जैसे, मांग की जरूरत क्या’

    Bharat Ratna:सावरकर को भारत रत्न की मांग पर चंद्रशेखर आजाद का तंज, बोले– ‘भागवत सरकार के मालिक जैसे, मांग की जरूरत क्या’

    नगीना। उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि देश में अभिव्यक्ति की आजादी है और कोई भी किसी के लिए पुरस्कार की मांग कर सकता है, लेकिन मोहन भागवत की स्थिति आम नागरिक जैसी नहीं है।

    नगीना सांसद ने तंज कसते हुए कहा, “मोहन भागवत सरकार के मालिक जैसे हैं। उन्हें किसी से मांग करने की क्या जरूरत है? वे कह देंगे तो भला कौन मना करेगा।” उन्होंने कहा कि देश की आजादी और सामाजिक बदलाव की लड़ाई में किसका कितना योगदान रहा है, यह इतिहास में दर्ज है और किसी से छिपा नहीं है।

    कांशीराम को भारत रत्न की मांग दोहराई

    चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम को भारत रत्न दिए जाने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने देश की राजनीति और सामाजिक चेतना को नई दिशा दी और वंचित, शोषित समाज को संगठित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

    कोतवाल धन सिंह गुर्जर को भी भारत रत्न देने की मांग

    नगीना सांसद ने 1857 की क्रांति के नायक कोतवाल धन सिंह गुर्जर को भी भारत रत्न देने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि ऐसे वीरों और महापुरुषों को उचित सम्मान न देकर सरकार उन वर्गों का अपमान कर रही है, जिनसे ये महान हस्तियां जुड़ी रही हैं।

    चेतावनी भरे लहजे में दिया बयान

    चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि समाज इस तरह की उपेक्षा को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर सरकार ने इन महान हस्तियों को सम्मान देने की मांग पर ध्यान नहीं दिया, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी। हमारे लोग यह अपमान सहन नहीं करेंगे और वोट की ताकत से इसका बदला लेंगे।”

  • Shivam Mishra Accident:कानपुर के पॉश इलाके में लैम्बोर्गिनी का कहर, बुलेट और ऑटो को मारी टक्कर, तीन घायल

    Shivam Mishra Accident:कानपुर के पॉश इलाके में लैम्बोर्गिनी का कहर, बुलेट और ऑटो को मारी टक्कर, तीन घायल

    कानपुर। शहर के पॉश ग्वालटोली इलाके में रविवार दोपहर एक तेज़ रफ़्तार लैम्बोर्गिनी कार ने पहले बुलेट सवार को टक्कर मारी, फिर एक ऑटो रिक्शा को चपेट में लिया और अंत में अनियंत्रित होकर फुटपाथ पर चढ़ गई। इस हादसे में तीन लोग घायल हो गए। पुलिस ने मामले में अज्ञात के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।

    हादसा रविवार दोपहर करीब 3:15 बजे हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त लैम्बोर्गिनी कार को जब्त कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दुर्घटना के बाद कार चला रहे शिवम मिश्रा को उसके बॉडीगार्ड्स ने कार का शीशा तोड़कर बाहर निकाला और अपने साथ ले गए।

    नशे में होने का आरोप

    स्थानीय लोगों का दावा है कि हादसे के समय शिवम मिश्रा नशे की हालत में था। हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।

    कौन है शिवम मिश्रा(Shivam Mishra)

    शिवम मिश्रा मशहूर तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे हैं। वह दो साल पहले उस समय चर्चा में आए थे, जब आयकर विभाग ने उनके पिता की कंपनी बंशीधर टोबैको लिमिटेड पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी।

    5 राज्यों में पड़ी थी आईटी की रेड

    आयकर विभाग ने कानपुर, दिल्ली, मुंबई और गुजरात सहित 5 राज्यों में कंपनी से जुड़े करीब 20 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। विभाग के मुताबिक, कंपनी ने अपनी सालाना आय 20 से 25 करोड़ रुपये घोषित की थी, जबकि उसका वास्तविक कारोबार 100 से 150 करोड़ रुपये के आसपास होने का अनुमान लगाया गया था।

    लग्जरी कारों का शौक, नंबर एक जैसा

    छापेमारी के दौरान शिवम मिश्रा के दिल्ली स्थित आवास से कई महंगी लग्जरी कारें बरामद हुई थीं। खास बात यह थी कि सभी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन नंबर ‘4018’ था। इन कारों की कुल कीमत करीब 50 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
    इनमें 16 करोड़ रुपये की रोल्स-रॉयस फैंटम, मैकलारेन, पोर्श और एक लेम्बोर्गिनी रेवुएल्टो शामिल थी।

    नकद, गहने और करोड़ों की घड़ियां बरामद

    आयकर विभाग को छापेमारी के दौरान करीब 4.5 करोड़ रुपये नकद और लगभग 7 करोड़ रुपये के आभूषण मिले थे। इसके अलावा शिवम मिश्रा की कई महंगी घड़ियां भी जब्त की गई थीं, जिनमें एक हीरे जड़ी घड़ी शामिल थी, जिसकी कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये बताई गई थी।

    अब तक कार्रवाई पर सस्पेंस

    बंशीधर टोबैको(Banshidhar Tambaku) प्राइवेट लिमिटेड देश की प्रमुख पान मसाला कंपनियों में गिनी जाती है। हालांकि आयकर छापेमारी के बाद इन मामलों में आगे क्या कार्रवाई हुई, इसे लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

  • Land Deal: पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी ने 21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी नोटिस को दी चुनौती, IGR के सामने होगी सुनवाई

    Land Deal: पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी ने 21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी नोटिस को दी चुनौती, IGR के सामने होगी सुनवाई

    मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। संबंधित कंपनी ने महाराष्ट्र पंजीकरण विभाग द्वारा जारी करीब 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी वसूली नोटिस को चुनौती देते हुए अपील दायर की है। विभागीय सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।

    सूत्रों के अनुसार, पंजीकरण विभाग ने पुणे के मुंधवा इलाके में स्थित जमीन की बिक्री विलेख (Land Deal) से जुड़े मामले में 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी जमा करने का नोटिस जारी किया था। विभाग का कहना है कि जमीन की बिक्री के दौरान नियमानुसार स्टांप शुल्क अदा नहीं किया गया, जिसके चलते यह राशि वसूल की जानी चाहिए थी। नोटिस में 10 फरवरी तक भुगतान की समयसीमा तय की गई थी।

    पहले भी जारी हो चुका है वसूली आदेश
    इससे पहले पंजीकरण विभाग ने एक आदेश जारी कर अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी और उसके साझेदार दिग्विजय पाटिल को 40 एकड़ सरकारी जमीन की बिक्री विलेख के दौरान माफ की गई स्टांप ड्यूटी जमा करने का निर्देश दिया था। उस आदेश में भी भुगतान की अंतिम तारीख 10 फरवरी तय की गई थी।

    IGR के सामने होगी अब सुनवाई
    पंजीकरण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि स्टांप ड्यूटी जमा करने की अंतिम तारीख तक भुगतान नहीं किया गया, बल्कि संबंधित कंपनी ने आदेश को चुनौती देते हुए अपील दाखिल कर दी है। अब इस पूरे मामले की सुनवाई पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) के समक्ष होगी। हालांकि अधिकारी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि 21 करोड़ रुपये की मांग वाले आदेश को किन आधारों पर चुनौती दी गई है।

    300 करोड़ रुपये के सौदे से जुड़ा मामला
    बताया जा रहा है कि अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी द्वारा करीब 40 एकड़ जमीन को लगभग 300 करोड़ रुपये में बेचने का सौदा उस समय विवादों में आया, जब यह सामने आया कि संबंधित जमीन सरकारी है और कंपनी को स्टांप शुल्क में छूट दी गई थी। इसी खुलासे के बाद यह मामला प्रशासनिक और कानूनी जांच के दायरे में आ गया।

  • Bharat Ratna: सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर गरमाई सियासत, भाई जगताप भाजपा-आरएसएस हुए हमलावर

    Bharat Ratna: सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर गरमाई सियासत, भाई जगताप भाजपा-आरएसएस हुए हमलावर

    मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग के बाद देश की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता भाई जगताप ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि जिन व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगे हों, उन्हें भारत रत्न(Bharat Ratna) जैसे सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ना देश की गरिमा पर सवाल खड़े करता है।

    भाई जगताप ने कहा कि भारत रत्न केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की भावनाओं और देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा सम्मान है। उन्होंने कहा कि अब तक यह सम्मान उन्हीं महान व्यक्तित्वों को दिया गया है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र, समाज या किसी बड़े उद्देश्य के लिए समर्पित किया।

    विवादित नामों को सम्मान देना समझ से परे – भाई जगताप
    कांग्रेस नेता ने कहा, “भारत रत्न (Bharat Ratna)से बड़ा कोई सम्मान नहीं है। संघ प्रमुख किसी संगठन के प्रमुख हैं, देश के नहीं। वीर सावरकर पर लगे आरोपों के बीच इस तरह की मांग समझ से परे है। अगर विवादित व्यक्तियों को भारत रत्न दिया गया, तो इसकी समीक्षा पूरा देश करेगा और सम्मान की गरिमा पर गंभीर सवाल उठेंगे।”

    उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा सरकार में ऐसे कई मंत्री हैं जिन पर आरोप लगने की बातें रिपोर्ट्स में सामने आती रही हैं। ऐसे माहौल में भारत रत्न देने का फैसला सम्मान की तौहीन जैसा होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को बेवजह हवा नहीं देना चाहते, अंतिम फैसला सरकार का होगा और जवाब जनता देगी।

    कानून-व्यवस्था, कलाकार और राजनीति पर भी सरकार को घेरा
    संघ प्रमुख के एक कार्यक्रम में अभिनेता सलमान खान की मौजूदगी पर प्रतिक्रिया देते हुए भाई जगताप ने कहा कि खेल और कला को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज कलाकारों को खुलेआम धमकियां मिल रही हैं, फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के घर फायरिंग की घटना सामने आई है और गैंगस्टरों में कानून का कोई डर नहीं दिख रहा।

    उन्होंने कहा कि 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड के खौफ पर काबू पाया गया था, लेकिन आज हालात फिर से चिंता पैदा कर रहे हैं, जो सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

    तीन बच्चों वाले बयान पर भी जताई नाराज़गी
    संघ प्रमुख के तीन बच्चों से जुड़े बयान को हास्यास्पद बताते हुए भाई जगताप ने कहा कि जब भारत पहले ही जनसंख्या के मामले में दुनिया में नंबर एक है, तब इस तरह की सलाह देना गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं पहले से ज्यादा असुरक्षित हैं और युवा खुद यह तय करने में सक्षम हैं कि उन्हें कब और किससे शादी करनी है।

    अन्य मुद्दों पर भी रखी बेबाक राय
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर लगाए गए आरोपों पर भाई जगताप ने कहा कि केवल आरोप लगाने से कुछ नहीं होगा, अगर आरोप सही हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए।
    बीएमसी में रितु तावड़े के मेयर बनने और घुसपैठियों पर दिए गए बयान को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार चारों तरफ है, कानून भी मौजूद है, फिर पिछले 12 वर्षों में कितने घुसपैठियों को निकाला गया, यह जनता को बताया जाना चाहिए।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि संसद देश का पवित्र मंदिर है, लेकिन वहां विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन जैसे गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा से बचा जा रहा है।

    महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़े विमान हादसे के सवाल पर भाई जगताप ने कहा, “जहां धुआं होता है, वहां आग भी होती है।” उन्होंने 18 साल पुराने विमान, लैंडिंग प्रक्रिया और तकनीकी खामियों पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।

    वहीं मीडिया को दिए बयान में उन्होंने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर कहा कि खेल, कला और संगीत को राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। भारत का क्रिकेट में दबदबा रहा है और विश्व कप जैसे आयोजनों को राजनीतिक नजरिये से देखना ठीक नहीं है।

  • IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया तेज, कोटक महिंद्रा, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स ने दी फाइनेंशियल बोली

    IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया तेज, कोटक महिंद्रा, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स ने दी फाइनेंशियल बोली

    नई दिल्ली। IDBI बैंक के विनिवेश (IDBI Bank Disinvestment) की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंचती नजर आ रही है। स्ट्रेटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट के तहत कोटक महिंद्रा बैंक, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स ने अपनी फाइनेंशियल बोलियां जमा कर दी हैं।

    एमिरेट्स NBD दुबई सरकार के स्वामित्व वाला बैंक है, जबकि फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी है। शॉर्टलिस्ट किए गए इन तीनों बोलीदाताओं की फाइनेंशियल बिड का अब तय प्रक्रिया के तहत वैल्यूएशन किया जाएगा।

    सूत्रों के अनुसार, फाइनल चयन केवल सबसे ऊंची बोली के आधार पर नहीं होगा। इसमें प्राइस के साथ-साथ कई क्वालिटेटिव और रेगुलेटरी फैक्टर्स को भी ध्यान में रखा जाएगा, ताकि बैंक की दीर्घकालिक स्थिरता और प्रबंधन क्षमता सुनिश्चित की जा सके।

    DIPAM ने की फाइनेंशियल बिड्स की पुष्टि

    डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने पहले ही फाइनेंशियल बिड्स मिलने की पुष्टि कर दी थी। DIPAM सचिव ने 6 फरवरी को सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी थी कि IDBI बैंक के स्ट्रेटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट के लिए फाइनेंशियल ऑफर प्राप्त हो चुके हैं और उनका मूल्यांकन तय प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।

    शॉर्टलिस्ट किए गए निवेशकों से फाइनल फाइनेंशियल ऑफर मिलने के बाद यह सौदा अपने निर्णायक मूल्यांकन चरण में प्रवेश कर जाता है।

    सरकार और LIC बेचेगी 60.72% हिस्सेदारी

    इस स्ट्रेटेजिक सेल में IDBI बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी के साथ-साथ मैनेजमेंट कंट्रोल का हस्तांतरण भी शामिल है। केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहे हैं।
    इसमें सरकार की 30.48 प्रतिशत और LIC की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।

    यह विनिवेश केंद्र सरकार के व्यापक स्ट्रेटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नॉन-टैक्स रेवेन्यू बढ़ाना और नॉन-कोर सेक्टर्स में सरकारी भागीदारी को कम करना है।

    2021 में PCA से बाहर निकलने के बाद बढ़ी रफ्तार

    IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया को मार्च 2021 में नई गति मिली थी, जब बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) फ्रेमवर्क से बाहर निकला। एसेट क्वालिटी, कैपिटल एडिक्वेसी और प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार के बाद PCA से बाहर आना प्राइवेट निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक अहम शर्त माना जा रहा था। अब फाइनेंशियल बिड्स के मूल्यांकन के साथ IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया अपने सबसे अहम मोड़ पर पहुंच गई है।

  • DALAI LAMA IN JEFFRY EDWARD EPSTEIN FILE : दलाई लामा का जेफरी एपस्टीन से कोई संबंध नहीं, कार्यालय ने खबरों को बताया झूठा और बेबुनियाद

    DALAI LAMA IN JEFFRY EDWARD EPSTEIN FILE : दलाई लामा का जेफरी एपस्टीन से कोई संबंध नहीं, कार्यालय ने खबरों को बताया झूठा और बेबुनियाद

    14वें दलाई लामा के कार्यालय ने विवादित अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एडवर्ड एपस्टीन(JEFFRY EDWARD EPSTEIN) से किसी भी तरह के संबंध से साफ इनकार किया है। रविवार को जारी बयान में हाल की मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट को “झूठा, बेबुनियाद और गुमराह करने वाला” बताया गया, जिनमें तिब्बती आध्यात्मिक नेता को एपस्टीन से जोड़ने की कोशिश की गई थी।

    दलाई लामा(DALAI LAMA) के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि परम पावन कभी जेफरी एपस्टीन से नहीं मिले और न ही उन्होंने किसी व्यक्ति को अपनी ओर से एपस्टीन से मिलने या बातचीत करने के लिए अधिकृत किया। बयान में कहा गया कि बिना किसी तथ्यात्मक आधार के मनगढ़ंत संबंध बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।

    दलाई लामा के कार्यालय ने कहा कि इन दावों का कोई तथ्यात्मक या दस्तावेजी आधार नहीं है।

    अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जताई नाराज़गी

    इस मुद्दे पर अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू(PEMA KHANDU) ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “दलाई लामा की पूजनीय संस्था” को निराधार आरोपों और दुर्भावनापूर्ण अटकलों में घसीटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री खांडू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा,
    “गलत सूचना के जरिए एक पवित्र आध्यात्मिक संस्था को बदनाम करने के प्रयास बेहद गैर-जिम्मेदाराना और निंदनीय हैं।”

    उन्होंने उन खबरों की आलोचना की, जिनमें दावा किया गया था कि दलाई लामा का नाम तथाकथित ‘एपस्टीन फाइल्स’ में सामने आया है।

    क्या हैं एपस्टीन फाइल्स

    हाल ही में अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने जेफरी एपस्टीन से जुड़े कई दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इन दस्तावेजों के मुताबिक, एफबीआई ने जुलाई 2006 में एपस्टीन के खिलाफ जांच शुरू की थी। अगस्त 2019 में, अभियोग लगने के एक महीने बाद, एपस्टीन ने न्यूयॉर्क की एक जेल में आत्महत्या कर ली थी।

    जनवरी में अमेरिकी न्याय विभाग ने बताया था कि वह एपस्टीन मामले से जुड़ी दो दशकों से अधिक समय की जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री को सार्वजनिक करेगा। इसमें करीब 30 लाख पन्नों के दस्तावेज, 2,000 से अधिक वीडियो और लगभग 1,80,000 तस्वीरें शामिल हैं।

    ये दस्तावेज एपस्टीन फाइल पारदर्शिता अधिनियम के तहत सार्वजनिक किए गए हैं, जो लंबे समय से चले आ रहे सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव के बाद लागू किया गया कानून है।

    घिसलेन मैक्सवेल का मामला

    एपस्टीन की करीबी सहयोगी और पूर्व प्रेमिका घिसलेन मैक्सवेल को 2021 में न्यूयॉर्क की एक संघीय जूरी ने यौन तस्करी का दोषी ठहराया था। उस पर नाबालिग लड़कियों की भर्ती में मदद करने का आरोप सिद्ध हुआ था। मैक्सवेल फिलहाल 20 साल की सजा काट रही है, हालांकि उसने किसी भी गलत काम में शामिल होने से इनकार किया है।

  • Bomb Threat:दिल्ली के 10 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, संसद पर हमले का भी दावा; अफजल गुरु और खालिस्तान का जिक्र

    Bomb Threat:दिल्ली के 10 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, संसद पर हमले का भी दावा; अफजल गुरु और खालिस्तान का जिक्र

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बार फिर बम धमाके की धमकियों से हड़कंप मच गया है। बुधवार को दिल्ली के करीब 10 स्कूलों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी(Bomb threat) दी गई। इन ईमेल्स में न सिर्फ स्कूलों, बल्कि संसद में धमाके की भी बात कही गई है।

    धमकी भरे ईमेल्स में संसद पर 13 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 11 मिनट पर विस्फोट करने का दावा किया गया है। ईमेल भेजने वाले ने संसद हमले के दोषी आतंकवादी अफजल गुरु का नाम लेते हुए भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया है। इसके साथ ही मेल में “दिल्ली बनेगा खालिस्तान”(Delhi banega Khalistan) और “पंजाब खालिस्तान है”(Punjab Khalistan hai) जैसे आपत्तिजनक और उकसाने वाले संदेश भी लिखे गए हैं।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, धमकी की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और बम निरोधक दस्ते (बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वायड) को संबंधित स्कूलों में भेजा गया। एहतियातन सभी स्कूल परिसरों को खाली करा लिया गया है और बच्चों को सुरक्षित घर भेज दिया गया।

    दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) ने बताया कि सुबह कई शैक्षणिक संस्थानों से इमरजेंसी कॉल प्राप्त हुईं। डीएफएस के एक अधिकारी ने कहा,
    “आज कुल 10 स्कूलों को बम की धमकी मिली है। दमकल विभाग और बम निरोधक टीमें मौके पर पहुंचकर तलाशी ले रही हैं।”

    खबर लिखे जाने तक किसी भी स्कूल परिसर से कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इसे गंभीरता से लेते हुए ईमेल भेजने वाले की पहचान और लोकेशन ट्रेस करने में जुटी हुई हैं।

    गौरतलब है कि हाल के महीनों में दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियां मिलती रही हैं, जिनमें से अधिकांश फर्जी साबित हुई हैं। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए हर धमकी को गंभीरता से ले रही हैं।

    धमकी भरे ईमेल में 13 फरवरी की तारीख का उल्लेख किया गया है, जो 2001 के संसद हमले की तारीख से मेल खाती है, हालांकि उस हमले का महीना दिसंबर था।

    फिलहाल सभी स्कूलों में तलाशी अभियान जारी है और राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

  • Mohan Bhagwat V/S BJP : आरएसएस के बिना भाजपा के ‘अच्छे दिन’ नहीं हो सकते: मोहन भागवत की भाजपा नेतृत्व को दो टूक

    Mohan Bhagwat V/S BJP : आरएसएस के बिना भाजपा के ‘अच्छे दिन’ नहीं हो सकते: मोहन भागवत की भाजपा नेतृत्व को दो टूक

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत(Mohan Bhagwat) ने भाजपा और संघ के रिश्तों को लेकर एक बार फिर स्पष्ट रेखा खींच दी है। उन्होंने कहा है कि भाजपा को मिले राजनीतिक ‘अच्छे दिन’ आरएसएस की विचारधारा और उसके दीर्घकालिक संघर्षों का ही परिणाम हैं। उनके इस बयान को भाजपा नेतृत्व के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    दरअसल, 2024 के आम चुनावों के दौरान भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि भाजपा आरएसएस के बिना भी चुनाव जीत सकती है। इस बयान के बाद संघ कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की चर्चा सामने आई थी। अब मोहन भागवत के ताज़ा बयान को उसी पृष्ठभूमि में अहम माना जा रहा है।

    भागवत ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के लिए आरएसएस ने दशकों तक प्रतिबद्धता दिखाई। जिसने इस आंदोलन का साथ दिया, उसे राजनीतिक लाभ भी मिला। उन्होंने यह भी साफ किया कि राम मंदिर आंदोलन संघ के नेतृत्व में चला और उसका चुनावी फायदा भाजपा को मिला।

    भागवत के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि भाजपा की राजनीतिक सफलता का वैचारिक आधार आज भी आरएसएस ही है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक पार्टी है, संघ की नहीं। हालांकि, भाजपा में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक काम करते हैं। संघ का दावा है कि वह कार्यकर्ता देता है, लेकिन राजनीतिक फैसलों में उसका सीधा हस्तक्षेप नहीं होता।

    संघ की कार्यशैली पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस स्वयंसेवकों के पास किसी और काम के लिए समय नहीं होता। माताएं-बहनें भी शिकायत करती हैं कि स्वयंसेवकों को घर के लिए वक्त नहीं मिलता। संघ का एकमात्र उद्देश्य संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करना है।

    उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का हवाला देते हुए कहा कि संघ खुद कुछ नहीं करता, लेकिन स्वयंसेवक कुछ भी छोड़ते नहीं हैं। स्वयंसेवक समाज के हर अहम क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं, लेकिन पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं। संघ में नियंत्रण नहीं, बल्कि सहयोग और विचार की शक्ति काम करती है।

    भागवत ने अंत में कहा कि संघ का उद्देश्य किसी को सत्ता या राजनीतिक लाभ पहुंचाना नहीं है, बल्कि राष्ट्र के लिए एक विचार गढ़ना और उसे समाज में जीवित रखना है।

  • Social News: ब्रेन हेमरेज पीड़ित के इलाज में सर्व प्रजापति शक्ति ट्रस्ट ने दिया आर्थिक सहयोग

    Social News: ब्रेन हेमरेज पीड़ित के इलाज में सर्व प्रजापति शक्ति ट्रस्ट ने दिया आर्थिक सहयोग

    प्रयागराज(Social News): प्रयागराज निवासी गंगाराम प्रजापति गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे अपने इलाज का खर्च वहन नहीं कर पा रहे थे। दुखद स्थिति यह थी कि जनवरी माह में ही उनके बड़े पुत्र का हृदयाघात से निधन हो गया था, जिससे परिवार पहले से ही गहरे सदमे में था।

    27 जनवरी को गंगाराम प्रजापति को हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज हो गया, जिसके कारण उनका इलाज बीच में ही रुक गया। इस कठिन समय में जंघई, प्रयागराज निवासी संतोष प्रजापति, जो सर्व प्रजापति शक्ति ट्रस्ट के साथ लंबे समय से जुड़े हैं, ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रस्ट के संस्थापक अजय प्रजापति, अरुण प्रजापति, इन्द्रजीत प्रजापति और विनोद प्रजापति को तुरंत जानकारी दी।

    सूचना मिलते ही ट्रस्ट ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सहयोगियों से अपील की और गंगाराम प्रजापति के मेडिकल उपचार के लिए ₹25,000/- की आर्थिक सहायता प्रदान की।

    इस अवसर पर ट्रस्ट के संस्थापक अजय प्रजापति ने कहा, “सर्व प्रजापति शक्ति ट्रस्ट सदैव जरूरतमंदों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।” उन्होंने गंगाराम प्रजापति के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।

    इस पहल ने न केवल गंगाराम प्रजापति के परिवार को मुश्किल घड़ी में राहत दी, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना को भी उजागर किया।

  • Bjp old workers marginalized new leaders power :कांग्रेसमुक्त भारत का सपना देखने वाली भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेसयुक्त हो गई : सुरेशचंद्र राजहंस

    Bjp old workers marginalized new leaders power :कांग्रेसमुक्त भारत का सपना देखने वाली भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेसयुक्त हो गई : सुरेशचंद्र राजहंस

    दूसरे दलों से आए नेताओं को सत्ता में हिस्सेदारी, पुराने भाजपा कार्यकर्ता हाशिये पर

    अश्विनी कुमार दुबे

    मुंबई: भारतीय जनता पार्टी में अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। विपक्ष और राजनीतिक जानकार आरोप लगा रहे हैं कि पार्टी वर्षों तक सत्ता से बाहर संघर्ष करने वाले अपने पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रही है, जबकि कांग्रेस, एनसीपी और अन्य दलों से आए नेताओं को मंत्री पद, निगम मंडलों की अध्यक्षता और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।

    मुंबई कांग्रेस के प्रवक्ता और मीडिया समन्वयक सुरेशचंद्र राजहंस ने कहा, “कांग्रेसमुक्त भारत का सपना देखने वाली भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेसयुक्त हो गई है। पार्टी में अपने नेता, कार्यकर्ता और पदाधिकारी नहीं हैं; दिल्ली से लेकर गलियों तक, भाजपा को दूसरों के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।”

    राजनैतिक जानकारों के मुताबिक, सत्ता में भागीदारी अब विचारधारा या वर्षों के संघर्ष के बजाय दल-बदल की राजनीति पर आधारित हो गई है। पार्टी की जमीनी ताकत माने जाने वाले कार्यकर्ताओं को केवल झंडा उठाने और रैलियों में हिस्सा लेने तक सीमित कर दिया गया है(Bjp old workers marginalized new leaders power), जबकि वास्तविक सत्ता का लाभ बाहरी नेताओं को मिल रहा है।

    विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है, “जो पार्टी खुद को अनुशासन और कार्यकर्ता आधारित संगठन बताती थी, वही अब अपने ही कार्यकर्ताओं का अपमान कर रही है। वर्षों तक सत्ता-विहीन रहने वाले कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन पार्टी को समर्पित किया, उन्हें अब नजरअंदाज किया जा रहा है।”

    राजनीतिक विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो भाजपा को इसका सीधा नुकसान आगामी चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं में बढ़ती नाराजगी पार्टी की जमीनी पकड़ को कमजोर कर रही है, जिससे आगामी राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है।

    पार्टी नेतृत्व की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंदरूनी असंतोष की चर्चा अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच चुकी है।