Category: Bharat

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  • Congress demands Fadnavis’ resignation: डॉ. संपदा मुंडे की मौत संस्थागत हत्या, फडणवीस इस्तीफा दें : वर्षा गायकवाड़

    Congress demands Fadnavis’ resignation: डॉ. संपदा मुंडे की मौत संस्थागत हत्या, फडणवीस इस्तीफा दें : वर्षा गायकवाड़

    नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने महाराष्ट्र की चिकित्सक डॉ. संपदा मुंडे की मौत को “संस्थागत हत्या” करार देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे की मांग की है।
    पार्टी ने इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) या न्यायिक जांच गठित करने की भी मांग की है ताकि सच्चाई सामने आए और दोषियों को सज़ा मिल सके।

    दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद वर्षा गायकवाड़ और महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटील ने कहा कि सतारा जिले के एक अस्पताल में कार्यरत डॉ. संपदा मुंडे को राजनीतिक दबाव, ब्लैकमेलिंग और यौन उत्पीड़न के कारण आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया।

    कांग्रेस नेताओं ने बताया कि डॉ. संपदा पर एक चीनी मिल, जो पूर्व भाजपा सांसद रणजीत सिंह नाईक निम्बालकर की है, के अधिकारियों द्वारा फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेरफेर करने का दबाव डाला जा रहा था।
    जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उन्हें लगातार परेशान और ब्लैकमेल किया गया। शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

    वर्षा गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने बिना किसी जांच के नाईक को क्लीन चिट दी, जो स्पष्ट रूप से सत्ता के दुरुपयोग का मामला है।
    उन्होंने राज्य महिला आयोग के रवैये पर भी नाराज़गी जताई, कहा कि आयोग ने पीड़िता के परिवार से मुलाकात तक नहीं की और उल्टे चरित्र हनन में शामिल हो गया।

    अतुल लोंढे पाटील ने कहा कि यह घटना आरएसएस की मानसिकता को दर्शाती है, जो दलितों और आदिवासियों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया रखती है और अपराधियों को संरक्षण देती है।
    उन्होंने मांग की कि फडणवीस को मुख्यमंत्री और गृह मंत्री दोनों पदों से तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

    लोंढे ने यह भी बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने डॉ. संपदा मुंडे के परिवार से बात कर न्याय की इस लड़ाई में कांग्रेस का पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया है।

  • Congress Morcha 1 November Election Commission :सरकार किसानों की आवाज दबा रही है, कर्जमाफी हर हाल में होनी चाहिए: हर्षवर्धन सपकाल

    Congress Morcha 1 November Election Commission :सरकार किसानों की आवाज दबा रही है, कर्जमाफी हर हाल में होनी चाहिए: हर्षवर्धन सपकाल

    1 नवंबर को निर्वाचन आयोग से जवाब मांगने के लिए कांग्रेस का मोर्चा

    मुंबई: महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि राज्य में मतदाता सूचियों में भारी गड़बड़ी पाई गई है, जिसकी जानकारी कांग्रेस पार्टी ने सबसे पहले ठोस सबूतों के साथ उजागर की थी।
    इसके बावजूद निर्वाचन आयोग ने इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इस “सोए हुए निर्वाचन आयोग” को जगाने के लिए सभी दलों ने 1 नवंबर को एक विशाल मोर्चा आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसमें कांग्रेस पार्टी भी सक्रिय रूप से शामिल होगी।

    बुलढाणा में पत्रकारों से बातचीत में सपकाल ने बताया —

    “आज मुंबई में 1 नवंबर के मोर्चे के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। कुछ व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों से मैं उस बैठक में शामिल नहीं हो सका, लेकिन कांग्रेस के प्रतिनिधि बैठक में मौजूद थे। कांग्रेस पार्टी का इस मोर्चे में पूर्ण सहभाग रहेगा।”

    उन्होंने आगे कहा —

    “इस आंदोलन में कौन शामिल होता है यह गौण विषय है — मुख्य मुद्दा यह है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी को तत्काल सुधारा जाए।”

    बच्चू कडू के आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए सपकाल ने सरकार पर किसानों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
    उन्होंने कहा —

    “सरकार कभी पुलिस को, तो कभी अदालत को आगे कर मुख्य मुद्दे से भाग रही है। अदालत को ढाल बनाकर किसानों के आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है। अगर सरकार में हिम्मत है तो वह सीधे किसानों से बातचीत करे।”

    सपकाल ने कहा कि चुनाव के समय कर्जमाफी का वादा किया गया था, लेकिन अब सरकार टालमटोल कर रही है।

    “किसानों का कर्ज माफ होना ही चाहिए। अगर राज्य सरकार के खजाने में पैसे की कमी है, तो यह उसकी अक्षमता का प्रमाण है।”

    मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा —

    “अगर उनमें थोड़ी भी राजनीतिक साख बची है, तो वे दिल्ली जाकर महाराष्ट्र के लिए विशेष आर्थिक पैकेज लाएं। किसानों को राहत देना सरकार की जिम्मेदारी है, और अब जनता जवाब मांगने के मूड में है।”

    महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों की आवाज दबा रही है। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर को निर्वाचन आयोग से जवाब मांगने के लिए कांग्रेस सहित कई दल मोर्चा निकालेंगे। सपकाल ने सरकार से कर्जमाफी और विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की
  • Toxic Yash Movie: यश की एक्शन थ्रिलर ‘टॉक्सिक’ 19 मार्च 2026 को रिलीज़ होगी, कियारा आडवाणी संग दिखेगी धमाकेदार जोड़ी

    Toxic Yash Movie: यश की एक्शन थ्रिलर ‘टॉक्सिक’ 19 मार्च 2026 को रिलीज़ होगी, कियारा आडवाणी संग दिखेगी धमाकेदार जोड़ी

    साउथ सुपरस्टार यश एक बार फिर बड़े पर्दे पर धमाका करने के लिए तैयार हैं। उनकी बहुप्रतीक्षित एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘टॉक्सिक’ की रिलीज़ डेट की आधिकारिक घोषणा हो चुकी है। फिल्म 19 मार्च 2026 को रिलीज़ होगी — यानी गुड़ीपड़वा और ईद के मौके पर दर्शकों को एक साथ डबल सेलिब्रेशन मिलेगा।

    फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्ममेकर गीतू मोहनदास ने किया है, जो अपनी दमदार विज़ुअल स्टोरीटेलिंग के लिए जानी जाती हैं। इस फिल्म में यश के साथ कियारा आडवाणी मुख्य भूमिका में नजर आएंगी, जबकि नयनतारा, हुमा कुरैशी और अक्षय ओबेरॉय भी महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे हैं।

    पहले जारी किए गए पोस्टर में यश का इंटेंस और रहस्यमयी लुक देखकर फैंस में जबरदस्त उत्सुकता देखने को मिली थी।

    बीते दिनों फिल्म की रिलीज़ डेट आगे बढ़ने की अफवाहें तेज थीं, लेकिन फिल्म समीक्षक तरण आदर्श ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि “टॉक्सिक” तय समय पर ही रिलीज़ होगी, इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है।

    फिल्म की शूटिंग का अंतिम चरण पूरा हो चुका है और जनवरी 2026 से इसका भव्य प्रमोशन अभियान शुरू किया जाएगा। खास बात यह है कि ‘टॉक्सिक’ को भारतीय भाषाओं के अलावा अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में भी डब किया जा रहा है, जिससे इसे एक वैश्विक रिलीज़ का दर्जा मिलेगा।

    ‘केजीएफ’ के बाद ‘टॉक्सिक’ यश की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी फिल्म मानी जा रही है, जो भारतीय सिनेमा के एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रही है।

  • क्या ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ जल्द कहेगा अलविदा? फैंस में बढ़ी बेचैनी, हितेन तेजवानी ने दी सफाई

    क्या ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ जल्द कहेगा अलविदा? फैंस में बढ़ी बेचैनी, हितेन तेजवानी ने दी सफाई

    टीवी जगत में इन दिनों एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है — क्या एकता कपूर का सुपरहिट शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ अब ऑफ-एयर होने वाला है? टीआरपी चार्ट्स में ‘अनुपमा’ के बाद दूसरा स्थान हासिल करने वाला यह शो दर्शकों के दिलों पर राज कर रहा है। लेकिन ताजा खबरों के अनुसार, यह बहुचर्चित सीक्वल अपने तय समय से पहले ही अचानक बंद किया जा सकता है।

    25 साल बाद स्मृति ईरानी की वापसी
    29 जुलाई 2025 को स्टार प्लस पर लॉन्च हुए इस शो ने नॉस्टैल्जिया और नए ड्रामे का बेहतरीन संगम पेश किया। 25 साल बाद स्मृति ईरानी की छोटे पर्दे पर वापसी ने दर्शकों को फिर से तुलसी-मिहिर के दौर में लौटा दिया। शो की कहानी, संवाद और पारिवारिक ट्विस्ट ने पुराने और नए दोनों दर्शकों को जोड़ रखा है।

    हितेन तेजवानी बोले — ‘कोई आधिकारिक जानकारी नहीं’
    शो में करण वीरानी का किरदार निभा रहे अभिनेता हितेन तेजवानी ने इन अफवाहों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

    “मुझे इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है कि शो बंद हो रहा है या नहीं, क्योंकि मैं नियमित रूप से शूटिंग नहीं कर रहा हूं। यह शो पहले से ही लिमिटेड सीरीज़ के तौर पर प्लान किया गया था। अब आगे क्या फैसला होगा, यह चैनल और प्रोडक्शन टीम पर निर्भर करता है।”

    एकता कपूर क्या करेंगी कोई नई घोषणा?
    मनोरंजन जगत में चर्चाएं हैं कि शो का अंत अचानक किया जा सकता है, लेकिन फैंस को उम्मीद है कि एकता कपूर शायद कोई नया ट्विस्ट या स्पिन-ऑफ लेकर आएंगी। तुलसी और मिहिर की जोड़ी को फिर से स्क्रीन पर देखना दर्शकों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं रहा, इसलिए यह खबर उनके लिए निराशाजनक हो सकती है।

    अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ वाकई जल्द अलविदा कह देगा या फिर एकता कपूर इसे किसी भावनात्मक क्लाइमेक्स या बड़े सरप्राइज के साथ आगे बढ़ाएंगी।

  • Transfer Politics: यूपी में 46 आईएएस के बाद 27 पीसीएस अफसरों के तबादले, वाराणसी में बड़े बदलाव

    Transfer Politics: यूपी में 46 आईएएस के बाद 27 पीसीएस अफसरों के तबादले, वाराणसी में बड़े बदलाव

    यूपी में 46 आईएएस के बाद 27 पीसीएस अफसरों के तबादले, वाराणसी में बड़े बदलाव

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को एक और बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राज्यभर में 27 पीसीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया। इससे पहले 46 आईएएस अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। दोनों स्तरों के तबादलों में वाराणसी, अयोध्या, मुरादाबाद और लखनऊ सहित कई जिलों में अहम बदलाव किए गए हैं।

    वाराणसी में तीन वरिष्ठ अधिकारियों — मुख्य विकास अधिकारी, एडीएम (फाइनेंस) और विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष — को बदला गया है। साथ ही एएसडीएम, अपर नगर आयुक्त और अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) पदों पर भी नई नियुक्तियां की गई हैं।

    प्रमुख तबादले

    सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार:

    — अरुण कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी (वि/रा) बाराबंकी से अब मुरादाबाद मंडल के अपर आयुक्त बनाए गए हैं। — दिलीप कुमार श्रीवास्तव को मेरठ से वाराणसी मंडल का अपर आयुक्त बनाया गया है। — गोविंद मौर्य को राजस्व परिषद, लखनऊ से वाराणसी मंडल का अपर आयुक्त बनाया गया है। — अमित कुमार, उप जिलाधिकारी वाराणसी, को अपर नगर आयुक्त, नगर निगम वाराणसी का कार्यभार सौंपा गया है। — श्रद्धा चौधरी, उप जिलाधिकारी वाराणसी, को सहायक निदेशक, दुग्ध समिति लिमिटेड, लखनऊ के रूप में स्थानांतरित किया गया है।

    अन्य जिलों में फेरबदल

    इसके अलावा अयोध्या, मथुरा, बागपत, जालौन, शाहजहांपुर, हापुड़, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, कन्नौज, मेरठ और गोरखपुर जिलों में भी कई अफसरों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं।

    अयोध्या में रविशंकर कुमार को अपर जिलाधिकारी (भू-अर्जन) बनाया गया है, जबकि सरजमी हैदर को विन्ध्याचल मंडल, मीरजापुर में अपर आयुक्त नियुक्त किया गया है। वहीं, बागपत के मनोज वर्मा को मुरादाबाद विकास प्राधिकरण का सचिव बनाया गया है।

    प्रशासनिक दृष्टि से अहम कदम

    मुख्य सचिव कार्यालय के अनुसार, यह फेरबदल प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने और आगामी विधानसभा उपचुनावों व त्योहारों के दौरान सुचारु प्रबंधन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां तत्परता से संभालने के निर्देश दिए हैं।

    इससे पहले सोमवार देर रात जारी आदेश में 46 आईएएस अधिकारियों के तबादले हुए थे, जिनमें तीन मंडलायुक्त, दस जिलों के जिलाधिकारी और कई नगर आयुक्त शामिल थे। मंगलवार को पीसीएस अधिकारियों की सूची जारी होने के साथ यह प्रशासनिक पुनर्गठन और व्यापक हो गया है।

    सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में सचिवालय और विभागीय स्तर पर भी कुछ और बदलाव संभव हैं।

  • Bihar Election: सस्ता डेटा नहीं, बिहार से बाहर गया बेटा वापस चाहिए: पीएम मोदी पर प्रशांत किशोर का चुनावी तंज

    Bihar Election: सस्ता डेटा नहीं, बिहार से बाहर गया बेटा वापस चाहिए: पीएम मोदी पर प्रशांत किशोर का चुनावी तंज

    “सस्ता डेटा नहीं, बिहार से बाहर गया बेटा वापस चाहिए”: पीएम मोदी पर प्रशांत किशोर का निशाना

    अररिया / राघोपुर प्रखंड (बिहार) — जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने मंगलवार देर शाम अररिया के नरपतगंज के बाद राघोपुर प्रखंड के सिमराही में आयोजित चुनावी सभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा तंज कसते हुए कहा, “मोदीजी कह रहे हैं कि वे सस्ता डेटा दे रहे हैं — अरे भाई, बिहारवालों को सस्ता डेटा नहीं चाहिए, गुजरात गया अपना बेटा वापस चाहिए।”

    प्रशांत किशोर ने सभा में स्पष्ट रूप से कहा कि बिहार में रोजगार सृजन और पलायन रोकना प्राथमिक मांग है। उनके शब्दों में, “हमें दिखावे के ऑफर नहीं चाहिए, असली रोजगार चाहिए ताकि युवा अपने घर में काम कर सकें और अपनी फैमिली के साथ रहें।”

    चुनावी संदेश: विकल्प और चेतावनी

    प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि पिछले तीस सालों में जनता के पास सही विकल्प कम ही रहे हैं। उन्होंने बताया कि जो लोग पहले प्रभाव के बहाने भाजपा या नीतीश कुमार को वोट दिया करते थे, अब उनके पास नई राजनीति का विकल्प उपलब्ध है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे सूझ-बूझ से वोट दें वरना “पांच साल और झेलने” का जोखिम बना रहेगा।

    नीतीश कुमार पर कटाक्ष करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, “चचा अब बूढ़े हो गए हैं — चचा को अब छुट्टी चाहिए।” यह टिप्पणी स्थानीय सभा में चर्चा का विषय बनी।

    जन सुराज पार्टी की रणनिति

    प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी का प्रचार-प्रसार लगातार जारी है और प्रशांत किशोर व्यक्तिगत रूप से कई सभाओं में ग्रामीण और शहरी मतदाताओं से मिल रहे हैं।

    बिहार में पहले चरण के लिए मतदान 6 नवंबर को निर्धारित है, दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा और चुनाव परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।

    सभासूत्र और स्थानीय प्रभाव

    सिमराही में हुई सभा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे। प्रशांत किशोर ने सभा में रोजगार, पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे स्थानीय मुद्दों को उठाया और जनता से स्थानीय उम्मीदवारों को समर्थन देने का आग्रह किया।

    नोट: यह रिपोर्ट चुनावी माहौल और प्रसारण के लिये संकलित घटनाक्रम पर आधारित है; घटनास्थल से मिली प्रत्यक्ष प्रतिक्रियाएँ और भाषण उद्धरण शामिल किए गए हैं।

  • Bombay High Court बड़ा फैसला: नाती-नातिन को नाना की संपत्ति में नहीं है जन्मसिद्ध अधिकार

    Bombay High Court बड़ा फैसला: नाती-नातिन को नाना की संपत्ति में नहीं है जन्मसिद्ध अधिकार

    मुंबई।
    पारिवारिक संपत्ति को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि हिंदू परिवार में नाती या नातिन को अपने नाना की पैतृक संपत्ति पर कोई जन्मसिद्ध अधिकार प्राप्त नहीं होता। इस निर्णय ने हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 की सीमाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया है।
    इस अधिनियम के अनुसार संयुक्त परिवार की संपत्ति में बेटियों को भी बेटों के समान सह-हिस्सेदार (coparcener) का दर्जा दिया गया है, किंतु यह अधिकार केवल पुत्र-पुत्री तक सीमित है, उनके बच्चों तक नहीं बढ़ाया गया है।

    मामला क्या था

    यह फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट ने ‘विश्वंभर बनाम सॉ. सुनंदा’ मामले में सुनाया। इस मामले में एक नातिन (वादी) ने अपने नाना की पैतृक संपत्ति के बंटवारे और उसमें हिस्सेदारी का दावा किया था।
    वादी के नाना का निधन हो चुका था, और उनके पीछे चार पुत्र और चार पुत्रियां थीं, जिनमें से वादी की माता (नाना की बेटी) जीवित थीं। सुनवाई के दौरान यह प्रश्न उठा कि क्या बेटी की बेटी (नातिन) को अपने नाना की संयुक्त पारिवारिक संपत्ति के विभाजन की मांग करने का अधिकार है।

    अदालत का निर्णय

    हाई कोर्ट ने नातिन के दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि नातिन को अपने नाना की संपत्ति के बंटवारे में कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
    न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 2005 के अधिनियम ने भले ही बेटों और बेटियों को समान दर्जा दिया हो, लेकिन बेटी के बच्चों को उस दायरे में शामिल नहीं किया गया है।
    चूंकि नातिन अपने नाना की पुरुष वंश परंपरा की रेखीय उत्तराधिकारी नहीं है, इसलिए उसे संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में कोई जन्मसिद्ध हिस्सा नहीं मिल सकता।

    मिताक्षरा कानून की पृष्ठभूमि

    हिंदू मिताक्षरा कानून के अनुसार, पैतृक संपत्ति में अधिकार जन्म से प्राप्त होता है। ऐतिहासिक रूप से यह अधिकार केवल पिता और उसके पुरुष वंशजों तक सीमित था।
    2005 के संशोधन अधिनियम के बाद बेटियों को भी यह समान अधिकार मिला, जिससे वे अपने पिता की संयुक्त संपत्ति में हिस्सा मांग सकती हैं।
    हालांकि यह अधिकार केवल बेटी तक सीमित है, उसके बच्चों तक नहीं बढ़ता। इसलिए नाती या नातिन को नाना की संपत्ति में कोई जन्मसिद्ध अधिकार नहीं कहा जा सकता।

    कानून की स्पष्टता और सीमाएँ

    2005 के अधिनियम के बाद उत्तराधिकार संबंधी कई जटिल प्रश्न उभरे हैं, जिनमें यह मुद्दा भी प्रमुख है कि बेटी के बच्चों का उनके नाना की संपत्ति पर क्या अधिकार है।
    परंपरागत मिताक्षरा सिद्धांतों के अनुसार, बेटी के बच्चे नाना की संपत्ति में सह-वारिस नहीं माने जाते।
    हालांकि दुर्लभ परिस्थितियों में, यदि नाना की कोई पुरुष संतान नहीं है और उन्होंने वसीयत द्वारा संपत्ति बेटी के बच्चों को दी है, तो वे ‘सहायकों से प्राप्त विरासत’ (succession through will) के अंतर्गत संपत्ति पा सकते हैं।

    फैसला क्यों महत्वपूर्ण है

    बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नज़ीर (legal precedent) बनेगा।
    यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि उत्तराधिकार के अधिकार सीमित और परिभाषित होते हैं, और कानून में समानता का अर्थ यह नहीं कि वह अगली पीढ़ियों तक स्वतः विस्तारित हो।

    यह फैसला न केवल पारिवारिक संपत्ति विवादों में दिशा-निर्देश प्रदान करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि हिंदू उत्तराधिकार कानून की व्याख्या में पारिवारिक वंश परंपरा की रेखा एक निर्णायक तत्व है।

  • HIGH ALERT! चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ ने पकड़ी रफ्तार, 35 से ज्यादा उड़ानें रद्द, आंध्र प्रदेश के 19 जिलों में रेड अलर्ट

    HIGH ALERT! चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ ने पकड़ी रफ्तार, 35 से ज्यादा उड़ानें रद्द, आंध्र प्रदेश के 19 जिलों में रेड अलर्ट

    नई दिल्ली। पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में तेजी से सक्रिय हो रहा भीषण चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ अब बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, यह तूफान वर्तमान में मछलीपट्टनम से लगभग 100 किलोमीटर और काकीनाडा से करीब 180 किलोमीटर की दूरी पर है। आईएमडी ने चेतावनी जारी करते हुए आंध्र प्रदेश के 19 जिलों में रेड अलर्ट घोषित किया है और अगले 24 घंटे में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है।

    35 से अधिक उड़ानें रद्द

    तूफान के असर से हवाई सेवाओं पर भी बड़ा प्रभाव पड़ा है। तेलंगाना के शमशाबाद हवाई अड्डे और आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और राजमुंद्री हवाई अड्डों से संचालित होने वाली 35 से अधिक उड़ानें रद्द की गई हैं। इनमें इंडिगो की 30, एयर इंडिया की 2 और एयर इंडिया एक्सप्रेस की 5 उड़ानें शामिल हैं।

    110 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं

    आईएमडी ने चेताया है कि विशाखापत्तनम के तटीय इलाकों में हवा की रफ्तार 90 से 100 किमी/घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर यह 110 किमी/घंटे तक भी जा सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, ‘मोंथा’ उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए आज शाम से रात के बीच मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच काकीनाडा के तट को पार कर सकता है।

    रेलवे ने बनाई विशेष रणनीति

    रेल मंत्रालय ने भी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सभी जोन को सतर्क कर दिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और गुंटूर मंडलों में ‘वॉर रूम’ सक्रिय कर यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेन संचालन पर नजर रखी जाए। मशीनरी, राहत सामग्री और तकनीकी स्टाफ को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

    पड़ोसी राज्यों में भी असर

    ‘मोंथा’ का प्रभाव केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। आईएमडी के मुताबिक, तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल और कर्नाटक के कई जिलों में भी भारी बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान है। तटीय क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, ‘मोंथा’ की गति और दिशा पर अगले 12 घंटे बेहद निर्णायक रहेंगे। यदि इसकी रफ्तार और तीव्रता बढ़ती है, तो आंध्र प्रदेश और आसपास के राज्यों में बड़े पैमाने पर बिजली, संचार और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

  • सिर्फ चार दिनों में 6,55,709 मतदाता कैसे जुड़े? – सचिन सावंत ने उठाए गंभीर सवाल-कहा चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत से मतदाता सूची में हुआ बड़ा घोटाला

    सिर्फ चार दिनों में 6,55,709 मतदाता कैसे जुड़े? – सचिन सावंत ने उठाए गंभीर सवाल-कहा चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत से मतदाता सूची में हुआ बड़ा घोटाला

    मुंबई: कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा देश के सामने उजागर किए गए भाजपा और चुनाव आयोग के कथित “वोट चोरी गठजोड़” के बाद महाराष्ट्र की मतदाता सूची में अनियमितताओं का नया खुलासा हुआ है। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सचिन सावंत ने गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल उठाया है कि सिर्फ चार दिनों में 6,55,709 नए मतदाता कैसे जोड़े गए? उन्होंने यह आंकड़ा स्वयं चुनाव आयोग के डेटा के हवाले से पेश किया है।

    सावंत ने कहा कि चुनाव आयोग के अनुसार लोकसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र में 9,29,43,890 पंजीकृत मतदाता थे। इसके बाद केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा 30 अगस्त 2024 तक की गई जांच में यह संख्या बढ़कर 9,53,74,302 हो गई — यानी चार महीनों में 24 लाख मतदाता बढ़े। फिर 15 अक्टूबर 2024 को विधानसभा चुनाव की घोषणा के समय मतदाताओं की संख्या 9,63,69,410 बताई गई।

    चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार नामांकन की पहली तारीख से दस दिन पहले तक मतदाता पंजीकरण खुला रहता है। इसके बाद आठ दिनों तक जांच की जाती है और नामांकन के पहले दिन अंतिम पूरक सूची जारी की जाती है। चूँकि 29 अक्टूबर नामांकन का पहला दिन था, इसलिए पंजीकरण 19 अक्टूबर तक खुला रहा।
    इस अवधि में — 16 अक्टूबर से 19 अक्टूबर के बीच — पंजीकरण सक्रिय रहा और जब 30 अक्टूबर को अंतिम पूरक सूची प्रकाशित की गई, तब मतदाताओं की संख्या 9,70,25,119 पहुँच गई।

    इसका अर्थ है कि सिर्फ चार दिनों में 6,55,709 मतदाता जोड़े गए, जो बेहद असामान्य और संदेहास्पद है। सावंत ने कहा कि मतदाता पंजीकरण पूरे वर्ष नियमित रूप से जारी था, ऐसे में चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद इतनी बड़ी संख्या में पंजीकरण होना “अभूतपूर्व और संदिग्ध” है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए।

    सावंत ने आगे कहा कि यही त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची अब 1 जुलाई 2025 तक बढ़ाई गई है, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को मतदाता सूची तक पहुँच नहीं दी जा रही है और उन्हें इस पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी नहीं दिया जा रहा।

    उन्होंने कहा, “राज्य चुनाव आयोग का यह रवैया पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से तैयार की गई इस मतदाता सूची के आधार पर स्थानीय निकाय चुनाव कराना लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ होगा। विपक्षी दलों की इस विषय पर उठाई गई आपत्ति पूरी तरह न्यायसंगत है।”

  • भाजपा महायुति सरकार के खिलाफ कांग्रेस का 20 अक्टूबर को पूरे राज्य में ‘पिठला-भाखर आंदोलन’

    भाजपा महायुति सरकार के खिलाफ कांग्रेस का 20 अक्टूबर को पूरे राज्य में ‘पिठला-भाखर आंदोलन’

    मुंबई। महाराष्ट्र में किसानों की दुर्दशा और सरकार की नीतियों के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने 20 अक्टूबर को पूरे राज्य में ‘पिठला-भाखर आंदोलन’ करने की घोषणा की है। इस दिन कांग्रेस कार्यकर्ता किसानों के साथ बैठकर पिठला-भाखर और ठेचा खाएंगे और भाजपा महायुति सरकार की किसान-विरोधी नीतियों का विरोध दर्ज कराएंगे।

    कांग्रेस ने कहा है कि अतिवृष्टि के कारण राज्य के 30 जिलों के 350 तालुकों में लाखों एकड़ फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है, लेकिन सरकार ने जो राहत पैकेज घोषित किया है, वह बेहद कमज़ोर और भ्रामक है। पार्टी का कहना है कि सरकार ने केवल पुरानी योजनाओं को जोड़कर 32,000 करोड़ रुपये का “फसवा पैकेज” घोषित किया है, जिससे किसानों को कोई वास्तविक सहायता नहीं मिली है।

    कांग्रेस ने मांग की थी कि किसानों को प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये, जबकि पूरी तरह बह गई जमीन के लिए प्रति हेक्टेयर 5 लाख रुपये की सहायता और साथ ही पूर्ण कर्जमाफी दी जाए। लेकिन सरकार ने इन मांगों को नज़रअंदाज़ कर दिया है।

    कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “देश का अन्नदाता इस दिवाली पर काली दिवाली मना रहा है और इसके लिए पूरी तरह भाजपा महायुति सरकार ज़िम्मेदार है।” पार्टी ने घोषणा की कि यह आंदोलन राज्य के हर ज़िले, हर तालुके और हर गांव में एक साथ आयोजित किया जाएगा ताकि किसानों की आवाज़ सरकार तक पहुंचाई जा सके।