Category: Thane

  • 36 वर्षों की निडर सेवा के बाद ठाणे पुलिस उपनिरीक्षक अजीत पालकर सेवानिवृत्त

    36 वर्षों की निडर सेवा के बाद ठाणे पुलिस उपनिरीक्षक अजीत पालकर सेवानिवृत्त

    ठाणे। “कर्तव्य चाहे कठिन हो या संकट गहरा, हमें झुकना नहीं चाहिए”— इसी आदर्श वाक्य पर चलते हुए ठाणे शहर पुलिस उपनिरीक्षक अजीत कृष्ण पालकर ने 36 वर्षों तक निडर, निष्ठावान और निष्पक्ष सेवा दी। 31 जुलाई 2025 को उन्होंने पुलिस बल से सेवानिवृत्ति ली।1990 में पुलिस सेवा में शामिल हुए पालकर सर ने नौपाड़ा, कोपरी, एम. फुले चौक, कल्याण, कलवा, राबोडी और भ्रष्टाचार निरोधक थाने जैसे अहम पदों पर कार्य किया। नौपाड़ा पुलिस स्टेशन में रहते हुए उन्होंने कलवा खरेगांव की बैंक डकैती मामले में 66 लाख रुपये बरामद कर अपराधियों की कमर तोड़ दी।अपने कार्यकाल में उन्होंने कई संगठित गिरोहों, आर्थिक अपराधों और सामाजिक अपराधों पर कड़ा प्रहार किया। कठोर अनुशासन, स्वच्छ छवि और स्पष्ट नीतियों के कारण वे जनता और सहकर्मियों दोनों के बीच आदर्श अधिकारी के रूप में पहचाने गए।सेवानिवृत्ति के अवसर पर उन्होंने कहा— “सेवा ही मेरा मार्ग था और जनता का विश्वास ही मेरा पुरस्कार है।” उनकी विदाई के साथ ही ठाणे पुलिस ने एक अनुशासित, निडर और प्रेरक अधिकारी को अलविदा कहा, लेकिन उनके काम की छाप हमेशा बनी रहेगी।

  • Veteran Journalist Shrinarayan Tiwari to Be Felicitated for 40 Years of Service: यशोभूमि के संपादक श्रीनारायण तिवारी को मिलेगा पत्रकारिता क्षेत्र का सर्वोत्तम सम्मान

    Veteran Journalist Shrinarayan Tiwari to Be Felicitated for 40 Years of Service: यशोभूमि के संपादक श्रीनारायण तिवारी को मिलेगा पत्रकारिता क्षेत्र का सर्वोत्तम सम्मान

    मुंबई। राष्ट्रीय हिंदी दैनिक यशोभूमि के संपादक श्रीनारायण तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में किए गए उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए 6 अगस्त को 2025 का ‘सर्वोत्तम सम्मान’ प्रदान किया जाएगा। श्री तिवारी पिछले चार दशकों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।यह सम्मान गऊ भारत भारती संस्था द्वारा दिया जाएगा।

    संस्था ने श्री तिवारी के दीर्घकालिक, निडर और जिम्मेदार पत्रकारिता को देखते हुए यह निर्णय लिया है।श्रीनारायण तिवारी ने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत वर्ष 1984 में जौनपुर जिले के शाहगंज से प्रकाशित राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक वादरायण से की थी। इसके पश्चात उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित साप्ताहिकों और दैनिक समाचार पत्रों में कार्य किया। वर्ष 1988 में उन्हें मुंबई से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय हिंदी दैनिक जनसत्ता में स्टाफ रिपोर्टर के रूप में कार्य करने का अवसर मिला।वर्ष 2003 में उन्होंने लोकमत समाचार में ब्यूरो चीफ के रूप में अपनी सेवाएं दीं। कुछ समय बाद उन्हें पूरे लोकमत समूह के लिए विशेष संवाददाता के रूप में काम करने का अवसर प्राप्त हुआ। इसके पश्चात उन्होंने दबंग दुनिया, एब्सल्यूट इंडिया, पूर्ण विराम और जागरूक टाइम्स जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में स्थानीय संपादक, संपादक और कार्यकारी संपादक के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया।

    वर्तमान में श्री तिवारी यशोभूमि के संपादक पद पर कार्यरत हैं। वह अपनी धारदार रिपोर्टिंग और खोजी पत्रकारिता के लिए व्यापक रूप से पहचाने जाते हैं। उन्हें इस क्षेत्र में पहले भी कई सम्मान और पुरस्कार मिल चुके हैं।

    वह मंत्रालय और राजनीतिक क्षेत्र की रिपोर्टिंग में दक्ष माने जाते हैं और उनकी रिपोर्टिंग आज भी सरकारी गलियारों में चर्चा का विषय रहती है।उनके नेतृत्व में यशोभूमि निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। ‘नया तेवर, नया कलेवर’ का जो परिवर्तन यशोभूमि में देखा जा रहा है, वह उनके संपादकीय मार्गदर्शन का ही प्रतिफल है।

  • भिवंडी उपजिला अस्पताल में विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर 780 नागरिकों की जांच, 10 संक्रमित पाए गए

    भिवंडी उपजिला अस्पताल में विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर 780 नागरिकों की जांच, 10 संक्रमित पाए गए

    भिवंडी: विश्व हेपेटाइटिस दिवस और जांच सप्ताह के अवसर पर भिवंडी स्थित स्वर्गीय इंदिरा गांधी स्मृति उपजिला अस्पताल में विशेष रक्त जांच अभियान आयोजित किया गया। इस अभियान का उद्देश्य हेपेटाइटिस बी और सी के संक्रमण की पहचान कर रोगियों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराना था।

    अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. माधवी पंडारे ने बताया कि हेपेटाइटिस बी और सी जैसे संक्रमण मुख्यतः संक्रमित रक्त, असुरक्षित यौन संबंध, दूषित सुइयों और संक्रमित मां से नवजात में फैलते हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे संक्रमण से बचाव के लिए नियमित जांच कराएं और जागरूकता बनाए रखें।

    अभियान के अंतर्गत 780 नागरिकों की जांच की गई, जिसमें गर्भवती महिलाएं और एआरटी (एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी) पर मौजूद मरीज भी शामिल थे। इनमें से 7 मरीजों में हेपेटाइटिस बी और 3 मरीजों में हेपेटाइटिस सी की पुष्टि हुई। इन सभी संक्रमित मरीजों के रक्त नमूने आगे की जांच और पुष्टि के लिए राज्य की महालैब में भेजे गए हैं।

    कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रयोगशाला विभाग के अधिकारी — देवीदास शेटगे, राजेंद्र शिंदे, अनिल वाघ और श्रीमती समीक्षा गायकवाड़ — ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने न केवल जांच में सहायता की, बल्कि उपस्थित नागरिकों को हेपेटाइटिस से बचाव के उपायों पर परामर्श भी दिया।

    डॉ. पंडारे ने यह भी कहा कि यह पहल न केवल एक मेडिकल जांच अभियान था, बल्कि नागरिकों के बीच जागरूकता फैलाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है, जो भविष्य में संक्रमण रोकने में सहायक होगा।

  • पुणे में कांग्रेस का ‘रोजगार सत्याग्रह’ सफल, 27 जिलों के बेरोजगार अभियंताओं ने लिया हिस्सा

    पुणे में कांग्रेस का ‘रोजगार सत्याग्रह’ सफल, 27 जिलों के बेरोजगार अभियंताओं ने लिया हिस्सा

    कांग्रेस के नेतृत्व में पुणे में आयोजित ‘रोजगार सत्याग्रह’ में 27 जिलों से 350 से अधिक बेरोजगार अभियंताओं ने हिस्सा लिया। WRD और WCD विभागों में 4600 से अधिक पदों पर भर्ती की मांग। कांग्रेस ने राज्य सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया।

    पुणे: महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में पुणे जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने आज “रोजगार सत्याग्रह” शांतिपूर्ण, संगठित और प्रभावी रूप से संपन्न हुआ। यह आंदोलन जलसंपदा विभाग (WRD) और जलसंवर्धन विभाग (WCD) में 2019 से लंबित पड़ी 4,600 से अधिक अभियंता पदों की नियुक्ति प्रक्रिया को तत्काल शुरू करने की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। इस सत्याग्रह में राज्य के 27 जिलों से 350 से अधिक बेरोजगार अभियंताओं ने भाग लिया।

    आंदोलन का नेतृत्व कांग्रेस के प्रदेश महासचिव एवं रोजगार विभाग के राज्य संयोजक धनंजय रामकृष्ण शिंदे ने किया। युवा अभियंताओं की संस्था “इंजीनियर्स असोसिएशन” ने राज्यव्यापी समर्थन प्रदान किया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने वीडियो कॉल के माध्यम से प्रदर्शनकारियों से संवाद किया और उन्हें पुणे दौरे में प्रत्यक्ष मुलाकात का आश्वासन देते हुए कहा, “रोजगार का मुद्दा राजनीति से ऊपर है, और युवाओं के न्यायसंगत अधिकारों के लिए कांग्रेस अंतिम सांस तक संघर्ष करेगी।”

    ज्येष्ठ कांग्रेस नेता गोपाल तिवारी भी सत्याग्रह स्थल पर पहुंचे और युवाओं से संवाद किया। आंदोलन के अंत में कांग्रेस पार्टी ने राज्य सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया। यदि इस अवधि में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो संभाजीनगर स्थित WALMI मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू किया जाएगा। इस बीच, संबंधित विभागीय मंत्री ने अगले सप्ताह वार्ता का आश्वासन दिया है।

  • ठाणे मनोरोग अस्पताल की महिलाओं ने बनाई 1200 राखियाँ, 500 भेजी गईं देश के जवानों को

    ठाणे मनोरोग अस्पताल की महिलाओं ने बनाई 1200 राखियाँ, 500 भेजी गईं देश के जवानों को

    ठाणे, 31 जुलाई 2025 — रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर ठाणे मनोरोग अस्पताल की महिला मरीजों ने अपने जज़्बे और सृजनशीलता से एक अनोखा संदेश दिया है। अस्पताल में इलाजरत 50 से अधिक महिला मरीजों ने मिलकर 1200 सुंदर राखियाँ तैयार की हैं, जिनमें से 500 राखियाँ भारत की सीमाओं पर तैनात वीर जवानों को प्रेम और सम्मान स्वरूप भेजी गई हैं।

    कला, आत्मसम्मान और पुनर्वास का संगम

    इस पहल का नेतृत्व अस्पताल के व्यावसायिक चिकित्सा विभाग ने चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नेताजी मुलिक के मार्गदर्शन में किया। जुलाई महीने से शुरू हुई इस गतिविधि में महिला मरीजों को राखी निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें रंग-बिरंगी डोरियाँ, मोती, कपड़ा और अन्य सजावटी सामग्री का उपयोग कर बेहद आकर्षक राखियाँ तैयार की गईं।

    इस रचनात्मक प्रक्रिया में डॉ. ममता अलसपुरकर, डॉ. हेमांगिनी देशपांडे, डॉ. अश्लेषा कोली, डॉ. प्राजक्ता मोरे और डॉ. जानवी केरजरकर का भी विशेष योगदान रहा।

    🇮🇳 सैनिकों को भेजी गई राखियाँ

    500 राखियाँ भारतीय सैनिकों को भेजी गई हैं — जो उन महिला मरीजों की ओर से एक भावनात्मक उपहार हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य की चुनौती से जूझ रही हैं लेकिन फिर भी देश के रक्षकों के प्रति प्रेम और कृतज्ञता प्रकट करने से पीछे नहीं हटीं।

    🧵 अस्पताल में भी मनाया जाएगा रक्षाबंधन

    इन राखियों का उपयोग अस्पताल में आयोजित रक्षाबंधन समारोह में भी किया जाएगा, जहाँ महिला मरीज पुरुष मरीजों को राखी बांधकर त्योहार की खुशियाँ साझा करेंगी। इसके अतिरिक्त, कुछ राखियाँ बिक्री के लिए भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे मरीजों को आत्मनिर्भरता और आर्थिक संबल का भी अनुभव हो।

    “यह केवल राखी नहीं, पुनर्वास की डोरी है” – डॉ. नेताजी मुलिक

    डॉ. नेताजी मुलिक ने कहा,

    “इन राखियों में केवल कला नहीं, आत्म-सम्मान और पुनर्वास की भावना भी जुड़ी है। सैनिकों के लिए भेजी गई राखियाँ मरीजों की ओर से प्रेम और गर्व का प्रतीक हैं।”

    समाज में एक सकारात्मक संदेश

    यह पहल मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज में सकारात्मक जागरूकता फैलाने का एक प्रेरक प्रयास है। यह साबित करता है कि सही मार्गदर्शन और सहयोग से मनोरोगी मरीज भी समाज में सार्थक योगदान दे सकते हैं।

  • RanRagini Theam: रणरागिनी थीम पर ठाणे में 2 अगस्त को होगी ‘मंगलागौर 2025’ प्रतियोगिता

    RanRagini Theam: रणरागिनी थीम पर ठाणे में 2 अगस्त को होगी ‘मंगलागौर 2025’ प्रतियोगिता

    मुंबई। श्रावण मास के उपलक्ष्य में ठाणे में 2 अगस्त को “मंगलागौर 2025 प्रतियोगिता” का आयोजन होगा। ‘रणरागिनी’ थीम पर आधारित यह आयोजन महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक कला को समर्पित है।

    कार्यक्रम का विवरण:

    📅 तारीख: शनिवार, 2 अगस्त 2025
    🕔 समय: शाम 5 बजे
    📍 स्थान: डॉ. काशीनाथ घाणेकर नाट्यगृह, ठाणे
    🎭 आयोजनकर्ता: विहंग चैरिटेबल ट्रस्ट एवं परिषा प्रताप सरनाईक


    🎭 थीम: “रणरागिनी” – महिला वीरता का उत्सव

    प्रतियोगिता की खास बात यह है कि इसमें हिस्सा लेने वाली महिला टीमें ऐतिहासिक महिला योद्धाओं की गाथाओं को मंगलागौर की पारंपरिक शैली में प्रस्तुत करेंगी। यह न केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति है, बल्कि महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण भी।


    🎁 विशेष आकर्षण:

    • पारंपरिक और आधुनिक नृत्य/नाट्य प्रस्तुति
    • महिला प्रतिभागियों के लिए लकी ड्रा
    • दर्शकों के लिए उपहार और आकर्षक प्रस्तुतियाँ

  • TMC: गणेशोत्सव आरास प्रतियोगिता के लिए किया आवाहन,शाडू मिट्टी से बनी गणेश मूर्तियों को मिलेंगे पुरस्कार; ठाणे मनपा की पहल

    TMC: गणेशोत्सव आरास प्रतियोगिता के लिए किया आवाहन,शाडू मिट्टी से बनी गणेश मूर्तियों को मिलेंगे पुरस्कार; ठाणे मनपा की पहल

    ठाणे। ठाणे महानगरपालिका ने हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों के लिए आरास प्रतियोगिता आयोजित करने का निर्णय लिया है। मनपा आयुक्त सौरभ राव ने गणेश मंडलों से इस प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भाग लेने की अपील की है।

    मनपा द्वारा इस प्रतियोगिता में तीन श्रेणियां रखी गई हैं – रूपांकन (सजावट), स्वच्छता और मूर्तिकार। आरास श्रेणी के विजेताओं को प्रथम पुरस्कार के रूप में ₹25,000, द्वितीय को ₹20,000, तृतीय को ₹15,000 और सांत्वना पुरस्कार के रूप में ₹10,000 तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। वहीं मूर्तिकार और स्वच्छता श्रेणियों के विजेताओं को ₹10,000, ₹7,000 और ₹5,000 के नकद पुरस्कार के साथ पदक और प्रशंसा पत्र दिया जाएगा।

    इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए इच्छुक मंडलों को मनपा के सूचना जनसंपर्क विभाग, पचपाखड़ी स्थित मुख्यालय से आवेदन पत्र लेना होगा। आवेदन शुक्रवार, 1 अगस्त 2025 से सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे और दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक वितरित किए जाएंगे। आवेदन की अंतिम तिथि गुरुवार, 14 अगस्त 2025 तय की गई है।

    मनपा ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा के बाद प्राप्त आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी मंडलों को मनपा द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।

  • भिवंडी-वाडा रोड पर गड्ढे ने ली युवक की जान, शव के साथ ग्रामीणों ने किया रास्ता रोको आंदोलन

    भिवंडी-वाडा रोड पर गड्ढे ने ली युवक की जान, शव के साथ ग्रामीणों ने किया रास्ता रोको आंदोलन

    भिवंडी: वाडा रोड पर गड्ढों की मार से इस मानसून में पहली जान चली गई। मडक्याचा पाड़ा निवासी 18 वर्षीय यश राजेश मोरे की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। घटना के बाद मृत युवक का शव जैसे ही गांव लाया गया, गुस्साए ग्रामीणों ने एम्बुलेंस को बीच सड़क पर रोक दिया और ठेकेदारों व अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग करते हुए रास्ता रोको आंदोलन शुरू कर दिया।

    जानकारी के अनुसार, यश मोरे और उसका मित्र यश बालाजी घुटे सुबह व्यायाम के लिए कवाड जा रहे थे। रास्ते में गड्ढे में बाइक फिसलने से दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ठाणे के निजी अस्पताल में दस दिन इलाज के बाद यश मोरे की बुधवार को मौत हो गई।

    शव गांव लाते ही क्षेत्र में तनाव फैल गया। परिजनों और ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार से इनकार करते हुए सड़क जाम कर दी। शाम के व्यस्त समय में करीब दो घंटे तक भिवंडी-वाडा मार्ग पर यातायात ठप रहा।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपाधीक्षक राहुल झालटे, वरिष्ठ निरीक्षक हर्षवर्धन बारवे, और स्थानीय अपराध शाखा के सुरेश मनोरे मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से संवाद किया। आश्वासन मिलने के बाद कि संबंधित ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी अधिकारी के खिलाफ अपराध दर्ज किया जाएगा, आंदोलन समाप्त हुआ।

    वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बारवे ने बताया कि मृतक के पिता का पूरक बयान दर्ज कर मामले में लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों को शामिल किया गया है। रास्ता रोको के चलते भिवंडी-वाडा मार्ग पर दोनों ओर पांच किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया था, जिसे बाद में पुलिस ने सामान्य किया।

    यह घटना एक बार फिर प्रशासन की लापरवाही और जर्जर सड़कों की कीमत आम नागरिकों को जान देकर चुकाने की त्रासदी को उजागर करती है।

  • Bhiwandi Municipal Corporation’s Shocking Move Amid Severe Staff Shortage: भिवंडी मनपा का हैरतअंगेज कारनामा, कर्मचारियों की भारी कमी, फिर भी एक पद पर दो-दो अधिकारी

    भिवंडी। एक ओर जहां भिवंडी मनपा में 950 से अधिक पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं और योग्य कर्मचारियों की भारी कमी है, वहीं दूसरी ओर मनपा प्रशासन ने कार्यों में “पारदर्शिता” लाने के नाम पर एक अजीब निर्णय लिया है—अब एक पद पर दो-दो अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है। इस फैसले को लेकर शहर में हैरानी और नाराज़गी दोनों देखने को मिल रही है।

    मनपा में लंबे समय से वर्ग तीन और चार के पद रिक्त हैं। भर्ती न होने की वजह से सफाई कर्मचारी, क्लर्क और अन्य स्टाफ को प्रभारी अधिकारी बनाकर काम चलाया जा रहा है। परिणामस्वरूप विकास कार्य ठप पड़े हैं और प्रशासनिक कार्यों में सुस्ती, अव्यवस्था और भ्रष्टाचार खुलकर सामने आ रहा है। कई महत्वपूर्ण पदों पर स्थायी नियुक्तियां न होने से प्रभाग समितियों से लेकर विभागों तक “प्रभारियों” के भरोसे ही व्यवस्था चल रही है।

    सबसे हैरानी की बात यह है कि इन कमियों के बावजूद मनपा प्रशासन ने अब “डबल ड्यूटी” का नया प्रयोग शुरू किया है। आदेश के अनुसार अब हर प्रभाग समिति में एक-एक पद पर दो-दो अधिकारी तैनात किए गए हैं। जैसे कर निरीक्षक के साथ अब सहायक कर निरीक्षक भी काम करेगा। बीट निरीक्षक के साथ जोड़ीदार बीट निरीक्षक भी नियुक्त होगा। यह आदेश मनपा उपायुक्त बिक्रम दराड़े द्वारा जारी किया गया है।

    उदाहरण के तौर पर, प्रभाग क्रमांक 1 में रविंद्र जाधव के साथ नितीन जामेकर को बीट निरीक्षक बनाया गया है। शिक्षा विभाग के अभिजीत जाधव को कर निरीक्षक का सहायक बना दिया गया है। इतना ही नहीं, सफाई कर्मी को निरीक्षक और प्रभारी क्लर्क को क्षेत्रीय निरीक्षक जैसी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। यह निर्णय प्रशासनिक अनुभव और योग्यता को दरकिनार कर मनमानी की ओर इशारा करता है।

    मनपा के वरिष्ठ अधिकारी इसे “प्रशिक्षण का अवसर” बताकर सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे नए कर्मचारियों को काम सीखने का मौका मिलेगा। लेकिन स्थानीय नागरिक और मनपा कर्मचारियों के संगठनों का कहना है कि यह व्यवस्था न केवल प्रशासनिक अनिश्चितता को बढ़ा रही है, बल्कि मनपा को ‘प्रयोगशाला’ बनाकर जनता के साथ मज़ाक किया जा रहा है।

    सवाल यह उठता है कि क्या पारदर्शिता के नाम पर मनपा प्रशासन खुद को ‘स्मार्ट’ साबित करने में लगा है या फिर यह एक और प्रशासनिक भ्रमजाल है जिसमें जिम्मेदारी की कोई स्पष्टता नहीं है? जब एक सफाई कर्मचारी को निरीक्षक बना दिया जाए और क्लर्क को कर विभाग का सहायक निरीक्षक, तो फिर विकास की राह पर भिवंडी कैसे आगे बढ़ेगी?