Category: Business

The real test is not whether you avoid this failure, because you won’t. It’s whether you let it harden or shame you into inaction, or whether you learn from it; whether you choose to persevere.

  • Force Motors की नई पेशकश: Traveller N रेंज में मिलेंगे एडवांस फीचर्स

    Force Motors की नई पेशकश: Traveller N रेंज में मिलेंगे एडवांस फीचर्स

    मुंबई: Force Motors ने अपनी नई Force Traveller N रेंज को लॉन्च कर दिया है। यह नई सीरीज एंबुलेंस, स्कूल बस और डिलीवरी वैन जैसे विभिन्न कमर्शियल उपयोगों के लिए तैयार की गई है। कंपनी का दावा है कि यह मॉडल पहले से ज्यादा आधुनिक, आरामदायक और कम मेंटेनेंस लागत वाला है।फोर्स मोटर्स लिमिटेड ने अपनी नई फोर्स ट्रैवेलर एन रेंज लॉन्च की है, जिसे एंबुलेंस, स्कूल बस और डिलीवरी वैन जैसे उपयोगों के लिए तैयार किया गया है।

    नई रेंज में कार जैसा ड्राइवर केबिन, डिजिटल डिस्प्ले और 9-इंच टचस्क्रीन जैसी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। इसके साथ ही बेहतर सीटिंग, कम शोर और कंपन, तथा नया एयर कंडीशनिंग सिस्टम सफर को अधिक आरामदायक बनाता है।

    कंपनी के एमडी प्रसन्न फिरोदिया के अनुसार, इस मॉडल को ग्राहकों, ड्राइवरों और फ्लीट ऑपरेटरों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है, ताकि बेहतर परफॉर्मेंस और कम मेंटेनेंस लागत सुनिश्चित हो सके। कंपनी अब धीरे-धीरे पुराने ट्रैवेलर मॉडल्स की जगह इसी नई ‘एन’ रेंज को लाने की योजना बना रही है।

    कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रसन्न फिरोदिया ने कहा:

    “नई Traveller N रेंज को ग्राहकों, ड्राइवरों और फ्लीट ऑपरेटर्स के फीडबैक के आधार पर डिजाइन किया गया है। हमारा लक्ष्य बेहतर परफॉर्मेंस, ज्यादा आराम और कम मेंटेनेंस लागत देना है, ताकि यह हर सेगमेंट के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बने।”

    नई Force Traveller N रेंज में ड्राइवर और यात्रियों दोनों के अनुभव को बेहतर बनाने पर खास ध्यान दिया गया है। इसमें कार जैसा ड्राइवर केबिन दिया गया है, जो लंबे समय तक ड्राइविंग को अधिक सुविधाजनक बनाता है। इसके अलावा, वाहन में डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 9-इंच टचस्क्रीन जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल की गई हैं, जिससे ड्राइविंग और ऑपरेशन दोनों आसान हो जाते हैं।

  • India-Vietnam Partnership: भारत और वियतनाम के बीच व्यापक साझेदारी, रणनीतिक सहयोग हुआ गहरा!

    India-Vietnam Partnership: भारत और वियतनाम के बीच व्यापक साझेदारी, रणनीतिक सहयोग हुआ गहरा!

    India-Vietnam Partnership: भारत और वियतनाम ने संबंधों को प्रगाढ बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए द्विपक्षीय संबंधों को “एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेन्सिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” तक उन्नत करने पर सहमति जताई है। भारत यात्रा पर आये वियतनाम के राष्ट्रपति तो लम ने बुधवार को यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। इससे पहले उनका राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया।

    वार्ता के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में दोनों पक्षों ने आपसी विश्वास और साझा दृष्टिकोण को आधार मानते हुए संबंधों को “एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेन्सिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” तक उन्नत करने पर सहमति जताई। दोनों ने व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ाने पर जोर देते हुए वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। कृषि क्षेत्र में भारत से अंगूर और वियतनाम से ड्यूरियन के निर्यात-आयात को भी मंजूरी दी गई।

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    रक्षा और सुरक्षा सहयोग को संबंधों का प्रमुख स्तंभ बताते हुए दोनों देशों ने संयुक्त अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, रक्षा उत्पादन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया। डिजिटल भुगतान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे उभरते क्षेत्रों में साझेदारी को भी मजबूत किया जाएगा।

    स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने हिन्द प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने पर सहमति व्यक्त की। राष्ट्रपति तो लम ने प्रधानमंत्री मोदी को वियतनाम आने का निमंत्रण दिया, जिससे दोनों देशों के बीच भविष्य में और सहयोग के और मजबूत होने की संभावना है।

  • IPO Watch: इस हफ्ते SME और REIT इश्यू पर निवेशकों की नजर

    IPO Watch: इस हफ्ते SME और REIT इश्यू पर निवेशकों की नजर

    IPO Watch: इस हफ्ते SME और REIT इश्यू पर निवेशकों की नजर: अगर आप किसी बड़े IPO का इंतजार कर रहे थे, तो इस हफ्ते थोड़ा निराशा हाथ लग सकती है। हालांकि, बाजार पूरी तरह शांत नहीं है। SME सेगमेंट और रियल एस्टेट में कुछ नए इश्यू निवेशकों के लिए अवसर लेकर आ रहे हैं।

    इस हफ्ते Value 360 Communications, Recod Studios और Bagmane Prime Office REIT चर्चा में हैं।


    1. Value 360 Communications IPO
    • ओपन: 4 मई – 6 मई
    • प्राइस बैंड: ₹95 – ₹98
    • मिनिमम आवेदन: 2,400 शेयर

    यह कंपनी मार्केटिंग और पीआर सेक्टर में सक्रिय है और IPO से मिले फंड का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और नए प्लेटफॉर्म्स (जैसे इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग) में करेगी।


    2. Recod Studios IPO
    • ओपन: 5 मई – 7 मई
    • प्राइस बैंड: ₹150 – ₹158
    • मिनिमम आवेदन: 1,600 शेयर

    ब्यूटी और कॉस्मेटिक्स ब्रांड Recod Studios ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों चैनल्स के जरिए अपने प्रोडक्ट्स बेचती है। IPO का पैसा मुख्य रूप से ब्रांडिंग और मार्केटिंग में लगाया जाएगा।


    3. Bagmane Prime Office REIT
    • साइज: ₹3,405 करोड़
    • ओपन: 5 मई – 7 मई
    • प्राइस बैंड: ₹95 – ₹100

    यह इस हफ्ते का सबसे बड़ा इश्यू है। REIT (Real Estate Investment Trust) एक ऐसा निवेश विकल्प है, जो कमर्शियल प्रॉपर्टी (जैसे ऑफिस स्पेस) में निवेश करता है। Bagmane के पास बेंगलुरु में 2 करोड़ स्क्वायर फीट से ज्यादा प्रीमियम ऑफिस स्पेस है।


    REIT क्या होता है?

    REIT एक तरह का म्यूचुअल फंड जैसा निवेश है, लेकिन यह शेयरों के बजाय रियल एस्टेट में पैसा लगाता है और निवेशकों को किराए/इनकम का हिस्सा देता है।


    निवेश से पहले ध्यान रखें
    • SME IPO में जोखिम ज्यादा होता है
    • कंपनी फंड का उपयोग कैसे करेगी, यह जरूर देखें
    • REIT का रिटर्न मॉडल अलग होता है
    • केवल भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से ही निवेश करें

    साथ ही, Parle Products के संभावित IPO को लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

  • Nestle India: ग्राहकों को राहत! Maggi समेत प्रोडक्ट्स के दाम नहीं बढ़ाएगी Nestlé India

    Nestle India: ग्राहकों को राहत! Maggi समेत प्रोडक्ट्स के दाम नहीं बढ़ाएगी Nestlé India

    भारत: FMCG सेक्टर की दिग्गज कंपनी Nestlé India ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर Manish Tiwary ने संकेत दिया है कि अब फोकस कीमत बढ़ाने के बजाय बिक्री (Volume Growth) बढ़ाने पर रहेगा।(Nestle India)

    इसका सीधा मतलब है कि Maggi जैसे लोकप्रिय प्रोडक्ट्स के दाम फिलहाल बढ़ाने की योजना नहीं है, बल्कि कंपनी चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग उसके प्रोडक्ट्स खरीदें। हाल ही में कंपनी ने मजबूत वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। मुनाफा 26% बढ़कर 1,114 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि रेवेन्यू 22.6% की वृद्धि के साथ 6,748 करोड़ रुपये रहा।

    क्यों बदली रणनीति?
    कंपनी के मुताबिक, बाजार में मांग थोड़ी धीमी हुई है। ऐसे में अगर कीमतें बढ़ाई गईं तो बिक्री पर और असर पड़ सकता है। इसलिए कंपनी उन कैटेगरी पर फोकस कर रही है, जहां अभी भी ग्राहकों तक पहुंच कम है। लागत बढ़ने के बावजूद कंपनी ‘कॉस्ट एफिशिएंसी’ पर काम कर रही है, ताकि ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

    कच्चे माल की चुनौती
    कोको की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव
    दूध, गेहूं और पाम ऑयल महंगे
    लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग लागत में वृद्धि

    इसके बावजूद कंपनी ने बड़े स्तर पर कीमतें नहीं बढ़ाने का फैसला किया है।

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    कौन चला रहा ग्रोथ इंजन?
    KitKat और Maggi जैसे पारंपरिक ब्रांड्स के साथ-साथ नए सेगमेंट भी तेजी से बढ़ रहे हैं:
    Purina (Pet Care)
    Nespresso
    Nestlé Professional (B2B)

    इन नए बिजनेस को कंपनी आने वाले 5–10 सालों के लिए “ग्रोथ ड्राइवर” मान रही है।

    शेयर बाजार में प्रदर्शन
    रेवेन्यू: ₹6,748 करोड़ (+22.6%)
    मुनाफा: ₹1,114 करोड़ (+26%)
    मार्जिन में 110 बेसिस पॉइंट की बढ़त
    पिछले 6 महीनों में ~15% रिटर्न

    कंपनी को उम्मीद है कि ग्रामीण बाजार में बढ़ती मांग और ब्रांड निवेश के चलते आगे भी बेहतर प्रदर्शन जारी रहेगा।

  • Nagad Pe: दूधवालों और अख़बार विक्रेताओं के लिए ‘नगदपे’ ऐप लॉन्च, डिजिटल भुगतान को मिलेगा बढ़ावा

    Nagad Pe: दूधवालों और अख़बार विक्रेताओं के लिए ‘नगदपे’ ऐप लॉन्च, डिजिटल भुगतान को मिलेगा बढ़ावा

    मुंबई। असंगठित क्षेत्र के कामगारों को डिजिटल वित्तीय सेवाओं से जोड़ने के उद्देश्य से फिनटेक प्लेटफॉर्म NagadPe का रविवार को मुंबई में शुभारंभ किया गया। यह ऐप खासतौर पर दूध विक्रेताओं, अख़बार वितरकों और छोटे दैनिक कमाई करने वाले कामगारों के लिए तैयार किया गया है।इस ऐप के जरिए उपयोगकर्ता डिजिटल चालान बना सकते हैं, समय पर भुगतान प्राप्त कर सकते हैं और अपनी एक विश्वसनीय वित्तीय पहचान विकसित कर सकते हैं। इससे उन्हें भविष्य में ऋण और अन्य औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकेगी।

    भारत में आज भी लाखों छोटे कामगार कागज़ी हिसाब-किताब और महीने के अंत में नकद भुगतान पर निर्भर हैं, जिससे देरी और लेनदेन संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं। NagadPe इस पारंपरिक व्यवस्था को बदलने का प्रयास करता है, जहां भुगतान संग्रह, ग्राहक प्रबंधन और बहीखाते की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।

    कंपनी के सह-संस्थापक गजेंद्र गर्ग ने कहा कि “देश की रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था इन छोटे कामगारों पर टिकी है, लेकिन उनकी वित्तीय व्यवस्था अब भी पुरानी है। हमारा लक्ष्य उन्हें सरल और पारदर्शी डिजिटल समाधान देकर सशक्त बनाना है।”इस प्लेटफॉर्म की खासियतों में आसान ऑनबोर्डिंग, तकनीकी ज्ञान की जरूरत न होना और जल्द ही स्थानीय भाषाओं का समर्थन शामिल है। मुंबई से शुरू हुआ यह ऐप जल्द ही महाराष्ट्र और देश के अन्य शहरों में विस्तार करेगा।

    NagadPe फिलहाल एंड्रॉइड पर उपलब्ध है और दूध वितरण, अख़बार सप्लाई, लॉन्ड्री, छोटे दुकानदारों सहित नियमित नकद लेनदेन करने वाले कामगारों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

  • Digital Reforms in India: भारत में डिजिटल सुधारों से MSME ने व्यापारिक माहौल को सुधारने के लिए उठाए गए कदम!

    Digital Reforms in India: भारत में डिजिटल सुधारों से MSME ने व्यापारिक माहौल को सुधारने के लिए उठाए गए कदम!

    नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के एक हालिया वर्किंग पेपर ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सार्वजनिक प्रशासन को डिजिटल बनाने की पहलों ने छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को नई ताकत दी है और उनकी उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की है।(Digital Reforms in India)

    डिजिटलीकरण ने उद्यमों की उत्पादकता को कैसे प्रभावित किया?
    राष्ट्रीय सर्वेक्षण डेटा (वर्ष 2010 से 2015 के बीच) पर आधारित इस वर्किंग पेपर के अनुसार, जिन राज्यों ने सार्वजनिक प्रशासन के डिजिटलीकरण में तेजी दिखाई है, वहां सूक्ष्म उद्यमों की उत्पादकता में काफी सुधार हुआ है। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि डिजिटल सुधारों को अधिक मात्रा में अपनाने वाले राज्यों ने न केवल उच्च उत्पादकता वृद्धि का अनुभव किया है, बल्कि वहां काम कर रही कंपनियों के बीच उत्पादकता का अंतर भी काफी कम हुआ है।

    व्यापारिक माहौल को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए थे?
    यह उत्पादकता वृद्धि कोई अचानक हुआ बदलाव नहीं है, बल्कि यह भारत में व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाने के व्यापक प्रयासों का परिणाम है। साल 2014 में विभिन्न राज्यों ने एक ’98-प्वाइंट एक्शन प्लान’ पर सहमति व्यक्त की थी। इस कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी नियमों को सरल बनाना और डिजिटल प्रणालियों का तेजी से विस्तार करना था, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं।

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    डिजिटल सिस्टम से छोटे कारोबारियों को क्या सीधा लाभ हुआ?
    आइएमएफ की रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटलीकरण ने उद्यमियों पर से प्रशासनिक बोझ को काफी हद तक कम कर दिया है। इसका सबसे अधिक और सीधा लाभ छोटे व्यवसायों को मिला है, जिनके पास बड़े कॉरपोरेट्स की तरह संसाधन नहीं होते। डिजिटल प्रणालियों के लागू होने से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आई है और लालफीताशाही या देरी में भारी कमी आई है। रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि व्यापारिक माहौल में सुधारों का दायरा जितना बड़ा होगा, कुल कारक उत्पादकता में उतना ही अधिक लाभ देखने को मिलेगा।

    भारतीय अर्थव्यवस्था में इन छोटे उद्यमों की क्या अहमियत है?
    सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। देश के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में इनकी बेहद महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। आंकड़े बताते हैं कि देश के कुल विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र में इस सेक्टर का अकेले 35 प्रतिशत योगदान है। ऐसे में छोटे उद्यमों का डिजिटल रूप से सशक्त होना और उनकी उत्पादकता बढ़ना, पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई गति प्रदान करने वाला कदम है।

  • FDI नियम बदले: इंश्योरेंस 100%, LIC 20%—क्या बदलेगा?

    FDI नियम बदले: इंश्योरेंस 100%, LIC 20%—क्या बदलेगा?

    नई दिल्ली: भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों में जरूरी बदलाव कर दिए हैं। 2 मई 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, विदेशी मुद्रा प्रबंध नियम, 2026 लागू हो गए हैं। भारत सरकार ने देश में विदेशी निवेश को नियंत्रित करने वाले नियमों में संशोधन किया है। इस नए नियम को ‘विदेशी मुद्रा प्रबंध (गैर-ऋण लिखत) (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026’ का नाम दिया गया है, जो 2 मई 2026 को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी हो गया है। इसका मुख्य उद्देश्य बीमा क्षेत्र की विभिन्न संस्थाओं में विदेशी निवेश की सीमा और शर्तों को स्पष्ट करना है।(FDI )

    अब बीमा कंपनियों और LIC में कितना विदेशी निवेश हो सकेगा?

    बीमा कंपनियां
    अब कोई भी विदेशी निवेशक (पोर्टफोलियो निवेशकों सहित) किसी भारतीय बीमा कंपनी की चुकता इक्विटी पूंजी के 100% तक निवेश कर सकता है। यह 100% निवेश स्वचालित मार्ग के तहत होगा।

    भारतीय जीवन बीमा निगम
    देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC में स्वचालित मार्ग से 20% तक विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है।

    बीमा मध्यस्थ
    बीमा दलालों, पुनर्बीमा दलालों, बीमा सलाहकारों, कॉर्पोरेट एजेंटों, तीसरे पक्ष के प्रशासकों (TPA) और सर्वेक्षकों सहित अन्य बीमा मध्यस्थों में भी स्वचालित मार्ग के जरिए 100% FDI को मंजूरी दी गई है।

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    विदेशी निवेश के लिए क्या-क्या प्रमुख शर्तें रखी गई हैं?

    IRDAI की मंजूरी
    भारतीय बीमा कंपनियों में 100% तक का विदेशी निवेश स्वचालित मार्ग पर तभी अनुमत होगा, जब यह भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा सत्यापन और अनुमोदन के अधीन हो।

    निवासी भारतीय का नेतृत्व
    ऐसी किसी भी भारतीय बीमा कंपनी, जिसमें विदेशी निवेश है, के निदेशक मंडल के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक (MD) या मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) में से कम से कम एक व्यक्ति निवासी भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। FDI प्राप्त करने वाली कंपनियों को बीमा अधिनियम, 1938 के प्रावधानों का पालन करना होगा और बीमा गतिविधियों के लिए IRDAI से आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करना होगा।

    बीमा मध्यस्थों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
    विदेशी निवेशकों की बहुसंख्यक हिस्सेदारी वाले बीमा मध्यस्थों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। बहुसंख्यक विदेशी निवेश वाले बीमा मध्यस्थ को कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के तहत एक सीमित कंपनी के रूप में निगमित होना होगा। इन संस्थाओं के निदेशक मंडल के अध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रधान अधिकारी या प्रबंध निदेशक में से कम से कम एक का निवासी भारतीय नागरिक होना चाहिए।

    इन्हें अपने साथ भारत में नवीनतम तकनीकी, प्रबंधकीय और अन्य कौशल भी लाने होंगे। यदि कोई बैंक, जिसका प्राथमिक व्यवसाय बीमा क्षेत्र के बाहर है, बीमा मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है, तो उसके कुल राजस्व का 50% से अधिक हिस्सा उसके प्राथमिक (यानी, गैर-बीमा) व्यवसाय से आना चाहिए।

  • Force Motors Financial Performance: फोर्स मोटर्स ने शानदार वार्षिक वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया!

    Force Motors Financial Performance: फोर्स मोटर्स ने शानदार वार्षिक वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया!

    मुंबई: भारत की सबसे बड़ी वैन निर्माता और प्रमुख ऑटोमोटिव कंपनी, फोर्स मोटर्स लिमिटेड ने आज 31 मार्च, 2026 को समाप्त चौथी तिमाही और वित्त वर्ष 2025-26 के अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा की। कंपनी ने अब तक का अपना अभूतपूर्व और सबसे शानदार वार्षिक वित्तीय प्रदर्शन किया है, जिसका मुख्य कारण हर तिमाही में निरंतर बेहतर कार्य-प्रदर्शन, बेहतर ऑपरेटिंग लीवरेज और अपने सभी उत्पाद सेगमेंट में व्यापक विकास रहा है। यह वर्ष फोर्स मोटर्स की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो कंपनी के केंद्रित, लचीले और अनुशासित व्यापार संचालन को दर्शाता है।(Force Motors Financial Performance)

    फोर्स मोटर्स का वार्षिक राजस्व 13% की वृद्धि के साथ 9,167 करोड़ रुपये और वार्षिक EBITDA 39% की बढ़त के साथ 1,593 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। चौथी तिमाही (Q4) में राजस्व 2,584 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही से 9% अधिक है। कर पूर्व लाभ के मोर्चे पर, कंपनी ने पूरे वर्ष के लिए 55% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज करते हुए 1,304 करोड़ रुपये का आंकड़ा छुआ, जबकि Q4 में यह 373 करोड़ रुपये रहा।

    हालाँकि Q4 का कर पश्चात लाभ 274 करोड़ रुपये दर्ज किया गया जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में सालाना आधार पर -36% दिखा रहा है, लेकिन पूरे वित्तीय वर्ष का कर पश्चात लाभ 51% की शानदार वृद्धि के साथ 1,211 करोड़ रुपये पर बंद हुआ। कंपनी ने पिछले चार वर्षों में बिक्री पर 30% का सुदृढ़ सीएजीआर बनाए रखा है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी पूरी तरह से ऋण मुक्त बनी हुई है, जो इसकी मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।

    वित्त वर्ष 2025-26 के परिचालन आकर्षण:
    वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने सभी प्रमुख क्षेत्रों में असाधारण परिचालन सफलता दर्ज की है, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में कुल थोक बिक्री में 20% की मजबूत वृद्धि प्रमुख रही। वैन सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत रखते हुए ट्रैवेलर प्लेटफॉर्म ने 70% से अधिक की बाजार हिस्सेदारी के साथ अपना दबदबा बरकरार रखा, जबकि प्रीमियम मोबिलिटी सेगमेंट में ‘अर्बानिया’ ने 100% से अधिक की शानदार विकास दर हासिल की।

    कंपनी ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों में भी अपनी पहुंच का विस्तार किया, जहां ट्रैक्स प्लेटफॉर्म को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप वॉल्यूम में 70% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त, संस्थागत और रक्षा क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए कंपनी ने भारतीय सशस्त्र बलों के लिए विशेष अनुप्रयोगों से जुड़े महत्वपूर्ण ऑर्डरों को सफलतापूर्वक पूरा किया है, जो कंपनी की बहुमुखी क्षमता और भविष्य की विकास संभावनाओं को दर्शाता है।

    कंपनी के असाधारण प्रदर्शन के बारे में फोर्स मोटर्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक प्रसन फिरोदिया ने कहा, “हम अपनी शुरुआत से ही सेगमेंट क्रिएटर रहे हैं, और अब हम अर्बानिया की मजबूत उपस्थिति के साथ प्रीमियम शेयर्ड मोबिलिटी सेगमेंट में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, जबकि ट्रैवलर और ट्रैक्स जैसे प्लेटफॉर्म बाजारों में निरंतर पैमाना और पहुंच प्रदान कर रहे हैं। साथ ही, संस्थागत और रक्षा ग्राहकों के साथ हमारा जुड़ाव हमारी इंजीनियरिंग क्षमताओं की गहराई और चुनौतीपूर्ण एवं निरंतर बदलते वातावरण में काम करने की हमारी क्षमता को दर्शाता है।

    वित्त वर्ष 2025-26 हमारी यात्रा का एक अभूतपूर्व वर्ष है, जहां सभी तिमाहियों में निरंतर बेहतर कार्य-प्रदर्शन ने अब तक के सबसे मजबूत वित्तीय परिणामों में तब्दील होने में मदद की है। यह उन सेगमेंट पर स्पष्ट फोकस की वजह से संभव हुआ है जहां हमें लगता है कि हम नेतृत्व कर सकते हैं और नए सेगमेंट भी बना सकते हैं, जिसे बेहतर ऑपरेटिंग लीवरेज और अधिक संतुलित उत्पाद मिश्रण का समर्थन मिला है।

    भविष्‍य में भी हमारा ध्यान लगातार मेहनत और अनुशासन के साथ बिजनेस को आगे बढ़ाने पर रहेगा। ग्राहकों की जरूरतों के साथ गहराई से जुड़े रहना और अपने प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी और नवाचार क्षमताओं को लगातार मजबूत करते रहना ही आगे की ग्रोथ के अगले चरण का मुख्य आधार होगा।”

  • Kia India Collaborates with HYBE India: किआ इंडिया का हाइब इंडिया के साथ सहयोग, ग्लोबल म्यूजिक ऑडिशन के लिए आए साथ!

    Kia India Collaborates with HYBE India: किआ इंडिया का हाइब इंडिया के साथ सहयोग, ग्लोबल म्यूजिक ऑडिशन के लिए आए साथ!

    मुंबई: भारत की अग्रणी मास-प्रीमियम ऑटोमोबाइल कंपनियों में से एक, किआ इंडिया ने हाइब इंडिया के साथ अपनी साझेदारी की घोषणा की है। किआ इस पहले बड़े स्तर के ऑडिशन के लिए एक्सक्लूसिव ऑटोमोटिव पार्टनर होगी, जिसका लक्ष्य भारत के अगले ‘ग्लोबल गर्ल ग्रुप’ को खोजना और उसे लॉन्च करना है। यह सहयोग वैश्विक मनोरंजन और स्थानीय सांस्कृतिक जुड़ाव को एक साथ लाता है, जिससे एक ऐसा मंच तैयार होगा जो युवा भारतीय प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर से जोड़ेगा।(Kia India Collaborates with HYBE India)

    किआ इंडिया और हाइब की यह साझेदारी किआ की उस सोच का हिस्सा है जो हमेशा युवाओं और नई संस्कृति से जुड़ी रहती है। एक ऐसे ब्रांड के तौर पर जो नए जमाने के लोगों की पसंद समझता है, यह साथ किआ के उस स्वभाव को दिखाता है जो क्रिएटिविटी, आत्म-अभिव्यक्ति और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देता है। नई प्रतिभाओं को मौका देने वाले इस मंच से जुड़कर, किआ उस पीढ़ी के साथ अपना रिश्ता और मजबूत करना चाहती है जो अपनी अलग पहचान और नए विचारों को सबसे ज्यादा महत्व देती है।

    हाइब की विश्व स्तर पर सफल ‘मल्टी-होम, मल्टी-जोनर’ रणनीति के तहत, हाइब इंडिया अब भारत के लिए आर्टिस्ट डेवलपमेंट अप्रोच को स्थानीय रूप देगा। यह दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल कलाकारों को खोजने, प्रशिक्षित करने और स्थापित करने के लिए जाना जाता है। सांस्कृतिक रूप से प्रभावशाली कलाकारों को आकार देने की विरासत के साथ, कंपनी की नज़र अब भारत पर है, जहां वह बीटीएस और वैश्विक गर्ल ग्रुप कातसेये जैसे कलाकारों के नक्शेकदम पर चलने वाले सितारों की अगली पीढ़ी को खोजने और विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

    इस साझेदारी के बारे में अपनी बात रखते हुए, किआ इंडिया के मार्केटिंग और सेल्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, श्री अतुल सूद ने कहा, “हाइब इंडिया के साथ किआ इंडिया की यह साझेदारी दिखाती है कि हम आज के युवाओं की बदलती सोच, उनकी रचनात्मकता और उनकी महत्वाकांक्षाओं को अच्छी तरह समझते हैं। एक युवा और प्रगतिशील ब्रांड होने के नाते हम नई पीढ़ी की सोच से पूरी तरह जुड़े हुए हैं।

    यह साझेदारी हमारी इसी सोच का स्वाभाविक विस्तार है, जो हमें उस रचनात्मक दुनिया से जोड़ती है जहाँ आत्म-अभिव्यक्ति, पहचान और वैश्विक प्रासंगिकता नई महत्वाकांक्षाओं को आकार दे रही हैं। यह हमारे उपभोक्ताओं की सांस्कृतिक नब्ज़ से जुड़े रहने और एक ऐसा ब्रांड बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है, जो भविष्य के लिए तैयार हो और लोगों के लिए मायने रखे।”

    हाइब इंडिया के बिजनेस डेवलपमेंट हेड, सार्थक अरोड़ा ने कहा , “किआ इंडिया के साथ हमारा यह तालमेल संगीत और मनोरंजन की दुनिया में उभरती हुई महिला प्रतिभाओं को ढूंढने और उन्हें आगे बढ़ाने के एक ही लक्ष्य पर टिका है। आज के युवा जिस तरह वैश्विक नज़रिए, आपसी जुड़ाव और अपनी मजबूत पहचान को महत्व दे रहे हैं, उसे देखते हुए यह साथ हमें एक ऐसा सार्थक मंच तैयार करने में मदद करेगा, जो भारतीय टैलेंट को पूरी दुनिया के सामने लाने में मददगार साबित होगा।”

    इस सहयोग का मुख्य आकर्षण है किआ एंगेजमेंट ज़ोन, जिसे विशेष रूप से 2026 किआ सायरोस के अंदर बनाया गया है और जो इस पहल का केंद्रबिंदु है। कार के भीतर कंटेंट क्रिएशन के एक अनूठे सेटअप के साथ, किआ सायरोस दर्शकों को उच्च-गुणवत्ता वाले और तुरंत शेयर किए जा सकने वाले परफॉर्मेंस वीडियो रिकॉर्ड करने और बनाने की सुविधा देती है। यह इमर्सिव सेटअप वाहन को रचनात्मकता और आत्म-अभिव्यक्ति के स्थान में बदल देता है, जो सायरोस को नवाचार, आकांक्षा और अगली पीढ़ी की मोबिलिटी के प्रतीक के रूप में स्थापित करता है।

    किआ इंडिया प्रमुख शहरों में हाइब इंडिया पॉप-अप पार्क्स के माध्यम से इन अनुभवों को जमीनी स्तर पर और विस्तार देगी, जिससे संगीत, प्रशंसकों और युवा संस्कृति के जीवंत केंद्र बनेंगे। ये गतिविधियाँ गुवाहाटी (2 मई), मुंबई (9 मई), पुणे (16 मई), हैदराबाद (23 मई), बेंगलुरु (30-31 मई) और नई दिल्ली (13-14 जून) में आयोजित की जाएंगी, जिसके बाद ऑन-ग्राउंड ऑडिशन होंगे। प्रत्येक स्थान पर 2026 किआ सायरोस को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि ब्रांड को सांस्कृतिक अनुभव के साथ सहजता से जोड़ते हुए युवा दर्शकों के साथ गहरा जुड़ाव बनाया जा सके।

  • LactaAI Launched: फाइंडबिलिटी साइंसेज ने डेयरी उद्योग के लिए ‘LactaAI’ लॉन्च किया; मुनाफ़े में सालाना बढ़ोतरी का दावा!

    LactaAI Launched: फाइंडबिलिटी साइंसेज ने डेयरी उद्योग के लिए ‘LactaAI’ लॉन्च किया; मुनाफ़े में सालाना बढ़ोतरी का दावा!

    मुंबई: सॉफ्टबैंक समर्थित एंटरप्राइज एआई कंपनी Findability Sciences ने डेयरी और व्हे प्रोसेसिंग प्लांट्स के लिए अपना नया प्लेटफॉर्म LactaAI लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह प्लेटफॉर्म बड़े डेयरी प्लांट्स के मुनाफ़े में सालाना 2.35 करोड़ से 28.2 करोड़ रुपये तक की बढ़ोतरी करने में मदद कर सकता है।

    उत्पादन और ऊर्जा दक्षता में सुधार
    यह प्लेटफॉर्म उत्पादन में 0.5 से 1.5 प्रतिशत तक सुधार, वाष्पीकरण और ड्राइंग प्रक्रियाओं में 5 से 10 प्रतिशत ऊर्जा बचत, और तेज़ निर्णय प्रक्रिया के जरिए लागत कम करने में सहायक होगा।

    क्या बोले CEO?
    कंपनी के संस्थापक और CEO Anand Mahurkar ने कहा कि डेयरी उद्योग को अब सिर्फ डैशबोर्ड नहीं, बल्कि ऐसे इंटेलिजेंस की जरूरत है जो सीधे निर्णय लेने में मदद करे। उनके अनुसार, “उच्च उत्पादन वाले प्लांट में 1% सुधार भी बड़ा आर्थिक असर डालता है।”

    कैसे काम करता है LactaAI?
    LactaAI प्लेटफॉर्म डेयरी प्लांट्स के जटिल डेटा को समझकर तीन अहम सवालों के जवाब देता है—क्या हो रहा है, क्यों हो रहा है और क्या सुधार करना चाहिए।

    प्लेटफॉर्म की दो मुख्य क्षमताएं
    Lacta Insight
    : रियल-टाइम प्रोसेस इनसाइट देता है, जिससे उत्पादन को प्रेडिक्टिव और ऑप्टिमाइज़ किया जा सकता है।

    Lacta BPC: एक कन्वर्सेशनल AI लेयर, जो आसान भाषा में ऑपरेशनल और बिजनेस सवालों के जवाब देता है।

    मौजूदा सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन
    यह प्लेटफॉर्म PLC, SCADA, ERP जैसे मौजूदा सिस्टम्स के साथ आसानी से जुड़ जाता है, जिससे प्लांट को अपने पुराने सिस्टम बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।

    डेयरी सेक्टर के लिए गेम चेंजर
    भारत के विशाल डेयरी सेक्टर में हर दिन भारी मात्रा में डेटा उत्पन्न होता है, जो अक्सर उपयोग में नहीं आ पाता। LactaAI इस डेटा को उपयोगी निर्णयों में बदलकर प्लांट की दक्षता और मुनाफ़े को बढ़ाने का काम करेगा।

    कंपनी के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म डेयरी उद्योग के लिए “Applied AI” का एक मजबूत उदाहरण है, जो सीधे उत्पादन और लागत पर सकारात्मक असर डाल सकता है।