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  • Babu Bhai Bhawanji:आठवले के राज्यसभा जाने से वंचित वर्गों को ताकत मिलेगी: बाबूभाई भवानजी

    Babu Bhai Bhawanji:आठवले के राज्यसभा जाने से वंचित वर्गों को ताकत मिलेगी: बाबूभाई भवानजी

    मुंबई: वरिष्ठ भाजपा नेता और मुंबई के पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी ने केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के नेता रामदास आठवले को तीसरी बार राज्यसभा के लिए नामित किए जाने पर खुशी जताई और उन्हें बधाई दी।

    सोमवार को जारी एक बयान में भवानजी ने कहा कि रामदास आठवले एक कर्मठ और जनसरोकारों से जुड़े नेता हैं। उनके राज्यसभा में जाने से समाज के वंचित और कमजोर वर्गों को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि आठवले सभी वर्गों में लोकप्रिय हैं और हर तबके के लोगों के लिए समर्पित भाव से काम करते हैं।

    भवानजी ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का आभार भी व्यक्त किया।

    गौरतलब है कि राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान प्रस्तावित है। नाम वापस लेने की अंतिम तिथि सोमवार (9 मार्च) है। कुल 10 राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, जिनमें से 7 राज्यों की 26 सीटों पर उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर होने के कारण निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है।

    इन राज्यों में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, असम, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। वहीं हरियाणा, ओडिशा और बिहार में सीटों से अधिक उम्मीदवार मैदान में होने के कारण मुकाबला होने की संभावना है।

  • BMC जूनियर इंजीनियर भर्ती का परिणाम लंबित, मेयर रितू तावड़े ने जल्द जारी करने को कहा

    मुंबई: मुंबई महानगरपालिका(BMC) के नगर अभियंता विभाग में कनिष्ठ अभियंता (सिविल/मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल) पदों की भर्ती परीक्षा होने के बावजूद अब तक परिणाम घोषित नहीं होने पर मुंबई की मेयर रितू तावड़े ने प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत में लंबित है, इसलिए अंतिम सुनवाई जल्द कराने के लिए न्यायालय से अनुरोध किया जाए और प्रशासन अपनी बात मजबूती से रखे।

    मेयर रितू तावड़े ने भर्ती से संबंधित लंबित मुद्दों पर हाल ही में महानगरपालिका अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि दुय्यम अभियंता भर्ती प्रक्रिया में छानबीन के दौरान अपात्र या अनुपस्थित उम्मीदवारों के कारण जो पद खाली हैं, उन्हें प्रतीक्षा सूची में शामिल उम्मीदवारों से भरने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया तेज की जाए।

    नगर अभियंता विभाग में कनिष्ठ अभियंता (सिविल) के 250 पद और कनिष्ठ अभियंता (मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल) के 130 पद भरने के लिए 15 अक्टूबर 2024 को विज्ञापन जारी किया गया था। इस भर्ती परीक्षा में लगभग 50 हजार उम्मीदवारों ने भाग लिया था। हालांकि एक साल बीतने के बाद भी परिणाम घोषित नहीं होने से उम्मीदवारों में असंतोष बढ़ रहा है।

    बैठक में म्युनिसिपल इंजीनियर्स एसोसिएशन के कार्याध्यक्ष रमेश भुतेकर सहित अन्य उम्मीदवारों ने कहा कि मामला अदालत में होने के बावजूद परिणाम घोषित करने पर कोई रोक नहीं है। साथ ही उन्होंने मांग की कि दुय्यम अभियंता भर्ती में अपात्र या अनुपस्थित उम्मीदवारों की जगह प्रतीक्षा सूची के उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन का अवसर दिया जाए।

    इस पर महानगरपालिका की ओर से अतिरिक्त आयुक्त (पूर्व उपनगर) डॉ. अविनाश ढाकणे ने बताया कि भर्ती विज्ञापन में केवल डिप्लोमा धारकों को पात्र बताया गया था। इसके खिलाफ डिग्रीधारी उम्मीदवारों ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी।

    उच्च न्यायालय ने 11 दिसंबर 2024 को अंतरिम आदेश देते हुए डिग्रीधारकों को भी मौका देने की बात कही, जिसके बाद परीक्षा आयोजित की गई। बाद में इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई, जहां उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी गई।

    डॉ. ढाकणे ने बताया कि अब प्रशासन की ओर से वरिष्ठ विधि विशेषज्ञों को नियुक्त कर अदालत में मजबूती से पक्ष रखा जा रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को होनी है।

    मेयर रितू तावड़े ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसमें अनावश्यक देरी से युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है। इसलिए प्रशासन को न्यायालय में मजबूत पक्ष रखते हुए अंतिम सुनवाई जल्द कराने का प्रयास करना चाहिए, ताकि भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।

  • Maternity Leave: मातृत्व अवकाश एक साल करने और भीड़भाड़ वाली जगहों पर फेस रिकग्निशन सिस्टम लगाने की मांग

    Maternity Leave: मातृत्व अवकाश एक साल करने और भीड़भाड़ वाली जगहों पर फेस रिकग्निशन सिस्टम लगाने की मांग

    मुंबई: कामकाजी महिलाओं की मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) अवधि बढ़ाकर एक वर्ष करने और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर फेस रिकग्निशन सिस्टम लगाने की मांग शिवसेना विधायक डॉ. मनीषा कायंदे ने महाराष्ट्र विधान परिषद में उठाई। उन्होंने यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सदन में हुई चर्चा के दौरान रखा।

    डॉ. मनीषा कायंदे ने कहा कि आज की जीवनशैली में महिलाओं पर काम का दबाव काफी बढ़ गया है। कॉर्पोरेट क्षेत्र में कई महिलाएं लगातार 12 घंटे तक लैपटॉप पर काम करती हैं, जिसका उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। वर्तमान में कामकाजी महिलाओं को छह महीने की मातृत्व अवकाश मिलती है, लेकिन इतने कम समय में कई माताओं को अपने छोटे बच्चों को डे-केयर या पाळनाघर में छोड़कर फिर से काम पर लौटना पड़ता है, जो मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।

    उन्होंने सरकार से मांग की कि मातृत्व अवकाश की अवधि बढ़ाकर एक वर्ष की जाए, ताकि मां अपने बच्चे की बेहतर देखभाल कर सके और बच्चे को उचित पोषण और स्तनपान मिल सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जर्मनी में नौकरी करने वाली महिलाओं को एक साल की मातृत्व अवकाश दी जाती है।

    डॉ. कायंदे ने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े अन्य मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार ने गर्भाशय की सर्जरी (हिस्टेरेक्टॉमी) कराने वाली महिलाओं को सवेतन छुट्टी देने का फैसला किया है। महाराष्ट्र सरकार को भी इस तरह का निर्णय लेना चाहिए, ताकि महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समय पर्याप्त आराम मिल सके।

    उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हाल के वर्षों में लड़कियों और महिलाओं के लापता होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसे रोकने के लिए रेलवे स्टेशन, एसटी डिपो और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर फेस रिकग्निशन सिस्टम लगाया जाना चाहिए।

    डॉ. कायंदे ने पंढरपुर वारी का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां पुलिस अधिकारी अतुल कुलकर्णी के नेतृत्व में करीब 20 लाख वारकरियों का फेस रिकग्निशन किया गया था। इस तकनीक के माध्यम से बायोमेट्रिक पहचान जैसे रेटिना स्कैन भी किया जा सकता है, जिससे अपराधों पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।

    इसके अलावा उन्होंने घरेलू हिंसा रोकथाम कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रोटेक्शन अधिकारियों की संख्या बढ़ाने, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग में खाली पदों को भरने तथा महिलाओं की मदद के लिए काउंसलर और वकीलों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं और लाड़ली बहन योजना जैसी पहल महिलाओं के लिए मददगार साबित हुई है। साथ ही राज्य के बजट में 13 जिलों में “उमेद मॉल” शुरू करने की योजना का भी स्वागत किया, जिससे महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिलेगा और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगी।

  • LPG सिलेंडर महंगा होने के बाद कालाबाजारी की आशंका, ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव के बहाने गैस एजेंसियों पर ग्राहकों को ठगने की साजिश!

    LPG सिलेंडर महंगा होने के बाद कालाबाजारी की आशंका, ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव के बहाने गैस एजेंसियों पर ग्राहकों को ठगने की साजिश!

    अश्विनी कुमार

    मुंबई: ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद कुछ गैस एजेंसियों पर ग्राहकों को सिलेंडर की कमी का बहाना बनाकर अधिक पैसे वसूलने का आरोप लग रहा है। एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद कई जगहों पर गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कुछ एजेंसियां सिलेंडर की कमी का बहाना बनाकर अधिक पैसे वसूलने और देरी से डिलीवरी करने की कोशिश कर रही हैं।

    बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद भारत में भी एलपीजी की कीमतों में वृद्धि हुई है। इसके बाद से कई इलाकों में उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा है, जिससे परेशानी बढ़ गई है।

    बताया जा रहा है कि BPCL, HPCL और इंडियन ऑयल से जुड़े कुछ वितरकों ने ग्राहकों को यह कहकर परेशान करना शुरू कर दिया है कि सिलेंडर की सप्लाई कम है या देर से आएगी। इसके चलते कई जगहों पर ब्लैक मार्केटिंग और अतिरिक्त पैसे लेने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

    पहले और अब सिलेंडर के दाम

    सिलेंडर प्रकारपुराना रेट (मुंबई)नया रेट (मुंबई)बढ़ोतरी
    घरेलू LPG (14.2 किलो)₹852.50₹912.50₹60
    कमर्शियल LPG (19 किलो)लगभग ₹1,692लगभग ₹1,836₹115–₹144

    7 मार्च 2026 से देशभर में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत लगभग ₹115 से अधिक बढ़ा दी गई है।

    सप्लाई में देरी और इंतजार

    मुंबई में कई उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुक करने के बाद 2 से 8 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

    सरकार पर उठ रहे सवाल

    विपक्षी दल और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि एजेंसियां ग्राहकों से अधिक पैसे वसूलती हैं या सिलेंडर की कृत्रिम कमी पैदा करती हैं तो केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

    लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो महंगे सिलेंडर और सप्लाई की कमी का फायदा उठाकर ग्राहकों से अवैध वसूली का नेटवर्क तैयार हो सकता है।

    सरकार से कार्रवाई की मांग

    स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि यदि कोई एजेंसी तय कीमत से ज्यादा पैसे वसूलती है या जानबूझकर सप्लाई रोकती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

    लोगों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच रसोई गैस पहले ही आम लोगों के बजट पर बोझ बन चुकी है। ऐसे में अगर एजेंसियों की मनमानी बढ़ती है तो इसका सीधा असर आम परिवारों पर पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को निगरानी बढ़ाने, शिकायत तंत्र मजबूत करने और कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।

  • Shiv Sena:घाटकोपर श्मशान घाट में गुजराती रसीदों को लेकर शिवसेना (यूबीटी) का बीजेपी पर हमला

    Shiv Sena:घाटकोपर श्मशान घाट में गुजराती रसीदों को लेकर शिवसेना (यूबीटी) का बीजेपी पर हमला

    मुंबई: महाराष्ट्र में भाषाई मुद्दे को लेकर राजनीति फिर गरमा गई है। Shiv Sena (Uddhav Balasaheb Thackeray) ने महानगरपालिका चुनाव में जीतने वाली महायुति सरकार पर निशाना साधते हुए अपने मुखपत्र सामना में प्रकाशित संपादकीय के जरिए बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

    घाटकोपर श्मशान घाट का मामला

    संपादकीय के अनुसार Brihanmumbai Municipal Corporation के तहत आने वाले घाटकोपर स्थित हिंदू श्मशान घाट में मृत्यु पंजीकरण की रसीदें गुजराती भाषा में जारी किए जाने का आरोप लगाया गया है। जबकि महानगरपालिका के पुराने नियमों के मुताबिक ऐसे प्रमाणपत्र मराठी और अंग्रेजी में जारी किए जाने चाहिए।

    लेख में दावा किया गया है कि कई दिनों से आधिकारिक चिह्नों वाली ये रसीदें वितरित की जा रही हैं, जिससे भाषाई विवाद खड़ा हो गया है। संपादकीय में यह भी कहा गया कि इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व वर्तमान मेयर Ritu Tawde कर रही हैं, इसलिए इस मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

    बीजेपी पर मराठी विरोध का आरोप

    सामना के संपादकीय में Bharatiya Janata Party पर आरोप लगाया गया कि चुनाव के समय मराठी प्रेम का प्रदर्शन किया जाता है, लेकिन बाद में उसे भुला दिया जाता है।

    लेख में यह भी कहा गया कि अगर महाराष्ट्र में मराठी अनिवार्य है, जैसा कि मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने विधानसभा में कहा था, तो श्मशान घाट में गुजराती भाषा में रसीदें जारी होना सवाल खड़ा करता है।

    मराठी अस्मिता का मुद्दा

    संपादकीय में कहा गया कि महाराष्ट्र में रेलवे प्लेटफॉर्म, सड़कों के नाम और अन्य सरकारी कामों में गुजराती भाषा को बढ़ावा देने की कोशिश मराठी के लिए खतरे के रूप में देखी जा रही है। हालांकि इसमें यह भी स्वीकार किया गया कि गुजराती भाषा और संस्कृति का देश के साहित्य, संगीत और राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

    लेख में यह भी कहा गया कि मराठी भाषा और अस्मिता की रक्षा के लिए शिवसेना ने दशकों तक संघर्ष किया है। इसमें Chhatrapati Shivaji Maharaj, B. R. Ambedkar और Bal Thackeray की भाषा के रूप में मराठी का उल्लेख करते हुए कहा गया कि महाराष्ट्र की राजधानी में मराठी का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • Ola, Uber & Rapido:महाराष्ट्र में ओला, उबर और रैपिडो की बाइक टैक्सी सेवाओं पर रोक

    Ola, Uber & Rapido:महाराष्ट्र में ओला, उबर और रैपिडो की बाइक टैक्सी सेवाओं पर रोक

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य में Ola, Uber और Rapido की बाइक टैक्सी सेवाओं पर फिलहाल रोक लगा दी है। सरकार ने तीनों कंपनियों के अस्थायी लाइसेंस (Temporary Licenses) तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए हैं।

    सरकार के अनुसार इन कंपनियों को महाराष्ट्र में केवल इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी चलाने की शर्त पर अनुमति दी गई थी, लेकिन आरोप है कि कंपनियों ने इलेक्ट्रिक बाइक के बजाय पेट्रोल से चलने वाली बाइक टैक्सी संचालित कीं। इसे नियमों का उल्लंघन और सरकार के साथ धोखाधड़ी माना गया है।

    परिवहन विभाग के मुताबिक नियमों का पालन न करने के कारण तीनों कंपनियों के अस्थायी लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं, जिसके चलते फिलहाल राज्य में उनकी बाइक टैक्सी सेवाएं बंद रहेंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में केवल इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी को ही अनुमति दी जाएगी, ताकि सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों को बढ़ावा मिल सके।

    बताया गया है कि सरकार ने कंपनियों को जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए पहले एक महीने का समय दिया था, लेकिन तय समय में दस्तावेज जमा नहीं किए गए। इस पर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा कि कंपनियों को एक और एक महीने की अंतिम मोहलत दी गई है। यदि इस अवधि में भी दस्तावेज जमा नहीं किए गए तो उनके लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिए जाएंगे।

    सरकार ने शुरुआत में ईको-फ्रेंडली ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने और युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से ई-बाइक टैक्सी को अनुमति दी थी। लेकिन कंपनियों द्वारा पेट्रोल बाइक का इस्तेमाल जारी रखने के कारण यह कार्रवाई की गई है।

    नए फैसले के मुताबिक यदि कहीं भी पेट्रोल बाइक टैक्सी चलती हुई पाई गई, तो ड्राइवर और बाइक मालिक दोनों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा और बाइक को भी जप्त किया जाएगा। सरकार के इस फैसले से मुंबई सहित महाराष्ट्र में गैरकानूनी बाइक टैक्सी सेवाओं पर रोक लगने की संभावना है, हालांकि इससे हजारों ड्राइवरों की आजीविका पर असर पड़ सकता है।

  • Prayas:‘प्रयास’ नुक्कड़ नाटक श्रृंखला से 6 हजार श्रमिकों को दिया गया सुरक्षा का संदेश

    Prayas:‘प्रयास’ नुक्कड़ नाटक श्रृंखला से 6 हजार श्रमिकों को दिया गया सुरक्षा का संदेश

    ठाणे: मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिकों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने ‘प्रयास’(Prayas) नामक नुक्कड़ नाटक श्रृंखला का आयोजन किया।

    23 फरवरी से 7 मार्च 2026 तक चले इस अभियान के दौरान बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के विभिन्न निर्माण स्थलों पर लगभग 6 हजार श्रमिकों को कार्यस्थल सुरक्षा का संदेश दिया गया। कलाकारों ने रोचक प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रमिकों को हेलमेट, हार्नेस बेल्ट, सेफ्टी शूज़ और पीपीई किट जैसे सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।

    यह अभियान कॉरिडोर के 40 निर्माण स्थलों पर चलाया गया, जिनमें गुजरात के 24 और महाराष्ट्र के 16 स्थल शामिल हैं। इन स्थानों में स्टेशन, कास्टिंग यार्ड, सुरंग, डिपो, पुल और वायाडक्ट जैसे निर्माण स्थल शामिल हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रमिक कार्यरत हैं।

    नुक्कड़ नाटक के जरिए श्रमिकों को यह संदेश दिया गया कि सुरक्षा नियमों का पालन करें, बिना प्रशिक्षण के काम न करें, शॉर्टकट से बचें और काम शुरू करने से पहले संभावित जोखिमों का आकलन करें।

    पिछले तीन वर्षों से चल रही यह पहल श्रमिकों में सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित कार्य संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

  • Central Railway:मध्य रेल में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया, 36 महिला कर्मचारियों को किया गया सम्मानित

    Central Railway:मध्य रेल में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया, 36 महिला कर्मचारियों को किया गया सम्मानित

    मुंबई: मध्य रेल(Central Railway) में 9 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) में केंद्रीय कर्मचारी कल्याण कोष (CSBF) के तत्वावधान में महिला कर्मचारी उपलब्धि सम्मान समारोह आयोजित किया गया।

    इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “Give to Gain” रखी गई, जिसका उद्देश्य महिलाओं को अवसर, सम्मान, समानता और सहयोग देकर समाज में प्रगति और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम की शुरुआत मध्य रेल के महाप्रबंधक प्रतीक गोस्वामी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई।

    इस दौरान महाप्रबंधक ने मध्य रेल की विभिन्न इकाइयों और विभागों से चयनित 36 महिला कर्मचारियों को “सशक्त नारी पुरस्कार” देकर सम्मानित किया। इनमें लोको पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन, शिक्षिका, वाणिज्य निरीक्षक, आरपीएफ कर्मी, कार्यालय अधीक्षक और अन्य विभागों की कर्मचारी शामिल थीं।

    इनमें से 21 महिला कर्मचारियों को मुख्यालय, मुंबई मंडल और विभिन्न वर्कशॉप से व्यक्तिगत रूप से सम्मानित किया गया। सम्मानित कर्मचारियों में अनुराधा रॉय भी शामिल हैं, जिन्हें 8 मार्च को नई दिल्ली में रेलवे बोर्ड द्वारा “Outstanding Women Award” से भी सम्मानित किया गया था।

    कार्यक्रम के दौरान महिला सशक्तिकरण के तहत 8 आश्रित अविवाहित बेटियों को साइकिल और 3 महिला आश्रितों को सिलाई मशीनें भी वितरित की गईं।

    इस मौके पर महाप्रबंधक प्रतीक गोस्वामी ने बताया कि मध्य रेल में लगभग 9 हजार महिलाएं विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं और महिला सशक्तिकरण के लिए कई पहलें की जा रही हैं।

    कार्यक्रम में लेखिका और TED एलुमना अनुपमा पांडे ने भी प्रेरणादायक व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में मुंबई मंडल के डीआरएम, वरिष्ठ अधिकारी और रेलवे कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

  • Mumbai Coastal Road:मुंबई कोस्टल रोड की ‘मेलोडी रोड’ पर विवाद, शोर से परेशान ब्रीच कैंडी के निवासी

    Mumbai Coastal Road:मुंबई कोस्टल रोड की ‘मेलोडी रोड’ पर विवाद, शोर से परेशान ब्रीच कैंडी के निवासी

    मुंबई: हाल ही में शुरू की गई कोस्टल रोड की ‘मेलोडी रोड’(Mumbai Coastal Road) अब विवादों में घिरती दिखाई दे रही है। इस सड़क पर लगाए गए विशेष म्यूजिकल पैच के कारण जब वाहन गुजरते हैं तो सड़क से “जय हो” की धुन बजती है। इस अनोखे प्रयोग का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था और कई वाहन चालकों को यह अनुभव काफी रोचक भी लगा।

    लेकिन अब समुद्र किनारे बसे पॉश इलाके ब्रीच कैंडी के स्थानीय निवासियों ने इस पहल पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सड़क पर बजने वाली यह धुन लगातार सुनाई देती है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को ध्वनि प्रदूषण की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस इलाके में प्रसिद्ध ब्रीच कैंडी अस्पताल के साथ-साथ कई उद्योगपतियों और राजनेताओं के आवास भी स्थित हैं।

    एक महीने में ही बढ़ी शिकायतें

    कोस्टल रोड पर ‘मेलोडी रोड’ शुरू हुए अभी करीब एक महीना ही हुआ है, लेकिन इस दौरान ही स्थानीय लोगों की शिकायतें सामने आने लगी हैं। ब्रीच कैंडी एएलएम (एरिया लोकल मैनेजमेंट) और ब्रीच कैंडी रेजिडेंट्स फोरम ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय और मुंबई महानगरपालिका को पत्र लिखकर अपनी नाराज़गी जाहिर की है।

    करीब 650 परिवारों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन संगठनों का कहना है कि कोस्टल रोड पर उत्तर दिशा की ओर जाने वाले मार्ग पर बजने वाली यह धुन सीधे रिहायशी इलाकों तक सुनाई देती है। इससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है और कई निवासियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

    सुबह से देर रात तक सुनाई देता है संगीत

    निवासियों के अनुसार यह धुन सुबह लगभग 6 बजे से लेकर आधी रात तक सुनाई देती रहती है। ऐसे में लोगों के लिए खिड़कियां खुली रखना मुश्किल हो जाता है, खासकर बुजुर्गों के लिए यह समस्या और अधिक बढ़ जाती है।

    पत्र में यह भी कहा गया है कि कोस्टल रोड पर पहले से ही तेज रफ्तार वाहनों के कारण शोर अधिक रहता है और अब इस म्यूजिकल रोड के कारण ध्वनि प्रदूषण और बढ़ गया है।

    सुरक्षा को लेकर भी जताई चिंता

    स्थानीय संगठनों ने यह भी आशंका जताई है कि यह सड़क तेज रफ्तार वाहनों के लिए बनाई गई है, ऐसे में सड़क से निकलने वाला संगीत ड्राइवरों का ध्यान भटका सकता है और इससे सड़क सुरक्षा को खतरा भी पैदा हो सकता है। इसके अलावा इलाके में अस्पताल और स्कूल होने के कारण मरीजों, छात्रों और बुजुर्गों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    बीएमसी करेगी डेसिबल स्तर की जांच

    शिकायत मिलने के बाद मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ‘मेलोडी रोड’ से होने वाले शोर की जांच करने का निर्णय लिया है। बीएमसी अधिकारियों के अनुसार कोस्टल रोड के आसपास की रिहायशी इमारतों में ध्वनि का डेसिबल स्तर मापा जाएगा।

  • Torrent Power: टोरेंट पावर का ‘सुरक्षा सप्ताह’, लेकिन भिवंडी में बिजली हादसे क्यों नहीं रुक रहे?

    सुरक्षा पर भाषण, जमीनी हकीकत पर सवाल; कर्मचारियों को दिए गए नियमों के पालन के निर्देश

    भिवंडी: भिवंडी में बिजली वितरण कंपनी टोरेंट पावर लिमिटेड द्वारा विद्युत सुरक्षा सप्ताह मनाया गया, जिसमें कर्मचारियों को बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी गई। हालांकि इस कार्यक्रम के बीच शहर में लगातार सामने आ रहे बिजली हादसों और असुरक्षित बिजली व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं।

    कार्यक्रम के दौरान ठाणे-2 के विद्युत निरीक्षक राजेश यादव ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्युत सुरक्षा केवल कागजी नियम नहीं है, बल्कि इसे कर्मचारियों की दैनिक कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने टोरेंट पावर द्वारा सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की।

    सुरक्षा नियमों पर जोर

    सहायक विद्युत निरीक्षक अर्जुन जाधव ने कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सुरक्षा) विनियम 2023 के तहत निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है।

    उन्होंने कर्मचारियों को मरम्मत से पहले बिजली आपूर्ति बंद करने, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने और लॉकआउट–टैगआउट प्रक्रिया अपनाने जैसे कई सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।

    टोरेंट पावर की जिम्मेदारी पर सवाल

    कार्यक्रम में सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया गया, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि भिवंडी के कई इलाकों में खुले बिजली के तार, पुराने ट्रांसफॉर्मर और असुरक्षित पोल अब भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।

    नागरिकों का कहना है कि अगर सुरक्षा नियम इतने महत्वपूर्ण हैं, तो शहर में बार-बार होने वाली बिजली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर क्या कदम उठाए गए हैं, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।

    अधिकारियों ने दिया सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश

    विद्युत निरीक्षक ने कहा कि अधिकांश बिजली दुर्घटनाएं जागरूकता, अनुशासन और सुरक्षा नियमों के पालन से रोकी जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित कार्यस्थल बनाए रखना हर कर्मचारी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    कार्यक्रम में टोरेंट पावर के जनरल मैनेजर राणे और कुलकर्णी ने अधिकारियों का आभार व्यक्त किया और कंपनी में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का भरोसा दिया।

    कार्यक्रम का समापन सेफ्टी गैलरी के दौरे और कर्मचारियों के साथ संवाद के साथ हुआ, जिसमें बिजली सुरक्षा के प्रति लगातार जागरूक रहने का संदेश दिया गया।