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  • Poisonous Butter:मुंबई में जहरीला मक्खन परोसा जा रहा है खुलेआम! योगेंद्रनाथ तिवारी बना मौत का सौदागर, बीएमसी और FDA मूकदर्शक

    Poisonous Butter:मुंबई में जहरीला मक्खन परोसा जा रहा है खुलेआम! योगेंद्रनाथ तिवारी बना मौत का सौदागर, बीएमसी और FDA मूकदर्शक

    बीएमसी और फूड विभाग ने ली जनता को मीठा जहर खिलाने की ली सुपारी, शिकायतों के बावजूद नटराज फूड प्रोडक्ट्स पर कार्रवाई नहीं

    शिवसेना नेता पं. सुधांशु भट्ट

    मुंबई: शहर में मिलावटी मक्खन का गोरखधंधा थमने का नाम नहीं ले रहा है। सीपी टैंक के खत्तर गली में नटराज फूड प्रोडक्ट्स का मालिक योगेंद्रनाथ तिवारी द्वारा बनाए जा रहे नकली और मिलावटी मक्खन की शिकायतें कई बार बीएमसी और फूड विभाग तक पहुँचीं, मगर कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई यानि नाश्ता-पानी चालू है।
    परिणामस्वरूप यह “मौत का कारोबार” अब खुलेआम चल रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।


    जनता के स्वास्थ्य पर सीधा हमला

    विशेषज्ञों के अनुसार इस मिलावटी मक्खन में industrial fat, synthetic essence और non-edible oil जैसे रासायनिक तत्वों का प्रयोग किया जा रहा है, जो किडनी, लंग्स और लीवर को गंभीर नुकसान पहुँचा रहे हैं।
    स्थानीय नागरिकों में पेट दर्द, सांस लेने में तकलीफ, त्वचा की एलर्जी और कमजोरी जैसी शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं।


    शिवसेना नेता पं. सुधांशु भट्ट का सख्त रुख

    शिवसेना नेता पं. सुधांशु भट्ट ने इस घोटाले को “जनता की सेहत से खिलवाड़ और प्रशासन की आपराधिक लापरवाही” बताया है।
    उन्होंने बीएमसी आयुक्त, राज्य फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) और स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र भेजकर नटराज फूड प्रोडक्ट्स का मालिक योगेंद्रनाथ तिवारी पर तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है।


    कानूनी रूप से संभव कार्रवाई

    विशेषज्ञों के अनुसार, यदि विभाग सख्ती दिखाए तो निम्न धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है —

    • फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 (FSSA) की धारा 59
      ➤ मिलावट से हानि पहुँचाने पर रु 10 लाख तक जुर्माना और आजीवन कारावास तक का प्रावधान।
    • भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 272, 273, 274,275, 120B व 420
      ➤ मिलावटी खाद्य पदार्थ तैयार करने, बेचने और धोखाधड़ी करने पर जेल व आर्थिक दंड।
    • FSSAI लाइसेंस रद्दीकरण या निलंबन
      ➤ कंपनी का लाइसेंस तत्काल रद्द कर उत्पादन इकाई को सील किया जा सकता है।

    बीएमसी और फूड विभाग की भूमिका पर सवाल

    बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो उत्पादन बंद हुआ और न ही बिक्री पर रोक लगी।
    इससे स्पष्ट है कि विभागीय अधिकारियों और मिलावट माफिया के बीच सांठगांठ गहरी है।


    अपना पूर्वांचल महासंघ के अध्यक्ष एड. अशोक दुबे
    ज़हरीला मक्खन माफिया बेलगाम! बीएमसी–FDA की मिलीभगत से चल रहा मौत का कारोबार | नटराज फूड प्रोडक्ट्स पर कार्रवाई नहीं

    नागरिकों की नाराज़गी

    अपना पूर्वांचल महासंघ के अध्यक्ष एड. अशोक दुबे ने कहा —

    “ऐसे स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। अधिकारियों को जीरो टॉलरेंस नीति अपनानी चाहिए। अगर प्रशासन उचित कार्रवाई नहीं करती है तो उच्च न्यायालय में इस विषय पर PIL दाखिल की जा सकती है।”

    कपड़ा व्यापारी वसंत जैन ने कहा —

    “ज़हरीला मक्खन डोसा, सैंडविच और अन्य खाद्य पदार्थों में हर रोज़ परोसा जा रहा है। हर चम्मच मीठा ज़हर बन चुका है।”


    अब सवाल यह है — बीएमसी और FDA कब जागेंगे?
    क्या जनता को राहत देने के बजाय ये विभाग मिलावट माफिया के संरक्षण में हैं?

  • Maharashtra News:बार-बार मतदान करने वाले मतदाता अब वोट नहीं डाल सकेंगे:महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग

    Maharashtra News:बार-बार मतदान करने वाले मतदाता अब वोट नहीं डाल सकेंगे:महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग

    मुंबई: महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने गुरुवार को 246 नगर परिषद और 42 नगर पंचायत चुनावों की घोषणा करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि बार-बार मतदान करने वाले मतदाता अब वोट नहीं डाल सकेंगे। ऐसे मतदाताओं की पहचान के लिए एक विशेष टूल और नई प्रणाली लागू की गई है।

    बार-बार मतदान करने वालों की पहचान

    चुनाव आयोग ने बताया कि इस बार मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए बार-बार वोट देने वालों की पहचान की जाएगी। इसके लिए आयोग ने एक नया डिजिटल टूल तैयार किया है, जो मतदाता सूची में दोहराए गए नामों को स्वतः पहचान लेगा।

    मतदाताओं के लिए मोबाइल ऐप

    मतदाताओं की सुविधा के लिए आयोग ने एक मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया है। इस ऐप पर मतदाता अपने नाम, मतदान केंद्र, क्षेत्रवार उम्मीदवारों की सूची, और उम्मीदवारों की आपराधिक, शैक्षिक व वित्तीय जानकारी देख सकेंगे।

    डबल स्टार से होगी पहचान

    आयोग ने बताया कि बार-बार मतदान करने वाले मतदाता के नाम के आगे “डबल स्टार ( ** )” लगाया जाएगा। इससे ऐसे मतदाताओं की पहचान आसानी से की जा सकेगी। जिन मतदाताओं के नाम के आगे यह चिन्ह होगा, वे वोट नहीं दे पाएंगे।

    एक नाम रद्द किया जाएगा

    राज्य चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में अधिकारी मतदाता से संपर्क करेंगे। यदि मतदाता संतोषजनक जवाब नहीं देता, तो उसका एक नाम मतदाता सूची से रद्द कर दिया जाएगा।
    साथ ही, बार-बार वोट देने वालों से एक घोषणापत्र (Declaration Form) भरवाया जाएगा, जिसमें उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे सिर्फ एक ही मतदान केंद्र पर वोट देंगे।

    ⚖️ पारदर्शिता की दिशा में कदम

    आयोग का यह कदम दोहरी प्रविष्टि और फर्जी मतदान पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे मतदान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी तथा एक व्यक्ति द्वारा कई बार वोट देने की संभावना समाप्त होगी।

  • NDA Mook Andolan: मूक आंदोलन कर भाजपा ने किया पलटवार! — रविंद्र चव्हाण बोले, “सत्य मोर्चा नहीं, महाविकास आघाड़ी का नया राजनीतिक कट”

    NDA Mook Andolan: मूक आंदोलन कर भाजपा ने किया पलटवार! — रविंद्र चव्हाण बोले, “सत्य मोर्चा नहीं, महाविकास आघाड़ी का नया राजनीतिक कट”

    मुंबई: आगामी स्थानीय स्वराज संस्थाओं के चुनावों में संभावित हार को देखते हुए महाविकास आघाड़ी (MVA) मतदाता सूची पर संदेह का झूठा नैरेटिव फैलाकर नया राजनीतिक कट रच रही है — ऐसा आरोप भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने लगाया है।

    भाजपा की ओर से मविआ और मनसे के सत्य मोर्चे के जवाब में गिरगांव चौपाटी पर मूक आंदोलन आयोजित किया गया। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने काले पट्टे बांधकर महाविकास आघाड़ी के खिलाफ प्रदर्शन किया।

    रविंद्र चव्हाण ने कहा —

    “महायुती सरकार जनता के सपनों का महाराष्ट्र बनाने में जुटी है, जबकि महाविकास आघाड़ी अराजकता फैलाकर राज्य को पीछे धकेलने की साजिश कर रही है। विदेशी फंडिंग और समाजविरोधी संगठनों की मदद से यह लोग अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं।”


    लोढा का खुला चैलेंज

    भाजपा मंत्री मंगलप्रभात लोढा ने कहा —

    “अस्लम शेख, अमिन पटेल और अबू आसिम आज़मी के क्षेत्रों में कम से कम 5,000 बांग्लादेशी और रोहिंग्या मतदाता हैं। अगर यह दावा गलत साबित हुआ तो मैं इस्तीफा दूंगा — और अगर सही निकला तो इन्हें इस्तीफा देना चाहिए।”
    लोढा ने बताया कि इस मामले में वे सोमवार को चुनाव आयोग से औपचारिक शिकायत करेंगे।


    “यह असत्य का तमाशा है” — अमित साटम

    भाजपा विधायक अमित साटम ने कहा कि महाविकास आघाड़ी आत्ममंथन करने की बजाय झूठ फैलाने में लगी है।

    “मतदाता उन्हें नकार रहे हैं, और वे समाज में विभाजन पैदा करने की राजनीति कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।


    शरद पवार की असुविधा पर सुप्रिया सुळे का गुस्सा

    सत्य मोर्चा रैली के दौरान एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार को मंच तक पहुंचने में परेशानी हुई, जिससे सांसद सुप्रिया सुळे भड़क उठीं। पवार की गाड़ी मंच तक नहीं पहुंच पाई और उन्हें डिवाइडर पार करना पड़ा। सुळे ने आयोजकों को फटकार लगाई और पुलिस से बात कर वाहन को स्टेज तक बुलवाया।


    शर्मिला ठाकरे का भाजपा पर वार

    मोर्चे में शामिल शर्मिला ठाकरे (राज ठाकरे की पत्नी) ने सवाल उठाया —

    “जब हम चुनाव आयोग से सवाल करते हैं, तो जवाब भाजपा देती है। क्या चुनाव आयोग भाजपा का कार्यालय है?”
    उन्होंने भाजपा के मूक आंदोलन पर तंज कसते हुए कहा, “आपका आंदोलन तो मूक है, फिर इतनी बड़बड़ क्यों?”

    मोर्चे में अमित ठाकरे, उनकी पत्नी मिताली ठाकरे और बड़ी संख्या में मनसे कार्यकर्ता भी शामिल हुए।


    मानवता की मिसाल

    मोर्चे के दौरान एक एंबुलेंस के लिए भीड़ ने रास्ता खाली कर मानवीयता की मिसाल पेश की। वहीं, फैशन स्ट्रीट के दुकानदारों ने सुरक्षा के चलते अपने प्रतिष्ठान बंद रखे।

  • Satya Morcha: मुंबई में INDIA का ‘सत्य का मोर्चा’: बोगस मतदाता सूची के खिलाफ महाविकास आघाड़ी का तीखा हमला

    Satya Morcha: मुंबई में INDIA का ‘सत्य का मोर्चा’: बोगस मतदाता सूची के खिलाफ महाविकास आघाड़ी का तीखा हमला

    मुंबई: महाराष्ट्र में विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर एक बार फिर मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य और पूर्व मंत्री बाला साहेब थोरात ने मुंबई में आयोजित महाविकास आघाड़ी (MVA) के भव्य सर्वदलीय ‘सत्य का मोर्चा’ को संबोधित करते हुए कहा कि “यह मोर्चा सिर्फ़ चुनाव आयोग के खिलाफ नहीं, बल्कि उन लोगों के खिलाफ है जो चुनाव आयोग को नियंत्रित करते हैं।”

    थोरात ने दावा किया कि विधानसभा चुनाव में बोगस मतदाता सूचियों का बड़े पैमाने पर उपयोग हुआ था और अब वही सूचियाँ स्थानीय स्वराज संस्थाओं के चुनावों के लिए भी इस्तेमाल की जा रही हैं। उन्होंने मांग की कि इन सूचियों को तुरंत दुरुस्त किया जाए और तभी स्थानीय चुनाव कराए जाएँ।

    उन्होंने कहा, “देशभर में मतचोरी हुई है — यह बात लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सबूतों के साथ उजागर की थी, लेकिन केंद्रीय चुनाव आयोग ने उस पर केवल औपचारिक और भ्रामक जवाब दिया। आयोग का उत्तर भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में सबसे बोगस जवाबों में से एक है।”

    थोरात ने आगे बताया कि उनके संगमनेर विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण भाग में ही 9,500 से अधिक फर्जी मतदाता पाए गए हैं। “हमने आपत्ति दर्ज कराते हुए दुरुस्ती की मांग की, लेकिन तहसीलदार का कहना है कि उनके पास संशोधन का कोई अधिकार नहीं है। यदि यही सूची नगरपालिकाओं, महानगरपालिकाओं और जिला परिषद चुनावों में इस्तेमाल की जाएगी, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है,” उन्होंने कहा।

    उन्होंने राज्य चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष की ओर से बार-बार आग्रह के बावजूद आयोग कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया है।

    इस बीच, सत्ता पक्ष द्वारा निकाले गए ‘मूक मोर्चा’ पर तंज कसते हुए थोरात ने कहा, “जब हम ‘सत्य का मोर्चा’ निकाल रहे हैं, तो सत्ताधारी दल मूक मोर्चा निकाल रहे हैं — कहीं इसमें चुनाव आयोग भी शामिल तो नहीं?”

    कार्यक्रम में शरद पवार, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे जैसे दिग्गज नेताओं ने भी हिस्सा लिया और भाजपा-महायुती सरकार के साथ-साथ चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा।

    “आयोग का सर्वर किसके कार्यालय में?: उद्धव ठाकरे का तीखा सवाल

    मुंबई: मुंबई में आयोजित महाविकास आघाड़ी के ‘सत्य का महामोर्चा’ में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गट) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और मतचोरी की साज़िश चल रही है।

    सभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने चौंकाने वाला खुलासा किया — “मेरे और मेरे परिवार के चार सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई है। यह कोई सामान्य गलती नहीं बल्कि एक सोची-समझी चाल है। सवाल यह है कि आयोग का सर्वर आखिर किसके कार्यालय में है? कौन तय करता है कि किसका नाम हटाना है और किसे जोड़ना है? यह पूरा खेल लोकतंत्र को कमजोर करने की दिशा में है।”

    मुंबई में आयोजित महाविकास आघाड़ी के ‘सत्य का महामोर्चा’ में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने चुनाव आयोग पर मतदाता सूची और EVM में गड़बड़ी का आरोप लगाया।

    उन्होंने बताया कि ऑनलाइन आवेदन कर झूठे मोबाइल नंबर के माध्यम से उनके परिवार के नाम हटाने का प्रयास किया गया था। चुनाव आयोग की टीम जब सत्यापन के लिए उनके घर पहुँची, तब यह बात सामने आई। उद्धव ने कहा, “यह साज़िश 23 अक्टूबर को रची गई थी — अब हमें न्याय चाहिए और हम इस पूरे मामले में अदालत का दरवाज़ा खटखटाएँगे।”


    मुंबई में आयोजित महाविकास आघाड़ी के ‘सत्य का महामोर्चा’ में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने चुनाव आयोग पर मतदाता सूची और EVM में गड़बड़ी का आरोप लगाया।

    राज ठाकरे का आरोप: EVM और मतदाता सूचियों में गड़बड़ी का सबूत मेरे पास है’

    मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा कि वह 2017 से लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि EVM और मतदाता सूचियाँ दोनों में घोटाला है। उन्होंने दावा किया कि कल्याण ग्रामीण, डोंबिवली, मुरबाड और भिवंडी के 4,500 मतदाताओं ने मुंबई के मलबार हिल मतदारसंघ में भी मतदान किया है।
    राज ठाकरे ने मंच से कहा, “यह कारस्थानें चुनाव आयोग के माध्यम से चल रही हैं। अगर ऐसे ही चुनाव होंगे तो हम लोकतंत्र में कैसे भरोसा करें? अब जनता को जागरूक होना होगा — एक-एक मतदाता सूची की जाँच करनी होगी, और अगर कहीं डुप्लिकेट या फर्जी नाम मिले तो वहीं उजागर करना होगा।”

    उन्होंने अपने पास मौजूद दस्तावेज़ों का ‘सबूतों का ढेर’ मंच पर दिखाया, जिसमें हर लोकसभा क्षेत्र में 50,000 से 1 लाख तक दोहराए गए मतदाता नाम होने का दावा किया गया।


    मुंबई में आयोजित महाविकास आघाड़ी के ‘सत्य का महामोर्चा’ में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने चुनाव आयोग पर मतदाता सूची और EVM में गड़बड़ी का आरोप लगाया।

    मोर्चे में ‘यमराज’ का अनोखा प्रदर्शन

    मोर्चे में एक व्यक्ति ने यमराज के वेश में आकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उसने कहा, “मैं यमलोक से आया हूँ — 80, 90, 117, 124 साल के जो मतदाता इस दुनिया में नहीं हैं, उन्हें अब ले जाने आया हूँ। जो ‘झुकेगा नहीं’ बोलते हैं, पहले उन्हें ही ले जाऊँगा!”


    ‘लाल सलाम’ से गूंजा मोर्चा परिसर

    इस मोर्चे में वामपंथी नेताओं शैलेंद्र कांबळे, अजित नवले, सुभाष लांडे, प्रकाश रेड्डी और मिलिंद रानडे ने ‘लाल सलाम’ के नारे लगाकर माहौल में जोश भर दिया। उनके साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस और उद्धव सेना के कार्यकर्ता भी शामिल हुए।


    राज ठाकरे का लोकल ट्रेन से चर्चगेट तक सफर

    राज ठाकरे ने मोर्चे में शामिल होने के लिए दादर से चर्चगेट तक लोकल ट्रेन से सफर किया। भीड़ के कारण उन्होंने दो लोकल ट्रेनें छोड़ीं और तीसरी (10:22 की) ट्रेन में सफर किया। दिलचस्प बात यह रही कि उन्हें “विंडो सीट” मिली और कुछ यात्रियों के कहने पर उन्होंने उनके टिकट पर ऑटोग्राफ भी दिए।


    हम अदालत में जाएंगे, जनता का न्याय सबसे बड़ा: उद्धव ठाकरे

    भाजपा की आलोचना करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब विपक्ष चुनाव आयोग से सवाल करता है, तो सत्ताधारी पूछते हैं — “अदालत में क्यों नहीं जाते?” अब हम अदालत में भी जाएंगे और जनता के न्यायालय में भी जाएंगे।
    उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र की जनता लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करने वालों को माफ़ नहीं करेगी। अगर मतचोरी करके चुनाव कराने की कोशिश की गई, तो यह जनता अपनी मुट्ठी का जवाब उनके सिर पर देगी।”

  • BJP V/S Congress: कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा पर लगाया जासूसी का सनसनीखेज आरोप

    BJP V/S Congress: कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा पर लगाया जासूसी का सनसनीखेज आरोप

    मुंबई: महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ(Harshwardhan Sakpal) ने राज्य की भाजपा सरकार और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके ऊपर लगातार पुलिस की नज़र रखी जा रही है और यह निगरानी अब उनकी निजी ज़िंदगी तक पहुंच गई है। सपकाळ ने खुलासा किया कि मुंबई के नाना चौक स्थित सर्वोदय आश्रम (Sarvoday Ashram) में उनके बेडरूम तक में पुलिसकर्मी घुस आए और उनसे निजी सवाल पूछे।

    सपकाळ ने बताया कि यह घटना सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि तीसरी बार हुई है। आज सुबह एक सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी सीधे मेरे बेडरूम में घुस आया। उसने पूछा, क्या आप प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं, पत्रकार आ चुके हैं या नहीं? सपकाळ ने बताया कि जब मैंने पूछा कि किसके आदेश पर आए हो, तो उसने कहा कि ‘वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश हैं। उन्होंने कहा कि यह विरोधी नेताओं की निजी ज़िंदगी में दखल है। भाजपा सरकार लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तोड़ रही है। पहले पेगासस, फिर फोन टैपिंग और अब सीधे बेडरूम में घुसपैठ ,यह भाजपा की तानाशाही प्रवृत्ति है। हम इस डराने-धमकाने की राजनीति से नहीं डरेंगे।

    मुंबई एनकाउंटर पर उठे सवाल: NSG मौजूद थी, फिर भी पुलिस ने गोली क्यों चलाई?

    सपकाळ ने मुंबई के पवई इलाके में हुए एनकाउंटर(Encounter) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि “रोहित आर्य नामक व्यक्ति ने बच्चों को बंधक बनाया था, लेकिन जब मौके पर एनएसजी का दस्ता मौजूद था, तो पुलिस ने गोली चलाने की ज़रूरत क्यों समझी?”
    उन्होंने कहा कि रोहित आर्य मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया जा रहा है, मगर उसने ‘सुंदर माझी शाळा’ जैसी सरकारी परियोजनाओं में काम किया था और वह तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे व शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर(Deepak Kesarkar) के साथ मंच साझा कर चुका था। सपकाळ ने कहा, इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    “गुंडों के सरगना हैं फडणवीस”, डॉ. संपदा मुंडे की मौत को बताया संस्थागत हत्या

    सपकाळ ने कहा कि डॉक्टर संपदा मुंडे की आत्महत्या दरअसल संस्थागत हत्या है, और इसके पीछे भाजपा के पूर्व सांसद रणजीतसिंह नाईक निंबाळकर(Ranjeet Naik Nimbalkar) जैसे प्रभावशाली नेताओं की भूमिका है। उन्होंने कहा कि निंबाळकर पर अपहरण, धमकी और मारपीट जैसे गंभीर आरोप हैं, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें बचा लिया।
    उन्होंने बताया कि सिंधुदुर्ग में एक फूल व्यापारी ने भी भाजपा नेताओं के उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या की थी और एक वीडियो में अपनी पीड़ा बताई थी। “राज्य में गुंडाराज चल रहा है, और इस सबका आका खुद फडणवीस हैं,” सपकाळ ने कहा।

    शिवसेना और भाजपा के कई नेता कांग्रेस में शामिल

    अकोला जिले में शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता विजय मालोकार कांग्रेस(Congress) में शामिल हो गए हैं। उन्होंने तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ा है और कई सरकारी समितियों में पद संभाला है। इसी तरह, हिंगोली जिले के शिवसेना (उद्धव गुट) (UBT)के नेता डॉ. रमेश शिंदे पाटिल भी अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं सहित कांग्रेस में शामिल हुए। इनके साथ एनसीपी, भाजपा, युवासेना और किसान संगठनों के कई पदाधिकारी भी कांग्रेस में आए। सपकाळ ने कहा, “गढ़चिरोली, जालना और नांदेड़ के देगलुर में भी हाल ही में बड़े स्तर पर प्रवेश हुए हैं। आने वाले दिनों में और भी प्रमुख नेता कांग्रेस से जुड़ने वाले हैं।”

    1 नवंबर को चुनाव आयोग के खिलाफ सर्वदलीय मोर्चा

    सपकाळ ने बताया कि 1 नवंबर को सभी विपक्षी दल चुनाव आयोग(Election Commission) के खिलाफ एक विशाल मोर्चा निकालेंगे। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है, जिसकी पोल सबसे पहले राहुल गांधी ने खोली। अब समय आ गया है कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की गारंटी सुनिश्चित की जाए। इस मौके पर कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य और पूर्व मंत्री नसीम खान, प्रदेश उपाध्यक्ष सचिन नाईक और वरिष्ठ प्रवक्ता सचिन सावंत सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

  • Congress Morcha 1 November Election Commission :सरकार किसानों की आवाज दबा रही है, कर्जमाफी हर हाल में होनी चाहिए: हर्षवर्धन सपकाल

    Congress Morcha 1 November Election Commission :सरकार किसानों की आवाज दबा रही है, कर्जमाफी हर हाल में होनी चाहिए: हर्षवर्धन सपकाल

    1 नवंबर को निर्वाचन आयोग से जवाब मांगने के लिए कांग्रेस का मोर्चा

    मुंबई: महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि राज्य में मतदाता सूचियों में भारी गड़बड़ी पाई गई है, जिसकी जानकारी कांग्रेस पार्टी ने सबसे पहले ठोस सबूतों के साथ उजागर की थी।
    इसके बावजूद निर्वाचन आयोग ने इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इस “सोए हुए निर्वाचन आयोग” को जगाने के लिए सभी दलों ने 1 नवंबर को एक विशाल मोर्चा आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसमें कांग्रेस पार्टी भी सक्रिय रूप से शामिल होगी।

    बुलढाणा में पत्रकारों से बातचीत में सपकाल ने बताया —

    “आज मुंबई में 1 नवंबर के मोर्चे के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। कुछ व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों से मैं उस बैठक में शामिल नहीं हो सका, लेकिन कांग्रेस के प्रतिनिधि बैठक में मौजूद थे। कांग्रेस पार्टी का इस मोर्चे में पूर्ण सहभाग रहेगा।”

    उन्होंने आगे कहा —

    “इस आंदोलन में कौन शामिल होता है यह गौण विषय है — मुख्य मुद्दा यह है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी को तत्काल सुधारा जाए।”

    बच्चू कडू के आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए सपकाल ने सरकार पर किसानों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
    उन्होंने कहा —

    “सरकार कभी पुलिस को, तो कभी अदालत को आगे कर मुख्य मुद्दे से भाग रही है। अदालत को ढाल बनाकर किसानों के आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है। अगर सरकार में हिम्मत है तो वह सीधे किसानों से बातचीत करे।”

    सपकाल ने कहा कि चुनाव के समय कर्जमाफी का वादा किया गया था, लेकिन अब सरकार टालमटोल कर रही है।

    “किसानों का कर्ज माफ होना ही चाहिए। अगर राज्य सरकार के खजाने में पैसे की कमी है, तो यह उसकी अक्षमता का प्रमाण है।”

    मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा —

    “अगर उनमें थोड़ी भी राजनीतिक साख बची है, तो वे दिल्ली जाकर महाराष्ट्र के लिए विशेष आर्थिक पैकेज लाएं। किसानों को राहत देना सरकार की जिम्मेदारी है, और अब जनता जवाब मांगने के मूड में है।”

    महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों की आवाज दबा रही है। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर को निर्वाचन आयोग से जवाब मांगने के लिए कांग्रेस सहित कई दल मोर्चा निकालेंगे। सपकाल ने सरकार से कर्जमाफी और विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की
  • Toxic Yash Movie: यश की एक्शन थ्रिलर ‘टॉक्सिक’ 19 मार्च 2026 को रिलीज़ होगी, कियारा आडवाणी संग दिखेगी धमाकेदार जोड़ी

    Toxic Yash Movie: यश की एक्शन थ्रिलर ‘टॉक्सिक’ 19 मार्च 2026 को रिलीज़ होगी, कियारा आडवाणी संग दिखेगी धमाकेदार जोड़ी

    साउथ सुपरस्टार यश एक बार फिर बड़े पर्दे पर धमाका करने के लिए तैयार हैं। उनकी बहुप्रतीक्षित एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘टॉक्सिक’ की रिलीज़ डेट की आधिकारिक घोषणा हो चुकी है। फिल्म 19 मार्च 2026 को रिलीज़ होगी — यानी गुड़ीपड़वा और ईद के मौके पर दर्शकों को एक साथ डबल सेलिब्रेशन मिलेगा।

    फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्ममेकर गीतू मोहनदास ने किया है, जो अपनी दमदार विज़ुअल स्टोरीटेलिंग के लिए जानी जाती हैं। इस फिल्म में यश के साथ कियारा आडवाणी मुख्य भूमिका में नजर आएंगी, जबकि नयनतारा, हुमा कुरैशी और अक्षय ओबेरॉय भी महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे हैं।

    पहले जारी किए गए पोस्टर में यश का इंटेंस और रहस्यमयी लुक देखकर फैंस में जबरदस्त उत्सुकता देखने को मिली थी।

    बीते दिनों फिल्म की रिलीज़ डेट आगे बढ़ने की अफवाहें तेज थीं, लेकिन फिल्म समीक्षक तरण आदर्श ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि “टॉक्सिक” तय समय पर ही रिलीज़ होगी, इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है।

    फिल्म की शूटिंग का अंतिम चरण पूरा हो चुका है और जनवरी 2026 से इसका भव्य प्रमोशन अभियान शुरू किया जाएगा। खास बात यह है कि ‘टॉक्सिक’ को भारतीय भाषाओं के अलावा अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में भी डब किया जा रहा है, जिससे इसे एक वैश्विक रिलीज़ का दर्जा मिलेगा।

    ‘केजीएफ’ के बाद ‘टॉक्सिक’ यश की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी फिल्म मानी जा रही है, जो भारतीय सिनेमा के एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रही है।

  • क्या ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ जल्द कहेगा अलविदा? फैंस में बढ़ी बेचैनी, हितेन तेजवानी ने दी सफाई

    क्या ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ जल्द कहेगा अलविदा? फैंस में बढ़ी बेचैनी, हितेन तेजवानी ने दी सफाई

    टीवी जगत में इन दिनों एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है — क्या एकता कपूर का सुपरहिट शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ अब ऑफ-एयर होने वाला है? टीआरपी चार्ट्स में ‘अनुपमा’ के बाद दूसरा स्थान हासिल करने वाला यह शो दर्शकों के दिलों पर राज कर रहा है। लेकिन ताजा खबरों के अनुसार, यह बहुचर्चित सीक्वल अपने तय समय से पहले ही अचानक बंद किया जा सकता है।

    25 साल बाद स्मृति ईरानी की वापसी
    29 जुलाई 2025 को स्टार प्लस पर लॉन्च हुए इस शो ने नॉस्टैल्जिया और नए ड्रामे का बेहतरीन संगम पेश किया। 25 साल बाद स्मृति ईरानी की छोटे पर्दे पर वापसी ने दर्शकों को फिर से तुलसी-मिहिर के दौर में लौटा दिया। शो की कहानी, संवाद और पारिवारिक ट्विस्ट ने पुराने और नए दोनों दर्शकों को जोड़ रखा है।

    हितेन तेजवानी बोले — ‘कोई आधिकारिक जानकारी नहीं’
    शो में करण वीरानी का किरदार निभा रहे अभिनेता हितेन तेजवानी ने इन अफवाहों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

    “मुझे इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है कि शो बंद हो रहा है या नहीं, क्योंकि मैं नियमित रूप से शूटिंग नहीं कर रहा हूं। यह शो पहले से ही लिमिटेड सीरीज़ के तौर पर प्लान किया गया था। अब आगे क्या फैसला होगा, यह चैनल और प्रोडक्शन टीम पर निर्भर करता है।”

    एकता कपूर क्या करेंगी कोई नई घोषणा?
    मनोरंजन जगत में चर्चाएं हैं कि शो का अंत अचानक किया जा सकता है, लेकिन फैंस को उम्मीद है कि एकता कपूर शायद कोई नया ट्विस्ट या स्पिन-ऑफ लेकर आएंगी। तुलसी और मिहिर की जोड़ी को फिर से स्क्रीन पर देखना दर्शकों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं रहा, इसलिए यह खबर उनके लिए निराशाजनक हो सकती है।

    अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ वाकई जल्द अलविदा कह देगा या फिर एकता कपूर इसे किसी भावनात्मक क्लाइमेक्स या बड़े सरप्राइज के साथ आगे बढ़ाएंगी।

  • Bombay High Court बड़ा फैसला: नाती-नातिन को नाना की संपत्ति में नहीं है जन्मसिद्ध अधिकार

    Bombay High Court बड़ा फैसला: नाती-नातिन को नाना की संपत्ति में नहीं है जन्मसिद्ध अधिकार

    मुंबई।
    पारिवारिक संपत्ति को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि हिंदू परिवार में नाती या नातिन को अपने नाना की पैतृक संपत्ति पर कोई जन्मसिद्ध अधिकार प्राप्त नहीं होता। इस निर्णय ने हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 की सीमाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया है।
    इस अधिनियम के अनुसार संयुक्त परिवार की संपत्ति में बेटियों को भी बेटों के समान सह-हिस्सेदार (coparcener) का दर्जा दिया गया है, किंतु यह अधिकार केवल पुत्र-पुत्री तक सीमित है, उनके बच्चों तक नहीं बढ़ाया गया है।

    मामला क्या था

    यह फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट ने ‘विश्वंभर बनाम सॉ. सुनंदा’ मामले में सुनाया। इस मामले में एक नातिन (वादी) ने अपने नाना की पैतृक संपत्ति के बंटवारे और उसमें हिस्सेदारी का दावा किया था।
    वादी के नाना का निधन हो चुका था, और उनके पीछे चार पुत्र और चार पुत्रियां थीं, जिनमें से वादी की माता (नाना की बेटी) जीवित थीं। सुनवाई के दौरान यह प्रश्न उठा कि क्या बेटी की बेटी (नातिन) को अपने नाना की संयुक्त पारिवारिक संपत्ति के विभाजन की मांग करने का अधिकार है।

    अदालत का निर्णय

    हाई कोर्ट ने नातिन के दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि नातिन को अपने नाना की संपत्ति के बंटवारे में कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
    न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 2005 के अधिनियम ने भले ही बेटों और बेटियों को समान दर्जा दिया हो, लेकिन बेटी के बच्चों को उस दायरे में शामिल नहीं किया गया है।
    चूंकि नातिन अपने नाना की पुरुष वंश परंपरा की रेखीय उत्तराधिकारी नहीं है, इसलिए उसे संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में कोई जन्मसिद्ध हिस्सा नहीं मिल सकता।

    मिताक्षरा कानून की पृष्ठभूमि

    हिंदू मिताक्षरा कानून के अनुसार, पैतृक संपत्ति में अधिकार जन्म से प्राप्त होता है। ऐतिहासिक रूप से यह अधिकार केवल पिता और उसके पुरुष वंशजों तक सीमित था।
    2005 के संशोधन अधिनियम के बाद बेटियों को भी यह समान अधिकार मिला, जिससे वे अपने पिता की संयुक्त संपत्ति में हिस्सा मांग सकती हैं।
    हालांकि यह अधिकार केवल बेटी तक सीमित है, उसके बच्चों तक नहीं बढ़ता। इसलिए नाती या नातिन को नाना की संपत्ति में कोई जन्मसिद्ध अधिकार नहीं कहा जा सकता।

    कानून की स्पष्टता और सीमाएँ

    2005 के अधिनियम के बाद उत्तराधिकार संबंधी कई जटिल प्रश्न उभरे हैं, जिनमें यह मुद्दा भी प्रमुख है कि बेटी के बच्चों का उनके नाना की संपत्ति पर क्या अधिकार है।
    परंपरागत मिताक्षरा सिद्धांतों के अनुसार, बेटी के बच्चे नाना की संपत्ति में सह-वारिस नहीं माने जाते।
    हालांकि दुर्लभ परिस्थितियों में, यदि नाना की कोई पुरुष संतान नहीं है और उन्होंने वसीयत द्वारा संपत्ति बेटी के बच्चों को दी है, तो वे ‘सहायकों से प्राप्त विरासत’ (succession through will) के अंतर्गत संपत्ति पा सकते हैं।

    फैसला क्यों महत्वपूर्ण है

    बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नज़ीर (legal precedent) बनेगा।
    यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि उत्तराधिकार के अधिकार सीमित और परिभाषित होते हैं, और कानून में समानता का अर्थ यह नहीं कि वह अगली पीढ़ियों तक स्वतः विस्तारित हो।

    यह फैसला न केवल पारिवारिक संपत्ति विवादों में दिशा-निर्देश प्रदान करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि हिंदू उत्तराधिकार कानून की व्याख्या में पारिवारिक वंश परंपरा की रेखा एक निर्णायक तत्व है।

  • सिर्फ चार दिनों में 6,55,709 मतदाता कैसे जुड़े? – सचिन सावंत ने उठाए गंभीर सवाल-कहा चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत से मतदाता सूची में हुआ बड़ा घोटाला

    सिर्फ चार दिनों में 6,55,709 मतदाता कैसे जुड़े? – सचिन सावंत ने उठाए गंभीर सवाल-कहा चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत से मतदाता सूची में हुआ बड़ा घोटाला

    मुंबई: कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा देश के सामने उजागर किए गए भाजपा और चुनाव आयोग के कथित “वोट चोरी गठजोड़” के बाद महाराष्ट्र की मतदाता सूची में अनियमितताओं का नया खुलासा हुआ है। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सचिन सावंत ने गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल उठाया है कि सिर्फ चार दिनों में 6,55,709 नए मतदाता कैसे जोड़े गए? उन्होंने यह आंकड़ा स्वयं चुनाव आयोग के डेटा के हवाले से पेश किया है।

    सावंत ने कहा कि चुनाव आयोग के अनुसार लोकसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र में 9,29,43,890 पंजीकृत मतदाता थे। इसके बाद केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा 30 अगस्त 2024 तक की गई जांच में यह संख्या बढ़कर 9,53,74,302 हो गई — यानी चार महीनों में 24 लाख मतदाता बढ़े। फिर 15 अक्टूबर 2024 को विधानसभा चुनाव की घोषणा के समय मतदाताओं की संख्या 9,63,69,410 बताई गई।

    चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार नामांकन की पहली तारीख से दस दिन पहले तक मतदाता पंजीकरण खुला रहता है। इसके बाद आठ दिनों तक जांच की जाती है और नामांकन के पहले दिन अंतिम पूरक सूची जारी की जाती है। चूँकि 29 अक्टूबर नामांकन का पहला दिन था, इसलिए पंजीकरण 19 अक्टूबर तक खुला रहा।
    इस अवधि में — 16 अक्टूबर से 19 अक्टूबर के बीच — पंजीकरण सक्रिय रहा और जब 30 अक्टूबर को अंतिम पूरक सूची प्रकाशित की गई, तब मतदाताओं की संख्या 9,70,25,119 पहुँच गई।

    इसका अर्थ है कि सिर्फ चार दिनों में 6,55,709 मतदाता जोड़े गए, जो बेहद असामान्य और संदेहास्पद है। सावंत ने कहा कि मतदाता पंजीकरण पूरे वर्ष नियमित रूप से जारी था, ऐसे में चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद इतनी बड़ी संख्या में पंजीकरण होना “अभूतपूर्व और संदिग्ध” है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए।

    सावंत ने आगे कहा कि यही त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची अब 1 जुलाई 2025 तक बढ़ाई गई है, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को मतदाता सूची तक पहुँच नहीं दी जा रही है और उन्हें इस पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी नहीं दिया जा रहा।

    उन्होंने कहा, “राज्य चुनाव आयोग का यह रवैया पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से तैयार की गई इस मतदाता सूची के आधार पर स्थानीय निकाय चुनाव कराना लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ होगा। विपक्षी दलों की इस विषय पर उठाई गई आपत्ति पूरी तरह न्यायसंगत है।”