Category: Mumbai Police

  • LPG सिलेंडर महंगा होने के बाद कालाबाजारी की आशंका, ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव के बहाने गैस एजेंसियों पर ग्राहकों को ठगने की साजिश!

    LPG सिलेंडर महंगा होने के बाद कालाबाजारी की आशंका, ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव के बहाने गैस एजेंसियों पर ग्राहकों को ठगने की साजिश!

    अश्विनी कुमार

    मुंबई: ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद कुछ गैस एजेंसियों पर ग्राहकों को सिलेंडर की कमी का बहाना बनाकर अधिक पैसे वसूलने का आरोप लग रहा है। एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद कई जगहों पर गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कुछ एजेंसियां सिलेंडर की कमी का बहाना बनाकर अधिक पैसे वसूलने और देरी से डिलीवरी करने की कोशिश कर रही हैं।

    बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद भारत में भी एलपीजी की कीमतों में वृद्धि हुई है। इसके बाद से कई इलाकों में उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा है, जिससे परेशानी बढ़ गई है।

    बताया जा रहा है कि BPCL, HPCL और इंडियन ऑयल से जुड़े कुछ वितरकों ने ग्राहकों को यह कहकर परेशान करना शुरू कर दिया है कि सिलेंडर की सप्लाई कम है या देर से आएगी। इसके चलते कई जगहों पर ब्लैक मार्केटिंग और अतिरिक्त पैसे लेने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

    पहले और अब सिलेंडर के दाम

    सिलेंडर प्रकारपुराना रेट (मुंबई)नया रेट (मुंबई)बढ़ोतरी
    घरेलू LPG (14.2 किलो)₹852.50₹912.50₹60
    कमर्शियल LPG (19 किलो)लगभग ₹1,692लगभग ₹1,836₹115–₹144

    7 मार्च 2026 से देशभर में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत लगभग ₹115 से अधिक बढ़ा दी गई है।

    सप्लाई में देरी और इंतजार

    मुंबई में कई उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुक करने के बाद 2 से 8 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

    सरकार पर उठ रहे सवाल

    विपक्षी दल और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि एजेंसियां ग्राहकों से अधिक पैसे वसूलती हैं या सिलेंडर की कृत्रिम कमी पैदा करती हैं तो केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

    लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो महंगे सिलेंडर और सप्लाई की कमी का फायदा उठाकर ग्राहकों से अवैध वसूली का नेटवर्क तैयार हो सकता है।

    सरकार से कार्रवाई की मांग

    स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि यदि कोई एजेंसी तय कीमत से ज्यादा पैसे वसूलती है या जानबूझकर सप्लाई रोकती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

    लोगों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच रसोई गैस पहले ही आम लोगों के बजट पर बोझ बन चुकी है। ऐसे में अगर एजेंसियों की मनमानी बढ़ती है तो इसका सीधा असर आम परिवारों पर पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को निगरानी बढ़ाने, शिकायत तंत्र मजबूत करने और कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।

  • Mumbai Rail Neer Contractor :रेल नीर ठेकेदार पर रंगदारी का आरोप: टिळक नगर में कैंटीन संचालक से मांगे 2 लाख, महीनों तक वसूले 30-30 हजार

    Mumbai Rail Neer Contractor :रेल नीर ठेकेदार पर रंगदारी का आरोप: टिळक नगर में कैंटीन संचालक से मांगे 2 लाख, महीनों तक वसूले 30-30 हजार

    टिळक नगर में कैंटीन संचालक से रंगदारी, गैंग बनाकर करता रहा वसूली फिलहाल दो पर मामला दर्ज

    “प्रोटेक्शन मनी” के नाम पर 2 लाख की मांग, महीनों तक वसूले 30-30 हजार रुपये
    शिकायत के बाद कई कंप्लेनर आए सामने

    मुंबई | प्रतिनिधि

    मुंबई के टिळक नगर इलाके में रेल नीर(Rail Neer) ठेकेदारी से जुड़े एक व्यक्ति पर कैंटीन संचालक से रंगदारी मांगने और मारपीट करने का गंभीर मामला सामने आया है। टिळक नगर पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता शिवप्रकाश रामलखन यादव (37) टिळक नगर रेलवे स्टेशन के पास एक कैंटीन चलाते हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच दो स्थानीय लोगों ने उनसे “प्रोटेक्शन मनी” के नाम पर लगातार पैसों की मांग की और डराकर उनसे रकम वसूली।

    2 लाख रुपये की मांग, हर महीने हफ्ता

    शिकायत के मुताबिक आरोपी सेतुरामानंद पिल्लई उर्फ सेतुभाई और सुभाष कांदर उर्फ सुभाषभाई ने कैंटीन चलाने के बदले पहले 2 लाख रुपये प्रोटेक्शन मनी और हर महीने 40 हजार रुपये देने का दबाव बनाया।

    पीड़ित ने आरोप लगाया कि डर के कारण उसने पहले 1 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए और इसके बाद कई महीनों तक हर महीने करीब 30 हजार रुपये आरोपियों को देता रहा।

    पैसे देने से मना करने पर मारपीट

    पीड़ित के अनुसार फरवरी 2026 में जब उसने और पैसे देने से इनकार किया तो आरोपियों ने उसे टिळक नगर इलाके में बुलाकर कथित रूप से मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद उसने टिळक नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत के बाद सामने आ रहे अन्य मामले

    सूत्रों के अनुसार शिकायत सामने आने के बाद इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की भी शिकायतें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि रेल नीर व्यवसाय में पार्टनर रहे मुकेश मिश्रा के साथ भी आरोपियों द्वारा मारपीट और धोखाधड़ी की घटना हुई थी।

    आरोप है कि प्रोटेक्शन मनी नहीं देने पर दबाव बनाकर उनका धंधा हथिया लिया गया, जिसके बाद मुकेश मिश्रा अपने गांव लौट गए। डर के कारण उन्होंने उस समय पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई।

    इन धाराओं में मामला दर्ज

    टिळक नगर पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 352, 351(3), 308(5), 3(5) और 115(2) के तहत मामला दर्ज किया है।

    मामले की जांच पुलिस उपनिरीक्षक मयूर सुलेपाटिल को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

  • Drugs Racket: बांद्रा टर्मिनस पर आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई,  13.834 किलो चरस बरामद!

    Drugs Racket: बांद्रा टर्मिनस पर आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई, 13.834 किलो चरस बरामद!

    आर.एस. नेटवर्क। सुजीत मिश्र

    मुंबई: पश्चिम रेलवे के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी(Drugs racket) के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत मुम्बई डिवीजन स्थित बाँद्रा टर्मिनस स्थित आरपीएफ़ ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए लगभग 13.834 किलोग्राम चरस बरामद की है जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत ₹13 करोड़ 83 लाख 40 हजार आंकी गई है।


    यह कार्रवाई पश्चिम रेलवे के प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त के नेतृत्व तथा वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त के दिशा-निर्देश में की गई। सुरक्षा आयुक्त रजत कुंदगीर एवं सहायक सुरक्षा आयुक्त अजीत डी. माने के मार्गदर्शन में मुंबई सेंट्रल मंडल की टीम ट्रेनों में मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध सतत अभियान चला रही है।
    21 फरवरी 2026 को लगभग 4:20 बजे गाड़ी संख्या 19038 (अवध एक्सप्रेस) के बांद्रा टर्मिनस के प्लेटफार्म संख्या 4 पर आगमन के पश्चात कोच लॉकिंग के दौरान ड्यूटी पर तैनात आरक्षक को गार्ड के समीप स्थित सामान्य डिब्बे में एक लावारिस बैग संदिग्ध अवस्था में मिला। तत्काल इसकी सूचना ड्यूटी अधिकारी को दी गई जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया और संयुक्त जाँच प्रारंभ की गई। घटनास्थल पर आरपीएफ, (जीआरपी), डॉग स्क्वॉड तथा एफएसएल टीम को बुलाया गया। आरपीएफ के नार्को विशेषज्ञ डॉग “टैंगा” तथा जीआरपी के डॉग “रॉकी” द्वारा बैग में मादक पदार्थ होने की पुष्टि की गई। स्वतंत्र पंचों की उपस्थिति में जब बैग को खोला गया तो उसमें कपड़ों के भीतर सावधानीपूर्वक छिपाकर रखे गए 31 पैकेट चरस बरामद हुए।
    मौके पर प्रत्येक पैकेट का वजन किया गया, जिसमें कुल वजन 13.834 किलोग्राम पाया गया। एफएसएल टीम द्वारा संदिग्ध सामग्री की प्राथमिक जाँच की गई तथा संपूर्ण कार्रवाई की वीडियोग्राफी आईपीएफ जगदीश जाट व आरपीएफ़ के विनीत कुमार की देख रेख में कई गई व फोटोग्राफी के साक्ष्य को सुरक्षित किए गए।
    इस संबंध में जीआरपी बांद्रा द्वारा अज्ञात आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8(C) एवं 20(b)(ii)(C) के तहत अपराध क्रमांक 42/26 दिनांक 21.02.2026 को मामला दर्ज कर आगे की जाँच प्रारंभ कर दी गई है।
    रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों एवं जवानों की सतर्कता, सजगता और कर्तव्यनिष्ठा के परिणामस्वरूप यह बड़ी तस्करी प्रयास विफल हुआ। इस कार्रवाई को ट्रेनों के माध्यम से संचालित मादक पदार्थ नेटवर्क पर प्रभावी प्रहार माना जा रहा है।
    आरपीएफ ने स्पष्ट किया है कि रेलवे परिसरों में अवैध गतिविधियों के विरुद्ध इसी प्रकार सघन निगरानी एवं अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे। ज्ञातव्य हो कि आईपीएफ जगदीश पी जाट ने जब से बाँद्रा टर्मिनस का चार्ज लिया है तब से असामाजिक तत्वों एवं मादक पदार्थो के सप्लाई करने वालों की कमर तोड़ कर रख दी है।

  • Bank Fraud: नवी मुंबई में 6.90 करोड़ की SBI बैंक से धोखाधड़ी, फर्जी सरकारी दस्तावेजों से 51 लोगों ने लिया लोन

    Bank Fraud: नवी मुंबई में 6.90 करोड़ की SBI बैंक से धोखाधड़ी, फर्जी सरकारी दस्तावेजों से 51 लोगों ने लिया लोन

    नवी मुंबई। सीबीडी बेलापुर स्थित State Bank of India की शाखा में सरकारी कंपनियों के फर्जी पहचान पत्र और वेतन प्रमाणपत्र के आधार पर 51 लोगों द्वारा करीब 6 करोड़ 90 लाख रुपये की धोखाधड़ी(Bank Fraud) किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

    जांच में इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे येमनाथ नाइक राठोड़, सद्दाम अली शेख और उन्हें काम सौंपने वाले राजू नायके का नाम सामने आया है। बताया जा रहा है कि येमनाथ राठोड़ Central Reserve Police Force (सीआरपीएफ) में कार्यरत है और वह सीआरपीएफ कर्मियों की व्यक्तिगत ऋण फाइलें एसबीआई में मंजूरी के लिए ले जाता था। इसी दौरान उसकी बैंक अधिकारियों से पहचान हो गई, जिसका उसने दुरुपयोग किया।

    आरोप है कि अक्टूबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच राठोड़ ने 51 व्यक्तियों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक से 6.90 करोड़ रुपये का व्यक्तिगत ऋण मंजूर करा लिया। लोन स्वीकृत होने के बाद आरोपियों ने कुछ महीनों तक किस्तें भरकर बैंक का विश्वास भी जीत लिया, लेकिन बाद में खातों में वेतन आना बंद हो गया और खाते एनपीए की स्थिति में पहुंचने लगे। इसी के बाद बैंक को शक हुआ।

    जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने लोन लेने के लिए GAIL, Bharat Heavy Electricals Limited (भेल), Steel Authority of India Limited (सेल), Oil and Natural Gas Corporation (ओएनजीसी), Indian Oil Corporation (आईओसीएल), Hindustan Aeronautics Limited, Bharat Sanchar Nigam Limited (बीएसएनएल) और National Highways Authority of India (एनएचएआई) जैसी नामी सरकारी कंपनियों के फर्जी पहचान पत्र और वेतन प्रमाणपत्र तैयार किए थे।

    जब बैंक ने संबंधित कंपनियों के मुंबई और हैदराबाद कार्यालयों से संपर्क कर सत्यापन किया तो पता चला कि जिन 51 लोगों के नाम पर लोन लिया गया, वे इनमें से किसी भी कंपनी में कार्यरत नहीं हैं। इसके बाद पूरे घोटाले का खुलासा हुआ।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस आरोपियों की भूमिका तथा बैंक की आंतरिक प्रक्रिया की भी जांच कर रही है।

  • CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns: क्या ट्रांसफर रोकने के लिए सीएसएमटी पार्सल में कार्यरत शैलेन्द्र पंडित ने शिकायत को बनाया हथियार?

    CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns: क्या ट्रांसफर रोकने के लिए सीएसएमटी पार्सल में कार्यरत शैलेन्द्र पंडित ने शिकायत को बनाया हथियार?

    ” विजिलेंस पर दबाव डालने की कोशिश या प्रशासन को खुली चुनौती!”–सीएसएमटी पार्सल प्रकरण ने उठाया सवाल

    सीएसएमटी पार्सल विभाग में स्थानांतरण के बाद जीआरपी शिकायत से मचा बवाल, विजिलेंस कार्रवाई और प्रशासनिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल
    सीएसएमटी पार्सल विभाग में स्थानांतरण के बाद जीआरपी शिकायत से मचा बवाल, विजिलेंस कार्रवाई और प्रशासनिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल

    मुंबई: मध्य रेलवे के मुंबई डिवीजन(CR Mumbai Division) स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के पार्सल विभाग में सामने आया विवाद अब एक कर्मचारी के स्थानांतरण से कहीं आगे बढ़ चुका है। यह मामला रेलवे की प्रशासनिक पारदर्शिता, विजिलेंस तंत्र की स्वतंत्रता और शिकायत प्रणाली के संभावित दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दों को केंद्र में ले आया है।

    सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस की अनुशंसा के आधार पर सीएसएमटी पार्सल सीबीएस बैच इंचार्ज शैलेन्द्र पंडित का स्थानांतरण सीएसएमटी से शिवुड़–दारावे स्टेशन किया गया। लेकिन स्थानांतरण आदेश जारी (CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns) होने के तुरंत बाद 11 फरवरी 2026 को सीएसएमटी जीआरपी में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराए जाने से पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    https://epaper.rashtriyaswabhimaan.com/view/501/rashtriya-swabhimaan

    जीआरपी में प्रस्तुत शिकायत(Complain) में मुंबई डिवीजन के सीनियर डीसीएम डॉ. शिवराज मानसपुरे, मध्य रेलवे के डिप्टी सीवीओ (ट्रैफिक) प्रदीप हिरडे तथा चीफ विजिलेंस इंस्पेक्टर सुमित दूधे के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। रेलवे के जानकार अधिकारियों का कहना है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के तुरंत बाद इस प्रकार की शिकायत दर्ज होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इससे यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि कहीं यह कदम विभागीय कार्रवाई को प्रभावित करने या दबाव बनाने की रणनीति तो नहीं।

    पहले से दर्ज थीं अनियमितताएँ

    • दस्तावेजों के अनुसार, संबंधित कर्मचारी की कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में भी आपत्तियाँ दर्ज की जा चुकी थीं।
    • 23 अप्रैल 2025 को निरीक्षण में अनियमितता दर्ज होने की बात सामने आई।
    • 25 जून 2025 को ड्यूटी से अनुपस्थित पाए जाने का उल्लेख रिकॉर्ड में है।
    • ड्यूटी मस्टर में नाम का कॉलम खाली छोड़ने और बाद में हस्ताक्षर करने की प्रवृत्ति भी नोट की गई।
    • 3 अगस्त 2025 को सीआरबी निरीक्षण के दौरान अनुपस्थिति के बाद चेतावनी जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    इन्हीं तथ्यों के आधार पर चार्जशीट और बाद में स्थानांतरण आदेश जारी किए जाने की बात कही जा रही है।

    एसोसिएशन की मान्यता पर भी प्रश्न

    मामले का एक और संवेदनशील पहलू यह है कि शिकायत पत्र ‘ऑल इंडिया एससी एंड एसटी रेलवे एम्प्लॉइज एसोसिएशन’ के नाम से प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, रेलवे के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार संबंधित संगठन की रेलवे बोर्ड से मान्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि संगठन की वैधता संदिग्ध पाई जाती है, तो यह मामला फर्जी संगठन के नाम पर दबाव बनाने तक जा सकता है।

    क्या शिकायत तंत्र बन रहा है ‘ढाल’?

    रेलवे के भीतर अब यह चर्चा तेज है कि क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए शिकायत प्रणाली का उपयोग एक ‘ढाल’ के रूप में किया गया। यदि हर विभागीय जांच या स्थानांतरण के बाद इसी तरह की रणनीति अपनाई जाती है, तो निष्पक्ष कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के लिए भय और असुरक्षा का वातावरण बन सकता है।

    एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि यदि जांच एजेंसियों और विजिलेंस अधिकारियों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाएगा, तो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करना कठिन हो जाएगा। यह केवल एक कर्मचारी बनाम प्रशासन का मामला नहीं, बल्कि संस्थागत व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है।

    रेलवे प्रशासन के लिए चेतावनी संकेत

    यह प्रकरण रेलवे के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। यदि विजिलेंस की अनुशंसा पर की गई कार्रवाई को शिकायतों के माध्यम से दबाने की प्रवृत्ति बढ़ती है, तो भविष्य में ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है।

    रेलवे को चाहिए कि:

    • शिकायत की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराए।
    • विजिलेंस कार्रवाई के तथ्यों को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करे (नियमों के दायरे में)।
    • एसोसिएशन की मान्यता की सत्यता की जांच कर स्पष्ट स्थिति सामने लाए।
    • ईमानदार अधिकारियों को संस्थागत संरक्षण प्रदान करे।

    यदि समय रहते स्पष्ट और दृढ़ रुख नहीं अपनाया गया, तो यह मामला भविष्य में अनुशासनात्मक प्रक्रिया को कमजोर करने वाली मिसाल बन सकता है।

    अब सबकी निगाहें रेलवे बोर्ड और मध्य रेलवे के शीर्ष प्रशासन पर टिकी हैं कि वे संस्थागत साख को मजबूत करते हैं या यह प्रकरण भी फाइलों में सिमट कर रह जाता है।

  • The Freedom Trail Mumbai: मुंबई का फ्रीडम ट्रेल खुद आज़ादी को तरस रहा, आज़ादी के रास्ते पर हॉकर्स का कब्ज़ा

    The Freedom Trail Mumbai: मुंबई का फ्रीडम ट्रेल खुद आज़ादी को तरस रहा, आज़ादी के रास्ते पर हॉकर्स का कब्ज़ा

    मुंबई। भारत की आज़ादी की कहानी को ज़मीन पर उतारने वाला मुंबई का ‘फ्रीडम ट्रेल’(Mumbai Freedom Trail) आज खुद बेबसी की तस्वीर बन चुका है। जिस ऐतिहासिक पैदल मार्ग को देश के स्वतंत्रता संग्राम, खासकर अगस्त क्रांति मैदान (ग्वालिया टैंक) से जुड़े Quit India Movement की स्मृति को संजोने के लिए विकसित किया गया था, वही ट्रेल आज हॉकर्स, अतिक्रमण और अव्यवस्था का शिकार है।

    आजादी के नायकों की विरासत को दर्शाने वाला यह क्यूरेटेड वॉकिंग रूट आज भी हॉकर्स से आज़ाद नहीं हो पाया है। जगह-जगह ठेले, अस्थायी दुकानें और अवैध कब्ज़े न सिर्फ पैदल यात्रियों की राह रोक रहे हैं, बल्कि इस ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

    विडंबना यह है कि जिस रास्ते ने देश को “अंग्रेज़ों भारत छोड़ो” का नारा दिया, उसी रास्ते पर आज नागरिकों को चलने की आज़ादी तक नहीं मिल रही। पर्यटक, इतिहास प्रेमी और स्थानीय नागरिक—सभी को संकरे रास्तों, भीड़ और गंदगी से जूझना पड़ता है। सूचना पट्टिकाएं, विरासत चिन्ह और गाइडेड साइनबोर्ड कई जगह हॉकर्स के पीछे छिप चुके हैं।

    नगर निगम और प्रशासन ने फ्रीडम ट्रेल को सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत के रूप में विकसित करने के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को आईना दिखा रही है। सवाल यह है कि जब मुंबई स्मार्ट सिटी, हेरिटेज सिटी और टूरिज़्म हब बनने की बात करती है, तो क्या उसकी आज़ादी की सबसे बड़ी कहानी को यूं ही अतिक्रमण के हवाले छोड़ दिया जाएगा?

    आज ज़रूरत इस बात की है कि फ्रीडम ट्रेल को सिर्फ इतिहास की निशानी नहीं, बल्कि सच में ‘फ्री’ बनाया जाए।

    अगर यही हाल रहा, तो आने वाली पीढ़ियां आज़ादी की कहानी किताबों में पढ़ेंगी—और मुंबई में उसका रास्ता तलाशती रह जाएंगी।

  • Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे

    Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे

    अजित पवार के असामयिक निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां हर फैसला इतिहास लिख सकता है। उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख के रूप में अजित पवार केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि सत्ता संतुलन की धुरी थे। उनके जाने के बाद न केवल पार्टी, बल्कि पूरी महायुति और विपक्षी खेमे में भी राजनीतिक भूचाल आ गया है।

    इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभर आए हैं। भले ही अजित पवार की बगावत के बाद एनसीपी दो गुटों में बंटी हो, लेकिन संकट की इस घड़ी में परिवार और पार्टी—दोनों के सबसे वरिष्ठ मार्गदर्शक के रूप में शरद पवार की ओर सभी की निगाहें टिक गई हैं।

    क्या होगा अजित पवार गुट का भविष्य?

    सबसे बड़ा और निर्णायक सवाल यही है कि अब अजित पवार की एनसीपी का रास्ता क्या होगा? क्या यह गुट स्वतंत्र पहचान बनाए रख पाएगा या फिर इतिहास खुद को दोहराते हुए दोनों एनसीपी का विलय होगा?

    महानगरपालिका चुनाव के दौरान पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी को हराने के लिए अजित पवार का शरद पवार के साथ आना कोई सामान्य राजनीतिक घटना नहीं थी। तभी से यह संकेत मिलने लगे थे कि दोनों गुटों के बीच जमी बर्फ पिघल रही है। खुद अजित पवार ने भी एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि कार्यकर्ता एकजुटता चाहते हैं और सही समय पर बड़ा फैसला लिया जाएगा।
    अब वही “सही समय” नियति ने तय कर दिया है।

    41 विधायक, एक सांसद और सत्ता की चाबी

    फिलहाल अजित पवार गुट के पास महाराष्ट्र विधानसभा में 41 विधायक और लोकसभा में एक सांसद—सुनील तटकरे—हैं। यह संख्या किसी भी गठबंधन सरकार को बनाने या गिराने की ताकत रखती है। यही वजह है कि बीजेपी, शिंदे सेना और शरद पवार—तीनों खेमे इस गुट पर नज़र गड़ाए बैठे हैं।

    अगर दोनों गुटों का विलय होता है तो सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। ऐसे में शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल डिप्टी सीएम पद के प्रबल दावेदार के रूप में उभर सकते हैं। लेकिन यह राह आसान नहीं होगी। इसके लिए उन्हें प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे जैसे कद्दावर नेताओं का भरोसा जीतना होगा—जो कभी अजित पवार के सबसे विश्वस्त सिपहसालार रहे हैं।

    पटेल–तटकरे–भुजबल: किंगमेकर की भूमिका

    अजित पवार के बाद उनके गुट में सबसे मजबूत स्तंभ प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे हैं। दोनों नेताओं ने एनसीपी के विभाजन में निर्णायक भूमिका निभाई थी। अब वही नेता तय करेंगे कि पार्टी का भविष्य किस दिशा में जाएगा—शरद पवार की छांव में या बीजेपी के साथ सत्ता के केंद्र में।

    इसके अलावा छगन भुजबल जैसे अनुभवी नेता भी इस राजनीतिक शतरंज के अहम मोहरे हैं। उनका एक कदम कई समीकरणों को उलट सकता है।

    सुनेत्रा पवार की अग्निपरीक्षा

    अजित पवार के निधन के बाद सबसे कठिन परीक्षा उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के सामने है। निजी शोक और राजनीतिक जिम्मेदारी—दोनों का बोझ एक साथ उठाना आसान नहीं होगा। राज्यसभा सांसद होने के नाते वे पहले ही संसद में मौजूद हैं, लेकिन अब उन्हें पार्टी की विरासत को संभालने का प्रस्ताव भी मिल सकता है।

    राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि बीजेपी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम पद का प्रस्ताव दे सकती है। इससे एक ओर अजित समर्थकों में भावनात्मक जुड़ाव बना रहेगा, तो दूसरी ओर महायुति की स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। साथ ही कैबिनेट में एक महिला चेहरे की एंट्री भी बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी हो सकती है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला शिंदे सेना से विचार-विमर्श के बाद ही होगा।

    पार्थ और जय पवार: उत्तराधिकार का संकट

    अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार पहले ही जमीन घोटाले के आरोपों और 2019 की लोकसभा हार के चलते कमजोर स्थिति में हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल बड़ी जिम्मेदारी मिलना मुश्किल माना जा रहा है। छोटे बेटे जय पवार राजनीति में अभी सक्रिय नहीं हैं।
    इस हालात में शरद पवार की भूमिका निर्णायक हो जाती है। माना जा रहा है कि उनकी सहमति और मार्गदर्शन के बिना पवार परिवार और एनसीपी का कोई भी बड़ा फैसला संभव नहीं है।

    अजित पवार का जाना केवल एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक युगांतकारी क्षण है। आने वाले दिनों में तय होगा कि एनसीपी फिर से एकजुट होकर नई ताकत बनेगी या इतिहास के पन्नों में बिखर जाएगी। इतना तय है कि इस पूरे घटनाक्रम की धुरी—एक बार फिर—शरद पवार ही होंगे।

  • Western Railway News: चलती लोकल बनी कत्लखाना! मलाड स्टेशन पर प्रोफेसर की चाकुओं से नृशंस हत्या, रेलवे की नाक के नीचे गैंगराज

    Western Railway News: चलती लोकल बनी कत्लखाना! मलाड स्टेशन पर प्रोफेसर की चाकुओं से नृशंस हत्या, रेलवे की नाक के नीचे गैंगराज

    सुजीत मिश्र | मुंबई।
    मुंबई की लोकल ट्रेनें अब सिर्फ सफर का जरिया नहीं रहीं, बल्कि दिनदहाड़े अपराध की चलती-फिरती प्रयोगशाला बन चुकी हैं। पश्चिम रेलवे की लोकल ट्रेनों में कानून, सुरक्षा और इंसानियत—तीनों का सार्वजनिक रूप से अंतिम संस्कार हो चुका है। गुरुवार, 22 जनवरी को बोरीवली जाने वाली स्लो लोकल में मलाड रेलवे स्टेशन पर मामूली बहस ने वह भयावह मोड़ लिया, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया। 33 वर्षीय प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह की चलती ट्रेन में चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई।

    यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सरकारी नाकामी का खून से लिखा दस्तावेज़ है। आरोपी 27 वर्षीय ओमकार शिंदे की गिरफ्तारी अगले दिन हो गई, लेकिन असली सवाल गिरफ्तारी का नहीं—सवाल यह है कि ऐसे कातिल लोकल ट्रेनों में बेखौफ कैसे घूम रहे हैं?

    मुंबई लोकल में अब अकेले यात्री नहीं चलते—गुंडों के झुंड चलते हैं। ये गिरोह तय करते हैं कि कौन चढ़ेगा, कौन उतरेगा और कौन ज़िंदा बचेगा। विरोध किया तो मारपीट, लूट और अब हत्या तय है। विकलांग डिब्बों तक पर दबंगों और माफियाओं का कब्ज़ा है, जहाँ असल में दिव्यांग यात्रियों की एंट्री ही मुश्किल हो चुकी है। यह अव्यवस्था नहीं, बल्कि संस्थागत अपराध है।

    रेलवे के उच्चाधिकारी और कमर्शियल विभाग या तो गहरी नींद में हैं या जानबूझकर आँखें मूंदे बैठे हैं। न नियमित पेट्रोलिंग, न अपराधियों पर सख़्त लगाम। बीते साल महिला डिब्बे में मारपीट का वीडियो वायरल हुआ, चेतावनियाँ दी गईं—लेकिन प्रशासन ने खून बहने तक इंतज़ार किया।

    मृतक आलोक कुमार सिंह उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के चंदवक थाना क्षेत्र के पड़रछा गाँव के निवासी थे और मुंबई के प्रतिष्ठित एन.एम. कॉलेज, विले पार्ले में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। एक शिक्षक, एक शिक्षित नागरिक अगर लोकल ट्रेन में सुरक्षित नहीं है, तो मजदूर, छात्र और महिला यात्रियों की सुरक्षा का दावा कौन करेगा?

    सीधा सवाल, सीधा आरोप—
    क्या मुंबई लोकल अब अपराधियों के लिए फ्री ज़ोन बन चुकी है?
    क्या रेलवे प्रशासन को चेतना सिर्फ लाशों की गिनती से आती है?

    यह घटना चेतावनी नहीं, अंतिम अलार्म है। अगर अब भी सख़्त और दिखाई देने वाली कार्रवाई नहीं हुई, तो अगली मौत किसी और की होगी—और जिम्मेदार फिर भी कोई नहीं होगा।

  • Mumbai Security: बलॉर्ड पियर-फोर्ट  इलाके में अवैध गैरेज और पार्किंग से बढ़ता खतरा

    Mumbai Security: बलॉर्ड पियर-फोर्ट इलाके में अवैध गैरेज और पार्किंग से बढ़ता खतरा

    मुंबई। मुंबई के सबसे संवेदनशील इलाकों में शुमार फोर्ट क्षेत्र में अवैध गैरेज और गैरकानूनी पार्किंग का जाल अब शहर की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। बजू कोटक मार्ग, आर. कामानी रोड समेत आसपास की कई गलियों में सार्वजनिक सड़कों को अवैध रूप से कार रिपेयरिंग वर्कशॉप और पार्किंग में तब्दील कर दिया गया है। यह स्थिति न सिर्फ ट्रैफिक व्यवस्था को बाधित कर रही है, बल्कि भविष्य में आपराधिक और देशद्रोही गतिविधियों को भी खुला न्योता दे सकती है।

    संवेदनशील इलाका, सुरक्षा मानकों की अनदेखी

    फोर्ट क्षेत्र में मंत्रालय, बॉम्बे हाईकोर्ट, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और पोर्ट ट्रस्ट जैसे देश के अत्यंत महत्वपूर्ण संस्थान स्थित हैं। इसके बावजूद यहां सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
    गौरतलब है कि मुंबई पहले भी इसी क्षेत्र के आसपास आतंकी और देशद्रोही घटनाओं का दंश झेल चुकी है। ऐसे में मौजूदा हालात प्रशासन की लापरवाही को उजागर करते हैं।

    हर गली में अवैध गैरेज का जाल

    स्थानीय नागरिकों के अनुसार बजू कोटक मार्ग, आर. कामानी रोड और आसपास की गलियों में खुलेआम अवैध कार और बाइक रिपेयरिंग गैरेज संचालित हो रहे हैं।
    सार्वजनिक सड़कों पर दिनदहाड़े गाड़ियां खड़ी कर मरम्मत, ऑयल चेंज और लंबे समय तक पार्किंग की जा रही है, जो कानून का सीधा उल्लंघन है।

    अवैध पार्किंग बना सुरक्षा के लिए सीधा खतरा

    बिना किसी जांच के लंबे समय तक खड़ी रहने वाली गाड़ियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
    विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी गाड़ियों का इस्तेमाल—

    • संदिग्ध वस्तुएं, विस्फोटक या हथियार छिपाने में
    • रेकी (टोह लेने) के लिए
    • अपराध के बाद फरार होने के साधन के रूप में
      किया जा सकता है। यह स्थिति अपराधियों और देशद्रोही तत्वों को आसान कवर उपलब्ध कराती है।

    पुलिस और BMC की भूमिका पर सवाल

    चौंकाने वाली बात यह है कि कई अवैध गैरेज ट्रैफिक चौकी और पुलिस स्टेशन के बेहद करीब चल रहे हैं। इसके बावजूद न तो नियमित कार्रवाई हो रही है और न ही कोई स्थायी समाधान नजर आता है।
    अब तक की कार्रवाई सिर्फ नाममात्र के जुर्मानों तक सीमित रही है, जिससे अवैध गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

    मामला केवल ट्रैफिक नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का

    यह मुद्दा सिर्फ अतिक्रमण या ट्रैफिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

    जनहित में स्पष्ट मांग

    स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि—

    • फोर्ट इलाके में अवैध गैरेजों की तत्काल पहचान कर उन्हें हटाया जाए
    • बिना अनुमति खड़ी सभी गाड़ियों की गहन जांच कर जब्ती की जाए
    • जिम्मेदार पुलिस और मुंबई महानगरपालिका (BMC) अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए

    इस खबर को प्रकाशित करने का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि मुंबई की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो और किसी भी आपराधिक या देशद्रोही तत्व को शहर में गलत गतिविधियों का मौका न मिले।
    खबर का असर

    खबर सामने आने के बाद संबंधित ट्रैफिक पुलिस ने PSI संदीप सोनावाने के नेतृत्व में अवैध रूप से खड़ी गाड़ियों और सड़क पर कब्जा कर चलाए जा रहे गैरेजों पर कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान अवैध पार्किंग और सड़क पर कब्जा करने वाले गैरेज व वाहन मालिकों पर मात्र ₹1200-₹1200 का जुर्माना लगाया गया और गाड़ियां हटाई गईं।

    हालांकि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतनी मामूली कार्रवाई से अवैध गतिविधियों पर रोक लगना मुश्किल है। लोगों के अनुसार, जब तक सख्त और स्थायी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक अवैध गैरेज और पार्किंग का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

  • Mumbai BMC News: मुंबई में शिवसेना कॉरपोरेटर्स के लिए विशेष ट्रेनिंग कैंप, एकनाथ शिंदे देंगे मार्गदर्शन

    आर. एस. नेटवर्क

    मुंबई | मुंबई महानगरपालिका चुनाव में जीत हासिल करने वाले शिवसेना के 29 नवनिर्वाचित कॉरपोरेटर्स के लिए मुंबई में एक विशेष ट्रेनिंग कैंप का आयोजन किया गया है। यह जानकारी युवा सेना के जनरल सेक्रेटरी और कॉरपोरेटर अमेय घोले ने दी।अमेय घोले ने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर के दौरान शिवसेना के मुख्य नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कॉरपोरेटर्स को मुंबई महानगरपालिका की कार्यप्रणाली, प्रमुख विकास योजनाओं और आगामी पांच वर्षों के रोडमैप पर विस्तृत मार्गदर्शन देंगे। इसके साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेता वार्ड स्तर पर प्रभावी ढंग से कार्य करने के तरीकों की भी जानकारी देंगे।यह तीन दिवसीय ट्रेनिंग कैंप मुंबई के होटल ताज लैंड्स एंड में आयोजित किया जा रहा है। घोले ने कहा कि चुनाव परिणाम घोषित होने के अगले ही दिन से शिवसेना के कॉरपोरेटर्स ने जनहित के कार्यों की शुरुआत कर दी है, ताकि जनता द्वारा जताए गए विश्वास पर खरा उतरा जा सके।उन्होंने यह भी बताया कि राज्यभर में शिवसेना के कुल 397 कॉरपोरेटर्स निर्वाचित हुए हैं, जो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में जनता के भरोसे और पार्टी की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।मुंबई के महापौर पद को लेकर घोले ने स्पष्ट किया कि यह पद ग्रैंड अलायंस के खाते में जाएगा और इस संबंध में अंतिम निर्णय पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।