Category: Uttar Pradesh

  • Varanasi News: नेहियां के 18 तालाब पर हुआ अतिक्रमण या निगले गए, फाइलों में दफन कार्रवाई, लेखपाल-एसडीएम की निष्क्रियता या घूसखोरी के आगे ‘मुरदा’ हुआ प्रशासन?

    Varanasi News: नेहियां के 18 तालाब पर हुआ अतिक्रमण या निगले गए, फाइलों में दफन कार्रवाई, लेखपाल-एसडीएम की निष्क्रियता या घूसखोरी के आगे ‘मुरदा’ हुआ प्रशासन?

    नहियां ग्रामसभा के 18 तालाब खत्म, जल-संकट गहराया: पर्यावरण और जनजीवन पर सीधा असर

    वाराणसी (Varanasi News)। नहियां ग्रामसभा में तालाबों पर अवैध कब्जे का असर अब गंभीर जल-संकट के रूप में सामने आ रहा है। मगर यहां खामोशी है—लंबी, गहरी और संदिग्ध। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों, ज्ञापनों और न्यायालयी आदेशों के बावजूद न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हुई।

    https://epaper.rashtriyaswabhimaan.com/clip/448

    सवाल सीधा है—क्या यह महज़ लापरवाही है, या फिर मिलीभगत और घूसखोरी के आगे प्रशासन ने घुटने टेक दिए हैं? स्थिति की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं—

    1. 18 तालाबों पर पूरा कब्जा
      ग्रामसभा के सभी 18 तालाबों पर अवैध कब्जा हो चुका है। तालाबों की जमीन पर पक्के मकान और निर्माण खड़े कर दिए गए हैं।
    2. तालाबों का पानी पूरी तरह सूखा
      अतिक्रमण और भराव के कारण तालाबों में पानी नहीं बचा है। जलस्रोत खत्म होने से गांव की प्राकृतिक जल-व्यवस्था टूट चुकी है।
    3. पर्यावरण को भारी नुकसान
      तालाबों के खत्म होने से पर्यावरण असंतुलन बढ़ा है। गर्मी में तापमान अधिक महसूस होता है और हरियाली कम होती जा रही है।
    4. भूजल स्तर बेहद नीचे गया
      तालाब खत्म होने से पानी का रिचार्ज बंद हो गया है, जिससे भूजल स्तर तेजी से नीचे चला गया है।
    5. गर्मियों में पेयजल संकट
      गर्मी के मौसम में कई हैंडपंप सूख जाते हैं। कुछ-कुछ इलाकों में लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल पाता।
    6. प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
      तालाब खत्म होने, घर बन जाने और जल-संकट के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
    7. ग्रामीणों की मांग
      ग्रामीणों ने सभी तालाबों का तत्काल सीमांकन, अतिक्रमण हटाने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और जल-संरक्षण योजना लागू करने की मांग की है।

    गांव वालों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि जीवन और भविष्य का सवाल है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में नहियां ग्रामसभा गंभीर जल-आपदा की चपेट में आ सकती है।

  • SP President Akhilesh Yadav Offers CM Post to Brajesh Pathak & Keshav Prasad Maurya :  100 विधायक लाओ, सीएम बन जाओ:अखिलेश यादव

    SP President Akhilesh Yadav Offers CM Post to Brajesh Pathak & Keshav Prasad Maurya : 100 विधायक लाओ, सीएम बन जाओ:अखिलेश यादव

    लखनऊ।
    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने डिप्टी सीएम Keshav Prasad Maurya और Brajesh Pathak को खुला ऑफर देते हुए कहा कि “100 विधायक लेकर आइए और मुख्यमंत्री बन जाइए, इससे बेहतर मौका नहीं मिलेगा।”

    अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के अंदर ही नेतृत्व को लेकर असंतोष है। उन्होंने दावा किया कि अगर डिप्टी सीएम में हिम्मत है तो वे अपने समर्थन का आंकड़ा दिखाएं और सत्ता संभालें।

    शंकराचार्य प्रकरण पर योगी सरकार को घेरा

    अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से जुड़े कथित विवाद को लेकर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में कभी किसी शंकराचार्य का अपमान नहीं हुआ, लेकिन मौजूदा सरकार के दौर में धार्मिक गुरुओं के साथ अभद्र व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं।

    उन्होंने कहा कि जब शंकराचार्य की बेइज्जती की जा रही थी, तब सरकार के लोग खामोश क्यों थे? जनता इसका जवाब देगी।

    भाजपा पर तीखा हमला

    अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार भ्रष्टाचार, विकास परियोजनाओं में अनियमितताओं और जनसमस्याओं से ध्यान हटाने के लिए मुद्दों को भटका रही है। उन्होंने कहा कि जनता सरकार से निराश है और पीडीए गठबंधन लगातार मजबूत हो रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सरकार टिकाऊ नहीं है और जनता अब बदलाव का इंतजार कर रही है। डिप्टी सीएम को दिए गए इस खुले ऑफर और शंकराचार्य प्रकरण पर भाजपा की प्रतिक्रिया क्या होगी, इस पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।

  • Akhilesh Yadav:अखिलेश यादव का बीजेपी सरकार पर बड़ा हमला

    Akhilesh Yadav:अखिलेश यादव का बीजेपी सरकार पर बड़ा हमला

    लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव(Akhilesh yadav) ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर निर्माण कार्यों और विकास परियोजनाओं को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार में योजनाओं और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं और भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।

    अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “हवा हवाई हो गये हवाई अड्डे! दरअसल बीजेपी राज में कोई भी योजना या निर्माण सिर्फ सरकारी खजाने से पैसे निकालने का जरिया होता है, जिससे भ्रष्टाचार को मुखौटा पहनाया जा सके।” उन्होंने कहा कि भाजपा की बनाई पानी की टंकियाँ गिर रही हैं, मंदिर से लेकर संसद तक की छतें टपक रही हैं, सड़के बदहाल हैं और एक्सप्रेसवे लागत व कमीशनखोरी का रिकॉर्ड बना रहे हैं। रेलवे स्टेशन की दीवारें धराशायी हो रही हैं और एयरपोर्ट के शेड्स गिर रहे हैं या बंद हो रहे हैं।

    सपा मुखिया ने तंज कसते हुए कहा कि “विनाश की गति अपरंपार, डबल इंजन का भ्रष्टाचार।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपाई और उनके ठेकेदारों का गुप्त नारा है—“पैसा बँटा, बजट सफा।”

    इससे पहले अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि “यह दूसरों को उपद्रवी माफिया कहते हैं, लेकिन 2017 के बाद अगर उन्होंने अपने मुकदमे वापस न लिए होते तो अब तक का सबसे उपद्रवी मुख्यमंत्री वही होते।” अखिलेश ने गोरखपुर पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि “वह गोरखपुर नहीं है, वहां पर गोरख धंधा चल रहा है।”

  • यूपी में 22 फरवरी को विशेष मतदाता सूची अभियान, सभी बूथों पर नाम जोड़ने और सुधार का मौका

    यूपी में 22 फरवरी को विशेष मतदाता सूची अभियान, सभी बूथों पर नाम जोड़ने और सुधार का मौका

    लखनऊ। भारत निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश में दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान रविवार को प्रदेश के सभी मतदेय स्थलों पर विशेष अभियान दिवस आयोजित किया जाएगा।

    यह अभियान पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने और सूची में दर्ज त्रुटियों को सुधारने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

    प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि आयोग के निर्देशानुसार चार विशेष अभियान दिवस निर्धारित किए गए थे। इनमें 11 जनवरी, 18 जनवरी और 31 जनवरी को अभियान पहले ही आयोजित हो चुके हैं, जबकि 22 फरवरी को चौथा और अंतिम विशेष अभियान दिवस आयोजित किया जाएगा।

    ⏰ समय और व्यवस्था

    • प्रत्येक मतदेय स्थल पर सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक बूथ लेवल अधिकारी (BLO) उपस्थित रहेंगे।
    • बीएलओ के पास 6 जनवरी को प्रकाशित आलेख्य मतदाता सूची उपलब्ध रहेगी।
    • मतदाता अपने नाम की जांच कर सकेंगे।

    📝 उपलब्ध फार्म

    • फॉर्म-6 : नया नाम जोड़ने के लिए
    • फॉर्म-6A : विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए
    • फॉर्म-7 : नाम विलोपन हेतु
    • फॉर्म-8 : प्रविष्टि संशोधन के लिए

    प्रत्येक मतदान केंद्र पर हेल्प डेस्क की व्यवस्था भी की जाएगी, जहां मतदाताओं को फॉर्म भरने में सहायता मिलेगी।

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवकों से भी नियमानुसार सहयोग लिया जाएगा। साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी अभियान की निगरानी के लिए भ्रमणशील रहेंगे।

  • UP Election: लखनऊ में संघ-सरकार मंथन, 2027 की सियासी बिसात बिछनी शुरू

    UP Election: लखनऊ में संघ-सरकार मंथन, 2027 की सियासी बिसात बिछनी शुरू

    हिंदुत्व और सोशल इंजीनियरिंग पर संघ-सीएम की अहम बातचीत

    लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती कुंज में बुधवार शाम हुई बैठक ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संघ प्रमुख मोहन भागवत के बीच करीब 40 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। आधिकारिक तौर पर इस मुलाकात को संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे 2027 (UP Election) के विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

    2027 के चुनाव का रोडमैप?

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में हिंदुत्व के एजेंडे को और सशक्त करने तथा विपक्ष के ‘पीडीए’ कार्ड का जवाब तैयार करने पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार के बीच समन्वय बढ़ाने की रूपरेखा तैयार की गई।

    मुख्यमंत्री योगी पहले ही काशी, अयोध्या और मथुरा जैसे धार्मिक-आध्यात्मिक केंद्रों का उल्लेख कर चुके हैं। अब इन मुद्दों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संघ के सहयोग की रणनीति पर विचार हुआ। हाल ही में मोहन भागवत का “हम सब हिंदू हैं” बयान भी सामाजिक समरसता और जातिगत विभाजनों को कम करने की दिशा में एक संकेत माना जा रहा है।

    संगठन की बड़ी भूमिका

    सूत्रों का दावा है कि उत्तर प्रदेश में संघ के लगभग दो लाख कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका देने की योजना पर चर्चा हुई। इन कार्यकर्ताओं के माध्यम से सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों तक सीधा संपर्क स्थापित कर जनाधार मजबूत करने की रणनीति बनाई जा रही है।

    बैठक में अवैध घुसपैठ, खासकर बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई, ‘घर वापसी’ और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। बताया जा रहा है कि कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान के प्रश्न पर दोनों नेताओं की सोच में सामंजस्य दिखाई दिया।

    सरकार-संगठन समन्वय पर जोर

    बैठक के दौरान सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति के जरिए मुख्यमंत्री योगी के एजेंडे को जमीनी स्तर पर और मजबूती दी जा सकती है।

    हालांकि, इस बैठक को लेकर आधिकारिक बयान सीमित हैं, लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है।

  • निजी अंग पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना ‘‘बलात्कार का प्रयास’’ माना जाएगा: Supreme Court

    निजी अंग पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना ‘‘बलात्कार का प्रयास’’ माना जाएगा: Supreme Court

    नई दिल्ली – उच्चतम न्यायालय(Supreme Court) ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक विवादास्पद आदेश को रद्द करते हुए स्पष्ट किया है कि निजी अंग पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना ‘‘बलात्कार का प्रयास’’ माना जाएगा, न कि केवल ‘‘तैयारी’’।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारी की पीठ ने कहा कि आपराधिक न्यायशास्त्र के स्थापित सिद्धांतों का स्पष्ट रूप से गलत प्रयोग किया गया था, इसलिए उच्च न्यायालय का आदेश रद्द किया जाना आवश्यक है।

    🔎 क्या था मामला?

    इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने 17 मार्च, 2025 के आदेश में कहा था कि स्तन पकड़ना और पायजामे की डोरी खींचना बलात्कार का अपराध नहीं, बल्कि केवल उसकी तैयारी है। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 10 फरवरी को सुनवाई की।

    शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि आरोपी व्यक्तियों ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत अपराध करने के पूर्व निर्धारित इरादे से कार्य किया।

    📜 पीओसीएसओ के तहत बहाल हुआ आरोप

    सर्वोच्च न्यायालय(Supreme Court) ने यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत दो आरोपियों के खिलाफ ‘‘बलात्कार के प्रयास’’ का गंभीर आरोप बहाल कर दिया। साथ ही विशेष न्यायाधीश (पीओसीएसओ), कासगंज द्वारा 23 जून, 2023 को पारित मूल समन आदेश को भी बहाल कर दिया गया।

    पीठ ने कहा:

    “आरोपी व्यक्तियों द्वारा किया गया प्रयास स्पष्ट रूप से इस निष्कर्ष की ओर ले जाता है कि शिकायतकर्ता और अभियोजन पक्ष द्वारा बलात्कार के प्रयास के प्रावधानों को लागू करने का मामला बनता है। अतः विवादित निर्णय को रद्द किया जाता है।”

    इस फैसले को यौन अपराधों के मामलों में ‘तैयारी’ और ‘प्रयास’ के बीच कानूनी अंतर को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

  • Action: Shahjahanpur में 74 साल बाद वन भूमि मुक्त,  300 बीघा पर चला प्रशासन का बुलडोजर

    Action: Shahjahanpur में 74 साल बाद वन भूमि मुक्त, 300 बीघा पर चला प्रशासन का बुलडोजर

    शाहजहांपुर(Shahjahanpur) (उ.प्र.) – जिले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 74 वर्षों से वन विभाग की 300 बीघा जमीन पर किसानों द्वारा किए गए अवैध कब्जे को हटवा दिया। कार्रवाई के दौरान जमीन को ट्रैक्टर से जोतकर उस पर खड़ी फसल को भी नष्ट कर दिया गया।

    पुलिस अधीक्षक Rajesh Dwivedi ने बुधवार को बताया कि वर्ष 1952 में खुटार थाना क्षेत्र स्थित जंगल की भूमि पर कब्जा शुरू हुआ था। समय के साथ करीब 300 बीघा वन भूमि पर खेती की जाने लगी थी। कई बार वन विभाग ने कब्जा हटाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

    बाद में वन अधिकारियों के अनुरोध पर पुलिस ने कार्रवाई की योजना बनाई। पुलिस क्षेत्राधिकारी (पुवायां) प्रवीण मलिक के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम गठित की गई, जिसमें प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल थे। मंगलवार को टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध कब्जा हटाया और फसल जोतकर नष्ट कर दी।

    एसपी के अनुसार कार्रवाई के दौरान किसानों ने विरोध भी किया, लेकिन पुलिस बल की मौजूदगी में स्थिति नियंत्रित कर ली गई।

    10 नवंबर को भी हुई थी बड़ी कार्रवाई

    इससे पहले 10 नवंबर को जलालाबाद क्षेत्र के रोली बोली गांव में 13 बीघा जमीन पर बने लगभग 30 मकानों को अवैध घोषित कर प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया था। उस समय भी विरोध की स्थिति बनी थी।

    Meerut के Sardhana में भी चला कब्जा मुक्ति अभियान

    https://cf-img-a-in.tosshub.com/lingo/itne/images/story/202507/68709a5d733e8-eviction-drives-to-continue-himanta-says-25-000-acres-of-land-cleared-of-encroachment-in-4-yrs-110007939-16x9.png?size=948%3A533
    https://staticimg.amarujala.com/assets/images/2025/04/09/meerut-city_a0037c4ffcd363a6ae834749b5971756.jpeg
    https://media.assettype.com/newslaundry/2025-11-12/8z9pgijy/Mahar-land-controversy.jpg?h=675&w=1200

    उधर मेरठ जिले के सरधना तहसील क्षेत्र में भी प्रशासन ने सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई की। एसडीएम Udit Narayan Sengar को लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद उन्होंने राजस्व विभाग की टीम गठित कर कार्रवाई के निर्देश दिए।

    मंगलवार को टीम ने गांव ईकड़ी में विवादित भूमि को कुर्क किया। कस्बा खिवाई में सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाया गया और भलसोना गांव में रास्ते पर किए गए अतिक्रमण को भी मुक्त कराया गया।

    राजस्व निरीक्षक समर सिंह ने बताया कि खिवाई में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से खड़ी फसल को ट्रैक्टर से जोतकर कब्जा हटाया गया। विरोध के बावजूद पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई सफल रही।

    एसडीएम उदित नारायण सेंगर ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने का अभियान आगे भी जारी रहेगा और नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • 13-Year-Old Girl Abducted in Azamgarh: आजमगढ़ में 13 वर्षीय बालिका अपहरण: स्थानीय पुलिस 23 दिन से निष्क्रिय, कार्रवाई में मूकदर्शक बना हुआ प्रशासन

    13-Year-Old Girl Abducted in Azamgarh: आजमगढ़ में 13 वर्षीय बालिका अपहरण: स्थानीय पुलिस 23 दिन से निष्क्रिय, कार्रवाई में मूकदर्शक बना हुआ प्रशासन

    आजमगढ़ (Azamgarh): आजमगढ़ के अत्रौलिया थाना क्षेत्र, ग्राम इटौरी-खालिसपुर में 20 जनवरी 2026 को रामलोटन तिवारी की 13 वर्षीय बेटी को स्कूल से घर लौटते समय कुछ बदमाशों ने अपहरण (13-Year-Old Girl Abducted in Azamgarh) कर लिया। आज 23 दिन बीत चुके हैं, लेकिन बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन सोया हुआ है और कार्रवाई में मूकदर्शक बना हुआ है।

    घटना के बाद बच्ची के साथ आने वाली सहेलियां मानसिक रूप से परेशान हैं। इसके बावजूद पुलिस ने माता-पिता को बयान देने से रोककर जांच में विलंब किया। जिले के DM और थाना प्रशासन (SO, CO) भी इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या कानून केवल आम जनता के लिए है या पुलिस और सरकार अधिकारियों के लिए अलग है।

    राष्ट्रीय पूर्वांचल एकता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुनाथ उपाध्याय ने कहा, “अगर पुलिस अधिकारियों की बेटी का अपहरण हुआ होता, तो क्या वे हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहते?” उन्होंने स्पष्ट किया कि यूपी सरकार की ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना सिर्फ कागजों में है, असली धरातल पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो रही।

    उपाध्याय ने कहा कि बलात्कार, अपहरण और अपराधों में लगातार वृद्धि इस बात का संकेत है कि यूपी पुलिस अपराधियों के लिए सुरक्षित वातावरण बना रही है। उन्होंने योगी सरकार से तत्काल कठोर कदम उठाने, दोषियों को गिरफ्तार करने और प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की।

    स्थानीय नागरिक और राजनीतिक नेता भी कह रहे हैं कि अगर यही निष्क्रियता जारी रही, तो अपराधियों में और हिम्मत बढ़ेगी और आम जनता के लिए कानून और सुरक्षा केवल शब्दों तक सीमित रह जाएगी।

  • Lamborghini Accident Kanpur: 10 करोड़ की लैंबॉर्गिनी का कहर: VIP रोड पर रफ्तार बनी आफत, शिवम मिश्रा गिरफ्तार

    Lamborghini Accident Kanpur: 10 करोड़ की लैंबॉर्गिनी का कहर: VIP रोड पर रफ्तार बनी आफत, शिवम मिश्रा गिरफ्तार

    कानपुर (Kanpur): उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए हाई-प्रोफाइल लैंबॉर्गिनी हादसे (Lamborghini Accident) ने शहर को झकझोर दिया है। तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। रविवार दोपहर वीआईपी रोड पर हुई इस सनसनीखेज घटना में कई लोग घायल हो गए थे।

    पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, 35 वर्षीय आरोपी शिवम मिश्रा को मेडिकल परीक्षण के बाद अदालत में पेश किया गया। हादसा उस समय हुआ जब करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की लैंबॉर्गिनी रेवुएल्टो ग्वालटोली इलाके में अनियंत्रित होकर पैदल चलने वालों और खड़े वाहनों से टकरा गई।

    https://epaper.rashtriyaswabhimaan.com/view/501/rashtriya-swabhimaan

    फर्राटे से फुटपाथ तक

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शिवम मिश्रा अपनी लग्जरी कार से ग्रीन पार्क की ओर जा रहे थे। रिंग वाले चौराहे के पास अचानक कार बेकाबू हो गई। पहले सड़क किनारे खड़ी ऑटो और बुलेट मोटरसाइकिल को टक्कर मारी, फिर फुटपाथ पर चढ़ गई।

    इस हादसे में 18 वर्षीय ई-रिक्शा चालक मोहम्मद तौफीक समेत कई लोग घायल हुए। बुलेट सवार विशाल त्रिपाठी और सोनू त्रिपाठी भी जख्मी बताए जा रहे हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    ड्राइवर बदलने की कोशिश, पुलिस ने किया खारिज

    मामले में नया मोड़ तब आया जब मोहन नामक एक व्यक्ति ने खुद को कार का ड्राइवर बताते हुए दावा किया कि हादसे के समय शिवम कार नहीं चला रहे थे। हालांकि, पुलिस ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने स्पष्ट कहा कि जांच में मिले साक्ष्यों से साबित हुआ है कि दुर्घटना के समय शिवम मिश्रा ही कार चला रहे थे।

    घायल तौफीक ने मामले में शिकायत दर्ज कराई है, हालांकि आरोपी पक्ष के वकील ने दावा किया कि पीड़ित कानूनी कार्रवाई के इच्छुक नहीं थे।

    बाउंसरों की एंट्री और नंबर प्लेट तोड़ने का आरोप

    हादसे के बाद घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लैंबॉर्गिनी के पीछे चल रही कार से आए सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को हटाने की कोशिश की। चालक को बाहर निकालने के लिए कार का शीशा तोड़ा गया और उसे निजी अस्पताल ले जाया गया।

    कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि कार मालिक की पहचान छिपाने के लिए नंबर प्लेट तोड़ने का प्रयास किया गया। पुलिस ने लक्जरी कार को जब्त कर ग्वालटोली थाने पहुंचा दिया है।

    ‘दौरा’ आने का दावा भी जांच के घेरे में

    आरोपी पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि चालक को अचानक दौरा आने के कारण हादसा हुआ। हालांकि, पुलिस ने कहा है कि इस दावे की भी मेडिकल और तकनीकी जांच की जा रही है।

  • Vande Bharat 2026 : “वंदे मातरम्” बनाम बेरोज़गारी: क्या राष्ट्रवाद असली मुद्दों पर पर्दा डाल रहा है?

    Vande Bharat 2026 : “वंदे मातरम्” बनाम बेरोज़गारी: क्या राष्ट्रवाद असली मुद्दों पर पर्दा डाल रहा है?

    अश्विनी कुमार दुबे

    नई दिल्ली।
    भारत में देशभक्ति सिर्फ एक भावना नहीं, बल्कि जनमानस की पहचान है। “वंदे मातरम्”(Vande Mataram 2026) और “भारत माता की जय” जैसे उद्घोष स्वतंत्रता संग्राम की विरासत हैं। लेकिन आज एक गंभीर सवाल उठ रहा है—
    क्या राष्ट्रवाद के नारों का इस्तेमाल जनता की रोज़मर्रा की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए किया जा रहा है?


    नारा बनाम नौकरियाँ: बहस का केंद्र

    देश का युवा पूछ रहा है—

    • नौकरी कहाँ है?
    • भर्ती परीक्षाएँ समय पर क्यों नहीं हो रहीं?
    • पेपर लीक क्यों रुक नहीं रहा?

    मध्यम वर्ग पूछ रहा है—

    • महंगाई पर नियंत्रण कब होगा?
    • टैक्स और EMI के बीच राहत कहाँ है?

    किसान पूछ रहा है—

    • लागत से कम दाम क्यों मिल रहा है?
    • MSP पर कानूनी गारंटी क्यों नहीं?

    लेकिन सार्वजनिक विमर्श में इन सवालों से ज्यादा चर्चा राष्ट्रवाद, धार्मिक पहचान और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की दिखाई देती है। यही विरोधाभास बहस को जन्म देता है।


    राष्ट्रवाद: भावना या राजनीतिक रणनीति?

    राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि भावनात्मक मुद्दे—

    • राष्ट्रवाद
    • धार्मिक प्रतीक
    • सीमा और सुरक्षा
    • ऐतिहासिक विवाद

    —अक्सर चुनावी विमर्श में प्रमुखता पा जाते हैं, क्योंकि वे तेज प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं।

    आलोचकों का आरोप है कि जब आर्थिक या प्रशासनिक सवालों पर दबाव बढ़ता है, तो भावनात्मक मुद्दों को प्राथमिकता दी जाती है।

    वहीं सरकार और समर्थकों का तर्क है कि राष्ट्रवाद और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना है कि राष्ट्रीय गौरव, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान भी उतने ही महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जितने रोज़गार और महंगाई।


    बेरोज़गारी और महंगाई: आंकड़ों की हकीकत

    • विभिन्न रिपोर्टों में युवाओं में बेरोज़गारी दर चिंता का विषय बताई जाती रही है।
    • भर्ती परीक्षाओं में देरी और पेपर लीक की घटनाएँ कई राज्यों में सुर्खियाँ बनी हैं।
    • महंगाई, विशेषकर खाद्य और ईंधन की कीमतें, घरेलू बजट पर असर डाल रही हैं।

    यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की बड़ी आबादी युवा है, और रोजगार सृजन सरकारों के लिए केंद्रीय चुनौती बना हुआ है।


    मीडिया की भूमिका पर भी सवाल

    एक वर्ग का आरोप है कि मुख्यधारा मीडिया में बहसें अक्सर राष्ट्रवाद और राजनीतिक टकराव पर केंद्रित रहती हैं, जबकि रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं।

    हालाँकि, मीडिया संस्थानों का पक्ष है कि वे वही दिखाते हैं जो दर्शक देखना चाहते हैं और जो राजनीतिक रूप से प्रासंगिक होता है।


    असली राष्ट्रवाद क्या है?

    राष्ट्रवाद का अर्थ सिर्फ नारे नहीं, बल्कि नागरिकों का जीवन स्तर भी है।
    अगर राष्ट्र सशक्त है, तो—

    • युवा को अवसर मिलना चाहिए
    • किसान को सम्मानजनक आय मिलनी चाहिए
    • शिक्षा और स्वास्थ्य सुलभ होने चाहिए
    • महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए

    देशभक्ति और जवाबदेही एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। लोकतंत्र में सवाल पूछना अधिकार है, और जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी।


    “वंदे मातरम्” का सम्मान, राजनीतिक हथियार नहीं

    “वंदे मातरम्” भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का गौरवशाली प्रतीक है।
    इसका सम्मान तब और सार्थक होगा जब:

    • देश का युवा आत्मनिर्भर बने
    • किसान कर्ज और संकट से मुक्त हो
    • गरीब भूखा न सोए
    • मध्यम वर्ग आर्थिक असुरक्षा से बाहर निकले

    नारा तब ताकत बनता है, जब उसके पीछे ठोस नीति और परिणाम हों।


    निष्कर्ष: शोर नहीं, समाधान चाहिए

    देश को राष्ट्रवाद बनाम रोज़गार की बहस में उलझने की बजाय दोनों के बीच संतुलन चाहिए।

    • भावनात्मक मुद्दे अपनी जगह
    • आर्थिक और सामाजिक मुद्दे अपनी जगह

    आखिरकार लोकतंत्र में नागरिकों का अधिकार है कि वे पूछें—
    विकास कहाँ है? रोजगार कब मिलेगा? महंगाई कब घटेगी?

    देशभक्ति का अर्थ सिर्फ उद्घोष नहीं, बल्कि जवाबदेह शासन भी है और यही किसी भी लोकतंत्र की असली ताकत होती है।