Category: New Delhi

  • White House Clarification on H-1B Visa:H-1B वीज़ा पर 88 लाख रुपये शुल्क की अफवाह पर व्हाइट हाउस का स्पष्टीकरण- मौजूदा धारकों को नहीं देना होगा शुल्क

    White House Clarification on H-1B Visa:H-1B वीज़ा पर 88 लाख रुपये शुल्क की अफवाह पर व्हाइट हाउस का स्पष्टीकरण- मौजूदा धारकों को नहीं देना होगा शुल्क

    नई दिल्ली। अमेरिका में H-1B वीज़ा को लेकर एक नई नीति ने दुनियाभर में हलचल मचा दी है। डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने इस वीज़ा पर शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसके तहत नए आवेदकों को अब H-1B वीज़ा के लिए 1 लाख अमेरिकी डॉलर यानी लगभग ₹88 लाख चुकाने होंगे। इस फैसले से अमेरिका में काम करने के इच्छुक हजारों भारतीय तकनीकी पेशेवरों को सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
    कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यह शुल्क हर साल देना होगा और मौजूदा वीज़ा धारकों को भी वीज़ा रिन्यूअल के समय यही राशि चुकानी पड़ेगी, अन्यथा उन्हें अमेरिका छोड़कर अपने देश लौटना होगा। इन खबरों से लोगों में भ्रम और चिंता का माहौल बन गया।
    इस गड़बड़ी को देखते हुए व्हाइट हाउस ने शनिवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर सभी अफवाहों का खंडन किया। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क केवल नए आवेदकों पर लागू होगा। मौजूदा H-1B वीज़ा धारकों को न तो अमेरिका छोड़ना पड़ेगा और न ही वीज़ा रिन्यूअल के लिए इतनी बड़ी राशि देनी होगी।


    व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए कहा, “जो H-1B वीज़ा धारक फिलहाल देश के बाहर हैं, उन्हें अमेरिका लौटने के लिए 1 लाख डॉलर का शुल्क नहीं देना होगा। सरकार की नई नीति केवल नए आवेदकों के लिए है, मौजूदा वीज़ा धारकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।”
    गौरतलब है कि अमेरिका में H-1B वीज़ा पर रहने वाले लोगों में करीब 70% भारतीय हैं, जो मुख्य रूप से आईटी सेक्टर में कार्यरत हैं। ट्रम्प प्रशासन के इस नए निर्णय से अमेरिका जाने की योजना बना रहे भारतीयों के लिए रास्ता कठिन हो सकता है। कई लोगों का मानना है कि इससे उनका अमेरिका में काम करने का सपना टूट सकता है।

  • Election Newdelhi: हमने EVM हैक किया तो राहुल गांधी को क्यों बुरा लग रहा है: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

    Election Newdelhi: हमने EVM हैक किया तो राहुल गांधी को क्यों बुरा लग रहा है: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

    नई दिल्ली। देश में EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कई बार EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि EVM के जरिए चुनावी प्रक्रिया में छेड़छाड़ की जा सकती है और इससे चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने और कई विपक्षी दलों ने मांग की है कि चुनाव मतपत्रों के जरिए कराए जाएं।
    इस बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक मीडिया बातचीत में ऐसा बयान दिया है जिससे विवाद और गहराया है। जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि विपक्ष का आरोप है कि भाजपा और उसके सहयोगी दल EVM की मदद से चुनाव जीतते हैं और चुनाव आयोग भी उनके पक्ष में है, तो रेखा गुप्ता ने जवाब दिया, “70 साल तक वो लोग (कांग्रेस) EVM हैक करते रहे तो उन्हें फर्क नहीं पड़ा, अब हमने किया तो उन्हें बुरा लग रहा है, ये अच्छा है।”
    रेखा गुप्ता के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। आम आदमी पार्टी ने भी इस वीडियो को शेयर किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वीडियो साझा करते हुए लिखा, “दिल्ली की मुख्यमंत्री क्या कह रही हैं, एक बार देखिए।”


    इस बयान पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। एक एक्स यूजर ने लिखा, “रेखा गुप्ता कह रही हैं कि कांग्रेस 70 साल से EVM हैक कर रही थी, जबकि भारत में EVM से चुनाव 2004 के बाद ही शुरू हुए हैं।” भारत में अब तक पांच लोकसभा चुनाव EVM से हुए हैं, जिनमें से तीन भाजपा ने जीते हैं। 2004 से पहले देश में चुनाव मतपत्रों के जरिए होते थे।
    रेखा गुप्ता के इस बयान को लेकर विपक्ष का कहना है कि यह राहुल गांधी के आरोपों की अप्रत्यक्ष पुष्टि है। इससे EVM की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर फिर से सवाल उठने लगे हैं।

  • Uttar Pradesh News(Meerut): गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल बनी शिव बारात: फलावदा में ऐतिहासिक आयोजन

    Uttar Pradesh News(Meerut): गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल बनी शिव बारात: फलावदा में ऐतिहासिक आयोजन

    मेरठ (फलावदा): आदर्श रामलीला समिति द्वारा आयोजित शिव बारात ने धार्मिक समरसता और सांस्कृतिक एकता की अनूठी मिसाल पेश की। प्राचीन बूढ़ा शिव मंदिर से शुरू हुई इस बारात का शुभारंभ परमप्रज्ञ जगदगुरु प्रो. पुष्पेन्द्र कुमार आर्यम जी महाराज के करकमलों से हुआ, जिनकी उपस्थिति ने आयोजन को दिव्यता प्रदान की।

    गुरुदेव ने अपने संबोधन में कहा, “शिव बारात विविधता में एकता का प्रतीक है, जहाँ देवता, असुर, भूत-प्रेत, ऋषि-मुनि और सामान्य जन सभी सम्मिलित होकर सनातन धर्म की समरसता को दर्शाते हैं।” उन्होंने भगवान शिव को आशुतोष बताते हुए समाज में सहयोग, सामंजस्य और समानता का संदेश देने की बात कही।

    बारात में नृत्य, गान और उल्लास के बीच गुरुदेव के मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो गया। पंचदीप प्रज्वलन कर उन्होंने सनातन परंपरा का गौरव बढ़ाया।

    इस आयोजन की विशेष बात रही मुस्लिम समुदाय के नेताओं द्वारा हिंदू धर्मगुरु का स्वागत — अटल चौक से शुरू हुआ यह स्वागत जुलूस मुख्य बाज़ार होते हुए बूढ़ा शिव मंदिर तक पहुँचा, जिसने गंगा-जमुनी तहज़ीब की भावना को सजीव कर दिया।

    कार्यक्रम में नगर परिषद अध्यक्ष अशोक सैनी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति और रामलीला समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

    शिव बारात: एकता और समरसता का उत्सव

    • स्थान: फलावदा, मेरठ
    • आयोजनकर्ता: आदर्श रामलीला समिति
    • शुभारंभ: प्राचीन बूढ़ा शिव मंदिर से, जगदगुरु प्रो. पुष्पेन्द्र कुमार आर्यम जी महाराज के करकमलों द्वारा
    • मुख्य संदेश:
      • शिव बारात में देवता, असुर, भूत-प्रेत, ऋषि-मुनि और आमजन की भागीदारी विविधता में एकता का प्रतीक है
      • भगवान शिव की बारात सहयोग, सामंजस्य और समानता का संदेश देती है
      • पंचदीप प्रज्वलन और मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय बना

    गंगा-जमुनी तहज़ीब की अनूठी मिसाल

    • विशेष पहल: मुस्लिम समुदाय के नेताओं ने हिंदू धर्मगुरु का स्वागत कर सांप्रदायिक सौहार्द का परिचय दिया
    • स्वागत जुलूस: अटल चौक से बूढ़ा शिव मंदिर तक, मुख्य बाज़ार होते हुए
    • उपस्थिति: नगर परिषद अध्यक्ष अशोक सैनी और अन्य गणमान्य व्यक्ति

  • Congress attack on TRAI : ट्राई पर कांग्रेस का वार, महाराष्ट्र चुनाव का “सच” दबाने की साज़िश?

    Congress attack on TRAI : ट्राई पर कांग्रेस का वार, महाराष्ट्र चुनाव का “सच” दबाने की साज़िश?

    नई दिल्ली। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र सरकार और उसके संस्थानों पर बड़ा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से जुड़ी “वोट चोरी” पर आधारित एक वृत्तचित्र का लिंक भेजने की उनकी अनुमति इसलिए खारिज कर दी क्योंकि उसे “विरोध प्रदर्शन से संबंधित सामग्री” करार दिया गया।

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह कदम सरकार की साजिश को उजागर करता है, जिसमें गृह मंत्रालय, निर्वाचन आयोग और ट्राई जैसे निकाय “तालमेल” से काम कर रहे हैं ताकि चुनावी धांधली की जानकारी जनता तक न पहुंचे।

    “ट्राई कब से भाजपा का आईटी सेल बन गया?”

    कांग्रेस सांसदों ने सीधे-सीधे ट्राई पर पक्षपात का आरोप लगाया। एक सांसद ने कहा,

    “अश्विनी जी, ट्राई कब से भाजपा का आईटी सेल बन गया? एसएमएस दबाने से सच्चाई नहीं दबेगी। जितना सेंसर करेंगे, लोग उतना ही जोर से पूछेंगे कि महाराष्ट्र 2024 चुनाव में आखिर क्या छिपाया जा रहा है?”

    प्रवीण चक्रवर्ती का बड़ा दावा

    कांग्रेस के डेटा एनालिटिक्स विभाग के प्रमुख प्रवीण चक्रवर्ती ने बताया कि पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को यूट्यूब पर जारी वृत्तचित्र “महाराष्ट्र 2024 चुनाव कैसे चुराया गया” का लिंक भेजना चाहती थी। इसके लिए नियमानुसार ट्राई से अनुमति मांगी गई।
    लेकिन ट्राई ने आवेदन खारिज कर दिया और लिखा कि यह ‘विरोध प्रदर्शन से जुड़ा कंटेंट’ है।

    चक्रवर्ती ने एक्स पर सवाल उठाया –
    “गृह मंत्रालय, निर्वाचन आयोग और ट्राई में इतनी सटीक तालमेल कैसे हो सकती है? यह चुनावी धोखाधड़ी का साफ सबूत नहीं है तो और क्या है?”
    उन्होंने ट्राई के जवाब का स्क्रीनशॉट भी साझा किया।

    “सेंसरशिप की श्रृंखला कौन चला रहा?”

    कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने पूछा:
    “कांग्रेस जब एक साधारण एसएमएस भेजना चाहती है तो उसे ‘विरोध प्रदर्शन सामग्री’ कहकर रोक दिया जाता है। यह सेंसरशिप की श्रृंखला कौन चला रहा है? अमित शाह, अश्विनी वैष्णव या कोई और?”

    गृह मंत्रालय पर निगरानी का आरोप

    टैगोर ने आरोप लगाया कि गृह मंत्रालय संचार पर निगरानी कर रहा है, रेलवे और दूरसंचार मंत्रालय संचार रोक रहे हैं और निर्वाचन आयोग चुपचाप तमाशा देख रहा है।
    “अगर महाराष्ट्र चुनाव चोरी नहीं हुआ तो एक यूट्यूब लिंक से इतना डर क्यों?” – टैगोर ने तंज कसा।

    ट्राई की चुप्पी

    इस पूरे विवाद पर ट्राई की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन कांग्रेस के आरोपों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। विपक्ष का कहना है कि यह मामला केवल एक वृत्तचित्र का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आवाज़ दबाने का है।

  • Mathura News Update: मथुरा में बाढ़ का कहर, यमुना ने तोड़ा रेकॉर्ड, 45 गांव बने टापू, 9 हजार लोग रेस्क्यू

    Mathura News Update: मथुरा में बाढ़ का कहर, यमुना ने तोड़ा रेकॉर्ड, 45 गांव बने टापू, 9 हजार लोग रेस्क्यू

    मथुरा। यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर ने जिले की स्थिति को बेकाबू बना दिया है। रविवार को नदी का जलस्तर 167.55 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर है। तेज बहाव से लक्ष्मीनगर की कॉलोनियों में पानी एक-एक मंजिल तक घुस गया, जबकि वृंदावन, सदर बाजार और जयसिंहपुरा समेत दर्जनों कॉलोनियां जलमग्न हो गईं। जिले के 45 गांव पूरी तरह टापू में तब्दील हो चुके हैं। प्रशासन ने अब तक नौ हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में भेजा है।

    हथिनीकुंड और ओखला से छोड़ा गया पानी

    सिंचाई विभाग के अनुसार रविवार शाम हथिनीकुंड से 44,016 क्यूसेक और ओखला से 1.6 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। वहीं, गोकुल बैराज से 1.56 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। अधिकारी मानते हैं कि यदि बारिश नहीं हुई तो सोमवार से जलस्तर में गिरावट आनी शुरू हो सकती है।

    डीएम-एसएसपी ने संभाला मोर्चा

    लक्ष्मीनगर में हालात बिगड़ने के बाद जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार खुद मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारी ट्रैक्टर से बाढ़ग्रस्त कॉलोनियों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनीं और राहत सामग्री वितरित की। डीएम ने शेल्टर होम का निरीक्षण कर साफ-सफाई, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।

    रेड अलर्ट, घाटों की राह बंद

    केंद्रीय जल आयोग ने यमुना का जलस्तर खतरे से ऊपर जाने पर मथुरा में रेड अलर्ट घोषित कर दिया है। प्रशासन ने सभी घाटों और निचले इलाकों को खाली कराने का आदेश दिया है। विश्राम घाट समेत कई मार्ग बंद कर दिए गए हैं। दुकानों पर भी बाढ़ का असर पड़ा है और आसपास के बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा।

    200 मकान डूबे, दीवारें गिरीं

    नौहझील क्षेत्र के 9 गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां करीब 200 मकान पानी में डूब गए हैं। 5-6 फीट तक घरों में पानी भर चुका है, जिससे लाखों का सामान नष्ट हो गया। दर्जनों मकानों की दीवारें गिर गईं और किसानों पर आर्थिक संकट गहरा गया।

    मंदिरों में दर्शन पर रोक

    पानीगांव मार्ग पर चार फीट तक पानी भरने से सड़क बंद कर दी गई है। वहीं, राधारानी मानसरोवर मंदिर परिसर में भी जलस्तर बढ़ने पर श्रद्धालुओं के दर्शन रोक दिए गए हैं। केवल सेवायतों को पूजा की अनुमति दी गई है।

    कांग्रेस भी उतरी मदद को

    प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता भी मदद के लिए आगे आए। जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर ने रांची बांगर और गणेश पुरम में राहत सामग्री वितरित कर बाढ़ प्रभावितों को भरोसा दिलाया कि संकट की घड़ी में पार्टी उनके साथ खड़ी है।

  • पटना की रैली से उपेंद्र कुशवाहा ने बदले राजनीतिक तेवर, एनडीए पर दबाव की कोशिश

    पटना की रैली से उपेंद्र कुशवाहा ने बदले राजनीतिक तेवर, एनडीए पर दबाव की कोशिश

    पटना। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के नेता उपेंद्र कुशवाहा इन दिनों अपने राजनीतिक अस्तित्व और ताकत का अहसास कराने के लिए लगातार शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। कभी मानव श्रृंखला तो कभी बड़ी रैलियों के जरिए, वह अपने समर्थकों को संदेश देने और विपक्षियों पर दबाव बनाने में जुटे हैं। इसी कड़ी में 5 सितंबर को पटना में आयोजित रैली ने राजनीतिक गलियारों का ध्यान खींचा। इस रैली का समय और मकसद दोनों ही काफी अहम माने जा रहे हैं।

    यह संयोग नहीं है कि कुशवाहा ने शिक्षक दिवस पर रैली की, बल्कि उनके लिए यह तारीख इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि यह बिहार के लेनिन कहे जाने वाले शहीद जगदेव प्रसाद का शहादत दिवस है। जगदेव प्रसाद कुशवाहा समाज के बड़े नेता रहे हैं और उनकी याद में पहले भी कई रैलियां होती रही हैं। ऐसे मौके का चुनाव कर उपेंद्र कुशवाहा ने अपने समाज और समर्थकों को साधने का प्रयास किया है।

    इस रैली का मुख्य मुद्दा परिसीमन रहा। कुशवाहा लंबे समय से यह कहते आ रहे हैं कि बिहार में 50 साल से परिसीमन नहीं हुआ, जबकि अगर समय पर यह प्रक्रिया पूरी होती तो राज्य की लोकसभा सीटें 40 नहीं बल्कि 60 होतीं। इसी मुद्दे को लेकर वह लगातार रैलियां कर रहे हैं और लोगों को अपने पक्ष में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल, यह अभियान अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र सरकार और बीजेपी पर दबाव बनाने का तरीका भी है।

    लेकिन रैली में दिए गए उनके कुछ बयान एनडीए के लिए असहज करने वाले साबित हुए। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और राहुल गांधी पर उनकी टिप्पणी ने यह संकेत दिया कि वह एनडीए की स्थापित राजनीतिक लाइन से हटकर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को SIR की प्रक्रिया के लिए बिहार जैसे राज्य को अधिक समय देना चाहिए था। साथ ही, यह भी माना कि वोटर अधिकार यात्रा से कांग्रेस और राहुल गांधी को फायदा हो सकता है। हालांकि उन्होंने इस यात्रा को ‘फेल’ भी बताया, लेकिन राहुल गांधी के पक्ष में यह स्वीकारोक्ति बीजेपी के लिए स्वीकार करना मुश्किल होगी।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि उपेंद्र कुशवाहा की लाइन इस समय कांग्रेस और महागठबंधन के नेताओं से मिलती-जुलती नजर आ रही है। फर्क बस इतना है कि वह खुलकर ‘वोट चोरी’ जैसी बातें नहीं कर रहे, लेकिन SIR पर उनकी राय वही है जो तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की है।

    इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के भीतर असहज हो रहे हैं और फिर से नए विकल्प की तलाश कर रहे हैं। उनका राजनीतिक इतिहास भी इस आशंका को मजबूत करता है। कभी जेडीयू में रहकर, कभी बीजेपी से गठबंधन कर और कभी तीसरा मोर्चा बनाकर, वह बार-बार पाला बदलते रहे हैं। 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद वह बीजेपी के सहारे राज्यसभा पहुंचे, लेकिन अब उनके तेवर यह दिखा रहे हैं कि आने वाले दिनों में वह फिर किसी नए समीकरण की ओर बढ़ सकते हैं।

    पटना रैली ने स्पष्ट कर दिया है कि उपेंद्र कुशवाहा सिर्फ अस्तित्व की लड़ाई ही नहीं लड़ रहे, बल्कि एनडीए में भी अपनी राजनीतिक कीमत बढ़ाने की जुगत में हैं। परिसीमन और SIR जैसे मुद्दों को उठाकर उन्होंने एक साथ जनता और केंद्र दोनों को संदेश दिया है। अब देखना यह होगा कि यह दांव उन्हें सत्ता समीकरण में कितना लाभ पहुंचाता है और क्या वह एनडीए के साथ टिके रहते हैं या फिर एक बार फिर पाला बदलने की राजनीति करते हैं।

  • ADR Report Shocker : आधे से ज्यादा मंत्री ‘दागी’, हत्या-अपहरण से लेकर महिलाओं के खिलाफ अपराध तक के मामले दर्ज

    ADR Report Shocker : आधे से ज्यादा मंत्री ‘दागी’, हत्या-अपहरण से लेकर महिलाओं के खिलाफ अपराध तक के मामले दर्ज

    नई दिल्ली। देश की राजनीति में हड़कंप मचाने वाली एक रिपोर्ट सामने आई है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने खुलासा किया है कि देश के लगभग 47% मंत्री आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। इनमें हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर मामले भी शामिल हैं।

    एडीआर ने यह आंकड़े 27 राज्यों, 3 केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के मंत्रियों द्वारा चुनावी हलफनामों में दी गई जानकारी का विश्लेषण करने के बाद जारी किए हैं। रिपोर्ट बताती है कि 302 मंत्रियों पर केस दर्ज हैं, जिनमें से 174 पर गंभीर आपराधिक केस हैं।

    केंद्रीय मंत्रियों की स्थिति

    नेशनल लेवल पर देखें तो 72 केंद्रीय मंत्रियों में से 29 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें कई ऐसे मंत्री भी हैं जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माना जाता है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में इस रिपोर्ट को लेकर खासी हलचल है।

    क्यों खास है यह रिपोर्ट?

    यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब केंद्र सरकार ने तीन अहम विधेयक पेश किए हैं। इन प्रस्तावित कानूनों के मुताबिक यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर अपराध के मामले में 30 दिन से ज्यादा जेल में रहते हैं, तो उन्हें अपनी कुर्सी छोड़नी होगी। हालांकि ये बिल अभी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजे गए हैं।

    दागी मंत्रियों में कौन आगे?

    • बीजेपी: कुल 336 मंत्रियों में से 136 (40%) पर केस दर्ज हैं, जिनमें 88 (26%) पर गंभीर मामले हैं।
    • कांग्रेस: चार राज्यों में सरकार चला रही कांग्रेस के 45 मंत्रियों में से 21 (47%) दागी हैं, जिनमें से 18 पर गंभीर केस हैं।
    • डीएमके: सबसे खराब स्थिति यहां है। 31 मंत्रियों में से 27 (87%) पर केस दर्ज हैं, जिनमें 14 (45%) गंभीर मामले हैं।
    • टीएमसी: पार्टी के 40 मंत्रियों में से 13 (33%) दागी हैं, और 8 (20%) पर गंभीर केस दर्ज हैं।

    किन राज्यों में साफ-सुथरी तस्वीर?

    एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और नागालैंड ऐसे राज्य हैं जहां किसी मंत्री के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। जबकि दिल्ली, बिहार, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और पुड्डुचेरी में 60% से ज्यादा मंत्री आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।

    राजनीतिक निहितार्थ

    रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दल सरकार और बीजेपी पर हमलावर हो सकते हैं। खासकर जब केंद्र खुद ऐसा कानून लाने की तैयारी कर रहा है जो ‘दागी नेताओं’ की कुर्सी खतरे में डाल सकता है। सवाल यह है कि क्या सरकार इस दिशा में सख्ती दिखाएगी या फिर यह प्रस्ताव महज कागजों तक ही सीमित रहेगा।

  • मुंबई शॉक: कुशीनगर एक्सप्रेस में 3 साल के मासूम का शव मिला, हत्या का राज खुला;आरोपी भाई गिरफ्तार

    मुंबई शॉक: कुशीनगर एक्सप्रेस में 3 साल के मासूम का शव मिला, हत्या का राज खुला;आरोपी भाई गिरफ्तार

    राष्ट्रीय स्वाभिमान। शिवदिनेश शर्मा

    मुंबई: दिल दहला देने वाली घटना! कुशीनगर एक्सप्रेस के बी2 एसी कोच के शौचालय में सिर्फ 3 साल का मासूम बच्चा मृत पाया गया। शव की पहचान सूरत के अमरोली के रहने वाले बच्चे के रूप में हुई। जानकारी के अनुसार, यह मासूम रात को लापता हुआ था। उसके माता-पिता ने 22 अगस्त को अमरोली पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन मुंबई में इस खौफनाक खोज ने सबको हिला कर रख दिया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला कि बच्चे की गला घोंटकर बेरहमी से हत्या की गई थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हत्या करने वाला मासूम का ही मौसी का लड़का भाई, विकाश शाह, था। आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया है।

    मुंबई रेलवे पुलिस और आरपीएफ की टीम ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। घटना से रेलवे यात्री भी स्तब्ध हैं और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के लाखों सुरक्षा दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
    इस दर्दनाक घटना ने न केवल मासूम के परिवार को तहस-नहस कर दिया है, बल्कि पूरे शहर में रेलवे सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने भरा उपराष्ट्रपति पद का नामांकन, पीएम मोदी रहे प्रस्तावक

    एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने भरा उपराष्ट्रपति पद का नामांकन, पीएम मोदी रहे प्रस्तावक

    नई दिल्ली। एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई वरिष्ठ भाजपा और एनडीए नेता मौजूद रहे।

    तमिलनाडु के गाउंडर–कोंगु वेल्लालर (ओबीसी) समुदाय से आने वाले राधाकृष्णन का राजनीतिक करियर लंबा रहा है। वे 1998 में पहली बार सांसद बने और 2023 में झारखंड के राज्यपाल नियुक्त हुए। वर्तमान में वे महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। उपराष्ट्रपति चुने जाने पर वे तमिलनाडु से इस पद पर पहुंचने वाले तीसरे नेता होंगे।

    नामांकन दाखिल करने से पहले राधाकृष्णन ने संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, किरेन रिजिजू, अर्जुन राम मेघवाल, धर्मेंद्र प्रधान, राम मोहन नायडू किंजरापु, एल. मुरुगन और भाजपा नेता विनोद तावड़े भी मौजूद रहे।

    चुनाव आयोग की घोषणा के मुताबिक उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 9 सितंबर को होगा और उसी दिन मतगणना भी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त है, जबकि उम्मीदवार 25 अगस्त तक अपना नाम वापस ले सकते हैं। उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 788 सांसद मतदान करेंगे।

    भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 17 अगस्त को एनडीए संसदीय दल की बैठक के बाद राधाकृष्णन के नाम का ऐलान किया था। उपराष्ट्रपति पद जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद खाली हुआ है। धनखड़ ने 21 जुलाई को संसद के मानसून सत्र से पहले स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था।

  • Delhi CM Rekha Gupta Attacked During Public Hearing, Accused Arrested:दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर जनसुनवाई के दौरान हमला, आरोपी गिरफ्तार

    Delhi CM Rekha Gupta Attacked During Public Hearing, Accused Arrested:दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर जनसुनवाई के दौरान हमला, आरोपी गिरफ्तार

    नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर उनके सिविल लाइंस स्थित सरकारी आवास पर आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान हमला हुआ। जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह जब मुख्यमंत्री जनता से मिल रही थीं, तभी लगभग 35 वर्षीय एक व्यक्ति उनके पास आया। उसने सीएम को कुछ कागज दिए और अचानक जोर-जोर से चिल्लाने लगा। आरोप है कि इसी दौरान उसने मुख्यमंत्री का हाथ पकड़कर उन्हें खींचने और धक्का-मुक्की करने की कोशिश की। घटना में मुख्यमंत्री को हल्की चोट आई है। मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को काबू कर लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। फिलहाल आरोपी से सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में पूछताछ की जा रही है।

    इस हमले की भारतीय जनता पार्टी और अन्य राजनीतिक दलों ने कड़ी निंदा की है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि राजनीति में इस तरह की घटनाएं निंदनीय हैं और मुख्यमंत्री की हालत स्थिर है। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने सीएम की जांच की है और सिर पर हल्की चोट पाई गई है। भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने भी कहा कि आरोपी को पकड़ लिया गया है और कानून अपना काम करेगा।

    दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस घटना को विरोधियों की साज़िश करार दिया और कहा कि मुख्यमंत्री दिन-रात जनता के लिए काम करती हैं, इसलिए इस हमले के पीछे राजनीतिक षड्यंत्र हो सकता है। वहीं मंत्री परवेश साहिब सिंह ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रहार बताते हुए कहा कि जनसुनवाई जनता से सीधे जुड़ने का माध्यम है और इस प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है।

    विपक्षी दलों ने भी इस हमले की आलोचना की। आप नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की जगह हो सकती है लेकिन हिंसा की नहीं। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने महिला सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम महिलाएं कैसे सुरक्षित रहेंगी। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने इसे गृह मंत्रालय की विफलता बताया, जबकि सांसद प्रमोद तिवारी ने भाजपा को हिंसा की जननी करार दिया लेकिन साथ ही घटना की निंदा भी की। मणिकम टैगोर और पी. संदोष कुमार ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए दिल्ली पुलिस से उचित कार्रवाई की मांग की।

    फिलहाल पुलिस हमलावर से पूछताछ कर रही है और मामले की जांच जारी है। मुख्यमंत्री की स्थिति स्थिर बताई जा रही है और उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया है कि जनसुनवाई का कार्यक्रम आगे भी जारी रहेगा।