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  • Chef Sanjeev Kapoor on Poha: अगर चावल अनहेल्दी है तो पोहा उससे भी ज्यादा….शेफ संजीव कपूर ने पोहे को लेकर कह दी ये बड़ी बात!

    Chef Sanjeev Kapoor on Poha: अगर चावल अनहेल्दी है तो पोहा उससे भी ज्यादा….शेफ संजीव कपूर ने पोहे को लेकर कह दी ये बड़ी बात!

    Chef Sanjeev Kapoor on Poha: क्या आपके घर में पोहा नाश्ते में अक्सर बनता है? कई भारतीयों के लिए, यह लगभग हर हफ़्ते बनने वाला मुख्य नाश्ता है — हल्का, पेट को आराम देने वाला और जल्दी बनने वाला। कुछ घरों में, इसे कुरकुरी जलेबियों के साथ भी खाया जाता है, ताकि मीठे और नमकीन का एकदम सही मेल मिल सके।

    हालांकि, मशहूर शेफ़ संजीव कपूर इसे एक हेल्दी नाश्ता नहीं मानते। ANI पॉडकास्ट पर स्मिता प्रकाश से बात करते हुए, पद्म श्री से सम्मानित शेफ़ ने इस मशहूर नाश्ते के बारे में अपने विचार साझा किए और कहा कि यह उतना हेल्दी नहीं होता जितना कि बहुत से लोग मानते हैं।

    पॉडकास्ट के दौरान, शेफ़ ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में खाने से जुड़े कुछ मिथकों को तोड़ा और साथ ही “कम सराहे गए खाने वाले शहरों,” “ज़्यादा सराहे गए स्ट्रीट फ़ूड” और भी बहुत कुछ पर अपनी बेबाक राय दी। चर्चा के दौरान, प्रकाश ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि उनके हिसाब से, “पोहा को ज़रूरत से ज़्यादा सराहा जाता है।”

    बात को आगे बढ़ाते हुए, कपूर ने समझाया कि भारतीयों के लिए पोहा असल में एक “कम्फ़र्ट फ़ूड” (आराम देने वाला खाना) ज़्यादा है। “पोहा एक कम्फ़र्ट फ़ूड है, लेकिन यह सब देखने वालों के लिए है; यह बिल्कुल भी हेल्दी नहीं है। अगर चावल को अनहेल्दी माना जाता है, तो पोहा उससे भी ज़्यादा अनहेल्दी है।”

    यह राय कई भारतीयों के लिए हैरानी की बात हो सकती है, खासकर इंदौर जैसे शहरों में, जहाँ पोहा-जलेबी सिर्फ़ एक नाश्ता नहीं, बल्कि एक “जज़्बा” है। लेकिन शेफ़ के अनुसार, इससे बचना चाहिए। अरे-अरे! हम आपके दिल टूटने की आवाज़ सुन सकते हैं। उन्होंने आगे बताया कि सुबह-सुबह पोहा खाने से शरीर में इंसुलिन का स्तर अचानक बढ़ सकता है।

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    पोहे पर बहस
    असल में, पोहा चपटे चावल (चिवड़ा) से बनता है, जिसमें आमतौर पर राई, करी पत्ता, प्याज़, मूंगफली और कुछ मसाले डालकर तड़का लगाया जाता है। हालांकि, हर घर में इसे बनाने का अपना अलग तरीका और अंदाज़ होता है। कुछ लोग इसमें ज़्यादा सब्ज़ियाँ डालते हैं, कुछ लोग इस पर थोड़ा सा नींबू निचोड़कर खाना पसंद करते हैं, और कुछ लोग इसे ज़्यादा मज़ेदार तरीके से खाते हैं — ऊपर से सेव या कुरकुरा मिक्सचर डालकर।

    अब, अगर सेहत के नज़रिए से देखें, तो यह काफ़ी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कैसे बनाया गया है और कितनी मात्रा में खाया जा रहा है। इसकी लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि यह पेट के लिए हल्का, सुकून देने वाला और जल्दी बनने वाला नाश्ता है, जो व्यस्त सुबहों के लिए एक आसान विकल्प है। जब इसे सब्ज़ियों, मूंगफली और बहुत कम तेल के साथ पकाया जाता है, तो यह कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और हेल्दी फैट्स का एक अच्छा मिश्रण भी देता है।

    अब, भारतीय लोग एक आम गलती यह करते हैं कि वे रिफाइंड कार्ब्स बहुत ज़्यादा लेते हैं और प्रोटीन बहुत कम।

    वहीं, पोहा मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है और अपने आप में इसमें प्रोटीन की मात्रा कम होती है; इसका मतलब है कि यह शायद हर किसी का पेट ज़्यादा देर तक भरा न रख पाए या लगातार ऊर्जा न दे पाए। अगर इसे नियमित रूप से, बिना सही पोषक तत्वों के संतुलन के खाया जाए, तो यह इंसुलिन के स्तर में तेज़ी से बढ़ोतरी का कारण बन सकता है – खासकर तब, जब इसे जलेबी जैसी मीठी चीज़ों के साथ खाया जाए।

    अक्सर यह सलाह दी जाती है कि इस नाश्ते को ज़्यादा संतुलित बनाने के लिए, इसके साथ प्रोटीन से भरपूर चीज़ें जैसे अंकुरित अनाज (sprouts), पनीर या सोया चंक्स भी खाए जाएँ। इसके अलावा, सेव, चीनी या तली हुई चीज़ों का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करने से भी इसकी कुल पौष्टिक गुणवत्ता कम हो सकती है।

    कुल मिलाकर, पोहे को नाश्ते की मेज़ से पूरी तरह से हटाने की ज़रूरत नहीं है। ज़्यादातर ‘कम्फर्ट फ़ूड’ (मनपसंद और सुकून देने वाले खाने) की तरह ही, इसका भी राज़ संतुलन, संयम और इस बात में छिपा है कि आप इसे किस चीज़ के साथ खाते हैं।

  • Summer Travel Tips: भीड़-भाड़ से दूर बिताना चाहते हैं छुट्टियां? ये ऑफबीट डेस्टिनेशन हैं परफेक्ट!

    Summer Travel Tips: भीड़-भाड़ से दूर बिताना चाहते हैं छुट्टियां? ये ऑफबीट डेस्टिनेशन हैं परफेक्ट!

    Summer Travel Tips: गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही लोग पहाड़ों की ओर रुख करने लगते हैं, लेकिन अब मशहूर हिल स्टेशन पहले जैसे शांत नहीं रहे। हर जगह पर्यटकों की भीड़, ट्रैफिक जाम और महंगे होटल ट्रिप का मजा कम कर देते हैं। ऐसे में अब लोग ऐसी जगहों की तलाश कर रहे हैं, जहां शांति, प्राकृतिक खूबसूरती और सुकून एक साथ मिल सके।

    चोपता: मिनी स्विट्जरलैंड का अनुभव
    चोपता उत्तराखंड की बेहद खूबसूरत जगहों में गिना जाता है। हरे-भरे घास के मैदान, ऊंचे पहाड़ और ठंडी हवाएं यहां आने वालों को अलग ही सुकून देती हैं। यह जगह ट्रैकिंग, कैंपिंग और बर्ड वॉचिंग के लिए काफी मशहूर है। गर्मियों में यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है।

    शंगढ़: प्रकृति के बीच शांति का एहसास
    शंगढ़ हिमाचल प्रदेश की सैंज वैली में बसा एक शांत और कम भीड़भाड़ वाला गांव है। यहां के देवदार के जंगल, खुले मैदान और ताजी हवा लोगों को शहरों की भागदौड़ से दूर ले जाते हैं। पास में मौजूद ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क इस जगह को और खास बनाता है।

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    कनाताल: सुकूनभरा हिल स्टेशन
    कनाताल उन चुनिंदा हिल स्टेशनों में शामिल है, जहां अभी भी ज्यादा भीड़ नहीं पहुंची है। यहां का शांत वातावरण और खूबसूरत नजारे पर्यटकों को काफी पसंद आते हैं। सुरकंडा देवी मंदिर, कौड़िया जंगल और टिहरी झील यहां के प्रमुख आकर्षण हैं। रात में कैंपिंग और तारों भरा आसमान यहां का यादगार अनुभव बन जाता है।

    तवांग: हिमालय की असली खूबसूरती
    तवांग अपनी बर्फीली वादियों और शांत माहौल के लिए जाना जाता है। यहां स्थित तवांग मठ भारत के सबसे बड़े बौद्ध मठों में शामिल है। नुरानंग वॉटरफॉल, सेला पास और ऊंचाई पर बनी झीलें इस जगह को बेहद खास बनाती हैं। यहां की प्राकृतिक सुंदरता यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

    हाफलोंग: कम बजट में शानदार ट्रिप
    हाफलोंग असम का एक खूबसूरत और शांत हिल स्टेशन है। यहां की नीली पहाड़ियां, हरियाली और झीलें पर्यटकों को काफी आकर्षित करती हैं। नेचर वॉक, ट्रैकिंग और बोटिंग जैसी एक्टिविटीज यहां की खासियत हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां भीड़ कम होती है, जिससे सफर ज्यादा आरामदायक बन जाता है।

  • Over Workout Signs: जिम में जरूरत से ज्यादा वर्कआउट कर रहे हैं? शरीर देता है ये 5 बड़े संकेत!

    Over Workout Signs: जिम में जरूरत से ज्यादा वर्कआउट कर रहे हैं? शरीर देता है ये 5 बड़े संकेत!

    Over Workout Signs: अगर आप जल्दी फिट होने, तेजी से वेट लॉस करने या मसल्स गेन की चाह में जरूरत से ज्यादा वर्कआउट कर रहे हैं, तो यह आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। शरीर की क्षमता से अधिक एक्सरसाइज करने पर इंजरी, थकान और कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर वेट ट्रेनिंग के दौरान ओवरवर्कआउट शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। आइए जानते हैं वे 5 संकेत, जो बताते हैं कि आपका शरीर जरूरत से ज्यादा वर्कआउट से परेशान हो रहा है।

    1. लगातार थकान और मसल्स में दर्द

    वर्कआउट के बाद हल्की थकान और दर्द सामान्य है, लेकिन अगर आराम करने के बावजूद शरीर में थकावट बनी रहे या मसल्स को छूने पर भी दर्द महसूस हो, तो यह ओवरवर्कआउट का संकेत हो सकता है।

    2. नींद का पैटर्न बिगड़ना

    आमतौर पर एक्सरसाइज से नींद बेहतर होती है, लेकिन अगर आपको नींद न आना, बार-बार नींद खुलना या पूरी नींद लेने के बाद भी सुस्ती महसूस हो रही है, तो यह शरीर के ज्यादा दबाव में होने का संकेत है।

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    3. चोट और रिकवरी में देरी

    अगर हल्की चोटें या मसल्स स्ट्रेन जल्दी ठीक नहीं हो रहे, सूजन बनी रहती है या शरीर रिकवर नहीं कर पा रहा, तो समझिए कि आपके शरीर को आराम की जरूरत है।

    4. परफॉर्मेंस में गिरावट

    जिम में पहले की तुलना में जल्दी थक जाना, स्टैमिना कम होना या पहले आसानी से उठाया जाने वाला वजन भारी लगना भी ओवरवर्कआउट का संकेत है।

    5. मूड बदलना और मोटिवेशन कम होना

    जरूरत से ज्यादा वर्कआउट का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। चिड़चिड़ापन, उदासी, ट्रेनिंग में मन न लगना और रोजमर्रा के कामों में ज्यादा थकान महसूस होना इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर और दिमाग दोनों पर दबाव बढ़ रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार फिटनेस के लिए नियमित वर्कआउट जरूरी है, लेकिन शरीर को पर्याप्त आराम और रिकवरी देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

  • Story Time: चिपकाने की कला में निपुण समाज: चिपकाने की कला, भला ही भला (व्यंग्य)

    Story Time: चिपकाने की कला में निपुण समाज: चिपकाने की कला, भला ही भला (व्यंग्य)

    Story Time: चिपकाने की कला में माहिर महारथियों के जीवन में, सोशल मीडिया से हर वक्त बहार छाई रहती है। फेविकॉल से भी प्रगाढ़ जोड़ है इनका अपनी कला से, जो हर वक्त इसमें रमें रहते हैं। किसी के मुँह से बात निकली और लपककर पकड़ लिया। आनन-फानन ही चिपका आए किसी और महफ़िल में। मुँहजुबानी की तो बात छोड़िए, नाम, गाँव, पते के साथ लिखी बातों को भी ये मनमौजी आसानी से उड़ा ले जाते हैं।‌

    चिपकाने की कला में समय कम लगता है परंतु मेहनत बहुत ज़्यादा है। पहले पढ़ो, निर्णय करो कि कैसे उठाना है और कहाँ चिपकाना है। गूगल बाबा ने सारी समस्याओं का हल समय रहते ही सोच लिया था। हर बात पर हामी भरने, विचार चिपकाने के लिए शब्दों की जगह इमोजी बना दिए। समय और माँग के अनुसार इनकी गुणवत्ता, संख्या, रूप में बदलाव मानो चिपकाने वाले कलाकारों के लिए वरदान साबित हो गई।

    रचना, पोस्ट पढ़ने की भी जरूरत नहीं, उठाओ रंग-बिरंगे दिलों में से अपने पसंदीदा रंग का दिल और चिपका आओ। कहीं ठेंगा, कहीं ताली, कहीं नमस्कार का चमत्कार तो कहीं सुबह चाय की प्याली। चिपकाने में माहिर इन मनमौजियों को क्या लिखा है यह जानने उसी प्रकार इच्छा नहीं रहती जैसे कुछ को संसद में चलने वाले सत्र के विषय की।

    इमोजी चिपकाने का मायाजाल इतना भाने लगा कि अब एक-दो शब्द लिखना भी इनके बस का रोग नहीं रहा। आपातकालीन स्थिति में दो शब्द लिखने की ज़रूरत पड़ी तो फिर बस, गूगल शरणम् गच्छामि का रास्ता अपना लिया। अब कुछ शुभ प्रभात, शुभरात्रि, शुभकामनाओं के संदेश चिपकाने वाले दल की बात करते हैं। प्रतिदिन सूर्योदय से पहले, निष्ठा के साथ उगते सूरज, मुस्कुराते सूरज, लालिमा लपेटे सूरज को अपने सभी मित्रों-अमित्रों को चिपकाकर ही, बिस्तर से बाहर आते हैं।

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    विभिन्न रूपों के चाँद, घटते-बढ़ते, बादलों में छिपे, तारों संग चमकते चाँदों को जब-तक अपने सब कांटेक्ट में नहीं भेज देते, उनकी स्वयं की रात्रि शुभ नहीं होती।‌ बधाई और शुभकामना शब्दों में न ढालकर रंग-बिरंगे, देशी-विदेशी फूल, गुलदस्ते चिपकाकर, कर्त्तव्य की इतिश्री कर लेने वाले, इस चिपकाऊ गैंग की महिमा, शब्दों में बयां नहीं की जा सकती।

    चिपकाने के व्यापक तंत्र में दूसरों की कविताएं, रचनाएं अपनी दीवार पर चिपकाकर, बेसब्री से रंग-बिरंगे दिलों, फूलों और शाब्दिक शुभकामनाओं का इंतजार करते ये मनमौजी आसानी से देखे जा सकते हैं। इधर‌ का संदेश उधर करने में माहिर इन तस्करों की तन्मयता, इन्हें पुरस्कार का पात्र बनाती है।‌ काटने और चिपकाने में निष्ठा से लगे ये मनमौजी, साहित्य की आन-बान-शान हैं।

    सारे अच्छे, संस्कारी संदेशों, सूक्तियों, तुकबंदियों का कॉपीराइट लिए यह दल, सक्रियता से अपने आपको साधारण मानव से श्रेष्ठ साबित करने में जुटा है। इमोजी, संदेश काटकर चिपकाने वाले इन कलाकारों ने सोशल मीडिया में अपना वर्चस्व बनाया है। सारे मुहावरे, सारी कहावतों को अपने बगल में दबाए, चिपकाओ और राज करो की प्रधानता वाले इन कलाकारों की हर तरफ जय-जयकार है। इंतज़ार है किसी मंच द्वारा, इस कला में पारंगत लोगों के लिए पुरस्कारों की, श्रेणीबद्ध घोषणा की जाए। अपनी जगह सुरक्षित रखने के लिए लेखक ने आज ही आवेदन कर दिया है।

    शर्मिला चौहान

  • Crude Oil में उछाल के बावजूद Petrol-Diesel के दाम स्थिर, जानिए आपके शहर में आज का रेट

    Crude Oil में उछाल के बावजूद Petrol-Diesel के दाम स्थिर, जानिए आपके शहर में आज का रेट

    नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज भी कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 8 मई के लिए नए रेट जारी कर दिए हैं, जिनमें देश के प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती तल्खी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतों में तेजी देखी जा रही है।हालांकि, भारतीय तेल कंपनियां — IOC, BPCL और HPCL — ने फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। कंपनियां रोजाना सुबह 6 बजे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपये के विनिमय दर के आधार पर नए रेट तय करती हैं।

    देश के प्रमुख शहरों में Petrol के ताजा दाम

    ●नई दिल्ली – ₹94.77 प्रति लीटर

    ●कोलकाता – ₹105.41 प्रति लीटर

    ●मुंबई – ₹103.54 प्रति लीटर

    ●चेन्नई – ₹100.84 प्रति लीटर

    ●गुड़गांव – ₹95.65 प्रति लीटर

    ●नोएडा – ₹94.88 प्रति लीटर

    ●बेंगलुरु – ₹102.92 प्रति लीटर

    ●भुवनेश्वर – ₹101.35 प्रति लीटर

    ●चंडीगढ़ – ₹94.30 प्रति लीटर

    ●हैदराबाद – ₹107.46 प्रति लीटर

    ●जयपुर – ₹104.72 प्रति लीटर

    ●लखनऊ – ₹94.69 प्रति लीटर

    ●पटना – ₹105.23 प्रति लीटर

    ●तिरुवनंतपुरम – ₹107.33 प्रति लीटर

    Diesel के ताजा रेट

    ○नई दिल्ली – ₹87.67 प्रति लीटर

    ○कोलकाता – ₹92.76 प्रति लीटर

    ○मुंबई – ₹89.97 प्रति लीटर

    ○चेन्नई – ₹92.43 प्रति लीटर

    ○गुड़गांव – ₹88.50 प्रति लीटर

    ○नोएडा – ₹88.01 प्रति लीटर

    ○बेंगलुरु – ₹88.99 प्रति लीटर

    ○भुवनेश्वर – ₹92.92 प्रति लीटर

    ○चंडीगढ़ – ₹82.45 प्रति लीटर

    ○हैदराबाद – ₹95.70 प्रति लीटर

    ○जयपुर – ₹90.21 प्रति लीटर

    ○लखनऊ – ₹87.80 प्रति लीटर

    ○पटना – ₹92.09 प्रति लीटर

    ○तिरुवनंतपुरम – ₹96.18 प्रति लीटर

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दामों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल आम लोगों को स्थिर कीमतों से राहत जरूर मिली है।

  • Story Time: IITian ने छोड़ी करोड़ों की अमेरिकी नौकरी, माता-पिता के लिए खोली किराना दुकान

    Story Time: IITian ने छोड़ी करोड़ों की अमेरिकी नौकरी, माता-पिता के लिए खोली किराना दुकान

    Story Time: मेरा नाम विवेक शर्मा है। उम्र 32 साल। लोग जब पूछते हैं, तुम क्या करते हो, तो मैं कहता हूँ, किराना दुकान चलाता हूँ। वे हँसते हैं, क्योंकि उन्हें पता है मैं आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में गोल्ड मेडलिस्ट था, और मेरे पास सैन फ्रांसिस्को की एक कंपनी का ऑफर लेटर आज भी अलमारी में रखा है, जिस पर सैलरी लिखी है 2,40,000 डॉलर सालाना। मैंने वह लेटर कभी फाड़ा नहीं, पर कभी इस्तेमाल भी नहीं किया।

    कहानी 1998 से शुरू होती है, कानपुर के किदवई नगर में। दो कमरे का घर, ऊपर टीन। पापा रेलवे में क्लर्क, माँ ट्यूशन पढ़ातीं। मैं इकलौता बेटा। पापा की सैलरी 8,000 रुपये। माँ की ट्यूशन से 2,000। हम मिडिल क्लास भी नहीं थे, लोअर मिडिल पर पापा का एक सपना था, बेटा बड़ा आदमी बने। उन्होंने कभी मुझसे नहीं कहा डॉक्टर बन, इंजीनियर बन। वह सिर्फ कहते, बेटा, जितना पढ़ना है पढ़, पैसे की चिंता मत कर। मैं पढ़ता गया। दसवीं में 95 प्रतिशत, बारहवीं में 97। कोचिंग की फीस 1 लाख थी। पापा ने पीएफ निकाला। माँ ने अपनी चूड़ियाँ बेचीं। मैं कोटा गया। दो साल पंखे के नीचे पढ़ा, मच्छर खाए। 2012 में रिजल्ट आया, AIR 147। आईआईटी बॉम्बे, कंप्यूटर साइंस।

    जिस दिन लेटर आया, पापा मिठाई का डिब्बा ले कर पूरे मोहल्ले में बाँट आए। माँ रो पड़ी। बोली, अब मेरा बेटा अमेरिका जाएगा। आईआईटी में मैं उड़ा। कोडिंग, हैकाथॉन, इंटर्नशिप। तीसरे साल में गूगल समर इंटर्न, 1 लाख स्टाइपेंड। मैंने पहली सैलरी से पापा को फोन दिलाया, माँ को वॉशिंग मशीन। पापा ने फोन पर कहा, बेटा, अब तो रिटायरमेंट में आराम करूँगा।

    फाइनल ईयर में प्लेसमेंट। मैं दिन रात तैयारी करता। दिसंबर 2015, मेरा इंटरव्यू हुआ एक कंपनी से, नाम था स्ट्राइप जैसी पेमेंट स्टार्टअप, बेस सैन फ्रांसिस्को। चार राउंड, आखिरी में सीटीओ ने कहा, वी वांट यू। ऑफर आया, 240k डॉलर, H1B, रीलोकेशन। मैंने हॉस्टल में चिल्ला कर दोस्तों को बताया। रात को पापा को फोन किया। पापा चुप रहे, फिर बोले, बेटा, बहुत बड़ी बात है। माँ ने कहा, पासपोर्ट बनवा ले।

    मैंने टिकट देखना शुरू किया, अगस्त 2016 जॉइनिंग। मार्च 2016 में होली पर घर आया। पापा कमजोर लग रहे थे। खाँसी। मैंने कहा, डॉक्टर को दिखाओ। बोले, कुछ नहीं, ठंड लग गई। माँ भी थकी थकी। मैंने सोचा, उम्र है। अप्रैल में फोन आया, माँ का। पापा गिर गए, अस्पताल में। मैं भागा। डॉक्टर ने कहा, लंग्स में इंफेक्शन, साथ में हार्ट की प्रॉब्लम। एंजियोप्लास्टी करनी पड़ेगी। खर्च, 3 लाख।

    पापा के पास मेडिकल था, पर आधा ही कवर। मैंने अपनी इंटर्नशिप के पैसे, 2 लाख, निकाल कर दिए। ऑपरेशन हुआ। पापा बच गए। मैं वापस बॉम्बे गया, फाइनल प्रोजेक्ट। मई में फिर फोन, माँ को चक्कर आए। जांच हुई, ब्रेस्ट कैंसर, स्टेज 2। डॉक्टर ने कहा, कीमो शुरू करो, 6 साइकल, हर साइकल 80 हजार। कुल 5 लाख, प्लस सर्जरी।

    मैं सुन्न। पापा रिटायर हो चुके थे, पेंशन 12 हजार। घर में सेविंग खत्म। मैंने दोस्तों से उधार माँगा, 1 लाख मिला। बाकी। जून में मैं घर बैठा था, ऑफर लेटर हाथ में। वीजा इंटरव्यू 15 जुलाई को था। फ्लाइट 10 अगस्त की। माँ की पहली कीमो 20 जून को।

    मैंने पापा से कहा, मैं लोन लेता हूँ। पापा बोले, कौन देगा, घर गिरवी रखना पड़ेगा। मैंने कहा, रख देंगे। पापा ने मना किया, बोले, ये घर तेरी माँ की निशानी है। उस रात मैं छत पर बैठा। आसमान में प्लेन जा रहा था। मैंने सोचा, यही प्लेन मुझे ले जाएगा। दूसरी तरफ माँ नीचे दर्द में।

    मैंने अपने मेंटर को मेल किया, क्या जॉइनिंग डिफर हो सकती है, 6 महीने। रिप्लाई आया, सॉरी विवेक, वी नीड पीपल नाउ। यू कैन रीअप्लाई नेक्स्ट ईयर। मैंने फिर मेल किया, रिमोट पॉसिबल। नो। 14 जुलाई की रात। वीजा इंटरव्यू कल। माँ की दूसरी कीमो परसों। पापा दवाई लेने गए थे, लौटे तो पर्ची गिर गई, झुक कर उठा नहीं पाए। मैंने उठाई। उस वक्त समझ आया, मैं अगर चला गया तो ये दोनों कैसे रहेंगे।

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    पापा रिटायर्ड, बीमार। माँ कीमो पर। कोई भाई बहन नहीं। रिश्तेदार मदद नहीं करते। कौन अस्पताल ले जाएगा, कौन दवाई लाएगा, कौन रात को पानी देगा। मैंने सुबह वीजा इंटरव्यू कैंसिल किया। कंपनी को मेल लिखा, थैंक यू फॉर ऑफर, ड्यू टू फैमिली मेडिकल इमरजेंसी आई एम अनेबल टू जॉइन। दोस्तों ने फोन किया, पागल है क्या, 1.6 करोड़ की जॉब छोड़ रहा है। मैंने कहा, हाँ।

    माँ को नहीं बताया। पापा को बताया। वह चुप रहे, फिर बोले, बेटा तेरा करियर। मैंने कहा, करियर फिर बन जाएगा, आप फिर नहीं मिलोगे। मैंने कानपुर में ही नौकरी ढूंढी। एक लोकल सॉफ्टवेयर कंपनी, सैलरी 35 हजार। मैंने जॉइन कर ली। सुबह 9 से शाम 6 ऑफिस, शाम को अस्पताल। कीमो में माँ के बाल गए, वह रोती। मैं विग ले आया। पापा की दवाई टाइम पर देता।

    2016 से 2018, दो साल ऐसे निकले। माँ की सर्जरी हुई, रिकवरी हुई। कैंसर रिमिशन में आया। पापा की तबीयत स्थिर। पर पैसे खत्म। मैंने लोन लिया, 7 लाख। 2018 में कंपनी बंद हो गई। मैं बेरोजगार। इंटरव्यू दिए, बेंगलुरु से ऑफर आया, 18 लाख। मैंने मना किया। पापा बोले, जा बेटा। मैंने कहा, अब नहीं छोड़ सकता। माँ को हर तीन महीने चेकअप, पापा को डायबिटीज। कौन देखेगा।

    दोस्त बोले, तू अपना करियर मार रहा है। मैंने कहा, करियर मेरा है, माँ बाप भी मेरे। मैंने घर के नीचे छोटी सी दुकान खोली, पापा के नाम पर, शर्मा जनरल स्टोर। कंप्यूटर छोड़ कर दाल चावल बेचने लगा। पहले दिन शर्म आई। आईआईटी का लड़का दुकान पर। फिर एक आंटी आईं, बोलीं, बेटा तुम्हारी माँ ने मुझे पढ़ाया था, तुम दुकान खोलो, हम यहीं से लेंगे।

    धीरे धीरे दुकान चली। मैं सुबह 6 बजे होलसेल मंडी जाता, सामान लाता, दिन में दुकान, रात को फ्रीलांस कोडिंग। 500 डॉलर की वेबसाइट बनाता।2019 में माँ पूरी तरह ठीक। डॉक्टर ने कहा, क्लियर। उस दिन मैं दुकान बंद कर के मंदिर गया। प्रसाद चढ़ाया। घर आया तो पापा बोले, बेटा,तूने हमारे लिए सब छोड़ दिया। मैंने कहा, छोड़ा नहीं, बदला है।

    2020 लॉकडाउन। दुकान एसेंशियल में खुली। लोगों को राशन चाहिए था। मैंने होम डिलीवरी शुरू की। साइकिल पर जाता। पापा हिसाब लिखते। माँ पैकिंग करती। उस लॉकडाउन में हमने 2 लाख कमाए। मैंने लोन का आधा चुका दिया।

    2021 में मैंने दुकान के साथ एक छोटा कंप्यूटर क्लास शुरू किया, बच्चों को कोडिंग सिखाने। फीस 500 महीना। 20 बच्चे आए। मुझे फिर से कोडिंग का मजा आया। 2022 में एक बच्चा, अंश, जो मेरे पास पढ़ता था, उसने नेशनल ओलंपियाड जीता। न्यूज में आया, ‘कानपुर के किराना वाले आईआईटीयन से सीख कर जीता’। वह आर्टिकल वायरल हुआ।

    उसी हफ्ते मुझे मेल आया, स्ट्राइप के उसी सीटीओ से। लिखा था, विवेक, आई सॉ योर स्टोरी। वी आर ओपनिंग इंडिया ऑफिस। वुड यू लाइक टू लीड एजुकेशन इनिशिएटिव, रिमोट, पार्ट टाइम। मैंने हाँ कहा। अब मैं सुबह दुकान, दोपहर क्लास, शाम को यूएस टीम के साथ काम। सैलरी डॉलर में नहीं, पर इज्जत में बहुत।

    पिछले महीने पापा 68 के हुए। मैंने छोटा सा फंक्शन रखा। दोस्त आए, वही जो कहते थे तूने करियर बर्बाद किया। पापा ने माइक ले कर कहा, मेरा बेटा अमेरिका नहीं गया, पर मेरे पास रहा। जब मैं अस्पताल में था, उसने मेरा हाथ पकड़ा। जब इसकी माँ के बाल गए, इसने चोटी बनाई। करियर तो बहुत लोग बनाते हैं, बेटा कोई कोई बनता है।

    माँ ने धीरे से कहा, मुझे आज भी वह ऑफर लेटर याद है। तूने अलमारी में क्यों रखा। मैंने कहा, ताकि याद रहे मैंने क्या छोड़ा। बोली, तूने छोड़ा नहीं, तूने चुना। आज दुकान पर बैठा हूँ। सामने स्कूल के बच्चे टॉफी ले रहे हैं। लैपटॉप पर कोड चल रहा है। पापा बगल में अखबार पढ़ रहे हैं, माँ काउंटर पर बैठी हैं। कभी कभी रात को वह ऑफर लेटर निकालता हूँ। 240,000 डॉलर। फिर माँ की हँसी सुनता हूँ, पापा की खाँसी कम हुई है, देखता हूँ। और लेटर वापस रख देता हूँ।

    लोग पूछते हैं, पछतावा होता है। मैं सच कहता हूँ, पहले होता था। जब दोस्त बेंगलुरु से फोटो डालते, यूएस ट्रिप की। अब नहीं। क्योंकि मैंने करियर का त्याग नहीं किया, मैंने करियर को रीडिफाइन किया। मेरा करियर अब सिर्फ कोड नहीं, केयर है। मैंने माता पिता के लिए अमेरिका छोड़ा, पर उनके साथ जिंदगी जी ली। पापा को हर सुबह चाय दे पाता हूँ, माँ के पैर दबा पाता हूँ। ये 2.4 करोड़ में नहीं मिलता।

    अगर फिर से मौका मिले, तो मैं फिर वही करूँगा। वीजा कैंसिल, जॉब छोड़, दुकान खोल। क्योंकि कुछ त्याग घाटा नहीं होते, वे निवेश होते हैं, प्यार में। और आज जब कोई बच्चा पूछता है, भैया आप आईआईटी करके दुकान क्यों, मैं हँस कर कहता हूँ, क्योंकि मेरे माता पिता मेरी सबसे बड़ी कंपनी हैं, और मैं उनका फुल टाइम सीईओ हूँ।l

  • Hindi Poetry: विरह की तपन में भीगती भावनाएं: ‘अंखियां से बरसइ रोज सपनवां’

    Hindi Poetry: विरह की तपन में भीगती भावनाएं: ‘अंखियां से बरसइ रोज सपनवां’

    Hindi Poetry: तपन बढ़ती जा रही है। विरह में बदन तप रहा है तो तपते सूरज से धरती की तपन। उसकी समझ में नहीं आ रहा है कि अपने दिल का दर्द किससे कहे।

    अंखियां से बरसइ रोज सपनवां
    सुगनवां हमरे।

    केतनउ दिल के समुझाई
    फिर भी आवेला रोवाई
    साजन बिनु हमरी हालत
    जल बिनु मछरी की नाईं
    होरहा जस जरेला मोर परनवां
    अंखियां से बरसइ रोज सपनवां
    सुगनवां हमरे।

    सेजिया पर गरम तवा पे
    बूनी जस तड़पत बानी
    पानी न बरसइ बालम
    फिर भी हम पानी-पानी
    पिसि-पिसि के जियरा भइल पिसनवां
    सुगनवां हमरे।

    अमराई चहकत बाटइ
    तरुणाई बहकत बाटइ
    लेकिन आंवां के जइसन
    ई देहिया धधकत बाटइ
    काटइ दउड़इ हमके मधुबनवां
    सुगनवां हमरे।

    तोहरे जियरा में का बा?
    समुझइं न काशी-काबा
    हमरी भगिया मा साजन
    लागत बाटइ सुख ना बा
    मटिया म मिलि गा सबइ सपनवां
    सुगनवां हमरे।

    परती बा खेतिया हमरी
    सुनी बा रतिया हमरी
    फोनवा ना लागइ तोहरा
    आवइ न पतिया तोहरी
    रूठल बा काहें मोर किसनवां
    सुगनवां हमरे।

    गउवां में डीजे बाजइ
    नाचइं जब छोरा-छोरी
    झांकी हम रहिया तोहरी
    मदमाइल मतिया मोरी
    उपरा से मारइ बान मदनवां
    सुगनवां हमरे।

    सुरेश मिश्र

  • Pink Lips Home Remedies: होंठों का कालापन दूर कैसे करें? अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय और पाएं सॉफ्ट गुलाबी होंठ

    Pink Lips Home Remedies: होंठों का कालापन दूर कैसे करें? अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय और पाएं सॉफ्ट गुलाबी होंठ

    Pink Lips Home Remedies: क्या आप भी अपने चेहरे की स्किन का तो पूरा ध्यान रखते हैं, लेकिन होंठ काले और बेजान ही नजर आते हैं? यह एक आम समस्या है, जो आपके पूरे लुक को प्रभावित कर सकती है। महंगे प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने के बावजूद अगर फर्क नहीं दिख रहा, तो अब वक्त है आसान और असरदार घरेलू उपाय अपनाने का। (Pink Lips Home Remedies)

    पानी और अच्छी आदतें भी हैं जरूरी
    कई बार डिहाइड्रेशन और गलत आदतें भी होंठों के कालेपन का कारण बनती हैं।

    • दिनभर पर्याप्त पानी पिएं
    • स्मोकिंग से बचें
    • होंठों को बार-बार चाटने से बचें
    • बाहर जाते समय SPF वाला लिप बाम जरूर लगाएं नींबू और शहद से पाएं नैचुरल गुलाबी होंठ
      नींबू में मौजूद नैचुरल ब्लीचिंग प्रॉपर्टीज होंठों के कालेपन को कम करने में मदद करती हैं, जबकि शहद उन्हें गहराई से मॉइस्चराइज करता है।
    • आधा चम्मच नींबू का रस + आधा चम्मच शहद मिलाकर होंठों पर लगाएं
    • 15 मिनट बाद धो लें
    • रोजाना इस्तेमाल से जल्दी असर दिखेगा नारियल तेल से करें डीप मॉइस्चराइजिंग
      नारियल तेल होंठों को पोषण देने के साथ उनके रंग को भी निखारता है।
    • दिन में 2–3 बार हल्के हाथों से मसाज करें
    • इससे होंठ सॉफ्ट और हेल्दी बनते हैं चीनी और शहद से हटाएं डेड स्किन
      डेड स्किन सेल्स जमा होने से होंठ काले दिखने लगते हैं।
    • 1 चम्मच चीनी + थोड़ा शहद मिलाकर स्क्रब करें
    • हफ्ते में 2–3 बार इस्तेमाल करें
    • होंठ साफ और ग्लॉसी नजर आएंगे
  • Genetic Risk Protection: बच्चों को Diabetes से कैसे रखें दूर? जानें 5 आसान तरीके

    Genetic Risk Protection: बच्चों को Diabetes से कैसे रखें दूर? जानें 5 आसान तरीके

    Genetic Risk Protection: जब माता-पिता से ऐसे जीन बच्चों में ट्रांसफर होते हैं, जो शरीर की इंसुलिन प्रतिक्रिया को प्रभावित करते हैं, तो इसे जेनेटिक डायबिटीज कहा जाता है।

    ⚠️ डायबिटीज के प्रमुख कारण
    इंसुलिन रेजिस्टेंस (शरीर इंसुलिन को सही से इस्तेमाल नहीं करता)
    बीटा सेल्स का सही से काम न करना
    अनहेल्दी लाइफस्टाइल (जंक फूड, मोटापा, तनाव)
    🚨 लक्षण जिन पर रखें नजर
    बार-बार प्यास लगना
    बार-बार पेशाब आना
    अचानक वजन कम होना
    थकान और कमजोरी
    घाव देर से भरना
    त्वचा का काला पड़ना

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    टाइप 1 डायबिटीज (Genetic Risk Protection)
    टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून कंडीशन है। अगर पुरुष को टाइप 1 डायबिटीज है, तो बच्चे को डायबिटीज होने की संभावना 17 में से 1 होती है। वहीं अगर मां को टाइप 1 डायबिटीज है और बच्चे का जन्म 25 साल से पहले हुआ है, तो उन बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज का खतरा 25 में से 1 है। वहीं अगर बच्चे का जन्म 25 साल की उम्र के बाद हुआ, तो उनके बच्चों में इस डायबिटीज का खतरा 100 में से 1 है।

    टाइप 2 डायबिटीज
    यह जीन और लाइफस्टाइल के मिश्रण से होने वाली समस्या है। अगर फैमिली में पहले से किसी को टाइप 2 डायबिटीज है, तो यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि आपकी डायबिटीज लाइफस्टाइल की वजह से है या फिर जेनेटिक्स की वजह से है।

    जेनेटिक डायबिटीज की वजह
    इंसुलिन रेजिस्टेंस

    जब पेरेंट्स से ऐसे जीन मिलते हैं, जोकि बॉडी को इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं करने देते हैं। तो टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। जब हमारे सेल्स इंसुलिन की बात मानना बंद कर देते हैं, जिसको हम इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं। इससे हमारे ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ने लगता है।

    बीटा सेल डिस्फंक्शन
    बता दें कि पैनक्रियाज वह अंग है, जिसमें बीटा सेल्स होती हैं। इसका काम इंसुलिन हार्मोन प्रोड्यूस करना होता है। इंसुलिन का काम ब्लड से शुगर यानी ग्लूकोज को निकालकर बॉडी की सेल्स तक पहुंचाना है। जिससे हमको एनर्जी मिल सके। इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण पैनक्रियाज बीटा सेल्स नहीं बना पाती है। ऐसे में भी डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

    लक्षण
    आंखों की रोशनी में अचानक बदलाव होना।
    घाव भरने में अधिक समय लगना।
    बहुत ज्यादा प्यास लगना।
    बिना कारण वजन घटना
    बार-बार पेशाब आना।
    त्वचा का काला पड़ना।
    थकान और कमजोरी।

    टाइप 2 और प्री-डायबिटीज के लिए टेस्ट
    एचबीए1सी टेस्ट

    एचबीए1सी टेस्ट के जरिए पिछले 2 से 3 महीनों का औसत शुगर लेवल का पता लगाया जा सकता है। बच्चों में डायबिटीज का पता लगाने के लिए यह सबसे आसान टेस्ट है। क्योंकि इस टेस्ट के लिए बच्चे को भूखे रहने की भी जरूरत नहीं है।

    फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज
    सुबह खाली पेट यह टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट से पहले आमतौर पर बच्चे को कम से कम 8 से 10 घंटे तक भूखे रहना होता है। इस दौरान बच्चा सिर्फ पानी पी सकता है। यह प्री-डायबिटीज और डायबिटीज का पता लगाने का आसान तरीका है।

    ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट
    इसमें ग्लूकोज वाला पानी पिलाया जाता है। फिर उसको 2 घंटे बाद शुगर लेवल चेक किया जाता है। ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट से पता चलता है कि बॉडी किस तरह से शुगर को हैंडल कर रहा है।

    पेरेंट्स बच्चे को ऐसे डायबिटीज से बचाएं
    हेल्दी डाइट

    अगर माता-पिता को डायबिटीज है, तो उनको अपने बच्चे की डाइट का खास ख्याल रखना चाहिए। बच्चे को प्रोसेस्ड फूड और चीनी जैसे- पैकेट बंद जूस, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक्स और चॉकलेट्स बहुत कम मात्रा में दें।बच्चों में डाइट मुख्य रूप से जेनेटिक डायबिटीज को ट्रिगर करती है। जोकि आनुवांशिक रूप से संवेदनशील बच्चों में ऑटोइम्यूनिटी के लिए एक एंवायरमेंट फैक्टर्स के रूप में काम करती हैं। या फिर इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देती है। पेरेंट्स को बच्चों की डाइट में फाइबर की मात्रा को बढ़ाना चाहिए। वहीं उनकी डाइट में सलाद और हरी पत्तेदार सब्जियों को जरूर शामिल करें।

    कम करें स्क्रीन टाइम
    आज के समय में बच्चों का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है। कई बच्चे घंटों तक मोबाइल पर समय बिताते हैं। जितना ज्यादा स्क्रीन टाइम होता है, टाइप 2 डायबिटीज का खतरा उतना बढ़ जाता है। क्योंकि स्क्रीन टाइम के समय बच्चे निष्क्रिय बैठते हैं, जिससे मांसपेशियां ग्लूकोज का इस्तेमाल कम करती हैं। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने लगता है। अक्सर स्क्रीन देखते हुए बच्चे अनहेल्दी स्नैक्स का भी सेवन कर बैठते हैं। जिससे मोटापे का खतरा बढ़ता है। इसलिए पेरेंट्स को चाहिए कि बच्चे का स्क्रीन टाइम कम करें।

    फिजिकल एक्टिविटी
    कम से कम 60 मिनट तक बच्चे को पसीने वाली फिजिकल एक्टिविटी जैसे बैडमिंटन, फुटबॉल, रनिंग या स्विमिंग करने के लिए मोटिवेट करना चाहिए। इससे बच्चा शारीरिक रूप से सक्रिय होता है और मोटापा नहीं बढ़ता है। वहीं मेटाबॉलिज्म भी ठीक तरह से काम करता है। इससे डायबिटीज के खतरे को भी कम किया जा सकता है।

    वजन कंट्रोल
    माता-पिता के लिए जरूरी है कि वह अपने बच्चे का वेट कंट्रोल में रखने की कोशिश करें। एक रिपोर्ट के मुताबिक मोटापा बच्चों में इंसुलिन रिजेस्टेंस पैदा करके टाइप 2 डायबिटीज की वजह बनता है।

  • Skoda Auto Volkswagen India Private Limited: SAVWIPL ने बढ़ाया R&D विस्तार, पुणे टेक्नोलॉजी सेंटर के नए विंग का उद्घाटन

    मुंबई। Skoda Auto Volkswagen India Private Limited (SAVWIPL) ने पुणे के बानेर स्थित अपने टेक्नोलॉजी सेंटर के नए विंग का उद्घाटन किया है। इस विस्तार के साथ कंपनी ने भारत में अपने अनुसंधान एवं विकास (R&D) नेटवर्क को और मजबूत किया है।

    करीब 33,000 वर्ग फुट में फैला यह नया सेंटर एडवांस्ड व्हीकल डेवलपमेंट, प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस और सस्टेनेबल मोबिलिटी इनोवेशन पर केंद्रित है। यह विस्तार चाकन प्लांट के साथ मिलकर काम करेगा, जिससे कंपनी की कुल इंजीनियरिंग टीम 450 से अधिक हो गई है।कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ Piyush Arora ने कहा कि पुणे में R&D विस्तार भारत में कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नए विंग के जरिए कंपनी डिजिटलाइजेशन, ऑटोमेशन और एडवांस्ड सेफ्टी टेक्नोलॉजी में अपनी क्षमताएं बढ़ाएगी।

    Skoda Auto Volkswagen India Private Limited का टेक्नोलॉजी सेंटर पुणे 2019 से सक्रिय है और भारतीय बाजार के लिए वाहनों के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। इसने Volkswagen Taigun, Skoda Kushaq और Skoda Kylaq जैसे मॉडलों के विकास में योगदान दिया है।यह नया विस्तार ‘मेड इन इंडिया फॉर इंडिया एंड द वर्ल्ड’ विजन को आगे बढ़ाते हुए भारत को वैश्विक ऑटोमोटिव इनोवेशन हब के रूप में मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।