Category: lifestyle

  • LPG Cylinder: यूएस-इजरायल और ईरान तनाव के बीच भारत ने एलपीजी सप्लाई को सुरक्षित रखा लेकिन जनता कालाबाजारी से बेहाल

    LPG Cylinder: यूएस-इजरायल और ईरान तनाव के बीच भारत ने एलपीजी सप्लाई को सुरक्षित रखा लेकिन जनता कालाबाजारी से बेहाल

    ;

    नई दिल्ली/मुंबई: यूएस-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है, जिससे एलपीजी (LPG Cylinder) की सप्लाई पर भी असर पड़ा। भारत सरकार ने एलपीजी की घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने दावा किया है कि घरेलू डिलीवरी सामान्य समय पर ही जारी रहेगी।

    लेकिन वास्तविक स्थिति जनता के लिए भयावह बनी हुई है। कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की कालाबाजारी और ऊँचे होलसेल दाम आम जनता को परेशान कर रहे हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार बड़े कारोबारी और डीलर एलपीजी की उपलब्धता को नियंत्रित कर उसके दाम बढ़ा रहे हैं। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को सिलेंडर खरीदने में मुश्किल हो रही है, और सरकारी राहत की योजनाएं प्रभावी रूप से जमीन पर नहीं पहुंच पा रही हैं।

    पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने एलपीजी की सुरक्षित सप्लाई और नए LNG कार्गो की व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि घरेलू सेक्टर को प्राथमिकता दी जा रही है और नॉन-डोमेस्टिक सेक्टर जैसे हॉस्पिटल और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को भी जरूरत के अनुसार आवंटन किया जा रहा है। वहीं एलपीजी बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतराल को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।

    सरकार का दावा है कि घरेलू डिलीवरी सामान्य रूप से 2.5 दिन में होगी, लेकिन जनता का कहना है कि होलसेल दामों और कालाबाजारी के कारण सिलेंडर आसानी से नहीं मिल रहा। BPCL, IOC और HPCL की संयुक्त समिति मांग और आवंटन की समीक्षा कर रही है, लेकिन कई क्षेत्रों में लोग निजी डीलरों के बढ़ते दाम और काले बाजारी आपूर्ति से परेशान हैं।

    केंद्रीय गृह सचिव ने राज्यों के डीजीपी और सचिवों से कहा है कि कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएँ। हालांकि जनता का अनुभव बताता है कि इस दिशा में कार्रवाई पर्याप्त नहीं हो रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के उपायों और अतिरिक्त LNG आयात के बावजूद स्थानीय डीलरों द्वारा किए जा रहे मनमाने दामों और कालाबाजारी पर नजर रखना बेहद जरूरी है, वरना आम जनता की परेशानी और बढ़ सकती है।

    सरकार का दावा और जनता का अनुभव फिलहाल आमने-सामने हैं, और एलपीजी संकट को लेकर वास्तविक राहत जनता तक पहुँचने में देरी हो रही है।

  • MWC 2026 में गैलेक्सी S26 अल्ट्रा को ‘बेस्ट इन शो’ अवॉर्ड

    MWC 2026 में गैलेक्सी S26 अल्ट्रा को ‘बेस्ट इन शो’ अवॉर्ड

    मुंबई: सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने घोषणा की है कि उसके फ्लैगशिप स्मार्टफोन सैमसंग गैलेक्सी S26 अल्ट्रा को ‘ग्लोबल मोबाइल अवार्ड्स’ में ‘बेस्ट इन शो’ के सम्मान से नवाज़ा गया है। यह पुरस्कार बार्सिलोना में आयोजित मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 (MWC 2026) के दौरान दिया गया। इन पुरस्कारों का आयोजन हर साल ‘ग्लोबल मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन’ द्वारा किया जाता है, जो मोबाइल उद्योग में बेहतरीन नवाचारों को मान्यता देता है। ‘बेस्ट इन शो’ श्रेणी उन उपभोक्ता-केंद्रित उत्पादों को सम्मानित करती है जो तकनीक के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करते हैं। इसे उद्योग के सबसे बड़े सम्मानों में से एक माना जाता है। 200 से अधिक अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों, पत्रकारों और विशेषज्ञों की जूरी द्वारा चुने जाने के कारण इन डिवाइस को डिजिटल जगत का “गोल्ड स्टैंडर्ड” माना जाता है।

    जूरी के अनुसार, यह पुरस्कार इसके उन्नत हार्डवेयर और One UI 8.5 सॉफ्टवेयर के बेहतरीन मेल के लिए दिया गया है। इसमें मौजूद गैलेक्सी AI यूज़र की जरूरतों को समझकर रोज़मर्रा के काम आसान बनाता है और सुरक्षा व गोपनीयता का भी पूरा ध्यान रखता है। गैलेक्सी S26 अल्ट्रा में दुनिया का पहला इन-बिल्ट ‘प्राइवेसी डिस्प्ले’ दिया गया है, जो अधिक निजी और बेहतर व्यूइंग अनुभव प्रदान करता है। साथ ही इसका कस्टमाइज़्ड चिपसेट तेज़ और उन्नत गैलेक्सी AI को पावर देता है। जूरी चेयरमैन शॉन कॉलिन्स ने कहा कि कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच गैलेक्सी S26 अल्ट्रा अपने नवाचार और प्राइवेसी-केंद्रित तकनीक के कारण सबसे अलग रहा। 3,000 से अधिक प्रदर्शकों के बीच इसे ऐसी तकनीक के रूप में सराहा गया, जो भविष्य की संभावनाओं को आज ही उपभोक्ताओं तक पहुंचाती है। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स की स्टेफ़नी चोई ने कहा कि ‘बेस्ट इन शो’ सम्मान गैलेक्सी S26 अल्ट्रा के एजेंटिक एआई फोन के रूप में मोबाइल तकनीक में नए मानक स्थापित करने की दिशा में कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

  • AUDI INDIA:ऑडी इंडिया ने नई ऑडी SQ8 की बुकिंग शुरू की, 17 मार्च को होगी लॉन्च

    AUDI INDIA:ऑडी इंडिया ने नई ऑडी SQ8 की बुकिंग शुरू की, 17 मार्च को होगी लॉन्च

    मुंबई। जर्मन लग्ज़री कार निर्माता ऑडी इंडिया(AUDI INDIA) ने भारत में अपनी नई लग्ज़री एसयूवी ऑडी SQ8 की बुकिंग शुरू करने की घोषणा की है। ग्राहक इस एसयूवी को 5 लाख रुपये की शुरुआती राशि के साथ ऑडी इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट या ‘मायऑडी कनेक्ट’ ऐप के माध्यम से बुक कर सकते हैं। कंपनी इस कार को 17 मार्च 2026 को आधिकारिक तौर पर लॉन्च करेगी।

    नई ऑडी SQ8 में 4.0-लीटर V8 TFSI इंजन दिया गया है, जो 373 kW की पावर और 770 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। यह दमदार इंजन एसयूवी को केवल 4.1 सेकंड में 0 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचाने में सक्षम बनाता है, जबकि इसकी अधिकतम स्पीड 250 किमी प्रति घंटा है।

    ऑडी इंडिया ने नई लग्ज़री एसयूवी ऑडी SQ8 की बुकिंग शुरू की, 5 लाख रुपये की शुरुआती राशि के साथ ग्राहक वेबसाइट और ‘मायऑडी कनेक्ट’ ऐप के जरिए कर सकते हैं बुकिंगऑडी इंडिया ने नई लग्ज़री एसयूवी ऑडी SQ8 की बुकिंग शुरू की, 5 लाख रुपये की शुरुआती राशि के साथ ग्राहक वेबसाइट और ‘मायऑडी कनेक्ट’ ऐप के जरिए कर सकते हैं बुकिंग

    इस एसयूवी में ऑडी का क्वॉट्रो परमानेंट ऑल-व्हील ड्राइव, सेल्फ-लॉकिंग सेंटर डिफरेंशियल, एडैप्टिव एयर सस्पेंशन स्पोर्ट और ऑल-व्हील स्टीयरिंग जैसे आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं, जो इसे दमदार और स्मूद ड्राइविंग अनुभव प्रदान करते हैं।

    ऑडी इंडिया के ब्रांड डायरेक्टर बलवीर सिंह ढिल्लों ने कहा कि ऑडी SQ8 रोजमर्रा की लग्ज़री और शानदार स्पोर्टी परफॉर्मेंस का बेहतरीन मिश्रण है। उन्होंने बताया कि भारत में ऑडी की Q सीरीज़ को ग्राहकों से अच्छा प्रतिसाद मिला है और कंपनी को उम्मीद है कि नई SQ8 भी परफॉर्मेंस पसंद करने वाले ग्राहकों को आकर्षित करेगी। उन्होंने ग्राहकों को सीमित उपलब्धता के कारण समय रहते बुकिंग कराने की सलाह भी दी।

  • पश्चिम एशिया तनाव का असर: महंगे सिलेंडर के बाद अब कमर्शियल LPG की कमी से होटल-रेस्टोरेंट उद्योग परेशान

    पश्चिम एशिया तनाव का असर: महंगे सिलेंडर के बाद अब कमर्शियल LPG की कमी से होटल-रेस्टोरेंट उद्योग परेशान

    मुंबई: पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का असर अब भारत के जमीनी हालात पर भी साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद जहां घरेलू उपभोक्ता पहले ही परेशान हैं, वहीं अब कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी ने होटल और रेस्टोरेंट उद्योग की चिंता बढ़ा दी है।

    देश के कई बड़े शहरों — मुंबई, चेन्नई और बंगलूरू — से यह खबरें सामने आ रही हैं कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की नियमित सप्लाई बाधित हो रही है। इससे होटल और रेस्टोरेंट की रसोई चलाना मुश्किल हो गया है और कारोबार पर सीधा असर पड़ने लगा है। उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो कई छोटे होटल और ढाबों का काम ठप होने की नौबत आ सकती है।

    सिलेंडर की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी

    7 मार्च 2026 से देशभर में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है।

    सिलेंडर प्रकारपुराना रेट (मुंबई)नया रेट (मुंबई)बढ़ोतरी
    घरेलू LPG (14.2 किलो)₹852.50₹912.50₹60
    कमर्शियल LPG (19 किलो)लगभग ₹1,692लगभग ₹1,836₹115–₹144

    कीमत बढ़ने के बाद कई इलाकों में सिलेंडर की सप्लाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

    होटल उद्योग ने सरकार से किया हस्तक्षेप का आग्रह

    होटल और रेस्टोरेंट उद्योग की प्रमुख संस्था फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FHRAI) ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

    संस्था का कहना है कि जमीनी स्तर पर गैस सिलेंडर की सप्लाई में भारी रुकावट आ रही है। कई गैस डिस्ट्रीब्यूटर 5 मार्च के कथित सरकारी आदेश का हवाला देकर कमर्शियल सिलेंडर देने से मना कर रहे हैं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट चलाना मुश्किल हो रहा है।

    FHRAI के महासचिव जैसन चाको ने कहा कि सरकार को इस मामले में तुरंत स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए ताकि यह साफ हो सके कि होटल और फूड सर्विस सेक्टर के लिए गैस सप्लाई पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

    रेस्टोरेंट संगठनों ने भी जताई चिंता

    रेस्टोरेंट उद्योग की दूसरी प्रमुख संस्था भारतीय राष्ट्रीय रेस्तरां संघ (NRAI) ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि कई गैस सप्लायर रेस्टोरेंट उद्योग की मांग पूरी करने में असमर्थता जता रहे हैं, जिससे कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

    NRAI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि खबरों के अनुसार सरकार ने स्पष्ट किया है कि रेस्टोरेंट उद्योग के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई सप्लायर गैस देने से मना कर रहे हैं।

    मुंबई में भी बढ़ी परेशानी

    मुंबई में होटल व्यवसाईयों का कहना है कि सिलेंडर की सप्लाई समय पर नहीं मिल रही है। कुछ जगहों पर सिलेंडर मिलने में 2 से 5 दिन की देरी के साथ तय कीमत से 300-500रुपए ज्यादा में मिल रही है, जिससे रसोई संचालन प्रभावित हो रहा है। छोटे रेस्टोरेंट और ढाबों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर बनती जा रही है। होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर लोगों को भोजन उपलब्ध कराने जैसी जरूरी सेवा से जुड़ा है। यदि गैस सप्लाई में रुकावट जारी रहती है तो इसका असर सीधे आम नागरिकों तक पहुंचेगा और खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं।

    निगरानी बढ़ाने की मांग

    सामाजिक संगठनों और उद्योग प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं ताकि कमर्शियल और घरेलू दोनों तरह के सिलेंडरों की सप्लाई बिना बाधा जारी रहे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को सप्लाई चेन की निगरानी, कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई और शिकायत तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि महंगाई और गैस संकट का बोझ आम लोगों और कारोबारियों पर कम किया जा सके।

    समाजसेवी व पत्रकार जगदीश पुरोहित

  • AI Investment Plan: मुकेश अंबानी का बड़ा ऐलान: AI में 10 लाख करोड़ का करेंगे निवेश

    AI Investment Plan: मुकेश अंबानी का बड़ा ऐलान: AI में 10 लाख करोड़ का करेंगे निवेश

    Reliance Industries के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के मंच से एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए अगले सात वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रुपये निवेश करने का ऐलान किया है। उनका लक्ष्य साफ है—जिस तरह Jio Platforms ने इंटरनेट को हर हाथ तक पहुंचाया, उसी तरह अब AI को हर भारतीय के लिए सस्ता और सुलभ बनाया जाएगा।


    AI Investment Plan के लिए विदेशी निर्भरता खत्म करने पर जोर

    अंबानी ने कहा कि भारत को अपनी तकनीकी जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भर रहना अब जोखिम भरा है। उन्होंने इसे “इंटेलिजेंस को किराये पर लेना” बताया और स्पष्ट किया कि देश को अपना सुरक्षित और स्वदेशी AI इकोसिस्टम विकसित करना होगा।

    उनके अनुसार, जियो ने देश को डेटा क्रांति से जोड़ा था, और अब रिलायंस भारत को “एज ऑफ इंटेलिजेंस” में ले जाने की तैयारी कर चुका है।


    रिलायंस के AI मिशन के 3 प्रमुख आधार

    1. जामनगर में अत्याधुनिक AI डेटा सेंटर
    जामनगर में विश्वस्तरीय एआई डेटा सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जो 10 गीगावाट ग्रीन एनर्जी से संचालित होंगे। इससे तकनीक और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम रहेगा।

    2. जियो नेटवर्क के जरिए लो-लेटेंसी AI सेवाएं
    देशभर में फैले जियो के टेलीकॉम नेटवर्क का उपयोग कर ऐसा डिजिटल ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे बिना रुकावट (लो-लेटेंसी) के AI सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

    3. गांव-गांव तक AI की पहुंच
    रिलायंस एक सुरक्षित और व्यापक सिस्टम विकसित करेगा, जिसका लाभ केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। यह तकनीक गांवों के खेतों, छोटे स्कूलों, मोहल्ले के क्लीनिकों और किराना दुकानों तक पहुंचेगी।


    राष्ट्र निर्माण की दिशा में कदम

    मुकेश अंबानी ने स्पष्ट किया कि यह निवेश केवल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से किया जा रहा है। उनका मानना है कि जियो भारत के AI ट्रांसफॉर्मेशन की धुरी बनेगी और इससे सरकारी सेवाओं, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आएगा।

    यह पहल भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

  • INDIA-US Agro Trade Deal: क्या अमेरिका के साथ कृषि समझौता भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” साबित होगा?

    INDIA-US Agro Trade Deal: क्या अमेरिका के साथ कृषि समझौता भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” साबित होगा?

    मोदी सरकार की एग्री-डील पर उठते सवाल और हकीकत

    भारत और अमेरिका के बीच कृषि क्षेत्र (INDIA-US Agro Trade Deal) में बढ़ते सहयोग और संभावित व्यापारिक समझौतों को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्ष के कुछ नेताओं और किसान संगठनों का आरोप है कि यह समझौता भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ है और “किसानों के डेथ वारंट” पर हस्ताक्षर जैसा कदम है।

    लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है? आइए विस्तार से समझते हैं।


    कृषि समझौते की पृष्ठभूमि

    भारत और अमेरिका के बीच कृषि व्यापार पहले से ही जारी है। भारत अमेरिका से बादाम, सेब, दालें और कृषि तकनीक आयात करता है, जबकि अमेरिका को चावल, मसाले, समुद्री उत्पाद और कुछ कृषि उत्पाद निर्यात करता है।

    हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच:

    • कृषि बाजारों को खोलने,
    • टैरिफ कम करने,
    • जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों के आयात,
    • डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के व्यापार
      को लेकर चर्चा तेज हुई है।

    इसी संदर्भ में प्रस्तावित या चर्चित “कृषि डील” को लेकर किसानों में आशंकाएँ पैदा हुई हैं।


    किसानों की प्रमुख चिंताएँ

    1. सस्ते आयात का खतरा

    अमेरिका में कृषि बड़े पैमाने पर, अत्याधुनिक तकनीक और भारी सरकारी सब्सिडी के सहारे की जाती है। यदि भारतीय बाजार अमेरिकी गेहूं, मक्का, सोयाबीन या डेयरी उत्पादों के लिए खुलता है, तो:

    • भारतीय किसानों को मूल्य प्रतिस्पर्धा में भारी नुकसान हो सकता है
    • एमएसपी व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है
    • छोटे और सीमांत किसान बाजार से बाहर हो सकते हैं

    2. जीएम फसलों का मुद्दा

    अमेरिका जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों का बड़ा उत्पादक है। यदि ऐसे उत्पाद भारत में व्यापक रूप से आयात होते हैं, तो:

    • जैव विविधता पर असर पड़ सकता है
    • पारंपरिक बीजों और स्थानीय खेती पर संकट आ सकता है
    • बीज कंपनियों की निर्भरता बढ़ सकती है

    3. डेयरी सेक्टर पर दबाव

    भारत का डेयरी क्षेत्र मुख्यतः छोटे किसानों और सहकारी मॉडल (जैसे अमूल) पर आधारित है। अमेरिकी डेयरी उत्पादों को अनुमति मिलने से लाखों दुग्ध उत्पादकों की आय पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


    सरकार का पक्ष क्या है?

    सरकार का कहना है कि:

    • कोई भी समझौता भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करते हुए ही किया जाएगा।
    • निर्यात के नए अवसर खुलेंगे, जिससे किसानों को वैश्विक बाजार मिलेगा।
    • कृषि तकनीक, कोल्ड स्टोरेज, सप्लाई चेन और प्रोसेसिंग में निवेश बढ़ेगा।
    • भारत को उच्च गुणवत्ता वाले बीज और तकनीकी सहयोग मिलेगा।

    सरकार यह भी तर्क देती है कि वैश्विक व्यापार से अलग रहकर भारत कृषि क्षेत्र को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी नहीं बना सकता।


    “डेथ वारंट” वाली राजनीति

    “डेथ वारंट” जैसे शब्द राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं। विपक्ष इसे 2020 के कृषि कानूनों की याद से जोड़ता है, जब बड़े कॉर्पोरेट और विदेशी कंपनियों के प्रवेश को लेकर व्यापक किसान आंदोलन हुआ था।

    आलोचकों का कहना है कि:

    • यह समझौता धीरे-धीरे कृषि बाजार को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए खोल देगा
    • एमएसपी कानूनी गारंटी से ध्यान हटाया जा रहा है
    • आत्मनिर्भर कृषि मॉडल कमजोर होगा

    वहीं समर्थकों का दावा है कि:

    • भारतीय किसान अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं
    • निर्यात-आधारित कृषि से आय दोगुनी करने का लक्ष्य मजबूत होगा

    वास्तविक खतरा कहाँ है?

    सवाल यह नहीं है कि अमेरिका के साथ समझौता हो या न हो। असली मुद्दा यह है कि:

    • क्या भारतीय किसानों को बराबर की सब्सिडी और सुरक्षा मिलेगी?
    • क्या एमएसपी और सार्वजनिक खरीद प्रणाली बरकरार रहेगी?
    • क्या छोटे किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी?

    यदि सुरक्षा उपायों के बिना बाजार पूरी तरह खोल दिया गया, तो छोटे किसानों पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन यदि समझौता संतुलित शर्तों और चरणबद्ध तरीके से लागू हुआ, तो यह अवसर भी बन सकता है।

  • IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया तेज, कोटक महिंद्रा, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स ने दी फाइनेंशियल बोली

    IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया तेज, कोटक महिंद्रा, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स ने दी फाइनेंशियल बोली

    नई दिल्ली। IDBI बैंक के विनिवेश (IDBI Bank Disinvestment) की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंचती नजर आ रही है। स्ट्रेटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट के तहत कोटक महिंद्रा बैंक, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स ने अपनी फाइनेंशियल बोलियां जमा कर दी हैं।

    एमिरेट्स NBD दुबई सरकार के स्वामित्व वाला बैंक है, जबकि फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी है। शॉर्टलिस्ट किए गए इन तीनों बोलीदाताओं की फाइनेंशियल बिड का अब तय प्रक्रिया के तहत वैल्यूएशन किया जाएगा।

    सूत्रों के अनुसार, फाइनल चयन केवल सबसे ऊंची बोली के आधार पर नहीं होगा। इसमें प्राइस के साथ-साथ कई क्वालिटेटिव और रेगुलेटरी फैक्टर्स को भी ध्यान में रखा जाएगा, ताकि बैंक की दीर्घकालिक स्थिरता और प्रबंधन क्षमता सुनिश्चित की जा सके।

    DIPAM ने की फाइनेंशियल बिड्स की पुष्टि

    डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने पहले ही फाइनेंशियल बिड्स मिलने की पुष्टि कर दी थी। DIPAM सचिव ने 6 फरवरी को सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी थी कि IDBI बैंक के स्ट्रेटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट के लिए फाइनेंशियल ऑफर प्राप्त हो चुके हैं और उनका मूल्यांकन तय प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।

    शॉर्टलिस्ट किए गए निवेशकों से फाइनल फाइनेंशियल ऑफर मिलने के बाद यह सौदा अपने निर्णायक मूल्यांकन चरण में प्रवेश कर जाता है।

    सरकार और LIC बेचेगी 60.72% हिस्सेदारी

    इस स्ट्रेटेजिक सेल में IDBI बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी के साथ-साथ मैनेजमेंट कंट्रोल का हस्तांतरण भी शामिल है। केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहे हैं।
    इसमें सरकार की 30.48 प्रतिशत और LIC की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।

    यह विनिवेश केंद्र सरकार के व्यापक स्ट्रेटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नॉन-टैक्स रेवेन्यू बढ़ाना और नॉन-कोर सेक्टर्स में सरकारी भागीदारी को कम करना है।

    2021 में PCA से बाहर निकलने के बाद बढ़ी रफ्तार

    IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया को मार्च 2021 में नई गति मिली थी, जब बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) फ्रेमवर्क से बाहर निकला। एसेट क्वालिटी, कैपिटल एडिक्वेसी और प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार के बाद PCA से बाहर आना प्राइवेट निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक अहम शर्त माना जा रहा था। अब फाइनेंशियल बिड्स के मूल्यांकन के साथ IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया अपने सबसे अहम मोड़ पर पहुंच गई है।

  • Environment Crime: क्या पेड़ों पर लाइटिंग करना निसर्ग की हत्या है?

    Environment Crime: क्या पेड़ों पर लाइटिंग करना निसर्ग की हत्या है?

    पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत सिनकर ने की ठाणे में ज़िंदा पेड़ों पर सजावट बंद करने की मुख्यमंत्री से मांग

    ठाणे (Thane News)।
    शहर में ज़िंदा पेड़ों पर की जा रही बिजली की लाइटिंग और सजावट को लेकर पर्यावरण का गंभीर मुद्दा खड़ा हो गया है। पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत सिनकर ने इस प्रथा को सीधे-सीधे पर्यावरण अपराध (Environment Crime) करार देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ठाणे में ऐसे सभी कार्य तुरंत बंद करने की मांग की है।

    डॉ. सिनकर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि त्योहारों, कार्यक्रमों और तथाकथित ब्यूटीफिकेशन के नाम पर ज़िंदा पेड़ों पर वायरिंग, ड्रिलिंग, कीलें ठोकना और भारी लाइटिंग उपकरण टांगना पेड़ों के लिए घातक साबित हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पेड़ सजावटी खंभे नहीं, बल्कि शहर की सांस और नागरिकों की जीवनरेखा हैं।

    पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि इस तरह की गतिविधियों से न केवल पेड़ों को शारीरिक नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि पक्षियों, कीट-पतंगों और पूरी जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। पेड़ों पर की गई लाइटिंग उनके प्राकृतिक विकास, जीवन चक्र और पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ रही है।

    डॉ. सिनकर ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर राज्य और केंद्र सरकार नेट ज़ीरो लाइफ मिशन और क्लाइमेट चेंज से लड़ने की बातें कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय निकाय खुलेआम ज़िंदा पेड़ों पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने इसे नीति और ज़मीनी हकीकत के बीच की खतरनाक विडंबना बताया।

    इस पृष्ठभूमि में डॉ. सिनकर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि

    • ज़िंदा पेड़ों पर किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रिक लाइटिंग, डेकोरेशन और विज्ञापन सामग्री लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए
    • नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं

    अपने पत्र के अंत में उन्होंने भावनात्मक अपील करते हुए लिखा,
    “पेड़ चीख नहीं सकते, लेकिन पूरे शहर को चुपचाप उनके ज़ख्म सहने पड़ते हैं। अगर आज हम पेड़ों के लिए नहीं खड़े हुए, तो कल शहर के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा।”

    पर्यावरणविदों का मानना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को चुकाना पड़ेगा।

  • Business News: राडो ने लॉन्च की ले कॉर्बुज़ियर से प्रेरित 3 स्पेशल-एडिशन घड़ियाँ, आर्किटेक्चर और वॉचमेकिंग का अनोखा संगम

    Business News: राडो ने लॉन्च की ले कॉर्बुज़ियर से प्रेरित 3 स्पेशल-एडिशन घड़ियाँ, आर्किटेक्चर और वॉचमेकिंग का अनोखा संगम

    मुंबई। स्विस लग्ज़री वॉच ब्रांड राडो(Rado) ने दिग्गज आर्किटेक्ट और डिजाइन विजनरी ले कॉर्बुज़ियर(Le Corbusier) से प्रेरित तीन नई स्पेशल-एडिशन घड़ियाँ लॉन्च की हैं। यह कलेक्शन राडो और Les Couleurs Suisse के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग का नया अध्याय है, जिसमें आधुनिक आर्किटेक्चर, बोल्ड डिजाइन और अत्याधुनिक मटेरियल्स का शानदार मेल देखने को मिलता है।

    ‘मास्टर ऑफ मटेरियल्स’ के नाम से पहचाना जाने वाला राडो, ले कॉर्बुज़ियर की आधुनिक सोच, स्ट्रॉन्ग ज्योमेट्री और स्टेटमेंट रंगों को अपनी इनोवेटिव वॉचमेकिंग फिलॉसफी के साथ जोड़ता है। अब तक इस साझेदारी के तहत 12 विशेष घड़ियाँ पेश की जा चुकी हैं, जो आधुनिक आर्किटेक्चर और ब्रूटलिस्ट स्टाइल में ले कॉर्बुज़ियर के योगदान को श्रद्धांजलि देती हैं।

    तीन आइकॉनिक आर्किटेक्चरल प्रेरणाएँ

    इस नए कलेक्शन की पहली घड़ी फ्रांस के मार्सिले में स्थित ला सिटे रेडियूज को समर्पित है। 1952 में पूरी हुई यह विशाल कंक्रीट इमारत आधुनिक शहरी जीवन की परिभाषा बदलने के लिए जानी जाती है। घड़ी के हाई-टेक सिरेमिक डायल पर लेजर-एंग्रेव्ड डिजाइन के जरिए ‘बेटन-ब्रूट’ कंक्रीट के टेक्सचर को अमूर्त रूप में दर्शाया गया है, जो रोशनी के साथ अलग-अलग प्रभाव पैदा करता है।

    दूसरी घड़ी अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित कारपेंटर सेंटर फॉर द विज़ुअल आर्ट्स से प्रेरित है। यह ले कॉर्बुज़ियर द्वारा नॉर्थ अमेरिका में डिजाइन की गई एकमात्र इमारत है और 1963 में पूरी हुई थी। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी परिसर के पारंपरिक वातावरण के बीच इसका बोल्ड और आधुनिक स्वरूप इसे खास बनाता है।

    तीसरी घड़ी भारत के चंडीगढ़ शहर को श्रद्धांजलि देती है, जो ले कॉर्बुज़ियर की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक रहा है। ज्यामितीय ग्रिड लेआउट, सुव्यवस्थित शहरी ढांचा और प्रकृति के संतुलित समावेश के जरिए उन्होंने 20वीं सदी के शहरी नियोजन को नई दिशा दी।

    डिजाइन, तकनीक और प्रैक्टिकैलिटी

    तीनों घड़ियों के केस-बैक पर 63 डिजिटली प्रिंटेड कलर स्ट्रिप्स दी गई हैं, जो पॉलीक्रोमी आर्किटेक्चरल के पूरे रंग-स्पेक्ट्रम को दर्शाती हैं। फ्लैट नीलम क्रिस्टल के जरिए अंदर मौजूद राडो कैलिबर R763 ऑटोमैटिक मूवमेंट देखा जा सकता है, जिसके केंद्र में ले कॉर्बुज़ियर का लोगो उकेरा गया है। यही कलर स्ट्रिप्स इन घड़ियों के प्रेजेंटेशन बॉक्स को भी सजाती हैं।

    हाई-टेक सिरेमिक से बनी ये घड़ियाँ कलाई पर बेहद हल्की और आरामदायक महसूस होती हैं। लगभग स्क्रैच-प्रूफ सिरेमिक मटेरियल इन्हें असाधारण टिकाऊपन देता है, जबकि 80 घंटे का पावर रिज़र्व और 5 बार (50 मीटर) वॉटर रेजिस्टेंस इन्हें रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लिए भी उपयुक्त बनाता है।

    कुल मिलाकर, यह नया कलेक्शन आधुनिक आर्किटेक्चर के जनक ले कॉर्बुज़ियर और राडो की इनोवेटिव स्विस वॉचमेकिंग के बीच एक सशक्त संवाद है, जो डिजाइन और तकनीक की दुनिया में एक यादगार अध्याय जोड़ता है।

  • Bhiwandi Haj Yatri: हज यात्रियों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान शुरू, 700 से अधिक जायरीन लाभान्वित

    Bhiwandi Haj Yatri: हज यात्रियों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान शुरू, 700 से अधिक जायरीन लाभान्वित

    भिवंडी (Bhiwandi)।
    मुस्लिम धर्म की पवित्र हज यात्रा पर जाने वाले जायरीन की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका के चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष टीकाकरण एवं स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत अब तक जिले के 700 से अधिक हज यात्रियों (Bhiwandi Haj Yatri) को आवश्यक रोग-प्रतिरोधक टीके लगाए जा चुके हैं।

    भिवंडी ऐसा एकमात्र केंद्र है, जहाँ पिछले चार वर्षों से हज यात्रियों के लिए लगातार यह विशेष टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक चलाया जा रहा है। इस सुविधा का लाभ केवल भिवंडी शहर के ही नहीं, बल्कि भिवंडी ग्रामीण, कल्याण, मुंब्रा और ठाणे से आने वाले हज यात्री भी उठा रहे हैं।

    शुक्रवार से शुरू हुए इस अभियान में अब तक कुल 702 हज यात्रियों का टीकाकरण किया जा चुका है। यह अभियान अगले दो दिनों तक जारी रहेगा। फार्मासिस्ट आसिफ अंसारी के अनुसार, आने वाले दिनों में करीब 300 और हज यात्रियों के टीकाकरण की उम्मीद है।

    इस अभियान को सफल बनाने के लिए चिकित्सा अधिकारी डॉ. आयशा, फार्मासिस्ट आसिफ अंसारी, पंकज सिंह, राजश्री दाभाडे सहित नर्सिंग स्टाफ की पूरी टीम विशेष मेहनत कर रही है।

    प्रशासनिक टीम ने बताया कि,

    “हज यात्रियों की सेहत और सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिले के अलग-अलग हिस्सों से जायरीन यहां आकर टीकाकरण करवा रहे हैं, जो इस केंद्र की विश्वसनीयता और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को दर्शाता है।”

    भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी हज यात्रियों को समय पर आवश्यक टीके, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे सुरक्षित और स्वस्थ हज यात्रा पूरी कर सकें।