Category: Gujrat

  • Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project: भारत में पहली बार मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की पर्वतीय सुरंगों के लिए टनल हुड्स का निर्माण!

    Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project: भारत में पहली बार मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की पर्वतीय सुरंगों के लिए टनल हुड्स का निर्माण!

    Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में पर्वतीय सुरंग पोर्टल्स पर टनल हुड्स लगाए जा रहे हैं। यह भारत में पहली बार है जब रेलवे टनलों के लिए इस प्रकार की टनल हुड तकनीक को डिज़ाइन और लागू किया गया है।मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर कठिन भौगोलिक क्षेत्र से होकर गुजरता है और इसमें महाराष्ट्र में सात तथा गुजरात में एक पर्वतीय सुरंग शामिल है। इन पर्वतीय सुरंगों के दोनों सिरों पर टनल हुड्स बनाए जा रहे हैं।

    टनल हुड्स की आवश्यकता क्यों होती है?
    जब कोई हाई-स्पीड ट्रेन टनल में प्रवेश करती है, तो वह अपने आगे बड़ी मात्रा में हवा को धक्का देती है, ठीक वैसे ही जैसे एक पिस्टन सिलेंडर के अंदर चलता है। हवा के इस अचानक संपीड़न से प्रेशर वेव्स उत्पन्न होती हैं, जो टनल के भीतर फैलती हैं। यदि इनका सही तरीके से प्रबंधन नहीं किया जाए, तो ये प्रेशर वेव्स ट्रेन के टनल से बाहर निकलते समय तेज़ धमाके जैसी आवाज पैदा कर सकती हैं।

    टनल हुड्स खुले वातावरण और सीमित टनल स्थान के बीच एक संक्रमण क्षेत्र के रूप में कार्य करते हैं। हवा को धीरे-धीरे प्रवेश और निकास की अनुमति देकर, वे प्रेशर में होने वाले बदलावों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं और पूरे सिस्टम के एयरोडायनामिक परफॉरमेंस में सुधार करते हैं।

    बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर टनल हुड्स को निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए डिज़ाइन किया गया है:

    • अत्यंत उच्च गति से चलने वाली ट्रेनों के सुरक्षित और कुशल संचालन को समर्थन प्रदान करना
    • हाई-स्पीड ट्रेन की आवाजाही के दौरान, विशेष रूप से टनल से बाहर निकलते समय उत्पन्न होने वाले टनल बूम और शोर को कम करना
    • आसपास के समुदायों में होने वाले व्यवधान को कम करना

    सरल शब्दों में, टनल हुड ट्रेन और हवा को एक-दूसरे के साथ धीरे-धीरे तालमेल बैठाने में मदद करता है, बजाय इसके कि यह अचानक हो। इससे हाई-स्पीड रेल यात्रा अधिक शांत, सुचारू और आरामदायक होगी।

    विशेष प्रेशर-रिलीफ ओपनिंग्स
    इन टनल हुड्स की एक विशिष्ट विशेषता सावधानीपूर्वक डिज़ाइन किए गए प्रेशर-रिलीफ वेंट्स या विंडोज़ हैं।ये विंडोज़ या ओपनिंग्स, जब ट्रेन टनल में प्रवेश करती है, तब संपीड़ित हवा के एक हिस्से को धीरे-धीरे वातावरण में बाहर निकलने की अनुमति देती हैं। इससे प्रेशर वेव्स की तीव्रता कम होती है, टनल बूम को न्यूनतम किया जाता है और वायु प्रवाह को अधिक सुचारू बनाए रखने में मदद मिलती है।

    वैश्विक हाई-स्पीड रेल तकनीक को भारत में लाना
    टनल हुड्स उन हाई-स्पीड रेल प्रणालियों में एक सामान्य विशेषता हैं, जो बुलेट ट्रेन संचालित करने वाले देशों में उपयोग होती हैं, जहाँ ट्रेनें 300 कि.मी./घंटा से अधिक गति से चलती हैं। मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में इनका उपयोग उन्नत इंजीनियरिंग समाधानों और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने को दर्शाता है, जिससे सुरक्षा, आराम और पर्यावरणीय प्रदर्शन के विश्व-स्तरीय मानकों को सुनिश्चित किया जा सके।

  • Sadbhavna Old Age Home: राजकोट के सद्भावना वृद्धाश्रम में बीमार और निराश्रित बुजुर्गों को मिलेगा आजीवन मुफ्त आश्रय!

    Sadbhavna Old Age Home: राजकोट के सद्भावना वृद्धाश्रम में बीमार और निराश्रित बुजुर्गों को मिलेगा आजीवन मुफ्त आश्रय!

    Sadbhavna Old Age Home: सद्भावना वृद्धाश्रम द्वारा राजकोट में एक विशाल और अत्याधुनिक वृद्धाश्रम परियोजना शुरू की गई है, जहां निराश्रित, बीमार और बिस्तर पर रहने वाले बुजुर्गों को आजीवन पूरी तरह मुफ्त रहने और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

    राजकोट-जामनगर हाईवे पर पडधरी के पास मोटा रामपाल क्षेत्र में स्थित यह सद्भावना वृद्धाश्रम लगभग 20 लाख वर्गफुट क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस प्रकल्प में 7 टॉवर होंगे, जिनमें प्रत्येक टॉवर 11 मंजिला होगा। यहां 1400 कमरों में लगभग 5000 बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था की जाएगी।

    वृद्धाश्रम की खास बात यह है कि यहां जाति या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। जरूरतमंद और असहाय बुजुर्गों को संस्था के नियमों के अनुसार सम्मानपूर्वक प्रवेश दिया जाएगा और उनसे किसी प्रकार का शुल्क या चंदा नहीं लिया जाएगा। सभी सुविधाएं पूरी तरह निशुल्क रहेंगी।

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    संस्था की ओर से जैन समाज के बुजुर्गों के लिए एक अलग टॉवर भी बनाया गया है, जहां मंदिर की विशेष व्यवस्था की गई है। सद्भावना वृद्धाश्रम पिछले दस वर्षों से बुजुर्गों की सेवा में कार्यरत है। संस्था का उद्देश्य निःसंतान, निराश्रित, बीमार और अंथरुण से जुड़े बुजुर्गों को सम्मान और परिवार जैसा वातावरण प्रदान करना है।

    30 एकड़ में फैले शांत और हरित परिसर में बुजुर्गों को प्राकृतिक वातावरण के बीच सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराया जाएगा। वृद्धाश्रम में 24 घंटे चिकित्सा सुविधा, प्रशिक्षित विशेषज्ञों की देखरेख, नियमित स्वास्थ्य जांच, फिजियोथेरेपी सेंटर, उपचारात्मक सेवाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

    इसके अलावा योग, हल्के व्यायाम और आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से बुजुर्गों को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने का प्रयास किया जाएगा। संस्था का कहना है कि यह केवल एक वृद्धाश्रम नहीं, बल्कि ऐसा परिवार है जहां बुजुर्गों को प्यार, सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन बिताने का अवसर मिलेगा।

  • Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project: परियोजना के लिए भारतीय रेलवे ट्रैक पर 130 मीटर लंबे स्टील ब्रिज का निर्माण किया गया!

    Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project: परियोजना के लिए भारतीय रेलवे ट्रैक पर 130 मीटर लंबे स्टील ब्रिज का निर्माण किया गया!

    Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत गुजरात के भरूच जिले के त्रालसी गांव के पास भारतीय रेलवे ट्रैक पर 330 मीटर लंबे (100+130,100 मीटर) स्टील ब्रिज के 130 मीटर लंबे स्पैन का सफलतापूर्वक निर्माण पूरा किया गया। यह ब्रिज वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के सूरत-वडोदरा सेक्शन के बीच डीएफसीसी ट्रैक को पार करता है।यह स्टील ब्रिज तीन स्पैन वाला ब्रिज है, जिसमें 100+130 मीटर का सतत (Continuous) स्पैन तथा 100 मीटर का Simply Supported स्पैन शामिल है।

    इनमें से 130 मीटर लंबे स्पैन का लॉन्चिंग कार्य 16 मई 2026 को पूरा किया गया। लगभग 18 मीटर ऊंचाई और 15.5 मीटर चौड़ाई वाले इस स्पैन का वजन लगभग 2900 मीट्रिक टन है।100 मीटर लंबे Simply Supported स्पैन, जिसका वजन लगभग 1500 मीट्रिक टन है, को मार्च 2026 में निर्माण स्थल पर ही (इन-सीटू) स्थापित किया गया था। शेष 100 मीटर लंबे सतत स्पैन, जिसका वजन लगभग 1600 मीट्रिक टन है, को भी निर्माण स्थल पर ही स्थापित किया जाएगा।

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    ब्रिज संरचना (100+130 मीटर सतत स्पैन तथा 100 मीटर Simply Supported स्पैन) के पूर्ण होने पर इसका कुल वजन लगभग 6100 मीट्रिक टन होगा। गुजरात के उमरगांव स्थित कार्बन फैक्ट्री वर्कशॉप में निर्मित इन स्टील ब्रिजों को 100 वर्षों की आयु को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। 130 मीटर लंबे इस स्पैन के निर्माण में लगभग 1,21,373 टॉर-शियर टाइप हाई स्ट्रेंथ (TTHS) बोल्ट, C5 सिस्टम पेंटिंग तथा मेटैलिक बेयरिंग का उपयोग किया गया है।

    इसे जमीन से लगभग 14 मीटर ऊंचाई पर अस्थायी ट्रेस्टलों पर असेंबल किया गया तथा दो सेमी-ऑटोमैटिक जैक की सहायता से स्वचालित प्रणाली द्वारा आगे बढ़ाया गया। प्रत्येक जैक में मैक-अलॉय बार्स के माध्यम से 250 टन तक की पुशिंग क्षमता है।फ्रेट ट्रैक पर सावधानीपूर्वक समन्वित यातायात व्यवस्थाओं के तहत लॉन्चिंग कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

    इन व्यवस्थाओं ने चरणबद्ध तरीके से कार्य निष्पादन सुनिश्चित करते हुए लॉन्चिंग की सुरक्षा और सटीकता बनाए रखी तथा मालगाड़ियों की आवाजाही में न्यूनतम बाधा सुनिश्चित की।17 स्टील ब्रिज में से 14 स्टील ब्रिज गुजरात में पूरे हो चुके हैं। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए 28 स्टील ब्रिज की योजना है।

  • Rahul Gandhi attack Epstein files & adani trade deal: एप्स्टीन फाइल्स से अडानी केस तक—मोदी सरकार दे जवाब, देश को सच चाहिए: राहुल गांधी का बड़ा हमला

    Rahul Gandhi attack Epstein files & adani trade deal: एप्स्टीन फाइल्स से अडानी केस तक—मोदी सरकार दे जवाब, देश को सच चाहिए: राहुल गांधी का बड़ा हमला

    नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्र सरकार पर बहुआयामी हमला बोला। सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने एप्स्टीन फाइल्स, भारत-अमेरिका ट्रेड डील, अडानी प्रकरण और किसानों की स्थिति जैसे मुद्दों को जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा।

    राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कथित एप्स्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री, उनके मंत्रियों और करीबी उद्योगपतियों के नाम आने की चर्चा बेहद गंभीर है। उनका कहना था कि यह देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला है और सरकार को पारदर्शी स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि लाखों दस्तावेज अब भी सार्वजनिक नहीं हुए हैं और उनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, उद्योगपति अनिल अंबानी तथा प्रधानमंत्री का नाम होने की बात कही।

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस डील में राष्ट्रीय हितों से समझौता किया गया। उनके अनुसार भारतीय डेटा को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोला गया, किसानों के हितों की अनदेखी हुई और टेक्सटाइल उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस समझौते से देश को वास्तविक लाभ क्या मिला।

    राहुल गांधी ने उद्योगपति Gautam Adani से जुड़े अमेरिका में चल रहे मामले का भी जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल एक कारोबारी का मामला नहीं, बल्कि सत्ता संरचना से जुड़ा सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि 14 महीनों से ठोस कार्रवाई न होना कई संदेह पैदा करता है।

    इन आरोपों पर विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संबंधित दस्तावेजों में प्रधानमंत्री के 2017 के इज़रायल दौरे के संदर्भ से परे जो भी उल्लेख हैं, वे एक दोषी अपराधी की कल्पनाएं हैं और निराधार हैं।

    राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि कांग्रेस देशहित के मुद्दों पर पीछे नहीं हटेगी और सरकार से जवाब मांगती रहेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों के हितों की रक्षा में अधिक सक्रिय है, जबकि किसान और मध्यम वर्ग समस्याओं से जूझ रहे हैं।

    इस मुद्दे पर सियासी तापमान बढ़ गया है और आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक बहस तेज होने के संकेत हैं।

  • INDIA-US Agro Trade Deal: क्या अमेरिका के साथ कृषि समझौता भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” साबित होगा?

    INDIA-US Agro Trade Deal: क्या अमेरिका के साथ कृषि समझौता भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” साबित होगा?

    मोदी सरकार की एग्री-डील पर उठते सवाल और हकीकत

    भारत और अमेरिका के बीच कृषि क्षेत्र (INDIA-US Agro Trade Deal) में बढ़ते सहयोग और संभावित व्यापारिक समझौतों को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्ष के कुछ नेताओं और किसान संगठनों का आरोप है कि यह समझौता भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ है और “किसानों के डेथ वारंट” पर हस्ताक्षर जैसा कदम है।

    लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है? आइए विस्तार से समझते हैं।


    कृषि समझौते की पृष्ठभूमि

    भारत और अमेरिका के बीच कृषि व्यापार पहले से ही जारी है। भारत अमेरिका से बादाम, सेब, दालें और कृषि तकनीक आयात करता है, जबकि अमेरिका को चावल, मसाले, समुद्री उत्पाद और कुछ कृषि उत्पाद निर्यात करता है।

    हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच:

    • कृषि बाजारों को खोलने,
    • टैरिफ कम करने,
    • जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों के आयात,
    • डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के व्यापार
      को लेकर चर्चा तेज हुई है।

    इसी संदर्भ में प्रस्तावित या चर्चित “कृषि डील” को लेकर किसानों में आशंकाएँ पैदा हुई हैं।


    किसानों की प्रमुख चिंताएँ

    1. सस्ते आयात का खतरा

    अमेरिका में कृषि बड़े पैमाने पर, अत्याधुनिक तकनीक और भारी सरकारी सब्सिडी के सहारे की जाती है। यदि भारतीय बाजार अमेरिकी गेहूं, मक्का, सोयाबीन या डेयरी उत्पादों के लिए खुलता है, तो:

    • भारतीय किसानों को मूल्य प्रतिस्पर्धा में भारी नुकसान हो सकता है
    • एमएसपी व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है
    • छोटे और सीमांत किसान बाजार से बाहर हो सकते हैं

    2. जीएम फसलों का मुद्दा

    अमेरिका जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों का बड़ा उत्पादक है। यदि ऐसे उत्पाद भारत में व्यापक रूप से आयात होते हैं, तो:

    • जैव विविधता पर असर पड़ सकता है
    • पारंपरिक बीजों और स्थानीय खेती पर संकट आ सकता है
    • बीज कंपनियों की निर्भरता बढ़ सकती है

    3. डेयरी सेक्टर पर दबाव

    भारत का डेयरी क्षेत्र मुख्यतः छोटे किसानों और सहकारी मॉडल (जैसे अमूल) पर आधारित है। अमेरिकी डेयरी उत्पादों को अनुमति मिलने से लाखों दुग्ध उत्पादकों की आय पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


    सरकार का पक्ष क्या है?

    सरकार का कहना है कि:

    • कोई भी समझौता भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करते हुए ही किया जाएगा।
    • निर्यात के नए अवसर खुलेंगे, जिससे किसानों को वैश्विक बाजार मिलेगा।
    • कृषि तकनीक, कोल्ड स्टोरेज, सप्लाई चेन और प्रोसेसिंग में निवेश बढ़ेगा।
    • भारत को उच्च गुणवत्ता वाले बीज और तकनीकी सहयोग मिलेगा।

    सरकार यह भी तर्क देती है कि वैश्विक व्यापार से अलग रहकर भारत कृषि क्षेत्र को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी नहीं बना सकता।


    “डेथ वारंट” वाली राजनीति

    “डेथ वारंट” जैसे शब्द राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं। विपक्ष इसे 2020 के कृषि कानूनों की याद से जोड़ता है, जब बड़े कॉर्पोरेट और विदेशी कंपनियों के प्रवेश को लेकर व्यापक किसान आंदोलन हुआ था।

    आलोचकों का कहना है कि:

    • यह समझौता धीरे-धीरे कृषि बाजार को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए खोल देगा
    • एमएसपी कानूनी गारंटी से ध्यान हटाया जा रहा है
    • आत्मनिर्भर कृषि मॉडल कमजोर होगा

    वहीं समर्थकों का दावा है कि:

    • भारतीय किसान अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं
    • निर्यात-आधारित कृषि से आय दोगुनी करने का लक्ष्य मजबूत होगा

    वास्तविक खतरा कहाँ है?

    सवाल यह नहीं है कि अमेरिका के साथ समझौता हो या न हो। असली मुद्दा यह है कि:

    • क्या भारतीय किसानों को बराबर की सब्सिडी और सुरक्षा मिलेगी?
    • क्या एमएसपी और सार्वजनिक खरीद प्रणाली बरकरार रहेगी?
    • क्या छोटे किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी?

    यदि सुरक्षा उपायों के बिना बाजार पूरी तरह खोल दिया गया, तो छोटे किसानों पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन यदि समझौता संतुलित शर्तों और चरणबद्ध तरीके से लागू हुआ, तो यह अवसर भी बन सकता है।

  • Richa Industries बैंक घोटाला: ED ने पूर्व प्रमोटर संदीप गुप्ता को गिरफ्तार, करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा

    Richa Industries बैंक घोटाला: ED ने पूर्व प्रमोटर संदीप गुप्ता को गिरफ्तार, करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा

    गुरुग्राम: रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड(Richa Industries) से जुड़े बड़े बैंक फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गुरुग्राम जोनल टीम ने कंपनी के पूर्व प्रमोटर और सस्पेंडेड मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप गुप्ता को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें ED की कस्टडी में 8 दिन के लिए भेजा गया।

    236 करोड़ का चूना, फर्जी बिलिंग का खेल:
    ED की जांच में सामने आया है कि संदीप गुप्ता ने 2015 से 2018 के बीच जानबूझकर बिना माल सप्लाई किए फर्जी बिक्री दिखाकर सार्वजनिक बैंकों को 236 करोड़ रुपए का नुकसान पहुँचाया। इसमें कॉटन फैब्रिक सेल 7.42 करोड़ और सोलर संबंधित फर्जी बिक्री 8.50 करोड़ की पाई गई। फर्जी लेन-देन के लिए कई शेल कंपनियों का सहारा लिया गया और इनवॉइस व अकाउंट बुक्स में हेराफेरी की गई।

    फर्जी खरीद और लोन का घोटाला:
    कंपनी ने ZLD प्लांट और मशीनरी की 9.23 करोड़ की फर्जी खरीद दिखाई, जबकि FY 2015-16 से 2017-18 के बीच 16.40 करोड़ रुपये ग्रुप कंपनियों में लोन रीपेमेंट के नाम पर घुमाए गए। FY 2018-19 में RIL के पैसों से रिचा कृष्णा कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड में controlling stake खरीदकर अहम प्रोजेक्ट को बाहर ले जाया गया।

    संपत्तियों में हेरफेर, CIRP प्रभावित:
    ED ने आरोप लगाया कि CIRP शुरू होने से ठीक पहले संदीप गुप्ता ने कंपनी की कीमती संपत्तियों को डायवर्ट करने में भूमिका निभाई। इसके लिए कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। दिसंबर 2018 में CIRP शुरू हुआ, लेकिन कोई रिज़ॉल्यूशन प्लान पास नहीं हो सका। 11 जून 2025 को NCLT ने कंपनी को लिक्विडेशन में डाल दिया।

    बैंकों को भारी नुकसान, रिजर्व प्राइस पर बेची गई कंपनी:
    16 अक्टूबर 2025 को कंपनी को ई-ऑक्शन में 96 करोड़ के रिजर्व प्राइस पर बेचा गया। इससे IOB और यूनियन बैंक जैसे पब्लिक सेक्टर बैंकों को 696 करोड़ के दावों के बदले मात्र 40.29 करोड़ मिले, यानी लगभग 94% का हेयरकट झेलना पड़ा।

    कोरपोरेट गारंटी और शेल कंपनियों का इस्तेमाल:
    ED की जांच में खुलासा हुआ कि CIRP शुरू होने से पहले रिचा इंडस्ट्रीज़ ने छह कंपनियों को 232 करोड़ से ज्यादा की कॉरपोरेट गारंटी दी, जिनमें CoC में करीब 48.25% वोटिंग राइट्स थे। संदीप गुप्ता ने शेल कंपनी सारिगा कंस्ट्रक्शन प्रा. लिमिटेड बनाई, जिसमें पूर्व कर्मचारी नेहा सिंह को बेनामी डायरेक्टर बनाया गया।

    ED की जांच जारी:
    ED ने आरोप लगाया कि CIRP के दौरान संदीप गुप्ता और उनके परिवार ने गैरकानूनी तरीके से कंपनी पर कंट्रोल बनाए रखा, एग्रीमेंट किए और सैलरी भी ली। CIRP शुरू होने से पहले मसूरी के एक बड़े प्रोजेक्ट को प्रमोटर से जुड़ी कंपनी को सब-कॉन्ट्रैक्ट दे दिया गया, जिससे करीब 40 करोड़ रुपये बाहर चले गए।

  • Tamilnadu Politics: चुनाव से पहले तमिलनाडु की सियासत में घमासान, स्टालिन की हठधर्मिता से BJP को मिल रहा फायदा

    Tamilnadu Politics: चुनाव से पहले तमिलनाडु की सियासत में घमासान, स्टालिन की हठधर्मिता से BJP को मिल रहा फायदा

    New Delhi: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी उथल-पुथल तेज हो गई है। कांग्रेस की सत्ता में हिस्सेदारी की पुरानी मांग को एक बार फिर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सिरे से खारिज कर दिया है। डीएमके नेतृत्व का साफ संदेश है कि गठबंधन चुनाव तक ठीक है, लेकिन सरकार में हिस्सेदारी नहीं। स्टालिन की यही “एकला चलो” नीति अब गठबंधन धर्म पर सवाल खड़े कर रही है।

    कांग्रेस नेताओं के तीखे बयानों से साफ है कि सहयोगी दल खुद को सिर्फ बाहरी समर्थन तक सीमित नहीं रखना चाहते। बावजूद इसके डीएमके का अड़ियल रवैया जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्टालिन का यह रुख सीधे तौर पर बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अमित शाह पहले ही राज्य में आक्रामक मोड में नजर आ रहे हैं, वहीं थलपति विजय की संभावित एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

    अगर डीएमके ने सहयोगियों को नजरअंदाज करना जारी रखा, तो गठबंधन में दरार तय मानी जा रही है—और इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिल सकता है। चुनावी रण में सबसे बड़ा सवाल यही है: स्टालिन की जिद डीएमके को भारी पड़ेगी या बीजेपी इस मौके को भुनाने में कामयाब होगी?

  • Jain Unity: अहमदाबाद में जैन एकता पर ऐतिहासिक चिंतन, जिसो टीम की आनंदजी कल्याणजी ट्रस्ट अध्यक्ष समवेगलालभाई से विशेष भेंट

    Jain Unity: अहमदाबाद में जैन एकता पर ऐतिहासिक चिंतन, जिसो टीम की आनंदजी कल्याणजी ट्रस्ट अध्यक्ष समवेगलालभाई से विशेष भेंट

    अहमदाबाद,: दिवाली और नववर्ष के पावन अवसर पर जैन इंटरनेशनल सेवा ऑर्गेनाइजेशन (जिसो) की टीम ने आनंदजी कल्याणजी ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं “शासन रत्न” समवेगलालभाई से अहमदाबाद में एक प्रेरणादायी और ऐतिहासिक मुलाकात की। इस अवसर पर जिसो के फ़ाउंडर चेयरमैन सुरेश पुनामिया तथा राष्ट्रीय प्रचार मंत्री प्रशांत जवेरी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    बैठक में “जैन एकता” जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर गहन चिंतन हुआ। समवेगलालभाई ने कहा, “अब समय आ गया है कि जैन समाज के सभी संप्रदाय — दिगंबर, श्वेतांबर, तेरापंथ और स्थानकवासी — एक साथ आएँ और जैन एकता को आंदोलन एवं मिशन के रूप में आगे बढ़ाएँ। यदि अब यह एकता नहीं हुई, तो समाज को इसके दूरगामी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।”

    उनके इस प्रेरक संदेश से प्रभावित होकर सुरेश पुनामिया ने कहा कि “जिसो परिवार आपके इस मिशन को अपने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का हर संभव प्रयास करेगा। आपके मार्गदर्शन में ‘जैन एकता ही जिसो का मिशन’ बनकर आगे कार्य करेगी।”

    इस अवसर पर जिसो टीम ने समवेगलालभाई का स्नेहपूर्वक सम्मान किया, जिसे उन्होंने आत्मीय भावनाओं के साथ स्वीकार किया और जिसो परिवार को समाज-सेवा के कार्यों के लिए आशीर्वाद दिया।

    यह मुलाकात जैन समाज की एकता, सेवा और समरसता को नई दिशा देने वाली साबित हुई है। जिसो टीम ने संकल्प लिया कि डिजिटल माध्यमों के ज़रिए समाज के चार स्तंभ — जैन संत, जैन संघ, जैन संस्थाएँ और जैन श्रावक — को एक मंच पर लाकर “जैन एकता डिजिटल अभियान” को सशक्त बनाया जाएगा। इस पहल के अंतर्गत विश्वभर में बसे जैन समाज की डिजिटल जनगणना जैसे सशक्त प्रकल्प को भी प्रारंभ किया जाएगा।

    जैन समाज के लिए गौरव का अवसर:
    अभी जुड़ें जैन इंटरनेशनल सेवा ऑर्गेनाइजेशन (जिसो) से
    व्हाट्सएप पर “Hi” भेजकर अपना निःशुल्क जैन माइनॉरिटी कार्ड प्राप्त करें।

  • भरूच की फैक्ट्री में भीषण आग, 15 दमकल गाड़ियां मौके पर

    भरूच की फैक्ट्री में भीषण आग, 15 दमकल गाड़ियां मौके पर

    भरूच, गुजरात: गुजरात के भरूच जिले के पानोली GIDC औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक फैक्ट्री में भीषण आग लग गई है। आग की भयावहता को देखते हुए दमकल विभाग की 15 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश में जुट गईं। अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन आग से भारी नुकसान होने की आशंका है।

    चंद मिनटों में फैली आग

    यह घटना पानोली के GIDC क्षेत्र में स्थित संघवी ऑर्गेनिक्स प्राइवेट लिमिटेड नामक फैक्ट्री की है। शनिवार सुबह अचानक फैक्ट्री में आग लग गई, जो इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में इसने एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। आग से उठता काला धुआँ कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा था, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।

    जानमाल का नुकसान नहीं, कारण अज्ञात

    आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग ने तुरंत कार्रवाई की और 15 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर भेजीं। दमकल कर्मी लगातार आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, फैक्ट्री में काम कर रहे सभी कर्मचारियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था, जिससे किसी भी तरह की जानमाल की हानि नहीं हुई है। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है और पूरी तरह से आग पर काबू पाने के बाद ही नुकसान का सही आकलन किया जा सकेगा।

    औद्योगिक सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

    गुजरात के औद्योगिक क्षेत्रों में इस तरह की दुर्घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। बीते 2 अप्रैल को बानसकांठा जिले के दीसा में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट से भीषण आग लगी थी, जिसमें 21 मजदूरों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं ने एक बार फिर राज्य में औद्योगिक सुरक्षा मानदंडों और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।