Category: Politics

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  • Vande Bharat 2026 : “वंदे मातरम्” बनाम बेरोज़गारी: क्या राष्ट्रवाद असली मुद्दों पर पर्दा डाल रहा है?

    Vande Bharat 2026 : “वंदे मातरम्” बनाम बेरोज़गारी: क्या राष्ट्रवाद असली मुद्दों पर पर्दा डाल रहा है?

    अश्विनी कुमार दुबे

    नई दिल्ली।
    भारत में देशभक्ति सिर्फ एक भावना नहीं, बल्कि जनमानस की पहचान है। “वंदे मातरम्”(Vande Mataram 2026) और “भारत माता की जय” जैसे उद्घोष स्वतंत्रता संग्राम की विरासत हैं। लेकिन आज एक गंभीर सवाल उठ रहा है—
    क्या राष्ट्रवाद के नारों का इस्तेमाल जनता की रोज़मर्रा की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए किया जा रहा है?


    नारा बनाम नौकरियाँ: बहस का केंद्र

    देश का युवा पूछ रहा है—

    • नौकरी कहाँ है?
    • भर्ती परीक्षाएँ समय पर क्यों नहीं हो रहीं?
    • पेपर लीक क्यों रुक नहीं रहा?

    मध्यम वर्ग पूछ रहा है—

    • महंगाई पर नियंत्रण कब होगा?
    • टैक्स और EMI के बीच राहत कहाँ है?

    किसान पूछ रहा है—

    • लागत से कम दाम क्यों मिल रहा है?
    • MSP पर कानूनी गारंटी क्यों नहीं?

    लेकिन सार्वजनिक विमर्श में इन सवालों से ज्यादा चर्चा राष्ट्रवाद, धार्मिक पहचान और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की दिखाई देती है। यही विरोधाभास बहस को जन्म देता है।


    राष्ट्रवाद: भावना या राजनीतिक रणनीति?

    राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि भावनात्मक मुद्दे—

    • राष्ट्रवाद
    • धार्मिक प्रतीक
    • सीमा और सुरक्षा
    • ऐतिहासिक विवाद

    —अक्सर चुनावी विमर्श में प्रमुखता पा जाते हैं, क्योंकि वे तेज प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं।

    आलोचकों का आरोप है कि जब आर्थिक या प्रशासनिक सवालों पर दबाव बढ़ता है, तो भावनात्मक मुद्दों को प्राथमिकता दी जाती है।

    वहीं सरकार और समर्थकों का तर्क है कि राष्ट्रवाद और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना है कि राष्ट्रीय गौरव, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान भी उतने ही महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जितने रोज़गार और महंगाई।


    बेरोज़गारी और महंगाई: आंकड़ों की हकीकत

    • विभिन्न रिपोर्टों में युवाओं में बेरोज़गारी दर चिंता का विषय बताई जाती रही है।
    • भर्ती परीक्षाओं में देरी और पेपर लीक की घटनाएँ कई राज्यों में सुर्खियाँ बनी हैं।
    • महंगाई, विशेषकर खाद्य और ईंधन की कीमतें, घरेलू बजट पर असर डाल रही हैं।

    यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की बड़ी आबादी युवा है, और रोजगार सृजन सरकारों के लिए केंद्रीय चुनौती बना हुआ है।


    मीडिया की भूमिका पर भी सवाल

    एक वर्ग का आरोप है कि मुख्यधारा मीडिया में बहसें अक्सर राष्ट्रवाद और राजनीतिक टकराव पर केंद्रित रहती हैं, जबकि रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं।

    हालाँकि, मीडिया संस्थानों का पक्ष है कि वे वही दिखाते हैं जो दर्शक देखना चाहते हैं और जो राजनीतिक रूप से प्रासंगिक होता है।


    असली राष्ट्रवाद क्या है?

    राष्ट्रवाद का अर्थ सिर्फ नारे नहीं, बल्कि नागरिकों का जीवन स्तर भी है।
    अगर राष्ट्र सशक्त है, तो—

    • युवा को अवसर मिलना चाहिए
    • किसान को सम्मानजनक आय मिलनी चाहिए
    • शिक्षा और स्वास्थ्य सुलभ होने चाहिए
    • महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए

    देशभक्ति और जवाबदेही एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। लोकतंत्र में सवाल पूछना अधिकार है, और जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी।


    “वंदे मातरम्” का सम्मान, राजनीतिक हथियार नहीं

    “वंदे मातरम्” भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का गौरवशाली प्रतीक है।
    इसका सम्मान तब और सार्थक होगा जब:

    • देश का युवा आत्मनिर्भर बने
    • किसान कर्ज और संकट से मुक्त हो
    • गरीब भूखा न सोए
    • मध्यम वर्ग आर्थिक असुरक्षा से बाहर निकले

    नारा तब ताकत बनता है, जब उसके पीछे ठोस नीति और परिणाम हों।


    निष्कर्ष: शोर नहीं, समाधान चाहिए

    देश को राष्ट्रवाद बनाम रोज़गार की बहस में उलझने की बजाय दोनों के बीच संतुलन चाहिए।

    • भावनात्मक मुद्दे अपनी जगह
    • आर्थिक और सामाजिक मुद्दे अपनी जगह

    आखिरकार लोकतंत्र में नागरिकों का अधिकार है कि वे पूछें—
    विकास कहाँ है? रोजगार कब मिलेगा? महंगाई कब घटेगी?

    देशभक्ति का अर्थ सिर्फ उद्घोष नहीं, बल्कि जवाबदेह शासन भी है और यही किसी भी लोकतंत्र की असली ताकत होती है।

  • Vande Mataram 150 yrs Celebration: आधिकारिक कार्यक्रमों में अब 3 मिनट 10 सेकंड का “वंदे मातरम्” अनिवार्य, सरकार ने जारी किया नया प्रोटोकॉल

    Vande Mataram 150 yrs Celebration: आधिकारिक कार्यक्रमों में अब 3 मिनट 10 सेकंड का “वंदे मातरम्” अनिवार्य, सरकार ने जारी किया नया प्रोटोकॉल

    वंदे मातरम् का छह अंतरों वाला संस्करण, जिसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के गायन और वादन को लेकर एक नया आधिकारिक प्रोटोकॉल जारी किया है। अब सभी सरकारी एवं आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम्(Vande Mataram) का छह अंतरों वाला संस्करण, जिसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है, अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।

    वंदे मातरम्

    छंद 1

    वन्दे मातरम्।
    सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
    शस्यश्यामलां मातरम्।
    शुभ्रज्योत्स्ना-पुलकित-यामिनीम्,
    फुल्ल-कुसुमित-द्रुम-दल-शोभिनीम्,
    सुहासिनीं सुमधुर-भाषिणीम्,
    सुखदां वरदां मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 2

    वन्दे मातरम्।
    कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले,
    कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खर-करवाले,
    अबला केन मा एत बले?
    बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं,
    रिपुदलवारिणीं मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 3

    वन्दे मातरम्।
    तुमि विद्या, तुमि धर्म,
    तुमि हृदि, तुमि मर्म,
    त्वं हि प्राणाः शरीरे।
    बाहुते तुमि मा शक्ति,
    हृदये तुमि मा भक्ति,
    तोमारई प्रतिमा गढ़ि
    मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 4

    वन्दे मातरम्।
    त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
    कमला कमलदलविहारिणी,
    वाणी विद्यादायिनी।
    नमामि त्वाम्।
    नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम्,
    सुजलां सुफलां मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 5

    वन्दे मातरम्।
    श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्,
    धरणीं भरणीं मातरम्,
    शत्रुदलवारिणीं मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 6

    वन्दे मातरम्।
    त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति,
    त्वं हि शक्ति मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।

    यह नियम राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अवसरों, राष्ट्रपति के आगमन, उनके भाषणों अथवा राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में लागू होगा।

    इसके साथ ही राज्यों के राज्यपालों के आगमन तथा उनके संबोधन से पूर्व और पश्चात भी इसी निर्धारित संस्करण और समय-सीमा का पालन करना आवश्यक होगा।

    सरकार के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति में एकरूपता, गरिमा और प्रोटोकॉल की स्पष्टता सुनिश्चित करना है।


    अब तय समय-सीमा के भीतर ही होगा गायन

    नए निर्देशों के अनुसार, सभी सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का गायन या वादन निर्धारित 3 मिनट 10 सेकंड की अवधि के भीतर ही किया जाएगा। इससे पहले विभिन्न आयोजनों में इसकी अवधि और प्रस्तुति शैली में भिन्नता देखने को मिलती थी।

    सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में उठाया गया है।


    क्या “वंदे मातरम्” शुरू में सिर्फ बंगाल का गीत था?

    कुछ इतिहासकारों और विचारकों का मत है कि “वंदे मातरम्” प्रारंभ में पूरे भारत का राष्ट्रगीत नहीं था, बल्कि यह बंगाल की सांस्कृतिक चेतना से उपजा एक साहित्यिक गीत था।

    इस गीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अत्यंत संस्कृतनिष्ठ बंगाली भाषा में की थी। इसे पहली बार 7 नवंबर 1875 को ‘बंगदर्शन’ पत्रिका में प्रकाशित किया गया। बाद में 1882 में प्रकाशित उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में यह गीत शामिल किया गया।

    हालांकि, जो गीत मातृभूमि की स्तुति के रूप में साहित्यिक अभिव्यक्ति था, वही आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम की धड़कन बन गया।

    स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान:

    • क्रांतिकारी इसे संघर्ष से पहले फुसफुसाकर गाते थे,
    • विद्यार्थी विरोध प्रदर्शनों में इसे स्वर देते थे,
    • और यह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध राष्ट्रभावना का प्रतीक बन गया।

    राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता

    भारत का राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” है, जिसका अर्थ है — “हे मातृभूमि, मैं तुम्हें नमन करता हूँ।”

    1950 में संविधान सभा ने इसे “राष्ट्रीय गीत” का दर्जा दिया। हालांकि राष्ट्रगान “जन गण मन” है, लेकिन वंदे मातरम् को समान सम्मान प्रदान किया गया है।

    यह गीत भारत को एक हरित, समृद्ध और पालन-पोषण करने वाली मां के रूप में चित्रित करता है —
    सुजलां, सुफलां, मलयज-शीतलाम्…

    आज इस ऐतिहासिक गीत की रचना को लगभग 150 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।


    एकरूपता बनाम बहस

    जहाँ सरकार इसे प्रोटोकॉल स्पष्टता और राष्ट्रीय सम्मान से जोड़कर देख रही है, वहीं कुछ वर्गों में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों को लेकर बहस भी समय-समय पर उठती रही है।

    फिर भी इसमें कोई संदेह नहीं कि “वंदे मातरम्” भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक अमिट प्रतीक रहा है और आज भी राष्ट्रभावना से गहराई से जुड़ा हुआ है।

  • Parliament Budget Session: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, विपक्ष का आरोप– ‘बोलने से रोका जा रहा’

    Parliament Budget Session: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, विपक्ष का आरोप– ‘बोलने से रोका जा रहा’

    नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इंडिया ब्लॉक ने स्पीकर को हटाने से संबंधित प्रस्ताव का नोटिस दाखिल किया है, जिस पर 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। यह प्रस्ताव नियम 94(सी) के तहत दिया गया है, जिसमें 100 से अधिक सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है।

    कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि विपक्ष ने संविधान में अपना पूर्ण विश्वास जताया है। उन्होंने कहा, “माननीय अध्यक्ष महोदय के प्रति हमारा व्यक्तिगत सम्मान है, लेकिन यह बेहद दुखद है कि विपक्षी सांसदों को सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाने के अवसरों से लगातार रोका जा रहा है। कई वर्षों बाद स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। यह कोई सामान्य कदम नहीं, बल्कि असाधारण परिस्थितियों में उठाया गया असाधारण निर्णय है।”

    स्पीकर ने सचिवालय को प्रस्ताव की जांच के निर्देश दिए(Parliament Budget Session)

    सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को लेकर लोकसभा सचिवालय को निर्देश दिए हैं कि नियमों के तहत इसकी जांच कर आगे की कार्रवाई की जाए।

    हालांकि, इस प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। टीएमसी नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी संसद को सुचारू रूप से चलने देने के पक्ष में है, इसलिए उन्होंने इस प्रस्ताव से दूरी बनाए रखी है।

    इमरान मसूद का तीखा बयान

    इस बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का सदन के बाहर दिया गया बयान भी चर्चा में है। उन्होंने कहा,
    “तो मारते हमें। आप गुंडे हैं न। आप साबित कर रहे हो कि बोलने नहीं देते। लो, अभी यहीं मार लो हमें। सांसदों को बाहर निकाल दिया गया है। आपकी गुंडागर्दी चल रही है, चलाइए। लेकिन लोकतंत्र में गुंडागर्दी की कोई जगह नहीं होती। यह सब इतिहास में दर्ज होगा।”

    इन सांसदों ने दिया प्रस्ताव

    स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सांसद गौरव गोगोई, के. सुरेश और मोहम्मद जावेद द्वारा दिया गया है। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष तरीके से नहीं चलाई जा रही और विपक्षी सांसदों को लगातार बोलने से रोका जा रहा है।

    राजनीतिक मायने

    राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाना अपने आप में दुर्लभ घटना है। इससे संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव और गतिरोध की स्थिति और स्पष्ट होती है।

  • BJP–NCP political deal: सीएम फडणवीस का अचानक दिल्ली दौरा, सियासी हलचल तेज; सुनेत्रा पवार भी जाएंगी दिल्ली

    BJP–NCP political deal: सीएम फडणवीस का अचानक दिल्ली दौरा, सियासी हलचल तेज; सुनेत्रा पवार भी जाएंगी दिल्ली

    मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सोमवार (9 फरवरी) देर रात अचानक दिल्ली पहुंचने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ने दिल्ली में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और इसके बाद मंगलवार तड़के मुंबई लौट आए। इस गोपनीय दौरे को मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

    राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खास तौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विलय को लेकर चर्चाएं तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस संबंध में महायुति के सहयोगी दलों के साथ बातचीत का दौर शुरू हो चुका है।

    फडणवीस के बाद सुनेत्रा पवार का दिल्ली दौरा

    मुख्यमंत्री के अचानक दिल्ली दौरे के तुरंत बाद अब दिवंगत अजित पवार की पत्नी और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के दिल्ली जाने की जानकारी सामने आई है। सुनेत्रा पवार मंगलवार (10 फरवरी) शाम 6:45 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगी।

    उपमुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, वह बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार भेंट करेंगी। उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद यह उनकी पहली औपचारिक दिल्ली यात्रा बताई जा रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री फडणवीस के देर रात किए गए गोपनीय दौरे के बाद सुनेत्रा पवार की इस यात्रा को राजनीतिक रूप से खास महत्व दिया जा रहा है।

    इस दौरे के दौरान एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और पार्टी के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल भी सुनेत्रा पवार के साथ दिल्ली में मौजूद रहेंगे।

    सीएम देवेंद्र फडणवीस के अचानक दिल्ली दौरे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज, सुनेत्रा पवार की दिल्ली यात्रा को भी खास माना जा रहा है।
    सीएम देवेंद्र फडणवीस के अचानक दिल्ली दौरे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज, सुनेत्रा पवार की दिल्ली यात्रा को भी खास माना जा रहा है।

    जिला परिषद चुनावों में बीजेपी पहले, एनसीपी दूसरे नंबर पर

    इसी बीच महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न हुए 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनावों के नतीजों ने भी सियासी समीकरणों को नई दिशा दी है। इन चुनावों में बीजेपी पहले स्थान पर रही, जबकि अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दूसरे नंबर पर रही।

    इन चुनावों में जिला परिषद की 731 और पंचायत समितियों की 1462 सीटों के लिए मतदान हुआ था।
    जिला परिषद की 731 सीटों में से बीजेपी ने सबसे ज्यादा 233 सीटें जीतीं। इसके बाद अजित पवार गुट की एनसीपी को 167 और शिंदे गुट की शिवसेना को 162 सीटें मिलीं। महायुति ने कुल मिलाकर 731 में से 562 सीटों पर जीत दर्ज की है।

    वहीं, विपक्षी महाविकास आघाड़ी को करारा झटका लगा है। कांग्रेस को 56, शरद पवार गुट को 26 और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना को 43 सीटें मिली हैं। इस तरह एमवीए को कुल मिलाकर सिर्फ 125 सीटों से संतोष करना पड़ा।

    आने वाले दिनों में बड़े सियासी संकेत(BJP–NCP political deal)

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री का अचानक दिल्ली दौरा, उसके तुरंत बाद सुनेत्रा पवार की प्रस्तावित यात्रा और हालिया चुनावी नतीजे—ये सभी घटनाएं महाराष्ट्र में आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक फैसलों की ओर इशारा कर रही हैं।

  • Land Deal: पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी ने 21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी नोटिस को दी चुनौती, IGR के सामने होगी सुनवाई

    Land Deal: पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी ने 21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी नोटिस को दी चुनौती, IGR के सामने होगी सुनवाई

    मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। संबंधित कंपनी ने महाराष्ट्र पंजीकरण विभाग द्वारा जारी करीब 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी वसूली नोटिस को चुनौती देते हुए अपील दायर की है। विभागीय सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।

    सूत्रों के अनुसार, पंजीकरण विभाग ने पुणे के मुंधवा इलाके में स्थित जमीन की बिक्री विलेख (Land Deal) से जुड़े मामले में 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी जमा करने का नोटिस जारी किया था। विभाग का कहना है कि जमीन की बिक्री के दौरान नियमानुसार स्टांप शुल्क अदा नहीं किया गया, जिसके चलते यह राशि वसूल की जानी चाहिए थी। नोटिस में 10 फरवरी तक भुगतान की समयसीमा तय की गई थी।

    पहले भी जारी हो चुका है वसूली आदेश
    इससे पहले पंजीकरण विभाग ने एक आदेश जारी कर अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी और उसके साझेदार दिग्विजय पाटिल को 40 एकड़ सरकारी जमीन की बिक्री विलेख के दौरान माफ की गई स्टांप ड्यूटी जमा करने का निर्देश दिया था। उस आदेश में भी भुगतान की अंतिम तारीख 10 फरवरी तय की गई थी।

    IGR के सामने होगी अब सुनवाई
    पंजीकरण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि स्टांप ड्यूटी जमा करने की अंतिम तारीख तक भुगतान नहीं किया गया, बल्कि संबंधित कंपनी ने आदेश को चुनौती देते हुए अपील दाखिल कर दी है। अब इस पूरे मामले की सुनवाई पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) के समक्ष होगी। हालांकि अधिकारी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि 21 करोड़ रुपये की मांग वाले आदेश को किन आधारों पर चुनौती दी गई है।

    300 करोड़ रुपये के सौदे से जुड़ा मामला
    बताया जा रहा है कि अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी द्वारा करीब 40 एकड़ जमीन को लगभग 300 करोड़ रुपये में बेचने का सौदा उस समय विवादों में आया, जब यह सामने आया कि संबंधित जमीन सरकारी है और कंपनी को स्टांप शुल्क में छूट दी गई थी। इसी खुलासे के बाद यह मामला प्रशासनिक और कानूनी जांच के दायरे में आ गया।

  • Bharat Ratna: सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर गरमाई सियासत, भाई जगताप भाजपा-आरएसएस हुए हमलावर

    Bharat Ratna: सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर गरमाई सियासत, भाई जगताप भाजपा-आरएसएस हुए हमलावर

    मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग के बाद देश की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता भाई जगताप ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि जिन व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगे हों, उन्हें भारत रत्न(Bharat Ratna) जैसे सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ना देश की गरिमा पर सवाल खड़े करता है।

    भाई जगताप ने कहा कि भारत रत्न केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की भावनाओं और देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा सम्मान है। उन्होंने कहा कि अब तक यह सम्मान उन्हीं महान व्यक्तित्वों को दिया गया है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र, समाज या किसी बड़े उद्देश्य के लिए समर्पित किया।

    विवादित नामों को सम्मान देना समझ से परे – भाई जगताप
    कांग्रेस नेता ने कहा, “भारत रत्न (Bharat Ratna)से बड़ा कोई सम्मान नहीं है। संघ प्रमुख किसी संगठन के प्रमुख हैं, देश के नहीं। वीर सावरकर पर लगे आरोपों के बीच इस तरह की मांग समझ से परे है। अगर विवादित व्यक्तियों को भारत रत्न दिया गया, तो इसकी समीक्षा पूरा देश करेगा और सम्मान की गरिमा पर गंभीर सवाल उठेंगे।”

    उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा सरकार में ऐसे कई मंत्री हैं जिन पर आरोप लगने की बातें रिपोर्ट्स में सामने आती रही हैं। ऐसे माहौल में भारत रत्न देने का फैसला सम्मान की तौहीन जैसा होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को बेवजह हवा नहीं देना चाहते, अंतिम फैसला सरकार का होगा और जवाब जनता देगी।

    कानून-व्यवस्था, कलाकार और राजनीति पर भी सरकार को घेरा
    संघ प्रमुख के एक कार्यक्रम में अभिनेता सलमान खान की मौजूदगी पर प्रतिक्रिया देते हुए भाई जगताप ने कहा कि खेल और कला को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज कलाकारों को खुलेआम धमकियां मिल रही हैं, फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के घर फायरिंग की घटना सामने आई है और गैंगस्टरों में कानून का कोई डर नहीं दिख रहा।

    उन्होंने कहा कि 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड के खौफ पर काबू पाया गया था, लेकिन आज हालात फिर से चिंता पैदा कर रहे हैं, जो सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

    तीन बच्चों वाले बयान पर भी जताई नाराज़गी
    संघ प्रमुख के तीन बच्चों से जुड़े बयान को हास्यास्पद बताते हुए भाई जगताप ने कहा कि जब भारत पहले ही जनसंख्या के मामले में दुनिया में नंबर एक है, तब इस तरह की सलाह देना गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं पहले से ज्यादा असुरक्षित हैं और युवा खुद यह तय करने में सक्षम हैं कि उन्हें कब और किससे शादी करनी है।

    अन्य मुद्दों पर भी रखी बेबाक राय
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर लगाए गए आरोपों पर भाई जगताप ने कहा कि केवल आरोप लगाने से कुछ नहीं होगा, अगर आरोप सही हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए।
    बीएमसी में रितु तावड़े के मेयर बनने और घुसपैठियों पर दिए गए बयान को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार चारों तरफ है, कानून भी मौजूद है, फिर पिछले 12 वर्षों में कितने घुसपैठियों को निकाला गया, यह जनता को बताया जाना चाहिए।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि संसद देश का पवित्र मंदिर है, लेकिन वहां विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन जैसे गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा से बचा जा रहा है।

    महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़े विमान हादसे के सवाल पर भाई जगताप ने कहा, “जहां धुआं होता है, वहां आग भी होती है।” उन्होंने 18 साल पुराने विमान, लैंडिंग प्रक्रिया और तकनीकी खामियों पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।

    वहीं मीडिया को दिए बयान में उन्होंने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर कहा कि खेल, कला और संगीत को राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। भारत का क्रिकेट में दबदबा रहा है और विश्व कप जैसे आयोजनों को राजनीतिक नजरिये से देखना ठीक नहीं है।

  • DALAI LAMA IN JEFFRY EDWARD EPSTEIN FILE : दलाई लामा का जेफरी एपस्टीन से कोई संबंध नहीं, कार्यालय ने खबरों को बताया झूठा और बेबुनियाद

    DALAI LAMA IN JEFFRY EDWARD EPSTEIN FILE : दलाई लामा का जेफरी एपस्टीन से कोई संबंध नहीं, कार्यालय ने खबरों को बताया झूठा और बेबुनियाद

    14वें दलाई लामा के कार्यालय ने विवादित अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एडवर्ड एपस्टीन(JEFFRY EDWARD EPSTEIN) से किसी भी तरह के संबंध से साफ इनकार किया है। रविवार को जारी बयान में हाल की मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट को “झूठा, बेबुनियाद और गुमराह करने वाला” बताया गया, जिनमें तिब्बती आध्यात्मिक नेता को एपस्टीन से जोड़ने की कोशिश की गई थी।

    दलाई लामा(DALAI LAMA) के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि परम पावन कभी जेफरी एपस्टीन से नहीं मिले और न ही उन्होंने किसी व्यक्ति को अपनी ओर से एपस्टीन से मिलने या बातचीत करने के लिए अधिकृत किया। बयान में कहा गया कि बिना किसी तथ्यात्मक आधार के मनगढ़ंत संबंध बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।

    दलाई लामा के कार्यालय ने कहा कि इन दावों का कोई तथ्यात्मक या दस्तावेजी आधार नहीं है।

    अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जताई नाराज़गी

    इस मुद्दे पर अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू(PEMA KHANDU) ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “दलाई लामा की पूजनीय संस्था” को निराधार आरोपों और दुर्भावनापूर्ण अटकलों में घसीटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री खांडू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा,
    “गलत सूचना के जरिए एक पवित्र आध्यात्मिक संस्था को बदनाम करने के प्रयास बेहद गैर-जिम्मेदाराना और निंदनीय हैं।”

    उन्होंने उन खबरों की आलोचना की, जिनमें दावा किया गया था कि दलाई लामा का नाम तथाकथित ‘एपस्टीन फाइल्स’ में सामने आया है।

    क्या हैं एपस्टीन फाइल्स

    हाल ही में अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने जेफरी एपस्टीन से जुड़े कई दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इन दस्तावेजों के मुताबिक, एफबीआई ने जुलाई 2006 में एपस्टीन के खिलाफ जांच शुरू की थी। अगस्त 2019 में, अभियोग लगने के एक महीने बाद, एपस्टीन ने न्यूयॉर्क की एक जेल में आत्महत्या कर ली थी।

    जनवरी में अमेरिकी न्याय विभाग ने बताया था कि वह एपस्टीन मामले से जुड़ी दो दशकों से अधिक समय की जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री को सार्वजनिक करेगा। इसमें करीब 30 लाख पन्नों के दस्तावेज, 2,000 से अधिक वीडियो और लगभग 1,80,000 तस्वीरें शामिल हैं।

    ये दस्तावेज एपस्टीन फाइल पारदर्शिता अधिनियम के तहत सार्वजनिक किए गए हैं, जो लंबे समय से चले आ रहे सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव के बाद लागू किया गया कानून है।

    घिसलेन मैक्सवेल का मामला

    एपस्टीन की करीबी सहयोगी और पूर्व प्रेमिका घिसलेन मैक्सवेल को 2021 में न्यूयॉर्क की एक संघीय जूरी ने यौन तस्करी का दोषी ठहराया था। उस पर नाबालिग लड़कियों की भर्ती में मदद करने का आरोप सिद्ध हुआ था। मैक्सवेल फिलहाल 20 साल की सजा काट रही है, हालांकि उसने किसी भी गलत काम में शामिल होने से इनकार किया है।

  • Bjp old workers marginalized new leaders power :कांग्रेसमुक्त भारत का सपना देखने वाली भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेसयुक्त हो गई : सुरेशचंद्र राजहंस

    Bjp old workers marginalized new leaders power :कांग्रेसमुक्त भारत का सपना देखने वाली भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेसयुक्त हो गई : सुरेशचंद्र राजहंस

    दूसरे दलों से आए नेताओं को सत्ता में हिस्सेदारी, पुराने भाजपा कार्यकर्ता हाशिये पर

    अश्विनी कुमार दुबे

    मुंबई: भारतीय जनता पार्टी में अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। विपक्ष और राजनीतिक जानकार आरोप लगा रहे हैं कि पार्टी वर्षों तक सत्ता से बाहर संघर्ष करने वाले अपने पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रही है, जबकि कांग्रेस, एनसीपी और अन्य दलों से आए नेताओं को मंत्री पद, निगम मंडलों की अध्यक्षता और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।

    मुंबई कांग्रेस के प्रवक्ता और मीडिया समन्वयक सुरेशचंद्र राजहंस ने कहा, “कांग्रेसमुक्त भारत का सपना देखने वाली भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेसयुक्त हो गई है। पार्टी में अपने नेता, कार्यकर्ता और पदाधिकारी नहीं हैं; दिल्ली से लेकर गलियों तक, भाजपा को दूसरों के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।”

    राजनैतिक जानकारों के मुताबिक, सत्ता में भागीदारी अब विचारधारा या वर्षों के संघर्ष के बजाय दल-बदल की राजनीति पर आधारित हो गई है। पार्टी की जमीनी ताकत माने जाने वाले कार्यकर्ताओं को केवल झंडा उठाने और रैलियों में हिस्सा लेने तक सीमित कर दिया गया है(Bjp old workers marginalized new leaders power), जबकि वास्तविक सत्ता का लाभ बाहरी नेताओं को मिल रहा है।

    विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है, “जो पार्टी खुद को अनुशासन और कार्यकर्ता आधारित संगठन बताती थी, वही अब अपने ही कार्यकर्ताओं का अपमान कर रही है। वर्षों तक सत्ता-विहीन रहने वाले कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन पार्टी को समर्पित किया, उन्हें अब नजरअंदाज किया जा रहा है।”

    राजनीतिक विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो भाजपा को इसका सीधा नुकसान आगामी चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं में बढ़ती नाराजगी पार्टी की जमीनी पकड़ को कमजोर कर रही है, जिससे आगामी राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है।

    पार्टी नेतृत्व की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंदरूनी असंतोष की चर्चा अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच चुकी है।

  • Birth Day: एकनाथ शिंदे के जन्मदिन पर ‘लाड़ली बहनों’ द्वारा 9 फरवरी को राज्यभर के प्रमुख मंदिरों में होगी देवताओं की महाआरती

    Birth Day: एकनाथ शिंदे के जन्मदिन पर ‘लाड़ली बहनों’ द्वारा 9 फरवरी को राज्यभर के प्रमुख मंदिरों में होगी देवताओं की महाआरती

    मुंबई: शिवसेना के मुख्य नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे(Eknath shinde birthday) के जन्मदिन के अवसर पर सोमवार, 9 फरवरी 2026 को राज्यभर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर ‘लाड़ली बहनों’ की ओर से सामूहिक महाआरती का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान उपमुख्यमंत्री शिंदे के स्वस्थ, दीर्घायु और ऊर्जावान जीवन की कामना की जाएगी।

    उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे 9 फरवरी को अपने 62वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। उनके जनकल्याणकारी कार्यों को निरंतर शक्ति मिले और वे इसी तरह राज्य की सेवा करते रहें, इस भावना के साथ लाखों लाडकी बहनें मंदिरों में प्रार्थना करेंगी।

    शिवसेना की उपनेता और प्रवक्ता शीतल म्हात्रे ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य के प्रमुख मंदिरों में शाम 7 बजे एक साथ महाआरती की जाएगी। इनमें श्री क्षेत्र पंढरपुर का विठ्ठल मंदिर, देहू, आलंदी, तुलजापुर का तुलजाभवानी मंदिर, कोल्हापुर का अंबाबाई मंदिर और ज्योतिबा मंदिर, शिरडी का साईं बाबा मंदिर, अक्कलकोट का स्वामी समर्थ समाधि स्थल, श्री क्षेत्र जेजुरी, त्र्यंबकेश्वर, कालाराम मंदिर, शेगांव का गजानन महाराज मंदिर सहित अन्य प्रमुख मंदिर शामिल हैं।

    शीतल म्हात्रे ने कहा कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हमेशा अपने वचनों पर खरे उतरते आए हैं। ‘लाडकी बहन योजना’ के माध्यम से उन्होंने राज्य की लगभग ढाई करोड़ महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। इस योजना से लाखों महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं और उन्हें आर्थिक मजबूती मिली है। इसी कृतज्ञता भाव से लाडकी बहनें उनके लिए प्रार्थना करेंगी।

    उन्होंने यह भी बताया कि लाडकी बहनों ने विधानसभा, नगरपालिका और महापालिका चुनावों में शिवसेना और महायुति को भरपूर समर्थन दिया है। वहीं, महायुति के सहयोगी दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख एवं उपमुख्यमंत्री अजित पवार के दुर्भाग्यपूर्ण निधन के कारण इस वर्ष उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपना जन्मदिन सार्वजनिक रूप से न मनाने का निर्णय लिया है।

    इसके बावजूद, राज्यभर की लाडकी बहनें श्रद्धा और आस्था के साथ मंदिरों में महाआरती कर उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करेंगी।

  • Rohit Pawar Statement:हवाई दुर्घटना में अजित पवार की मौत पर रोहित पवार का बड़ा बयान, 10 फरवरी को करेंगे खुलासा

    Rohit Pawar Statement:हवाई दुर्घटना में अजित पवार की मौत पर रोहित पवार का बड़ा बयान, 10 फरवरी को करेंगे खुलासा

    बारामती/मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के नेता और विधायक रोहित पवार ने अजित पवार की हवाई दुर्घटना में हुई मौत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल और संदेह हैं, जिन पर वे 10 फरवरी को मुंबई में विस्तृत जानकारी और प्रेजेंटेशन के जरिए खुलासा करेंगे।

    बारामती में जिला परिषद चुनाव के लिए मतदान करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में रोहित पवार (Rohit Pawar Statement) ने कहा कि अजित पवार की मौत को लेकर हर किसी के मन में सवाल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुर्घटना क्यों हुई और कैसे हुई, इस पर 10 फरवरी को तथ्यात्मक रूप से बात रखी जाएगी।

    गौरतलब है कि 28 जनवरी को पुणे जिले के बारामती हवाई अड्डे पर उतरने के प्रयास के दौरान एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें अजित पवार सहित पांच लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से ही हादसे के कारणों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं तेज हैं।

    विलय की इच्छा और एकजुटता का संदेश

    रोहित पवार ने इस मौके पर एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि अजित पवार एनसीपी के एकजुट होने के पक्ष में थे और इस दिशा में उन्होंने प्रयास भी किए थे। रोहित पवार के मुताबिक, अजित पवार की यह दिली इच्छा थी कि पार्टी एक परिवार की तरह साथ आए।

    उन्होंने कहा, “अजित दादा चाहते थे कि पार्टी कार्यकर्ताओं का भला हो और जो लोग उनकी विचारधारा से जुड़े हैं, वे चुनाव जीतें। उन्हें दोनों गुटों के एक होने की उम्मीद थी। दादा ने इसके लिए प्रयास किए थे और हम भी उसी दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे। परिवार आज भी एकजुट है।”

    चुनाव में साथ उतरे दोनों गुट

    रोहित पवार ने यह भी बताया कि जिला परिषद चुनाव में एनसीपी (एसपी) और एनसीपी ने हाथ मिलाया है और दोनों दल ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न पर मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। शनिवार को महाराष्ट्र में 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए मतदान हुआ।

    अजित पवार की मौत, संभावित राजनीतिक एकजुटता और 10 फरवरी को होने वाले खुलासे ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अब सभी की नजरें रोहित पवार के उस प्रेजेंटेशन पर टिकी हैं, जिसमें वे इस हवाई दुर्घटना से जुड़े सवालों के जवाब देने वाले हैं।