विश्व मूल वंश स्वदेशी दिवस पर चिरमिरी में बच्चों और समाजसेवियों का सम्मान

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80 मेधावी छात्र और 5 विशिष्ट नागरिक हुए सम्मानित, अगले वर्ष और भव्य आयोजन की तैयारी


चिरमिरी (छत्तीसगढ़)। राष्ट्रीय मूल वंश समाज संघ चिरमिरी द्वारा लगातार तीसरे वर्ष विश्व मूल वंश स्वदेशी दिवस का आयोजन एनसीपीएच कलारी क्लब में धूमधाम से किया गया। इस अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, जनरल नॉलेज प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और सम्मान समारोह का आयोजन हुआ।
मेधावी छात्रों और विशिष्ट नागरिकों का सम्मान
कार्यक्रम में क्षेत्र के पाँच नागरिकों को उनके उम्र और अनुभव के साथ किए गए प्रेरणादायक एवं अनोखे कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा हायर सेकेंडरी स्तर के 16–17 स्कूलों के 80 विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने 80% से अधिक अंक अर्जित कर चिरमिरी, अपने विद्यालय और परिवार का नाम रोशन किया।
पदाधिकारियों ने रखे विचार
इस अवसर पर प्रदेश से आए राष्ट्रीय मूल वंश समाज संघ के पदाधिकारियों ने विश्व आदिवासी दिवस मनाने के उद्देश्य, महत्व और इतिहास पर विस्तार से चर्चा की।
अर्चना बागड़े ने कहा कि संस्था का प्रयास है कि अधिक से अधिक बच्चों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए जाएं और ज़रूरतमंद छात्रों को हर संभव सहायता दी जाए।
रामकुमार कनौजिया ने सुझाव दिया कि स्कूलों में जनरल नॉलेज और संविधान से संबंधित किताबें उपलब्ध कराई जाएं, ताकि बच्चों को अपने अधिकारों और क्षेत्र के बारे में अधिक जानकारी हो।
रामदास बघेल, मंगलदास और अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए।
आगामी वर्ष के लिए भव्य योजना
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि यह आयोजन पिछले तीन वर्षों से लगातार हो रहा है और आने वाले वर्ष में इसे और बड़े पैमाने पर आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में शेख स्माइल, अलेक्स गुरु, दयाल, रामदास बघेल सहित कई कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा।

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