Samik Bhattacharya Clarification: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने कलकत्ता उच्च न्यायालय परिसर के भीतर गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी में अपनी पार्टी की किसी भी संलिप्तता से इनकार किया है।
अदालत में बनर्जी के खिलाफ ‘चोर-चोर’ के नारे लगने और कथित अपमानजनक टिप्पणी किए जाने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए भट्टाचार्य ने कहा, “यह भाजपा की संस्कृति नहीं है। वह पूर्व मुख्यमंत्री और एक महिला हैं। भाजपा उनके खिलाफ ‘चोर-चोर’ जैसे नारे लगाने में विश्वास नहीं रखती।”
यह घटना आज उस समय हुई जब सुश्री बनर्जी राज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा का आरोप लगाते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंची थीं। खुद वकील के तौर पर पेश होते हुए उन्होंने मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवगणनम की पीठ के सामने दलील दी कि चुनाव के बाद हुई हिंसा में तृणमूल के कई कार्यकर्ताओं पर हमले हुए हैं।
बनर्जी के अनुसार, लगभग 160 पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ या आगजनी की गई और राज्य भर में हिंसा की लगभग 2,000 घटनाएं हुईं। उन्होंने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि वह खुद अपने निर्वाचन क्षेत्र के थानों में सीधे शिकायत दर्ज नहीं करा पा रही थीं और उन्हें ऑनलाइन शिकायतों का सहारा लेना पड़ा।
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उन्होंने आरोप लगाया कि एक 12 साल की बच्ची को दुष्कर्म की धमकी दी गई जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता कथित 2,000 घटनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी देने में विफल रहे हैं। सुनवाई खत्म होने के बाद जब वह अदालत कक्ष से बाहर आ रही थीं, तब वकीलों के एक समूह ने कथित तौर पर उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
इसके तुरंत बाद पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। इस हंगामे के बीच सुश्री बनर्जी ने कुछ वकीलों द्वारा उनके साथ मारपीट किये जाने का भी आरोप लगाया। घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने कहा, “अगर उच्च न्यायालय के भीतर सुरक्षा की यह स्थिति है, तो समझा जा सकता है कि पूरे राज्य में क्या हो रहा होगा।”
कल्याण बनर्जी के बयान पर पलटवार करते हुए भट्टाचार्य ने कहा, “भाजपा ने यह स्थिति पैदा नहीं की है। अगर इसके लिए कोई जिम्मेदार है, तो वह खुद तृणमूल कांग्रेस है।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कोई भी अपने कर्मों के फल से नहीं बच सकता, फिर भी हम नहीं चाहते कि ऐसी घटनाएं हों। उन्होंने दावा किया कि विरोध करने वाले और जिनका विरोध हो रहा है, दोनों ही तृणमूल कांग्रेस के ही लोग हैं।
चुनाव बाद की हिंसा के सवाल पर भाजपा नेता ने कहा, “यहाँ भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है। यह तृणमूल के भीतर ‘संपन्न’ और ‘वंचित’ लोगों के बीच की लड़ाई है। जिन लोगों को तृणमूल के शासन में लाभ नहीं मिला, वे अब उनके खिलाफ बोल रहे हैं जिन्हें लाभ मिला।” राजनीतिक हिंसा पर उन्होंने कहा कि भाजपा के भी तीन कार्यकर्ता मारे गए हैं और इसे रोकने के लिए लोगों को आगे आना होगा।
एक तीखी टिप्पणी में भट्टाचार्य ने कहा, “आप इसलिए जीवित हैं क्योंकि भाजपा सत्ता में है। हमारे कार्यकर्ता जरूरत पड़ने पर जवाब दे सकते हैं। अन्यथा, जनता के स्वाभाविक गुस्से ने सब कुछ खत्म कर दिया होता। हम इस तरह की राजनीति का अंत देखना चाहते हैं।”

