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  • Bribery Case: पंजीकृत अपराध में सहायता के लिए धन की मांग; रिश्वतखोरी के मामले में एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज!

    Bribery Case: पंजीकृत अपराध में सहायता के लिए धन की मांग; रिश्वतखोरी के मामले में एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज!

    Bribery Case: वर्तकनगर पुलिस स्टेशन में सुहास लहनु रहाणे (42) के खिलाफ रिश्वत मांगने का मामला दर्ज किया गया है। यह मामला पुलिस स्टेशन में दर्ज एक शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है, जिसमें सहायक पुलिस निरीक्षक ने 50,000 रुपये की मांग की और 20,000 रुपये की किस्त ले ली।

    इसके अलावा, पुलिस स्टेशन में दर्ज एक अपराध में कानूनी सहायता और शिकायतकर्ता के साथ समझौता कराने के लिए 30,000 रुपये की मांग की गई थी। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है। वर्तकनगर पुलिस स्टेशन के सहायक पुलिस निरीक्षक सुहास लहनु रहाणे (42) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने शिकायतकर्ता से 20,000 रुपये अग्रिम लिए और शेष 30,000 रुपये की मांग की। ठाणे भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) में 10 जून को शिकायत दर्ज कराई गई थी। जांच में रिश्वत की मांग का खुलासा होने के बाद, पुलिस निरीक्षक प्रमोद अहिरे की शिकायत पर सरकार ने वर्तकनगर पुलिस स्टेशन में रहाणे के खिलाफ मामला दर्ज किया है और आगे की जांच जारी है।

  • Anti-Corruption Bureau Action: ठाणे में एंटी-करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई; प्राइवेट स्कूल में एडमिशन के लिए रिश्वत लेते दो लोग पकड़े गए!

    Anti-Corruption Bureau Action: ठाणे में एंटी-करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई; प्राइवेट स्कूल में एडमिशन के लिए रिश्वत लेते दो लोग पकड़े गए!

    Anti-Corruption Bureau Action: एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने ठाणे के एक प्राइवेट स्कूल में क्लास 6 में एडमिशन के लिए रिश्वत मांगते और लेते हुए दो लोगों को रंगे हाथों पकड़ा। इस कार्रवाई ने एक बार फिर प्राइवेट एजुकेशनल एडमिशन प्रोसेस में गड़बड़ियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ACB के मुताबिक, आरोपियों ने राबोडी की एक शिकायत करने वाली महिला की बेटी का घोड़बंदर रोड इलाके के एक प्राइवेट स्कूल में एडमिशन कराने के लिए 1 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। वेरिफिकेशन के बाद ACB ने जाल बिछाया।

    शिकायत सही पाए जाने के बाद, आरोपियों ने रिश्वत की रकम में से 77,300 रुपये लिए और उन्हें एंटी-करप्शन ब्यूरो टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में फातिमा अंसारी (उम्र 35, निवासी राबोडी, ठाणे) और चैतन्य प्रदीप प्रधान (निवासी ठाणे) के खिलाफ आगे का केस दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है, और ACB ने बताया है कि राबोडी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है।

    इस ऑपरेशन को सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस शिवराज पाटिल, एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस सुधाकर शिंदे और डिप्टी सुपरिटेंडेंट भागवत सोनवणे ने गाइड किया। जबकि पुलिस इंस्पेक्टर संतोष नवलगी की टीम ने इस सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया।

  • Bribery Case: दो TTI रमीज़ सय्यद और राकेश कुमार 56 हजार रुपए की घूस के साथ दबोचे गए!

    Bribery Case: दो TTI रमीज़ सय्यद और राकेश कुमार 56 हजार रुपए की घूस के साथ दबोचे गए!

    Bribery Case: मध्य रेलवे विजलेंस ने मुंबई डिवीजन में भ्रष्टाचार पर अब तक की सबसे बड़ी चोट करते हुए ट्रेन संख्या 22122 मुंबई एलटीटी एसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस में तैनात दो टीटीआई रमीज़ सय्यद और राकेश कुमार को 56 हजार रुपये की घूस राशि के साथ दबोच लिया।

    यह कार्रवाई 15 जून 2026 को जलगाँव से एलटीटी के बीच मे हुई जिसने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं क्योकि एक हप्ते पहले घूसखोर टीटीआई कुमार गौरव के घूस काण्ड की आग अभी ठंडी भी नही हुई थी कि एक दूसरी घूस काण्ड की आग वापस लग गई।

    सूत्रों के अनुसार दोनों टीटीआई लंबे समय से ट्रेन में “सेटिंग और वसूली” का खेल चला रहे थे। आरोप है कि यात्रियों से खुलेआम पैसे वसूले जाते थे लेकिन टिकट नहीं बनाए जाते थे। बताया जा रहा है कि इस एक सफर में ही करीब 150 यात्रियों से रकम वसूली गई ओर टिकट नहीं बनाया गया जिसके कारण रेलवे को राजस्व का भारी नुकसान पहुँचा।

    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये दोनों टीटीआई घूस की रकम सीधे अपने पास रखने के बजाय पेंट्री कार के वेंडर साहिल रफीक मिर्जा को “सुरक्षित चैनल” की तरह इस्तेमाल किया गया। जानकारी के मुताबिक 37 हजार रुपये राकेश कुमार और 19 हजार रुपये रमीज़ सय्यद ने वेंडर को सौंपे थे।

    वेंडर ने और पेंट्री मैनेजर अतुल सिंह ने ऑन रिकॉर्ड यह बात कबूल की है।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या पेंट्री कार केवल खाने-पीने की सुविधा का माध्यम रह गई है या फिर भ्रष्टाचार का चलता-फिरता सेफ हाउस बन चुकी है?

    रेलवे सूत्रों का दावा है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष एजेंसी से जाँच हो जाए तो कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। आखिर कैसे 150 से अधिक बिना टिकट यात्री लखनऊ से मुंबई तक सफर करते रहे और किसी वरिष्ठ अधिकारी की नजर नहीं पड़ी? क्या यह केवल दो टीटीआई का खेल था या फिर पूरा सिस्टम मौन सहमति से चल रहा था?

    सबसे बड़ा प्रश्न रेलवे प्रशासन की जवाबदेही पर है। जब ट्रेनों में “स्टार्ट टू एंड” ड्यूटी होती है तब वरिष्ठ निरीक्षण तंत्र क्या कर रहा था? क्या अधिकारियों को ट्रेन में चल रही अवैध वसूली की भनक तक नहीं थी या फिर सब कुछ जानबूझकर नजर अंदाज किया जा रहा था?

    सूत्रों के अनुसार पूरे मामले को एक टीटीआई द्वारा दबाने की कोशिश भी हुई लेकिन विजलेंस टीम के सख्त रुख के आगे किसी की एक नहीं चली। यह कार्रवाई साफ संकेत है कि रेलवे में वर्षों से जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार के नेटवर्क को सिर्फ विजलेंस के भरोसे खत्म करना आसान नहीं है।

    अब जनता यह जानना चाहती है कि कार्रवाई केवल दो कर्मचारियों तक सीमित रहेगी या फिर उन अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होगी जिनकी नाक के नीचे यात्रियों की जेब काटकर रेलवे राजस्व को चूना लगाया जाता रहा। इस पूरे काण्ड का मास्टरमाइंड रमीज़ सय्यद के पैसों व रसूख के आगे रेलवे के उच्चाधिकारी कथक कली नृत्य करते नज़र आएँगे या लीपा-पोती करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल देंगे।

  • Bribery Case: तीन करोड़ की रिश्वत मामले में दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर गिरफ्तार

    Bribery Case: तीन करोड़ की रिश्वत मामले में दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर गिरफ्तार

    Bribery Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में तैनात निरीक्षक प्रदीप सिंह को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सीबीआई के मामलों में राहत दिलाने के नाम पर तीन करोड़ रुपये की रिश्वत की साजिश में अहम भूमिका निभाई।

    जांच एजेंसी के अनुसार, यह रिश्वत पुड्डुचेरी के एक आरोपी और उसके सहयोगी से कथित तौर पर सीबीआई मामलों में अनुकूल कार्रवाई कराने के बदले मांगी गई थी। आरोप है कि निरीक्षक प्रदीप सिंह ने दोनों आरोपियों की मुलाकात एक वरिष्ठ लोक सेवक से कराई, जिसने जांच एजेंसी में प्रभाव होने का दावा करते हुए मामलों में राहत दिलाने के लिए तीन करोड़ रुपये की मांग की।

    सीबीआई के मुताबिक, पुड्डुचेरी निवासी एन. राजा उर्फ राजशेखर और उसके सहयोगी राजकुमार उर्फ मधनराज इस कथित साजिश में शामिल थे। राजकुमार कथित तौर पर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था।

    जांच में सामने आया कि मई महीने में दिल्ली के एरोसिटी क्षेत्र में हुई एक बैठक के दौरान रिश्वत की मांग को अंतिम रूप दिया गया था। इसके बाद रकम पहुंचाने के लिए हवाला नेटवर्क का सहारा लिया गया। आरोपियों ने दिल्ली तक धन पहुंचाने के लिए चेन्नई के एक हवाला कारोबारी से संपर्क किया था।

    सीबीआई को सूचना मिली थी कि रिश्वत की पहली किस्त 8 जून को दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में सौंपी जानी है। सूचना के आधार पर एजेंसी ने जाल बिछाकर कार्रवाई की और निरीक्षक प्रदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया।

    सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क, कथित वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका और रिश्वत लेन-देन के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

  • Vasai-Virar Bribery: वसई-विरार मनपा का लिपिक 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार!

    Vasai-Virar Bribery: वसई-विरार मनपा का लिपिक 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार!

    Vasai-Virar Bribery: महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ठाणे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए वसई-विरार शहर महानगरपालिका के सातीवली विभागीय कार्यालय में कार्यरत लिपिक दिलीप लक्ष्मण लोखंडे (52) को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

    जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता को अधिकृत भूमि मालिक की ओर से अवैध कब्जा तथा बिना अनुमति पेड़ काटने के मामले में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नोटिस जारी कर कानूनी कार्रवाई करवानी थी। इस कार्य के बदले आरोपी लिपिक दिलीप लोखंडे ने शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।

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    शिकायतकर्ता रिश्वत देने के पक्ष में नहीं था। उसने 27 मई 2026 को एंटी करप्शन ब्यूरो, ठाणे कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। एसीबी द्वारा शिकायत की जांच एवं सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद एसीबी ठाणे की टीम ने 2 जून 2026 को सातीवली स्थित विभागीय कार्यालय में जाल बिछाकर कार्रवाई की।

    शाम करीब 5:20 बजे शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार करते समय आरोपी लिपिक को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। एसीबी अधिकारियों ने आरोपी को हिरासत में लेकर वालीव पुलिस स्टेशन में आवश्यक प्रविष्टि दर्ज कराई है तथा मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    यह कार्रवाई एसीबी ठाणे परिक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक शिवराज पाटील, अपर पुलिस अधीक्षक सुहास शिंदे एवं भागवत सोनावणे के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इस अवसर पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है अथवा भ्रष्टाचार संबंधी कोई जानकारी हो तो तत्काल एसीबी से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराएं।

  • ₹10 Crore Scam: सुरक्षा रक्षक पंजीकरण में ₹10 करोड़ के घोटाले का आरोप, ACB जांच की मांग से मचा हड़कंप!

    ₹10 Crore Scam: सुरक्षा रक्षक पंजीकरण में ₹10 करोड़ के घोटाले का आरोप, ACB जांच की मांग से मचा हड़कंप!

    ₹10 Crore Scam: मीरा-भाईंदर महानगरपालिका और सुरक्षा रक्षक मंडल (बृहन्मुंबई एवं ठाणे जिला) के माध्यम से सुरक्षा रक्षकों के पंजीकरण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता और न्यायालय को गुमराह करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले में सुरक्षा रक्षक मंडल के अध्यक्ष अशोक डोके सहित संबंधित अधिकारियों की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से विस्तृत जांच कराने की मांग सामाजिक कार्यकर्ता तथा फाइट फॉर राइट फाउंडेशन के अध्यक्ष विनोद पांडुरंग घोलप ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, श्रम मंत्री आकाश फुंडकर और श्रम विभाग के प्रधान सचिव को लिखित शिकायत देकर की है।

    शिकायत के अनुसार, 4 अप्रैल 2022 को मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के तत्कालीन उपायुक्त मारुति पांडुरंग गायकवाड ने मे. सैनिक इंटेलिजेंस सिक्युरिटी प्रा. लि. नामक ठेकेदार कंपनी के माध्यम से कार्यरत सुरक्षा रक्षकों के पंजीकरण के लिए पत्र जारी किया था। हालांकि, संबंधित सुरक्षा रक्षक वास्तव में कहां, कितने समय से और किस विभाग में कार्यरत थे, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाया गया है।

    मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया गया है कि उच्च न्यायालय में केवल 161 सुरक्षा रक्षकों के पंजीकरण से संबंधित याचिका लंबित होने के बावजूद लगभग 490 अतिरिक्त सुरक्षा रक्षकों का पंजीकरण किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने इसे न्यायालय के आदेश की अवमानना और प्रशासन द्वारा न्यायालय को गुमराह करने का मामला बताया है।

    शिकायत में आगे कहा गया है कि न्यायालय में दायर शपथपत्र में तत्कालीन उपायुक्त मारुति गायकवाड ने लगभग 650 सुरक्षा रक्षकों की कोई जानकारी महानगरपालिका के पास उपलब्ध नहीं होने की बात कही थी, जबकि इससे पहले उन्हीं अधिकारियों द्वारा पंजीकरण के लिए अनुशंसा पत्र जारी किया गया था। इससे शासन और न्यायालय को विरोधाभासी जानकारी देने का आरोप और गंभीर हो गया है।

    इसके अलावा, संबंधित सुरक्षा रक्षकों से पंजीकरण खर्च के नाम पर ₹1 लाख से ₹1.50 लाख तक की राशि अग्रिम कर्ज के रूप में लेकर उनके वेतन से कटौती किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इसे सुरक्षा रक्षकों के आर्थिक शोषण और बड़े स्तर के भ्रष्टाचार का संकेत बताया है।

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    वहीं सुरक्षा रक्षक मंडल के निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में संबंधित 650 सुरक्षा रक्षकों को पिछले 15 वर्षों से कार्यरत बताते हुए उनके पंजीकरण पर कोई आपत्ति नहीं होने की बात कही गई है। हालांकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह जानकारी वास्तविकता से मेल नहीं खाती और शासन व न्यायालय को गुमराह करने के उद्देश्य से गलत जानकारी प्रस्तुत की गई है।

    उल्लेखनीय है कि तत्कालीन उपायुक्त मारुति गायकवाड बाद में नवी मुंबई महानगरपालिका में कार्यरत रहते हुए भ्रष्टाचार के एक मामले में ACB द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इससे पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

    शिकायतकर्ता विनोद घोलप ने इस पूरे मामले में ₹10 करोड़ से अधिक के आर्थिक घोटाले का दावा करते हुए अवैध पंजीकरण तत्काल रद्द करने, सुरक्षा रक्षकों से वसूली गई राशि वापस करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।

    इन आरोपों के बाद मीरा-भाईंदर महानगरपालिका और सुरक्षा रक्षक मंडल का कामकाज एक बार फिर विवादों में आ गया है। अब राज्य सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगी या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। “यदि सुरक्षा रक्षकों को न्याय नहीं मिला तो तीव्र जन आंदोलन किया जाएगा,” ऐसा इशारा शिकायतकर्ता विनोद घोलप ने दिया है।