BNCMC General Body Meeting: मानसून में अब केवल बीस दिन शेष हैं, लेकिन भिवंडी शहर में अभी तक नालों की सफाई का काम शुरू नहीं हो सका है। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार (7 मई) को हुई भिवंडी महानगरपालिका की महासभा में नाला सफाई और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के दौरान अधिकारियों की मिलीभगत के विषयों पर जमकर हंगामा हुआ। महासभा में नाला सफाई की निविदा प्रक्रिया को मंजूरी देने के साथ-साथ प्रभाग अधिकारियों की मनमानी, भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण पर कार्रवाई के बदले आर्थिक लेन-देन जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई।
नाला सफाई में देरी पर प्रशासन को घेरा
भाजपा पार्षद सुमित पाटिल ने प्रश्न उठाया कि जब मानसून सिर पर है, तो प्रशासन हर बार नाला सफाई में देरी क्यों करता है? क्या यह देरी ठेकेदारों को फायदा पहुँचाने के लिए की जा रही है? उन्होंने प्रशासन से इस विलंब का स्पष्टीकरण मांगा। वहीं, यशवंत टावरे ने सुझाव दिया कि नाला सफाई पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद स्थिति वैसी ही बनी रहती है।
इसके बजाय यदि नगर निगम खुद के जेसीबी, पोकलेन और डंपर खरीद ले और साल भर नालों की सफाई करे, तो करोड़ों रुपये बचाए जा सकते हैं। पार्षद रोहित चौधरी ने कहा कि केवल बीस दिनों में ठेकेदार क्या काम कर पाएंगे, इसलिए ठेकेदारों को स्थानीय पार्षदों के निर्देशों के अनुसार काम करना चाहिए। कमलाकर पाटिल ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों के प्रशासक काल में देरी से हुई सफाई का खामियाजा जनता ने भुगता है, क्या इस बार भी वही गलतियाँ दोहराई जाएंगी? उन्होंने प्रभाग स्तर पर निगरानी समिति बनाने का सुझाव दिया।
संबंधित खबरें: Coastal Road Traffic Management: कोस्टल रोड से ठाणे का ट्रैफिक जाम कम होगा; 28 परसेंट काम पूरा, दो साल में चालू हो जाएगा!
अवैध निर्माण कार्रवाई के नाम पर वसूली का आरोप
राष्ट्रवादी (शरद पवार) कांग्रेस के पार्षद फराज बाबा बहाउद्दीन ने महासभा में सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि “शहर में अवैध निर्माण बड़े पैमाने पर बढ़ गए हैं। प्रभाग समिति क्रमांक 5 के प्रभाग अधिकारी सईद चिवणे, खतरनाक और अवैध इमारतों के बिल्डरों से 2 लाख रुपये, मरम्मत के नाम पर 3 लाख रुपये और गालाधारकों से 10 हजार रुपये की फिरौती वसूल रहे हैं।”
पार्षद फराज के आरोपों पर प्रभाग अधिकारी सईद चिवणे ने जवाब देने की कोशिश की, लेकिन महासभा में कई पार्षदों ने उनके जवाबों को असंतोषजनक और टालमटोल वाला बताया। इस बहस से यह बात सार्वजनिक हो गई कि नगर निगम के अधिकारी अवैध निर्माणों की आड़ में किस तरह वसूली कर रहे हैं। फराज ने यह मांग भी की कि प्रभाग अधिकारियों को दी गई सरकारी गाड़ियाँ वापस ले लेनी चाहिए।
जमीन खाली कराने का ‘उद्योग’
शिवसेना (शिंदे गुट) के गुट नेता मनोज काटेकर ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के चलते किसी भी इमारत को ‘अति खतरनाक’ घोषित कर तुरंत गिरा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि नगर निगम अब भू-मालिकों को जमीन खाली करा के देने का “उद्योग” चला रहा है। काटेकर ने मांग की कि ऐसी इमारतों में ‘पगड़ी’ पर रहने वाले किरायेदारों को सुरक्षा देने के लिए उनका विधिवत पंचनामा किया जाना चाहिए।

