नई दिल्ली। संसद मार्च के दौरान दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच हुई झड़पों के बाद अब कई राज्यों के छात्र संगठनों और किसान संगठनों ने भी आंदोलन के समर्थन का ऐलान किया है।
प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव देखने को मिला। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। वहीं कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव की भी घटनाएं सामने आईं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, इन घटनाओं में 50 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी सूचना है।
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प्रदर्शन के बाद देर रात जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसी दौरान पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ किसान समूहों ने भी आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की। सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ कुछ लोगों के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं। हालांकि, इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
आंदोलन से जुड़े संगठनों का दावा है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों के छात्र संगठन भी विरोध-प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, मुंबई और अन्य शहरों में प्रदर्शन की घोषणाएं की गई हैं।
इस बीच आंदोलनकारी संगठनों ने कहा है कि उनकी मांगें पूरी होने तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। दूसरी ओर प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से आंदोलन के विस्तार और विभिन्न संगठनों के समर्थन के दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून अपने हाथ में न लेने की अपील की है।

