नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में संसद मार्च के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगहों पर झड़पें हुईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। वहीं, प्रदर्शनकारियों की ओर से कई स्थानों पर पथराव किए जाने की भी सूचना है, जिसमें 50 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए।

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, घायल पुलिसकर्मियों में 10 से अधिक भारतीय पुलिस सेवा (IPS) तथा दिल्ली, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा (DANIPS) के अधिकारी भी शामिल हैं। सभी घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। पुलिस का कहना है कि घायलों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई कर्मियों का इलाज अभी जारी है। दूसरी ओर, झड़पों में कई प्रदर्शनकारी भी घायल हुए हैं।
DELHI PARLIAMENT MARCH VIOLENCE
शाम करीब चार बजे सुरक्षा बलों ने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को समाप्त कराने के लिए कार्रवाई की। प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए टेंट हटाए गए और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया गया। इसके बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।
इस बीच CJP के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। बैठक के बाद जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन और अनशन समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज सुबह पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार से बातचीत का प्रस्ताव आया और सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा हुई। हालांकि CJP ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
CJP की तीन प्रमुख मांगें
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।
- सोनम वांगचुक को रिहा किया जाए तथा उनके आने-जाने पर किसी प्रकार की रोक न लगाई जाए।
- नीट पेपर लीक से आहत होकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
फिलहाल CJP की इन मांगों पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं पुलिस ने हिंसा, पथराव और कानून-व्यवस्था भंग करने की घटनाओं की जांच शुरू कर दी है।

