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Digital Reforms in India: भारत में डिजिटल सुधारों से MSME ने व्यापारिक माहौल को सुधारने के लिए उठाए गए कदम!

Digital Reforms in India
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नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के एक हालिया वर्किंग पेपर ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सार्वजनिक प्रशासन को डिजिटल बनाने की पहलों ने छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को नई ताकत दी है और उनकी उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की है।(Digital Reforms in India)

डिजिटलीकरण ने उद्यमों की उत्पादकता को कैसे प्रभावित किया?
राष्ट्रीय सर्वेक्षण डेटा (वर्ष 2010 से 2015 के बीच) पर आधारित इस वर्किंग पेपर के अनुसार, जिन राज्यों ने सार्वजनिक प्रशासन के डिजिटलीकरण में तेजी दिखाई है, वहां सूक्ष्म उद्यमों की उत्पादकता में काफी सुधार हुआ है। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि डिजिटल सुधारों को अधिक मात्रा में अपनाने वाले राज्यों ने न केवल उच्च उत्पादकता वृद्धि का अनुभव किया है, बल्कि वहां काम कर रही कंपनियों के बीच उत्पादकता का अंतर भी काफी कम हुआ है।

व्यापारिक माहौल को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए थे?
यह उत्पादकता वृद्धि कोई अचानक हुआ बदलाव नहीं है, बल्कि यह भारत में व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाने के व्यापक प्रयासों का परिणाम है। साल 2014 में विभिन्न राज्यों ने एक ’98-प्वाइंट एक्शन प्लान’ पर सहमति व्यक्त की थी। इस कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी नियमों को सरल बनाना और डिजिटल प्रणालियों का तेजी से विस्तार करना था, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं।

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डिजिटल सिस्टम से छोटे कारोबारियों को क्या सीधा लाभ हुआ?
आइएमएफ की रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटलीकरण ने उद्यमियों पर से प्रशासनिक बोझ को काफी हद तक कम कर दिया है। इसका सबसे अधिक और सीधा लाभ छोटे व्यवसायों को मिला है, जिनके पास बड़े कॉरपोरेट्स की तरह संसाधन नहीं होते। डिजिटल प्रणालियों के लागू होने से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आई है और लालफीताशाही या देरी में भारी कमी आई है। रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि व्यापारिक माहौल में सुधारों का दायरा जितना बड़ा होगा, कुल कारक उत्पादकता में उतना ही अधिक लाभ देखने को मिलेगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था में इन छोटे उद्यमों की क्या अहमियत है?
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। देश के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में इनकी बेहद महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। आंकड़े बताते हैं कि देश के कुल विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र में इस सेक्टर का अकेले 35 प्रतिशत योगदान है। ऐसे में छोटे उद्यमों का डिजिटल रूप से सशक्त होना और उनकी उत्पादकता बढ़ना, पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई गति प्रदान करने वाला कदम है।

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