कोलकाता | प्रतिनिधि
अंतर्राष्ट्रीय संस्था रचनाकार भारत फाउंडेशन द्वारा आयोजित भाषण प्रतियोगिता श्रृंखला की तीसरी कड़ी रविवार को कोलकाता में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। प्रतियोगिता का विषय “21वीं सदी में प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता” रखा गया, जिसमें विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम की शुरुआत संस्था की अध्यक्ष रचना सरन के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने प्रतिभागियों, निर्णायकों और उपस्थित श्रोताओं का स्वागत करते हुए प्रतियोगिता के उद्देश्य एवं मूल्यांकन के मानदंडों की जानकारी दी।

कार्यक्रम का संयुक्त संचालन संस्था के मीडिया प्रभारी सुरेंद्र सिंह एवं शिक्षिका प्रिया श्रीवास्तव ने किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में ब्रजेश कुमार त्रिपाठी (रेलवे अधिकारी), विवेक लाल (शिक्षक), डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी (व्याख्याता एवं शिक्षाविद), प्रिया श्रीवास्तव (कवयित्री) तथा रचना सरन शामिल रहीं।

प्रतियोगिता के समापन पर निर्णायकों ने प्रेमचंद के साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए। डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का विश्लेषण करते हुए उनकी खूबियों और सुधार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने वर्तमान समय में प्रेमचंद के साहित्य की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि विवेक लाल ने ऐसे साहित्यिक आयोजनों के महत्व को रेखांकित किया। नुपुर श्रीवास्तव ने भी विषय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
प्रतियोगिता में रानी कुमारी महतो ने प्रथम, सुमन कुमारी राम ने द्वितीय और वर्षा सिंह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
कार्यक्रम के विशेष अतिथि युगांडा से आए विश्व प्रसिद्ध कवि एवं रचनाकार भारत फाउंडेशन के विदेश विभाग के प्रभारी अजय गोयल रहे। संस्था के संस्थापक सभापति सुरेश चौधरी एवं अन्य सदस्यों ने उनका मुक्ताहार, स्मृति-चिह्न और दुपट्टा भेंट कर सम्मान किया। अजय गोयल ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए, जबकि सभी प्रतिभागियों को स्मृति-चिह्न और सहभागिता प्रमाणपत्र दिए गए। कार्यक्रम के अंत में अजय गोयल ने अपने मधुर गीतों की प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों का मनोरंजन किया।
संस्था ने बताया कि यह भाषण प्रतियोगिता प्रत्येक माह आयोजित की जाती है और इसमें 16 वर्ष से अधिक आयु के विद्यार्थी भाग ले सकते हैं। पूरे आयोजन का संयोजन विनोद यादव ने किया, जिसकी उपस्थित जनों ने सराहना की।

