Category: Maharashtra

  • RTO & Traffic Cops Accused of Backing Illegal Truck Activity: ट्रैफिक पुलिस और RTO की मिलीभगत से चल रहा अवैध लोडिंग-अनलोडिंग का खेल,मुंबई में नियमों की उड़ रही धज्जियाँ

    मुंबई में नियमों की उड़ रही धज्जियाँ: ट्रैफिक पुलिस और RTO की मिलीभगत से चल रहा अवैध लोडिंग-अनलोडिंग का खेल?

    मुंबई | ग्रांट रोड पूर्व (डी.बी. मार्ग) — देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई में कानून का मज़ाक किस हद तक उड़ाया जा रहा है, इसका ताज़ा उदाहरण ग्रांट रोड (पूर्व) स्थित डी.बी. मार्ग पर देखा जा सकता है, जहाँ BVC Logistic की 9 से 10 भारी वाहन (हैवी व्हीकल्स) रोज़ाना खुलेआम खड़े रहते हैं और लोडिंग-अनलोडिंग करते हैं।

    समाजसेवक विक्रम कांबले का कहना है कि वे 2022 से लगातार पुलिस और RTO अधिकारियों को शिकायत दे रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल झूठे आश्वासन और औपचारिक जवाब ही मिलते हैं।

    “फाइन मार दिया” – क्या ये नया लाइसेंस बन गया है नियम तोड़ने का?

    मुंबई ट्रैफिक पुलिस अक्सर यही जवाब देती है — “हमने जुर्माना लगा दिया है।”
    पर सवाल उठता है कि क्या जुर्माना भरना अब ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की वैध अनुमति बन चुका है?

    एक नागरिक ने पूछा:

    “अगर सुबह 7 से रात 10 बजे तक भारी वाहनों को लोडिंग-अनलोडिंग की अनुमति नहीं है, तो ये वाहन पूरे दिन सड़क पर क्यों खड़े रहते हैं? क्या यह सीधा भ्रष्टाचार नहीं है?”

    सूचना के अधिकार (RTI) ने खोली पोल:

    वरळी पुलिस स्टेशन द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दी गई जानकारी के अनुसार:

    “सुबह 7 से रात 10 बजे तक भारी वाहनों को लोडिंग-अनलोडिंग की अनुमति नहीं है।”

    फिर भी, वास्तविकता में BVC Logistic के वाहन इस नियम की खुलेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।

    RTO और पुलिस की चुप्पी पर सवाल:

    • क्या RTO और ट्रैफिक विभाग की मिलीभगत से यह पूरा सिस्टम चल रहा है?
    • क्या जुर्माने के नाम पर केवल औपचारिकता निभाकर बड़े लॉजिस्टिक नेटवर्क को ‘फ्री पास’ दिया जा रहा है?

    सार्वजनिक सुरक्षा से खिलवाड़:

    न केवल यह नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भारी वाहनों की यह अवैध पार्किंग पैदल यात्रियों, स्कूली बच्चों और अन्य वाहनों की आवाजाही में भी बाधा बन रही है।

    जनता की माँग:

    विक्रम कांबले और स्थानीय नागरिकों की माँग है:

    • इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए।
    • ट्रैफिक पुलिस और RTO अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
    • संबंधित कंपनी पर सख्त कार्रवाई की जाए।

    क्या मुंबई प्रशासन जागेगा? या फिर यह ‘फाइन’ सिस्टम भ्रष्टाचार की नई चाभी बना रहेगा?

  • डोंबिवली को गर्व: पवन भोईर को ‘द्रोणाचार्य’, राही पाखले और आदर्श भोईर को ‘शिवछत्रपती’ पुरस्कार

    कल्याण/डोंबिवली: महाराष्ट्र राज्य के खेल क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान ‘शिवछत्रपती पुरस्कार’ और ‘द्रोणाचार्य पुरस्कार’इस वर्ष डोंबिवली के नाम रहा। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने पूरे शहर को गर्व से भर दिया है। डोंबिवली के तीन होनहारों ने राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर यह सम्मान अर्जित किया है। इनका सम्मान भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और डोंबिवली के विधायक रविंद्र चव्हाण ने किया, जिन्होंने इसे “डोंबिवली का गौरवमयी क्षण” बताया।

    समर्पण का प्रतीक: पवन मुकुंद भोईर को ‘द्रोणाचार्य पुरस्कार’
    भोईर जिमखाना के संस्थापक और विख्यात जिम्नास्टिक कोच पवन मुकुंद भोईर को जिम्नास्टिक में उनके वर्षों के समर्पण और उत्कृष्ट कोचिंग के लिए ‘द्रोणाचार्य पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा रहा है। यह सम्मान उन प्रशिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने खिलाड़ियों के जीवन में परिवर्तन लाने और उन्हें राज्य व राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई हो।

    होनहार शिष्य: राही पाखले और आदर्श भोईर को ‘शिवछत्रपती पुरस्कार’
    पवन भोईर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षित दो युवा जिमनास्ट — राही नितीन पाखले और आदर्श अनिल भोईर — को ‘शिवछत्रपती पुरस्कार’ के लिए चुना गया है। ये दोनों खिलाड़ी जिम्नास्टिक के ट्रॅम्पोलीन इवेंट में अपने शानदार प्रदर्शन के लिए यह सम्मान प्राप्त करेंगे।

    यह पुरस्कार वितरण समारोह 18 अप्रैल को पुणे के म्हाळुंगे-बालेवाडी क्रीड़ा संकुल में आयोजित होगा, जहाँ माननीय राज्यपाल के करकमलों से पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

    सम्मान और भावना से भरा क्षण
    इस गौरवपूर्ण क्षण को और खास बनाते हुए रविंद्र चव्हाण स्वयं पवन भोईर के निवास स्थान पहुँचे और उन्हें तथा उनके शिष्यों को बधाई दी। उन्होंने कहा, “यह केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि डोंबिवली की खेल संस्कृति की जीत है। यह हमारे संस्कारों की पहचान है।” चव्हाण ने भावुक होते हुए स्वर्गीय सुरेंद्र वाजपेयी सर को भी याद किया, जिन्होंने डोंबिवली में खेल संस्कृति की नींव रखी थी। उन्होंने कहा, “वाजपेयी सर ने सपना देखा था कि हमारे समाज से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकलें। आज पवन भोईर और उनके शिष्य उस सपने को साकार कर रहे हैं।”
    पुरस्कार से सम्मानित हो रहे तीनों प्रतिभागियों के परिवारों ने इसे “भावुक और अविस्मरणीय क्षण” बताया। वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण का फल अब मिल रहा है। राही पाखले और आदर्श भोईर जैसे युवा खिलाड़ियों के लिए यह पुरस्कार सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक नई प्रेरणा का स्रोत है।

    “माझे डोंबिवलीकर, माझा अभिमान!”
    अंत में विधायक चव्हाण ने अपने अभिवादन में गर्व से दोहराया कि “माझे डोंबिवलीकर, माझा अभिमान!”, उन्होंने सरकार और समाज से अपील की कि वे ऐसे होनहार खिलाड़ियों के पीछे मजबूती से खड़े रहें। यह सम्मान सिर्फ तीन व्यक्तियों का नहीं, बल्कि पूरे डोंबिवली का है कि एक ऐसा शहर जहाँ खेल सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक संस्कार है।

  • ₹3.38 लाख की बिजली चोरी का पर्दाफाश

    भिवंडी: भिवंडी शहर के पास कारिवली ग्राम पंचायत क्षेत्र में टोरेंट पावर कंपनी ने सवा तीन लाख रुपये की बिजली चोरी का मामला उजागर किया है। यह बिजली वितरण एवं वसूली का कार्य संभाल रही कंपनी है।

    जांच के दौरान सामने आया कि हनुमान मंदिर के पास स्थित विश्वनाथ जगन्नाथ पाटील ने अपने घर के पास से गुजर रही टोरेंट पावर की केबल से अवैध रूप से एक साल तक कनेक्शन जोड़कर बिजली का उपयोग किया। उन्होंने बिना बिजली मीटर के सीधे केबल जोड़कर 10329 यूनिट बिजली की खपत की, जिसकी कुल अनुमानित कीमत ₹3,37,974 बताई गई है। इस गंभीर अनियमितता के बाद शांतिनगर पुलिस स्टेशन में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आगे की जांच कर रही है।

  • “Congress: An Idea That Still Lives and Breathes”: “कांग्रेस एक विचार जो आज भी धड़कता है”: अतीत की महाशक्ति, वर्तमान की चुनौती

    “जो पार्टी कभी देश की पहचान थी, वह आज खुद को पहचानने की जद्दोजहद में है।”

    अश्विनी कुमार दुबे। राष्ट्रीय स्वाभिमान

    नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress – INC), देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी, आज गहरे आत्ममंथन के दौर से गुजर रही है। वह पार्टी जिसने स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया, संविधान निर्माण में अहम भूमिका निभाई और आज़ादी के बाद दशकों तक सत्ता में रही — आज उसे देश की राजनीति में खुद के लिए जगह बनाने में संघर्ष करना पड़ रहा है।”यह केवल एक पार्टी नहीं, यह तो उस सपने का नाम है जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की हिम्मत की थी…”जब हम कांग्रेस का नाम लेते हैं, तो केवल एक राजनीतिक दल की छवि आंखों में नहीं उभरती है, वो स्वतंत्रता की पहली चीख, वो चर्खा, वो नमक सत्याग्रह, और वो तिरंगे की पहली लहराती हुई लकीर। कांग्रेस कोई दफ्तरों में बंद बैठा संगठन नहीं था; वह तो गाँव-गाँव, दिल-दिल में फैला एक आंदोलन था — एक जुनून, एक सपना, एक विचार।

    सत्ता की शिखर से नीचे तक
    भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी और यह जल्दी ही देश की आज़ादी की लड़ाई की धुरी बन गई। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं ने कांग्रेस को केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन बना दिया।

    आज़ादी के बाद, 1952 से लेकर 1989 तक, कांग्रेस ने अधिकांश समय केंद्र में सत्ता संभाली। यह पार्टी न केवल सरकार थी, बल्कि शासन की परिभाषा थी। इंदिरा गांधी की ताकतवर नेतृत्व शैली, राजीव गांधी की तकनीकी दृष्टि और नरसिम्हा राव के आर्थिक सुधार आज भी याद किए जाते हैं। लेकिन 1990 के दशक के बाद कांग्रेस का राजनीतिक प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगा। मंडल-कमंडल राजनीति, क्षेत्रीय दलों का उदय और अंततः भारतीय जनता पार्टी (BJP) का उभार कांग्रेस के लिए चुनौती बनते गए।

    वर्तमान संकट: नेतृत्व, रणनीति और संगठन की त्रासदी
    नेतृत्व की अस्पष्टता
    कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या उसका नेतृत्व बन चुका है। राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद छोड़ा, फिर भारत जोड़ो यात्रा निकाली, लेकिन उनके राजनीतिक दृष्टिकोण में स्थिरता का अभाव रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ता अभी भी असमंजस में हैं कि पार्टी का असली नेता कौन है — सोनिया गांधी, राहुल गांधी या फिर सिर्फ एक अंतरिम व्यवस्था?

    संगठन की जड़ता
    कांग्रेस पार्टी में लंबे समय से कोई गंभीर संगठनात्मक चुनाव नहीं हुए। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता असंगठित हैं, बूथ स्तर पर मौजूदगी कमजोर हो गई है, और नेताओं के बीच गुटबाजी आम हो चुकी है। कई राज्यों में पार्टी के पास कोई मज़बूत चेहरा ही नहीं है।

    राजनीतिक रणनीति का अभाव
    बीजेपी जहां आक्रामक प्रचार, सोशल मीडिया और जातीय समीकरणों का खुलकर इस्तेमाल करती है, वहीं कांग्रेस अब भी पारंपरिक राजनीति में उलझी हुई दिखाई देती है। चुनावी घोषणापत्र तो आते हैं, लेकिन उन्हें जनता तक ले जाने का तंत्र विफल है।

    राज्यों में स्थिति: कुछ उम्मीदें, पर ज़्यादा निराशा
    कई राज्यों में कांग्रेस को सत्ता में आने का अवसर मिला, जैसे राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश। लेकिन इन राज्यों में भी गुटबाजी और नेतृत्व संघर्ष ने पार्टी की छवि को धूमिल किया है। पंजाब में आम आदमी पार्टी का उदय और मध्य प्रदेश में सिंधिया जैसे नेताओं के बाहर जाने से नुकसान हुआ।

    कुछ सकारात्मक बातें भी हैं — छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने लोकप्रियता हासिल की है। लेकिन ये अपवाद हैं, नियम नहीं।

    क्षेत्रीय दलों की मार और गठबंधन की राजनीति
    एक समय था जब कांग्रेस देशभर में सर्वव्यापी थी। लेकिन आज उसके पारंपरिक वोट बैंक पर क्षेत्रीय दलों का कब्जा हो चुका है। यूपी में समाजवादी पार्टी और बसपा, बिहार में राजद-नीतीश, बंगाल में तृणमूल, दक्षिण में डीएमके और टीआरएस जैसे दल कांग्रेस के विकल्प बन चुके हैं।

    गठबंधन की राजनीति में कांग्रेस अब “बड़ा भाई” नहीं रही। विपक्षी एकता की बात होती है तो कांग्रेस को बराबरी का दर्जा देना बाकी दलों को मुश्किल लगता है। ‘INDIA’ गठबंधन एक पहल थी, लेकिन उसमें भी आपसी समन्वय की कमी दिखी।

    भारत जोड़ो यात्रा: एक नई उम्मीद?
    2022 में राहुल गांधी द्वारा शुरू की गई भारत जोड़ो यात्रा ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा फूंकी। यह यात्रा सामाजिक मुद्दों, आर्थिक असमानता और सांप्रदायिकता के खिलाफ एक संदेश लेकर चली। कई जगहों पर इसे जनता का समर्थन भी मिला। लेकिन यह यात्रा एक आंदोलन के रूप में थी, न कि चुनावी हथियार।

    जब तक इस ऊर्जा को चुनावी रणनीति और संगठनात्मक बदलाव में नहीं बदला जाएगा, तब तक सिर्फ यात्राओं से बदलाव संभव नहीं।

    क्या पुनरुत्थान संभव है?
    बिलकुल, लेकिन इसके लिए कांग्रेस को नीचे दिए गए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे:

    नया और स्पष्ट नेतृत्व:
    कांग्रेस को तय करना होगा कि नेतृत्व किसके हाथ में होगा, और वह व्यक्ति न केवल पार्टी के भीतर, बल्कि जनता के बीच भी विश्वसनीय और प्रभावशाली हो।
    संगठन का पुनर्गठन:
    जमीनी कार्यकर्ताओं को फिर से जोड़ने, बूथ स्तर पर मज़बूती और युवा नेतृत्व को बढ़ावा देना जरूरी है।

    स्पष्ट वैकल्पिक एजेंडा:
    सिर्फ बीजेपी का विरोध करने से कुछ नहीं होगा। कांग्रेस को एक ठोस नीति, विज़न और योजनाओं के साथ सामने आना होगा — शिक्षा, रोजगार, महंगाई, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर।

    डिजिटल युग की राजनीति:
    सोशल मीडिया, डिजिटल कैंपेन, डेटा एनालिटिक्स जैसे आधुनिक चुनावी टूल्स को अपनाना होगा। 21वीं सदी की राजनीति 20वीं सदी के तरीकों से नहीं जीती जा सकती।

    गांधी का सत्य, नेहरू का स्वप्न
    कांग्रेस की आत्मा को समझने के लिए इतिहास की किताबें नहीं, देश के ज़ख्मों को पढ़ना होता है।
    गांधी जी जब चंपारण के खेतों में पहुंचे, तो उनके साथ एक पूरी सोच आई — सत्याग्रह की।
    नेहरू जब लाल किले से बोले, तो केवल भाषण नहीं दिया, आज़ाद भारत की आत्मा को स्वर दिया।

    आज भी जब हम ‘भारत’ कहते हैं, उसमें कांग्रेस का सपना गूंजता है।

    संघर्षों की वो गाथा जो मिट नहीं सकती
    कांग्रेस ने सिर्फ सत्ता में रहना नहीं सीखा — इसने जेलों की दीवारें देखीं, गोली खाई, जूते घिसे, और फिर भी मुस्कराते हुए कहा “देश सबसे पहले है।” आज भले ही टीवी डिबेट में कांग्रेस को ‘खत्म होती पार्टी’ कहा जाए, लेकिन सच यह है कि जो पार्टी 130 करोड़ लोगों की भावनाओं से कभी जुड़ी थी.

    वह एक चुनाव में हारी हुई हो सकती है — पर मिट नहीं सकती

    आज की हालत: धुंधला होता आदर्श, लेकिन बुझा हुआ दीप नहीं है। आज कांग्रेस एक आत्ममंथन के दौर से गुजर रही है।
    कभी-कभी लगता है कि पार्टी अपने ही बनाए उस आईने को पहचान नहीं पा रही, जिसमें खुद का अक्स सबसे सुंदर था।
    नेतृत्व असमंजस में है, कार्यकर्ता हतोत्साहित हैं, और जनता का भरोसा डगमगाया है। मगर जब-जब इस पार्टी ने खुद को भीतर से झांका है, तब-तब नए सवेरे ने दस्तक दी है।

    भारत जोड़ो यात्रा: एक कविता, एक पुकार
    राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं थी — वह तो दिल से दिल को जोड़ने की कवायद थी।
    वो पाँव जो कन्याकुमारी से कश्मीर तक चले, वो सड़कें जिन्होंने देश की धड़कनों को महसूस किया — वहां केवल नारे नहीं लगे, वहां लोगों की कहानियाँ सुनी गईं।

    क्या यही वह राह है जिससे कांग्रेस फिर अपने मूल विचार — “सेवा, समर्पण और समभाव” की ओर लौट सकती है?

    कांग्रेस: एक बीज जो हर पीढ़ी में उगता है
    भले ही आज यह बीज धूप से झुलसा हो,
    भले ही इस पर शक के बादल हों,
    मगर यह बीज मिट्टी में गहराई से गड़ा हुआ है।

    हर वो युवा जो संविधान पढ़ता है,
    हर वो बच्चा जो “आजादी” शब्द बोलता है,
    हर वो औरत जो अपने अधिकारों के लिए लड़ती है —
    वो कांग्रेस की ही कहानियों का कोई ना कोई अध्याय है।

    निष्कर्ष: कांग्रेस एक पार्टी नहीं, एक प्रतीक है
    इस दौर में जब राजनीति केवल सत्ता की कुर्सी बन गई है,
    कांग्रेस अब भी उस आदर्श की तलाश में है,
    जहां राजनीति का मतलब था — “जनसेवा”,
    ना कि “जनमत प्रबंधन”।

    कांग्रेस को फिर से सिर्फ वोट पाने वाली पार्टी नहीं, विचार रचने वाली संस्था बनना होगा। यह काम सिर्फ जमीनी स्तर से लेकर ऊपर तक के संगठन को करना होगा बिना किसी भेद-भाव और गुटबाजी के।

  • Grand Hanuman Jayanti Procession Held in Nalasopara: हनुमान जन्मोत्सव पर भव्य शोभायात्रा का आयोजन

    स्थानीय पुलिस प्रशासन और नागरिकों का विशेष सहयोग

  • कामन में हनुमान जन्मोत्सव पर भव्य शोभायात्रा एवं कवि सम्मेलन सम्पन्न

    कामन में हनुमान जन्मोत्सव पर भव्य शोभायात्रा एवं कवि सम्मेलन सम्पन्न

    वसई पूर्व: हनुमान जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर वसई पूर्व के कामन क्षेत्र में एक भव्य शोभायात्रा तथा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। रविवार प्रातः 11:00 बजे, कोल्ही गांव स्थित गांवदेवी मंदिर से भगवा ध्वज थामे रामभक्तों की विशाल जनसमूह यात्रा प्रारंभ हुई। भजन-कीर्तन और जयकारों के साथ यह यात्रा लगभग 7 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए कामन के श्रीराम मंदिर तक पहुंची।

    यात्रा के उपरांत श्री राम सेवा समिति की ओर से महाप्रसाद का आयोजन किया गया, जिसके बाद कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्री सदाशिव चतुर्वेदी ‘मधुर’ ने की तथा संचालन उमेश मिश्र ‘प्रभाकर’ ने किया।

    इस अवसर पर युवा ओज कवि राजेश ‘अल्हड़ असरदार’ के संयोजन में सुप्रसिद्ध कवियों—डाॅ. मृदुल ‘महक’, अन्नपूर्णा ‘सरगम’, तथा रामकृष्ण गुप्ता ने अपनी शानदार कविताओं से उपस्थित जनसमूह को रससिक्त किया।

    कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अतिथियों में:

    • दिनेश म्हात्रे
    • जीत सिंह
    • सुनील मिश्रा
    • बाला सकपाल
    • तथा श्रीराम सेवा समिति के अध्यक्ष श्री फूलचंद जी प्रजापति शामिल रहे।

    शोभायात्रा का आयोजन सकल हिंदू समाज के प्रमोद मिश्रा, अश्विन कुमार, शिवम यादव, विमलेश दुबे, दिनेश विश्वकर्मा, निलेश दुबे, बिपिन पांडे, आकाश हजारे, राहुल दुबे, निशांत भुसाले और रतन पटेल द्वारा किया गया।

    भीषण गर्मी के बावजूद, हजारों की संख्या में रामभक्त महिलाएं, पुरुष और बच्चे इस यात्रा में सम्मिलित हुए। यात्रा मार्ग पर जलपान व शरबत की व्यवस्था स्थानीय व्यापारियों और ग्रामवासियों द्वारा की गई थी। अंत में राजेश दुबे ने सभी सहयोगियों और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया।

  • भिवंडी मनपा द्वारा 100 दिवसीय कार्य योजना के तहत निवेश को बढ़ावा देने हेतु महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन

    भिवंडी: भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका के प्रशासक तथा आयुक्त अनमोल सागर की अध्यक्षता में दिनांक 8 अप्रैल 2025 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी 100 दिवसीय कार्य योजना कार्यक्रम के अंतर्गत, महानगरपालिका क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी।

    इस बैठक में भिवंडी क्षेत्र के औद्योगिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और निजी प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य था:

    • औद्योगिक नीति के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु अनुकूल वातावरण तैयार करना,
    • औद्योगिक विकास में आ रही वास्तविक समस्याओं पर चर्चा करना,
    • सीएसआर फंड के माध्यम से शहर के सौंदर्यीकरण में सहयोग लेना,
    • और ‘माझी भिवंडी, स्वच्छ भिवंडी’ अभियान को और प्रभावी बनाना।

    बैठक में कुल 52 संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभाग लिया। इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त ने बैठक की प्रस्तावना प्रस्तुत की, जबकि आयुक्त अनमोल सागर ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

    सभी प्रतिनिधियों ने अपनी ओर से सुधारों और अपेक्षाओं से संबंधित ज्ञापन प्रस्तुत किए, जिनका आयुक्त ने उत्तर देकर समाधान का आश्वासन दिया। साथ ही, उन्होंने यह भी अपेक्षा जताई कि शहर के विकास में सभी प्रतिनिधि मिलकर सहयोग करें।

    बैठक में मंच पर उपस्थित अधिकारीगण:

    • अतिरिक्त आयुक्त (1): देविदास पवार
    • अतिरिक्त आयुक्त (2): विठ्ठल डाके
    • उपायुक्त (मुख्यालय): रोहिदास दोरकुळकर
    • उपायुक्त (समाज कल्याण): विक्रम दराडे
    • सहायक आयुक्त (स्वास्थ्य): शैलेश दोंदे
    • सहायक आयुक्त (प्रशासन): डॉ. अनुराधा बाबर
    • समाज कल्याण विभाग प्रमुख: नितेश चौधरी
    • अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

  • भिवंडी मनपा द्वारा 100 दिवसीय कार्य योजना के तहत निवेश को बढ़ावा देने हेतु महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन

    भिवंडी: भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका के प्रशासक तथा आयुक्त अनमोल सागर की अध्यक्षता में दिनांक 8 अप्रैल 2025 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी 100 दिवसीय कार्य योजना कार्यक्रम के अंतर्गत, महानगरपालिका क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी। इस बैठक में भिवंडी क्षेत्र के औद्योगिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और निजी प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य औद्योगिक नीति के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु अनुकूल वातावरण तैयार करना, औद्योगिक विकास में आ रही वास्तविक समस्याओं पर चर्चा करना, सीएसआर फंड के माध्यम से शहर के सौंदर्यीकरण में सहयोग लेना, और ‘माझी भिवंडी, स्वच्छ भिवंडी’ अभियान को और प्रभावी बनाना।

    बैठक में कुल 52 संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभाग लिया। इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त ने बैठक की प्रस्तावना प्रस्तुत की, जबकि आयुक्त अनमोल सागर ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। सभी प्रतिनिधियों ने अपनी ओर से सुधारों और अपेक्षाओं से संबंधित ज्ञापन प्रस्तुत किए, जिनका आयुक्त ने उत्तर देकर समाधान का आश्वासन दिया। साथ ही, उन्होंने यह भी अपेक्षा जताई कि शहर के विकास में सभी प्रतिनिधि मिलकर सहयोग करें। बैठक में मंच पर अतिरिक्त आयुक्त (1): देविदास पवार, अतिरिक्त आयुक्त (2): विठ्ठल डाके, उपायुक्त (मुख्यालय): रोहिदास दोरकुळकर, उपायुक्त (समाज कल्याण): विक्रम दराडे, सहायक आयुक्त (स्वास्थ्य): शैलेश दोंदे, सहायक आयुक्त (प्रशासन): डॉ. अनुराधा बाबर, समाज कल्याण विभाग प्रमुख: नितेश चौधरी और अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

  • created a stir by waving naked swords:भिवंडी में आंबेडकर जयंती के दौरान युवक ने नंगी तलवारें लहराकर मचाया हड़कंप, मामला दर्ज

    भिवंडी: भिवंडी के पास खोणी ग्राम पंचायत क्षेत्र में भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती के उत्सव के दौरान एक युवक द्वारा नंगी तलवारें लहराकर आतंक फैलाने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। आरोपी की पहचान देविदास बालाराम पाटील के रूप में हुई है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सिद्धार्थनगर बस्ती, खोणी गांव में रविवार रात आंबेडकर जयंती के सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया गया था। लगभग सौ से अधिक महिला-पुरुष ऑर्केस्ट्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जश्न मना रहे थे। कार्यक्रम की वजह से कुछ समय के लिए सड़क बंद की गई थी।इसी दौरान बाइक से पहुंचे देविदास पाटील ने सड़क बंद होने पर जातिसूचक गालियां देते हुए हंगामा शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद वह अपने घर से दो नंगी तलवारें लेकर मौके पर लौटा और तलवारें लहराकर लोगों पर हमला करने की कोशिश की। इससे कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।

    हालांकि, समय रहते गांव के युवक सागर पाटील ने साहस दिखाते हुए देविदास से तलवारें छीन लीं और स्थिति को काबू में किया। इस संबंध में स्थानीय निवासी बालाराम जाधव की शिकायत पर निजामपुर पुलिस थाने में देविदास पाटील के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, दहशत फैलाने और अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। आंबेडकरवादी समाज और सामाजिक संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।

  • भिवंडीकरों के लिए खुशखबरी! अब एक QR कोड से मिलेंगी कई सरकारी सेवाएं


    भिवंडी: भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका ने नागरिक सेवाओं को और अधिक आसान व पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब शहर के नागरिक एक साझा QR कोड को स्कैन कर कर भुगतान, शिकायत पंजीकरण, और 70 से अधिक सरकारी सेवाओं का लाभ घर बैठे उठा सकेंगे। महानगरपालिका के प्रशासक एवं आयुक्त अनमोल सागर द्वारा वर्ष 2025-26 के बजट में पारदर्शी और तेज प्रशासन का आश्वासन दिया गया था। उसी के अंतर्गत यह QR कोड सेवा शुरू की गई है।

    क्या-क्या होगा संभव एक QR कोड से?

    घर बैठे कर भरना
    सेवा हमी कानून के अंतर्गत 70 से अधिक सेवाओं के लिए आवेदन
    ऑनलाइन शिकायत पंजीकरण और स्थिति की ट्रैकिंग

    शिकायत किस कार्यालय में लंबित है, यह जानकारी भी मिलेगी और QR कोड स्कैन करते ही नागरिकों को एक बार पंजीकरण करना होगा, जिसके बाद वे कभी भी सेवाओं का लाभ ले सकते हैं। अगर कोई शिकायत 7 दिनों में हल नहीं होती, तो वह स्वतः उच्च अधिकारी को भेज दी जाएगी। यह QR कोड स्टिकर जल्द ही महानगरपालिका के सभी कार्यालयों के बाहर लगाए जाएंगे, ताकि हर नागरिक को यह सुविधा सरलता से उपलब्ध हो सके।

    समीक्षा और जवाबदेही
    आयुक्त हर सप्ताह शिकायतों की समीक्षा करेंगे। जिन अधिकारियों के पास 1 महीने से ज्यादा शिकायतें लंबित रहेंगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त (1) देविदास पवार, अतिरिक्त आयुक्त (2) विट्ठल डाके, उपायुक्त रोहिदास दोरकुळकर, विक्रम दराडे, बाळकृष्ण क्षिरसागर, डॉ. अनुराधा बाबर, शैलेश दोंदे, और अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे। आयुक्त अनमोल सागर ने शहरवासियों से इस डिजिटल सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। अब सरकारी सेवाएं होंगी सिर्फ एक स्कैन की दूरी पर!