RTO & Traffic Cops Accused of Backing Illegal Truck Activity: ट्रैफिक पुलिस और RTO की मिलीभगत से चल रहा अवैध लोडिंग-अनलोडिंग का खेल,मुंबई में नियमों की उड़ रही धज्जियाँ

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मुंबई में नियमों की उड़ रही धज्जियाँ: ट्रैफिक पुलिस और RTO की मिलीभगत से चल रहा अवैध लोडिंग-अनलोडिंग का खेल?

मुंबई | ग्रांट रोड पूर्व (डी.बी. मार्ग) — देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई में कानून का मज़ाक किस हद तक उड़ाया जा रहा है, इसका ताज़ा उदाहरण ग्रांट रोड (पूर्व) स्थित डी.बी. मार्ग पर देखा जा सकता है, जहाँ BVC Logistic की 9 से 10 भारी वाहन (हैवी व्हीकल्स) रोज़ाना खुलेआम खड़े रहते हैं और लोडिंग-अनलोडिंग करते हैं।

समाजसेवक विक्रम कांबले का कहना है कि वे 2022 से लगातार पुलिस और RTO अधिकारियों को शिकायत दे रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल झूठे आश्वासन और औपचारिक जवाब ही मिलते हैं।

“फाइन मार दिया” – क्या ये नया लाइसेंस बन गया है नियम तोड़ने का?

मुंबई ट्रैफिक पुलिस अक्सर यही जवाब देती है — “हमने जुर्माना लगा दिया है।”
पर सवाल उठता है कि क्या जुर्माना भरना अब ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की वैध अनुमति बन चुका है?

एक नागरिक ने पूछा:

“अगर सुबह 7 से रात 10 बजे तक भारी वाहनों को लोडिंग-अनलोडिंग की अनुमति नहीं है, तो ये वाहन पूरे दिन सड़क पर क्यों खड़े रहते हैं? क्या यह सीधा भ्रष्टाचार नहीं है?”

सूचना के अधिकार (RTI) ने खोली पोल:

वरळी पुलिस स्टेशन द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दी गई जानकारी के अनुसार:

“सुबह 7 से रात 10 बजे तक भारी वाहनों को लोडिंग-अनलोडिंग की अनुमति नहीं है।”

फिर भी, वास्तविकता में BVC Logistic के वाहन इस नियम की खुलेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।

RTO और पुलिस की चुप्पी पर सवाल:

  • क्या RTO और ट्रैफिक विभाग की मिलीभगत से यह पूरा सिस्टम चल रहा है?
  • क्या जुर्माने के नाम पर केवल औपचारिकता निभाकर बड़े लॉजिस्टिक नेटवर्क को ‘फ्री पास’ दिया जा रहा है?

सार्वजनिक सुरक्षा से खिलवाड़:

न केवल यह नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भारी वाहनों की यह अवैध पार्किंग पैदल यात्रियों, स्कूली बच्चों और अन्य वाहनों की आवाजाही में भी बाधा बन रही है।

जनता की माँग:

विक्रम कांबले और स्थानीय नागरिकों की माँग है:

  • इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए।
  • ट्रैफिक पुलिस और RTO अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
  • संबंधित कंपनी पर सख्त कार्रवाई की जाए।

क्या मुंबई प्रशासन जागेगा? या फिर यह ‘फाइन’ सिस्टम भ्रष्टाचार की नई चाभी बना रहेगा?

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