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  • University of Bristol के साथ महाराष्ट्र सरकार का समझौता, मेधावी छात्रों को मिलेगी 100% ट्यूशन फीस माफी

    University of Bristol के साथ महाराष्ट्र सरकार का समझौता, मेधावी छात्रों को मिलेगी 100% ट्यूशन फीस माफी

    मुंबई। महाराष्ट्र सरकार और University of Bristol मुंबई कैंपस प्राइवेट लिमिटेड के बीच विधान भवन में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल का उद्देश्य राज्य के प्रतिभाशाली और जरूरतमंद छात्रों को विश्व स्तरीय उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।

    यह समझौता मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री Chandrakant Patil, अतिरिक्त मुख्य सचिव बी. वेणुगोपाल रेड्डी, ब्रिस्टल विश्वविद्यालय की कुलपति एवं अध्यक्ष प्रो. एवलिन वेल्च, मुख्य परिचालन अधिकारी लुसिंडा पार, निदेशक जूलिया हॉल और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अश्विन दमेरा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


    मुख्यमंत्री का वक्तव्य

    मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने कहा कि ब्रिस्टल विश्वविद्यालय जैसे विश्व प्रसिद्ध संस्थान के साथ साझेदारी करना महाराष्ट्र के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि सरकार और शिक्षा जगत के सहयोग से राज्य के छात्रों के लिए उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है।


    ‘मुख्यमंत्री–ब्रिस्टल विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति योजना’

    समझौते के तहत एक संयुक्त छात्रवृत्ति योजना विकसित की जाएगी, जिसका नाम होगा — ‘मुख्यमंत्री और ब्रिस्टल विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति योजना’।

    योजना की प्रमुख विशेषताएं:

    ✔ सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित लेकिन मेधावी छात्रों को प्राथमिकता
    ✔ चयनित छात्रों की पूरी डिग्री अवधि तक 100% ट्यूशन फीस माफ
    ✔ छात्रवृत्ति का संपूर्ण खर्च ब्रिस्टल विश्वविद्यालय, मुंबई परिसर द्वारा वहन

    इस पहल से महाराष्ट्र के उन छात्रों को बड़ा लाभ मिलेगा, जो आर्थिक बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।

  • Right of Children to Free and Compulsory Education Act में बड़ा बदलाव: नासिक में अब 10 स्कूल चुन सकेंगे अभिभावक

    Right of Children to Free and Compulsory Education Act में बड़ा बदलाव: नासिक में अब 10 स्कूल चुन सकेंगे अभिभावक

    नासिक। शिक्षा के अधिकार कानून यानी Right of Children to Free and Compulsory Education Act (आरटीई) के तहत इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार अब अभिभावक ऑनलाइन आवेदन करते समय अधिकतम 10 स्कूलों का चयन कर सकेंगे।

    घर के पास स्कूल को प्राथमिकता

    नई व्यवस्था के तहत आवेदन पोर्टल पर आवेदक के पते से एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य छात्रों को उनके घर के नजदीक स्कूल में प्रवेश दिलाना और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।

    शिक्षा विभाग ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे केवल एक स्कूल पर निर्भर न रहें, बल्कि अधिक विकल्प चुनें ताकि चयन की संभावना बढ़ सके।


    सीटें और स्कूलों की स्थिति

    • पिछले वर्ष पंजीकृत स्कूल: 410
    • इस वर्ष पंजीकृत स्कूल: 393
    • कुल उपलब्ध सीटें: 5,622
    • लगभग 17 स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया बंद
    • पिछले वर्ष शून्य प्रवेश वाले 15 स्कूल प्रशासन की निगरानी में

    प्रवेश के मुख्य मानदंड

    ✔ विद्यार्थी आर्थिक रूप से दुर्बल वर्ग (EWS) या वंचित घटक से होना चाहिए।
    ✔ परिवार की वार्षिक आय निर्धारित सीमा के भीतर हो।
    ✔ निवास प्रमाण पत्र (डोमिसाइल) और अन्य आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य।


    पूरी तरह ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली

    इस वर्ष चयन प्रक्रिया पूरी तरह कंप्यूटरीकृत और ऑनलाइन होगी, जिससे मानवीय हस्तक्षेप की संभावना समाप्त होगी। परिणाम घोषित होने के बाद चयनित अभिभावकों को एसएमएस के माध्यम से सूचना दी जाएगी।

    शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 25 प्रतिशत कोटे के तहत पात्र सभी स्कूलों को पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य रूप से कराना होगा, अन्यथा उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है।


    अभिभावकों को मिलने वाले लाभ

    🔹 अधिक विकल्प: एक साथ 10 स्कूलों के चयन की सुविधा।
    🔹 नजदीकी स्कूल: घर के पास प्रवेश मिलने की संभावना अधिक।
    🔹 धन की बचत: पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन, भागदौड़ से मुक्ति।
    🔹 पारदर्शिता: चयन प्रक्रिया और परिणाम पूरी तरह स्पष्ट।

  • Nashik Singhastha Kumbh:कुंभ से पहले प्रशासन की रफ्तार ढीली, साधु ग्राम को लेकर संतों ने छेड़ा संघर्ष

    Nashik Singhastha Kumbh:कुंभ से पहले प्रशासन की रफ्तार ढीली, साधु ग्राम को लेकर संतों ने छेड़ा संघर्ष

    नासिक। आगामी सिंहस्थ कुंभ (Nashik Singhastha Kumbh) मेला की आहट के साथ शहर में तैयारियां तेज होती नजर आ रही हैं। सड़कों के चौड़ीकरण, बिजली और पानी आपूर्ति से जुड़े बुनियादी ढांचे के कार्य कई हिस्सों में शुरू हो चुके हैं।

    लेकिन कुंभ मेले के मुख्य केंद्र तपोवन क्षेत्र स्थित साधु ग्राम में अब तक निर्माण कार्य शुरू न होने से साधु-संतों में भारी नाराजगी है।

    अखाड़ा परिषद ने उठाए सवाल

    अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रवक्ताओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब शहर के अन्य इलाकों में काम दिखाई दे रहा है, तो साधु ग्राम को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है?

    संतों ने स्पष्ट किया कि साधु ग्राम के लिए आरक्षित जमीन का अधिग्रहण करने से पहले संबंधित किसानों को तत्काल और उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए।


    प्रमुख मांगें

    1️⃣ मुआवजा:
    भूमि अधिग्रहण के बदले किसानों को तुरंत आर्थिक भुगतान।

    2️⃣ निर्माण कार्य:
    साधु ग्राम में बुनियादी सुविधाओं का काम युद्धस्तर पर शुरू किया जाए।

    3️⃣ संरक्षण:
    स्थानीय आश्रमों और मठों की मौजूदा व्यवस्था को कोई नुकसान न पहुंचे।

    4️⃣ समन्वय:
    प्रशासन और संतों के बीच नियमित संवाद और पारदर्शी योजना बने।


    संतों की चेतावनी

    तीनों प्रमुख अखाड़ों — दिगंबर, निर्वाणी और निर्मोही — के संतों ने हाल ही में गोवा में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की।
    राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत भक्ति चरणदास महाराज ने कहा कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो साधु-संत सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

    संतों का कहना है कि कुंभ मेले में लाखों श्रद्धालुओं और साधु-संतों का आगमन होता है और उनके ठहरने की व्यवस्था साधु ग्राम में ही की जाती है। यदि समय पर कार्य पूरे नहीं हुए, तो मेले के सफल आयोजन पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।

  • AISF: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन का नासिक में आंदोलन: 18,000 मराठी स्कूल बंद करने के फैसले के खिलाफ बिगुल

    AISF: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन का नासिक में आंदोलन: 18,000 मराठी स्कूल बंद करने के फैसले के खिलाफ बिगुल

    नासिक/मुंबई। महाराष्ट्र में कम छात्र संख्या (पटसंख्या) का हवाला देते हुए लगभग 18,000 सरकारी मराठी स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की खबर ने शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है। इस निर्णय के विरोध में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) ने नासिक में बड़े आंदोलन की घोषणा कर दी है।

    26 फरवरी को जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन

    एआईएसएफ(AISF) के नेतृत्व में गुरुवार, 26 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजे नासिक के जिलाधिकारी कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन का आरोप है कि स्कूलों में छात्र संख्या स्वाभाविक रूप से कम नहीं हुई, बल्कि वर्षों की सरकारी उपेक्षा के कारण यह स्थिति पैदा की गई है।

    आंदोलनकारियों का कहना है कि:

    • कई स्कूलों की इमारतें जर्जर अवस्था में हैं
    • मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है
    • वर्षों से नई शिक्षक भर्ती बंद है
    • शिक्षकों के रिक्त पद नहीं भरे गए
    • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए

    इन सब कारणों से अभिभावक मजबूर होकर बच्चों को निजी स्कूलों की ओर भेज रहे हैं, जिससे सरकारी स्कूलों की पटसंख्या घटती गई।


    आंदोलन की रूपरेखा

    • दिनांक: गुरुवार, 26 फरवरी 2026
    • समय: दोपहर 12:00 बजे
    • स्थान: जिलाधिकारी कार्यालय, नासिक
    • नेतृत्व: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ)

    निजीकरण का बढ़ता खतरा

    एआईएसएफ का आरोप है कि यह निर्णय शिक्षा के निजीकरण की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में मराठी माध्यम के सरकारी स्कूल बंद होते हैं, तो:

    • गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा महंगी हो जाएगी
    • कई छात्र पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं
    • ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का ढांचा कमजोर पड़ेगा
    • मराठी माध्यम की शैक्षणिक परंपरा को झटका लगेगा

    संगठन का यह भी कहना है कि मराठी भाषा और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने की नीति के तहत यह कदम उठाया जा रहा है।


    जनआंदोलन बनाने की तैयारी

    एआईएसएफ की टीमें नासिक जिले के विभिन्न सरकारी स्कूलों में जाकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद कर रही हैं। अभिभावकों से अपील की गई है कि वे बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल हों, ताकि सरकार को यह निर्णय वापस लेने पर मजबूर किया जा सके।

    संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि स्कूल बंद करने की प्रक्रिया नहीं रोकी गई, तो आंदोलन को जिला स्तर से राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा।

  • दिल्ली सरकार का बड़ा ऐलान, होली और दीवाली पर राशन कार्ड धारकों को मुफ्त गैस सिलेंडर; DBT के जरिए खातों में भेजे जाएंगे 853 रुपए

    दिल्ली सरकार का बड़ा ऐलान, होली और दीवाली पर राशन कार्ड धारकों को मुफ्त गैस सिलेंडर; DBT के जरिए खातों में भेजे जाएंगे 853 रुपए

    नई दिल्ली। दिल्लीवासियों के लिए होली से पहले बड़ी खुशखबरी सामने आई है। Rekha Gupta के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने घोषणा की है कि होली और दीवाली पर सभी राशन कार्ड धारकों को मुफ्त गैस सिलेंडर दिया जाएगा।

    इस योजना की शुरुआत इसी वर्ष होली से की जाएगी और लाभार्थियों के खातों में DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए सीधे राशि ट्रांसफर की जाएगी।


    मुख्यमंत्री कार्यालय ने दी जानकारी

    5 फरवरी को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इसकी जानकारी दी गई थी। पोस्ट में कहा गया कि सरकार ने अपने संकल्प पत्र का एक और वादा पूरा किया है।

    योजना के तहत प्रतिवर्ष होली और दीवाली पर राशन कार्ड धारक परिवारों को एक-एक गैस सिलेंडर की राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी।


    कितनी राशि मिलेगी?

    3 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कैबिनेट बैठक के बाद कहा:

    • इस योजना के लिए 242.77 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।
    • प्रत्येक पात्र परिवार को ₹853 (एक सिलेंडर की अनुमानित कीमत) खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे।
    • जो परिवार PNG गैस का उपयोग करते हैं, उन्हें भी ₹853 की राशि दी जाएगी।

    कब मिलेगा लाभ?

    • होली (4 मार्च 2026) से पहले राशि ट्रांसफर की जाएगी।
    • दीवाली (लगभग 8 नवंबर 2026) पर भी इसी तरह मुफ्त सिलेंडर का लाभ मिलेगा।

    योजना का लाभ किन्हें मिलेगा?

    • दिल्ली सरकार द्वारा जारी वैध राशन कार्ड धारक
    • लाभार्थी का एक्टिव बैंक अकाउंट DBT से लिंक होना चाहिए
    • राशन कार्ड सिस्टम में पंजीकरण अनिवार्य

    राजनीतिक और सामाजिक महत्व

    यह योजना सीधे तौर पर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से लाई गई है। त्योहारों के दौरान बढ़ते खर्च के बीच मुफ्त सिलेंडर की सुविधा लोगों के लिए आर्थिक सहारा साबित हो सकती है।

    सरकार का दावा है कि इससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा और त्योहारों की खुशियां दोगुनी होंगी।

  • Bharatiya Janta Party का महाराष्ट्र में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल

    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी(Bhartiya Janta Party) ने एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए नई प्रदेश टीम की घोषणा कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष Ravindra Chavan ने मंगलवार (24 फरवरी) को मुंबई में आयोजित पत्रकार परिषद में पदाधिकारियों की नई सूची जारी की।

    इस सूची में सबसे अहम नाम Chitra Wagh का है, जिन्हें महिला मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं नवनाथ बन को मुंबई का मुख्य प्रवक्ता बनाया गया है।

    हाल ही में हुए निकाय चुनाव और विशेष रूप से Brihanmumbai Municipal Corporation (बीएमसी) चुनाव में पार्टी के मजबूत प्रदर्शन के बाद इस बदलाव को संगठन को और धार देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।


    उपाध्यक्ष पद पर इन नेताओं को मिली जिम्मेदारी

    प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने अपनी नई टीम में कई वरिष्ठ नेताओं को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें शामिल हैं:

    • अतुल कासेकर
    • भरती पवार
    • संजय कोडगे
    • संजय भेंडे
    • रामदास तडस
    • केशव उपाध्याय
    • प्रवीण पोटे
    • गोपीचंद पडलक
    • चेतन देशमुख
    • सुजय विखे पाटील
    • अर्चना चाकोरकर

    जनरल सेक्रेटरी पद पर बदलाव

    पार्टी ने संगठनात्मक मजबूती के लिए जनरल सेक्रेटरी (महासचिव) पदों पर भी नए नामों की घोषणा की है:

    • निरंजन डावखरे
    • योगेश सागर
    • संजय कुटे
    • माधवी नाईक
    • राजेश पांडे
    • सुनील राणे

    सेक्रेटरी (चिटणीस) पद पर नियुक्तियां

    बीजेपी ने सेक्रेटरी पद पर भी व्यापक बदलाव करते हुए निम्नलिखित नेताओं को जिम्मेदारी दी है:

    • प्रशांत ठाकूर
    • मंगेश चव्हाण
    • परिणय
    • वर्षा ढहाळे
    • संजय जगताप
    • रोहिणी नायडू
    • राम सातपुते
    • प्रवीण घुगे
    • रेखा कुलकर्णी
    • भैरवी वाघ

    कोषाध्यक्ष और सह-कोषाध्यक्ष

    महाराष्ट्र बीजेपी के कोषाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी Mihir Kotecha को सौंपी गई है।
    वहीं सह-कोषाध्यक्ष के रूप में लखानी को नियुक्त किया गया है।


    राजनीतिक मायने क्या हैं?

    राज्य कार्यकारिणी की घोषणा अभी बाकी है, लेकिन मुख्य पदों पर नई नियुक्तियों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि पार्टी आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए संगठन को पुनर्गठित कर रही है।

    मुंबई और महाराष्ट्र में बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच यह फेरबदल बीजेपी की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव पार्टी के प्रदर्शन को और मजबूती देने के उद्देश्य से किया गया है।

  • Drugs Racket: बांद्रा टर्मिनस पर आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई,  13.834 किलो चरस बरामद!

    Drugs Racket: बांद्रा टर्मिनस पर आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई, 13.834 किलो चरस बरामद!

    आर.एस. नेटवर्क। सुजीत मिश्र

    मुंबई: पश्चिम रेलवे के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी(Drugs racket) के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत मुम्बई डिवीजन स्थित बाँद्रा टर्मिनस स्थित आरपीएफ़ ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए लगभग 13.834 किलोग्राम चरस बरामद की है जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत ₹13 करोड़ 83 लाख 40 हजार आंकी गई है।


    यह कार्रवाई पश्चिम रेलवे के प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त के नेतृत्व तथा वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त के दिशा-निर्देश में की गई। सुरक्षा आयुक्त रजत कुंदगीर एवं सहायक सुरक्षा आयुक्त अजीत डी. माने के मार्गदर्शन में मुंबई सेंट्रल मंडल की टीम ट्रेनों में मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध सतत अभियान चला रही है।
    21 फरवरी 2026 को लगभग 4:20 बजे गाड़ी संख्या 19038 (अवध एक्सप्रेस) के बांद्रा टर्मिनस के प्लेटफार्म संख्या 4 पर आगमन के पश्चात कोच लॉकिंग के दौरान ड्यूटी पर तैनात आरक्षक को गार्ड के समीप स्थित सामान्य डिब्बे में एक लावारिस बैग संदिग्ध अवस्था में मिला। तत्काल इसकी सूचना ड्यूटी अधिकारी को दी गई जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया और संयुक्त जाँच प्रारंभ की गई। घटनास्थल पर आरपीएफ, (जीआरपी), डॉग स्क्वॉड तथा एफएसएल टीम को बुलाया गया। आरपीएफ के नार्को विशेषज्ञ डॉग “टैंगा” तथा जीआरपी के डॉग “रॉकी” द्वारा बैग में मादक पदार्थ होने की पुष्टि की गई। स्वतंत्र पंचों की उपस्थिति में जब बैग को खोला गया तो उसमें कपड़ों के भीतर सावधानीपूर्वक छिपाकर रखे गए 31 पैकेट चरस बरामद हुए।
    मौके पर प्रत्येक पैकेट का वजन किया गया, जिसमें कुल वजन 13.834 किलोग्राम पाया गया। एफएसएल टीम द्वारा संदिग्ध सामग्री की प्राथमिक जाँच की गई तथा संपूर्ण कार्रवाई की वीडियोग्राफी आईपीएफ जगदीश जाट व आरपीएफ़ के विनीत कुमार की देख रेख में कई गई व फोटोग्राफी के साक्ष्य को सुरक्षित किए गए।
    इस संबंध में जीआरपी बांद्रा द्वारा अज्ञात आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8(C) एवं 20(b)(ii)(C) के तहत अपराध क्रमांक 42/26 दिनांक 21.02.2026 को मामला दर्ज कर आगे की जाँच प्रारंभ कर दी गई है।
    रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों एवं जवानों की सतर्कता, सजगता और कर्तव्यनिष्ठा के परिणामस्वरूप यह बड़ी तस्करी प्रयास विफल हुआ। इस कार्रवाई को ट्रेनों के माध्यम से संचालित मादक पदार्थ नेटवर्क पर प्रभावी प्रहार माना जा रहा है।
    आरपीएफ ने स्पष्ट किया है कि रेलवे परिसरों में अवैध गतिविधियों के विरुद्ध इसी प्रकार सघन निगरानी एवं अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे। ज्ञातव्य हो कि आईपीएफ जगदीश पी जाट ने जब से बाँद्रा टर्मिनस का चार्ज लिया है तब से असामाजिक तत्वों एवं मादक पदार्थो के सप्लाई करने वालों की कमर तोड़ कर रख दी है।

  • A Caste-free Society:अहिल्यानगर के सौंदाला गांव का ‘जातिमुक्ति’ मॉडल पूरे महाराष्ट्र में लागू होना चाहिए, ताकि समाज में एकता, समानता और बंधुत्व को मजबूती मिले:हर्षवर्धन सपकाल

    A Caste-free Society:अहिल्यानगर के सौंदाला गांव का ‘जातिमुक्ति’ मॉडल पूरे महाराष्ट्र में लागू होना चाहिए, ताकि समाज में एकता, समानता और बंधुत्व को मजबूती मिले:हर्षवर्धन सपकाल

    मुंबई: भेदभाव और नफरत के बढ़ते माहौल के बीच अहिल्यानगर ज़िले के नेवासा तालुका स्थित सौंदाला गाँव ने ग्रामसभा में जातमुक्ति (A caste-free society) का प्रस्ताव पारित कर एक नई सामाजिक मिसाल पेश की है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल (Harshvardhan sapkal) ने गाँव का दौरा कर ग्रामवासियों को बधाई दी और कहा कि सौंदाला का यह विचार पूरे राज्य में फैलना चाहिए।

    ग्रामवासियों को संबोधित करते हुए सपकाल ने कहा कि आज देश और दुनिया में जानबूझकर भेदभाव, डर और नफरत का वातावरण बनाया जा रहा है। जाति और धर्म की दीवारें खड़ी कर समाज में प्रेम और अपनापन कम किया जा रहा है। ऐसे समय में सौंदाला गाँव ने जातमुक्ति का प्रस्ताव पारित कर ‘डरो मत’ का संदेश दिया है, जो समाज के लिए प्रेरणादायक है।

    उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन संभव है, लेकिन जाति की पहचान से व्यक्ति को जीवनभर जूझना पड़ता है। स्कूल में प्रवेश से लेकर विवाह और सामाजिक व्यवहार तक जाति की दीवारें मजबूत होती जा रही हैं। बीड ज़िले में संतोष देशमुख की हत्या के बाद सामाजिक वातावरण और अधिक तनावपूर्ण हुआ है। अपनी ही जाति की दुकान से सामान खरीदने या अपने ही समुदाय के लोगों को प्राथमिकता देने जैसी प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं, जो समाज को विभाजित करती हैं।

    सपकाल ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने सद्भावना पदयात्रा निकालकर समाज के सभी वर्गों को साथ लाने का प्रयास किया है। उनका कहना था कि सौंदाला गाँव ने एकता, समानता और बंधुत्व का संदेश देकर सामाजिक समरसता की दिशा में ठोस कदम उठाया है।

    इस अवसर पर उन्होंने गाडगे महाराज की जयंती का भी उल्लेख किया और कहा कि गाडगे बाबा ने स्वच्छता, अंधश्रद्धा उन्मूलन और सामाजिक न्याय का संदेश दिया था। सौंदाला का निर्णय उनके विचारों से पूरी तरह मेल खाता है और प्रदूषित होते सामाजिक वातावरण में यह मानो शुद्धिकरण का कार्य है।

    दौरे के दौरान सौंदाला के सरपंच शरद आरगडे, प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहन जोशी, महासचिव प्रभावतीताई घोगरे, अहिल्यानगर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष सचिन गुजर, उपाध्यक्ष ज्ञानेश्वर मुरकुटे, अभिजीत लुनिया, जिला महासचिव रंजन जाधव, नेवासा तालुका अध्यक्ष नानासाहेब पठारे, महिला जिला अध्यक्ष लताताई डांगे, शिर्डी शहर अध्यक्ष सचिन चौगुले, पाथर्डी तालुका अध्यक्ष नासिर शेख सहित अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।

  • Rahul Gandhi attack Epstein files & adani trade deal: एप्स्टीन फाइल्स से अडानी केस तक—मोदी सरकार दे जवाब, देश को सच चाहिए: राहुल गांधी का बड़ा हमला

    Rahul Gandhi attack Epstein files & adani trade deal: एप्स्टीन फाइल्स से अडानी केस तक—मोदी सरकार दे जवाब, देश को सच चाहिए: राहुल गांधी का बड़ा हमला

    नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्र सरकार पर बहुआयामी हमला बोला। सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने एप्स्टीन फाइल्स, भारत-अमेरिका ट्रेड डील, अडानी प्रकरण और किसानों की स्थिति जैसे मुद्दों को जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा।

    राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कथित एप्स्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री, उनके मंत्रियों और करीबी उद्योगपतियों के नाम आने की चर्चा बेहद गंभीर है। उनका कहना था कि यह देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला है और सरकार को पारदर्शी स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि लाखों दस्तावेज अब भी सार्वजनिक नहीं हुए हैं और उनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, उद्योगपति अनिल अंबानी तथा प्रधानमंत्री का नाम होने की बात कही।

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस डील में राष्ट्रीय हितों से समझौता किया गया। उनके अनुसार भारतीय डेटा को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोला गया, किसानों के हितों की अनदेखी हुई और टेक्सटाइल उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस समझौते से देश को वास्तविक लाभ क्या मिला।

    राहुल गांधी ने उद्योगपति Gautam Adani से जुड़े अमेरिका में चल रहे मामले का भी जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल एक कारोबारी का मामला नहीं, बल्कि सत्ता संरचना से जुड़ा सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि 14 महीनों से ठोस कार्रवाई न होना कई संदेह पैदा करता है।

    इन आरोपों पर विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संबंधित दस्तावेजों में प्रधानमंत्री के 2017 के इज़रायल दौरे के संदर्भ से परे जो भी उल्लेख हैं, वे एक दोषी अपराधी की कल्पनाएं हैं और निराधार हैं।

    राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि कांग्रेस देशहित के मुद्दों पर पीछे नहीं हटेगी और सरकार से जवाब मांगती रहेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों के हितों की रक्षा में अधिक सक्रिय है, जबकि किसान और मध्यम वर्ग समस्याओं से जूझ रहे हैं।

    इस मुद्दे पर सियासी तापमान बढ़ गया है और आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक बहस तेज होने के संकेत हैं।

  • Yogi v/s Amukteshwaranand: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मामले में सनसनीखेज दावा,  आशुतोष के गवाह ने कथित दबाव और प्रलोभन का किया खुलासा

    Yogi v/s Amukteshwaranand: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मामले में सनसनीखेज दावा, आशुतोष के गवाह ने कथित दबाव और प्रलोभन का किया खुलासा

    वाराणसी। ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद(Amukteshwaranand) सरस्वती से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में सोमवार को घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में आयोजित प्रेस वार्ता में रमाशंकर दीक्षित नामक व्यक्ति ने दावा किया कि उन पर उनकी नाबालिग बेटी के नाम का सहारा लेकर शंकराचार्य पर गंभीर आरोप लगाने के लिए दबाव बनाया गया।

    दीक्षित के अनुसार, उन्हें कथित रूप से आर्थिक प्रलोभन दिया गया ताकि वे लिखित शिकायत देकर मामला दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव को ठुकराने के बाद उन्हें अप्रत्यक्ष धमकियों का सामना करना पड़ा। दीक्षित ने पूरी घटना को लिखित रूप में अपने हस्ताक्षर सहित मठ प्रशासन को सौंपने और मीडिया के सामने रखने की बात कही।

    दूसरी ओर, शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी प्रयागराज जिला न्यायालय में पेश हुए। सुनवाई के दौरान पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई के पहलुओं पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे संवेदनशील मामलों में शिकायत और गवाहों की विश्वसनीयता की गहन जांच अनिवार्य है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि आरोप असत्य सिद्ध होते हैं या गवाह बयान से पलटता है, तो शिकायतकर्ता के विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई संभव है।

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायालय ने निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच पर जोर दिया है। फिलहाल सभी पक्ष आगामी सुनवाई और जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    संपादकीय दृष्टि से यह प्रकरण कानून-प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े करता है। ऐसे मामलों में राजनीतिक बयानबाजी से परे रहकर पारदर्शी और समयबद्ध जांच आवश्यक है, ताकि न तो किसी निर्दोष की प्रतिष्ठा पर आंच आए और न ही वास्तविक शिकायत दबे। कानून के समक्ष सभी समान हैं—और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।

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