Category: Bharat

Stay updated with the pulse of the nation!
In this category, explore the latest news and breaking updates from across India – including politics, economy, education, science, law, social issues, and more. Get real-time updates and in-depth coverage of stories that matter to every Indian.

  • Bhiwandi Haj Yatri: हज यात्रियों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान शुरू, 700 से अधिक जायरीन लाभान्वित

    Bhiwandi Haj Yatri: हज यात्रियों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान शुरू, 700 से अधिक जायरीन लाभान्वित

    भिवंडी (Bhiwandi)।
    मुस्लिम धर्म की पवित्र हज यात्रा पर जाने वाले जायरीन की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका के चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष टीकाकरण एवं स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत अब तक जिले के 700 से अधिक हज यात्रियों (Bhiwandi Haj Yatri) को आवश्यक रोग-प्रतिरोधक टीके लगाए जा चुके हैं।

    भिवंडी ऐसा एकमात्र केंद्र है, जहाँ पिछले चार वर्षों से हज यात्रियों के लिए लगातार यह विशेष टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक चलाया जा रहा है। इस सुविधा का लाभ केवल भिवंडी शहर के ही नहीं, बल्कि भिवंडी ग्रामीण, कल्याण, मुंब्रा और ठाणे से आने वाले हज यात्री भी उठा रहे हैं।

    शुक्रवार से शुरू हुए इस अभियान में अब तक कुल 702 हज यात्रियों का टीकाकरण किया जा चुका है। यह अभियान अगले दो दिनों तक जारी रहेगा। फार्मासिस्ट आसिफ अंसारी के अनुसार, आने वाले दिनों में करीब 300 और हज यात्रियों के टीकाकरण की उम्मीद है।

    इस अभियान को सफल बनाने के लिए चिकित्सा अधिकारी डॉ. आयशा, फार्मासिस्ट आसिफ अंसारी, पंकज सिंह, राजश्री दाभाडे सहित नर्सिंग स्टाफ की पूरी टीम विशेष मेहनत कर रही है।

    प्रशासनिक टीम ने बताया कि,

    “हज यात्रियों की सेहत और सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिले के अलग-अलग हिस्सों से जायरीन यहां आकर टीकाकरण करवा रहे हैं, जो इस केंद्र की विश्वसनीयता और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को दर्शाता है।”

    भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी हज यात्रियों को समय पर आवश्यक टीके, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे सुरक्षित और स्वस्थ हज यात्रा पूरी कर सकें।

  • Open Pathshala: चर्चगेट के गार्डन बने बोर्ड परीक्षा की खुली पाठशाला

    Open Pathshala: चर्चगेट के गार्डन बने बोर्ड परीक्षा की खुली पाठशाला

    Mumbai News: मुंबई के चर्चगेट इलाके में इन दिनों एक अलग ही नज़ारा देखने को मिल रहा है। एसएससी और एचएससी बोर्ड की आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राएं घरों और कोचिंग क्लासेस से बाहर निकलकर गार्डन में पढ़ाई (Open Pathshala) करते नजर आ रहे हैं। किताबें, नोट्स और प्रश्नपत्रों के साथ पेड़ों की छांव में बैठे ये छात्र शांत माहौल में एक-दूसरे के साथ चर्चा करते हुए पढ़ाई कर रहे हैं।

    छात्रों का कहना है कि गार्डन का खुला और शांत वातावरण पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाता है और लंबे समय तक बैठकर पढ़ने में मदद करता है। कई अभिभावक भी इसे सकारात्मक पहल मान रहे हैं, जहां बच्चे मोबाइल और अन्य ध्यान भटकाने वाली चीज़ों से दूर रहकर पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं।

    बोर्ड परीक्षाओं का दबाव झेल रहे इन छात्रों के लिए चर्चगेट का गार्डन न केवल पढ़ाई की जगह बन गया है, बल्कि मानसिक तनाव कम करने का भी एक ज़रिया साबित हो रहा है।

  • The Freedom Trail Mumbai: मुंबई का फ्रीडम ट्रेल खुद आज़ादी को तरस रहा, आज़ादी के रास्ते पर हॉकर्स का कब्ज़ा

    The Freedom Trail Mumbai: मुंबई का फ्रीडम ट्रेल खुद आज़ादी को तरस रहा, आज़ादी के रास्ते पर हॉकर्स का कब्ज़ा

    मुंबई। भारत की आज़ादी की कहानी को ज़मीन पर उतारने वाला मुंबई का ‘फ्रीडम ट्रेल’(Mumbai Freedom Trail) आज खुद बेबसी की तस्वीर बन चुका है। जिस ऐतिहासिक पैदल मार्ग को देश के स्वतंत्रता संग्राम, खासकर अगस्त क्रांति मैदान (ग्वालिया टैंक) से जुड़े Quit India Movement की स्मृति को संजोने के लिए विकसित किया गया था, वही ट्रेल आज हॉकर्स, अतिक्रमण और अव्यवस्था का शिकार है।

    आजादी के नायकों की विरासत को दर्शाने वाला यह क्यूरेटेड वॉकिंग रूट आज भी हॉकर्स से आज़ाद नहीं हो पाया है। जगह-जगह ठेले, अस्थायी दुकानें और अवैध कब्ज़े न सिर्फ पैदल यात्रियों की राह रोक रहे हैं, बल्कि इस ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

    विडंबना यह है कि जिस रास्ते ने देश को “अंग्रेज़ों भारत छोड़ो” का नारा दिया, उसी रास्ते पर आज नागरिकों को चलने की आज़ादी तक नहीं मिल रही। पर्यटक, इतिहास प्रेमी और स्थानीय नागरिक—सभी को संकरे रास्तों, भीड़ और गंदगी से जूझना पड़ता है। सूचना पट्टिकाएं, विरासत चिन्ह और गाइडेड साइनबोर्ड कई जगह हॉकर्स के पीछे छिप चुके हैं।

    नगर निगम और प्रशासन ने फ्रीडम ट्रेल को सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत के रूप में विकसित करने के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को आईना दिखा रही है। सवाल यह है कि जब मुंबई स्मार्ट सिटी, हेरिटेज सिटी और टूरिज़्म हब बनने की बात करती है, तो क्या उसकी आज़ादी की सबसे बड़ी कहानी को यूं ही अतिक्रमण के हवाले छोड़ दिया जाएगा?

    आज ज़रूरत इस बात की है कि फ्रीडम ट्रेल को सिर्फ इतिहास की निशानी नहीं, बल्कि सच में ‘फ्री’ बनाया जाए।

    अगर यही हाल रहा, तो आने वाली पीढ़ियां आज़ादी की कहानी किताबों में पढ़ेंगी—और मुंबई में उसका रास्ता तलाशती रह जाएंगी।

  • PM E-Bus Service Scheme:महाराष्ट्र में पीएम-ई-बस सेवा योजना कागज़ों तक सीमित, एक भी ई-बस सड़क पर नहीं उतरी: सांसद वर्षा गायकवाड़

    PM E-Bus Service Scheme:महाराष्ट्र में पीएम-ई-बस सेवा योजना कागज़ों तक सीमित, एक भी ई-बस सड़क पर नहीं उतरी: सांसद वर्षा गायकवाड़

    मुंबई। केंद्र की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना (PM E-Bus Service Scheme) महाराष्ट्र में अब तक केवल कागज़ों तक ही सीमित दिखाई दे रही है। इस योजना के तहत राज्य के 22 शहरों के लिए 1,609 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 1,411 बसों के लिए टेंडर भी जारी हो चुके हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक एक भी ई-बस प्रत्यक्ष सेवा में शामिल नहीं हुई है।

    यह जानकारी कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने दी है। सांसद वर्षा गायकवाड़ ने महाराष्ट्र में पीएम-ई-बस सेवा योजना के वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर सरकार को घेरा और योजना की प्रगति पर गंभीर सवाल उठाए।

    उन्होंने पूछा कि महाराष्ट्र में इस योजना के अंतर्गत कितने शहर शामिल हैं, कितनी इलेक्ट्रिक बसों को अब तक मंजूरी दी गई है, कितनी बसों के लिए निविदाएं निकाली गई हैं और कितनी बसें वास्तव में सेवा में आई हैं। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार ने राज्य में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बस डिपो की तैयारी और बिजली की उपलब्धता की पर्याप्त समीक्षा की है या नहीं, और इस योजना से यात्रियों को वास्तविक रूप से क्या लाभ मिलने वाला है।

    केंद्र सरकार की ओर से नगर विकास मंत्रालय ने लिखित जवाब में बताया कि पीएम-ई-बस सेवा योजना के तहत ‘बिहाइंड-द-मीटर’ (BTM) इलेक्ट्रिकल और सिविल डिपो इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 370.49 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इनमें से अब तक 200.18 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

    मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन कमेटी (PMEC) और सेंट्रल स्टियरिंग एंड अप्रूवल कमेटी (CSAC) के माध्यम से राज्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जाता है। पीएम-ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य देश के 100 से अधिक शहरों में 10,000 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें शुरू करना है, ताकि शहरी परिवहन को स्वच्छ, स्मार्ट और समावेशी बनाया जा सके।

    इस योजना में 3 से 40 लाख आबादी वाले शहरों, 3 लाख से कम आबादी वाले राज्यों की राजधानियों तथा पूर्वोत्तर और पर्वतीय क्षेत्रों की राजधानियों को शामिल किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे छोटे शहरों और उन इलाकों में रहने वाले यात्रियों को बड़ा लाभ मिलेगा, जहां संगठित बस सेवा उपलब्ध नहीं है।

    हालांकि, सांसद वर्षा गायकवाड़ ने महाराष्ट्र में अब तक एक भी ई-बस के सेवा में न आने को लेकर योजना के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए हैं और इसे सरकार की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बताया है।

  • Mahatma Jyotiba Phule : तेलंगाना में महात्मा फुले की प्रतिमा तोड़ने की कोशिश निंदनीय, मनुवादी भाजपा का कड़ा विरोध: सचिन सावंत

    Mahatma Jyotiba Phule : तेलंगाना में महात्मा फुले की प्रतिमा तोड़ने की कोशिश निंदनीय, मनुवादी भाजपा का कड़ा विरोध: सचिन सावंत

    हैदराबाद/मुंबई।
    कांग्रेस नेता और तेलंगाना प्रभारी सचिन सावंत ने तेलंगाना के तेल्लापूर इलाके में महात्मा ज्योतिबा फुले(Mahatma Jyotiba Phule) की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे भाजपा की “अत्यंत विषाक्त राजनीति” करार देते हुए इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की है।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर जारी बयान में सचिन सावंत ने कहा कि जिस तरह भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा महात्मा फुले की प्रतिमा तोड़ने का प्रयास किया गया, वह पूरी तरह से निषेधार्ह और शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले वही महान समाज सुधारक हैं जिन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को ‘कुळवाडी भूषण’ की उपाधि दी और उनकी ऐतिहासिक समाधि की खोज का कार्य किया।

    सचिन सावंत ने आरोप लगाया कि भाजपा एक तरफ छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर राजनीति करती है, वहीं दूसरी तरफ महात्मा फुले के विचारों और प्रतीकों का विरोध कर रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “ज्योतिबा फुले को शिवरायों से अलग नहीं किया जा सकता। जो लोग यह कोशिश कर रहे हैं, उन्हें न तो शिवराय समझ आए हैं और न ही फुले का विचार।”

    कांग्रेस नेता ने भाजपा को मनुवादी सोच वाली पार्टी बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक समरसता और महापुरुषों के सम्मान पर सीधा हमला हैं। उन्होंने भाजपा की इस मानसिकता का खुला और सार्वजनिक विरोध करने का आह्वान किया।

  • (Thane News)ठाणे में 11वें संस्कृति आर्ट फेस्टिवल का भव्य उद्घाटन, ढोल-मृदंग की थाप पर निकली शोभायात्रा और कला-संगीत के रंग में रंगा शहर

    (Thane News)ठाणे में 11वें संस्कृति आर्ट फेस्टिवल का भव्य उद्घाटन, ढोल-मृदंग की थाप पर निकली शोभायात्रा और कला-संगीत के रंग में रंगा शहर

    ठाणे (Thane News)। ठाणे शहर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को समर्पित 11वें संस्कृति आर्ट फेस्टिवल का भव्य उद्घाटन उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। फेस्टिवल की शुरुआत छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। उद्घाटन समारोह में ठाणे की महापौर शर्मिला पिंपलोलकर, उपमहापौर कृष्णा पाटिल, ठाणे पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे और ठाणे मनपा आयुक्त सौरभ राव सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

    इस वर्ष संस्कृति आर्ट फेस्टिवल का थीम ‘कला संगमाची विट्ठलवारी’ रखा गया है। ढोल की थाप और मृदंग की मधुर धुनों के बीच विठ्ठल भक्ति से ओत-प्रोत भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे शहर को भक्तिरस में डुबो दिया। शोभायात्रा के दौरान प्रस्तुत किए गए पारंपरिक मर्दानी खेल दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इस भव्य आयोजन को ठाणेकरों से जबरदस्त प्रतिसाद मिला।

    उपवन तालाब परिसर की ठंडी हवा और विठुमौली की भक्तिमय वातावरण के बीच प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित आनंद भाटे की मधुर आवाज़ ने संध्या को और भी यादगार बना दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पंढरपुर की अनुभूति ठाणे में साकार हो गई हो।

    इस अवसर पर दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजितदादा पवार की स्मृति को सम्मान देते हुए फेस्टिवल के आर्ट हॉल का नाम उनके नाम पर रखा गया और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

    फेस्टिवल के दौरान देश-विदेश में ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। इनमें मशहूर कथक नृत्यांगना मंजरी देव, प्रसिद्ध अभिनेत्री और भरतनाट्यम कलाकार सुधा चंद्रन, ओडिसी नृत्यांगना सुजाता महापात्रा और भरतनाट्यम कलाकार दीपक मजूमदार प्रमुख रूप से शामिल हैं।

    संस्कृति आर्ट फेस्टिवल न केवल कला, नृत्य और संगीत का संगम है, बल्कि यह ठाणे की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त मंच भी बन चुका है।

  • Thane News:ज़िला परिषद ठाणे में ‘सप्तरंग महोत्सव 2026’ का आयोजन, GPF ऐप लॉन्च

    Thane News:ज़िला परिषद ठाणे में ‘सप्तरंग महोत्सव 2026’ का आयोजन, GPF ऐप लॉन्च

    ठाणे(Thane News)। ज़िला परिषद ठाणे के अधिकारियों और कर्मचारियों की छिपी प्रतिभा को मंच देने के उद्देश्य से ‘सप्तरंग महोत्सव 2026’ का आयोजन किया गया। यह सांस्कृतिक कार्यक्रम तलावपाली स्थित गडकरी रंगायतन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन ज़िला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रंजीत यादव ने किया। इस अवसर पर GPF ऐप का भी शुभारंभ किया गया।

    मुख्य कार्यकारी अधिकारी रंजीत यादव ने कहा कि ‘सप्तरंग महोत्सव’ अधिकारियों और कर्मचारियों की रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाने का एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है। उन्होंने सभी से उत्साहपूर्वक भाग लेने की अपील की और कहा कि ऐसे कार्यक्रम कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बनाने में सहायक होते हैं।

    कार्यक्रम के दौरान ज़िला परिषद के विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कला, संस्कृति और मनोरंजन से जुड़ी अपनी प्रतिभा प्रस्तुत की। रंजीत यादव ने उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी अविनाश फड़तरे सहित इस कार्यक्रम की संकल्पना और सफल आयोजन के लिए सभी संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को बधाई दी।

    ‘सप्तरंग महोत्सव 2026’(Saptrang Mahotsav 2026) के माध्यम से ज़िला परिषद ने यह संदेश दिया कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ रचनात्मकता और सांस्कृतिक गतिविधियां भी कर्मचारियों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाती हैं।

  • RSS News :आरएसएस 100 वर्ष कार्यक्रम में मोहन भागवत का स्पष्ट संदेश-                                                                 संघ न तो पैरामिलिट्री है, न राजनीतिक पार्टी

    RSS News :आरएसएस 100 वर्ष कार्यक्रम में मोहन भागवत का स्पष्ट संदेश- संघ न तो पैरामिलिट्री है, न राजनीतिक पार्टी

    मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के “संघ यात्रा के 100 वर्ष–नए क्षितिज” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की भूमिका और विचारधारा को लेकर उठने वाली भ्रांतियों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि संघ को दूर से देखने पर गलतफहमी हो सकती है, इसलिए संघ को समझने के लिए उसकी शाखाओं और स्वयंसेवकों के जीवन को देखना जरूरी है।

    मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ के स्वयंसेवक रूट मार्च करते हैं, लाठी-काठी सीखते हैं और घोष की धुन बजती है, लेकिन संघ न तो कोई पैरामिलिट्री संगठन है, न अखाड़ा और न ही संगीतशाला। उन्होंने कहा कि संघ में राजनीति से जुड़े स्वयंसेवक जरूर हैं, लेकिन संघ स्वयं कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ का काम अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे देश और समाज के लिए है। संघ न तो किसी के विरोध में बना है और न ही किसी से प्रतिस्पर्धा के लिए। संघ को न लोकप्रियता चाहिए और न सत्ता, उसका उद्देश्य केवल समाज को संगठित करना है।

    “संघ को समझना है तो शाखा देखिए”
    आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संघ को समझने के लिए उसकी शाखाओं, कार्यकर्ताओं के परिवारों और उनके सामाजिक व्यवहार को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी देश का उत्थान या पतन समाज की एकता पर निर्भर करता है, इसका उदाहरण अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और जर्मनी जैसे देशों के इतिहास से लिया जा सकता है।

    हिंदू शब्द और समाज पर विचार
    मोहन भागवत ने कहा कि ‘हिंदू’ को केवल धर्म या पूजा-पद्धति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह किसी एक समुदाय का नाम नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन है। उन्होंने कहा कि भारत धर्म-प्राण देश है, जहां सबको साथ लेकर चलने की परंपरा रही है।

    बीजेपी और संघ पर टिप्पणी
    संघ प्रमुख ने साफ किया कि बीजेपी संघ की पार्टी नहीं है, हालांकि संघ के स्वयंसेवक उसमें कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि संघ का एकमात्र उद्देश्य संपूर्ण समाज को संगठित करना है।

    अपने संबोधन के अंत में मोहन भागवत ने कहा कि भारत का स्वभाव सनातन है और “सबका सम्मान, सबका स्वीकार” ही हमारी संस्कृति की मूल भावना है। सबको साथ लेकर चलना ही देश की ताकत है।

  • Half Marathon 2026 : रविवार को दौड़ेगा ठाणे, स्ट्राइडर्स हाफ मैराथन का 12वां संस्करण

    Half Marathon 2026 : रविवार को दौड़ेगा ठाणे, स्ट्राइडर्स हाफ मैराथन का 12वां संस्करण

    ठाणे। स्ट्राइडर्स द्वारा आयोजित ठाणे हाफ मैराथन(Thane Half Marathon) का 12वां संस्करण रविवार, 8 फरवरी को हीरानंदानी एस्टेट, ठाणे में आयोजित होगा। इस प्रतिष्ठित रन में 21 किमी और 10 किमी (समयबद्ध) तथा 4 किमी (फन रन) कैटेगरी शामिल हैं। यह मैराथन फिटनेस और एक्टिव लाइफस्टाइल को बढ़ावा देने वाला शहर का प्रमुख स्पोर्टिंग इवेंट बन चुका है।

    2026 संस्करण में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया टाइटल स्पॉन्सर है, जो हेल्थ, वेलनेस और कम्युनिटी एंगेजमेंट के प्रति बैंक की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस साल इवेंट की खास आकर्षण होंगे मशहूर फिटनेस आइकन और एंड्योरेंस एथलीट मिलिंद सोमन, जो ब्रांड एंबेसडर के रूप में रनर्स का उत्साह बढ़ाएंगे।

    पिछले संस्करण में 15 हजार से ज्यादा रनर्स की भागीदारी के बाद, इस बार भी बड़ी संख्या में प्रोफेशनल, एमेच्योर और नए रनर्स के शामिल होने की उम्मीद है। हाफ मैराथन की शुरुआत न्यू होराइजन स्कूल गेट, ठाणे से होगी और समापन टीएमसी ग्राउंड पर किया जाएगा।

  • Supreme Court:सिर्फ कल्याण नहीं, माता-पिता की भूमिका भी तय करेगी फैसला: बच्चों की कस्टडी पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश

    Supreme Court:सिर्फ कल्याण नहीं, माता-पिता की भूमिका भी तय करेगी फैसला: बच्चों की कस्टडी पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश

    नई दिल्ली। बच्चों की कस्टडी (child-custody) तय करते समय केवल उनके “कल्याण” को ही एकमात्र आधार मानना सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में अदालतों को माता-पिता के आचरण, उनकी आर्थिक स्थिति, जीवन-स्तर, बच्चों की सुविधा और शिक्षा जैसे अन्य प्रासंगिक पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार करना होगा।

    जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें दो नाबालिग बच्चों की कस्टडी उनकी मां को बहाल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चों का कल्याण सर्वोपरि जरूर है, लेकिन वही अकेला निर्णायक कारक नहीं हो सकता।

    खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा,

    “कस्टडी मामलों में बच्चों का कल्याण सर्वोच्च विचार है, इसमें कोई विवाद नहीं है। लेकिन इसके साथ-साथ कई अन्य कारक भी होते हैं, जैसे पक्षकारों का आचरण, उनकी आर्थिक क्षमता, जीवन-स्तर, तथा बच्चों की सुविधा और शिक्षा। इसलिए यह कहना कि ये कारक बहुत प्रासंगिक नहीं हैं और केवल कल्याण के आधार पर ही निर्णय होगा—पूरी तरह सही नहीं है।”

    क्या है मामला

    यह अपील एक तलाकशुदा दंपति के बीच लंबे समय से चल रहे कस्टडी विवाद से जुड़ी है। दोनों पक्ष भारतीय नागरिक हैं और उनके दो नाबालिग पुत्र हैं, जिनका जन्म क्रमशः 2017 और 2019 में हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि हाईकोर्ट ने कस्टडी तय करते समय मां के आचरण समेत कई अहम तथ्यों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

    शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे पहलू “महत्वपूर्ण” हैं और इन्हें इस तर्क पर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि केवल बच्चों का कल्याण ही निर्णायक है।

    हाईकोर्ट को दोबारा सुनवाई का निर्देश

    अंततः, सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मामला पुनः गुण-दोष के आधार पर विचार के लिए वापस भेज दिया। साथ ही निर्देश दिया कि हाईकोर्ट इस कस्टडी विवाद का निपटारा यथाशीघ्र, अधिमानतः चार महीने के भीतर करे।

    यह फैसला देशभर में चल रहे कस्टडी मामलों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि अदालतें अब बच्चों के हित को व्यापक दृष्टिकोण से परखेंगी, न कि केवल एक ही कसौटी पर।