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  • Fraud Voter Name 2026: कालबादेवी के रामवाड़ी में मतदाता सूची में बड़ा फर्जीवाड़ा, एक व्यक्ति के दो नाम और दो फोटो से मचा हड़कंप

    मतदाता सूची में गड़बड़ी पर विपक्ष सख्त हो, चुप्पी टूटी नहीं तो लोकतंत्र पर खतरा: पार्टियों को चेतावनी

    आर.एस. नेटवर्क। अश्विनीकुमार

    मुंबई | कालबादेवी के रामवाड़ी स्थित प्रभु सुंदर बिल्डिंग, वार्ड क्रमांक 222 में मतदाता सूची को लेकर सामने आई गंभीर अनियमितताओं ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप है कि एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग नाम और दो अलग-अलग फोटो के आधार पर दो मतदाता दर्ज किए गए हैं। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में राजनीतिक हलचल मच गई है और नागरिकों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।


    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह महज़ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया खेल प्रतीत होता है, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है। प्रभु सुंदर बिल्डिंग में रहने वाले एक व्यक्ति, जिसका नाम बदले हुए रूप में रुद्रेश बताया जा रहा है, से इलाके के लोगों की नियमित मुलाकात होती रहती है। रविवार को जब कुछ नागरिक उनके घर पहुंचे, तो जानकारी मिली कि भाजपा उम्मीदवार रीता मकवाना की ओर से मतदाता पर्चियों का वितरण किया जा रहा था। संबंधित बिल्डिंग के लिए कुल चार शीट की मतदाता पर्चियां तैयार की गई थीं।


    जब इन शीट्स की गहन जांच की गई, तो चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आईं। एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज पाया गया। एक जगह पिता के नाम की जगह मां का नाम दर्ज था, तो दूसरी जगह पिता का नाम लिखा गया था। इतना ही नहीं, एक स्थान पर कमरे का नंबर 61 दर्शाया गया, जबकि दूसरी जगह वही व्यक्ति कमरे नंबर 6 में दर्ज मिला। दोनों प्रविष्टियों में अलग-अलग फोटो लगाए गए थे, जिससे दो अलग मतदाताओं का आभास पैदा किया गया।


    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस प्रकार की त्रुटियां यह साफ़ संकेत देती हैं कि मतदाता सूची तैयार करने में या तो घोर लापरवाही बरती गई है या फिर जानबूझकर गड़बड़ी की गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस मतदाता सूची के निर्माण पर चुनाव आयोग करोड़ों रुपये खर्च करता है, उसमें ऐसी गंभीर चूक कैसे संभव है। लोगों को आशंका है कि यह मामला केवल इसी एक बिल्डिंग तक सीमित नहीं, बल्कि शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के फर्जी और डुप्लिकेट मतदाता तैयार किए गए हो सकते हैं।
    इस प्रकरण के सामने आने के बाद विपक्षी दलों कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और वंचित बहुजन आघाड़ी से तत्काल और आक्रामक भूमिका निभाने की मांग तेज़ हो गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि अब भी विपक्ष चुप्पी साधे रहता है, तो आने वाले चुनावों में लोकतंत्र के साथ बड़ा खिलवाड़ होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
    स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि फर्जी आधार कार्ड के सहारे फर्जी मतदान कराया जा सकता है और अलग-अलग इमारतों में इस तरह के डुप्लिकेट मतदाता खड़े किए जा सकते हैं। नागरिकों ने चुनाव आयोग से मांग की है कि तत्काल आधार कार्ड की सत्यता जांचने के लिए सख्त और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए, ताकि डुप्लिकेट और फर्जी आधार के जरिए किसी अन्य के नाम पर मतदान कराने की साजिश को समय रहते रोका जा सके।
    यह मामला न केवल सत्ताधारी दलों के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है, बल्कि चुनाव आयोग(Mumbai Election 2026) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक तूफान बन सकता है।

  • Mahanagar Palika 2026: ‘सात संकल्प, नई शुरुआत’, पिंपरी-चिंचवड़ के लिए अजित पवार का घोषणापत्र जारी

    Mahanagar Palika 2026: ‘सात संकल्प, नई शुरुआत’, पिंपरी-चिंचवड़ के लिए अजित पवार का घोषणापत्र जारी

    पिंपरी-चिंचवड़: नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री अजितदादा पवार ने पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका चुनाव के लिए पार्टी का घोषणापत्र ‘सात संकल्प, एक नई शुरुआत’ के नारे के साथ जारी किया। इस घोषणापत्र में शहर की बुनियादी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए विकास का स्पष्ट रोडमैप पेश किया गया है।

    घोषणापत्र में रोज़ाना जलापूर्ति, बेहतर सड़कें, ट्रैफिक प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और पारदर्शी विकास योजना जैसे मुद्दों पर ठोस वादे किए गए हैं। पार्टी का दावा है कि यह घोषणापत्र छह महीने के ऑन-ग्राउंड सर्वे, वार्ड-स्तरीय संवाद और नागरिकों से सीधी बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। इस दौरान नागरिकों की प्रमुख मांगों नियमित पानी की आपूर्ति, तेज़ और सुरक्षित परिवहन, स्वच्छ वातावरण, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और प्रत्यक्ष आर्थिक राहत को घोषणापत्र में प्राथमिकता दी गई है।

    सात प्रमुख संकल्प

    • रोज़ाना स्वच्छ जलापूर्ति
      हर घर में तय समय पर हाई-प्रेशर नल से पानी, टैंकर निर्भरता खत्म करना, लीकेज-फ्री पाइपलाइन, नदियों का पुनर्जीवन और बाढ़ नियंत्रण के उपाय।
    • ट्रैफिक-फ्री और गड्ढा-मुक्त पीसीएमसी
      सड़कों की समयबद्ध मरम्मत, गुणवत्ता की ज़िम्मेदारी ठेकेदारों पर, डिजिटल शिकायत प्रणाली, मेट्रो रूट और फ्लाईओवर परियोजनाओं की पारदर्शी निगरानी।
    • देश का सबसे स्वच्छ शहर
      100% कचरा पृथक्करण, वैज्ञानिक निपटान, ज़ीरो लैंडफिल और स्वच्छता के लिए हाउसिंग सोसाइटियों की सक्रिय भागीदारी।
    • सस्ते और हाई-टेक हेल्थकेयर सेंटर
      बड़े अस्पताल, नए मेडिकल संस्थान, 100 सब-अर्बन क्लिनिक, किफायती जांच और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए मजबूत स्वास्थ्य सुविधाएं।
      -पारदर्शी विकास योजना (DP)
      मौजूदा ड्राफ्ट डीपी को रद्द कर नागरिकों की भागीदारी से नई योजना, कानूनी घरों की सुरक्षा और विस्थापन के बजाय पुनर्वास पर ज़ोर।
    • पीसीएमसी मॉडल स्कूल
      100 आधुनिक नगर निगम स्कूल-राष्ट्रीय मानकों की शिक्षा, आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षित शिक्षक और निःशुल्क सुविधाएं।
      -सीधी राहत और ज़िम्मेदार शासन
      मुफ़्त मेट्रो-बस यात्रा, छोटे घर मालिकों को प्रॉपर्टी टैक्स में छूट, छात्रों को टैबलेट, महिलाओं के लिए बिना ब्याज ऋण योजना तथा खेल-संस्कृति को प्रोत्साहन।

    -एक्शन-ओरिएंटेड विज़न डॉक्यूमेंट
    अजित पवार ने कहा कि ये सात संकल्प छत्रपति शिवाजी महाराज के लोककल्याणकारी शासन, छत्रपति शाहू महाराज के सामाजिक न्याय, महात्मा फुले के शिक्षा-समानता के विचार और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के समता सिद्धांत से प्रेरित हैं। बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबावों के बीच यह घोषणापत्र नागरिकों को सीधी राहत, मजबूत बुनियादी ढांचा और आत्मनिर्भर शहर की दिशा में ले जाने का संकल्प दर्शाता है। एनसीपी का यह घोषणापत्र नारों से अधिक एक्शन-ओरिएंटेड विज़न डॉक्यूमेंट के रूप में पेश किया गया है।

  • Election Commission 2026: बीजेपी ने यूपी से मंगाए नेता और प्रचार गाड़ियाँ, चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर उठे गंभीर सवाल

    Election Commission 2026: बीजेपी ने यूपी से मंगाए नेता और प्रचार गाड़ियाँ, चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर उठे गंभीर सवाल

    मुंबई | विशेष प्रतिनिधि
    महाराष्ट्र में चुनावी ज़मीन कमजोर पड़ते ही भारतीय जनता पार्टी ने प्रचार के लिए उत्तर प्रदेश से नेताओं, प्रचार गाड़ियों और सामग्री का आयात शुरू कर दिया है। जिस ईडी–सीबीआई के डर के सहारे भाजपा उत्तर भारत में राजनीतिक बढ़त बनाती रही, वही दबाव की राजनीति महाराष्ट्र में कारगर नहीं हो पा रही है। नतीजतन अब भाजपा को प्रचार के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त वाहन तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे, और मजबूरी में यूपी से गाड़ियाँ मंगाई जा रही हैं।


    सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन सभी प्रचार वाहनों की जानकारी चुनाव आयोग को दी गई है? या फिर भाजपा चुनाव आयोग की आंखों में धूल झोंककर बाहरी राज्यों से संसाधन लाकर खुलेआम आचार संहिता की धज्जियाँ उड़ा रही है?
    जानकारों के मुताबिक, चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार हर प्रचार वाहन, उसका नंबर, मालिकाना हक, खर्च और उपयोग की पूरी जानकारी आयोग के पास दर्ज होना अनिवार्य है। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि महाराष्ट्र की सड़कों पर यूपी नंबर की प्रचार गाड़ियाँ धड़ल्ले से घूम रही हैं, जिनका न तो स्थानीय स्तर पर कोई लेखा-जोखा दिख रहा है और न ही सार्वजनिक रूप से उनकी अनुमति स्पष्ट है।


    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा को महाराष्ट्र में जनाधार की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर भारतीय वोट बैंक को साधने के लिए बाहरी चेहरों को मैदान में उतारा जा रहा है, लेकिन यह प्रयास भी स्थानीय मतदाताओं को रास नहीं आ रहा। सवाल उठता है कि जब महाराष्ट्र में भाजपा के पास पर्याप्त संगठनात्मक ताकत और संसाधन हैं, तो प्रचार के लिए दूसरे राज्य पर निर्भरता क्यों?
    विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग भाजपा के मामले में चयनात्मक चुप्पी साधे हुए है। आम उम्मीदवारों और छोटे दलों पर सख्ती से नियम लागू किए जाते हैं, लेकिन सत्ताधारी दल द्वारा नियमों के संभावित उल्लंघन पर आयोग की निष्क्रियता लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
    – अब मांग उठ रही है कि चुनाव आयोग यह स्पष्ट करे कि
    – महाराष्ट्र में भाजपा के लिए कितनी प्रचार गाड़ियाँ पंजीकृत हैं?
    – यूपी से आई गाड़ियों की अनुमति किस आधार पर दी गई?
    – उनके खर्च का लेखा-जोखा किस खाते में दर्ज है?
    अगर इन सवालों के जवाब नहीं दिए गए, तो यह साफ माना जाएगा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर आंच आई है। लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ वोट से नहीं, नियमों की समानता से भी लड़े जाते हैं—और यही कसौटी आज भाजपा और चुनाव आयोग दोनों के सामने खड़ी है।

  • Tamilnadu Politics: चुनाव से पहले तमिलनाडु की सियासत में घमासान, स्टालिन की हठधर्मिता से BJP को मिल रहा फायदा

    Tamilnadu Politics: चुनाव से पहले तमिलनाडु की सियासत में घमासान, स्टालिन की हठधर्मिता से BJP को मिल रहा फायदा

    New Delhi: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी उथल-पुथल तेज हो गई है। कांग्रेस की सत्ता में हिस्सेदारी की पुरानी मांग को एक बार फिर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सिरे से खारिज कर दिया है। डीएमके नेतृत्व का साफ संदेश है कि गठबंधन चुनाव तक ठीक है, लेकिन सरकार में हिस्सेदारी नहीं। स्टालिन की यही “एकला चलो” नीति अब गठबंधन धर्म पर सवाल खड़े कर रही है।

    कांग्रेस नेताओं के तीखे बयानों से साफ है कि सहयोगी दल खुद को सिर्फ बाहरी समर्थन तक सीमित नहीं रखना चाहते। बावजूद इसके डीएमके का अड़ियल रवैया जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्टालिन का यह रुख सीधे तौर पर बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अमित शाह पहले ही राज्य में आक्रामक मोड में नजर आ रहे हैं, वहीं थलपति विजय की संभावित एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

    अगर डीएमके ने सहयोगियों को नजरअंदाज करना जारी रखा, तो गठबंधन में दरार तय मानी जा रही है—और इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिल सकता है। चुनावी रण में सबसे बड़ा सवाल यही है: स्टालिन की जिद डीएमके को भारी पड़ेगी या बीजेपी इस मौके को भुनाने में कामयाब होगी?

  • Bangladesh-Rohingya Matter: बांग्लादेशी–रोहिंग्या मुद्दे पर कांग्रेस का हमला, फडणवीस से मांगे ठोस आंकड़े

    Bangladesh-Rohingya Matter: बांग्लादेशी–रोहिंग्या मुद्दे पर कांग्रेस का हमला, फडणवीस से मांगे ठोस आंकड़े

    मुंबई। महाराष्ट्र में बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मुद्दे पर दावे नहीं, बल्कि प्रमाण देने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस ने कहा है कि अगर सरकार ने वाकई राज्य में अवैध प्रवासियों की “सबसे अधिक संख्या” की पहचान कर ली है, तो उसके स्पष्ट और सार्वजनिक आंकड़े सामने रखे जाएं।

    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने फडणवीस पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “सपनों का सौदागर” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार हकीकत से ज्यादा भविष्य के वादों और घोषणाओं पर निर्भर है। सावंत ने कहा कि मुंबई को बाढ़-मुक्त करने, ईस्टर्न फ्रीवे को ठाणे से जोड़ने और एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था जैसे बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन ज़मीन पर नतीजे नज़र नहीं आते।

    बीएमसी चुनाव से पहले बांग्लादेशी-रोहिंग्या मुद्दे को उठाने को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर राजनीतिक फायदे का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि डर और भ्रम की राजनीति के बजाय सरकार को अपने दावों की सच्चाई आंकड़ों के साथ जनता के सामने रखनी चाहिए।

  • Pakistan Bangladesh Politics: ओवैसी के बयान पर भड़के देवकीनंदन ठाकुर, पाकिस्तान–बांग्लादेश को लेकर कर दी ‘भविष्यवाणी’

    Pakistan Bangladesh Politics: ओवैसी के बयान पर भड़के देवकीनंदन ठाकुर, पाकिस्तान–बांग्लादेश को लेकर कर दी ‘भविष्यवाणी’

    New Delhi: हिजाब को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर सियासी और धार्मिक हलकों में घमासान मच गया है। कथावाचक और धार्मिक नेता देवकीनंदन ठाकुर ने ओवैसी पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि अगर उनका सपना है कि भारत में हिजाब पहनने वाली महिला प्रधानमंत्री बने, तो “हमारा भी सपना है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में तिलक और भगवा वस्त्र पहनने वाले लोग सत्ता में आएं।”

    देवकीनंदन ठाकुर ने इसे विचारधाराओं की टक्कर बताते हुए कहा कि जैसे ओवैसी भविष्य की कल्पना कर रहे हैं, वैसे ही सनातन समाज भी अपनी आकांक्षाएं रखता है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    ओवैसी के बयान पर बीजेपी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। बीजेपी सांसद अनिल बोंडे ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए कहा कि ओवैसी “आधा सच” बोल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई मुस्लिम महिलाएं हिजाब को मजबूरी मानती हैं और ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी गुलामी पसंद नहीं करता।

    गौरतलब है कि ओवैसी ने सोलापुर की जनसभा में भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा था कि भारत में कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है और भविष्य में हिजाब पहनने वाली महिला भी इस पद तक पहुंचेगी। इसी बयान ने अब सियासी आग में घी डालने का काम किया है।

  • Maharashtra Political News: ठाणे में पानी-कचरे की समस्या जस की तस, महायुति के ‘सभ्य शहर’ दावे पर सुप्रिया सुले का हमला

    Maharashtra Political News: ठाणे में पानी-कचरे की समस्या जस की तस, महायुति के ‘सभ्य शहर’ दावे पर सुप्रिया सुले का हमला

    ठाणे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने ठाणे की बदहाल बुनियादी सुविधाओं को लेकर सत्तारूढ़ महायुति सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भले ही सरकार ठाणे को “सभ्य शहर” बताने के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहां आज भी पानी की किल्लत, कूड़ाघरों की कमी और नागरिक सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।

    नगर निकाय चुनाव से पहले एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सुले ने कहा कि ठाणे कभी छोटा शहर था, जहां बेहतर जीवन की उम्मीद में देश-प्रदेश से लोग आए। लेकिन आज वही लोग बुनियादी जरूरतों के लिए जूझ रहे हैं।

    सुले ने विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर धन स्वीकृत किए जाने के सरकारी दावों पर भी सवाल उठाए और कहा कि अगर वाकई इतना पैसा आया है तो पानी, कचरा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याएं अब तक क्यों नहीं सुलझीं। उन्होंने मतदाताओं से “बदलाव की भाषा” बोलने और निकाय चुनाव में सत्ताधारियों को जवाब देने की अपील की।

  • Mumbai Manpa Election 2026:मुंबई मनपा चुनाव 2026: कांग्रेस ने की निरीक्षकों की नियुक्ति

    Mumbai Manpa Election 2026:मुंबई मनपा चुनाव 2026: कांग्रेस ने की निरीक्षकों की नियुक्ति

    मुंबई। मुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 को देखते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मुंबई के लिए जिलेवार निरीक्षकों की नियुक्ति की है। पार्टी ने अपने सभी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे कांग्रेस की मजबूत चुनावी प्रदर्शन के लिए एकजुट होकर काम करें।

    मुंबई उत्तर के निरीक्षक चरण सिंह सप्रा होंगे, जबकि मुंबई उत्तर-पूर्व के लिए जॅनेट डी’सूझा और मुंबई उत्तर-पश्चिम के लिए राजेश शर्मा नियुक्त किए गए हैं। मुंबई उत्तर-मध्य का प्रभार शिवजी सिंह को दिया गया है, मुंबई दक्षिण-मध्य के लिए सचिन सावंत और मुंबई दक्षिण के लिए भाई जगताप जिम्मेदार होंगे।

    कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व मुंबई प्रभारी यू. बी. वेंकटेश ने सभी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे संगठनात्मक रूप से सक्रिय रहें और चुनावी तैयारियों में पूर्ण सहयोग दें। पार्टी इस बार मुंबई में मजबूत प्रदर्शन के लिए पूरी तरह जुटी हुई है।

  • Polution: BJP शासन में धूल प्रदूषण पर आदेश जारी, लेकिन कार्रवाई का कोई हिसाब नहीं : RTI से खुलासा

    Polution: BJP शासन में धूल प्रदूषण पर आदेश जारी, लेकिन कार्रवाई का कोई हिसाब नहीं : RTI से खुलासा

    डबल इंजन सरकार में भी दमघोंटू लापरवाही

    डबल इंजन सरकार में भी दमघोंटू लापरवाही

    RTI LOGO

    R. S. Network

    मुंबई। केंद्र और राज्य—दोनों जगह भाजपा की “डबल इंजन सरकार” होने के बावजूद मुंबई आज भी धूल प्रदूषण से कराह रही है। हालात इतने बदतर हैं कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा जारी किए गए सख्त पर्यावरणीय आदेशों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जानकारी तक खुद सरकारी महकमों के पास मौजूद नहीं है। यह चौंकाने वाला सच एक आरटीआई आवेदन के जवाब में सामने आया है, जिसने प्रशासनिक लापरवाही की परतें खोल दी हैं।

    हाईकोर्ट का आदेश, पर अमल नदारद

    पिछले साल मई में बीएमसी के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए सभी निर्माण स्थलों पर वायु गुणवत्ता सेंसर और एलईडी डिस्प्ले लगाना अनिवार्य किया था। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना और सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया था। लेकिन हकीकत यह है कि इन आदेशों का कितना पालन हुआ, कितनी कार्रवाई हुई और कितने बिल्डरों पर जुर्माना लगा—इसका कोई समेकित रिकॉर्ड मौजूद ही नहीं है।

    RTI में सरकारी स्वीकारोक्ति

    सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र घाडगे द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में बीएमसी के पर्यावरण विभाग ने स्वीकार किया कि कितने निर्माण स्थलों पर सेंसर लगाए गए, इसकी जानकारी नहीं, नियम तोड़ने वालों पर कितनी कार्रवाई हुई, इसका कोई डेटा नहीं, इस योजना पर कितना सरकारी पैसा खर्च हुआ, इसका भी कोई विवरण उपलब्ध नहीं, इतना ही नहीं, विभाग ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि जानकारी अलग-अलग वार्ड कार्यालयों से मांगी जा सकती है।

    सवालों के घेरे में डबल इंजन सरकार

    जहां भाजपा बार-बार “डबल इंजन सरकार” के फायदे गिनाती है, वहीं यह मामला दिखाता है कि जिम्मेदारी का इंजन ही गायब है। शहर स्तर पर आदेश जारी होते हैं, लेकिन उसकी निगरानी के लिए न तो कोई केंद्रीय तंत्र है और न ही जवाबदेही तय की गई है।

    कार्यकर्ता का सीधा आरोप

    जितेंद्र घाडगे ने कहा कि जब सरकार और नगर निगम दोनों भाजपा के नियंत्रण में हैं, तब भी अगर हाईकोर्ट से जुड़े आदेशों की निगरानी नहीं हो रही, तो यह सीधी प्रशासनिक विफलता है। आदेश केवल कागज़ों में रह गए हैं और जनता प्रदूषण की कीमत अपनी सेहत से चुका रही है।”

    निर्माण माफिया को खुली छूट?

    मुंबई में मेट्रो, कोस्टल रोड, पुनर्विकास परियोजनाओं और ऊंची इमारतों के निर्माण से धूल प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। आरोप है कि सरकारी ढील और निगरानी के अभाव में निर्माण माफिया को खुली छूट मिल रही है, जबकि आम नागरिक सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं।

    जनता पूछ रही है सवाल कि जब केंद्र, राज्य और नगर निकाय—तीनों जगह भाजपा का शासन है, तब भी अगर पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दे पर यह हाल है, तो सवाल उठना लाज़िमी है कि क्या डबल इंजन सरकार सिर्फ नारों तक सीमित है, और ज़मीनी स्तर पर सरकारी महकमे बेलगाम हैं?

  • खोपोली हत्याकांड: राजनीतिक रंजिश में नगरसेविका के पति मंगेश कालोखे की हत्या, दो कॉन्ट्रैक्ट किलर गिरफ्तार, एक फरार

    खोपोली हत्याकांड: राजनीतिक रंजिश में नगरसेविका के पति मंगेश कालोखे की हत्या, दो कॉन्ट्रैक्ट किलर गिरफ्तार, एक फरार

    खोपोली में दिनदहाड़े हत्या का खुलासा, सुपारी देकर की गई वारदात, पुलिस जांच तेज

    नवी मुंबई।खोपोली नगर परिषद की नवनिर्वाचित शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) की नगरसेविका मानसी कालोखे के पति मंगेश कालोखे (45) की हत्या मामले में रायगढ़ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और कॉन्ट्रैक्ट किलरों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, इस सनसनीखेज हत्याकांड का एक मुख्य कॉन्ट्रैक्ट किलर अब भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

    व्यस्त चौराहे पर दिनदहाड़े हत्या

    गौरतलब है कि 26 दिसंबर की सुबह करीब 7 बजे, खोपोली के एक व्यस्त चौराहे पर मंगेश कालोखे की तलवार, कोयता और कुल्हाड़ी से बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। घटना के वक्त वे अपनी दो बेटियों को स्कूल छोड़कर बाइक से घर लौट रहे थे।पुलिस के अनुसार, हमलावर पहले से ही काले रंग की कार में घात लगाकर बैठे थे और वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हो गए।

    मुख्य साजिशकर्ता रविंद्र देवकर

    रायगढ़ की पुलिस अधीक्षक आंचल दलाल ने बताया कि इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता रविंद्र देवकर है, जो एनसीपी (अजित पवार गुट) की नेता उर्मिला देवकर का पति है।हाल ही में हुए खोपोली नगर परिषद चुनाव में मानसी कालोखे ने उर्मिला देवकर को पराजित किया था, जिसके बाद राजनीतिक रंजिश के चलते हत्या की साजिश रची गई।सुपारी देकर कराई गई हत्यापुलिस के अनुसार, रविंद्र देवकर ने मंगेश कालोखे की हत्या के लिए तीन कॉन्ट्रैक्ट किलरों को सुपारी दी थी।हत्या को अंजाम देने वाले कुल पांच आरोपियों में—रविंद्र देवकर का बड़ा बेटा दर्शन देवकर,उसका बॉडीगार्ड महेश धायतडाक,और तीन कॉन्ट्रैक्ट किलर शामिल हैं।इनमें से दो कॉन्ट्रैक्ट किलरों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि मुख्य कॉन्ट्रैक्ट किलर फरार है।

    एनसीपी नेताओं की भूमिका की जांच

    एसपी आंचल दलाल ने बताया कि पुलिस इस मामले में रायगढ़ जिला एनसीपी अध्यक्ष सुधाकर घारे और एनसीपी प्रवक्ता भारत भगत की भूमिका की भी जांच कर रही है।मृतक के भतीजे द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में दोनों के नाम शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि मुख्य कॉन्ट्रैक्ट किलर की गिरफ्तारी के बाद ही इनकी भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।अब तक 9 आरोपी गिरफ्तारइससे पहले, हत्या के 48 घंटे के भीतर पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें रविंद्र देवकर, उसकी पत्नी उर्मिला देवकर, बेटे दर्शन और धनंजयएनसीपी समर्थक विशाल देशमुख, दिलीप पवार, महेश धायतडाक, सागर मोरे, सचिन खराडे शामिल हैं।वहीं, एफआईआर में नामजद सामाजिक कार्यकर्ता सचिन चव्हाण की तलाश अभी भी जारी है।जांच तेज, जल्द गिरफ्तारी का दावापुलिस का कहना है कि मामले की जांच तेज़ी से जारी है और फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।