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The real test is not whether you avoid this failure, because you won’t. It’s whether you let it harden or shame you into inaction, or whether you learn from it; whether you choose to persevere.

  • PSU Banks Record Profit: PSU बैंकों ने कमाया रिकॉर्ड मुनाफा, सरकार ने दी सतर्क रहने की सलाह!

    PSU Banks Record Profit: PSU बैंकों ने कमाया रिकॉर्ड मुनाफा, सरकार ने दी सतर्क रहने की सलाह!

    PSU Banks Record Profit: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए संयुक्त रूप से लगभग ₹1.98 लाख करोड़ का रिकॉर्ड शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। यह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के इतिहास में सरकारी बैंकों का अब तक का सबसे बड़ा लाभ माना जा रहा है। इस उपलब्धि के बीच वित्त मंत्रालय ने बैंकों को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए खर्च में अनुशासन बनाए रखने और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।

    वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक की, जिसमें बैंकिंग क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, भविष्य की चुनौतियों और विकास की संभावनाओं पर चर्चा की गई। बैठक में अधिकारियों ने बैंकों की लाभप्रदता की सराहना की, लेकिन साथ ही उन्हें सतर्क रहने की भी सलाह दी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी बैंकों की बेहतर वित्तीय स्थिति के पीछे गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) में कमी, ऋण वसूली में सुधार, डिजिटल बैंकिंग का विस्तार और क्रेडिट ग्रोथ जैसे प्रमुख कारण रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग सुधारों और सख्त निगरानी के कारण सरकारी बैंकों की बैलेंस शीट पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है।

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    वित्त मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वे अपने परिचालन खर्चों पर नियंत्रण बनाए रखें और संसाधनों का उपयोग सोच-समझकर करें। वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियों, भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना आवश्यक बताया गया है।

    बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि रिकॉर्ड मुनाफा भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बैंकिंग प्रणाली में बढ़ते विश्वास का संकेत है। मजबूत बैंकिंग व्यवस्था उद्योगों, व्यापार और उपभोक्ताओं को ऋण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलती है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल बैंकिंग, फिनटेक सहयोग और तकनीकी नवाचार सरकारी बैंकों की वृद्धि को और मजबूत कर सकते हैं। हालांकि, लाभप्रदता बनाए रखने के लिए बैंकों को सतर्कता, लागत नियंत्रण और बेहतर ग्राहक सेवाओं पर लगातार ध्यान देना होगा।

    रिकॉर्ड मुनाफे के बावजूद वित्त मंत्रालय का संदेश स्पष्ट है कि बैंक केवल वर्तमान उपलब्धियों पर निर्भर न रहें, बल्कि भविष्य की संभावित चुनौतियों के लिए भी तैयार रहें। इससे बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता और देश की आर्थिक मजबूती दोनों को लाभ मिलेगा।

  • Adani Group Initiative: अडानी समूह और गुजरात सरकार मिलकर कच्छ के 11 आईटीआई संस्थानों का करेंगे आधुनिकीकरण!

    Adani Group Initiative: अडानी समूह और गुजरात सरकार मिलकर कच्छ के 11 आईटीआई संस्थानों का करेंगे आधुनिकीकरण!

    Adani Group Initiative: Adani Group की इकाई अडानी स्किल्स एंड एजुकेशन (एएसई) ने गुजरात सरकार के सहयोग से कच्छ क्षेत्र के 11 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के विकास और आधुनिकीकरण की शुरुआत की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उद्योग-तैयार कौशल प्रदान करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

    कंपनी द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस परियोजना के तहत आईटीआई संस्थानों में पाठ्यक्रम उन्नयन, प्रशिक्षकों का विकास, आधुनिक बुनियादी ढांचा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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    इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में रोजगार के लिए होने वाले पलायन को कम करना और नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स तथा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करना है। इस परियोजना की शुरुआत ‘कर्म उत्सव’ नामक कार्यक्रम के दौरान की गई, जिसमें 650 से अधिक छात्र, शिक्षक, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए।

    कार्यक्रम में गुजरात सरकार के श्रम, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री कुंवरजीभाई बावलिया, राज्य मंत्री कांतिलाल अमृतिया, कच्छ जिले के वरिष्ठ नेता और अन्य सरकारी प्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा अडानी समूह के वरिष्ठ अधिकारी, फैकल्टी सदस्य और सभी 11 सरकारी आईटीआई संस्थानों के छात्र भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

    अडानी स्किल्स एंड एजुकेशन के सीईओ Robin Bhowmik ने कहा कि कच्छ क्षेत्र उनकी दीर्घकालिक कौशल विकास योजना का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार और आईटीआई संस्थानों के साथ मिलकर एक ऐसा प्रशिक्षित और उद्योग-तैयार कार्यबल तैयार किया जाएगा, जो क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभा सके।

  • RBI Warning: पश्चिम एशिया संकट और महंगे कच्चे तेल से भारत की विकास दर व महंगाई पर खतरा!

    RBI Warning: पश्चिम एशिया संकट और महंगे कच्चे तेल से भारत की विकास दर व महंगाई पर खतरा!

    RBI Warning: Reserve Bank of India ने शुक्रवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं। आरबीआई के अनुसार, इन परिस्थितियों का असर आर्थिक विकास दर और महंगाई दोनों पर पड़ने की आशंका है।

    रिपोर्ट में कहा गया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं, वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और मौसम से जुड़ी चिंताएं निकट भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में अनिश्चितता भी चिंता का विषय बनी हुई है।

    केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी कि इन परिस्थितियों का असर कॉर्पोरेट आय और बैंकों के ऋण पोर्टफोलियो पर भी पड़ सकता है। हालांकि आरबीआई ने यह भी कहा कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली की स्थिति मजबूत बनी हुई है और देश की वित्तीय व्यवस्था प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम है।

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    रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय पर लगातार जोर, कॉर्पोरेट और बैंकों की मजबूत बैलेंस शीट तथा प्रमुख देशों के साथ व्यापार समझौते निवेश और विकास को समर्थन देंगे।

    आरबीआई ने यह भी कहा कि सरकार की राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की प्रतिबद्धता और केंद्रीय बैंक के तरलता बढ़ाने के कदम बॉन्ड यील्ड पर दबाव कम करने में मददगार साबित होंगे।

    हाल ही में Nirmala Sitharaman ने भी कहा था कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल, उर्वरक और सोने की कीमतों में तेजी से भारत के विदेशी मुद्रा व्यय पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन जरूरी आयातों का भुगतान विदेशी मुद्रा में करना पड़ता है, जिससे आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।

  • IndiGo Q4 Results: इंडिगो को चौथी तिमाही में 2,537 करोड़ रुपये का भारी नुकसान!

    IndiGo Q4 Results: इंडिगो को चौथी तिमाही में 2,537 करोड़ रुपये का भारी नुकसान!

    IndiGo Q4 Results: देश की प्रमुख विमान सेवा कंपनी IndiGo को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 2,537 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। हालांकि विदेशी मुद्रा प्रभाव और विशेष मदों को हटाने पर कंपनी ने लाभ दर्ज किया है।

    प्रमुख एयरलाइन कंपनी IndiGo ने शुक्रवार को अपने चौथी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए, जिसमें कंपनी को समेकित आधार पर 2,537 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कंपनी के निदेशक मंडल ने बैठक में इन परिणामों को मंजूरी दी।

    हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया कि यदि विदेशी मुद्रा विनिमय प्रभाव और विशेष मदों को अलग कर दिया जाए, तो चौथी तिमाही में उसे 1,921 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है।

    पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में इंडिगो को 3,068 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। वहीं विशेष मदों और मुद्रा विनिमय प्रभाव को हटाने पर लाभ 2,981 करोड़ रुपये रहा था।

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    कंपनी के अनुसार, मार्च महीने में पश्चिम एशिया संकट के कारण विमान सेवाओं पर असर पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उसकी उपलब्ध क्षमता में सालाना 3.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़कर 43.6 अरब सीट-किलोमीटर तक पहुंच गई।

    हालांकि यात्रियों की संख्या में 1.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 3.16 करोड़ रह गई। दूसरी ओर परिचालन से मिलने वाला राजस्व 1.3 प्रतिशत बढ़कर 22,438 करोड़ रुपये पहुंच गया।

    कंपनी ने बताया कि विमान ईंधन की औसत लागत सालाना आधार पर 4.8 प्रतिशत घटकर 1.53 रुपये प्रति किलोमीटर प्रति सीट रही, जबकि अन्य परिचालन खर्च 7.3 प्रतिशत बढ़ गए। प्रति सीट प्रति किलोमीटर कमाई में भी 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इंडिगो को 2,394 करोड़ रुपये का कुल नुकसान हुआ। हालांकि विशेष मदों और विदेशी मुद्रा प्रभाव को हटाने पर कंपनी ने 7,503 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया।

    कंपनी के प्रबंध निदेशक Rahul Bhatia ने कहा कि बीता वित्त वर्ष एयरलाइन उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण रहा, जिससे मुनाफे पर असर पड़ा। इसके बावजूद कंपनी का परिचालन प्रदर्शन मजबूत बना रहा और कुल आय में छह प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

  • Weak Monsoon Forecast Hits Market: कमजोर मानसून की आशंका से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1092 अंक टूटा!

    Weak Monsoon Forecast Hits Market: कमजोर मानसून की आशंका से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1092 अंक टूटा!

    Weak Monsoon Forecast Hits Market: कमजोर मानसून की आशंका ने शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। मौसम विभाग की कम बारिश की भविष्यवाणी के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ी और बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब डेढ़ फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

    भारतीय मौसम विभाग द्वारा इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहने की संभावना जताए जाने के बाद घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। निवेशकों की बिकवाली के दबाव में BSE Sensex 1,092.06 अंक यानी 1.44 प्रतिशत टूटकर 74,775.74 अंक पर बंद हुआ, जो 13 मई के बाद का इसका सबसे निचला स्तर है।

    वहीं Nifty 50 भी 359.40 अंक यानी 1.5 प्रतिशत गिरकर 23,547.75 अंक पर पहुंच गया। यह 20 मई के बाद का निचला स्तर रहा।

    शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी देखने को मिली थी और सेंसेक्स 76,220 अंक तक पहुंचा, लेकिन मानसून से जुड़ी चिंताओं के बाद बिकवाली तेज हो गई। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 1,631 अंकों का बड़ा उतार-चढ़ाव देखा।

    संबंधित ख़बरें: Air Cargo Growth: पश्चिम एशिया संकट के बावजूद अप्रैल में हवाई माल परिवहन 4% बढ़ा!

    मौसम विभाग ने कहा कि इस साल मानसून सीजन में दीर्घावधि औसत का लगभग 90 प्रतिशत ही वर्षा होने की संभावना है। इससे कृषि, ग्रामीण मांग और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई, जिसका असर सीधे शेयर बाजार पर दिखाई दिया।

    वृहद बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप-50 में 1.49 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक में 0.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। आईटी सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए।

    तेल एवं गैस, धातु, बैंकिंग, ऑटो, एफएमसीजी, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली रही। हालांकि आईटी शेयरों में कुछ खरीदारी देखने को मिली, जिससे नुकसान कुछ हद तक सीमित रहा।

    कंपनियों की बात करें तो इंडिगो का शेयर चौथी तिमाही में 2,537 करोड़ रुपये के नुकसान की खबर के बाद 3.55 प्रतिशत गिर गया। इसके अलावा पावर ग्रिड, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, रिलायंस इंडस्ट्रीज और हिंदुस्तान यूनिलीवर समेत कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही।

    दूसरी ओर, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसे आईटी शेयरों में तेजी देखने को मिली। वैश्विक बाजारों में एशियाई बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा, जबकि यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार में हल्की बढ़त दर्ज की गई।

  • Air Cargo Growth: पश्चिम एशिया संकट के बावजूद अप्रैल में हवाई माल परिवहन 4% बढ़ा!

    Air Cargo Growth: पश्चिम एशिया संकट के बावजूद अप्रैल में हवाई माल परिवहन 4% बढ़ा!

    Air Cargo Growth: पश्चिम एशिया में जारी संकट और हवाई क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद वैश्विक हवाई माल परिवहन में अप्रैल महीने के दौरान चार प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (IATA) की ओर से जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

    रिपोर्ट के अनुसार, कार्गो टन-किलोमीटर के आधार पर मापा जाने वाला हवाई माल परिवहन पिछले वर्ष अप्रैल की तुलना में इस वर्ष अप्रैल में चार प्रतिशत बढ़ा है। हालांकि इस दौरान कुल परिवहन क्षमता में 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    IATA ने बताया कि पश्चिम एशिया के कई देशों में हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों के कारण अंतर्राष्ट्रीय हवाई माल परिवहन क्षमता 0.9 प्रतिशत तक घट गई। 28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते समुद्री जहाजों की आवाजाही लगभग प्रभावित हो गई, जिसके कारण कई वस्तुओं का व्यापार हवाई मार्ग की ओर स्थानांतरित हुआ।

    संबंधित ख़बरें: NTPC’s Q4 Profit: एनटीपीसी का चौथी तिमाही का मुनाफा 34 प्रतिशत बढ़कर 10,615 करोड़ पर!

    IATA के महानिदेशक विली वॉल्श ने कहा कि एयर कार्गो की मांग में वृद्धि का सबसे बड़ा कारण एशिया से जुड़े व्यापार प्रवाह में मजबूती रहा। उन्होंने कहा कि सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद परिचालन माहौल लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख हवाई केंद्र प्रभावित हुए हैं, जिससे व्यापार मार्गों में बदलाव आया और कई महत्वपूर्ण रूटों पर क्षमता सीमित हो गई। समर्पित मालवाहक विमानों ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है।

    क्षेत्रीय आंकड़ों के अनुसार, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में क्षमता 5.3 प्रतिशत और वास्तविक माल ढुलाई 10.5 प्रतिशत बढ़ी। वहीं पश्चिम एशिया में क्षमता 22.9 प्रतिशत और वास्तविक माल ढुलाई 18.2 प्रतिशत घट गई। अफ्रीका में क्षमता 9.4 प्रतिशत कम होने के बावजूद हवाई माल परिवहन 7.7 प्रतिशत बढ़ा।

    यूरोप में क्षमता और माल ढुलाई क्रमशः तीन प्रतिशत और छह प्रतिशत बढ़ी, जबकि उत्तर अमेरिका में क्षमता 1.2 प्रतिशत और माल ढुलाई पांच प्रतिशत बढ़ी। दूसरी ओर लातिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों में क्षमता बढ़ने के बावजूद वास्तविक हवाई माल परिवहन में 2.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

  • NTPC’s Q4 Profit: एनटीपीसी का चौथी तिमाही का मुनाफा 34 प्रतिशत बढ़कर 10,615 करोड़ पर!

    NTPC’s Q4 Profit: एनटीपीसी का चौथी तिमाही का मुनाफा 34 प्रतिशत बढ़कर 10,615 करोड़ पर!

    NTPC’s Q4 Profit: सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनी एनटीपीसी को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में समेकित आधार पर 10,615 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ जो सालाना आधार पर 34 प्रतिशत अधिक है। कंपनी के निदेशक मंडल की शनिवार को हुई बैठक में वित्तीय परिणामों को मंजूरी प्रदान की गयी।

    संबंधित खबरें: India-Canada Trade Agreement: व्यापार समझौते को लेकर भारत और कनाडा के बीच बढ़ेगी बातचीत!

    एकल आधार पर एनटीपीसी को चौथी तिमाही में 8,747 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ जो सालाना 15 प्रतिशत की वृद्धि दिखाता है। सहयोगी कंपनियों से मुनाफे में हिस्सेदारी 870 रुपये रही जबकि संयुक्त उद्यमों से प्राप्त हिस्सेदारी 1,194 करोड़ रुपये रही

    तिमाही में कंपनी का एकल परिचालन राजस्व 43,904 करोड़ रुपये से घटकर 43,111 करोड़ रुपये रह गया। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान एनटीपीसी का एकल शुद्ध मुनाफा 23,162 करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 19,649 करोड़ रुपये था। हालांकि इस दौरान परिचालन राजस्व 1,70,037 करोड़ रुपये से घटकर 1,65,494 करोड़ रुपये रहा गया।

  • India-Canada Trade Agreement: व्यापार समझौते को लेकर भारत और कनाडा के बीच बढ़ेगी बातचीत!

    India-Canada Trade Agreement: व्यापार समझौते को लेकर भारत और कनाडा के बीच बढ़ेगी बातचीत!

    India-Canada Trade Agreement: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल देश के व्यापार और उद्योग जगत के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ शनिवार को कनाडा की यात्रा के लिए प्रस्थान कर रहे हैं और इस दौरान वहां अपने समकक्ष वाणिज्य मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ बैठक और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से भी मिलेंगे।

    गोयल ने यहां संवाददाताओं से बातचीत कहा कि उनके साथ कनाडा जा रहे व्यावसायिक शिष्टमंडल में करीब स्थानीय व्यापार एवं उद्योग जगत के करीब 150 प्रतिनिधि शामिल हैं। गोयल ने कहा कि इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री श्री कार्नी से भी मुलकात होगी जिन्होंने इस यात्रा को विशेष महत्व देते हुए इस मुलाकात के लिए समय रखा है।

    गोयल ने उम्मीद जतायी कि इस यात्रा से भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सेपा) के लिए चल रही वार्ता को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस बातचीत में दोनों देशों के बीच व्यापार को पांच साल में सालाना 50 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर ले जाने का लक्ष्य है। कनाडा को भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार और निवेश का स्रोत बताते हुए गोयल ने कहा कि दोनों देश एक दूसरे के पूरक है।

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    कनाडा खनिज ईंधन और यूरेनियम का प्रमुख उत्पादक देश है और उन्नत प्रौद्योगिकी और निवेश का स्रोत रहा है। वहां की 600 कंपनियां भारत में काम कर रही है। वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत कौशल और प्रतिभाओं का प्रमुख स्रोत है। इस तरह दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक दूसरे की पूरक हैं। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार इस यात्रा के दौरान 25 मई को ओटावा में बैठकें होंगी और 26 से 27 मई तक टोरंटो में दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    यह यात्रा मार्च में प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा के दौरान भारत और कनाडा के प्रधानमंत्रियों द्वारा दिए गए निर्देशों को आगे बढ़ाती है। इसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और लोगों से लोगों के बीच संबंधों जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को नई गति प्रदान करना है। इस यात्रा का मुख्य केंद्र बिंदु सेपा पर चल रही वार्ताओं को आगे बढ़ाना है। इस समझौते के लिए ‘नियम और शर्तें’ मार्च में प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित की गई थीं।

    वार्ताओं का पहला दौर मार्च में वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया था, और दूसरा दौर 8 मई को संपन्न हुआ। इस यात्रा के दौरान, 25 से 29 मई तक ओटावा में वार्ताओं का एक और दौर आयोजित किया जाएगा। दोनों पक्ष 2026 के अंत तक एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी सीईपीए को शीघ्रता से अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार का आंकड़ा 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर था। दोनों पक्षों का माना है कि इसमें विभिन्न क्षेत्रों में विस्तार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

  • Bhavya Scheme Guidelines: केंद्र सरकार की ‘भव्य’ योजना को मिली रफ्तार, 50 इंडस्ट्रियल पार्क पर फोकस!

    Bhavya Scheme Guidelines: केंद्र सरकार की ‘भव्य’ योजना को मिली रफ्तार, 50 इंडस्ट्रियल पार्क पर फोकस!

    Bhavya Scheme Guidelines: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने देशभर में निवेश-तैयार एवं विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए मार्च में मंजूर ‘भव्य’ योजना के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत परिचालन दिशा-निर्देश जारी किए कर दिये हैं और चार महीने में 50 औद्योगिक पार्कों के प्रस्ताव को मंजूरी देने का लक्ष्य है।

    इस योजना के तहत पूरे देश में 100 औद्योगिक पार्कों की स्थापना का लक्ष्य है जो 100 एकड़ से 1000 एकड़ तक के हो सकते हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्यों में हम 25 एकड़ के पार्क को भी मंजूरी दे सकते हैं। दिशानिर्देशों के तहत केंद्र सरकार भव्य के तहत राज्यों को प्रति पार्क प्रति एकड़ जरूरी सुविधाओं के विकास के लिए एक करोड़ रुपये या जमीन की प्रति एकड़ बाजार दर में से जो भी कम होगा, उसके बाराबर सहायता देगी।

    मंत्रिमंडल की मंजूरी के अनुसार इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 से 2031-32 तक छह वर्षों की अवधि में 100 औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे, जिनके लिए लगभग 33,660 करोड़ रुपये का कुल वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है। पहले चरण में राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा के आधार पर चयन प्रक्रिया के माध्यम से 50 तक औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक पार्क के लिए राज्यों को विशेष प्रयोजन इकाई का गठन करना होगा जो इन औद्योगिक पट्टियों में बुनियादी सुविधाओं का प्रबंधन करेगी।

    गोयल ने कहा, ‘सरकार इस योजना को लेकर कितनी सक्रियता से काम कर रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी गत 18 मार्च को मिली थी और इसे अप्रैल में अधिसूचित कर दिया गया था। अब इसके दिशा निर्देश जारी कर दिये गये हैं तथा चार महीने में 50 औद्योगिक पार्क मंजूर करने की तैयारी है।’

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    गोयल ने कहा कि इस चार महीने को भी दो भागों में बांट दिया गया है और पहले दो महीनों में 20 पार्क मंजूर कर दिये जाएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की सरकारें इस योजना के लिए प्रस्ताव जल्द प्रस्तुत कर सकती है।

    उन्होंने बताया कि भव्य योजना का उद्देश्य “मेक इन इंडिया”, “पीएम गति शक्ति” तथा भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र बनाने की सरकार की व्यापक दृष्टि के अनुरूप एकीकृत औद्योगिक अवसंरचना का विकास कर भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।

    भव्य के लिए जारी दिशा-निर्देशों में पार्कों की पात्रता के मानदंड, परियोजना की चयन प्रक्रिया, वित्तपोषण संरचना, प्रशासनिक ढांचा, निगरानी प्रणाली तथा कार्यान्वयन व्यवस्था सहित विस्तृत रूपरेखा प्रदान की गई है।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार इस योजना का मुख्य उद्देश्य “निवेश-तैयार” औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है, जिसमें प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, विश्वसनीय उपयोगिता सेवाएं, श्रमिक सहायता अवसंरचना, डिजिटल शासन प्रणाली तथा सतत विकास संबंधी सुविधाएं शामिल होंगी।

    दिशा-निर्देशों के अनुसार ग्रीनफील्ड तथा पात्र ब्राउनफील्ड औद्योगिक पार्कों दोनों का विकास किया जा सकेगा। गैर-पहाड़ी राज्यों के लिए न्यूनतम 100 एकड़ भूमि तथा पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और छोटे राज्यों के लिए न्यूनतम 25 एकड़ भूमि की आवश्यकता निर्धारित की गई है। योजना के अंतर्गत 1000 एकड़ तक के बड़े औद्योगिक पार्कों पर भी विचार किया जा सकेगा।

    चुनौती-आधारित चयन प्रक्रिया के तहत प्रस्तावों का मूल्यांकन मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, स्थल की उपयुक्तता, अवसंरचना की गुणवत्ता, औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती, नीतिगत सुविधा, डिजिटल शासन की तैयारी तथा दीर्घकालिक स्थिरता जैसे वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर किया जाएगा।

    दिशा-निर्देशों में भूमिगत उपयोगिता प्रणाली, जल एवं अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट सिस्टम, नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना, श्रमिक आवास, परीक्षण प्रयोगशालाएं, डिजिटल सिंगल-विंडो प्रणाली, कौशल विकास सुविधाएं तथा एकीकृत साझा अवसंरचना जैसे घटकों की गुणवत्ता के मूल्यांकन का भी प्रावधान किया गया है।

    योजना के अंतर्गत परियोजनाओं का कार्यान्वयन कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत गठित एसपीवी के माध्यम से किया जाएगा। ये एसपीवी परियोजना की योजना, विकास, संचालन, प्रबंधन, निवेशक सुविधा तथा दीर्घकालिक रखरखाव के लिए जिम्मेदार होंगी।

    राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (एनआईसीडीसी) को योजना के कार्यान्वयन एवं निगरानी के लिए परियोजना प्रबंधन एजेंसी (पीएमए) नियुक्त किया गया है। दिशा-निर्देशों में निजी डेवलपर्स की भागीदारी हेतु परियोजना-विशिष्ट एसपीवी के माध्यम से औद्योगिक पार्क विकास का भी प्रावधान किया गया है, जिसमें स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा, पारदर्शिता सुरक्षा उपाय और जवाबदेही तंत्र निर्धारित किए गए हैं।

    योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देशों में जीआईएस-आधारित निगरानी प्रणाली, समय-समय पर प्रगति रिपोर्टिंग, ऑडिट व्यवस्था तथा डीपीआईआईटी सचिव की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय स्तरीय संचालन समिति द्वारा निगरानी का प्रावधान शामिल किया गया है। योजना के दिशा-निर्देशों में लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास, सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, उपयोगिता अवसंरचना तथा औद्योगिक विकास से संबंधित केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ समन्वय का भी प्रावधान किया गया है।

  • India-Cyprus Agreement: भारत और साइप्रस ने रक्षा, साइबर सुरक्षा सहित छह क्षेत्रों में समझौते किये, आठ घोषणाएं भी की!

    India-Cyprus Agreement: भारत और साइप्रस ने रक्षा, साइबर सुरक्षा सहित छह क्षेत्रों में समझौते किये, आठ घोषणाएं भी की!

    India-Cyprus Agreement: भारत और साइप्रस ने द्विपक्षीय संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत करने के साथ-साथ रक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और समुद्री सहयोग समेत छह क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर किये और संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में आठ घोषणाएं भी की। भारत की तीन दिन की यात्रा पर आये साइप्रस के राष्ट्रपति महामहिम निकोस क्रिस्टोडूलाइड्स के साथ शुक्रवार को यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की द्विवपक्षीय वार्ता के बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये।

    विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों देशों के बीच जिन छह समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए उनमें आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह की स्थापना, वर्ष 2026-2031 के लिए रक्षा सहयोग रोडमैप, साइप्रस के अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल नीति उप मंत्रालय तथा भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच नवाचार और प्रौद्योगिकी सहयोग संबंधी समझौता शामिल है।

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    भारत और साइप्रस ने साइबर सुरक्षा संवाद और कांसुलर संवाद शुरू करने पर भी सहमति जताई, जबकि साइप्रस के लारनाका संयुक्त बचाव समन्वय केंद्र और भारत के रक्षा मंत्रालय के बीच खोज एवं बचाव सहयोग को लेकर तकनीकी व्यवस्था पर भी हस्ताक्षर किये गये। यात्रा के दौरान कूटनीतिक प्रशिक्षण, उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान, तथा वर्ष 2026-2030 के लिए सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े समझौते भी किए गए।

    एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक कदम के तहत साइप्रस ने “व्यापार, संपर्क और समुद्री परिवहन” स्तंभ के अंतर्गत भारत की हिन्द प्रशांत महासागर पहल में शामिल होने की घोषणा की। भारत ने साइप्रस को “भारत स्वास्थ्य पहल सहयोग, हित एवं मैत्री (भीष्म) क्यूब” उपहार स्वरूप देने की घोषणा की। दोनों देशों ने 18 मई को पहली बार “भारत-साइप्रस अंतरिक्ष दिवस” मनाकर अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को भी रेखांकित किया।

    इसके साथ ही साइप्रस ने व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने के लिए मुंबई में “साइप्रस ट्रेड सेंटर” खोलने की मंशा जाहिर की। राष्ट्रपति क्रिस्टोडूलाइड्स की इस यात्रा को भारत और साइप्रस के बीच रणनीतिक, प्रौद्योगिकी और समुद्री क्षेत्रों में सहयोग के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।