Category: Health

The human body has been designed to resist an infinite number of changes and attacks brought about by its environment. The secret of good health lies in successful adjustment to changing stresses on the body.

  • Hit & Run Accident:ठाणे में हिट एंड रन की दो घटनाएं, तेज रफ्तार दोपहिया वाहनों की टक्कर से तीन लोग घायल

    Hit & Run Accident:ठाणे में हिट एंड रन की दो घटनाएं, तेज रफ्तार दोपहिया वाहनों की टक्कर से तीन लोग घायल

    विवियाना मॉल और खोपट रोड पर हुए हादसे, घायलों को छोड़कर फरार हुए बाइक चालक

    ठाणे। ठाणे में अलग-अलग स्थानों पर हुई दो सड़क दुर्घटनाओं में तीन लोग घायल हो गए। दोनों मामलों में तेज रफ्तार दोपहिया वाहनों ने पैदल चल रहे लोगों को टक्कर(Hit & Run Accident) मार दी। हादसे के बाद दोनों बाइक चालक घायलों को उपचार दिलाए बिना मौके से फरार हो गए। पुलिस ने अज्ञात चालकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पहली घटना में मुलुंड निवासी गिरीश चव्हाण और उनकी पत्नी ममता चव्हाण विवियाना मॉल के सामने से गुजर रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए एक अज्ञात दोपहिया वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

    दूसरी घटना खोपट रोड स्थित फीनिक्स अस्पताल के सामने हुई। यहां टहल रही समीक्षा गुप्ता को एक तेज रफ्तार दोपहिया वाहन ने टक्कर मार दी। दुर्घटना में उनके बाएं पैर में फ्रैक्चर हो गया। हादसे के बाद आरोपी चालक मौके से फरार हो गया।

    दोनों घटनाओं में संबंधित पुलिस थानों में अज्ञात वाहन चालकों के खिलाफ हिट एंड रन का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

  • FSSAI Notice Lotte, FNP & Kubera foods: भ्रामक दावों पर FSSAI सख्त, लोट्टे इंडिया, फर्न्स एन पेटल्स और कुबेरा फूड्स को नोटिस

    FSSAI Notice Lotte, FNP & Kubera foods: भ्रामक दावों पर FSSAI सख्त, लोट्टे इंडिया, फर्न्स एन पेटल्स और कुबेरा फूड्स को नोटिस

    New Delhi:देश में खाद्य उत्पादों की लेबलिंग और भ्रामक दावों पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्त रुख अपनाया है। नियामक संस्था ने लोट्टे इंडिया, फर्न्स एन पेटल्स और कुबेरा फूड्स(FSSAI Notice Lotte, FNP & Kubera foods) को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है। एफएसएसएआई का आरोप है कि इन कंपनियों के कुछ खाद्य उत्पादों पर ऐसे दावे किए गए हैं, जो उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं और कई मामलों में लेबलिंग नियमों का भी उल्लंघन हुआ है।

    एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि यदि कंपनियों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संस्था का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं को उत्पादों की सही और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराने तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

    जांच में लोट्टे इंडिया के कई उत्पादों पर नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई। कंपनी पर पुराने प्री-प्रिंटेड लेबल बिना अनुमति इस्तेमाल करने, लोट्टे चॉको पाय पर “100 प्रतिशत शाकाहारी” जैसा भ्रामक दावा करने, पीईपीईआरओ बिस्किट स्टिक्स पर निर्धारित प्रारूप में पोषण संबंधी जानकारी न देने और लॉली ब्लिस लॉलीपॉप में विटामिन संबंधी मानकों का पालन नहीं करने के आरोप हैं। इसके अलावा कुछ उत्पादों की पैकेजिंग से फल होने का आभास दिया गया, जबकि उनमें फल मौजूद नहीं थे और पैक के सामने अनिवार्य डिस्क्लेमर भी नहीं दिया गया।

    कुबेरा फूड्स के ‘सॉफ्ट एंड फ्रेश क्रीम बन पाइनएप्पल’ उत्पाद पर “100 प्रतिशत प्राकृतिक”, “नो प्रिजरवेटिव्स” और “नो कलर्स एंड फ्लेवर्स” जैसे दावे किए गए, जबकि उत्पाद के लेबल पर प्रिजर्वेटिव, सिंथेटिक रंग और फ्लेवरिंग एजेंट का उल्लेख मिला। एफएसएसएआई के अनुसार, ऐसे दावे नियमों के विपरीत हैं।

    वहीं, फर्न्स एन पेटल्स के ‘रोस्टेड ऑलमंड चॉकलेट’ पर “प्रीमियम चॉकलेट” लिखा गया था, जबकि उसमें हाइड्रोजेनेटेड फैट का इस्तेमाल पाया गया। एफएसएसएआई का कहना है कि उत्पाद के दावों और उसकी वास्तविक सामग्री में अंतर होने से उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं।

    एफएसएसएआई ने कहा कि वह उपभोक्ताओं की शिकायतों और स्वतः संज्ञान के आधार पर ऐसे मामलों की लगातार जांच कर रहा है। हाल ही में ‘फ्रेश पनीर’ जैसे दावे को लेकर भी एक अन्य कंपनी को नोटिस जारी किया गया था। संस्था अब सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी कार्रवाई की जानकारी साझा कर रही है और खाद्य उत्पादों पर भ्रामक दावों के खिलाफ सख्त निगरानी जारी रखेगी।

  • Phantom Pain: जानिए क्या है फैंटम पेन, इसके कारण, लक्षण और इलाज!

    Phantom Pain: जानिए क्या है फैंटम पेन, इसके कारण, लक्षण और इलाज!

    Phantom Pain: शरीर के किसी अंग के कट जाने या हटाए जाने के बाद भी उस अंग में दर्द, जलन, झनझनाहट या दबाव महसूस होना फैंटम पेन (Phantom Pain) कहलाता है। यह एक वास्तविक और जटिल चिकित्सीय स्थिति है, जो अक्सर हाथ, पैर, उंगलियां या अन्य अंग कटने के बाद अनुभव की जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दर्द व्यक्ति की कल्पना नहीं होता, बल्कि मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र में होने वाले बदलावों के कारण उत्पन्न होता है।

    क्या होता है फैंटम पेन?
    फैंटम पेन वह स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को उस अंग में दर्द महसूस होता है, जो अब शरीर में मौजूद ही नहीं है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति का पैर दुर्घटना या बीमारी के कारण काटना पड़ा हो, तो उसे कई महीनों या वर्षों बाद भी उसी पैर में दर्द या खुजली महसूस हो सकती है।

    फैंटम पेन के कारण
    फैंटम पेन का सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ इसके पीछे कई संभावित कारण मानते हैं।

    मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में बदलाव:
    जब कोई अंग शरीर से अलग हो जाता है, तब मस्तिष्क का वह हिस्सा, जो उस अंग से जुड़े संकेत प्राप्त करता था, नए तरीके से खुद को व्यवस्थित करने लगता है। इसी प्रक्रिया के दौरान दर्द के संकेत उत्पन्न हो सकते हैं।

    नसों को नुकसान:
    अंग काटे जाने के दौरान आसपास की नसों को क्षति पहुंच सकती है। क्षतिग्रस्त नसें असामान्य संकेत भेज सकती हैं, जिन्हें मस्तिष्क दर्द के रूप में महसूस करता है।

    भावनात्मक और मानसिक कारक:
    तनाव, चिंता और अवसाद जैसी मानसिक स्थितियां भी फैंटम पेन की तीव्रता को बढ़ा सकती हैं।

    फैंटम पेन के लक्षण
    फैंटम पेन के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:

    • तेज या चुभने वाला दर्द
    • जलन या झनझनाहट महसूस होना
    • ऐंठन जैसा दर्द
    • दबाव या कसाव का एहसास
    • ऐसा महसूस होना कि हटाया गया अंग अभी भी अपनी जगह पर मौजूद है

    यह दर्द लगातार भी हो सकता है और बीच-बीच में भी हो सकता है।

    फैंटम पेन का इलाज
    फैंटम पेन का उपचार व्यक्ति की स्थिति और दर्द की गंभीरता के आधार पर किया जाता है।

    दवाइयां
    डॉक्टर दर्द कम करने के लिए कुछ विशेष दर्द निवारक दवाएं, एंटीडिप्रेसेंट्स या एंटी-सीजर दवाएं लिख सकते हैं।

    मिरर थेरेपी
    इस तकनीक में एक दर्पण का उपयोग किया जाता है, जिससे व्यक्ति को ऐसा प्रतीत होता है कि हटाया गया अंग अभी भी मौजूद है। कई मरीजों में इससे दर्द कम होने में मदद मिलती है।

    फिजिकल थेरेपी और व्यायाम
    नियमित व्यायाम और फिजिकल थेरेपी मांसपेशियों को सक्रिय रखने और दर्द को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं।

    मनोवैज्ञानिक सहायता
    काउंसलिंग, रिलैक्सेशन तकनीक और संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT) जैसी विधियां भी फैंटम पेन से निपटने में उपयोगी साबित हो सकती हैं।

    कब डॉक्टर से संपर्क करें?
    यदि अंग कटने के बाद लंबे समय तक दर्द बना रहे, दर्द बहुत अधिक हो या दैनिक जीवन प्रभावित होने लगे, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। सही उपचार और सहयोग से फैंटम पेन के लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

    अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

  • Lazy Keto Diet: वायरल हो रही लेज़ी कीटो डाइट क्या है? एक्सपर्ट से जानिए इस डाइट के बारे ए टू ज़ी!

    Lazy Keto Diet: वायरल हो रही लेज़ी कीटो डाइट क्या है? एक्सपर्ट से जानिए इस डाइट के बारे ए टू ज़ी!

    Lazy Keto Diet: Lazy Keto Diet पारंपरिक कीटो डाइट का एक आसान और कम प्रतिबंधों वाला रूप है। इसमें मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) का सेवन बहुत कम किया जाता है, जबकि प्रोटीन और वसा (फैट) की मात्रा पर ज्यादा सख्ती नहीं बरती जाती। हाल के वर्षों में वजन घटाने की चाह रखने वाले लोगों के बीच यह डाइट काफी लोकप्रिय हुई है।

    क्या है Lazy Keto Diet?
    सामान्य कीटो डाइट में व्यक्ति को प्रतिदिन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट की मात्रा का सटीक हिसाब रखना पड़ता है। वहीं, लेजी कीटो डाइट में केवल कार्बोहाइड्रेट को सीमित करने पर ध्यान दिया जाता है।

    आमतौर पर इस डाइट में:
    प्रतिदिन 20–50 ग्राम से कम कार्बोहाइड्रेट लेने की सलाह दी जाती है।
    प्रोटीन और फैट की मात्रा को सख्ती से ट्रैक करने की आवश्यकता नहीं होती।
    शरीर ऊर्जा के लिए कार्ब्स की बजाय फैट का उपयोग करने लगता है, जिसे कीटोसिस (Ketosis) कहा जाता है।

    Lazy Keto Diet में क्या खा सकते हैं?

    ✔ अंडे
    ✔ मछली और चिकन
    ✔ पनीर और चीज़
    ✔ मक्खन और घी
    ✔ बादाम, अखरोट और अन्य नट्स
    ✔ हरी पत्तेदार सब्जियां
    ✔ एवोकाडो और जैतून का तेल

    किन चीजों से परहेज करना चाहिए?

    ✘ चीनी और मिठाइयां
    ✘ ब्रेड, चावल और रोटी
    ✘ आलू और शकरकंद
    ✘ मीठे पेय पदार्थ
    ✘ अधिकांश पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड

    Lazy Keto Diet के फायदे

    1. वजन घटाने में मददगार
      कम कार्बोहाइड्रेट लेने से शरीर जमा फैट को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करने लगता है, जिससे वजन कम हो सकता है।
    2. फॉलो करना आसान
      पारंपरिक कीटो डाइट की तुलना में इसमें हर भोजन का रिकॉर्ड रखने की जरूरत नहीं होती।
    3. भूख कम लग सकती है
      फैट और प्रोटीन युक्त भोजन लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस करा सकता है।
    4. ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद
      कुछ लोगों में कार्ब्स कम करने से रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

    Lazy Keto Diet के नुकसान

    1. पोषक तत्वों की कमी
      फल, साबुत अनाज और कुछ सब्जियों का सेवन कम होने से विटामिन, मिनरल और फाइबर की कमी हो सकती है।
    2. ‘कीटो फ्लू’ की समस्या
      शुरुआती दिनों में कुछ लोगों को ये लक्षण महसूस हो सकते हैं:
      सिरदर्द
      थकान
      चक्कर आना
      चिड़चिड़ापन
      कब्ज
    3. लंबे समय तक अपनाने पर जोखिम
      बिना विशेषज्ञ सलाह के लंबे समय तक इस डाइट का पालन करने से हृदय स्वास्थ्य, किडनी और पाचन तंत्र पर असर पड़ सकता है।
    4. अस्वस्थ वसा का अधिक सेवन
      यदि व्यक्ति तले हुए या अत्यधिक प्रोसेस्ड हाई-फैट फूड खाता है, तो कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा हो सकता है।

    किन लोगों को Lazy Keto Diet नहीं अपनानी चाहिए?

    • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं
    • किडनी रोग से पीड़ित लोग
    • लिवर की बीमारी वाले मरीज
    • टाइप-1 डायबिटीज के मरीज
    • खाने से संबंधित विकार (Eating Disorders) से जूझ रहे लोग

    एक्सपर्ट की सलाह
    लेजी कीटो डाइट वजन घटाने का एक विकल्प हो सकती है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं है। यदि आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं या लंबे समय तक इस डाइट को अपनाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले किसी पोषण विशेषज्ञ (Nutritionist) या डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

    निष्कर्ष
    Lazy Keto Diet उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है जो कम कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन अपनाकर वजन कम करना चाहते हैं। हालांकि, संतुलित पोषण और नियमित चिकित्सकीय सलाह के बिना इसे लंबे समय तक अपनाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।

  • Fish in Monsoon: क्या मॉनसून में मछली खाना सुरक्षित है? जानें एक्सपर्ट की राय!

    Fish in Monsoon: क्या मॉनसून में मछली खाना सुरक्षित है? जानें एक्सपर्ट की राय!

    Fish in Monsoon: मॉनसून के मौसम में अक्सर खाने-पीने की चीज़ों की सुरक्षा को लेकर बहस होती है। सीफ़ूड भी उनमें से एक है। माना जाता है कि इस दौरान सीफ़ूड खाने से बैक्टीरिया के पनपने और पानी के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। सही खान-पान चुनने में आपकी मदद के लिए, एक न्यूट्रिशनिस्ट बारिश के मौसम में मछली खाने से जुड़े छिपे हुए स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में बता रही हैं और इसे खरीदने व पकाने के लिए सुरक्षा टिप्स भी दे रही हैं।

    क्या बारिश के महीनों में मछली खाना सुरक्षित है?
    सुश्री राज कहती हैं कि मॉनसून के मौसम में मछली खाना आम तौर पर सुरक्षित है, बशर्ते वह ताज़ी हो, उसे सही तरीके से रखा गया हो और अच्छी तरह पकाया गया हो। वह आगे कहती हैं कि मॉनसून के मौसम में भी मछली हाई-क्वालिटी प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन और मिनरल का एक पौष्टिक स्रोत बनी रहती है।

    नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, ऑयली मछली में लॉन्ग-चेन ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। यह दिल की बीमारी से बचाव में मदद कर सकता है। यह गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह बच्चे के नर्वस सिस्टम के विकास में मदद कर सकता है।

    एक्सपर्ट आगे कहती हैं, “हालांकि, अतिरिक्त सावधानी की ज़रूरत है क्योंकि बारिश के मौसम में ज़्यादा नमी और स्टोरेज की स्थितियों में उतार-चढ़ाव के कारण दूषित होने, खराब होने और बैक्टीरिया के पनपने का खतरा बढ़ सकता है। कुछ इलाकों में मॉनसून के दौरान मछली पकड़ने का काम भी कम हो सकता है क्योंकि यह कई मछली प्रजातियों के प्रजनन का मौसम होता है, जिससे बाज़ार में सीफ़ूड की उपलब्धता और गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।”

    खराब मछली खाने के जोखिम
    सुश्री राज कहती हैं कि खराब या ठीक से न पकाई गई मछली खाने से ये समस्याएं हो सकती हैं:

    • फ़ूड पॉइज़निंग
    • पेट का इन्फेक्शन
    • दस्त (डायरिया)
    • उल्टी
    • पाचन से जुड़ी अन्य समस्याएं
    • फ़ूड पॉइज़निंग
    • पेट का इन्फेक्शन
    • दस्त (डायरिया)
    • उल्टी
    • पाचन से जुड़ी अन्य समस्याएं

    किन्हें ज़्यादा खतरा है? इस सवाल का जवाब देते हुए एक्सपर्ट कहती हैं, “कमज़ोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों, बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को इस दौरान सीफ़ूड खाते समय खास सावधानी बरतनी चाहिए। भरोसेमंद विक्रेताओं से मछली चुनना और सही स्टोरेज सुनिश्चित करना स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए ज़रूरी कदम हैं।”

    मॉनसून में मछली खाने के लिए सुरक्षा टिप्स
    मॉनसून के दौरान सीफ़ूड का मज़ा लेते हुए सुरक्षित रहने के लिए, सुश्री राज इन बातों का पालन करने का सुझाव देती हैं:

    • मछली सिर्फ़ भरोसेमंद विक्रेताओं से खरीदें जो साफ़-सफ़ाई और सही रेफ्रिजरेशन का ध्यान रखते हों। ताज़ी मछली में हल्की गंध, साफ़ आंखें, सख्त मांस और चमकीले गलफड़े (gills) होने चाहिए।
    • ऐसी मछली न लें जिसमें तेज़ बदबू हो, जो चिपचिपी हो या जिसका रंग बदला हुआ हो। खरीदने के बाद, मछली को फ्रिज में रखें और जितनी जल्दी हो सके उसे पका लें।
    • कच्ची मछली को छूने के बाद अपने हाथों, बर्तनों और कटिंग बोर्ड को अच्छी तरह धो लें ताकि क्रॉस-कंटैमिनेशन (एक चीज़ से दूसरी चीज़ में कीटाणु फैलना) से बचा जा सके।
    • मछली को अच्छी तरह पकाना भी ज़रूरी है, क्योंकि ठीक से पकाने से हानिकारक बैक्टीरिया, पैरासाइट और दूसरे सूक्ष्मजीव मर जाते हैं।
    • मानसून के दौरान कच्चा या अधपका सीफ़ूड (समुद्री भोजन) खाने से बचें, जिसमें बिना पकी मछली वाली डिशेज़ भी शामिल हैं।

    निष्कर्ष
    सबसे ज़रूरी बात है ताज़गी, साफ़-सफ़ाई, सही तरीके से स्टोर करना और अच्छी तरह पकाना। भरोसेमंद जगहों से सीफ़ूड खरीदकर, उसे सही ढंग से स्टोर करके और सुरक्षित तरीके से खाना संभालकर, ज़्यादातर लोग बारिश के मौसम में भी सुरक्षित रूप से मछली का मज़ा ले सकते हैं। अगर मछली की ताज़गी या क्वालिटी को लेकर कोई शक हो, तो उसे न खाना ही बेहतर है, क्योंकि जोखिम लेने के बजाय खाने से होने वाली बीमारी से बचना हमेशा ज़्यादा सुरक्षित होता है।

  • UE LifeSciences Technology: स्तन कैंसर की बढ़ती चुनौती के बीच यूई लाइफसाइंसेज की तकनीक बनी उम्मीद!

    UE LifeSciences Technology: स्तन कैंसर की बढ़ती चुनौती के बीच यूई लाइफसाइंसेज की तकनीक बनी उम्मीद!

    UE LifeSciences Technology: देशभर में महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे स्तन कैंसर के मामलों के बीच समय पर जांच और शुरुआती पहचान को सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है। इसी दिशा में यूई लाइफसाइंसेज की अत्याधुनिक तकनीकें राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

    सरकार की महत्वाकांक्षी ‘RaKSA’ पहल के तहत कंपनी द्वारा विकसित पोर्टेबल और किफायती तकनीकों के जरिए कैंसर स्क्रीनिंग को अधिक तेज, आसान और व्यापक बनाया जा रहा है। कंपनी के ‘iBreastExam’ डिवाइस के माध्यम से महाराष्ट्र के 22 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 1 लाख से अधिक महिलाओं की जांच की जा चुकी है।

    रेडिएशन-फ्री और दर्द रहित जांच
    iBreastExam पूरी तरह रेडिएशन-फ्री, दर्द रहित और नॉन-इनवेसिव तकनीक पर आधारित है। यह कुछ ही मिनटों में स्तन की जांच कर संभावित असामान्यताओं की पहचान कर सकता है। जांच के दौरान हजारों महिलाओं में शुरुआती स्तर पर बदलाव पाए गए, जिन्हें आगे उपचार के लिए रेफर किया गया।

    यह स्क्रीनिंग कार्यक्रम सेंट जॉर्ज हॉस्पिटल, गोकुलदास तेजपाल अस्पताल, कामा एंड अल्ब्लेस हॉस्पिटल और ग्रांट मेडिकल कॉलेज सहित महाराष्ट्र के कई सरकारी अस्पतालों में संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा नांदेड़, अकोला, औरंगाबाद, नागपुर, कोल्हापुर, धुले, यवतमाल, चंद्रपुर, पुणे, सांगली और सतारा जैसे जिलों में भी यह अभियान जारी है।

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    महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए समय पर जांच जरूरी
    गौरी नवलकर-गोडसे ने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य को अब देरी से होने वाले निदान पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तविक बदलाव जागरूकता, समय पर स्क्रीनिंग और ऐसी तकनीकों की उपलब्धता से आता है, जो बीमारी को गंभीर अवस्था तक पहुंचने से पहले पहचान सकें। उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए शुरुआती कदम केवल बचाव नहीं, बल्कि परिवारों और भविष्य को सुरक्षित रखने का अवसर है।

    AI आधारित तकनीकों से होगा विस्तार
    यूई लाइफसाइंसेज अब अपनी AI आधारित तकनीकों का विस्तार करने जा रही है। कंपनी जल्द ही सर्वाइकल कैंसर के लिए cervAIcal और ओरल कैंसर के लिए OrCA को इस अभियान में शामिल करेगी। ये स्मार्टफोन आधारित पोर्टेबल उपकरण स्वास्थ्य कर्मियों को दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में ‘डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग’ करने में मदद करेंगे, जिससे मरीजों का डेटा तुरंत डॉक्टरों तक पहुंच सकेगा।

    हाल ही में मुंबई में महाराष्ट्र पुलिस कर्मियों के लिए आयोजित विशेष कैंसर स्क्रीनिंग कैंप में भी इन तकनीकों की मदद से लगभग 100 महिला और पुरुष पुलिस कर्मियों की स्तन तथा ओरल कैंसर जांच की गई। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्तन कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो 90 प्रतिशत तक मामलों में सफल उपचार संभव है। ऐसे में तकनीक आधारित समय पर जांच की यह पहल स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है।

  • Genetic Mutations: महिलाओं की ‘नेचुरल सेफ्टी शील्ड’ को कमजोर कर रहा जेनेटिक म्यूटेशन!

    Genetic Mutations: महिलाओं की ‘नेचुरल सेफ्टी शील्ड’ को कमजोर कर रहा जेनेटिक म्यूटेशन!

    Genetic Mutations: ऑटिज्म को लेकर सामने आई एक नई रिसर्च ने वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस अध्ययन में दावा किया गया है कि कुछ विशेष जेनेटिक म्यूटेशन महिलाओं में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

    अब तक यह माना जाता रहा है कि महिलाओं के शरीर और मस्तिष्क में मौजूद एक प्रकार की ‘नेचुरल सेफ्टी शील्ड’ उन्हें न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर से काफी हद तक सुरक्षा प्रदान करती है। लेकिन हालिया रिसर्च से पता चला है कि कुछ आनुवंशिक बदलाव इस प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र को भी कमजोर कर सकते हैं।

    शोधकर्ताओं के अनुसार, ऑटिज्म एक जटिल न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो व्यक्ति के व्यवहार, संचार क्षमता और सामाजिक गतिविधियों को प्रभावित करती है। आमतौर पर पुरुषों में ऑटिज्म के मामले अधिक देखे जाते हैं, जबकि महिलाओं में इसके लक्षण कई बार अलग और कम स्पष्ट होते हैं।

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    यही कारण है कि महिलाओं में ऑटिज्म की पहचान अक्सर देर से हो पाती है। नई स्टडी बताती है कि महिलाओं में मौजूद कुछ जेनेटिक म्यूटेशन मस्तिष्क के विकास और न्यूरल कनेक्शन को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे ऑटिज्म का खतरा बढ़ जाता है।

    वैज्ञानिकों ने रिसर्च के दौरान पाया कि जिन महिलाओं में ये विशेष जेनेटिक बदलाव मौजूद थे, उनमें सामाजिक व्यवहार, संवाद और भावनात्मक प्रतिक्रिया से जुड़ी चुनौतियां अधिक देखी गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज महिलाओं में ऑटिज्म की पहचान और समझ को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे भविष्य में शुरुआती जांच, बेहतर उपचार और व्यक्तिगत थेरेपी विकसित करने में मदद मिलने की संभावना है।

    रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि महिलाओं में ऑटिज्म को लेकर लंबे समय से कम अध्ययन हुए हैं, क्योंकि अधिकतर रिसर्च पुरुषों पर केंद्रित रही हैं। ऐसे में यह अध्ययन महिलाओं की मानसिक और न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को समझने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि ऑटिज्म केवल जेनेटिक कारणों से नहीं होता, बल्कि पर्यावरण, जीवनशैली और अन्य जैविक कारक भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं। फिर भी यह अध्ययन यह समझने में मदद करता है कि कैसे कुछ आनुवंशिक बदलाव महिलाओं की ‘नेचुरल सेफ्टी शील्ड’ को कमजोर कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस विषय पर अभी और व्यापक रिसर्च की आवश्यकता है, ताकि ऑटिज्म के कारणों और उसके प्रभावों को और गहराई से समझा जा सके।

  • Protect Yourself from Heatstroke: लू से बचने के लिए जानें क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज!

    Protect Yourself from Heatstroke: लू से बचने के लिए जानें क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज!

    Protect Yourself from Heatstroke: गर्मी के मौसम में बढ़ता तापमान और तेज धूप लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल सकती है। खासकर ‘लू’ लगने का खतरा इस दौरान काफी बढ़ जाता है। शरीर में पानी की कमी, कमजोरी, चक्कर आना और उल्टी जैसी समस्याएं लू के कारण हो सकती हैं। ऐसे में खानपान का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

    सही चीजों का सेवन आपको गर्मी और लू से बचाने में मदद कर सकता है, वहीं कुछ खाद्य पदार्थ आपकी परेशानी बढ़ा सकते हैं। आइए जानते हैं कि लू से बचने के लिए क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना बेहतर रहेगा।

    लू से बचने के लिए क्या खाएं?
    पानी और तरल पदार्थ
    : दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ और ORS शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं।
    मौसमी फल: तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और संतरा जैसे पानी से भरपूर फल शरीर को ठंडक देते हैं।
    दही और छाछ: ये शरीर को ठंडा रखने के साथ पाचन को भी बेहतर बनाते हैं।
    हल्का भोजन: गर्मियों में हल्का और आसानी से पचने वाला खाना खाना चाहिए।
    पुदीना और प्याज: पुदीना शरीर को ठंडक देता है और प्याज को लू से बचाव में फायदेमंद माना जाता है।

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    किन चीजों से करें परहेज?
    ज्यादा मसालेदार खाना
    : बहुत ज्यादा तेल और मसालों वाला खाना शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है।
    कैफीन और शराब: चाय, कॉफी और शराब शरीर में पानी की कमी कर सकते हैं।
    बासी खाना: गर्मियों में बासी भोजन जल्दी खराब हो सकता है, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।
    जंक फूड: तला-भुना और फास्ट फूड पाचन पर बुरा असर डाल सकता है।
    धूप में खाली पेट निकलना: खाली पेट बाहर जाने से कमजोरी और चक्कर आने की संभावना बढ़ जाती है।

    गर्मी के मौसम में सही खानपान और पर्याप्त पानी का सेवन आपको लू से बचाने में अहम भूमिका निभाता है। कोशिश करें कि दोपहर के समय तेज धूप में बाहर निकलने से बचें और शरीर को हमेशा हाइड्रेट रखें। थोड़ी सावधानी अपनाकर आप गर्मी के इस मौसम में खुद को स्वस्थ और सुरक्षित रख सकते हैं।

  • Healthy Korean Kimchi: खीरे की क्रंची किमची का मजेदार स्वाद जरूर करें ट्राई!

    Healthy Korean Kimchi: खीरे की क्रंची किमची का मजेदार स्वाद जरूर करें ट्राई!

    Healthy Korean Kimchi: खीरे से बनने वाली कोरियन किमची आजकल फूड लवर्स के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है। इसका खट्टा, मसालेदार और क्रंची स्वाद खाने का मजा दोगुना कर देता है। खास बात यह है कि किमची सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है।

    इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन को बेहतर बनाने और इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करते हैं। अगर आप घर पर कुछ नया, हेल्दी और आसान रेसिपी ट्राई करना चाहते हैं, तो खीरे की यह कोरियन किमची आपके लिए परफेक्ट है।

    सामग्री
    4–5 छोटे खीरे
    1 बड़ा चम्मच नमक
    2 बड़े चम्मच लाल मिर्च फ्लेक्स
    1 बड़ा चम्मच लहसुन बारीक कटा हुआ
    1 छोटा चम्मच अदरक पेस्ट
    1 बड़ा चम्मच सोया सॉस
    1 छोटा चम्मच चीनी
    2 हरी प्याज बारीक कटी हुई
    1 छोटा चम्मच तिल

    बनाने की विधि
    सबसे पहले खीरों को अच्छी तरह धोकर लंबाई में काट लें।
    अब इनमें नमक लगाकर लगभग 20–25 मिनट के लिए रख दें, ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए।
    एक बाउल में लाल मिर्च फ्लेक्स, लहसुन, अदरक, सोया सॉस और चीनी डालकर अच्छी तरह मिक्स करें।
    अब इस मसाले में हरी प्याज और तिल डालें।
    नमक लगे खीरों को हल्का धोकर सुखा लें और तैयार मसाला अच्छी तरह भर दें।
    किमची को एयरटाइट कंटेनर में भरकर 5–6 घंटे के लिए फ्रिज में रखें।

    अब आपकी टेस्टी और क्रंची कोरियन किमची तैयार है। इसे आप राइस, नूडल्स या स्नैक्स के साथ सर्व कर सकते हैं। स्वाद से भरपूर यह हेल्दी डिश घर के सभी लोगों को जरूर पसंद आएगी।

  • Heat Wave 2026: यूपी में भीषण गर्मी का कहर, दुनिया के सबसे गर्म इलाकों में शामिल हुए प्रदेश के 40 शहर, 47°C तक पहुंचा तापमान

    Heat Wave 2026: यूपी में भीषण गर्मी का कहर, दुनिया के सबसे गर्म इलाकों में शामिल हुए प्रदेश के 40 शहर, 47°C तक पहुंचा तापमान

    लू और गर्मी से बेहाल उत्तर प्रदेश, दिन में सड़कों पर पसरा सन्नाटा


    लखनऊ : उत्तर प्रदेश इस समय भीषण गर्मी (Heat Wave) और लू की चपेट में है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि प्रदेश के कई शहर दुनिया के सबसे गर्म स्थानों की सूची में शामिल हो गए हैं। लगातार बढ़ते तापमान ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। दोपहर के समय सड़कें सुनसान दिखाई दे रही हैं और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।
    AQI.in के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 19 मई 2026 को दुनिया के टॉप 100 सबसे गर्म स्थानों में उत्तर प्रदेश के करीब 40 शहर शामिल रहे। यह आंकड़े प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी की गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं।

    47 डिग्री तक पहुंचा तापमान, कई जिले बने “हॉटस्पॉट”
    उत्तर प्रदेश के बांदा, इटावा, औरैया और मुरादाबाद सबसे अधिक गर्म शहरों में शामिल रहे, जहां तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक रिकॉर्ड किया गया। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
    इसके अलावा प्रयागराज, बदायूं, रामपुर, फतेहपुर, संभल, एटा, बिजनौर, अमरोहा, मिर्जापुर, अलीगढ़, बलरामपुर, बरेली और वाराणसी जैसे शहरों में तापमान 46 डिग्री के आसपास पहुंच गया।
    वहीं जौनपुर, आजमगढ़, झांसी, मुजफ्फरनगर, फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा, हाथरस, सीतापुर, शाहजहांपुर, शामली और अयोध्या में भी तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया।

    NCR और पश्चिमी यूपी में भी गर्मी का प्रकोप(Heat Wave 2026)
    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ में तापमान करीब 44 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
    इसके अलावा बागपत, बुलंदशहर, हापुड़ और सहारनपुर में भी गर्म हवाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दोपहर के समय कई इलाकों में सड़कें लगभग खाली दिखाई दे रही हैं।

    बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर

    भीषण गर्मी के चलते एसी, कूलर और पंखों का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिसके कारण प्रदेश में बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है। कई शहरों में बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जारी की चेतावनी
    डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को धूप से बचने की चेतावनी दी गई है।
    विशेषज्ञों के अनुसार:

    दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर निकलने से बचें

    ●पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
    ●ORS, नींबू पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें
    ●हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें
    ●सिर को टोपी या कपड़े से ढककर रखें


    IMD ने जारी किया अलर्ट

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक आने वाले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं होने के कारण शुष्क हवाएं लगातार तापमान बढ़ा रही हैं।
    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द मौसम में बदलाव नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और जरूरी सावधानियां अपनाने की आवश्यकता है।

    उत्तर प्रदेश के सबसे गर्म शहर


    रैंक शहर तापमान

    1 बांदा 47°C
    2 इटावा 47°C
    3 औरैया 47°C
    4 मुरादाबाद47°C
    5 प्रयागराज46°C
    6 बदायूं 46°C
    7 रामपुर 46°C
    8 फतेहपुर 46°C
    9 संभल 46°C
    10 वाराणसी 46°C



    (अन्य कई शहरों में तापमान 44°C से 45°C के बीच दर्ज किया गया।)

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