Category: Mumbai

  • CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns: क्या ट्रांसफर रोकने के लिए सीएसएमटी पार्सल में कार्यरत शैलेन्द्र पंडित ने शिकायत को बनाया हथियार?

    CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns: क्या ट्रांसफर रोकने के लिए सीएसएमटी पार्सल में कार्यरत शैलेन्द्र पंडित ने शिकायत को बनाया हथियार?

    ” विजिलेंस पर दबाव डालने की कोशिश या प्रशासन को खुली चुनौती!”–सीएसएमटी पार्सल प्रकरण ने उठाया सवाल

    सीएसएमटी पार्सल विभाग में स्थानांतरण के बाद जीआरपी शिकायत से मचा बवाल, विजिलेंस कार्रवाई और प्रशासनिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल
    सीएसएमटी पार्सल विभाग में स्थानांतरण के बाद जीआरपी शिकायत से मचा बवाल, विजिलेंस कार्रवाई और प्रशासनिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल

    मुंबई: मध्य रेलवे के मुंबई डिवीजन(CR Mumbai Division) स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के पार्सल विभाग में सामने आया विवाद अब एक कर्मचारी के स्थानांतरण से कहीं आगे बढ़ चुका है। यह मामला रेलवे की प्रशासनिक पारदर्शिता, विजिलेंस तंत्र की स्वतंत्रता और शिकायत प्रणाली के संभावित दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दों को केंद्र में ले आया है।

    सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस की अनुशंसा के आधार पर सीएसएमटी पार्सल सीबीएस बैच इंचार्ज शैलेन्द्र पंडित का स्थानांतरण सीएसएमटी से शिवुड़–दारावे स्टेशन किया गया। लेकिन स्थानांतरण आदेश जारी (CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns) होने के तुरंत बाद 11 फरवरी 2026 को सीएसएमटी जीआरपी में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराए जाने से पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    https://epaper.rashtriyaswabhimaan.com/view/501/rashtriya-swabhimaan

    जीआरपी में प्रस्तुत शिकायत(Complain) में मुंबई डिवीजन के सीनियर डीसीएम डॉ. शिवराज मानसपुरे, मध्य रेलवे के डिप्टी सीवीओ (ट्रैफिक) प्रदीप हिरडे तथा चीफ विजिलेंस इंस्पेक्टर सुमित दूधे के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। रेलवे के जानकार अधिकारियों का कहना है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के तुरंत बाद इस प्रकार की शिकायत दर्ज होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इससे यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि कहीं यह कदम विभागीय कार्रवाई को प्रभावित करने या दबाव बनाने की रणनीति तो नहीं।

    पहले से दर्ज थीं अनियमितताएँ

    • दस्तावेजों के अनुसार, संबंधित कर्मचारी की कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में भी आपत्तियाँ दर्ज की जा चुकी थीं।
    • 23 अप्रैल 2025 को निरीक्षण में अनियमितता दर्ज होने की बात सामने आई।
    • 25 जून 2025 को ड्यूटी से अनुपस्थित पाए जाने का उल्लेख रिकॉर्ड में है।
    • ड्यूटी मस्टर में नाम का कॉलम खाली छोड़ने और बाद में हस्ताक्षर करने की प्रवृत्ति भी नोट की गई।
    • 3 अगस्त 2025 को सीआरबी निरीक्षण के दौरान अनुपस्थिति के बाद चेतावनी जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    इन्हीं तथ्यों के आधार पर चार्जशीट और बाद में स्थानांतरण आदेश जारी किए जाने की बात कही जा रही है।

    एसोसिएशन की मान्यता पर भी प्रश्न

    मामले का एक और संवेदनशील पहलू यह है कि शिकायत पत्र ‘ऑल इंडिया एससी एंड एसटी रेलवे एम्प्लॉइज एसोसिएशन’ के नाम से प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, रेलवे के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार संबंधित संगठन की रेलवे बोर्ड से मान्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि संगठन की वैधता संदिग्ध पाई जाती है, तो यह मामला फर्जी संगठन के नाम पर दबाव बनाने तक जा सकता है।

    क्या शिकायत तंत्र बन रहा है ‘ढाल’?

    रेलवे के भीतर अब यह चर्चा तेज है कि क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए शिकायत प्रणाली का उपयोग एक ‘ढाल’ के रूप में किया गया। यदि हर विभागीय जांच या स्थानांतरण के बाद इसी तरह की रणनीति अपनाई जाती है, तो निष्पक्ष कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के लिए भय और असुरक्षा का वातावरण बन सकता है।

    एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि यदि जांच एजेंसियों और विजिलेंस अधिकारियों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाएगा, तो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करना कठिन हो जाएगा। यह केवल एक कर्मचारी बनाम प्रशासन का मामला नहीं, बल्कि संस्थागत व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है।

    रेलवे प्रशासन के लिए चेतावनी संकेत

    यह प्रकरण रेलवे के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। यदि विजिलेंस की अनुशंसा पर की गई कार्रवाई को शिकायतों के माध्यम से दबाने की प्रवृत्ति बढ़ती है, तो भविष्य में ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है।

    रेलवे को चाहिए कि:

    • शिकायत की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराए।
    • विजिलेंस कार्रवाई के तथ्यों को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करे (नियमों के दायरे में)।
    • एसोसिएशन की मान्यता की सत्यता की जांच कर स्पष्ट स्थिति सामने लाए।
    • ईमानदार अधिकारियों को संस्थागत संरक्षण प्रदान करे।

    यदि समय रहते स्पष्ट और दृढ़ रुख नहीं अपनाया गया, तो यह मामला भविष्य में अनुशासनात्मक प्रक्रिया को कमजोर करने वाली मिसाल बन सकता है।

    अब सबकी निगाहें रेलवे बोर्ड और मध्य रेलवे के शीर्ष प्रशासन पर टिकी हैं कि वे संस्थागत साख को मजबूत करते हैं या यह प्रकरण भी फाइलों में सिमट कर रह जाता है।

  • Land Deal: पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी ने 21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी नोटिस को दी चुनौती, IGR के सामने होगी सुनवाई

    Land Deal: पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी ने 21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी नोटिस को दी चुनौती, IGR के सामने होगी सुनवाई

    मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। संबंधित कंपनी ने महाराष्ट्र पंजीकरण विभाग द्वारा जारी करीब 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी वसूली नोटिस को चुनौती देते हुए अपील दायर की है। विभागीय सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।

    सूत्रों के अनुसार, पंजीकरण विभाग ने पुणे के मुंधवा इलाके में स्थित जमीन की बिक्री विलेख (Land Deal) से जुड़े मामले में 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी जमा करने का नोटिस जारी किया था। विभाग का कहना है कि जमीन की बिक्री के दौरान नियमानुसार स्टांप शुल्क अदा नहीं किया गया, जिसके चलते यह राशि वसूल की जानी चाहिए थी। नोटिस में 10 फरवरी तक भुगतान की समयसीमा तय की गई थी।

    पहले भी जारी हो चुका है वसूली आदेश
    इससे पहले पंजीकरण विभाग ने एक आदेश जारी कर अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी और उसके साझेदार दिग्विजय पाटिल को 40 एकड़ सरकारी जमीन की बिक्री विलेख के दौरान माफ की गई स्टांप ड्यूटी जमा करने का निर्देश दिया था। उस आदेश में भी भुगतान की अंतिम तारीख 10 फरवरी तय की गई थी।

    IGR के सामने होगी अब सुनवाई
    पंजीकरण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि स्टांप ड्यूटी जमा करने की अंतिम तारीख तक भुगतान नहीं किया गया, बल्कि संबंधित कंपनी ने आदेश को चुनौती देते हुए अपील दाखिल कर दी है। अब इस पूरे मामले की सुनवाई पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) के समक्ष होगी। हालांकि अधिकारी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि 21 करोड़ रुपये की मांग वाले आदेश को किन आधारों पर चुनौती दी गई है।

    300 करोड़ रुपये के सौदे से जुड़ा मामला
    बताया जा रहा है कि अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी द्वारा करीब 40 एकड़ जमीन को लगभग 300 करोड़ रुपये में बेचने का सौदा उस समय विवादों में आया, जब यह सामने आया कि संबंधित जमीन सरकारी है और कंपनी को स्टांप शुल्क में छूट दी गई थी। इसी खुलासे के बाद यह मामला प्रशासनिक और कानूनी जांच के दायरे में आ गया।

  • Bharat Ratna: सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर गरमाई सियासत, भाई जगताप भाजपा-आरएसएस हुए हमलावर

    Bharat Ratna: सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर गरमाई सियासत, भाई जगताप भाजपा-आरएसएस हुए हमलावर

    मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग के बाद देश की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता भाई जगताप ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि जिन व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगे हों, उन्हें भारत रत्न(Bharat Ratna) जैसे सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ना देश की गरिमा पर सवाल खड़े करता है।

    भाई जगताप ने कहा कि भारत रत्न केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की भावनाओं और देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा सम्मान है। उन्होंने कहा कि अब तक यह सम्मान उन्हीं महान व्यक्तित्वों को दिया गया है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र, समाज या किसी बड़े उद्देश्य के लिए समर्पित किया।

    विवादित नामों को सम्मान देना समझ से परे – भाई जगताप
    कांग्रेस नेता ने कहा, “भारत रत्न (Bharat Ratna)से बड़ा कोई सम्मान नहीं है। संघ प्रमुख किसी संगठन के प्रमुख हैं, देश के नहीं। वीर सावरकर पर लगे आरोपों के बीच इस तरह की मांग समझ से परे है। अगर विवादित व्यक्तियों को भारत रत्न दिया गया, तो इसकी समीक्षा पूरा देश करेगा और सम्मान की गरिमा पर गंभीर सवाल उठेंगे।”

    उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा सरकार में ऐसे कई मंत्री हैं जिन पर आरोप लगने की बातें रिपोर्ट्स में सामने आती रही हैं। ऐसे माहौल में भारत रत्न देने का फैसला सम्मान की तौहीन जैसा होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को बेवजह हवा नहीं देना चाहते, अंतिम फैसला सरकार का होगा और जवाब जनता देगी।

    कानून-व्यवस्था, कलाकार और राजनीति पर भी सरकार को घेरा
    संघ प्रमुख के एक कार्यक्रम में अभिनेता सलमान खान की मौजूदगी पर प्रतिक्रिया देते हुए भाई जगताप ने कहा कि खेल और कला को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज कलाकारों को खुलेआम धमकियां मिल रही हैं, फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के घर फायरिंग की घटना सामने आई है और गैंगस्टरों में कानून का कोई डर नहीं दिख रहा।

    उन्होंने कहा कि 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड के खौफ पर काबू पाया गया था, लेकिन आज हालात फिर से चिंता पैदा कर रहे हैं, जो सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

    तीन बच्चों वाले बयान पर भी जताई नाराज़गी
    संघ प्रमुख के तीन बच्चों से जुड़े बयान को हास्यास्पद बताते हुए भाई जगताप ने कहा कि जब भारत पहले ही जनसंख्या के मामले में दुनिया में नंबर एक है, तब इस तरह की सलाह देना गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं पहले से ज्यादा असुरक्षित हैं और युवा खुद यह तय करने में सक्षम हैं कि उन्हें कब और किससे शादी करनी है।

    अन्य मुद्दों पर भी रखी बेबाक राय
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर लगाए गए आरोपों पर भाई जगताप ने कहा कि केवल आरोप लगाने से कुछ नहीं होगा, अगर आरोप सही हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए।
    बीएमसी में रितु तावड़े के मेयर बनने और घुसपैठियों पर दिए गए बयान को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार चारों तरफ है, कानून भी मौजूद है, फिर पिछले 12 वर्षों में कितने घुसपैठियों को निकाला गया, यह जनता को बताया जाना चाहिए।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि संसद देश का पवित्र मंदिर है, लेकिन वहां विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन जैसे गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा से बचा जा रहा है।

    महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़े विमान हादसे के सवाल पर भाई जगताप ने कहा, “जहां धुआं होता है, वहां आग भी होती है।” उन्होंने 18 साल पुराने विमान, लैंडिंग प्रक्रिया और तकनीकी खामियों पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।

    वहीं मीडिया को दिए बयान में उन्होंने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर कहा कि खेल, कला और संगीत को राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। भारत का क्रिकेट में दबदबा रहा है और विश्व कप जैसे आयोजनों को राजनीतिक नजरिये से देखना ठीक नहीं है।

  • Bjp old workers marginalized new leaders power :कांग्रेसमुक्त भारत का सपना देखने वाली भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेसयुक्त हो गई : सुरेशचंद्र राजहंस

    Bjp old workers marginalized new leaders power :कांग्रेसमुक्त भारत का सपना देखने वाली भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेसयुक्त हो गई : सुरेशचंद्र राजहंस

    दूसरे दलों से आए नेताओं को सत्ता में हिस्सेदारी, पुराने भाजपा कार्यकर्ता हाशिये पर

    अश्विनी कुमार दुबे

    मुंबई: भारतीय जनता पार्टी में अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। विपक्ष और राजनीतिक जानकार आरोप लगा रहे हैं कि पार्टी वर्षों तक सत्ता से बाहर संघर्ष करने वाले अपने पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रही है, जबकि कांग्रेस, एनसीपी और अन्य दलों से आए नेताओं को मंत्री पद, निगम मंडलों की अध्यक्षता और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।

    मुंबई कांग्रेस के प्रवक्ता और मीडिया समन्वयक सुरेशचंद्र राजहंस ने कहा, “कांग्रेसमुक्त भारत का सपना देखने वाली भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेसयुक्त हो गई है। पार्टी में अपने नेता, कार्यकर्ता और पदाधिकारी नहीं हैं; दिल्ली से लेकर गलियों तक, भाजपा को दूसरों के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।”

    राजनैतिक जानकारों के मुताबिक, सत्ता में भागीदारी अब विचारधारा या वर्षों के संघर्ष के बजाय दल-बदल की राजनीति पर आधारित हो गई है। पार्टी की जमीनी ताकत माने जाने वाले कार्यकर्ताओं को केवल झंडा उठाने और रैलियों में हिस्सा लेने तक सीमित कर दिया गया है(Bjp old workers marginalized new leaders power), जबकि वास्तविक सत्ता का लाभ बाहरी नेताओं को मिल रहा है।

    विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है, “जो पार्टी खुद को अनुशासन और कार्यकर्ता आधारित संगठन बताती थी, वही अब अपने ही कार्यकर्ताओं का अपमान कर रही है। वर्षों तक सत्ता-विहीन रहने वाले कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन पार्टी को समर्पित किया, उन्हें अब नजरअंदाज किया जा रहा है।”

    राजनीतिक विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो भाजपा को इसका सीधा नुकसान आगामी चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं में बढ़ती नाराजगी पार्टी की जमीनी पकड़ को कमजोर कर रही है, जिससे आगामी राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है।

    पार्टी नेतृत्व की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंदरूनी असंतोष की चर्चा अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच चुकी है।

  • Rohit Pawar Statement:हवाई दुर्घटना में अजित पवार की मौत पर रोहित पवार का बड़ा बयान, 10 फरवरी को करेंगे खुलासा

    Rohit Pawar Statement:हवाई दुर्घटना में अजित पवार की मौत पर रोहित पवार का बड़ा बयान, 10 फरवरी को करेंगे खुलासा

    बारामती/मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के नेता और विधायक रोहित पवार ने अजित पवार की हवाई दुर्घटना में हुई मौत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल और संदेह हैं, जिन पर वे 10 फरवरी को मुंबई में विस्तृत जानकारी और प्रेजेंटेशन के जरिए खुलासा करेंगे।

    बारामती में जिला परिषद चुनाव के लिए मतदान करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में रोहित पवार (Rohit Pawar Statement) ने कहा कि अजित पवार की मौत को लेकर हर किसी के मन में सवाल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुर्घटना क्यों हुई और कैसे हुई, इस पर 10 फरवरी को तथ्यात्मक रूप से बात रखी जाएगी।

    गौरतलब है कि 28 जनवरी को पुणे जिले के बारामती हवाई अड्डे पर उतरने के प्रयास के दौरान एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें अजित पवार सहित पांच लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से ही हादसे के कारणों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं तेज हैं।

    विलय की इच्छा और एकजुटता का संदेश

    रोहित पवार ने इस मौके पर एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि अजित पवार एनसीपी के एकजुट होने के पक्ष में थे और इस दिशा में उन्होंने प्रयास भी किए थे। रोहित पवार के मुताबिक, अजित पवार की यह दिली इच्छा थी कि पार्टी एक परिवार की तरह साथ आए।

    उन्होंने कहा, “अजित दादा चाहते थे कि पार्टी कार्यकर्ताओं का भला हो और जो लोग उनकी विचारधारा से जुड़े हैं, वे चुनाव जीतें। उन्हें दोनों गुटों के एक होने की उम्मीद थी। दादा ने इसके लिए प्रयास किए थे और हम भी उसी दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे। परिवार आज भी एकजुट है।”

    चुनाव में साथ उतरे दोनों गुट

    रोहित पवार ने यह भी बताया कि जिला परिषद चुनाव में एनसीपी (एसपी) और एनसीपी ने हाथ मिलाया है और दोनों दल ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न पर मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। शनिवार को महाराष्ट्र में 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए मतदान हुआ।

    अजित पवार की मौत, संभावित राजनीतिक एकजुटता और 10 फरवरी को होने वाले खुलासे ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अब सभी की नजरें रोहित पवार के उस प्रेजेंटेशन पर टिकी हैं, जिसमें वे इस हवाई दुर्घटना से जुड़े सवालों के जवाब देने वाले हैं।

  • Mumbai News : मुंबई से बांग्लादेशियों को बाहर करने के बयान पर मचा सियासी घमासान, रितू तावडे के बयान पर संजय राउत का पलटवार

    Mumbai News : मुंबई से बांग्लादेशियों को बाहर करने के बयान पर मचा सियासी घमासान, रितू तावडे के बयान पर संजय राउत का पलटवार

    क्या मोदी सरकार ने बांग्लादेश में टूटे हिंदू मंदिरों के पुनर्निर्माण के लिए करोड़ों की मदद दी?:शिवसेना (यूबीटी)

    मुंबई। मुंबई महानगरपालिका के महापौर (Mumbai Mayor) पद के लिए भाजपा ने रितू तावडे को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। 11 फरवरी को होने वाले महापौर चुनाव में उनके निर्विरोध चुने जाने की संभावना जताई जा रही है। उम्मीदवार घोषित होने के साथ ही रितू तावडे के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, जिस पर शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    रितू तावडे ने कहा है कि वे मुंबई के हर नागरिक के लिए काम करना चाहती हैं। उनका दावा है कि मुंबईकर टैक्स (Mumbaikar Tax) देने वाला, जागरूक और संवेदनशील नागरिक है, लेकिन आज उसे फुटपाथ और सड़कों पर चलने तक की पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में फुटपाथ और सड़कों पर अतिक्रमण की बड़ी वजह बांग्लादेशी और रोहिंग्या हैं। तावडे के मुताबिक, यदि मुंबई को सुरक्षित रखना है, तो इन लोगों को शहर से बाहर करना उनकी प्राथमिकता होगी।

    इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कटाक्ष किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बांग्लादेश में तोड़े गए हिंदू मंदिरों को बनाने के लिए सीधे “केंद्र सरकार की तरफ से करोड़ों रुपये की सहायता” देने का कोई आधिकारिक प्रावधान यूनियन बजट 2026-27 में नहीं किया है।

    वास्तव में, इस बजट में भारत ने बांग्लादेश को दी जाने वाली विदेशी मदद की राशि पहले के 120 करोड़ रुपये से घटाकर लगभग 60 करोड़ रुपये कर दी है, जो पिछले साल की तुलना में आधी है। यह बजट प्रावधान बांग्लादेश की सहायता के सामान्य विदेशी विकास सहयोग के रूप में है और उसमें किसी विशिष्ट धार्मिक स्थल की मरम्मत या मंदिर निर्माण जैसे प्रोजेक्ट का उल्लेख नहीं है। इस सहायता कटौती को दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव और वहां चल रही अन्य परिस्थितियों के बीच एक आर्थिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।

    महापौर चुनाव से पहले इस बयानबाज़ी ने मुंबई की राजनीति को गरमा दिया है। जहां भाजपा शहर की सुरक्षा और अतिक्रमण को बड़ा मुद्दा बना रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए भाजपा पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगा रहा है।

  • Bombay High Court: तेज़ न्याय के लिए हाईकोर्ट सख्त, 2,800 न्यायिक अधिकारियों की भर्ती पर मांगा ‘ब्लूप्रिंट’

    Bombay High Court: तेज़ न्याय के लिए हाईकोर्ट सख्त, 2,800 न्यायिक अधिकारियों की भर्ती पर मांगा ‘ब्लूप्रिंट’

    मुंबई। राज्य की निचली अदालतों में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मंजूर किए गए 2,800 से अधिक नए न्यायिक अधिकारियों की भर्ती को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट(Bombay High Court) ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि नागरिकों को तेज़ और प्रभावी न्याय देना है, तो राज्य सरकार के साथ-साथ हाईकोर्ट प्रशासन को भी तत्काल और ठोस कदम उठाने होंगे। इसी क्रम में हाईकोर्ट प्रशासन को भर्ती प्रक्रिया की विस्तृत ‘ब्लूप्रिंट’ योजना अदालत के सामने पेश करने को कहा गया है।

    न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल की खंडपीठ ने कहा कि अदालत को इस बात की पूरी समझ है कि न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया किसी निश्चित समय-सीमा में बांधना आसान नहीं है। लेकिन ‘तेज़ न्याय’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हाईकोर्ट प्रशासन और विधि एवं न्याय विभाग से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरी भर्ती प्रक्रिया हाईकोर्ट और महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) के माध्यम से प्रभावी ढंग से लागू की जानी चाहिए।

    याचिका में क्या है मामला

    ये निर्देश वैजनाथ वझे द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिए गए। याचिका में राज्य की न्याय व्यवस्था में लंबे समय से खाली पड़े पदों का मुद्दा उठाते हुए उन्हें तत्काल भरने की मांग की गई है। इससे पहले की सुनवाई में अतिरिक्त सरकारी वकील प्रियभूषण काकड़े ने अदालत को 6 फरवरी 2024 के सरकारी निर्णय की जानकारी दी थी। इसके अनुसार राज्य में 2,863 न्यायिक अधिकारियों के पदों को मंजूरी दी गई है। साथ ही 1,164 न्यायालयीन कर्मचारियों और 5,803 संविदा कर्मियों के नए पद भी सृजित किए गए हैं।

    भर्ती प्रक्रिया समय लेने वाली

    28 जनवरी की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने रिक्त पदों की ओर ध्यान दिलाते हुए तत्काल भर्ती की मांग की थी। इस पर खंडपीठ ने कहा कि भले ही पदों को मंजूरी मिल चुकी हो, लेकिन उनकी भर्ती महाराष्ट्र न्यायिक सेवा नियम, 2008 के अनुसार ही करनी होगी। नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया में उम्मीदवारों की पात्रता और योग्यता का मूल्यांकन जरूरी होता है, जिससे यह प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से समय लेने वाली बन जाती है।

    हालांकि, अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि नई मंजूरियों के बाद भर्ती को किस तरह अंजाम दिया जाएगा, इसका विस्तृत और व्यावहारिक ब्लूप्रिंट पेश करना अनिवार्य है। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख को न्यायिक व्यवस्था में लंबित मामलों के बोझ को कम करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

  • Maharashtra Politics: विधान परिषद की जंग में उद्धव ठाकरे की अग्निपरीक्षा, महायुति के आगे MVA की रणनीति होगी निर्णायक

    Maharashtra Politics: विधान परिषद की जंग में उद्धव ठाकरे की अग्निपरीक्षा, महायुति के आगे MVA की रणनीति होगी निर्णायक

    मुंबई(Mumbai) में एक बार फिर सत्ता संतुलन की लड़ाई तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सहित विधान परिषद के नौ सदस्यों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। ऐसे में सबसे बड़ा राजनीतिक(Political) सवाल यही है कि क्या उद्धव ठाकरे दोबारा विधान परिषद का टिकट हासिल कर पाएंगे या नहीं। बदले हुए संख्याबल ने महाविकास आघाड़ी (MVA) के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, जबकि भाजपा-महायुति मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है।

    मई 2020 में जिन नौ नेताओं को निर्विरोध(unopposed) विधान परिषद में भेजा गया था, उस समय राजनीतिक समीकरण अलग थे। तब MVA को पांच और भाजपा को चार सीटें मिली थीं। अब तस्वीर उलट है। विधानसभा में महायुति के पास करीब 235 विधायकों का संख्याबल है, जबकि MVA के पास माकपा और शेकाप को मिलाकर मात्र 48 विधायक हैं। दो सीटें रिक्त हैं और यदि मई से पहले इन पर उपचुनाव हो जाता है, तो सभी 288 विधायक विधान परिषद चुनाव में वोट डालेंगे।

    विधान परिषद चुनाव से पहले सात सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव होना है। संख्याबल के हिसाब से MVA को एक ही राज्यसभा सीट मिलने की संभावना है। ऐसे में तय माना जा रहा है कि गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर समझौता करना पड़ेगा—एक दल को राज्यसभा और दूसरे को विधान परिषद से संतोष करना होगा।

    भाजपा के लिए भी यह चुनाव आसान नहीं है। मौजूदा चार विधान परिषद सदस्यों में से तीन अब विधानसभा में पहुंच चुके हैं, जिससे नए चेहरों को मौका देने का दबाव बढ़ेगा। वहीं, सोलापुर की राजनीति में हुए हालिया घटनाक्रम के बाद रणजीतसिंह मोहिते पाटील को लेकर भाजपा का फैसला राजनीतिक संकेत देने वाला होगा।

    उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद छोड़ते समय विधान परिषद से इस्तीफा देने की घोषणा जरूर की थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अब सवाल यह है कि क्या वे स्वयं फिर से विधान परिषद जाने के इच्छुक हैं और क्या MVA उनके नाम पर सहमति बना पाएगी। यदि उद्धवसेना राज्यसभा की सीट पर कांग्रेस या शरद पवार गुट के उम्मीदवार को समर्थन देती है, तो इसे उद्धव ठाकरे के विधान परिषद जाने का स्पष्ट संकेत माना जाएगा।

    आने वाले दिनों में राज्यसभा और विधान परिषद दोनों चुनावों ने महाराष्ट्र की राजनीति को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। समझौते, रणनीति और उम्मीदवार चयन—तीनों मोर्चों पर फैसले तय करेंगे कि सत्ता संतुलन किसके पक्ष में झुकेगा।

  • Business News: स्टैंडर्ड इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी लिमिटेड का मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, तीसरी तिमाही में शानदार ग्रोथ

    Business News: स्टैंडर्ड इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी लिमिटेड का मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, तीसरी तिमाही में शानदार ग्रोथ

    मुंबई: स्टैंडर्ड इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी लिमिटेड, पूर्व में स्टैंडर्ड ग्लास लाइनिंग टेक्नोलॉजी लिमिटेड, ने वित्त वर्ष(Financial Year) 2026 की तीसरी तिमाही(Quarter) और नौ महीने के नतीजे घोषित किए, जो कंपनी के स्ट्रेटेजिक ग्रोथ, वित्तीय मजबूती और लॉन्ग-टर्म वैल्यू क्रिएशन को दर्शाते हैं।

    वित्त वर्ष 2026 के नौ महीनों में कंपनी की कुल आय 562 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 23.6% अधिक है। एबिटडा 102 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 11.9% की बढ़ोतरी हुई और एबिटडा मार्जिन 18.2% दर्ज किया गया। प्रॉफिट बिफ़ोर टैक्स (पीबीटी) 83 करोड़ रुपये और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 62 करोड़ रुपये रहा।

    तीसरी तिमाही के दौरान कुल आय 196 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 37.1% अधिक है। एबिटडा 34 करोड़ रुपये और PAT 20 करोड़ रुपये रहा, जिसमें क्रमशः 17.0% और 28.3% की बढ़ोतरी हुई।

    कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर नागेश्वर राव कंदुला ने कहा, “हमने सफलतापूर्वक इंटीग्रेटेड इंजीनियरिंग प्लेटफॉर्म में खुद को विकसित किया है और अपने ग्लास-लाइनिंग व्यवसाय को भी तेजी से आगे बढ़ाया है। हमारा ध्यान तकनीकी नेतृत्व और शेयरधारकों के लिए निरंतर मूल्य सृजन पर केंद्रित है।”

    स्टैंडर्ड इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी लिमिटेड ने इस तिमाही में औपचारिक रूप से अपना नाम बदलकर वर्तमान नाम अपनाया। कंपनी अब उच्च-प्रिसिशन, इंटीग्रेटेड इंजीनियरिंग प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य कर रही है, जो जटिल और मल्टी-डिसिप्लिनरी प्रोजेक्ट्स को अवधारणा से लेकर संचालन तक पूरा करने में सक्षम है।

    कंपनी का मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और रणनीतिक विस्तार इसे लंबी अवधि में सतत मूल्य सृजन के लिए तैयार करता है।

  • Open Pathshala: चर्चगेट के गार्डन बने बोर्ड परीक्षा की खुली पाठशाला

    Open Pathshala: चर्चगेट के गार्डन बने बोर्ड परीक्षा की खुली पाठशाला

    Mumbai News: मुंबई के चर्चगेट इलाके में इन दिनों एक अलग ही नज़ारा देखने को मिल रहा है। एसएससी और एचएससी बोर्ड की आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राएं घरों और कोचिंग क्लासेस से बाहर निकलकर गार्डन में पढ़ाई (Open Pathshala) करते नजर आ रहे हैं। किताबें, नोट्स और प्रश्नपत्रों के साथ पेड़ों की छांव में बैठे ये छात्र शांत माहौल में एक-दूसरे के साथ चर्चा करते हुए पढ़ाई कर रहे हैं।

    छात्रों का कहना है कि गार्डन का खुला और शांत वातावरण पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाता है और लंबे समय तक बैठकर पढ़ने में मदद करता है। कई अभिभावक भी इसे सकारात्मक पहल मान रहे हैं, जहां बच्चे मोबाइल और अन्य ध्यान भटकाने वाली चीज़ों से दूर रहकर पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं।

    बोर्ड परीक्षाओं का दबाव झेल रहे इन छात्रों के लिए चर्चगेट का गार्डन न केवल पढ़ाई की जगह बन गया है, बल्कि मानसिक तनाव कम करने का भी एक ज़रिया साबित हो रहा है।