Category: New Delhi

  • Lamborghini Accident Kanpur: 10 करोड़ की लैंबॉर्गिनी का कहर: VIP रोड पर रफ्तार बनी आफत, शिवम मिश्रा गिरफ्तार

    Lamborghini Accident Kanpur: 10 करोड़ की लैंबॉर्गिनी का कहर: VIP रोड पर रफ्तार बनी आफत, शिवम मिश्रा गिरफ्तार

    कानपुर (Kanpur): उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए हाई-प्रोफाइल लैंबॉर्गिनी हादसे (Lamborghini Accident) ने शहर को झकझोर दिया है। तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। रविवार दोपहर वीआईपी रोड पर हुई इस सनसनीखेज घटना में कई लोग घायल हो गए थे।

    पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, 35 वर्षीय आरोपी शिवम मिश्रा को मेडिकल परीक्षण के बाद अदालत में पेश किया गया। हादसा उस समय हुआ जब करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की लैंबॉर्गिनी रेवुएल्टो ग्वालटोली इलाके में अनियंत्रित होकर पैदल चलने वालों और खड़े वाहनों से टकरा गई।

    https://epaper.rashtriyaswabhimaan.com/view/501/rashtriya-swabhimaan

    फर्राटे से फुटपाथ तक

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शिवम मिश्रा अपनी लग्जरी कार से ग्रीन पार्क की ओर जा रहे थे। रिंग वाले चौराहे के पास अचानक कार बेकाबू हो गई। पहले सड़क किनारे खड़ी ऑटो और बुलेट मोटरसाइकिल को टक्कर मारी, फिर फुटपाथ पर चढ़ गई।

    इस हादसे में 18 वर्षीय ई-रिक्शा चालक मोहम्मद तौफीक समेत कई लोग घायल हुए। बुलेट सवार विशाल त्रिपाठी और सोनू त्रिपाठी भी जख्मी बताए जा रहे हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    ड्राइवर बदलने की कोशिश, पुलिस ने किया खारिज

    मामले में नया मोड़ तब आया जब मोहन नामक एक व्यक्ति ने खुद को कार का ड्राइवर बताते हुए दावा किया कि हादसे के समय शिवम कार नहीं चला रहे थे। हालांकि, पुलिस ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने स्पष्ट कहा कि जांच में मिले साक्ष्यों से साबित हुआ है कि दुर्घटना के समय शिवम मिश्रा ही कार चला रहे थे।

    घायल तौफीक ने मामले में शिकायत दर्ज कराई है, हालांकि आरोपी पक्ष के वकील ने दावा किया कि पीड़ित कानूनी कार्रवाई के इच्छुक नहीं थे।

    बाउंसरों की एंट्री और नंबर प्लेट तोड़ने का आरोप

    हादसे के बाद घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लैंबॉर्गिनी के पीछे चल रही कार से आए सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को हटाने की कोशिश की। चालक को बाहर निकालने के लिए कार का शीशा तोड़ा गया और उसे निजी अस्पताल ले जाया गया।

    कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि कार मालिक की पहचान छिपाने के लिए नंबर प्लेट तोड़ने का प्रयास किया गया। पुलिस ने लक्जरी कार को जब्त कर ग्वालटोली थाने पहुंचा दिया है।

    ‘दौरा’ आने का दावा भी जांच के घेरे में

    आरोपी पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि चालक को अचानक दौरा आने के कारण हादसा हुआ। हालांकि, पुलिस ने कहा है कि इस दावे की भी मेडिकल और तकनीकी जांच की जा रही है।

  • INDIA-US Agro Trade Deal: क्या अमेरिका के साथ कृषि समझौता भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” साबित होगा?

    INDIA-US Agro Trade Deal: क्या अमेरिका के साथ कृषि समझौता भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” साबित होगा?

    मोदी सरकार की एग्री-डील पर उठते सवाल और हकीकत

    भारत और अमेरिका के बीच कृषि क्षेत्र (INDIA-US Agro Trade Deal) में बढ़ते सहयोग और संभावित व्यापारिक समझौतों को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्ष के कुछ नेताओं और किसान संगठनों का आरोप है कि यह समझौता भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ है और “किसानों के डेथ वारंट” पर हस्ताक्षर जैसा कदम है।

    लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है? आइए विस्तार से समझते हैं।


    कृषि समझौते की पृष्ठभूमि

    भारत और अमेरिका के बीच कृषि व्यापार पहले से ही जारी है। भारत अमेरिका से बादाम, सेब, दालें और कृषि तकनीक आयात करता है, जबकि अमेरिका को चावल, मसाले, समुद्री उत्पाद और कुछ कृषि उत्पाद निर्यात करता है।

    हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच:

    • कृषि बाजारों को खोलने,
    • टैरिफ कम करने,
    • जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों के आयात,
    • डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के व्यापार
      को लेकर चर्चा तेज हुई है।

    इसी संदर्भ में प्रस्तावित या चर्चित “कृषि डील” को लेकर किसानों में आशंकाएँ पैदा हुई हैं।


    किसानों की प्रमुख चिंताएँ

    1. सस्ते आयात का खतरा

    अमेरिका में कृषि बड़े पैमाने पर, अत्याधुनिक तकनीक और भारी सरकारी सब्सिडी के सहारे की जाती है। यदि भारतीय बाजार अमेरिकी गेहूं, मक्का, सोयाबीन या डेयरी उत्पादों के लिए खुलता है, तो:

    • भारतीय किसानों को मूल्य प्रतिस्पर्धा में भारी नुकसान हो सकता है
    • एमएसपी व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है
    • छोटे और सीमांत किसान बाजार से बाहर हो सकते हैं

    2. जीएम फसलों का मुद्दा

    अमेरिका जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों का बड़ा उत्पादक है। यदि ऐसे उत्पाद भारत में व्यापक रूप से आयात होते हैं, तो:

    • जैव विविधता पर असर पड़ सकता है
    • पारंपरिक बीजों और स्थानीय खेती पर संकट आ सकता है
    • बीज कंपनियों की निर्भरता बढ़ सकती है

    3. डेयरी सेक्टर पर दबाव

    भारत का डेयरी क्षेत्र मुख्यतः छोटे किसानों और सहकारी मॉडल (जैसे अमूल) पर आधारित है। अमेरिकी डेयरी उत्पादों को अनुमति मिलने से लाखों दुग्ध उत्पादकों की आय पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


    सरकार का पक्ष क्या है?

    सरकार का कहना है कि:

    • कोई भी समझौता भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करते हुए ही किया जाएगा।
    • निर्यात के नए अवसर खुलेंगे, जिससे किसानों को वैश्विक बाजार मिलेगा।
    • कृषि तकनीक, कोल्ड स्टोरेज, सप्लाई चेन और प्रोसेसिंग में निवेश बढ़ेगा।
    • भारत को उच्च गुणवत्ता वाले बीज और तकनीकी सहयोग मिलेगा।

    सरकार यह भी तर्क देती है कि वैश्विक व्यापार से अलग रहकर भारत कृषि क्षेत्र को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी नहीं बना सकता।


    “डेथ वारंट” वाली राजनीति

    “डेथ वारंट” जैसे शब्द राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं। विपक्ष इसे 2020 के कृषि कानूनों की याद से जोड़ता है, जब बड़े कॉर्पोरेट और विदेशी कंपनियों के प्रवेश को लेकर व्यापक किसान आंदोलन हुआ था।

    आलोचकों का कहना है कि:

    • यह समझौता धीरे-धीरे कृषि बाजार को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए खोल देगा
    • एमएसपी कानूनी गारंटी से ध्यान हटाया जा रहा है
    • आत्मनिर्भर कृषि मॉडल कमजोर होगा

    वहीं समर्थकों का दावा है कि:

    • भारतीय किसान अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं
    • निर्यात-आधारित कृषि से आय दोगुनी करने का लक्ष्य मजबूत होगा

    वास्तविक खतरा कहाँ है?

    सवाल यह नहीं है कि अमेरिका के साथ समझौता हो या न हो। असली मुद्दा यह है कि:

    • क्या भारतीय किसानों को बराबर की सब्सिडी और सुरक्षा मिलेगी?
    • क्या एमएसपी और सार्वजनिक खरीद प्रणाली बरकरार रहेगी?
    • क्या छोटे किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी?

    यदि सुरक्षा उपायों के बिना बाजार पूरी तरह खोल दिया गया, तो छोटे किसानों पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन यदि समझौता संतुलित शर्तों और चरणबद्ध तरीके से लागू हुआ, तो यह अवसर भी बन सकता है।

  • Vande Mataram 150 yrs Celebration: आधिकारिक कार्यक्रमों में अब 3 मिनट 10 सेकंड का “वंदे मातरम्” अनिवार्य, सरकार ने जारी किया नया प्रोटोकॉल

    Vande Mataram 150 yrs Celebration: आधिकारिक कार्यक्रमों में अब 3 मिनट 10 सेकंड का “वंदे मातरम्” अनिवार्य, सरकार ने जारी किया नया प्रोटोकॉल

    वंदे मातरम् का छह अंतरों वाला संस्करण, जिसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के गायन और वादन को लेकर एक नया आधिकारिक प्रोटोकॉल जारी किया है। अब सभी सरकारी एवं आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम्(Vande Mataram) का छह अंतरों वाला संस्करण, जिसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है, अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।

    वंदे मातरम्

    छंद 1

    वन्दे मातरम्।
    सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
    शस्यश्यामलां मातरम्।
    शुभ्रज्योत्स्ना-पुलकित-यामिनीम्,
    फुल्ल-कुसुमित-द्रुम-दल-शोभिनीम्,
    सुहासिनीं सुमधुर-भाषिणीम्,
    सुखदां वरदां मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 2

    वन्दे मातरम्।
    कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले,
    कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खर-करवाले,
    अबला केन मा एत बले?
    बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं,
    रिपुदलवारिणीं मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 3

    वन्दे मातरम्।
    तुमि विद्या, तुमि धर्म,
    तुमि हृदि, तुमि मर्म,
    त्वं हि प्राणाः शरीरे।
    बाहुते तुमि मा शक्ति,
    हृदये तुमि मा भक्ति,
    तोमारई प्रतिमा गढ़ि
    मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 4

    वन्दे मातरम्।
    त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
    कमला कमलदलविहारिणी,
    वाणी विद्यादायिनी।
    नमामि त्वाम्।
    नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम्,
    सुजलां सुफलां मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 5

    वन्दे मातरम्।
    श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्,
    धरणीं भरणीं मातरम्,
    शत्रुदलवारिणीं मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।


    छंद 6

    वन्दे मातरम्।
    त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति,
    त्वं हि शक्ति मातरम्।
    वन्दे मातरम्।।

    यह नियम राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अवसरों, राष्ट्रपति के आगमन, उनके भाषणों अथवा राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में लागू होगा।

    इसके साथ ही राज्यों के राज्यपालों के आगमन तथा उनके संबोधन से पूर्व और पश्चात भी इसी निर्धारित संस्करण और समय-सीमा का पालन करना आवश्यक होगा।

    सरकार के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति में एकरूपता, गरिमा और प्रोटोकॉल की स्पष्टता सुनिश्चित करना है।


    अब तय समय-सीमा के भीतर ही होगा गायन

    नए निर्देशों के अनुसार, सभी सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का गायन या वादन निर्धारित 3 मिनट 10 सेकंड की अवधि के भीतर ही किया जाएगा। इससे पहले विभिन्न आयोजनों में इसकी अवधि और प्रस्तुति शैली में भिन्नता देखने को मिलती थी।

    सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में उठाया गया है।


    क्या “वंदे मातरम्” शुरू में सिर्फ बंगाल का गीत था?

    कुछ इतिहासकारों और विचारकों का मत है कि “वंदे मातरम्” प्रारंभ में पूरे भारत का राष्ट्रगीत नहीं था, बल्कि यह बंगाल की सांस्कृतिक चेतना से उपजा एक साहित्यिक गीत था।

    इस गीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अत्यंत संस्कृतनिष्ठ बंगाली भाषा में की थी। इसे पहली बार 7 नवंबर 1875 को ‘बंगदर्शन’ पत्रिका में प्रकाशित किया गया। बाद में 1882 में प्रकाशित उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में यह गीत शामिल किया गया।

    हालांकि, जो गीत मातृभूमि की स्तुति के रूप में साहित्यिक अभिव्यक्ति था, वही आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम की धड़कन बन गया।

    स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान:

    • क्रांतिकारी इसे संघर्ष से पहले फुसफुसाकर गाते थे,
    • विद्यार्थी विरोध प्रदर्शनों में इसे स्वर देते थे,
    • और यह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध राष्ट्रभावना का प्रतीक बन गया।

    राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता

    भारत का राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” है, जिसका अर्थ है — “हे मातृभूमि, मैं तुम्हें नमन करता हूँ।”

    1950 में संविधान सभा ने इसे “राष्ट्रीय गीत” का दर्जा दिया। हालांकि राष्ट्रगान “जन गण मन” है, लेकिन वंदे मातरम् को समान सम्मान प्रदान किया गया है।

    यह गीत भारत को एक हरित, समृद्ध और पालन-पोषण करने वाली मां के रूप में चित्रित करता है —
    सुजलां, सुफलां, मलयज-शीतलाम्…

    आज इस ऐतिहासिक गीत की रचना को लगभग 150 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।


    एकरूपता बनाम बहस

    जहाँ सरकार इसे प्रोटोकॉल स्पष्टता और राष्ट्रीय सम्मान से जोड़कर देख रही है, वहीं कुछ वर्गों में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों को लेकर बहस भी समय-समय पर उठती रही है।

    फिर भी इसमें कोई संदेह नहीं कि “वंदे मातरम्” भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक अमिट प्रतीक रहा है और आज भी राष्ट्रभावना से गहराई से जुड़ा हुआ है।

  • Parliament Budget Session: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, विपक्ष का आरोप– ‘बोलने से रोका जा रहा’

    Parliament Budget Session: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, विपक्ष का आरोप– ‘बोलने से रोका जा रहा’

    नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इंडिया ब्लॉक ने स्पीकर को हटाने से संबंधित प्रस्ताव का नोटिस दाखिल किया है, जिस पर 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। यह प्रस्ताव नियम 94(सी) के तहत दिया गया है, जिसमें 100 से अधिक सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है।

    कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि विपक्ष ने संविधान में अपना पूर्ण विश्वास जताया है। उन्होंने कहा, “माननीय अध्यक्ष महोदय के प्रति हमारा व्यक्तिगत सम्मान है, लेकिन यह बेहद दुखद है कि विपक्षी सांसदों को सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाने के अवसरों से लगातार रोका जा रहा है। कई वर्षों बाद स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। यह कोई सामान्य कदम नहीं, बल्कि असाधारण परिस्थितियों में उठाया गया असाधारण निर्णय है।”

    स्पीकर ने सचिवालय को प्रस्ताव की जांच के निर्देश दिए(Parliament Budget Session)

    सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को लेकर लोकसभा सचिवालय को निर्देश दिए हैं कि नियमों के तहत इसकी जांच कर आगे की कार्रवाई की जाए।

    हालांकि, इस प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। टीएमसी नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी संसद को सुचारू रूप से चलने देने के पक्ष में है, इसलिए उन्होंने इस प्रस्ताव से दूरी बनाए रखी है।

    इमरान मसूद का तीखा बयान

    इस बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का सदन के बाहर दिया गया बयान भी चर्चा में है। उन्होंने कहा,
    “तो मारते हमें। आप गुंडे हैं न। आप साबित कर रहे हो कि बोलने नहीं देते। लो, अभी यहीं मार लो हमें। सांसदों को बाहर निकाल दिया गया है। आपकी गुंडागर्दी चल रही है, चलाइए। लेकिन लोकतंत्र में गुंडागर्दी की कोई जगह नहीं होती। यह सब इतिहास में दर्ज होगा।”

    इन सांसदों ने दिया प्रस्ताव

    स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सांसद गौरव गोगोई, के. सुरेश और मोहम्मद जावेद द्वारा दिया गया है। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष तरीके से नहीं चलाई जा रही और विपक्षी सांसदों को लगातार बोलने से रोका जा रहा है।

    राजनीतिक मायने

    राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाना अपने आप में दुर्लभ घटना है। इससे संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव और गतिरोध की स्थिति और स्पष्ट होती है।

  • BJP–NCP political deal: सीएम फडणवीस का अचानक दिल्ली दौरा, सियासी हलचल तेज; सुनेत्रा पवार भी जाएंगी दिल्ली

    BJP–NCP political deal: सीएम फडणवीस का अचानक दिल्ली दौरा, सियासी हलचल तेज; सुनेत्रा पवार भी जाएंगी दिल्ली

    मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सोमवार (9 फरवरी) देर रात अचानक दिल्ली पहुंचने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ने दिल्ली में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और इसके बाद मंगलवार तड़के मुंबई लौट आए। इस गोपनीय दौरे को मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

    राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खास तौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विलय को लेकर चर्चाएं तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस संबंध में महायुति के सहयोगी दलों के साथ बातचीत का दौर शुरू हो चुका है।

    फडणवीस के बाद सुनेत्रा पवार का दिल्ली दौरा

    मुख्यमंत्री के अचानक दिल्ली दौरे के तुरंत बाद अब दिवंगत अजित पवार की पत्नी और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के दिल्ली जाने की जानकारी सामने आई है। सुनेत्रा पवार मंगलवार (10 फरवरी) शाम 6:45 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगी।

    उपमुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, वह बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार भेंट करेंगी। उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद यह उनकी पहली औपचारिक दिल्ली यात्रा बताई जा रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री फडणवीस के देर रात किए गए गोपनीय दौरे के बाद सुनेत्रा पवार की इस यात्रा को राजनीतिक रूप से खास महत्व दिया जा रहा है।

    इस दौरे के दौरान एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और पार्टी के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल भी सुनेत्रा पवार के साथ दिल्ली में मौजूद रहेंगे।

    सीएम देवेंद्र फडणवीस के अचानक दिल्ली दौरे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज, सुनेत्रा पवार की दिल्ली यात्रा को भी खास माना जा रहा है।
    सीएम देवेंद्र फडणवीस के अचानक दिल्ली दौरे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज, सुनेत्रा पवार की दिल्ली यात्रा को भी खास माना जा रहा है।

    जिला परिषद चुनावों में बीजेपी पहले, एनसीपी दूसरे नंबर पर

    इसी बीच महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न हुए 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनावों के नतीजों ने भी सियासी समीकरणों को नई दिशा दी है। इन चुनावों में बीजेपी पहले स्थान पर रही, जबकि अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दूसरे नंबर पर रही।

    इन चुनावों में जिला परिषद की 731 और पंचायत समितियों की 1462 सीटों के लिए मतदान हुआ था।
    जिला परिषद की 731 सीटों में से बीजेपी ने सबसे ज्यादा 233 सीटें जीतीं। इसके बाद अजित पवार गुट की एनसीपी को 167 और शिंदे गुट की शिवसेना को 162 सीटें मिलीं। महायुति ने कुल मिलाकर 731 में से 562 सीटों पर जीत दर्ज की है।

    वहीं, विपक्षी महाविकास आघाड़ी को करारा झटका लगा है। कांग्रेस को 56, शरद पवार गुट को 26 और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना को 43 सीटें मिली हैं। इस तरह एमवीए को कुल मिलाकर सिर्फ 125 सीटों से संतोष करना पड़ा।

    आने वाले दिनों में बड़े सियासी संकेत(BJP–NCP political deal)

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री का अचानक दिल्ली दौरा, उसके तुरंत बाद सुनेत्रा पवार की प्रस्तावित यात्रा और हालिया चुनावी नतीजे—ये सभी घटनाएं महाराष्ट्र में आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक फैसलों की ओर इशारा कर रही हैं।

  • Bharat Ratna:सावरकर को भारत रत्न की मांग पर चंद्रशेखर आजाद का तंज, बोले– ‘भागवत सरकार के मालिक जैसे, मांग की जरूरत क्या’

    Bharat Ratna:सावरकर को भारत रत्न की मांग पर चंद्रशेखर आजाद का तंज, बोले– ‘भागवत सरकार के मालिक जैसे, मांग की जरूरत क्या’

    नगीना। उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि देश में अभिव्यक्ति की आजादी है और कोई भी किसी के लिए पुरस्कार की मांग कर सकता है, लेकिन मोहन भागवत की स्थिति आम नागरिक जैसी नहीं है।

    नगीना सांसद ने तंज कसते हुए कहा, “मोहन भागवत सरकार के मालिक जैसे हैं। उन्हें किसी से मांग करने की क्या जरूरत है? वे कह देंगे तो भला कौन मना करेगा।” उन्होंने कहा कि देश की आजादी और सामाजिक बदलाव की लड़ाई में किसका कितना योगदान रहा है, यह इतिहास में दर्ज है और किसी से छिपा नहीं है।

    कांशीराम को भारत रत्न की मांग दोहराई

    चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम को भारत रत्न दिए जाने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने देश की राजनीति और सामाजिक चेतना को नई दिशा दी और वंचित, शोषित समाज को संगठित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

    कोतवाल धन सिंह गुर्जर को भी भारत रत्न देने की मांग

    नगीना सांसद ने 1857 की क्रांति के नायक कोतवाल धन सिंह गुर्जर को भी भारत रत्न देने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि ऐसे वीरों और महापुरुषों को उचित सम्मान न देकर सरकार उन वर्गों का अपमान कर रही है, जिनसे ये महान हस्तियां जुड़ी रही हैं।

    चेतावनी भरे लहजे में दिया बयान

    चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि समाज इस तरह की उपेक्षा को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर सरकार ने इन महान हस्तियों को सम्मान देने की मांग पर ध्यान नहीं दिया, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी। हमारे लोग यह अपमान सहन नहीं करेंगे और वोट की ताकत से इसका बदला लेंगे।”

  • Bharat Ratna: सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर गरमाई सियासत, भाई जगताप भाजपा-आरएसएस हुए हमलावर

    Bharat Ratna: सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर गरमाई सियासत, भाई जगताप भाजपा-आरएसएस हुए हमलावर

    मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग के बाद देश की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता भाई जगताप ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि जिन व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगे हों, उन्हें भारत रत्न(Bharat Ratna) जैसे सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ना देश की गरिमा पर सवाल खड़े करता है।

    भाई जगताप ने कहा कि भारत रत्न केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की भावनाओं और देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा सम्मान है। उन्होंने कहा कि अब तक यह सम्मान उन्हीं महान व्यक्तित्वों को दिया गया है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र, समाज या किसी बड़े उद्देश्य के लिए समर्पित किया।

    विवादित नामों को सम्मान देना समझ से परे – भाई जगताप
    कांग्रेस नेता ने कहा, “भारत रत्न (Bharat Ratna)से बड़ा कोई सम्मान नहीं है। संघ प्रमुख किसी संगठन के प्रमुख हैं, देश के नहीं। वीर सावरकर पर लगे आरोपों के बीच इस तरह की मांग समझ से परे है। अगर विवादित व्यक्तियों को भारत रत्न दिया गया, तो इसकी समीक्षा पूरा देश करेगा और सम्मान की गरिमा पर गंभीर सवाल उठेंगे।”

    उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा सरकार में ऐसे कई मंत्री हैं जिन पर आरोप लगने की बातें रिपोर्ट्स में सामने आती रही हैं। ऐसे माहौल में भारत रत्न देने का फैसला सम्मान की तौहीन जैसा होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को बेवजह हवा नहीं देना चाहते, अंतिम फैसला सरकार का होगा और जवाब जनता देगी।

    कानून-व्यवस्था, कलाकार और राजनीति पर भी सरकार को घेरा
    संघ प्रमुख के एक कार्यक्रम में अभिनेता सलमान खान की मौजूदगी पर प्रतिक्रिया देते हुए भाई जगताप ने कहा कि खेल और कला को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज कलाकारों को खुलेआम धमकियां मिल रही हैं, फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के घर फायरिंग की घटना सामने आई है और गैंगस्टरों में कानून का कोई डर नहीं दिख रहा।

    उन्होंने कहा कि 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड के खौफ पर काबू पाया गया था, लेकिन आज हालात फिर से चिंता पैदा कर रहे हैं, जो सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

    तीन बच्चों वाले बयान पर भी जताई नाराज़गी
    संघ प्रमुख के तीन बच्चों से जुड़े बयान को हास्यास्पद बताते हुए भाई जगताप ने कहा कि जब भारत पहले ही जनसंख्या के मामले में दुनिया में नंबर एक है, तब इस तरह की सलाह देना गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं पहले से ज्यादा असुरक्षित हैं और युवा खुद यह तय करने में सक्षम हैं कि उन्हें कब और किससे शादी करनी है।

    अन्य मुद्दों पर भी रखी बेबाक राय
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर लगाए गए आरोपों पर भाई जगताप ने कहा कि केवल आरोप लगाने से कुछ नहीं होगा, अगर आरोप सही हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए।
    बीएमसी में रितु तावड़े के मेयर बनने और घुसपैठियों पर दिए गए बयान को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार चारों तरफ है, कानून भी मौजूद है, फिर पिछले 12 वर्षों में कितने घुसपैठियों को निकाला गया, यह जनता को बताया जाना चाहिए।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि संसद देश का पवित्र मंदिर है, लेकिन वहां विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन जैसे गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा से बचा जा रहा है।

    महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़े विमान हादसे के सवाल पर भाई जगताप ने कहा, “जहां धुआं होता है, वहां आग भी होती है।” उन्होंने 18 साल पुराने विमान, लैंडिंग प्रक्रिया और तकनीकी खामियों पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।

    वहीं मीडिया को दिए बयान में उन्होंने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर कहा कि खेल, कला और संगीत को राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। भारत का क्रिकेट में दबदबा रहा है और विश्व कप जैसे आयोजनों को राजनीतिक नजरिये से देखना ठीक नहीं है।

  • IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया तेज, कोटक महिंद्रा, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स ने दी फाइनेंशियल बोली

    IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया तेज, कोटक महिंद्रा, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स ने दी फाइनेंशियल बोली

    नई दिल्ली। IDBI बैंक के विनिवेश (IDBI Bank Disinvestment) की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंचती नजर आ रही है। स्ट्रेटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट के तहत कोटक महिंद्रा बैंक, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स ने अपनी फाइनेंशियल बोलियां जमा कर दी हैं।

    एमिरेट्स NBD दुबई सरकार के स्वामित्व वाला बैंक है, जबकि फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी है। शॉर्टलिस्ट किए गए इन तीनों बोलीदाताओं की फाइनेंशियल बिड का अब तय प्रक्रिया के तहत वैल्यूएशन किया जाएगा।

    सूत्रों के अनुसार, फाइनल चयन केवल सबसे ऊंची बोली के आधार पर नहीं होगा। इसमें प्राइस के साथ-साथ कई क्वालिटेटिव और रेगुलेटरी फैक्टर्स को भी ध्यान में रखा जाएगा, ताकि बैंक की दीर्घकालिक स्थिरता और प्रबंधन क्षमता सुनिश्चित की जा सके।

    DIPAM ने की फाइनेंशियल बिड्स की पुष्टि

    डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने पहले ही फाइनेंशियल बिड्स मिलने की पुष्टि कर दी थी। DIPAM सचिव ने 6 फरवरी को सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी थी कि IDBI बैंक के स्ट्रेटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट के लिए फाइनेंशियल ऑफर प्राप्त हो चुके हैं और उनका मूल्यांकन तय प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।

    शॉर्टलिस्ट किए गए निवेशकों से फाइनल फाइनेंशियल ऑफर मिलने के बाद यह सौदा अपने निर्णायक मूल्यांकन चरण में प्रवेश कर जाता है।

    सरकार और LIC बेचेगी 60.72% हिस्सेदारी

    इस स्ट्रेटेजिक सेल में IDBI बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी के साथ-साथ मैनेजमेंट कंट्रोल का हस्तांतरण भी शामिल है। केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहे हैं।
    इसमें सरकार की 30.48 प्रतिशत और LIC की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।

    यह विनिवेश केंद्र सरकार के व्यापक स्ट्रेटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नॉन-टैक्स रेवेन्यू बढ़ाना और नॉन-कोर सेक्टर्स में सरकारी भागीदारी को कम करना है।

    2021 में PCA से बाहर निकलने के बाद बढ़ी रफ्तार

    IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया को मार्च 2021 में नई गति मिली थी, जब बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) फ्रेमवर्क से बाहर निकला। एसेट क्वालिटी, कैपिटल एडिक्वेसी और प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार के बाद PCA से बाहर आना प्राइवेट निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक अहम शर्त माना जा रहा था। अब फाइनेंशियल बिड्स के मूल्यांकन के साथ IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया अपने सबसे अहम मोड़ पर पहुंच गई है।

  • DALAI LAMA IN JEFFRY EDWARD EPSTEIN FILE : दलाई लामा का जेफरी एपस्टीन से कोई संबंध नहीं, कार्यालय ने खबरों को बताया झूठा और बेबुनियाद

    DALAI LAMA IN JEFFRY EDWARD EPSTEIN FILE : दलाई लामा का जेफरी एपस्टीन से कोई संबंध नहीं, कार्यालय ने खबरों को बताया झूठा और बेबुनियाद

    14वें दलाई लामा के कार्यालय ने विवादित अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एडवर्ड एपस्टीन(JEFFRY EDWARD EPSTEIN) से किसी भी तरह के संबंध से साफ इनकार किया है। रविवार को जारी बयान में हाल की मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट को “झूठा, बेबुनियाद और गुमराह करने वाला” बताया गया, जिनमें तिब्बती आध्यात्मिक नेता को एपस्टीन से जोड़ने की कोशिश की गई थी।

    दलाई लामा(DALAI LAMA) के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि परम पावन कभी जेफरी एपस्टीन से नहीं मिले और न ही उन्होंने किसी व्यक्ति को अपनी ओर से एपस्टीन से मिलने या बातचीत करने के लिए अधिकृत किया। बयान में कहा गया कि बिना किसी तथ्यात्मक आधार के मनगढ़ंत संबंध बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।

    दलाई लामा के कार्यालय ने कहा कि इन दावों का कोई तथ्यात्मक या दस्तावेजी आधार नहीं है।

    अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जताई नाराज़गी

    इस मुद्दे पर अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू(PEMA KHANDU) ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “दलाई लामा की पूजनीय संस्था” को निराधार आरोपों और दुर्भावनापूर्ण अटकलों में घसीटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री खांडू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा,
    “गलत सूचना के जरिए एक पवित्र आध्यात्मिक संस्था को बदनाम करने के प्रयास बेहद गैर-जिम्मेदाराना और निंदनीय हैं।”

    उन्होंने उन खबरों की आलोचना की, जिनमें दावा किया गया था कि दलाई लामा का नाम तथाकथित ‘एपस्टीन फाइल्स’ में सामने आया है।

    क्या हैं एपस्टीन फाइल्स

    हाल ही में अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने जेफरी एपस्टीन से जुड़े कई दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इन दस्तावेजों के मुताबिक, एफबीआई ने जुलाई 2006 में एपस्टीन के खिलाफ जांच शुरू की थी। अगस्त 2019 में, अभियोग लगने के एक महीने बाद, एपस्टीन ने न्यूयॉर्क की एक जेल में आत्महत्या कर ली थी।

    जनवरी में अमेरिकी न्याय विभाग ने बताया था कि वह एपस्टीन मामले से जुड़ी दो दशकों से अधिक समय की जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री को सार्वजनिक करेगा। इसमें करीब 30 लाख पन्नों के दस्तावेज, 2,000 से अधिक वीडियो और लगभग 1,80,000 तस्वीरें शामिल हैं।

    ये दस्तावेज एपस्टीन फाइल पारदर्शिता अधिनियम के तहत सार्वजनिक किए गए हैं, जो लंबे समय से चले आ रहे सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव के बाद लागू किया गया कानून है।

    घिसलेन मैक्सवेल का मामला

    एपस्टीन की करीबी सहयोगी और पूर्व प्रेमिका घिसलेन मैक्सवेल को 2021 में न्यूयॉर्क की एक संघीय जूरी ने यौन तस्करी का दोषी ठहराया था। उस पर नाबालिग लड़कियों की भर्ती में मदद करने का आरोप सिद्ध हुआ था। मैक्सवेल फिलहाल 20 साल की सजा काट रही है, हालांकि उसने किसी भी गलत काम में शामिल होने से इनकार किया है।

  • Bomb Threat:दिल्ली के 10 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, संसद पर हमले का भी दावा; अफजल गुरु और खालिस्तान का जिक्र

    Bomb Threat:दिल्ली के 10 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, संसद पर हमले का भी दावा; अफजल गुरु और खालिस्तान का जिक्र

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बार फिर बम धमाके की धमकियों से हड़कंप मच गया है। बुधवार को दिल्ली के करीब 10 स्कूलों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी(Bomb threat) दी गई। इन ईमेल्स में न सिर्फ स्कूलों, बल्कि संसद में धमाके की भी बात कही गई है।

    धमकी भरे ईमेल्स में संसद पर 13 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 11 मिनट पर विस्फोट करने का दावा किया गया है। ईमेल भेजने वाले ने संसद हमले के दोषी आतंकवादी अफजल गुरु का नाम लेते हुए भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया है। इसके साथ ही मेल में “दिल्ली बनेगा खालिस्तान”(Delhi banega Khalistan) और “पंजाब खालिस्तान है”(Punjab Khalistan hai) जैसे आपत्तिजनक और उकसाने वाले संदेश भी लिखे गए हैं।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, धमकी की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और बम निरोधक दस्ते (बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वायड) को संबंधित स्कूलों में भेजा गया। एहतियातन सभी स्कूल परिसरों को खाली करा लिया गया है और बच्चों को सुरक्षित घर भेज दिया गया।

    दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) ने बताया कि सुबह कई शैक्षणिक संस्थानों से इमरजेंसी कॉल प्राप्त हुईं। डीएफएस के एक अधिकारी ने कहा,
    “आज कुल 10 स्कूलों को बम की धमकी मिली है। दमकल विभाग और बम निरोधक टीमें मौके पर पहुंचकर तलाशी ले रही हैं।”

    खबर लिखे जाने तक किसी भी स्कूल परिसर से कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इसे गंभीरता से लेते हुए ईमेल भेजने वाले की पहचान और लोकेशन ट्रेस करने में जुटी हुई हैं।

    गौरतलब है कि हाल के महीनों में दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियां मिलती रही हैं, जिनमें से अधिकांश फर्जी साबित हुई हैं। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए हर धमकी को गंभीरता से ले रही हैं।

    धमकी भरे ईमेल में 13 फरवरी की तारीख का उल्लेख किया गया है, जो 2001 के संसद हमले की तारीख से मेल खाती है, हालांकि उस हमले का महीना दिसंबर था।

    फिलहाल सभी स्कूलों में तलाशी अभियान जारी है और राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।