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  • DALAI LAMA IN JEFFRY EDWARD EPSTEIN FILE : दलाई लामा का जेफरी एपस्टीन से कोई संबंध नहीं, कार्यालय ने खबरों को बताया झूठा और बेबुनियाद

    DALAI LAMA IN JEFFRY EDWARD EPSTEIN FILE : दलाई लामा का जेफरी एपस्टीन से कोई संबंध नहीं, कार्यालय ने खबरों को बताया झूठा और बेबुनियाद

    14वें दलाई लामा के कार्यालय ने विवादित अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एडवर्ड एपस्टीन(JEFFRY EDWARD EPSTEIN) से किसी भी तरह के संबंध से साफ इनकार किया है। रविवार को जारी बयान में हाल की मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट को “झूठा, बेबुनियाद और गुमराह करने वाला” बताया गया, जिनमें तिब्बती आध्यात्मिक नेता को एपस्टीन से जोड़ने की कोशिश की गई थी।

    दलाई लामा(DALAI LAMA) के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि परम पावन कभी जेफरी एपस्टीन से नहीं मिले और न ही उन्होंने किसी व्यक्ति को अपनी ओर से एपस्टीन से मिलने या बातचीत करने के लिए अधिकृत किया। बयान में कहा गया कि बिना किसी तथ्यात्मक आधार के मनगढ़ंत संबंध बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।

    दलाई लामा के कार्यालय ने कहा कि इन दावों का कोई तथ्यात्मक या दस्तावेजी आधार नहीं है।

    अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जताई नाराज़गी

    इस मुद्दे पर अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू(PEMA KHANDU) ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “दलाई लामा की पूजनीय संस्था” को निराधार आरोपों और दुर्भावनापूर्ण अटकलों में घसीटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री खांडू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा,
    “गलत सूचना के जरिए एक पवित्र आध्यात्मिक संस्था को बदनाम करने के प्रयास बेहद गैर-जिम्मेदाराना और निंदनीय हैं।”

    उन्होंने उन खबरों की आलोचना की, जिनमें दावा किया गया था कि दलाई लामा का नाम तथाकथित ‘एपस्टीन फाइल्स’ में सामने आया है।

    क्या हैं एपस्टीन फाइल्स

    हाल ही में अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने जेफरी एपस्टीन से जुड़े कई दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इन दस्तावेजों के मुताबिक, एफबीआई ने जुलाई 2006 में एपस्टीन के खिलाफ जांच शुरू की थी। अगस्त 2019 में, अभियोग लगने के एक महीने बाद, एपस्टीन ने न्यूयॉर्क की एक जेल में आत्महत्या कर ली थी।

    जनवरी में अमेरिकी न्याय विभाग ने बताया था कि वह एपस्टीन मामले से जुड़ी दो दशकों से अधिक समय की जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री को सार्वजनिक करेगा। इसमें करीब 30 लाख पन्नों के दस्तावेज, 2,000 से अधिक वीडियो और लगभग 1,80,000 तस्वीरें शामिल हैं।

    ये दस्तावेज एपस्टीन फाइल पारदर्शिता अधिनियम के तहत सार्वजनिक किए गए हैं, जो लंबे समय से चले आ रहे सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव के बाद लागू किया गया कानून है।

    घिसलेन मैक्सवेल का मामला

    एपस्टीन की करीबी सहयोगी और पूर्व प्रेमिका घिसलेन मैक्सवेल को 2021 में न्यूयॉर्क की एक संघीय जूरी ने यौन तस्करी का दोषी ठहराया था। उस पर नाबालिग लड़कियों की भर्ती में मदद करने का आरोप सिद्ध हुआ था। मैक्सवेल फिलहाल 20 साल की सजा काट रही है, हालांकि उसने किसी भी गलत काम में शामिल होने से इनकार किया है।

  • Bomb Threat:दिल्ली के 10 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, संसद पर हमले का भी दावा; अफजल गुरु और खालिस्तान का जिक्र

    Bomb Threat:दिल्ली के 10 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, संसद पर हमले का भी दावा; अफजल गुरु और खालिस्तान का जिक्र

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बार फिर बम धमाके की धमकियों से हड़कंप मच गया है। बुधवार को दिल्ली के करीब 10 स्कूलों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी(Bomb threat) दी गई। इन ईमेल्स में न सिर्फ स्कूलों, बल्कि संसद में धमाके की भी बात कही गई है।

    धमकी भरे ईमेल्स में संसद पर 13 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 11 मिनट पर विस्फोट करने का दावा किया गया है। ईमेल भेजने वाले ने संसद हमले के दोषी आतंकवादी अफजल गुरु का नाम लेते हुए भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया है। इसके साथ ही मेल में “दिल्ली बनेगा खालिस्तान”(Delhi banega Khalistan) और “पंजाब खालिस्तान है”(Punjab Khalistan hai) जैसे आपत्तिजनक और उकसाने वाले संदेश भी लिखे गए हैं।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, धमकी की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और बम निरोधक दस्ते (बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वायड) को संबंधित स्कूलों में भेजा गया। एहतियातन सभी स्कूल परिसरों को खाली करा लिया गया है और बच्चों को सुरक्षित घर भेज दिया गया।

    दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) ने बताया कि सुबह कई शैक्षणिक संस्थानों से इमरजेंसी कॉल प्राप्त हुईं। डीएफएस के एक अधिकारी ने कहा,
    “आज कुल 10 स्कूलों को बम की धमकी मिली है। दमकल विभाग और बम निरोधक टीमें मौके पर पहुंचकर तलाशी ले रही हैं।”

    खबर लिखे जाने तक किसी भी स्कूल परिसर से कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इसे गंभीरता से लेते हुए ईमेल भेजने वाले की पहचान और लोकेशन ट्रेस करने में जुटी हुई हैं।

    गौरतलब है कि हाल के महीनों में दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियां मिलती रही हैं, जिनमें से अधिकांश फर्जी साबित हुई हैं। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए हर धमकी को गंभीरता से ले रही हैं।

    धमकी भरे ईमेल में 13 फरवरी की तारीख का उल्लेख किया गया है, जो 2001 के संसद हमले की तारीख से मेल खाती है, हालांकि उस हमले का महीना दिसंबर था।

    फिलहाल सभी स्कूलों में तलाशी अभियान जारी है और राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

  • Mohan Bhagwat V/S BJP : आरएसएस के बिना भाजपा के ‘अच्छे दिन’ नहीं हो सकते: मोहन भागवत की भाजपा नेतृत्व को दो टूक

    Mohan Bhagwat V/S BJP : आरएसएस के बिना भाजपा के ‘अच्छे दिन’ नहीं हो सकते: मोहन भागवत की भाजपा नेतृत्व को दो टूक

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत(Mohan Bhagwat) ने भाजपा और संघ के रिश्तों को लेकर एक बार फिर स्पष्ट रेखा खींच दी है। उन्होंने कहा है कि भाजपा को मिले राजनीतिक ‘अच्छे दिन’ आरएसएस की विचारधारा और उसके दीर्घकालिक संघर्षों का ही परिणाम हैं। उनके इस बयान को भाजपा नेतृत्व के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    दरअसल, 2024 के आम चुनावों के दौरान भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि भाजपा आरएसएस के बिना भी चुनाव जीत सकती है। इस बयान के बाद संघ कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की चर्चा सामने आई थी। अब मोहन भागवत के ताज़ा बयान को उसी पृष्ठभूमि में अहम माना जा रहा है।

    भागवत ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के लिए आरएसएस ने दशकों तक प्रतिबद्धता दिखाई। जिसने इस आंदोलन का साथ दिया, उसे राजनीतिक लाभ भी मिला। उन्होंने यह भी साफ किया कि राम मंदिर आंदोलन संघ के नेतृत्व में चला और उसका चुनावी फायदा भाजपा को मिला।

    भागवत के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि भाजपा की राजनीतिक सफलता का वैचारिक आधार आज भी आरएसएस ही है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक पार्टी है, संघ की नहीं। हालांकि, भाजपा में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक काम करते हैं। संघ का दावा है कि वह कार्यकर्ता देता है, लेकिन राजनीतिक फैसलों में उसका सीधा हस्तक्षेप नहीं होता।

    संघ की कार्यशैली पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस स्वयंसेवकों के पास किसी और काम के लिए समय नहीं होता। माताएं-बहनें भी शिकायत करती हैं कि स्वयंसेवकों को घर के लिए वक्त नहीं मिलता। संघ का एकमात्र उद्देश्य संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करना है।

    उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का हवाला देते हुए कहा कि संघ खुद कुछ नहीं करता, लेकिन स्वयंसेवक कुछ भी छोड़ते नहीं हैं। स्वयंसेवक समाज के हर अहम क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं, लेकिन पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं। संघ में नियंत्रण नहीं, बल्कि सहयोग और विचार की शक्ति काम करती है।

    भागवत ने अंत में कहा कि संघ का उद्देश्य किसी को सत्ता या राजनीतिक लाभ पहुंचाना नहीं है, बल्कि राष्ट्र के लिए एक विचार गढ़ना और उसे समाज में जीवित रखना है।

  • Mahatma Jyotiba Phule : तेलंगाना में महात्मा फुले की प्रतिमा तोड़ने की कोशिश निंदनीय, मनुवादी भाजपा का कड़ा विरोध: सचिन सावंत

    Mahatma Jyotiba Phule : तेलंगाना में महात्मा फुले की प्रतिमा तोड़ने की कोशिश निंदनीय, मनुवादी भाजपा का कड़ा विरोध: सचिन सावंत

    हैदराबाद/मुंबई।
    कांग्रेस नेता और तेलंगाना प्रभारी सचिन सावंत ने तेलंगाना के तेल्लापूर इलाके में महात्मा ज्योतिबा फुले(Mahatma Jyotiba Phule) की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे भाजपा की “अत्यंत विषाक्त राजनीति” करार देते हुए इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की है।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर जारी बयान में सचिन सावंत ने कहा कि जिस तरह भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा महात्मा फुले की प्रतिमा तोड़ने का प्रयास किया गया, वह पूरी तरह से निषेधार्ह और शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले वही महान समाज सुधारक हैं जिन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को ‘कुळवाडी भूषण’ की उपाधि दी और उनकी ऐतिहासिक समाधि की खोज का कार्य किया।

    सचिन सावंत ने आरोप लगाया कि भाजपा एक तरफ छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर राजनीति करती है, वहीं दूसरी तरफ महात्मा फुले के विचारों और प्रतीकों का विरोध कर रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “ज्योतिबा फुले को शिवरायों से अलग नहीं किया जा सकता। जो लोग यह कोशिश कर रहे हैं, उन्हें न तो शिवराय समझ आए हैं और न ही फुले का विचार।”

    कांग्रेस नेता ने भाजपा को मनुवादी सोच वाली पार्टी बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक समरसता और महापुरुषों के सम्मान पर सीधा हमला हैं। उन्होंने भाजपा की इस मानसिकता का खुला और सार्वजनिक विरोध करने का आह्वान किया।

  • Supreme Court:सिर्फ कल्याण नहीं, माता-पिता की भूमिका भी तय करेगी फैसला: बच्चों की कस्टडी पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश

    Supreme Court:सिर्फ कल्याण नहीं, माता-पिता की भूमिका भी तय करेगी फैसला: बच्चों की कस्टडी पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश

    नई दिल्ली। बच्चों की कस्टडी (child-custody) तय करते समय केवल उनके “कल्याण” को ही एकमात्र आधार मानना सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में अदालतों को माता-पिता के आचरण, उनकी आर्थिक स्थिति, जीवन-स्तर, बच्चों की सुविधा और शिक्षा जैसे अन्य प्रासंगिक पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार करना होगा।

    जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें दो नाबालिग बच्चों की कस्टडी उनकी मां को बहाल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चों का कल्याण सर्वोपरि जरूर है, लेकिन वही अकेला निर्णायक कारक नहीं हो सकता।

    खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा,

    “कस्टडी मामलों में बच्चों का कल्याण सर्वोच्च विचार है, इसमें कोई विवाद नहीं है। लेकिन इसके साथ-साथ कई अन्य कारक भी होते हैं, जैसे पक्षकारों का आचरण, उनकी आर्थिक क्षमता, जीवन-स्तर, तथा बच्चों की सुविधा और शिक्षा। इसलिए यह कहना कि ये कारक बहुत प्रासंगिक नहीं हैं और केवल कल्याण के आधार पर ही निर्णय होगा—पूरी तरह सही नहीं है।”

    क्या है मामला

    यह अपील एक तलाकशुदा दंपति के बीच लंबे समय से चल रहे कस्टडी विवाद से जुड़ी है। दोनों पक्ष भारतीय नागरिक हैं और उनके दो नाबालिग पुत्र हैं, जिनका जन्म क्रमशः 2017 और 2019 में हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि हाईकोर्ट ने कस्टडी तय करते समय मां के आचरण समेत कई अहम तथ्यों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

    शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे पहलू “महत्वपूर्ण” हैं और इन्हें इस तर्क पर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि केवल बच्चों का कल्याण ही निर्णायक है।

    हाईकोर्ट को दोबारा सुनवाई का निर्देश

    अंततः, सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मामला पुनः गुण-दोष के आधार पर विचार के लिए वापस भेज दिया। साथ ही निर्देश दिया कि हाईकोर्ट इस कस्टडी विवाद का निपटारा यथाशीघ्र, अधिमानतः चार महीने के भीतर करे।

    यह फैसला देशभर में चल रहे कस्टडी मामलों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि अदालतें अब बच्चों के हित को व्यापक दृष्टिकोण से परखेंगी, न कि केवल एक ही कसौटी पर।

  • Earth Quake Japan:रयूक्यू द्वीपसमूह में 5.8 तीव्रता का भूकंप, दहशत का माहौल

    Earth Quake Japan:रयूक्यू द्वीपसमूह में 5.8 तीव्रता का भूकंप, दहशत का माहौल

    बीजिंग (शिन्हुआ): जापान के रयूक्यू द्वीपसमूह (Ryukyu Islands, Japan) में बुधवार को 5.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज़ (GFZ) के अनुसार, भूकंप के झटके स्थानीय समय शाम को महसूस किए गए, जिससे क्षेत्र में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई।

    GFZ ने बताया कि भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में था। भूकंप का एपिसेंटर 29.07 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 130.41 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित बताया गया है।

    जान-माल के नुकसान की खबर नहीं

    भूकंप के बाद अब तक किसी जान-माल के नुकसान या इमारतों के क्षतिग्रस्त होने की कोई आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है। इसके साथ ही सुनामी को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

    भूकंप संभावित क्षेत्र है रयूक्यू द्वीपसमूह

    गौरतलब है कि रयूक्यू द्वीपसमूह जापान के उन इलाकों में शामिल है जो पैसिफिक रिंग ऑफ फायर के अंतर्गत आते हैं, जहां भूकंपीय गतिविधियां अक्सर दर्ज की जाती रहती हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    विशेषज्ञों की सलाह

    विशेषज्ञों ने लोगों को अफवाहों से बचने और सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी अपडेट पर ही भरोसा करने की सलाह दी है।

  • Pakistan v/s Baloochistan: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में BLA और सेना के बीच बड़े पैमाने पर झड़पें, 10 सैनिकों की मौत

    Pakistan v/s Baloochistan: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में BLA और सेना के बीच बड़े पैमाने पर झड़पें, 10 सैनिकों की मौत

    इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सेना और विद्रोहियों के बीच बड़े पैमाने पर संघर्ष शुरू हो गया है। विद्रोही गुट बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ऑपरेशन हेरोफ शुरू करते हुए पाकिस्तानी सेना के ठिकानों को निशाना बनाया। शनिवार तड़के से बलूचिस्तान के कई जिलों में धमाके, मिलिट्री ठिकानों पर हमले और झड़पों की खबरें मिल रही हैं।

    बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में विस्फोट हुए हैं, वहीं ग्वादर पोर्ट के पास भी फायरिंग हुई। इन हमलों में कम से कम 10 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं।

    BLA के शीर्ष कमांडरों ने ऑपरेशन हेरोफ का दूसरा चरण शुरू करने की घोषणा की है। गुट ने इसे मातृभूमि की रक्षा के लिए अभियान बताया। क्वेटा, नुश्की, कलात, मस्तंग, दलबांदिन, खारान, ग्वादर, पसनी, टंप और बुलेदा में भारी गोलीबारी, विस्फोट और सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए।

    क्वेटा में हथियारबंद लोगों ने पुलिस मोबाइल पर हमला किया, जिसमें दो पुलिसकर्मी मारे गए और पुलिस वाहन में आग लगा दी। रेलवे स्टेशन के पास भी गोलीबारी हुई। नुश्की में फ्रंटियर कॉर्प्स मुख्यालय के पास झड़प हुई, जबकि कलात में सेना के कैंप के गेट पर विस्फोटक वाहन का उपयोग किया गया।

    BLA के प्रवक्ता जीयांद बलूच ने कहा कि उनके लड़ाकों ने सैन्य और प्रशासनिक ढांचों को निशाना बनाया। BLA के कमांडर-इन-चीफ बशीर जेब बलूच ने बलूच लोगों से अपील की कि वे अपनी घरों से बाहर निकलें और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ें।

    पाकिस्तान के प्रमुख अखबार द डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार तड़के से चल रही झड़पों में कई हमलों को नाकाम किया गया और सुरक्षा बलों ने 58 आतंकियों को मार गिराया। इस संघर्ष में 10 सैनिकों की मौत की पुष्टि की गई है।

  • Religion News: बद्रीनाथ–केदारनाथ में मोबाइल पर नो-एंट्री? गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक

    Religion News: बद्रीनाथ–केदारनाथ में मोबाइल पर नो-एंट्री? गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक

    देहरादून: चारधाम यात्रा 2026 से पहले बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति मोबाइल फोन पर पूर्ण प्रतिबंध और गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर सख्त नियम लागू करने पर विचार कर रही है। (BKTC) आगामी चारधाम यात्रा सीजन के लिए श्रद्धालुओं पर कड़े नियम लागू करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित नियमों में मंदिर परिसर में मोबाइल फोन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध और गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक जैसे अहम बिंदु शामिल हैं।

    ‘राष्ट्रीय स्वाभिमान’ फोटो

    समिति का कहना है कि इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य मंदिरों की पवित्रता बनाए रखना और हाल के वर्षों में मंदिर परिसर में बढ़ती वीडियोग्राफी, रील्स और ब्लॉगिंग की प्रवृत्ति पर लगाम लगाना है। समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के अनुसार, इन नियमों को लेकर जल्द होने वाली बैठक में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

    हेमंत द्विवेदी ने बताया कि मंदिर परिसर में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने पर गंभीरता से विचार चल रहा है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में मोबाइल का उपयोग करते हुए पाया गया, तो मोबाइल जब्त किया जा सकता है और उस पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।

    इसके अलावा, भविष्य में मंदिर परिसर में ब्लॉगिंग, शूटिंग या फिल्मिंग के लिए बीकेटीसी या जिला प्रशासन से लिखित पूर्व-अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति शूटिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। समिति का मानना है कि इससे न केवल अनुशासन बना रहेगा, बल्कि भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।

    समिति सूत्रों के मुताबिक, चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और सोशल मीडिया गतिविधियों को देखते हुए यह कदम उठाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

  • COURT NEWS:‘जा और मर’ गुस्से में कहना आत्महत्या के लिए उकसाना साबित नहीं करता है-केरल हाईकोर्ट

    COURT NEWS:‘जा और मर’ गुस्से में कहना आत्महत्या के लिए उकसाना साबित नहीं करता है-केरल हाईकोर्ट

    कोच्चि: केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) ने एक अहम फैसले में कहा है कि आपसी विवाद के दौरान गुस्से में कहे गए “जा और मर” जैसे शब्दों को मात्र इसी आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता। आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध में आरोपी की मंशा (इरादा) का साबित होना अनिवार्य है।

    न्यायमूर्ति सी. प्रदीप कुमार की एकलपीठ ने इस मामले में सत्र न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक युवक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और धारा 204 (सबूत नष्ट करना) के तहत आरोप तय किए गए थे।

    क्या है पूरा मामला?
    मामले के अनुसार, 30 वर्षीय युवक का एक विवाहित महिला के साथ संबंध था। बाद में युवक ने किसी अन्य महिला से विवाह करने का फैसला किया, जिससे दोनों के बीच वर्ष 2023 में तीखा विवाद हुआ। इसी विवाद के दौरान युवक ने महिला से कथित तौर पर “जा और मर” कहा। इसके कुछ समय बाद महिला ने अपनी साढ़े पांच साल की बेटी के साथ आत्महत्या कर ली।

    इसके बाद सत्र न्यायालय ने युवक की डिस्चार्ज अर्जी खारिज करते हुए उसके खिलाफ आरोप तय किए थे। इस आदेश को युवक ने केरल हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

    हाईकोर्ट(Kerala High Court) की अहम टिप्पणी
    मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 1995 के फैसले स्वामी प्रह्लाद दास बनाम मध्य प्रदेश राज्य का हवाला दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह देखना जरूरी है कि आरोपी ने ऐसे शब्द किस उद्देश्य से कहे थे। केवल यह तथ्य कि पीड़ित ने आत्महत्या कर ली, अपने-आप में आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है।

    अदालत ने कहा कि प्रस्तुत मामले में आरोपी द्वारा कहे गए शब्द विवाद और गुस्से की स्थिति में बोले गए प्रतीत होते हैं। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपी की मंशा महिला को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की थी। इसलिए IPC की धारा 306 के तहत अपराध नहीं बनता।

    धारा 204 पर भी राहत
    हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जब आत्महत्या के लिए उकसाने का मुख्य अपराध ही सिद्ध नहीं होता, तो सबूत नष्ट करने से संबंधित धारा 204 का आरोप भी टिक नहीं सकता।

    इन टिप्पणियों के साथ केरल हाईकोर्ट ने सत्र न्यायालय का आदेश रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को राहत दी।

  • Hormuz Blockade to Proxy Attacks, Tehran’s Full-Scale Battle Plan Ready:अमेरिका–ईरान युद्ध की आहट: होर्मुज की नाकाबंदी से प्रॉक्सी हमलों तक, तेहरान ने बिछाया जंग का पूरा शतरंज

    Hormuz Blockade to Proxy Attacks, Tehran’s Full-Scale Battle Plan Ready:अमेरिका–ईरान युद्ध की आहट: होर्मुज की नाकाबंदी से प्रॉक्सी हमलों तक, तेहरान ने बिछाया जंग का पूरा शतरंज

    मध्य पूर्व में हालात बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुके हैं। तेहरान और वाशिंगटन के बीच युद्ध की सुगबुगाहट अब खुली सैन्य तैयारी में बदलती नजर आ रही है। अमेरिकी धमकियों के बीच ईरान ने भी साफ संकेत दे दिए हैं कि अगर हमला हुआ, तो जवाब ऐसा होगा जिससे पूरा क्षेत्र थर्रा उठेगा।

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान पर संभावित हमले की पूरी तैयारी कर ली है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी मिलते ही सैन्य कार्रवाई शुरू हो सकती है। इसके जवाब में ईरान ने युद्ध की शुरुआत में ही अमेरिका को निर्णायक झटका देने की रणनीति तैयार कर ली है, ताकि पूरे मध्य पूर्व में अफरातफरी मच जाए।

    आंतरिक मोर्चे पर सख्ती, गवर्नरों को मिले विशेष अधिकार

    युद्ध की आशंका को देखते हुए ईरान ने देश के सभी प्रांतों के गवर्नरों की शक्तियां बढ़ा दी हैं। अब वे आपूर्ति, संसाधन और सुरक्षा से जुड़े फैसले अपने विवेक से ले सकेंगे। इसका मकसद युद्ध के दौरान देश के भीतर अराजकता को रोकना और अमेरिका को लंबे समय तक उलझाए रखना है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर सबसे बड़ा दांव

    ईरान की रणनीति का सबसे खतरनाक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने पानी के भीतर मिसाइलें और विस्फोटक तैनात कर दिए हैं। युद्ध शुरू होते ही होर्मुज को बंद करने की योजना है, जिससे एशिया और मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति ठप हो सकती है और वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो जाएगा।

    40 हजार अमेरिकी सैनिक निशाने पर

    ईरान ने लगभग 40,000 अमेरिकी सैनिकों को अपनी ‘हिटलिस्ट’ में शामिल किया है। तेहरान का दावा है कि अगर युद्ध छिड़ा, तो अमेरिकी हताहतों की संख्या अफगानिस्तान युद्ध से भी ज्यादा हो सकती है। ईरान इसे अमेरिकी सैन्य तंत्र की कमर तोड़ने वाला कदम मान रहा है।

    प्रॉक्सी वॉर से घिरेगा अमेरिका

    ईरान सीधे टकराव के साथ-साथ प्रॉक्सी युद्ध की भी तैयारी कर चुका है। यमन के हूती विद्रोही, लेबनान का हिजबुल्लाह और इराक के सशस्त्र गुट अमेरिकी ठिकानों और हितों पर हमले कर सकते हैं। लाल सागर से लेकर खाड़ी क्षेत्र तक तनाव फैलने की आशंका है।

    सुप्रीम लीडर की सुरक्षा सबसे ऊपर

    ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल उनके छोटे बेटे प्रशासनिक कामकाज देख रहे हैं, ताकि किसी भी तख्तापलट या अंदरूनी साजिश को नाकाम किया जा सके।

    सैन्य ताकत में ईरान कोई कमजोर खिलाड़ी नहीं

    ग्लोबल फायर पावर के अनुसार, ईरान सैन्य शक्ति के मामले में दुनिया में 16वें स्थान पर है।

    • 6.10 लाख सक्रिय सैनिक
    • 3 लाख से ज्यादा रिजर्व फोर्स
    • 1.5 लाख की रिवोल्यूशनरी गार्ड
    • 188 लड़ाकू विमान
    • 129 हेलिकॉप्टर
    • 1500+ मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम
    • मजबूत पनडुब्बी बेड़ा

    तेहरान और वाशिंगटन के बीच टकराव अब सिर्फ बयानबाज़ी नहीं रहा। अगर जंग शुरू होती है, तो उसका असर केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरा मध्य पूर्व और वैश्विक अर्थव्यवस्था इसकी चपेट में आ सकती है। दुनिया की नजरें अब व्हाइट हाउस और तेहरान—दोनों पर टिकी हैं।