Category: Politics

Politics is the art of looking for trouble, finding it everywhere, diagnosing it incorrectly and applying the wrong remedies.

  • Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे

    Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे

    अजित पवार के असामयिक निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां हर फैसला इतिहास लिख सकता है। उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख के रूप में अजित पवार केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि सत्ता संतुलन की धुरी थे। उनके जाने के बाद न केवल पार्टी, बल्कि पूरी महायुति और विपक्षी खेमे में भी राजनीतिक भूचाल आ गया है।

    इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभर आए हैं। भले ही अजित पवार की बगावत के बाद एनसीपी दो गुटों में बंटी हो, लेकिन संकट की इस घड़ी में परिवार और पार्टी—दोनों के सबसे वरिष्ठ मार्गदर्शक के रूप में शरद पवार की ओर सभी की निगाहें टिक गई हैं।

    क्या होगा अजित पवार गुट का भविष्य?

    सबसे बड़ा और निर्णायक सवाल यही है कि अब अजित पवार की एनसीपी का रास्ता क्या होगा? क्या यह गुट स्वतंत्र पहचान बनाए रख पाएगा या फिर इतिहास खुद को दोहराते हुए दोनों एनसीपी का विलय होगा?

    महानगरपालिका चुनाव के दौरान पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी को हराने के लिए अजित पवार का शरद पवार के साथ आना कोई सामान्य राजनीतिक घटना नहीं थी। तभी से यह संकेत मिलने लगे थे कि दोनों गुटों के बीच जमी बर्फ पिघल रही है। खुद अजित पवार ने भी एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि कार्यकर्ता एकजुटता चाहते हैं और सही समय पर बड़ा फैसला लिया जाएगा।
    अब वही “सही समय” नियति ने तय कर दिया है।

    41 विधायक, एक सांसद और सत्ता की चाबी

    फिलहाल अजित पवार गुट के पास महाराष्ट्र विधानसभा में 41 विधायक और लोकसभा में एक सांसद—सुनील तटकरे—हैं। यह संख्या किसी भी गठबंधन सरकार को बनाने या गिराने की ताकत रखती है। यही वजह है कि बीजेपी, शिंदे सेना और शरद पवार—तीनों खेमे इस गुट पर नज़र गड़ाए बैठे हैं।

    अगर दोनों गुटों का विलय होता है तो सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। ऐसे में शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल डिप्टी सीएम पद के प्रबल दावेदार के रूप में उभर सकते हैं। लेकिन यह राह आसान नहीं होगी। इसके लिए उन्हें प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे जैसे कद्दावर नेताओं का भरोसा जीतना होगा—जो कभी अजित पवार के सबसे विश्वस्त सिपहसालार रहे हैं।

    पटेल–तटकरे–भुजबल: किंगमेकर की भूमिका

    अजित पवार के बाद उनके गुट में सबसे मजबूत स्तंभ प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे हैं। दोनों नेताओं ने एनसीपी के विभाजन में निर्णायक भूमिका निभाई थी। अब वही नेता तय करेंगे कि पार्टी का भविष्य किस दिशा में जाएगा—शरद पवार की छांव में या बीजेपी के साथ सत्ता के केंद्र में।

    इसके अलावा छगन भुजबल जैसे अनुभवी नेता भी इस राजनीतिक शतरंज के अहम मोहरे हैं। उनका एक कदम कई समीकरणों को उलट सकता है।

    सुनेत्रा पवार की अग्निपरीक्षा

    अजित पवार के निधन के बाद सबसे कठिन परीक्षा उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के सामने है। निजी शोक और राजनीतिक जिम्मेदारी—दोनों का बोझ एक साथ उठाना आसान नहीं होगा। राज्यसभा सांसद होने के नाते वे पहले ही संसद में मौजूद हैं, लेकिन अब उन्हें पार्टी की विरासत को संभालने का प्रस्ताव भी मिल सकता है।

    राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि बीजेपी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम पद का प्रस्ताव दे सकती है। इससे एक ओर अजित समर्थकों में भावनात्मक जुड़ाव बना रहेगा, तो दूसरी ओर महायुति की स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। साथ ही कैबिनेट में एक महिला चेहरे की एंट्री भी बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी हो सकती है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला शिंदे सेना से विचार-विमर्श के बाद ही होगा।

    पार्थ और जय पवार: उत्तराधिकार का संकट

    अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार पहले ही जमीन घोटाले के आरोपों और 2019 की लोकसभा हार के चलते कमजोर स्थिति में हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल बड़ी जिम्मेदारी मिलना मुश्किल माना जा रहा है। छोटे बेटे जय पवार राजनीति में अभी सक्रिय नहीं हैं।
    इस हालात में शरद पवार की भूमिका निर्णायक हो जाती है। माना जा रहा है कि उनकी सहमति और मार्गदर्शन के बिना पवार परिवार और एनसीपी का कोई भी बड़ा फैसला संभव नहीं है।

    अजित पवार का जाना केवल एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक युगांतकारी क्षण है। आने वाले दिनों में तय होगा कि एनसीपी फिर से एकजुट होकर नई ताकत बनेगी या इतिहास के पन्नों में बिखर जाएगी। इतना तय है कि इस पूरे घटनाक्रम की धुरी—एक बार फिर—शरद पवार ही होंगे।

  • Maharashtra News : आज सुबह बारामती में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान में लैंडिंग के समय लगी भीषण आग से हुई मौत

    Maharashtra News : आज सुबह बारामती में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान में लैंडिंग के समय लगी भीषण आग से हुई मौत

    बारामती। आज सुबह बारामती, महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान ने लैंडिंग के समय भारी दुर्घटना का सामना किया। विमान क्रैश होते ही भीषण आग लग गई और उसके मलबे से धुआँ उठता हुआ देखा गया। यह हादसा एयरपोर्ट के लगभग खेत के पास सामने आया जहाँ विमान लैंड करने की कोशिश कर रहा था। मौके पर पुलिस, जिला प्रशासन और आपदा प्रतिक्रिया टीम तुरंत पहुंच चुकी हैं और राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया है। जहां महाराष्ट्र के बारामती के पास एनसीपी नेता और डिप्टी सीएम अजित पवार का निजी विमान दुर्घटना में मौत हो गई है. लैंडिंग के दौरान विमान हादसा हुआ, जिसमें अजित पवार सहित विमान में सवार सभी लोगों की जान चली गई. 

    🚨 अजित पवार की स्थिति
    प्राप्त रिपोर्ट्स के अनुसार वे बारामती में होने वाली एक भारी जनसभा कार्यक्रम के लिए आ रहे थे।महाराष्ट्र के बारामती के पास एनसीपी नेता और डिप्टी सीएम अजित पवार का निजी विमान दुर्घटना में मौत हो गई है. लैंडिंग के दौरान विमान हादसा हुआ, जिसमें अजित पवार सहित विमान में सवार सभी लोगों की जान चली गई. 

    🧯 बचाव कार्य और प्रशासन की प्रतिक्रिया

    • पुलिस और फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाने के लिए कार्य शुरू कर दिया है।
    • जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन अधिकारी स्थल पर पहुंचकर राहत प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं।

    📰 आगे क्या होने वाला है

    सरकारी सूत्रों और अधिकारियों की तरफ से अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन केंद्रीय और राज्य स्तर पर जांच शुरू होने की उम्मीद है।

    छह बार डिप्टी सीएम बनने वाले अजित पवार का सियासी सफर, सत्ता के हर समीकरण में निभाई अहम भूमिका


    महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार का नाम उन नेताओं में शुमार है, जिन्होंने सत्ता के बदलते दौर में खुद को हर बार प्रासंगिक बनाए रखा। रणनीतिक फैसलों, संगठन पर पकड़ और निर्णायक राजनीति के चलते वे अब तक छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे।

    अजित पवार पहली बार नवंबर 2010 में उपमुख्यमंत्री बने। इसके बाद उसी वर्ष दूसरी बार उन्हें यह जिम्मेदारी मिली। इसके बाद 2019 में उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली, हालांकि यह सरकार अल्पकालिक रही।

    जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी, तब भी अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद 2023 में राजनीतिक समीकरण बदले और वे शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होकर एक बार फिर डिप्टी सीएम बने।
    2024 में वे छठी बार उपमुख्यमंत्री बने, जो महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी गई।


    2022 में आया सियासी टर्निंग पॉइंट, चाचा से अलग चुनी अपनी राह

    अजित पवार ने राजनीति में कदम अपने चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में रखा था, लेकिन 2022 में उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ आया।
    जब शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले को राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में आगे बढ़ाना शुरू किया, तब अजित पवार ने अपनी अलग राजनीतिक राह चुनने का फैसला किया।

    उन्होंने एनसीपी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल होने का कदम उठाया।
    2023 में अजित पवार ने पार्टी संगठन पर मजबूत पकड़ बनाई और एनसीपी के नेतृत्व पर नियंत्रण स्थापित किया।
    2024 में वे सत्ता में अपनी स्थिति को और मजबूत करने में सफल रहे और खुद को महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रभावशाली केंद्र के रूप में स्थापित किया।


    महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूत पकड़

    लंबे राजनीतिक अनुभव और सत्ता के गलियारों की गहरी समझ के चलते अजित पवार ने खुद को केवल एक नेता नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में स्थापित किया।
    उनका सियासी सफर यह दर्शाता है कि वे बदलते राजनीतिक हालात में भी निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता रखते थे।

  • Public Politics:नवी मुंबई मनपा चुनाव में दल-बदल करने वाले उम्मीदवारों को जनता ने नकारा

    Public Politics:नवी मुंबई मनपा चुनाव में दल-बदल करने वाले उम्मीदवारों को जनता ने नकारा

    पार्टी बदलकर टिकट लेने की रणनीति उलटी पड़ी, अधिकांश उम्मीदवारों को हार

    नवी मुंबई: नवी मुंबई महानगरपालिका (मनपा) चुनाव से पहले बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने अपनी पुरानी पार्टी की निष्ठा छोड़कर दूसरे दलों से चुनाव लड़ने का रास्ता चुना। चुनाव की पूर्व संध्या पर टिकट पाने के लिए किया गया यह राजनीतिक दल-बदल इस बार मतदाताओं को रास नहीं आया। चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया कि जनता ने ऐसे राजनीतिक अवसरवाद को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

    चुनाव नतीजों में यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि अंतिम समय में पार्टी बदलने वाले अधिकांश उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा। मतदाताओं ने विचारधारा में अचानक आए इस बदलाव को स्वीकार नहीं किया और ऐसे उम्मीदवारों को समर्थन देने से इनकार कर दिया।


    ऐरोली में मढ़वी परिवार को बड़ा झटका

    दल-बदल से सबसे बड़ा झटका ऐरोली विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला। मनोहर उर्फ एम. के. मढ़वी, जो नवी मुंबई में शिवसेना (ठाकरे गुट) के प्रमुख नेतृत्व के रूप में पहचाने जाते थे, आचार संहिता लागू होने के कुछ ही दिनों के भीतर अपने परिवार के साथ शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए थे।

    हालांकि, चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे। इस चुनाव में:

    • एम. के. मढ़वी
    • उनकी पत्नी विनया मढ़वी (वार्ड 5D)
    • बहू तेजश्री करण मढ़वी (वार्ड 5A)

    तीनों को ही हार का सामना करना पड़ा, जिससे यह संकेत मिला कि मतदाताओं ने परिवार सहित किए गए दल-बदल को स्वीकार नहीं किया।


    भाजपा में शामिल हुए विठ्ठल मोरे के बेटे को भी हार

    इसी तरह, नवी मुंबई से शिवसेना (ठाकरे गुट) के वरिष्ठ नेता विठ्ठल मोरे ने नामांकन की अंतिम तिथि से ठीक एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया था। यह कदम उन्होंने अपने बेटे के लिए टिकट सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया था।

    हालांकि, उनके बेटे अवधूत मोरे (वार्ड 17D) को भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, जिससे यह साफ हुआ कि केवल पार्टी बदलकर टिकट हासिल करना मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर सका।


    सानपाड़ा में भी नहीं चला दल-बदल का दांव

    सानपाड़ा मंडल में भी इसी तरह का नतीजा देखने को मिला। पूर्व पार्षद सोमनाथ वास्कर (वार्ड 19A) और उनकी पत्नी कोमल वास्कर (वार्ड 19B) ने शिवसेना (ठाकरे गुट) छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में प्रवेश किया था।

    लेकिन दोनों को ही अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिला और चुनाव परिणाम उनके खिलाफ रहे।


    मतदाताओं का स्पष्ट संदेश

    नवी मुंबई मनपा चुनाव के नतीजों ने यह साफ संदेश दिया है कि मतदाता सिद्धांत और निष्ठा को महत्व देते हैं। अंतिम समय में पार्टी बदलने वाले उम्मीदवारों को जनता ने नकार दिया और यह साबित कर दिया कि केवल सत्ता या टिकट की राजनीति के लिए किया गया दल-बदल अब स्वीकार्य नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परिणाम भविष्य के चुनावों में राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

  • सत्ता के लिए सब तैयार(Maharashtra Politics): जनता का पैसा, सत्ता का खेल

    सत्ता के लिए सब तैयार(Maharashtra Politics): जनता का पैसा, सत्ता का खेल

    अंबरनाथ, कल्याण-डोंबिवली, उल्हासनगर या अचलपुर हर जगह सिर्फ समझौता, जनता की जमी हुई मेहनत पर राजनीति खेल

    मुंबई/अमरावती: राजनीतिक सिद्धांत और वैचारिक मजबूती को ताक पर रखकर, महाराष्ट्र की सभी प्रमुख और क्षेत्रीय पार्टियां केवल सत्ता की कुर्सी पाने के लिए गठजोड़ करती नजर आ रही हैं। चाहे वह अंबरनाथ नगरपालिका हो, कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका, उल्हासनगर महानगरपालिका, या अचलपुर नगर परिषद, हर जगह सिर्फ समझौते और गठबंधन ही देखने को मिल रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन गठबंधनों का मुख्य उद्देश्य जनता के टैक्स से चलने वाली सरकारी मशीनरी पर नियंत्रण और संसाधनों का निजी स्वार्थ के लिए उपयोग है। भाजपा, कांग्रेस या क्षेत्रीय पार्टियां—कोई भी पीछे नहीं है, और हर कोई सत्ता के लिए साफ-सुथरी राजनीति छोड़कर, केवल अपने फायदे के लिए किसी भी छल-कपट या समझौते को तैयार है।

    हालिया उदाहरण:

    -कल्याण-डोंबिवली में मनसे के पांच पार्षदों ने भाजपा-शिंदे गठबंधन को समर्थन दिया, जबकि उद्धव गुट की शिवसेना (उबाठा) हार का सामना कर रही थी।

    -अचलपुर नगर परिषद में भाजपा, एआईएमआईएम और कांग्रेस ने तालमेल कर समिति अध्यक्ष निर्विरोध चुने, स्थानीय विधायक तक को इसमें विश्वास में नहीं लिया गया।

    -अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता पाने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने हाथ मिलाया, जिसके बाद कई पार्षदों के पार्टी बदलने की खबरें सामने आईं।

    जनता का पैसा, सत्ता का खेल

    विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के गठबंधन सिर्फ और सिर्फ जनता के टैक्स और सरकारी फंड का निजीकरण सुनिश्चित करने के लिए बनाए जा रहे हैं। किसी भी नैतिक या विकास-उन्मुख एजेंडे की कोई परवाह नहीं।

    सावधान!

    लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों और जनता की मेहनत के पैसों को इस तरह राजनीतिक गठजोड़ के लिए हथियार बनाने की प्रवृत्ति, सख्त जनजागरूकता और सतर्कता की मांग करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जनता और मीडिया ने इस दिशा में ध्यान नहीं दिया, तो यह गठबंधन केवल सत्ता की कुर्सी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले बनकर रह जाएंगे।

  • Mahanagar Palika 2026: ‘सात संकल्प, नई शुरुआत’, पिंपरी-चिंचवड़ के लिए अजित पवार का घोषणापत्र जारी

    Mahanagar Palika 2026: ‘सात संकल्प, नई शुरुआत’, पिंपरी-चिंचवड़ के लिए अजित पवार का घोषणापत्र जारी

    पिंपरी-चिंचवड़: नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री अजितदादा पवार ने पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका चुनाव के लिए पार्टी का घोषणापत्र ‘सात संकल्प, एक नई शुरुआत’ के नारे के साथ जारी किया। इस घोषणापत्र में शहर की बुनियादी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए विकास का स्पष्ट रोडमैप पेश किया गया है।

    घोषणापत्र में रोज़ाना जलापूर्ति, बेहतर सड़कें, ट्रैफिक प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और पारदर्शी विकास योजना जैसे मुद्दों पर ठोस वादे किए गए हैं। पार्टी का दावा है कि यह घोषणापत्र छह महीने के ऑन-ग्राउंड सर्वे, वार्ड-स्तरीय संवाद और नागरिकों से सीधी बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। इस दौरान नागरिकों की प्रमुख मांगों नियमित पानी की आपूर्ति, तेज़ और सुरक्षित परिवहन, स्वच्छ वातावरण, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और प्रत्यक्ष आर्थिक राहत को घोषणापत्र में प्राथमिकता दी गई है।

    सात प्रमुख संकल्प

    • रोज़ाना स्वच्छ जलापूर्ति
      हर घर में तय समय पर हाई-प्रेशर नल से पानी, टैंकर निर्भरता खत्म करना, लीकेज-फ्री पाइपलाइन, नदियों का पुनर्जीवन और बाढ़ नियंत्रण के उपाय।
    • ट्रैफिक-फ्री और गड्ढा-मुक्त पीसीएमसी
      सड़कों की समयबद्ध मरम्मत, गुणवत्ता की ज़िम्मेदारी ठेकेदारों पर, डिजिटल शिकायत प्रणाली, मेट्रो रूट और फ्लाईओवर परियोजनाओं की पारदर्शी निगरानी।
    • देश का सबसे स्वच्छ शहर
      100% कचरा पृथक्करण, वैज्ञानिक निपटान, ज़ीरो लैंडफिल और स्वच्छता के लिए हाउसिंग सोसाइटियों की सक्रिय भागीदारी।
    • सस्ते और हाई-टेक हेल्थकेयर सेंटर
      बड़े अस्पताल, नए मेडिकल संस्थान, 100 सब-अर्बन क्लिनिक, किफायती जांच और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए मजबूत स्वास्थ्य सुविधाएं।
      -पारदर्शी विकास योजना (DP)
      मौजूदा ड्राफ्ट डीपी को रद्द कर नागरिकों की भागीदारी से नई योजना, कानूनी घरों की सुरक्षा और विस्थापन के बजाय पुनर्वास पर ज़ोर।
    • पीसीएमसी मॉडल स्कूल
      100 आधुनिक नगर निगम स्कूल-राष्ट्रीय मानकों की शिक्षा, आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षित शिक्षक और निःशुल्क सुविधाएं।
      -सीधी राहत और ज़िम्मेदार शासन
      मुफ़्त मेट्रो-बस यात्रा, छोटे घर मालिकों को प्रॉपर्टी टैक्स में छूट, छात्रों को टैबलेट, महिलाओं के लिए बिना ब्याज ऋण योजना तथा खेल-संस्कृति को प्रोत्साहन।

    -एक्शन-ओरिएंटेड विज़न डॉक्यूमेंट
    अजित पवार ने कहा कि ये सात संकल्प छत्रपति शिवाजी महाराज के लोककल्याणकारी शासन, छत्रपति शाहू महाराज के सामाजिक न्याय, महात्मा फुले के शिक्षा-समानता के विचार और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के समता सिद्धांत से प्रेरित हैं। बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबावों के बीच यह घोषणापत्र नागरिकों को सीधी राहत, मजबूत बुनियादी ढांचा और आत्मनिर्भर शहर की दिशा में ले जाने का संकल्प दर्शाता है। एनसीपी का यह घोषणापत्र नारों से अधिक एक्शन-ओरिएंटेड विज़न डॉक्यूमेंट के रूप में पेश किया गया है।

  • Tamilnadu Politics: चुनाव से पहले तमिलनाडु की सियासत में घमासान, स्टालिन की हठधर्मिता से BJP को मिल रहा फायदा

    Tamilnadu Politics: चुनाव से पहले तमिलनाडु की सियासत में घमासान, स्टालिन की हठधर्मिता से BJP को मिल रहा फायदा

    New Delhi: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी उथल-पुथल तेज हो गई है। कांग्रेस की सत्ता में हिस्सेदारी की पुरानी मांग को एक बार फिर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सिरे से खारिज कर दिया है। डीएमके नेतृत्व का साफ संदेश है कि गठबंधन चुनाव तक ठीक है, लेकिन सरकार में हिस्सेदारी नहीं। स्टालिन की यही “एकला चलो” नीति अब गठबंधन धर्म पर सवाल खड़े कर रही है।

    कांग्रेस नेताओं के तीखे बयानों से साफ है कि सहयोगी दल खुद को सिर्फ बाहरी समर्थन तक सीमित नहीं रखना चाहते। बावजूद इसके डीएमके का अड़ियल रवैया जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्टालिन का यह रुख सीधे तौर पर बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अमित शाह पहले ही राज्य में आक्रामक मोड में नजर आ रहे हैं, वहीं थलपति विजय की संभावित एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

    अगर डीएमके ने सहयोगियों को नजरअंदाज करना जारी रखा, तो गठबंधन में दरार तय मानी जा रही है—और इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिल सकता है। चुनावी रण में सबसे बड़ा सवाल यही है: स्टालिन की जिद डीएमके को भारी पड़ेगी या बीजेपी इस मौके को भुनाने में कामयाब होगी?

  • Bangladesh-Rohingya Matter: बांग्लादेशी–रोहिंग्या मुद्दे पर कांग्रेस का हमला, फडणवीस से मांगे ठोस आंकड़े

    Bangladesh-Rohingya Matter: बांग्लादेशी–रोहिंग्या मुद्दे पर कांग्रेस का हमला, फडणवीस से मांगे ठोस आंकड़े

    मुंबई। महाराष्ट्र में बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मुद्दे पर दावे नहीं, बल्कि प्रमाण देने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस ने कहा है कि अगर सरकार ने वाकई राज्य में अवैध प्रवासियों की “सबसे अधिक संख्या” की पहचान कर ली है, तो उसके स्पष्ट और सार्वजनिक आंकड़े सामने रखे जाएं।

    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने फडणवीस पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “सपनों का सौदागर” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार हकीकत से ज्यादा भविष्य के वादों और घोषणाओं पर निर्भर है। सावंत ने कहा कि मुंबई को बाढ़-मुक्त करने, ईस्टर्न फ्रीवे को ठाणे से जोड़ने और एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था जैसे बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन ज़मीन पर नतीजे नज़र नहीं आते।

    बीएमसी चुनाव से पहले बांग्लादेशी-रोहिंग्या मुद्दे को उठाने को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर राजनीतिक फायदे का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि डर और भ्रम की राजनीति के बजाय सरकार को अपने दावों की सच्चाई आंकड़ों के साथ जनता के सामने रखनी चाहिए।

  • Pakistan Bangladesh Politics: ओवैसी के बयान पर भड़के देवकीनंदन ठाकुर, पाकिस्तान–बांग्लादेश को लेकर कर दी ‘भविष्यवाणी’

    Pakistan Bangladesh Politics: ओवैसी के बयान पर भड़के देवकीनंदन ठाकुर, पाकिस्तान–बांग्लादेश को लेकर कर दी ‘भविष्यवाणी’

    New Delhi: हिजाब को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर सियासी और धार्मिक हलकों में घमासान मच गया है। कथावाचक और धार्मिक नेता देवकीनंदन ठाकुर ने ओवैसी पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि अगर उनका सपना है कि भारत में हिजाब पहनने वाली महिला प्रधानमंत्री बने, तो “हमारा भी सपना है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में तिलक और भगवा वस्त्र पहनने वाले लोग सत्ता में आएं।”

    देवकीनंदन ठाकुर ने इसे विचारधाराओं की टक्कर बताते हुए कहा कि जैसे ओवैसी भविष्य की कल्पना कर रहे हैं, वैसे ही सनातन समाज भी अपनी आकांक्षाएं रखता है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    ओवैसी के बयान पर बीजेपी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। बीजेपी सांसद अनिल बोंडे ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए कहा कि ओवैसी “आधा सच” बोल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई मुस्लिम महिलाएं हिजाब को मजबूरी मानती हैं और ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी गुलामी पसंद नहीं करता।

    गौरतलब है कि ओवैसी ने सोलापुर की जनसभा में भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा था कि भारत में कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है और भविष्य में हिजाब पहनने वाली महिला भी इस पद तक पहुंचेगी। इसी बयान ने अब सियासी आग में घी डालने का काम किया है।

  • Maharashtra Political News: ठाणे में पानी-कचरे की समस्या जस की तस, महायुति के ‘सभ्य शहर’ दावे पर सुप्रिया सुले का हमला

    Maharashtra Political News: ठाणे में पानी-कचरे की समस्या जस की तस, महायुति के ‘सभ्य शहर’ दावे पर सुप्रिया सुले का हमला

    ठाणे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने ठाणे की बदहाल बुनियादी सुविधाओं को लेकर सत्तारूढ़ महायुति सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भले ही सरकार ठाणे को “सभ्य शहर” बताने के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहां आज भी पानी की किल्लत, कूड़ाघरों की कमी और नागरिक सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।

    नगर निकाय चुनाव से पहले एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सुले ने कहा कि ठाणे कभी छोटा शहर था, जहां बेहतर जीवन की उम्मीद में देश-प्रदेश से लोग आए। लेकिन आज वही लोग बुनियादी जरूरतों के लिए जूझ रहे हैं।

    सुले ने विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर धन स्वीकृत किए जाने के सरकारी दावों पर भी सवाल उठाए और कहा कि अगर वाकई इतना पैसा आया है तो पानी, कचरा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याएं अब तक क्यों नहीं सुलझीं। उन्होंने मतदाताओं से “बदलाव की भाषा” बोलने और निकाय चुनाव में सत्ताधारियों को जवाब देने की अपील की।

  • Mumbai Manpa Election 2026:मुंबई मनपा चुनाव 2026: कांग्रेस ने की निरीक्षकों की नियुक्ति

    Mumbai Manpa Election 2026:मुंबई मनपा चुनाव 2026: कांग्रेस ने की निरीक्षकों की नियुक्ति

    मुंबई। मुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 को देखते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मुंबई के लिए जिलेवार निरीक्षकों की नियुक्ति की है। पार्टी ने अपने सभी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे कांग्रेस की मजबूत चुनावी प्रदर्शन के लिए एकजुट होकर काम करें।

    मुंबई उत्तर के निरीक्षक चरण सिंह सप्रा होंगे, जबकि मुंबई उत्तर-पूर्व के लिए जॅनेट डी’सूझा और मुंबई उत्तर-पश्चिम के लिए राजेश शर्मा नियुक्त किए गए हैं। मुंबई उत्तर-मध्य का प्रभार शिवजी सिंह को दिया गया है, मुंबई दक्षिण-मध्य के लिए सचिन सावंत और मुंबई दक्षिण के लिए भाई जगताप जिम्मेदार होंगे।

    कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व मुंबई प्रभारी यू. बी. वेंकटेश ने सभी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे संगठनात्मक रूप से सक्रिय रहें और चुनावी तैयारियों में पूर्ण सहयोग दें। पार्टी इस बार मुंबई में मजबूत प्रदर्शन के लिए पूरी तरह जुटी हुई है।