Thane News:पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश अभय ओक ने ठाणे लॉ कॉलेज में संविधान की आर्ट पेंटिंग प्रदर्शनी का उद्घाटन किया

ठाणे के विद्या प्रसारक मंडल लॉ कॉलेज में संविधान की आर्ट एग्ज़िबिशन का उद्घाटन करते पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश अभय ओक।

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ठाणे (Thane News) | संवाददाता

ठाणे के विद्या प्रसारक मंडल के लॉ कॉलेज में संविधान की ओरिजिनल कॉपी की एक परमानेंट आर्ट एग्ज़िबिशन का उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अभय ओक के हाथों किया गया।

इस अवसर पर संस्था के प्रेसिडेंट डॉ. विजय बेडेकर, सेक्रेटरी अभय मराठे, कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. विद्या जयकुमार और वाइस-प्रिंसिपल डॉ. विनोद एच. वाघ सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम के दौरान जस्टिस अभय ओक ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि टीएमसी लॉ कॉलेज शायद भारत का पहला ऐसा कॉलेज है, जिसने संविधान की ओरिजिनल कॉपी की इस तरह की परमानेंट एग्ज़िबिशन आयोजित की है। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रदर्शनी से छात्रों, वकीलों और आम नागरिकों को देश के संवैधानिक इतिहास को समझने का अवसर मिलेगा और इस विषय पर और अधिक शोध की आवश्यकता भी है।

लॉ छात्रों के लिए संविधान की समझ जरूरी

जस्टिस ओक ने कहा कि इस पहल से लॉ के छात्रों को संविधान को और अधिक गहराई और गंभीरता से समझने का मौका मिलेगा। वहीं प्रिंसिपल डॉ. विद्या जयकुमार ने बताया कि इस एग्ज़िबिशन का उद्देश्य छात्रों को संविधान के मूल विचारों और इतिहास से जोड़ना है।

क्रिमिनल ट्रायल प्रोसेस पर दिया व्याख्यान

उद्घाटन के बाद जस्टिस ओक ने भारत में क्रिमिनल ट्रायल प्रोसेस पर एक विशेष व्याख्यान भी दिया। उन्होंने कहा कि भारत के आपराधिक कानून मानवीय सोच और न्याय के सिद्धांतों पर आधारित हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद जैसे गंभीर अपराधों के आरोपियों को भी निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार दिया जाता है, जो भारतीय न्याय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।

जूरी ट्रायल से आधुनिक न्याय व्यवस्था तक का सफर

अपने व्याख्यान में उन्होंने भारत के क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के विकास को समझाते हुए जूरी ट्रायल सिस्टम से लेकर वर्तमान न्यायिक प्रक्रिया तक के बदलावों पर विस्तार से चर्चा की।

जस्टिस ओक के अनुसार भारतीय आपराधिक कानून संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है और किसी भी आपराधिक मामले में प्रॉसिक्यूटर और आरोपी दोनों को बराबर और निष्पक्ष अवसर देता है।

कार्यक्रम के अंत में जस्टिस ओक ने छात्रों से संवाद किया और उनके सवालों के जवाब देते हुए क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की कार्यप्रणाली पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। इस मौके पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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