Dr. Jyoti Mete warning to Mahayuti over seat sharing: महाराष्ट्र सरकार में सम्मानजनक हिस्सेदारी नहीं मिली तो चुनाव में दिखाएंगे ताकत: शिवसंग्राम पार्टी की अध्यक्ष डॉ. ज्योति मेटे

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मुंबई/बीड: शिवसंग्राम पार्टी की अध्यक्ष डॉ. ज्योति मेटे ने महायुति सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि उनकी पार्टी को सम्मानजनक राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं मिली, तो आगामी चुनावों में शिवसंग्राम अलग रणनीति अपनाने पर मजबूर होगा। उनके इस बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है।

डॉ. ज्योति मेटे ने कहा कि दिवंगत विनायक मेटे के जीवनकाल में महायुति में शिवसंग्राम को जो सम्मान और राजनीतिक भागीदारी मिलती थी, वह अब दिखाई नहीं दे रही है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष और नाराजगी है।

उन्होंने कहा कि शिवसंग्राम ने महायुति के सहयोगी दल के रूप में राज्यभर में जहां भी संभव हुआ, वहां भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के साथ मिलकर महानगरपालिका और नगरपालिकाओं के चुनावों में काम किया। इसके बावजूद पार्टी की लगातार उपेक्षा की जा रही है।

डॉ. मेटे ने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो पार्टी को अपनी राजनीतिक ताकत चुनावी मैदान में दिखानी पड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिवसंग्राम अपने अस्तित्व और विचारधारा के साथ राजनीति जारी रखेगा तथा केवल सत्ता के लिए अपनी पहचान से समझौता नहीं करेगा।

उन्होंने महायुति नेतृत्व से अपील करते हुए कहा कि शिवसंग्राम को सम्मानजनक हिस्सेदारी देने के लिए जल्द ठोस कदम उठाए जाएं। अन्यथा कार्यकर्ताओं की भावनाओं को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अपनी नाराजगी मुख्यमंत्री के सामने भी व्यक्त की जा चुकी है।

डॉ. ज्योति मेटे ने कहा कि शिवसंग्राम ने अपने संस्थापक नेता विनायक मेटे को जरूर खोया है, लेकिन पार्टी की ताकत आज भी बरकरार है। महायुति को इस ताकत का सम्मान करते हुए सहयोगी दलों के लिए बनाई जाने वाली राजनीतिक रणनीति में शिवसंग्राम को भी उचित स्थान देना चाहिए।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल पार्टी ने आगामी स्थानीय निकाय चुनाव स्वबळ (अपने दम पर) लड़ने का अंतिम फैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा कि बीड नगर परिषद चुनाव में शिवसंग्राम ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन उस समय किए गए वादे पूरे नहीं किए गए।

उन्होंने कहा कि अब जिला परिषद और अन्य स्थानीय निकाय चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में यदि महायुति ने समय रहते शिवसंग्राम की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो पार्टी के कार्यकर्ताओं को रोकना मुश्किल होगा। डॉ. ज्योति मेटे के इस बयान को महायुति सरकार के लिए एक बड़े राजनीतिक संदेश और चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

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