Permeable Road Shoulders Groundwater Recharge Proposal : कंक्रीट सड़कों के किनारे जल रिचार्ज स्ट्रक्चर बनाने की मांग, पर्यावरणविद् डॉ. प्रशांत सिनकर ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

सीमेंट-कंक्रीट सड़कों के किनारे पानी सोखने वाले पारगम्य स्ट्रक्चर विकसित कर भूजल रिचार्ज बढ़ाने और बाढ़ व टैंकर निर्भरता कम करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपा गया है

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ठाणे। राज्य में तेजी से बन रही सीमेंट-कंक्रीट सड़कों के कारण वर्षा जल का प्राकृतिक रूप से जमीन में समावेश कम होता जा रहा है, जिससे बाढ़, भूजल स्तर में गिरावट, टैंकरों पर बढ़ती निर्भरता और शहरी गर्मी जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सीमेंट-कंक्रीट सड़कों के किनारे पानी सोखने वाले पारगम्य (परमीएबल) स्ट्रक्चर विकसित करने की मांग उठी है(Permeable Road Shoulders Groundwater Recharge Proposal)। इस संबंध में पर्यावरणविद् डॉ. प्रशांत सिनकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपकर राज्य सरकार से नीति बनाने का आग्रह किया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान में सड़कों के दोनों ओर बने फुटपाथ, साइड शोल्डर और सार्वजनिक क्षेत्र पूरी तरह कंक्रीट से ढके होने के कारण वर्षा का अधिकांश पानी सीधे नालियों में बह जाता है। इससे मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ की स्थिति बनती है, जबकि गर्मियों में भूजल स्तर गिरने से पानी के लिए टैंकरों पर निर्भरता बढ़ जाती है।

प्रस्ताव में सुझाव दिया गया है कि सड़कों के किनारे पारगम्य इंटरलॉकिंग ब्लॉक, कुचले हुए पत्थर, बजरी, गिट्टी और रेत जैसी जल सोखने वाली परतों का उपयोग किया जाए, जिससे वर्षा जल जमीन में समाहित होकर भूजल रिचार्ज को बढ़ा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जलभराव कम होगा, भूजल स्तर सुधरेगा, टैंकरों पर निर्भरता घटेगी और शहरी क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

ज्ञापन में सार्वजनिक निर्माण विभाग, शहरी विकास विभाग, जल संसाधन विभाग और भूजल सर्वेक्षण विभाग से इस अवधारणा का तकनीकी अध्ययन कराने तथा पहले चुनिंदा शहरों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की मांग की गई है। इसके बाद सभी नए सीमेंट-कंक्रीट सड़क परियोजनाओं और सार्वजनिक विकास कार्यों में ऐसे जल रिचार्ज स्ट्रक्चर को अनिवार्य रूप से शामिल करने का सुझाव दिया गया है।

पर्यावरणविद् डॉ. प्रशांत सिनकर का कहना है कि यदि सड़कों के किनारे जल सोखने वाले ढांचे विकसित किए जाएं तो लाखों लीटर वर्षा जल सीधे जमीन में समा सकेगा। इससे ‘बाढ़ से टैंकर’ के दुष्चक्र को रोकने के साथ-साथ जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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