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  • Marathi Rajbhasha Gaurav Divas: मुंबादेवी में मनसे ने मनाया मराठी राजभाषा गौरव दिवस पर प्रतिष्ठित हस्तियों का किया गया सम्मान

    Marathi Rajbhasha Gaurav Divas: मुंबादेवी में मनसे ने मनाया मराठी राजभाषा गौरव दिवस पर प्रतिष्ठित हस्तियों का किया गया सम्मान

    मुंबई: प्रख्यात साहित्यकार वि. वा. शिरवाडकर (कुसुमाग्रज) की जयंती के उपलक्ष्य में पूरे महाराष्ट्र में ‘मराठी राजभाषा गौरव दिवस'(Marathi Rajbhasha Gaurav Divas) उत्साह के साथ मनाया गया। इसी कड़ी में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) द्वारा मुंबादेवी विधानसभा प्रभाग क्रमांक 220 में एक विशेष गौरव समारोह का आयोजन किया गया।

    विशिष्ट व्यक्तियों का सम्मान

    इस कार्यक्रम के माध्यम से कला, खेल, सामाजिक, प्रशासनिक और उद्यम जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले मराठी भाषी प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। सभी गणमान्य जनों को शॉल, गुलाब पुष्प और सम्मान पत्र प्रदान कर उनके कार्यों की सराहना की गई।

    उद्यमी जयवंत कोळेकर का विशेष सत्कार

    कार्यक्रम के दौरान प्रभाग के वरिष्ठ और अनुभवी मराठी उद्यमी (विकासक) श्री जयवंत कोळेकर का विशेष सम्मान किया गया। उन्होंने अपने क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाकर मराठी अस्मिता को गौरवान्वित किया है।

    प्रमुख उपस्थिति

    समारोह में मनसे के प्रमुख पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:

    • प्रशांत गांधी (विभाग अध्यक्ष)
    • अनिल शांताराम नागरे (उपविभाग अध्यक्ष)
    • राजेश बनसोडे (उपविभाग सचिव)
    • वैभव राऊत (शाखाध्यक्ष)

    सांस्कृतिक संदेश

    इस आयोजन के जरिए मनसे ने मराठी भाषा, संस्कृति और अस्मिता के संरक्षण व संवर्धन का कड़ा संदेश दिया। उपस्थित ‘महाराष्ट्र सैनिकों’ ने मराठी भाषा के गौरव को अक्षुण्ण रखने का संकल्प दोहराया।


  • NewMumbai:सिडको की ‘शिल्पकार’ छवि पर सवाल: नेरूल के आगरी कोळी भवन की बदहाली ने खोली पोल

    आर. एस. नेटवर्क। ज्योति दुबे
    नवी मुंबई (NewMumbai)। खुद को शहर का ‘शिल्पकार’ बताने वाली सिडको(CIDCO) की कार्यशैली एक बार फिर कटघरे में है। नेरूल स्थित आगरी कोळी भवन, जिसे स्थानीय आगरी-कोळी समाज की सांस्कृतिक पहचान का केंद्र माना जाता था, आज अव्यवस्था, लापरवाही और कथित मनमानी वसूली का उदाहरण बन चुका है।

    हाल ही में यहां कार्यक्रम आयोजित करने वाली एक संस्था ने भवन की दुर्दशा को उजागर किया। मौके पर की गई पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, वह सिडको के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।

    25 हजार रुपए किराया, लेकिन टूटी कुर्सियां और जर्जर हाल

    तीन घंटे के लिए ऑडिटोरियम का किराया करीब 25,000 रुपए वसूला जाता है। 550 सीटों वाले सभागार में लगभग 180 कुर्सियां टूटी या जर्जर हालत में हैं। आयोजकों को मजबूरन बाहर से प्लास्टिक कुर्सियां मंगवानी पड़ती हैं, जिस पर प्रति कुर्सी 30–40 रुपए का अतिरिक्त खर्च आता है। यानी कार्यक्रम के नाम पर हजारों रुपये की अतिरिक्त मार।

    इतना भारी किराया लेने के बावजूद मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं होना सीधे-सीधे प्रबंधन की विफलता को दर्शाता है।

    अंदर की सामग्री पर भी मनमानी वसूली

    हॉल के अलावा अन्य सामान के नाम पर भी ‘अव्वा के सव्वा’ दर वसूले जा रहे हैं—

    • एक समय (सामान) के लिए 1,200 रुपए तक
    • टेबल व झालर के लिए 200 रुपए
    • पूरे कार्यक्रम में केवल एक कॉर्डलेस माइक
    • लाइटिंग व्यवस्था भी बेहद सामान्य

    सवाल उठता है कि जब सुविधाएं न्यूनतम हैं, तो शुल्क आसमान छू क्यों रहे हैं?

    सुरक्षा से समझौता, सीढ़ियां बनीं कबाड़घर

    भवन की साफ-सफाई की स्थिति दयनीय है। सीढ़ियों और सार्वजनिक मार्गों पर कबाड़ का ढेर लगा है। आपात स्थिति में यह अवरोध जानलेवा साबित हो सकता है। क्या सिडको को किसी बड़े हादसे का इंतजार है?

    अजीब नियम, जनता से दूरी

    तीन मंजिला इमारत होने के बावजूद शादी या बड़े आयोजनों में भोजन पकाने पर रोक है। वहीं ‘वीआईपी रूम’ आम नागरिकों के लिए बंद है और कथित तौर पर केवल नेताओं व अधिकारियों तक सीमित है। मुख्य ऑडिटोरियम तीसरी मंजिल पर और वीआईपी कक्ष भूतल पर — यह भवन नियोजन की गंभीर खामी को दर्शाता है।

    पार्किंग और कैंटीन तक नहीं

    आश्चर्यजनक रूप से इतने बड़े सांस्कृतिक भवन में समुचित पार्किंग और कैंटीन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। आगरी-कोळी संस्कृति के संरक्षण के नाम पर बने कक्ष में समाज की परंपराओं का प्रदर्शन भी नगण्य है।

    नागरिकों का गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी

    स्थानीय नागरिकों और आगरी-कोळी समाज में भारी रोष है। ‘सजग नागरिक मंच’ के सुधीर दाणी ने आरोप लगाया कि जवाबदेही की कमी और प्रशासनिक उदासीनता ने सिडको को आर्थिक लूट का केंद्र बना दिया है। अधिकारी औपचारिक बयानबाजी छोड़कर खुद स्थल का निरीक्षण करें और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाएं। अन्यथा आंदोलन की राह अपनाने की चेतावनी दी गई है।

    अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सिडको सिर्फ इमारतें बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेती है, या उनकी देखरेख और जनता को बेहतर सुविधा देना भी उसकी प्राथमिकता में है? नेरूल का आगरी कोळी भवन आज इसी सवाल का जवाब मांग रहा है।

  • मुंबई कृषी उत्पन्न बाजार समिती (APMC) की बड़ी कार्रवाई: बिना सेस चुकाए कारोबार करने वालों से 17.51 करोड़ का कृषि माल जब्त

    मुंबई कृषी उत्पन्न बाजार समिती (APMC) की बड़ी कार्रवाई: बिना सेस चुकाए कारोबार करने वालों से 17.51 करोड़ का कृषि माल जब्त

    वाशी/नवी मुंबई। बिना वैध अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) लिए और बाजार शुल्क (सेस) का भुगतान किए बिना कृषि उपज का कारोबार करने वाले व्यापारियों पर मुंबई कृषी उत्पन्न बाजार समिति (APMC) ने सख्त कार्रवाई करते हुए जनवरी से फरवरी 2026 के बीच 17 करोड़ 51 लाख 30 हजार रुपये मूल्य का कृषि माल जब्त किया है। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित व्यापारियों से तीन गुना दंड वसूलते हुए 59 लाख 90 हजार रुपये की वसूली भी की गई है।

    यह विशेष अभियान जेएनपीटी, तुर्भे, नेरुल और ठाणे-बेलापुर औद्योगिक क्षेत्र सहित कई इलाकों में चलाया गया। विशेष रूप से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) के आसपास स्थित आयात-निर्यात से जुड़े गोदामों और थोक मंडियों की जांच की गई। बाजार समिति के सचिव शरद जरे के मार्गदर्शन में सतर्कता पथक के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया।

    जांच के दौरान पाया गया कि कई व्यापारी APMC की वैध अनुज्ञप्ति लिए बिना ही सीधे किसानों और एजेंटों से कृषि उपज की खरीद-बिक्री कर रहे थे। इतना ही नहीं, बाजार समिति को देय सेस और सुपरविजन फीस भी जमा नहीं की गई थी। कुछ आयातकों ने विदेश से मंगाए गए कृषि उत्पादों को APMC के अधिकार क्षेत्र में लाते समय पूर्व सूचना तक नहीं दी। कई मामलों में आयातकों के पास वैध लाइसेंस भी नहीं था, फिर भी बड़े पैमाने पर लेन-देन जारी था।

    नियमों की इस गंभीर अनदेखी को देखते हुए बाजार समिति ने संबंधित व्यापारियों पर तीन गुना जुर्माना लगाया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी बिना लाइसेंस और बिना शुल्क भुगतान के व्यापार करने वालों के खिलाफ जब्ती और दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

  • Thane: खारेगांव टोल नाका पर 123 किलो गांजा जब्त, दो आरोपी गिरफ्तार; ठाणे अपराध शाखा यूनिट-1 की कार्रवाई

    Thane: खारेगांव टोल नाका पर 123 किलो गांजा जब्त, दो आरोपी गिरफ्तार; ठाणे अपराध शाखा यूनिट-1 की कार्रवाई

    ठाणे (Thane News)। ठाणे अपराध शाखा की यूनिट-1 ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कलवा के खारेगांव टोल नाका पर एक कार से 123.640 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। पुलिस ने कार सहित कुल 30 लाख 91 हजार रुपये मूल्य का मादक पदार्थ जब्त किया है।

    इस मामले में पुलिस ने सागर गोविंद पवार (33, निवासी नंदुर शिंगोटे, तहसील सिन्नर, जिला नासिक) और धोंडीराम वैतु भागडे (50, निवासी नंदगांव सादो, तहसील इगतपुरी, जिला नासिक) को गिरफ्तार किया है।

    पुलिस के अनुसार, क्राइम ब्रांच यूनिट-1 के कांस्टेबल सागर सुरालकर को गुप्त सूचना मिली थी कि एक कार के जरिए गांजे की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर 24 फरवरी को कलवा स्थित खारेगांव टोल प्लाजा से कलवा जाने वाली सड़क पर जाल बिछाया गया।

    इस दौरान एक संदिग्ध सैंट्रो कार को रोककर तलाशी ली गई। जांच में कार के भीतर प्लास्टिक की थैलियों में छिपाकर रखा गया 123 किलो 640 ग्राम गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने मादक पदार्थ और वाहन दोनों को जब्त कर लिया।

    इस प्रकरण में कलवा पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों को ठाणे अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 28 फरवरी 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

    पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है और इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।

  • Thane :शिव सेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने दिवा में मनपा अस्पताल की मांग तेज, स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर प्रशासन पर बढ़ा दबाव

    Thane :शिव सेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने दिवा में मनपा अस्पताल की मांग तेज, स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर प्रशासन पर बढ़ा दबाव

    ठाणे (Thane News) : दिवा में बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। शिव सेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की दिवा नगर महिला संगठन की पदाधिकारी ज्योति पाटिल ने सत्ताधारी दल और नगर प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि अब राजनीति से ऊपर उठकर नागरिकों की बुनियादी जरूरतों पर ध्यान देने का समय आ गया है।

    ज्योति पाटिल ने आरोप लगाया कि दिवा की तेजी से बढ़ती आबादी के मुकाबले स्वास्थ्य सुविधाएं बेहद कम हैं। सामान्य उपचार के लिए भी नागरिकों को ठाणे शहर या कालवा स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ता है। आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर इलाज न मिलने से मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

    उन्होंने नगर प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वार्ड समिति कार्यालय के लिए निजी इमारत किराए पर ली जा सकती है, तो जनता के स्वास्थ्य के लिए किराए के भवन में अस्पताल क्यों नहीं शुरू किया जा सकता। उनका कहना है कि स्थायी सरकारी भवन की प्रतीक्षा करने के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था के तहत तत्काल अस्पताल शुरू किया जाना चाहिए।

    ज्योति पाटिल ने नगर आयुक्त से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि दिवा की जनता ने विश्वास के साथ जनप्रतिनिधियों को चुना है और अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उन्हें न्यूनतम स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए।

    इस मांग के बाद दिवा में स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। अब सबकी नजरें ठाणे नगर निगम पर टिकी हैं कि वह दिवा में मनपा अस्पताल शुरू करने को लेकर क्या कदम उठाता है।

  • BMC: कोकण विकास आघाड़ी के पूर्व पदाधिकारियों ने मुंबई मनपा के नवनियुक्त महापौर ऋतु तावड़े और उपमहापौर संजय घाडी से की शिष्टाचार भेंट

    BMC: कोकण विकास आघाड़ी के पूर्व पदाधिकारियों ने मुंबई मनपा के नवनियुक्त महापौर ऋतु तावड़े और उपमहापौर संजय घाडी से की शिष्टाचार भेंट

    मुंबई : कोकण विकास आघाड़ी के पूर्व पदाधिकारियों ने मुंबई महानगरपालिका की नवनियुक्त महापौर ऋतु तावड़े और उपमहापौर संजय घाडी से शिष्टाचार भेंट कर दी शुभकामनाएं।

    के पूर्व मुंबई महामंत्री राजेंद्र फणसगांवकर ने बृहंमुंबई महानगरपालिका की नवनियुक्त महापौर सौ. रितू ताई तावडे से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

    इस अवसर पर शिवसेना के उपमहापौर संजय घाडी, स्थायी समिति के अध्यक्ष मंगेश पवार तथा शिक्षा समिति की अध्यक्षा राजश्री ताई शिरवडकर से भी मुलाकात की गई।

    भेंट के दौरान मुंबई शहर में चल रहे विकास कार्यों, कोकण क्षेत्र से जुड़े सामाजिक उपक्रमों तथा संगठनात्मक समन्वय को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। फणसगांवकर ने शहर के सर्वांगीण विकास के लिए महानगरपालिका प्रशासन को सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

    इसके पश्चात उन्होंने बृहंमुंबई महानगरपालिका स्थित भाजपा पक्ष कार्यालय का भी दौरा किया। इस दौरान कोकण विकास आघाड़ी के पूर्व मुंबई अध्यक्ष सुधीर राणे, राजाराम मोरे, नरेंद्र मोरे, महेंद्र लोके, सुरेश बापर्डेकर, रसिका आणेराव, अनिता तावडे, लांबेश तावडे, कृष्णा कांबळी, प्रीती लाड, आर. सावंत तथा अनिल गोपाले सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

    इस शिष्टाचार भेंट को संगठनात्मक मजबूती और आपसी समन्वय को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

  • NCP:एनसीपी (अजित गुट) में बड़ा फैसला: पार्थ पवार राज्यसभा के लिए नामित, सुनेत्रा पवार बनीं पार्टी अध्यक्ष

    NCP:एनसीपी (अजित गुट) में बड़ा फैसला: पार्थ पवार राज्यसभा के लिए नामित, सुनेत्रा पवार बनीं पार्टी अध्यक्ष

    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की ओर से राज्यसभा सीट को लेकर लगभग अंतिम फैसला हो चुका है। जानकारी के अनुसार दिवंगत अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया गया है।

    गुरुवार (26 फरवरी) को हुई पार्टी की कोर कमेटी बैठक में सर्वसम्मति से पार्थ पवार के नाम पर मुहर लगाई गई। इसके बाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस फैसले की औपचारिक घोषणा की गई।

    सुनेत्रा पवार ने ली उपमुख्यमंत्री पद की शपथ

    इसी के साथ पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव भी हुआ है। सुनेत्रा पवार ने राज्य के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। इससे पहले उन्होंने राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद राज्यसभा में एनसीपी की सीट रिक्त हो गई थी।

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    अजित पवार के असामयिक निधन के बाद पार्टी अध्यक्ष का पद खाली था। अब सुनेत्रा पवार को निर्विरोध पार्टी अध्यक्ष चुना गया है। इस फैसले को संगठनात्मक एकजुटता और परिवार के भीतर नेतृत्व बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

    पार्थ पवार का राजनीतिक सफर

    पार्थ पवार ने वर्ष 2019 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने मावल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

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    https://th-i.thgim.com/public/elections/lok-sabha-2019/jaydw9/article27219316.ece/alternates/FREE_385/23BMPARTHPAWAR

    चुनाव हारने के बाद वे कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से दूर हो गए थे और पार्टी में कोई औपचारिक पद नहीं लिया था। नामांकन पत्र में उन्होंने लगभग 20 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। वे बीकॉम स्नातक हैं और आगे की पढ़ाई के लिए लंदन भी गए थे।

    राजनीतिक मायने

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय एनसीपी (अजित गुट) में नेतृत्व की निरंतरता और पारिवारिक विरासत को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एक ओर जहां सुनेत्रा पवार को संगठन की कमान सौंपी गई है, वहीं पार्थ पवार को संसद के उच्च सदन में भेजकर पार्टी भविष्य की रणनीति को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

    आने वाले दिनों में पार्थ पवार के नामांकन की औपचारिक घोषणा और चुनाव प्रक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

  • University of Bristol के साथ महाराष्ट्र सरकार का समझौता, मेधावी छात्रों को मिलेगी 100% ट्यूशन फीस माफी

    University of Bristol के साथ महाराष्ट्र सरकार का समझौता, मेधावी छात्रों को मिलेगी 100% ट्यूशन फीस माफी

    मुंबई। महाराष्ट्र सरकार और University of Bristol मुंबई कैंपस प्राइवेट लिमिटेड के बीच विधान भवन में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल का उद्देश्य राज्य के प्रतिभाशाली और जरूरतमंद छात्रों को विश्व स्तरीय उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।

    यह समझौता मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री Chandrakant Patil, अतिरिक्त मुख्य सचिव बी. वेणुगोपाल रेड्डी, ब्रिस्टल विश्वविद्यालय की कुलपति एवं अध्यक्ष प्रो. एवलिन वेल्च, मुख्य परिचालन अधिकारी लुसिंडा पार, निदेशक जूलिया हॉल और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अश्विन दमेरा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


    मुख्यमंत्री का वक्तव्य

    मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने कहा कि ब्रिस्टल विश्वविद्यालय जैसे विश्व प्रसिद्ध संस्थान के साथ साझेदारी करना महाराष्ट्र के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि सरकार और शिक्षा जगत के सहयोग से राज्य के छात्रों के लिए उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है।


    ‘मुख्यमंत्री–ब्रिस्टल विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति योजना’

    समझौते के तहत एक संयुक्त छात्रवृत्ति योजना विकसित की जाएगी, जिसका नाम होगा — ‘मुख्यमंत्री और ब्रिस्टल विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति योजना’।

    योजना की प्रमुख विशेषताएं:

    ✔ सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित लेकिन मेधावी छात्रों को प्राथमिकता
    ✔ चयनित छात्रों की पूरी डिग्री अवधि तक 100% ट्यूशन फीस माफ
    ✔ छात्रवृत्ति का संपूर्ण खर्च ब्रिस्टल विश्वविद्यालय, मुंबई परिसर द्वारा वहन

    इस पहल से महाराष्ट्र के उन छात्रों को बड़ा लाभ मिलेगा, जो आर्थिक बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।

  • Right of Children to Free and Compulsory Education Act में बड़ा बदलाव: नासिक में अब 10 स्कूल चुन सकेंगे अभिभावक

    Right of Children to Free and Compulsory Education Act में बड़ा बदलाव: नासिक में अब 10 स्कूल चुन सकेंगे अभिभावक

    नासिक। शिक्षा के अधिकार कानून यानी Right of Children to Free and Compulsory Education Act (आरटीई) के तहत इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार अब अभिभावक ऑनलाइन आवेदन करते समय अधिकतम 10 स्कूलों का चयन कर सकेंगे।

    घर के पास स्कूल को प्राथमिकता

    नई व्यवस्था के तहत आवेदन पोर्टल पर आवेदक के पते से एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य छात्रों को उनके घर के नजदीक स्कूल में प्रवेश दिलाना और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।

    शिक्षा विभाग ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे केवल एक स्कूल पर निर्भर न रहें, बल्कि अधिक विकल्प चुनें ताकि चयन की संभावना बढ़ सके।


    सीटें और स्कूलों की स्थिति

    • पिछले वर्ष पंजीकृत स्कूल: 410
    • इस वर्ष पंजीकृत स्कूल: 393
    • कुल उपलब्ध सीटें: 5,622
    • लगभग 17 स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया बंद
    • पिछले वर्ष शून्य प्रवेश वाले 15 स्कूल प्रशासन की निगरानी में

    प्रवेश के मुख्य मानदंड

    ✔ विद्यार्थी आर्थिक रूप से दुर्बल वर्ग (EWS) या वंचित घटक से होना चाहिए।
    ✔ परिवार की वार्षिक आय निर्धारित सीमा के भीतर हो।
    ✔ निवास प्रमाण पत्र (डोमिसाइल) और अन्य आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य।


    पूरी तरह ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली

    इस वर्ष चयन प्रक्रिया पूरी तरह कंप्यूटरीकृत और ऑनलाइन होगी, जिससे मानवीय हस्तक्षेप की संभावना समाप्त होगी। परिणाम घोषित होने के बाद चयनित अभिभावकों को एसएमएस के माध्यम से सूचना दी जाएगी।

    शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 25 प्रतिशत कोटे के तहत पात्र सभी स्कूलों को पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य रूप से कराना होगा, अन्यथा उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है।


    अभिभावकों को मिलने वाले लाभ

    🔹 अधिक विकल्प: एक साथ 10 स्कूलों के चयन की सुविधा।
    🔹 नजदीकी स्कूल: घर के पास प्रवेश मिलने की संभावना अधिक।
    🔹 धन की बचत: पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन, भागदौड़ से मुक्ति।
    🔹 पारदर्शिता: चयन प्रक्रिया और परिणाम पूरी तरह स्पष्ट।

  • Nashik Singhastha Kumbh:कुंभ से पहले प्रशासन की रफ्तार ढीली, साधु ग्राम को लेकर संतों ने छेड़ा संघर्ष

    Nashik Singhastha Kumbh:कुंभ से पहले प्रशासन की रफ्तार ढीली, साधु ग्राम को लेकर संतों ने छेड़ा संघर्ष

    नासिक। आगामी सिंहस्थ कुंभ (Nashik Singhastha Kumbh) मेला की आहट के साथ शहर में तैयारियां तेज होती नजर आ रही हैं। सड़कों के चौड़ीकरण, बिजली और पानी आपूर्ति से जुड़े बुनियादी ढांचे के कार्य कई हिस्सों में शुरू हो चुके हैं।

    लेकिन कुंभ मेले के मुख्य केंद्र तपोवन क्षेत्र स्थित साधु ग्राम में अब तक निर्माण कार्य शुरू न होने से साधु-संतों में भारी नाराजगी है।

    अखाड़ा परिषद ने उठाए सवाल

    अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रवक्ताओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब शहर के अन्य इलाकों में काम दिखाई दे रहा है, तो साधु ग्राम को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है?

    संतों ने स्पष्ट किया कि साधु ग्राम के लिए आरक्षित जमीन का अधिग्रहण करने से पहले संबंधित किसानों को तत्काल और उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए।


    प्रमुख मांगें

    1️⃣ मुआवजा:
    भूमि अधिग्रहण के बदले किसानों को तुरंत आर्थिक भुगतान।

    2️⃣ निर्माण कार्य:
    साधु ग्राम में बुनियादी सुविधाओं का काम युद्धस्तर पर शुरू किया जाए।

    3️⃣ संरक्षण:
    स्थानीय आश्रमों और मठों की मौजूदा व्यवस्था को कोई नुकसान न पहुंचे।

    4️⃣ समन्वय:
    प्रशासन और संतों के बीच नियमित संवाद और पारदर्शी योजना बने।


    संतों की चेतावनी

    तीनों प्रमुख अखाड़ों — दिगंबर, निर्वाणी और निर्मोही — के संतों ने हाल ही में गोवा में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की।
    राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत भक्ति चरणदास महाराज ने कहा कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो साधु-संत सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

    संतों का कहना है कि कुंभ मेले में लाखों श्रद्धालुओं और साधु-संतों का आगमन होता है और उनके ठहरने की व्यवस्था साधु ग्राम में ही की जाती है। यदि समय पर कार्य पूरे नहीं हुए, तो मेले के सफल आयोजन पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।