Category: Thane

  • Central Railway:मध्य रेल में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया, 36 महिला कर्मचारियों को किया गया सम्मानित

    Central Railway:मध्य रेल में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया, 36 महिला कर्मचारियों को किया गया सम्मानित

    मुंबई: मध्य रेल(Central Railway) में 9 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) में केंद्रीय कर्मचारी कल्याण कोष (CSBF) के तत्वावधान में महिला कर्मचारी उपलब्धि सम्मान समारोह आयोजित किया गया।

    इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “Give to Gain” रखी गई, जिसका उद्देश्य महिलाओं को अवसर, सम्मान, समानता और सहयोग देकर समाज में प्रगति और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम की शुरुआत मध्य रेल के महाप्रबंधक प्रतीक गोस्वामी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई।

    इस दौरान महाप्रबंधक ने मध्य रेल की विभिन्न इकाइयों और विभागों से चयनित 36 महिला कर्मचारियों को “सशक्त नारी पुरस्कार” देकर सम्मानित किया। इनमें लोको पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन, शिक्षिका, वाणिज्य निरीक्षक, आरपीएफ कर्मी, कार्यालय अधीक्षक और अन्य विभागों की कर्मचारी शामिल थीं।

    इनमें से 21 महिला कर्मचारियों को मुख्यालय, मुंबई मंडल और विभिन्न वर्कशॉप से व्यक्तिगत रूप से सम्मानित किया गया। सम्मानित कर्मचारियों में अनुराधा रॉय भी शामिल हैं, जिन्हें 8 मार्च को नई दिल्ली में रेलवे बोर्ड द्वारा “Outstanding Women Award” से भी सम्मानित किया गया था।

    कार्यक्रम के दौरान महिला सशक्तिकरण के तहत 8 आश्रित अविवाहित बेटियों को साइकिल और 3 महिला आश्रितों को सिलाई मशीनें भी वितरित की गईं।

    इस मौके पर महाप्रबंधक प्रतीक गोस्वामी ने बताया कि मध्य रेल में लगभग 9 हजार महिलाएं विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं और महिला सशक्तिकरण के लिए कई पहलें की जा रही हैं।

    कार्यक्रम में लेखिका और TED एलुमना अनुपमा पांडे ने भी प्रेरणादायक व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में मुंबई मंडल के डीआरएम, वरिष्ठ अधिकारी और रेलवे कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

  • Women,s Day:ठाणे में महिला दिवस से पहले दो नाबालिग लड़कियां लापता, 11 वर्षीय लड़के के अपहरण का भी मामला दर्ज

    Women,s Day:ठाणे में महिला दिवस से पहले दो नाबालिग लड़कियां लापता, 11 वर्षीय लड़के के अपहरण का भी मामला दर्ज

    ठाणे | संवाददाता: ठाणे शहर में बच्चों के अचानक घर से लापता होने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जिससे अभिभावकों में चिंता और दहशत का माहौल है। महिला दिवस(Women,s Day) की पूर्व संध्या पर ठाणे के कोलशेत इलाके से दो नाबालिग लड़कियों के लापता होने की घटना सामने आई है। वहीं इससे पहले एक 11 वर्षीय लड़के के अपहरण का मामला भी दर्ज किया गया है।

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 7 मार्च 2026 को सुबह करीब 6:45 बजे कोलशेत रोड से एक 16 वर्षीय लड़की अपनी सहेली के साथ बिना किसी को बताए घर से निकल गई। देर तक घर वापस न लौटने पर परिजनों ने आसपास काफी तलाश की, लेकिन दोनों का कोई पता नहीं चल सका।

    परिवार की शिकायत के बाद कपूरबावड़ी पुलिस स्टेशन में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि दोनों लड़कियों को किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाने की आशंका है। इस मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मंजुषा भोंगले के मार्गदर्शन में की जा रही है।

    11 वर्षीय लड़के के अपहरण का मामला भी दर्ज

    इस घटना से पहले 6 मार्च को ठाणे के श्रीनगर थाना क्षेत्र से एक 11 वर्षीय लड़का लापता हो गया था। बताया जा रहा है कि वह अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने के लिए घर से बाहर गया था, लेकिन इसके बाद वह वापस नहीं लौटा।

    काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने श्रीनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने वेंकट नामक एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया है।

    फिलहाल पुलिस दोनों मामलों की गंभीरता से जांच कर रही है और लापता बच्चों की तलाश जारी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से ठाणे में अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।

  • Mahavitaran: पाटण में मिट्टी उत्खनन का बड़ा खेल! हवा में लटके सैकड़ों बिजली खंभे, बड़े हादसे का खतरा

    Mahavitaran: पाटण में मिट्टी उत्खनन का बड़ा खेल! हवा में लटके सैकड़ों बिजली खंभे, बड़े हादसे का खतरा

    असुरक्षित बिजली खंभों से बड़ा हादसा होने की आशंका, क्या महावितरण(Mahavitaran) को खबर भी है?

    सातारा: महाराष्ट्र के सातारा जिले के पाटण तालुका में नदी किनारे चल रहे बड़े पैमाने पर मिट्टी उत्खनन ने एक गंभीर खतरा खड़ा कर दिया है। उत्खनन के कारण खेती और घरों को बिजली देने वाले सैकड़ों बिजली के खंभे बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गए हैं। कई जगह खंभों के चारों ओर की मिट्टी पूरी तरह हटा दी गई है, जिससे वे जमीन में मजबूती से टिके रहने के बजाय हवा में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर बरसात में बाढ़ या तेज बारिश हुई तो ये खंभे कभी भी गिर सकते हैं। ऐसे में न केवल बिजली आपूर्ति ठप हो सकती है, बल्कि करंट फैलने से लोगों और पशुओं की जान पर भी खतरा मंडरा सकता है।

    नदी किनारे बड़े पैमाने पर उत्खनन

    जानकारी के मुताबिक पाटण तालुका के नदी किनारे कई इलाकों में भारी मात्रा में मिट्टी निकाली जा रही है। उत्खनन के दौरान कई जगह शेतीपंप और घरों को बिजली देने वाले खंभों के आसपास की मिट्टी पूरी तरह हटा दी गई है।

    परिणाम यह हुआ कि कई बिजली के खंभे अब हवा में खड़े दिखाई दे रहे हैं और किसी भी समय गिर सकते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार ऐसे सैकड़ों खंभे क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या महावितरण को इस बारे में जानकारी है? और अगर है तो अब तक क्या कार्रवाई की गई है, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है।

    प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल

    मिट्टी उत्खनन के लिए आमतौर पर राजस्व विभाग, वन विभाग, सिंचन विभाग और सार्वजनिक निर्माण विभाग सहित कई विभागों से अनुमति और ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ लेना जरूरी होता है।

    लेकिन इस मामले में यह सवाल उठ रहा है कि क्या महावितरण से अनुमति ली गई थी या उन्हें इसकी जानकारी दी गई थी? अगर नहीं, तो यह प्रशासन की बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।

    बाढ़ के समय बढ़ सकता है खतरा

    इस इलाके के कई बिजली खंभे कोयना नदी की बाढ़ रेखा के नीचे आते हैं। ऐसे में बारिश के मौसम में अगर नदी में बाढ़ आती है या तेज बारिश होती है, तो इन खंभों के गिरने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाएगा।

    अगर खंभे गिरते हैं तो बिजली की तारें टूटकर जमीन या पानी में गिर सकती हैं, जिससे आसपास के लोगों, किसानों और पशुओं के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। खासकर अगर करंट पानी में फैल गया तो बड़ी जनहानि से इंकार नहीं किया जा सकता।

    शॉर्ट सर्किट और आग का भी खतरा

    विशेषज्ञों के मुताबिक अगर खंभे कमजोर हो जाएं तो तेज हवा या तूफान में गिर सकते हैं। इससे बिजली की तारें आपस में टकराकर शॉर्ट सर्किट और आग लगने जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं।

    ऐसी स्थिति में पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति ठप हो सकती है, जिससे किसानों, गांव वालों और स्थानीय व्यवसायों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    खंभों को फिर से लगाने का खर्च कौन उठाएगा?

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन खतरनाक हो चुके खंभों को दोबारा सुरक्षित तरीके से लगाने की जिम्मेदारी किसकी होगी। आम तौर पर एक बिजली खंभे को लगाने में 25 से 30 हजार रुपये तक खर्च आता है।

    ऐसे में अगर सैकड़ों खंभों को दोबारा लगाना पड़ा तो इसके लिए काफी बड़ा बजट लगेगा। यह खर्च महावितरण उठाएगा या उत्खनन करने वालों से वसूला जाएगा, इस पर अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।

    पर्यटन और नदी के प्रवाह पर भी असर

    कोयना नदी के किनारे कृषि पर्यटन और जल पर्यटन विकसित करने की योजनाएं भी चल रही हैं। कई लोगों ने नदी किनारे पर्यटन प्रोजेक्ट, होटल और अन्य व्यवसाय शुरू करने की तैयारी की है।

    लेकिन नदी से बड़े पैमाने पर मिट्टी निकालने से नदी का प्रवाह बदल सकता है, जिससे नावों और जल पर्यटन गतिविधियों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।

    इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत जांच कर उत्खनन पर नियंत्रण लगाया जाए और बिजली के खंभों को सुरक्षित किया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।


    भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 क्या कहता है?

    भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की गतिविधि से बिजली के खंभे, तार या अन्य विद्युत उपकरणों को नुकसान पहुंचता है, तो बिजली वितरण कंपनी उस व्यक्ति के खिलाफ कानूनी और आर्थिक कार्रवाई कर सकती है।

    ऐसे मामलों में क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत या पुनर्स्थापना का पूरा खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जा सकता है।

    अगर मामला गंभीर पाया जाता है तो दोषी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है। इस कानून के तहत सार्वजनिक बिजली संपत्ति को नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है, जिसमें जुर्माना, नुकसान की भरपाई और कुछ मामलों में जेल की सजा का भी प्रावधान है।

  • Unmesh Patil joins Shiv Sena:संपत्ति से ज्यादा लोगों का प्यार हमारे लिए मायने रखता है: एकनाथ शिंदे ने उबाठा पर कसा तंज

    खानदेश में उबाठा को लगा बड़ा झटका, सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने थामा शिवसेना का भगवा

    मुंबई: शिवसेना आम लोगों के साथ खड़े रहने वाली, अन्याय के खिलाफ लड़ने वाली और भगवा विचारों को आगे बढ़ाने वाली पार्टी है। इसलिए हर दिन बड़ी संख्या में लोग शिवसेना में शामिल हो रहे हैं। संपत्ति कितनी कमाई यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आपने कितने लोगों का दिल जीता और लोगों का कितना प्यार हासिल किया, यही सबसे ज्यादा मायने रखता है। यह बात शिवसेना के मुख्य नेता और राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उबाठा पर तंज कसते हुए कही। उद्धव ठाकरे गुट के नेता और पूर्व सांसद उन्मेष पाटील ने आज सैकड़ों समर्थकों के साथ उपमुख्यमंत्री शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना में प्रवेश किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री शिंदे कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस प्रवेश कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव, मंत्री गुलाबराव पाटील, सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे, सांसद मिलिंद देवरा, विधायक किशोर पाटील के साथ कई अन्य प्रमुख पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

    उन्मेष पाटील(Unmesh Patil joins Shiv Sena) के साथ आज कई प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी शिवसेना में प्रवेश किया। इनमें पंचायत समिति के पूर्व सभापति दिनेश बोरसे पूर्व अध्यक्ष, बीजेपी युवा मोर्चा , पंचायत समिति के उपसभापति भाऊसाहेब पाटील, बीजेपी के पूर्व सभापति लीलाभाई पाटील, राष्ट्रवादी कांग्रेस के रवि चौधरी, बीजेपी के पूर्व नगरसेवक चंदू तायडे, पूर्व नगरसेवक चिरागउद्दीन शेख, पूर्व नगरसेवक गणेश महाले, दिपक देशमुख, सुबोध वाघमारे, गवली समाज के प्रमुख विजू गवली, ओबीसी समाज के संजय चौधरी, बाळासाहेब पाटील, अनिल चव्हाण, रोहित खैरनार, मंगेश साबळे, सोमनाथ पाटील, चंद्रकांत पाटील, रमेश पाटील, योगेश मोरे, राजेंद्र सोनावणे, महादेव गायकवाड, विलास गवली, सुनीता पवार, रत्ना पाटील सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने आज शिवसेना का भगवा थाम लिया।

    उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि आज तिथि के अनुसार छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती है। महाराज कहा करते थे कि प्रजा की सब्जी के डंठल को भी हाथ नहीं लगाना चाहिए। आज राज्य सरकार ने राज्य के किसानों का दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने का फैसला लिया है। जब हम मुख्यमंत्री थे, तब राज्य में लाड़ली बहन योजना शुरू की गई थी। विधानसभा चुनाव में इन लाड़ली बहनों ने विपक्ष को करारा जवाब दिया। चुनाव के समय कर्ज माफी का जो वादा किया गया था, उसे आज महायुति सरकार ने पूरा कर दिखाया है। शिवसेना वह पार्टी है जो जो कहती है, वह करके भी दिखाती है। पिछले ढाई साल में किए गए कामों की वजह से इतिहास में पहली बार महायुति के २३२ विधायक चुनकर आए हैं।

    उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह पार्टी बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे के विचारों पर आगे बढ़ रही है। इसी वजह से सोलापुर के एक गरीब परिवार की लाड़ली बहन को पार्टी ने राज्यसभा की उम्मीदवारी दी है। शिवसेना कार्यकर्ताओं की पार्टी है और कार्यकर्ताओं का सम्मान बढ़ाने वाली पार्टी है। यहां कोई मालिक या नौकर नहीं है, हम सभी साथी हैं। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के समय महाराष्ट्र के लोगों को सुरक्षित वापस लाया गया था। इसी तरह ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण दुबई में फंसे सैकड़ों भारतीयों को भी दो विशेष विमानों के जरिए सुरक्षित भारत लाया गया।

    उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बताया कि आज नारपार योजना के लिए ७००० करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। चालीसगांव में किसानों को सबसे ज्यादा पशु शेड उपलब्ध कराने, सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने और किसानों के मुद्दों को उठाने का काम उन्मेष पाटील कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने गिरणा परिक्रमा भी की है। उन्होंने उन्मेष पाटील और उनके कार्यकर्ताओं से अपील की कि खानदेश में शिवसेना को घर-घर तक पहुंचाएं।

    इस मौके पर पूर्व सांसद उन्मेष पाटील ने कहा कि जब उपमुख्यमंत्री शिंदे दरे गांव में खेतों में काम करते नजर आते हैं, तो राज्य के किसानों को विश्वास होता है कि एक ऐसा नेता है जो खेती और मिट्टी से जुड़ा है और किसानों के दुख-दर्द को समझता है। उन्होंने कहा कि वे सरदार बनने के लिए नहीं, बल्कि एक सैनिक के रूप में काम करने के लिए शिवसेना में आए हैं।

  • Maharashtra Budget 2026-27: किसानों को कर्जमाफी, महिलाओं को आर्थिक संबल और उद्योगों को रफ्तार देने की कोशिश

    Maharashtra Budget 2026-27: किसानों को कर्जमाफी, महिलाओं को आर्थिक संबल और उद्योगों को रफ्तार देने की कोशिश

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री Devendra Fadnavis द्वारा पेश किया गया बजट 2026-27 (Maharashtra Budget 2026-27) राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। लगभग 51 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था (GSDP) के लक्ष्य के साथ सरकार ने इसे “विकसित महाराष्ट्र 2047” की आधारशिला बताया है। इस बजट में एक ओर किसानों, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए राहत भरी घोषणाएं की गई हैं, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी बड़ा जोर दिया गया है।

    मुंबई। सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए 30 सितंबर 2025 तक के बकाया कृषि ऋणों में से 2 लाख रुपये तक की कर्जमाफी की घोषणा की है। इस फैसले से राज्य के लाखों छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही समय पर अपनी कर्ज की किस्तें चुकाने वाले किसानों को 50 हजार रुपये का नकद प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया है, जिसे ईमानदार किसानों को प्रोत्साहित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    महिलाओं के लिए भी बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। राज्य सरकार की ‘लाडकी बहिन योजना’ को जारी रखते हुए 25 लाख नई “लखपति दीदी” तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मदद मिलेगी। वहीं दिव्यांग नागरिकों के मानधन में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए इसे 2,500 रुपये कर दिया गया है, जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा का बेहतर सहारा मिलने की उम्मीद है।

    औद्योगिक और शहरी विकास के क्षेत्र में भी सरकार ने बड़े विजन का संकेत दिया है। मुंबई के वडाला इलाके में 130 एकड़ में विशाल स्टार्टअप हब बनाने की योजना घोषित की गई है। इसके साथ ही राज्य में लगभग 50 लाख नए रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में कोस्टल रोड, मेट्रो नेटवर्क और भूमिगत सुरंगों के लिए बड़े पैमाने पर बजट आवंटित किया गया है, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए नई ऊर्जा माना जा रहा है। सरकार ने महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को 566 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके जरिए वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने और राज्य में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।

    हालांकि बजट को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए प्रत्यक्ष कर या महंगाई से राहत की कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है। मुंबई जैसे महंगे शहर में रहने वाले आम करदाताओं को भविष्य में टोल और बुनियादी ढांचे के निर्माण से होने वाली असुविधाओं की आशंका भी जताई जा रही है। विपक्ष ने राज्य के लगभग 9.32 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का हवाला देते हुए इतनी बड़ी योजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि कर्जमाफी और नकद लाभ योजनाओं का बोझ राज्य के खजाने पर दबाव बढ़ा सकता है।

    कुल मिलाकर यह बजट एक तरफ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कर्जमाफी और किसान हितैषी योजनाओं के जरिए मजबूती देने की कोशिश करता है, तो दूसरी ओर शहरी विकास, स्टार्टअप और इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से महाराष्ट्र को वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाने का रोडमैप भी प्रस्तुत करता है। अब इस बजट की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषित योजनाएं कितनी पारदर्शिता और तेजी से जमीन पर उतरती हैं।

  • Navimumbai: ऐरोली में महावितरण की कार्रवाई पर विवाद: बकाया के नाम पर मीटर हटाने से नागरिकों में आक्रोश

    Navimumbai: ऐरोली में महावितरण की कार्रवाई पर विवाद: बकाया के नाम पर मीटर हटाने से नागरिकों में आक्रोश

    नवी मुंबई: ऐरोली सेक्टर-15 में महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (महावितरण) की बकाया बिल वसूली के नाम पर मीटर हटाने की कार्रवाई ने स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि महावितरण के ठेकेदार और कुछ कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के घरों और दुकानों के बाहर लगे बिजली मीटर निकालकर ले जा रहे हैं।

    स्थानीय रहिवाशों का कहना है कि मीटर हटाने की यह कार्रवाई नियमों के विपरीत हो रही है। कई लोगों ने बताया कि मीटर हटाते समय कर्मचारियों द्वारा कोई नोटिस या सूचना नहीं दी जाती, और जब इसके कारण पूछे जाते हैं तो केवल बकाया बिल की वजह बताई जाती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से पहले नोटिस देना और समय देना आवश्यक है, लेकिन महावितरण की टीम सीधे मीटर निकाल लेती है।

    सामाजिक कार्यकर्ता विठ्ठल बबन बांगर ने भी इस मामले में महावितरण प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कई उपभोक्ता मौके पर ही बकाया बिल भरने के लिए तैयार हो जाते हैं, लेकिन मीटर वापस लगाने में देरी की जाती है। इससे लोगों को महावितरण कार्यालय के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं और अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

    नागरिकों ने बिल वितरण व्यवस्था में भी गड़बड़ी की शिकायत की है। कई सोसायटियों में घर-घर बिल नहीं पहुंचाया जाता, बल्कि बंडल किसी कोने में छोड़ दिया जाता है। इससे समय पर बिल न मिलने के कारण बाद में बकाया के नाम पर कार्रवाई होती है और उपभोक्ताओं पर दबाव बनता है।

    विठ्ठल बांगर ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में जल्द ही जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो नागरिक आंदोलन की राह अपनाने पर मजबूर होंगे। नागरिक अब इस मामले की शिकायत राज्य के ऊर्जा विभाग, महावितरण के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से करने की तैयारी में हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना सूचना किसी के परिसर से मीटर हटाना उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। अब यह देखना होगा कि महावितरण प्रशासन इस विवाद पर क्या स्पष्टीकरण देता है और भविष्य में ऐसी कार्रवाई रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।

  • Navimumbai: कोपरखैरने विद्या भवन में छत गिरने से हड़कंप, 15 लोग फंसे होने की आशंका, रेस्क्यू जारी

    Navimumbai: कोपरखैरने विद्या भवन में छत गिरने से हड़कंप, 15 लोग फंसे होने की आशंका, रेस्क्यू जारी

    नवी मुंबई(Navimumbai): कोपरखैरने सेक्टर-2 स्थित विद्या भवन में गुरुवार को एक बड़ा हादसा हुआ। यहां क्लास चलने के दौरान अचानक छत का स्लैब गिर गया, जिससे छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मलबे के नीचे लगभग 15 लोग फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

    घटना की सूचना मिलते ही नवी मुंबई पुलिस, फायर ब्रिगेड और महानगरपालिका आपदा प्रबंधन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। राहत एवं बचाव कार्य के लिए एम्बुलेंस, दमकल की गाड़ियां और मलबा हटाने वाली मशीनें तैनात की गई हैं। कुछ छात्र-छात्राएं और कर्मचारी सुरक्षित बाहर निकलने में सफल हुए, जबकि कई लोग अभी भी मलबे में फंसे हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने से पहले इमारत के कमजोर हिस्सों की जांच की जा रही है, ताकि बचाव कार्य के दौरान कोई और दुर्घटना न हो। इसके बाद मलबा हटाकर फंसे लोगों तक पहुंचने का काम तेजी से जारी है।

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह इमारत काफी पुरानी है और लंबे समय से इसकी मरम्मत की जरूरत थी। कई बार संबंधित विभागों को इसकी जर्जर हालत की जानकारी दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

    पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है और आसपास की भीड़ को नियंत्रित किया जा रहा है। मेडिकल टीम भी मौके पर मौजूद है और जरूरत पड़ने पर घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा जाएगा। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता मलबे में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। रेस्क्यू के बाद पूरी घटना की जांच की जाएगी ताकि यह पता चल सके कि स्लैब गिरने का कारण क्या था और कहीं निर्माण या रखरखाव में लापरवाही तो नहीं हुई।

  • Rajyasabha: सोलापुर की गलियों से राज्यसभा तक: मजदूर परिवार की बेटी डॉ. ज्योति वाघमारे को शिवसेना ने बनाया उम्मीदवार

    Rajyasabha: सोलापुर की गलियों से राज्यसभा तक: मजदूर परिवार की बेटी डॉ. ज्योति वाघमारे को शिवसेना ने बनाया उम्मीदवार

    मुंबई: शिवसेना ने सामान्य और दलित परिवार से आने वाली डॉ. ज्योति वाघमारे को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। डॉ. वाघमारे ने आज उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के मुख्य नेता एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया। इस अवसर पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, सांसद और मंत्री उपस्थित थे, जिनमें डॉ. श्रीकांत शिंदे, मंत्री दादाजी भुसे, मंत्री संजय शिरसाट, विधायक डॉ. मनीषा कायंदे, गजानन कीर्तिकर और आनंदराव अडसूळ शामिल थे।

    डॉ. ज्योति वाघमारे ने नामांकन भरते समय भावुकता व्यक्त की और कहा कि उन्हें अब तक विश्वास नहीं हो रहा है कि एक सामान्य और गरीब परिवार की लड़की को राज्यसभा की उम्मीदवारी मिली है। उनके पिता दलित पैंथर आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता थे और परिवार की आजीविका के लिए मेहनत-मजदूरी करते थे। डॉ. वाघमारे ने कहा, “यह सिर्फ मेरी व्यक्तिगत उम्मीदवारी नहीं है, बल्कि पिछड़े समाज और राज्य की ढाई करोड़ बहनों की उम्मीदवारी है। यह बाबा साहेब आंबेडकर के संविधान निर्माण के सपनों का प्रतीक भी है।”

    उन्होंने शिवसेना के मुख्य नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने हमेशा “लाड़ली बहनों” के पीछे मजबूती से खड़े होने का उदाहरण दिया। डॉ. वाघमारे ने बताया कि जब वह स्कूल में पढ़ती थी, तब उनके पैरों में चप्पल भी नहीं होती थी। सोलापुर की गलियों से राज्यसभा तक का यह सफर उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।

    शिवसेना में सामान्य कार्यकर्ताओं को ताकत देने का संदेश

    एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवसेना हमेशा साधारण और गरीब परिवारों की बेटियों को आगे लाती रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री रहते हुए लागू की गई लाडली बहन योजना ने कई परिवारों को आर्थिक सहारा दिया। डॉ. ज्योति वाघमारे को राज्यसभा भेजना इसी नीति का हिस्सा है, जिससे दबे-कुचले वर्ग की आवाज संसद में सुनाई दे सके।

    डॉ. ज्योति वाघमारे: शिक्षा और अनुभव

    • अंग्रेज़ी साहित्य में पीएचडी धारक
    • दसवीं परीक्षा में ८४% अंक
    • बारहवीं परीक्षा में पुणे मंडल में पिछड़ा वर्ग श्रेणी में प्रथम स्थान
    • अर्धमागधी विषय में राज्य स्तर पर प्रथम स्थान
    • महिलाओं के मुद्दों पर किए गए शोध को राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार
    • 10 वर्षों से अधिक समय तक प्राध्यापिका के रूप में कार्य

    भाषाई क्षमता

    • मराठी, हिंदी, अंग्रेज़ी, तेलुगु और कन्नड़ — पाँच भाषाओं पर गहरी पकड़

    सामाजिक और राजनीतिक योगदान

    डॉ. ज्योति वाघमारे सोलापुर की आंबेडकरी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा चुकी हैं। उनके पिता दलित पैंथर आंदोलन के कार्यकर्ता थे। उन्होंने मानवाधिकार अभियान, विद्रोही सांस्कृतिक आंदोलन और आंबेडकरी आंदोलन से सामाजिक कार्य की शुरुआत की। शुरुआती दौर में कुछ समय के लिए न्यूज़ एंकर भी रही।

    उच्च शिक्षा का उपयोग करते हुए महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, छत्रपति शिवाजी महाराज और महात्मा बसवेश्वर के जीवन पर व्याख्यान दिए। उन्होंने वालचंद महाविद्यालय में प्राध्यापिका के रूप में भी कार्य किया।

    राजनीतिक पहचान

    • शिवसेना में अप्रैल 2023 में प्रवेश, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व को स्वीकार किया
    • राज्य प्रवक्ता और धाराशिव जिला संपर्क प्रमुख की जिम्मेदारी
    • विभिन्न मंचों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा
    • विपक्षियों को तीखे और स्पष्ट जवाब देने वाली प्रभावशाली प्रवक्ता
    • राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर दबे-कुचले वर्ग और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने की तैयारी

    डॉ. ज्योति वाघमारे का राज्यसभा सदस्य बनना न केवल सोलापुर और पश्चिम महाराष्ट्र के लिए बल्कि पूरे राज्य में शिवसेना की सामाजिक और राजनीतिक पहुंच को भी मजबूत करेगा।

  • Women Security: विधानभवन में महिला सुरक्षा पर उच्चस्तरीय बैठक, पैनिक बटन को व्हॉट्सऐप से जोड़ने के निर्देश

    Women Security: विधानभवन में महिला सुरक्षा पर उच्चस्तरीय बैठक, पैनिक बटन को व्हॉट्सऐप से जोड़ने के निर्देश

    मुंबई। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में महिलाओं की सुरक्षा(Women Security) को लेकर विधानभवन में उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। राज्यव्यापी सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट की समीक्षा के लिए बुलाई गई इस बैठक में प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि रिपोर्ट में सुझाए गए सभी उपाय निश्चित समयसीमा में लागू किए जाएं।

    बदलापुर में नाबालिग बालिका से दुष्कर्म की घटना और स्वारगेट बस स्टेशन प्रकरण की पृष्ठभूमि में यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से राज्य के 242 स्थानों पर किए गए सेफ्टी ऑडिट में बस स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े स्थलों का निरीक्षण कर सीसीटीवी, प्रकाश व्यवस्था, महिला पुलिस गश्त, हेल्पलाइन, पैनिक बटन, शौचालय, शिकायत प्रणाली और ‘हिरकणी कक्ष’ जैसी सुविधाओं की स्थिति की जांच की गई।

    रिपोर्ट में सामने आया कि कई स्थानों पर सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। विशेष रूप से पैनिक बटन प्रणाली के निष्क्रिय पाए जाने पर डॉ. गोऱ्हे ने इसे नियंत्रण कक्ष और व्हॉट्सऐप नंबर से सीधे जोड़ने के निर्देश दिए, ताकि आपात स्थिति में महिलाओं को तुरंत सहायता मिल सके।

    बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि स्कूल बसों को स्कूल परिसर के भीतर ही खड़ा किया जाए और बस चालकों व कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। बस स्टेशनों पर सीसीटीवी संबंधी स्पष्ट सूचना पट्ट लगाए जाएं तथा पैनिक बटन के उपयोग को लेकर जनजागरूकता बढ़ाई जाए।

    डॉ. गोऱ्हे ने यह भी कहा कि पीड़ित बालिकाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं, इसकी समीक्षा की जाए और आवश्यकता पड़ने पर परामर्श (काउंसलिंग) सुविधा उपलब्ध कराई जाए। असंगठित क्षेत्र की महिला कामगारों की सुरक्षा के लिए अलग योजना तैयार करने और उनके पंजीकरण हेतु विशेष ऐप विकसित करने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया।

    परिवहन विभाग ने जानकारी दी कि 633 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं और प्रत्येक बस स्टेशन पर सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति की गई है। स्कूल बसों में महिला सहायकों की नियुक्ति अनिवार्य की गई है तथा जल्द ही सभी बसों में सीसीटीवी, जीपीएस और पैनिक बटन प्रणाली अनिवार्य कर उसे पुलिस विभाग से जोड़ा जाएगा।

    पुलिस विभाग ने बताया कि स्कूल छुट्टी के समय गश्त बढ़ा दी गई है और प्रत्येक पुलिस चौकी में ‘भरोसा सेल’ सक्रिय है। साथ ही वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर की नियमित समीक्षा कर वास्तविक लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए।

    बैठक में अपर पुलिस महानिदेशक अश्वती दोर्जे, परिवहन आयुक्त राजेश नार्वेकर, उपसचिव (स्कूली शिक्षा) तुषार महाजन, कामगार कल्याण आयुक्त भास्कर मोराडे, उपायुक्त (महिला एवं बाल कल्याण) राहुल मोरे, एसटी महामंडल के सुरक्षा एवं सतर्कता अधिकारी श्री तिकोटकर, शारदा साठे तथा स्त्री मुक्ती परिषद सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    बैठक के अंत में प्रत्येक बस स्टेशन पर महिला कर्मचारियों की नियुक्ति कर अलग सहायता केंद्र शुरू करने, रेलवे और एसटी के लिए पृथक सतर्कता समितियां गठित करने तथा शौचालय और ‘हिरकणी कक्ष’ की नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उपसभापति कार्यालय के माध्यम से स्वतंत्र महिला सुरक्षा समिति गठित कर सेफ्टी ऑडिट की सभी सिफारिशों को चरणबद्ध और कड़ाई से लागू किया जाएगा, ऐसा आश्वासन डॉ. गोऱ्हे ने दिया।

  • NMMC: नवी मुंबई मनपा में परिवहन समिति(Transport Committee) चुनाव पर हंगामा, आधे घंटे के लिए महासभा स्थगित

    NMMC: नवी मुंबई मनपा में परिवहन समिति(Transport Committee) चुनाव पर हंगामा, आधे घंटे के लिए महासभा स्थगित

    रेणू पांडे | नवी मुंबई

    नवी मुंबई महानगरपालिका की महासभा में परिवहन समिति सदस्य के चुनाव को लेकर जोरदार हंगामा हुआ, जिसके चलते सभा की कार्यवाही करीब आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    जानकारी के अनुसार, परिवहन समिति (Transport Committee) के सदस्य का चुनाव मतदान प्रक्रिया से कराने के निर्णय का शिवसेना के नगरसेवकों ने कड़ा विरोध किया। जैसे ही मतदान से चुनाव कराने की घोषणा की गई, विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ सदस्यों ने महापौर का घेराव करते हुए राजदंड उठाने के मुद्दे पर भी आपत्ति जताई, जिससे सभागार में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    स्थिति तनावपूर्ण होते देख सत्ताधारी दल की महिला नगरसेविकाएं महापौर की सुरक्षा के लिए उनके आसपास खड़ी हो गईं। अधिकारियों और वरिष्ठ सदस्यों ने हस्तक्षेप कर माहौल शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन बढ़ते हंगामे के चलते अंततः सभा को लगभग आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया गया।

    गौरतलब है कि परिवहन समिति सदस्य के चुनाव को लेकर पहले से ही राजनीतिक खींचतान चल रही थी, जिसके कारण महासभा में यह विवाद और अधिक उग्र रूप ले बैठा।