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The real test is not whether you avoid this failure, because you won’t. It’s whether you let it harden or shame you into inaction, or whether you learn from it; whether you choose to persevere.

  • Modi Government 12 Years: मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर उद्योग जगत ने सराहा आर्थिक सुधारों और विकास की रफ्तार को!

    Modi Government 12 Years: मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर उद्योग जगत ने सराहा आर्थिक सुधारों और विकास की रफ्तार को!

    Modi Government 12 Years: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर देश के प्रमुख उद्योग संगठनों ने आर्थिक सुधारों, बुनियादी ढांचे के विस्तार और निवेश माहौल को मजबूत बनाने के लिए सरकार की सराहना की है। उद्योग जगत का मानना है कि पिछले एक दशक में किए गए सुधारों ने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाया है।

    भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने कहा कि बीते वर्षों में लागू की गई नीतियों और सुधारों ने देश की आर्थिक बुनियाद को सुदृढ़ किया है। उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचा, डिजिटल तकनीक, विनिर्माण, नवाचार और कारोबार सुगमता जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है, जिससे भारत वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा है।

    भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (FICCI) के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा कि सुधारवादी नीतियों, बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और वैश्विक व्यापारिक साझेदारियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। उनके अनुसार, भारत आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है और वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।

    उद्योग संगठन एसोचैम (ASSOCHAM) ने भी सरकार की आर्थिक नीतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश की विकास दर, विनिर्माण गतिविधियों और सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। संगठन का मानना है कि आर्थिक स्थिरता, निवेश वृद्धि और निर्यात विस्तार ने भारत की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है।

    एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि हाल के वर्षों में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। साथ ही निर्यात में बढ़ोतरी और चालू खाते के घाटे में कमी से अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिलता है। उद्योग संगठनों ने विश्वास जताया कि सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में देश और तेज़ी से आगे बढ़ेगा।

  • Boosting Microfinance Sector: क्रेडिट गारंटी योजना-2.0 की अवधि बढ़ी, बड़े कर्ज भी होंगे शामिल!

    Boosting Microfinance Sector: क्रेडिट गारंटी योजना-2.0 की अवधि बढ़ी, बड़े कर्ज भी होंगे शामिल!

    Boosting Microfinance Sector: केंद्र सरकार ने माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र को मजबूती देने के लिए क्रेडिट गारंटी योजना-2.0 (CGSMFI 2.0) की अवधि बढ़ाने और इसके दायरे का विस्तार करने का फैसला किया है। अब यह योजना 31 अगस्त 2026 तक लागू रहेगी, जिससे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (MFI) को अधिक राहत मिलने की उम्मीद है।

    वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं को दिए जाने वाले ऋण पर सरकार गारंटी प्रदान करती है। योजना के लिए कुल 20,000 करोड़ रुपये के ऋण पर गारंटी का प्रावधान किया गया है। हालांकि यदि निर्धारित गारंटी सीमा समय से पहले पूरी हो जाती है, तो योजना उसी समय समाप्त मानी जाएगी।

    सरकार ने योजना में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए बड़े एनबीएफसी-एमएफआई के लिए ऋण सीमा 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये कर दी है। यह सुविधा संबंधित संस्थान की प्रबंधनाधीन कुल परिसंपत्तियों (AUM) के 20 प्रतिशत तक लागू होगी।

    सरकार का मानना है कि योजना की अवधि बढ़ाने और बड़े वित्तीय संस्थानों को शामिल करने से माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में ऋण प्रवाह बढ़ेगा तथा छोटे उधारकर्ताओं तक वित्तीय सहायता अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगी।

    मार्च 2026 में शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक लगभग 770 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। योजना के अनुसार, छोटे एनबीएफसी-एमएफआई के लिए डिफॉल्ट राशि का 80 प्रतिशत, मध्यम आकार की संस्थाओं के लिए 75 प्रतिशत और बड़े संस्थानों के लिए 70 प्रतिशत तक की गारंटी उपलब्ध कराई जाती है।

    योजना के तहत गारंटी शुल्क 0.50 प्रतिशत वार्षिक निर्धारित किया गया है। साथ ही माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के लिए ब्याज दरों पर भी नियंत्रण रखा गया है, ताकि अंतिम लाभ छोटे उधारकर्ताओं तक पहुंच सके।

  • Jitin Prasada: सेमीकंडक्टर और एआई मिशन भारत में नवाचार आधारित विकास को दे रहे नई गति

    Jitin Prasada: सेमीकंडक्टर और एआई मिशन भारत में नवाचार आधारित विकास को दे रहे नई गति

    Jitin Prasada: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री Jitin Prasada ने कहा है कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और इंडिया एआई मिशन जैसी पहलें देश में अनुसंधान, विनिर्माण और नवाचार आधारित आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने, कारोबार में सुगमता बढ़ाने और उन्नत तकनीकों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

    संबंधित खबर: Plastic Currency Notes: प्लास्टिक के नोटों पर विचार जारी, आरबीआई ने कहा- अभी शुरुआती चरण में है प्रस्ताव

    सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के 35वें स्थापना दिवस पर आयोजित ‘एसटीपीआई टेक समिट 2026: इंडियाज़ नेक्स्ट लीप’ को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि पिछले 35 वर्षों में एसटीपीआई ने भारत को वैश्विक डिजिटल शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर आधारित डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है तथा एसटीपीआई जैसे संस्थान स्टार्टअप्स और उभरती तकनीकों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

    कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन और एसटीपीआई के महानिदेशक अरविंद कुमार ने भी तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और आईटी निर्यात में एसटीपीआई की भूमिका पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर एसटीपीआई की 35 वर्ष की यात्रा पर आधारित स्मारक संकलन जारी किया गया, अग्रणी आईटी निर्यातकों को सम्मानित किया गया तथा नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए वाधवानी फाउंडेशन के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान भी किया गया।

  • WTO में भारत ने दिखाई हरित ऊर्जा और कार्बन ट्रेडिंग की ताकत, जलवायु लक्ष्यों में समय से पहले हासिल की बड़ी सफलता

    WTO में भारत ने दिखाई हरित ऊर्जा और कार्बन ट्रेडिंग की ताकत, जलवायु लक्ष्यों में समय से पहले हासिल की बड़ी सफलता

    WTO: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारत ने जिनेवा स्थित World Trade Organization मुख्यालय में आयोजित ‘ट्रेड एंड एनवायरमेंट वीक 2026’ के दौरान हरित ऊर्जा, कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अपनी प्रमुख उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार भारत ने इस अवसर पर कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मानकीकरण तथा जलवायु लक्ष्यों की दिशा में हुई प्रगति का विस्तृत विवरण साझा किया।

    संबंधित खबर: Andaman Gas Discovery: अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस का नया भंडार मिला, ऑयल इंडिया को बड़ी सफलता

    प्रस्तुति के दौरान भारत ने बताया कि देश जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्यों को तय समय से पहले हासिल कर रहा है। मार्च 2026 तक देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा का हिस्सा 53.21 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि 2030 तक इसे 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके अलावा 2005 से 2022 के बीच भारत की कार्बन उत्सर्जन गहनता में 37.38 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जो निर्धारित लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है।

    भारत ने इस दौरान अपने विकसित हो रहे कार्बन बाजार ढांचे और राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। सरकार का उद्देश्य बाजार आधारित तंत्र के माध्यम से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने वाली गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है। साथ ही, National Green Hydrogen Mission के तहत ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और उससे जुड़े मानकों की प्रगति को भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखा गया। भारत ने समानता, साझा लेकिन विभेदित दायित्व (CBDR-RC) और बहुपक्षीय सहयोग के सिद्धांतों को जलवायु कार्रवाई की आधारशिला बताते हुए सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

  • Plastic Currency Notes: प्लास्टिक के नोटों पर विचार जारी, आरबीआई ने कहा- अभी शुरुआती चरण में है प्रस्ताव

    Plastic Currency Notes: प्लास्टिक के नोटों पर विचार जारी, आरबीआई ने कहा- अभी शुरुआती चरण में है प्रस्ताव

    Plastic Currency Notes: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर Sanjay Malhotra ने कहा है कि देश में पॉलीमर यानी प्लास्टिक के करेंसी नोट शुरू करने के प्रस्ताव पर चर्चा जरूर हुई है, लेकिन यह अभी प्रारंभिक स्तर पर है। मौद्रिक नीति समिति की द्वैमासिक बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

    आरबीआई गवर्नर ने बताया कि पॉलीमर नोटों के फायदे और चुनौतियों का अध्ययन किया जा रहा है। इन नोटों की विशेषता यह है कि ये पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं और जल्दी खराब नहीं होते। साथ ही लंबे समय में इनके रखरखाव और प्रतिस्थापन की लागत भी कम हो सकती है। हालांकि, इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले सभी पहलुओं का गहन मूल्यांकन किया जाएगा।

    गौरतलब है कि पॉलीमर नोट विशेष प्रकार के प्लास्टिक से बनाए जाते हैं और इनमें कपास-आधारित कागज का उपयोग नहीं होता। दुनिया के कई देशों, जैसे Canada, United Kingdom और Singapore में ऐसे नोट पहले से प्रचलन में हैं। आरबीआई का कहना है कि भारत में भी इस विकल्प पर विचार किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में ही है।

  • Andaman Gas Discovery: अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस का नया भंडार मिला, ऑयल इंडिया को बड़ी सफलता

    Andaman Gas Discovery: अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस का नया भंडार मिला, ऑयल इंडिया को बड़ी सफलता

    Andaman Gas Discovery: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस अन्वेषण कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) को अंडमान द्वीप समूह के पास समुद्र में प्राकृतिक गैस का नया भंडार मिला है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने इस खोज को देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए अहम कदम बताया है।

    संबंधित खबर: Kiwi General Insurance: कीवी जनरल इंश्योरेंस ने भारतीय बाजार में प्रवेश किया; मोटर इंश्योरेंस होगा पहला प्रॉडक्ट!

    मंत्री ने बताया कि अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से करीब 15 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित ‘श्री विजयपुरम-3’ कुएं में प्राकृतिक गैस की उपस्थिति की पुष्टि हुई है। यह कुआं समुद्र में लगभग 355 मीटर गहराई वाले क्षेत्र में स्थित है। प्रारंभिक परीक्षणों के दौरान 1,900 मीटर से अधिक गहराई पर सतत गैस फ्लेयरिंग दर्ज की गई, जिससे प्राकृतिक गैस भंडार होने के संकेत मिले हैं। फिलहाल कंपनी गैस के नमूने एकत्र कर उसकी गुणवत्ता, संरचना और व्यावसायिक संभावनाओं का अध्ययन कर रही है।

    सरकार के ‘समुद्र मंथन मिशन’ के तहत अपतटीय क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज को बढ़ावा दिया जा रहा है। अंडमान बेसिन में चल रहे अन्वेषण अभियान के दौरान ऑयल इंडिया द्वारा खोदे गए तीन कुओं में से दो में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी मिल चुकी है। सरकार का मानना है कि यह खोज भविष्य में भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आयात पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • Kiwi General Insurance: कीवी जनरल इंश्योरेंस ने भारतीय बाजार में प्रवेश किया; मोटर इंश्योरेंस होगा पहला प्रॉडक्ट!

    Kiwi General Insurance: कीवी जनरल इंश्योरेंस ने भारतीय बाजार में प्रवेश किया; मोटर इंश्योरेंस होगा पहला प्रॉडक्ट!

    Kiwi General Insurance: डिजिटल युग की नई बीमा कंपनी, कीवी जनरल इंश्योरेंस ने भारत के बाजार में आधिकारिक रूप से प्रवेश करने की घोषणा की है। कंपनी का मुख्य मंत्र “योर पीस, अवर पॉलिसी” है, जिसका मकसद ग्राहकों के लिए इंश्योरेंस को आसान, तेज और भरोसेमंद बनाना है। कंपनी ने अपने काम की शुरुआत निजी कारों के मोटर बीमा से की है, जिसे सिर्फ प्रीमियम वसूलने के लिए नहीं, बल्कि दावों को आसानी से निपटाने के इर्द-गिर्द खास तौर पर तैयार किया गया है।

    इस कंपनी की स्थापना इंडस्ट्री के दिग्गजों नीलेश गर्ग और सौरव जायसवाल ने की है। कीवी को मार्च 2026 में नियामकीय मंजूरी मिली और इसे वेस्टब्रिज कैपिटल का पूरा सहयोग हासिल है, जो इसकी महत्वाकांक्षा को विश्वसनीयता और दीर्घकालिक विस्तार देता है। अपनी खुद की बनाई हुई इन-हाउस टेक्नोलॉजी स्टैक के दम पर, कीवी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि पुरानी और पेचीदा रुकावटों को खत्म करके ग्राहक-केंद्रित अंडरराइटिंग के आधार पर हाइपर-पर्सनलाइज्ड समाधान दिए जा सकें।

    मोटर इंश्योरेंस को कीवी ने जानबूझकर अपना पहला बड़ा प्रोडक्ट चुना है, क्योंकि इस क्षेत्र में ग्राहकों की तकलीफें साफ दिखती हैं और बड़े पैमाने पर फैली हुई हैं। लोग अक्सर इस डर से क्लेम करने से हिचकिचाते हैं कि कहीं उनके फायदे खत्म न हो जाएं, क्लेम मिलने की प्रक्रिया बहुत धीमी और अस्पष्ट होती है, और गाड़ी की दुरुस्ती करने के दौरान ग्राहकों को कोई सहयोग भी नहीं मिलता। कीवी का मोटर इंश्योरेंस सीधे तौर पर इन सभी समस्याओं को दूर करने और क्लेम से जुड़ी ग्राहकों की चिंता खत्म करने के लिए बनाया गया है।

    लॉन्च के बारे में, नीलेश गर्ग, फाउंडर, कीवी जनरल इंश्योरेंस ने एक व्यवस्थित बदलाव की जरूरत पर जोर देते हुए कहा , “इंश्योरेंस इंडस्ट्री बहुत समय से पुरानी प्रक्रियाओं की वजह से ग्राहकों में आशंका पैदा करती रही है। हमारा लक्ष्य है कि टेक्नोलॉजी, डेटा और अनुशासित निष्पादन का उपयोग करके इसे बुनियादी सिद्धांतों से दोबारा बनाएं। हम इंश्योरेंस को सरल, तेज और सुसंगत बनाना चाहते हैं।

    कीवी के साथ हम ऐसी संस्था बना रहे हैं जिस पर ग्राहक और पार्टनर पूरी तरह भरोसा कर सकें। हमारा दर्शन ‘योर पीस, अवर पॉलिसी’ इंश्योरेंस का एक ज्यादा भरोसेमंद अनुभव बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।” सौरव जायसवाल, एमडी और सीईओ, कीवी जनरल इंश्योरेंस ने कहा, “आज के ग्राहक स्पष्टता, स्पीड और विश्वसनीयता की उम्मीद करते हैं, खासकर उन पलों में जब यह सबसे ज्यादा मायने रखती है।

    संबंधित ख़बरें: Kia India: किआ इंडिया ने विश्व पर्यावरण दिवस मनाया; देशभर के वर्कशॉप और ऑफिसों में सस्टेनेबिलिटी अभियान चलाया!

    कीवी में हम हर बातचीत को सरल, तेज और पूर्वानुमानित बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इंस्टैंट पॉलिसी जारी करने से लेकर रीयल-टाइम क्लेम ट्रैकिंग, तेज निर्णय और सिंगल-पॉइंट ओनरशिप तक, हर तत्व अस्पष्टता कम करने के लिए डिजाइन किया गया है। मोटर इंश्योरेंस से शुरू करके हम इंश्योरेंस डिलीवरी के नए मानक स्थापित करना चाहते हैं। हमारे लिए ‘योर पीस, अवर पॉलिसी’ सिर्फ हमारा दर्शन नहीं — यह हर प्रोडक्ट और हर बातचीत के पीछे की प्रतिबद्धता है।”

    यह प्रोडक्ट उद्योग में पहली बार ऐसे इनोवेटिव फीचर्स पेश कर रहा है जो उपभोक्ताओं की वास्तविक समस्याओं को दूर करते हैं। इसके तहत मिलने वाला ‘सुपर एनसीबी’ क्लेम के बाद भी नो-क्लेम बोनस को सीधे जीरो नहीं होने देता, बल्कि डिस्काउंट स्केल पर केवल एक पायदान नीचे लाता है, जिससे ग्राहक स्टैंडर्ड स्ट्रक्चर की तुलना में 40% तक अधिक डिस्काउंट पा सकते हैं।

    वहीं, ‘फ्लेक्सी रिपेयर’ ग्राहकों को छोटे-मोटे नुकसानों को बचाकर रखने और बाद में किसी बड़े क्लेम के साथ जोड़ने की सुविधा देता है, ताकि उन्हें बार-बार अनिवार्य कटौती (Deductibles) न चुकानी पड़े। तुरंत कैश सपोर्ट के लिए इसमें ‘इंस्टाकैश’ दिया गया है, जो गाड़ी रिपेयर के दिन ही पैसे सीधे ग्राहक के खाते में ट्रांसफर कर देता है। इसके अलावा, कंपनी ‘पेफर्स्ट’ भी लॉन्च कर रही है, जिसके जरिए ग्राहक नेटवर्क से बाहर के अपने किसी भी पसंदीदा गैराज में कार ले जा सकते हैं और तुरंत भुगतान पा सकते हैं।

    कीवी का यह चिंता-मुक्त वादा उसके डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क पर भी लागू होता है, जहाँ डिजिटल ऑनबोर्डिंग और शेयर्ड क्लेम ट्रैकर जैसी सुविधाओं से एजेंट पूरी तरह क्लाइंट सर्विस पर फोकस कर पाते हैं। जटिलता और देरी के इस दौर में कीवी का ऑपरेटिंग मॉडल अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी को हाइब्रिड डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल (ह्यूमन टच) के साथ जोड़ता है। इंस्टैंट पॉलिसी जारी करने से लेकर रीयल-टाइम क्लेम ट्रैकिंग और परेशानी-मुक्त एंडोर्समेंट्स तक, इसका हर तत्व पूरे लाइफसाइकल में पारदर्शिता, स्पीड और सहानुभूति सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है।

  • Kia India: किआ इंडिया ने विश्व पर्यावरण दिवस मनाया; देशभर के वर्कशॉप और ऑफिसों में सस्टेनेबिलिटी अभियान चलाया!

    Kia India: किआ इंडिया ने विश्व पर्यावरण दिवस मनाया; देशभर के वर्कशॉप और ऑफिसों में सस्टेनेबिलिटी अभियान चलाया!

    Kia India: किआ इंडिया, जो देश की अग्रणी मास-प्रीमियम कार कंपनी है, ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अपने 500 से ज्यादा वर्कशॉप और कॉर्पोरेट ऑफिसों में पर्यावरण के लिए कई पहल किए हैं। ये पहल सस्टेनेबिलिटी, जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति किआ इंडिया की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती हैं। साथ ही, इनका उद्देश्य ग्राहकों, कर्मचारियों, डीलर पार्टनर्स और स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ाना है।

    इस अभियान के तहत किआ के सेवा केंद्र ग्राहकों की गाड़ी की प्रदूषण जांच मुफ्त में करेंगे और विशेष सत्रों में गाड़ी की देखभाल तथा पर्यावरण पर उसके असर के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही, ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान के सही निपटान के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

    इन सेवा केंद्रों को पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान जमा करने के अधिकृत केंद्र बनाया गया है और 31 जगहों पर 1,000 किलोग्राम से ज्यादा ई-कचरा इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा गया है। किआ इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, सेल्‍स एण्‍ड मार्केटिंग, अतुल सूद ने कहा, “किआ इंडिया में पर्यावरण की परवाह हमारे पूरे कामकाज में शामिल है, देशभर के नेटवर्क से लेकर अनंतपुर के हमारे अत्याधुनिक संयंत्र तक।

    संबंधित ख़बरें: JSW Ventures: जेएसडब्ल्यू वेंचर्स ने नेतृत्व-टीम को किया मजबूत,विकास चांडक को पार्टनर बनाया!

    सौर ऊर्जा अपनाने, संसाधनों के समझदारी से उपयोग और जिम्मेदार तौर-तरीकों के जरिए हम एक बेहतर कल की दिशा में काम कर रहे हैं। इस तरह की पहलें हमारी उस सोच को दर्शाती हैं जिसमें हम पर्यावरण के अनुकूल आवागमन को बढ़ावा देते हुए समाज और पर्यावरण के लिए भी कुछ अच्छा करना चाहते हैं।”

    इस अवसर पर किआ इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट, कस्टमर एक्सपीरियंस, श्री भीमसेन गुलाबनी ने कहा, “पर्यावरण की देखभाल हमारे लिए कोई एक दिन का आयोजन नहीं है, यह हमारी कारोबारी सोच और कार्यसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। यह हमारे रोजाना के काम और समाज से हमारे जुड़ाव में साफ दिखती है।

    हमारे सेवा केंद्र रोज ग्राहकों से मिलते हैं, इसलिए हमारे पास बड़े पैमाने पर जागरूकता फैलाने और जिम्मेदार आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करने का खास अवसर है। प्रदूषण जांच, ई-कचरा संग्रह और सामुदायिक गतिविधियों जैसी पहलों के जरिए हम चाहते हैं कि पर्यावरण की परवाह ग्राहकों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बने और हम मिलकर पर्यावरण पर सार्थक असर डाल सकें।”

    पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए किआ इंडिया अपने सेवा केंद्रों के कर्मचारियों को इस्तेमाल किए गए तेल को सही तरीके से संभालने, रखने और हटाने का विशेष प्रशिक्षण देगी। इसका मकसद पूरे नेटवर्क में कचरे के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही किआ के सेवा केंद्र अलग-अलग जगहों पर पौधे बांटेंगे और पेड़ लगाने के अभियान चलाएंगे।

  • JSW Ventures: जेएसडब्ल्यू वेंचर्स ने नेतृत्व-टीम को किया मजबूत,विकास चांडक को पार्टनर बनाया!

    JSW Ventures: जेएसडब्ल्यू वेंचर्स ने नेतृत्व-टीम को किया मजबूत,विकास चांडक को पार्टनर बनाया!

    JSW Ventures: स्टार्टअप कंपनियों में शुरुआती चरण का निवेश करने वाली वेंचर कैपिटल फर्म जेएसडब्ल्यू वेंचर्स ने फंड-3 को प्रस्तुत करने से पहले अपनी नेतृत्व-टीम को मजबूत करते हुए विभिन्न उद्योगों का लम्बा अनुभव रखने वाले प्रबंधक तथा उद्यमी विकास चांडक को पार्टनर नियुक्त किया है।

    जेएसडब्ल्यू वेंचर्स में वह फंड की निवेश रणनीति, पूंजी जुटाने, निवेश, पोर्टफोलियो प्रबंधन तथा फिनटेक और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी क्षेत्र की निवेश प्राप्त कंपनियों से निकलने (एग्जिट) से जुड़े कार्यों की संयुक्त जिम्मेदारी संभालेंगे।

    संबंधित ख़बरें: World Environment Day: वेदांता ने धातु कारोबार में कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता 15% घटाई

    कंपनी की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि चांडक के पास कंज्यूमर, फिनटेक और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में दो दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कई व्यवसायों को स्थापित करने, उनका विस्तार करने और उनके पुनर्गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए करने वाले विकास ने क्रेड, एतिहाद और आईसीआईसीआई बैंक जैसी प्रमुख कंपनियों के साथ काम किया है।

    जेएसडब्ल्यू वेंचर्स से जुड़ने से पहले चांडक कुछ प्रमुख फिनटेक और उपभोक्ता व्यवसायों में रणनीति, उत्पाद विकास और बिजनेस संचालन का नेतृत्व कर चुके हैं। वह पिछले पांच वर्षों से सक्रिय एंजेल निवेशक भी रहे हैं। जेएसडब्ल्यू वेंचर्स के मैनेजिंग पार्टनर सचिन टैगरा ने उनकी नियुक्ति पर कहा, “विकास के पास व्यावसायिक समझ और टेक्नोलॉजी आधारित व्यवसायों को सफलतापूर्वक संचालित व विस्तार देने का बेहतर अनुभव है जो हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है।”

    जेएसडब्ल्यू वेंचर्स के पार्टनर विकास चांडक ने कहा: “जेएसडब्ल्यू वेंचर्स ने स्टार्टअप संस्थापकों के लिए एक मजबूत पार्टनर के रूप में अपनी पहचान बनाई है।इस फर्म से जुड़ना मुझे एक ऐसा बेहतर संस्थागत प्लेटफॉर्म देता है, जहाँ मैं अपने इन अनुभवों का उपयोग अनुशासित निवेश और अगली पीढ़ी के मजबूत, टेक्नोलॉजी-संचालित व्यवसायों की मदद के लिए कर सकूँ।”

  • World Environment Day: वेदांता ने धातु कारोबार में कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता 15% घटाई

    World Environment Day: वेदांता ने धातु कारोबार में कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता 15% घटाई

    World Environment Day: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वेदांता समूह ने पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2021 की तुलना में उसके धातु कारोबार में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की तीव्रता में 15 प्रतिशत की कमी आई है। कंपनी ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, बायोमास ईंधन और हरित तकनीकों के उपयोग से यह उपलब्धि हासिल की गई है।

    वेदांता के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में उसके परिचालनों में नवीकरणीय ऊर्जा की खपत में साल-दर-साल 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई और यह लगभग 400 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई। इससे करीब 30 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोकने में मदद मिली। कंपनी ने 365 किलो टन बायोमास ईंधन का भी उपयोग किया, जिससे अनुमानित 5 से 6 लाख टन अतिरिक्त कार्बन उत्सर्जन में कमी आई।

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    समूह ने बताया कि वित्त वर्ष 2021 में प्रति टन धातु उत्पादन पर कार्बन उत्सर्जन 6.45 टन था, जिसे घटाकर वित्त वर्ष 2026 में 5.44 टन कर दिया गया है। यह उपलब्धि वेदांता की चार-स्तरीय डीकार्बोनाइजेशन रणनीति के तहत हासिल हुई, जिसमें ऊर्जा दक्षता बढ़ाना, स्वच्छ ईंधनों का उपयोग, नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार और कार्बन ऑफसेटिंग उपाय शामिल हैं।

    वेदांता पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में वृक्षारोपण और पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन पर भी विशेष ध्यान दे रही है। कंपनी ने वर्ष 2021 से अब तक अपने परिचालन क्षेत्रों के आसपास लगभग 40 लाख पेड़ लगाए हैं। केवल वित्त वर्ष 2026 में ही करीब 10 लाख पौधे लगाए गए, जिससे खनन क्षेत्रों और औद्योगिक भूमि के पुनर्वास को बढ़ावा मिला है।

    कंपनी ने कहा कि वह वर्ल्ड इकनोमिक फोरम की ‘ट्रिलियन ट्रीज़’ पहल के तहत वर्ष 2030 तक 70 लाख पेड़ लगाने के लक्ष्य की दिशा में लगातार काम कर रही है। वेदांता का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी और व्यापक वृक्षारोपण जैसे कदम भविष्य में सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत आधार प्रदान करेंगे।