Category: New Delhi

  • UGC ACT 2026: यूजीसी के समानता विनियम 2026 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

    UGC ACT 2026: यूजीसी के समानता विनियम 2026 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

    नई दिल्ली।
    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में अधिसूचित किए गए ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026’ को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ये नियम जाति आधारित भेदभाव की संकीर्ण और गैर-समावेशी परिभाषा अपनाते हैं, जिससे समाज के एक बड़े वर्ग को कानूनी सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है।

    याचिकाकर्ता विनीत जिंदल द्वारा दायर याचिका में विशेष रूप से नियम 3(सी) को कटघरे में खड़ा किया गया है। याचिका के अनुसार, यह नियम जाति आधारित भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) तक सीमित करता है, जबकि सामान्य या गैर-आरक्षित वर्ग के छात्रों और शिक्षकों को इसके दायरे से बाहर रखता है।

    “जाति आधारित उत्पीड़न केवल आरक्षित वर्ग तक सीमित नहीं”

    याचिका में कहा गया है कि यूजीसी का यह दृष्टिकोण वास्तविक सामाजिक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करता। जाति के आधार पर उत्पीड़न या भेदभाव किसी भी व्यक्ति के साथ हो सकता है, चाहे वह किसी भी वर्ग से हो। ऐसे में केवल कुछ वर्गों को ही संस्थागत संरक्षण देना न्याय और समानता के सिद्धांतों के विपरीत है।

    याचिकाकर्ता का तर्क है कि मौजूदा स्वरूप में नियम लागू रहने पर, सामान्य वर्ग के वे छात्र या शिक्षक, जो जाति के नाम पर उत्पीड़न का शिकार होते हैं, न तो शिकायत दर्ज करा सकते हैं और न ही उन्हें कोई प्रभावी निवारण तंत्र उपलब्ध है।

    संविधान के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

    याचिका में इन विनियमों को संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) और 21 का उल्लंघन बताया गया है।

    • अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है।
    • अनुच्छेद 15(1) राज्य को धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव करने से रोकता है।
    • वहीं अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान के साथ जीने का अधिकार सुनिश्चित किया गया है।

    याचिका के अनुसार, यूजीसी का यह विनियम इन मौलिक अधिकारों की भावना के विरुद्ध है, क्योंकि यह समान परिस्थितियों में अलग-अलग नागरिकों के साथ अलग व्यवहार करता है।

    नियम 3(सी) पर रोक और पुनर्परिभाषा की मांग

    याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह नियम 3(सी) को उसके वर्तमान स्वरूप में लागू करने पर रोक लगाए और यूजीसी को निर्देश दे कि जाति आधारित भेदभाव को जाति-तटस्थ और संविधान-सम्मत तरीके से परिभाषित किया जाए।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि भेदभाव की परिभाषा ऐसी होनी चाहिए, जिससे हर नागरिक को, उसकी जाति की परवाह किए बिना, समान सुरक्षा और शिकायत निवारण का अधिकार मिल सके।

    समान अवसर केंद्र और हेल्पलाइन सभी के लिए खोलने की मांग

    इसके अतिरिक्त, याचिका में केंद्र सरकार और यूजीसी से अंतरिम निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में स्थापित ‘समान अवसर केंद्र’ और ‘समानता हेल्पलाइन’ जैसी व्यवस्थाएं किसी भी प्रकार के वर्गीय भेदभाव के बिना सभी छात्रों और शिक्षकों के लिए उपलब्ध कराई जा सकें।

    शिक्षा में समानता की बहस फिर तेज

    इस याचिका के बाद उच्च शिक्षा में समानता, आरक्षण और जाति आधारित संरक्षण को लेकर एक बार फिर संवैधानिक और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है।

  • Supreme Court: मौत की सजा फांसी की जगह इंजेक्शन या इलेक्ट्रिक चेयर?-सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

    Supreme Court: मौत की सजा फांसी की जगह इंजेक्शन या इलेक्ट्रिक चेयर?-सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

    नई दिल्ली। मौत की सजा देने के पारंपरिक तरीके ‘फांसी’ को लेकर उठे संवैधानिक और मानवीय सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत में दाखिल जनहित याचिका में फांसी को क्रूर, अमानवीय और पीड़ादायक बताते हुए इसकी जगह लीथल इंजेक्शन, इलेक्ट्रिक चेयर या गोली मारने जैसे वैकल्पिक तरीकों को अपनाने की मांग की गई है।

    यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है कि फांसी देने की प्रक्रिया में दोषी को लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित गरिमामय जीवन और मृत्यु के अधिकार के खिलाफ है। याचिका में यह भी सुझाव दिया गया है कि कम से कम दोषी को यह विकल्प दिया जाए कि वह फांसी चाहता है या घातक इंजेक्शन के जरिए मृत्यु।

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने अदालत को बताया कि इस संवेदनशील मुद्दे पर विचार के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जो मौत की सजा के वैकल्पिक तरीकों का अध्ययन कर रही है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल फांसी को ही सबसे तेज और सुरक्षित तरीका माना जाता है और उसे बदलने के पक्ष में केंद्र नहीं है।

    केंद्र के इस रुख पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। अदालत ने टिप्पणी की कि समय के साथ कानून और प्रक्रियाओं में बदलाव आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान एक जीवंत और मानवीय दस्तावेज है, जिसमें सम्मानजनक मृत्यु का अधिकार भी निहित होना चाहिए।

    गौरतलब है कि यह याचिका वर्ष 2017 में दाखिल की गई थी और तब से इस पर कई चरणों में सुनवाई हो चुकी है। अदालत ने याचिकाकर्ता और केंद्र सरकार दोनों को तीन सप्ताह के भीतर अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है।

    यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दुनिया के कई देशों ने फांसी को समाप्त कर लीथल इंजेक्शन जैसे तरीकों को अपनाया है, जबकि भारत में अब भी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत मौत की सजा का एकमात्र तरीका फांसी ही है। सुप्रीम कोर्ट का आने वाला फैसला न केवल कानूनी बल्कि नैतिक और मानवीय दृष्टि से भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

  • Tamilnadu Politics: चुनाव से पहले तमिलनाडु की सियासत में घमासान, स्टालिन की हठधर्मिता से BJP को मिल रहा फायदा

    Tamilnadu Politics: चुनाव से पहले तमिलनाडु की सियासत में घमासान, स्टालिन की हठधर्मिता से BJP को मिल रहा फायदा

    New Delhi: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी उथल-पुथल तेज हो गई है। कांग्रेस की सत्ता में हिस्सेदारी की पुरानी मांग को एक बार फिर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सिरे से खारिज कर दिया है। डीएमके नेतृत्व का साफ संदेश है कि गठबंधन चुनाव तक ठीक है, लेकिन सरकार में हिस्सेदारी नहीं। स्टालिन की यही “एकला चलो” नीति अब गठबंधन धर्म पर सवाल खड़े कर रही है।

    कांग्रेस नेताओं के तीखे बयानों से साफ है कि सहयोगी दल खुद को सिर्फ बाहरी समर्थन तक सीमित नहीं रखना चाहते। बावजूद इसके डीएमके का अड़ियल रवैया जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्टालिन का यह रुख सीधे तौर पर बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अमित शाह पहले ही राज्य में आक्रामक मोड में नजर आ रहे हैं, वहीं थलपति विजय की संभावित एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

    अगर डीएमके ने सहयोगियों को नजरअंदाज करना जारी रखा, तो गठबंधन में दरार तय मानी जा रही है—और इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिल सकता है। चुनावी रण में सबसे बड़ा सवाल यही है: स्टालिन की जिद डीएमके को भारी पड़ेगी या बीजेपी इस मौके को भुनाने में कामयाब होगी?

  • Delhi Crime: दिल्ली में 4 साल की बच्ची से रेप केस: कोर्ट ने पुलिस को फटकारा, 5 लाख अंतरिम मुआवजे का आदेश

    Delhi Crime: दिल्ली में 4 साल की बच्ची से रेप केस: कोर्ट ने पुलिस को फटकारा, 5 लाख अंतरिम मुआवजे का आदेश

    Delhi Crime:दिल्ली में 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में रोहिणी कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि इतने गंभीर और संवेदनशील केस में पुलिस की लापरवाही चौंकाने वाली और अस्वीकार्य है।

    कोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी

    सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशन जज अमित सहरावत ने पूछा कि—

    • जांच अधिकारी मौजूद क्यों नहीं?
    • थाना प्रभारी कहाँ थे?
    • विक्टिम इम्पैक्ट रिपोर्ट कोर्ट में पेश क्यों नहीं की गई?

    कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति “बहुत गंभीर” है और ऐसे रवैये को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

    बच्ची की हालत चिंताजनक

    कोर्ट ने कहा कि अपराध इतना क्रूर है कि पीड़ित बच्ची आज भी जीवन से लड़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार—

    • बच्ची अस्पताल से छुट्टी पा चुकी है
    • उसके निजी अंग काम नहीं कर रहे
    • मल-मूत्र त्याग के लिए पेट में लगी पाइपों पर निर्भर
    • इलाज कम से कम 1 साल चलेगा
    • ठीक होने की कोई गारंटी नहीं

    अदालत ने टिप्पणी की कि बच्ची जिस पीड़ा से गुजर रही है, वह शब्दों में बयान नहीं की जा सकती।

    विक्टिम इम्पैक्ट रिपोर्ट गायब

    कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने न तो रिपोर्ट पेश की और न ही कोई कारण बताया। यह लापरवाही अदालत को चौंकाने वाली लगी।

    जज ने कहा कि इतने गंभीर मामले में—

    “पुलिस की ढिलाई हैरान करने वाली है और पीड़िता को इसका नुकसान नहीं भुगतना चाहिए।”

    5 लाख अंतरिम मुआवजे का आदेश

    अदालत ने निर्देश दिया कि:

    • दिल्ली स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी पीड़ित बच्ची को तुरंत ₹5 लाख का अंतरिम मुआवजा दे
    • यह राशि अंतिम मुआवजे का हिस्सा मानी जाएगी
    • आदेश की प्रति संबंधित DCP को भेजी जाए

    कोर्ट ने साफ कहा कि बच्ची और उसका परिवार पुलिस की गलती के कारण और पीड़ा नहीं झेलेगा।

  • मदरसों और मस्जिदों में भी लगाए जाएं सीसीटीवी कैमरे: अरुण गोविल ने संसद में जोरदार अपील की

    मदरसों और मस्जिदों में भी लगाए जाएं सीसीटीवी कैमरे: अरुण गोविल ने संसद में जोरदार अपील की

    नई दिल्ली: सांसद और टीवी के सुपरहिट सीरियल रामायण में भगवान राम का किरदार निभा चुके अरुण गोविल ने संसद में सुरक्षा और सार्वजनिक निगरानी को लेकर अहम सुझाव पेश किया। उन्होंने कहा कि देशभर के मंदिर, गुरुद्वारे, चर्च, स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों में जहां पहले से ही सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते हैं, वहीं मदरसों और मस्जिदों में भी आधुनिक सुरक्षा मानकों के तहत कैमरे लगाना अत्यंत आवश्यक है।

    अरुण गोविल ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि मस्जिदें भी सार्वजनिक स्थल हैं, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से इन धार्मिक स्थलों पर निगरानी प्रणाली अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देशों में धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से लागू की जाती है।

    गोविल ने कहा, “जब सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए अनिवार्य हैं, तो मदरसों और मस्जिदों को इस दिशा में पीछे क्यों रहना चाहिए? सुरक्षा, पारदर्शिता और निगरानी हर सार्वजनिक स्थल का मूलभूत अधिकार होना चाहिए।”

    सांसद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह देशव्यापी सुरक्षा नीति के तहत सभी सार्वजनिक धार्मिक स्थलों पर आधुनिक सुरक्षा मानक लागू करने के लिए कदम उठाए। उनका मानना है कि ऐसा करने से न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि किसी भी अप्रिय घटना या आपराधिक गतिविधि की जांच और रोकथाम भी तेज होगी।

    गोविल ने यह भी सुझाव दिया कि सभी धर्मों के सार्वजनिक स्थलों पर समान सुरक्षा मानक लागू किए जाएं, ताकि कोई भेदभाव न हो और देशवासियों का विश्वास बढ़े। उनके अनुसार, यह कदम न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले लोगों की सुरक्षा और मन की शांति सुनिश्चित करेगा।

  • Trump Maduro ultimatum Venezuela-US tension: अब देश छोड़ दो, वरना हालात और बिगड़ेंगे:डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति मादुरो को दिया अल्टीमेटम

    Trump Maduro ultimatum Venezuela-US tension: अब देश छोड़ दो, वरना हालात और बिगड़ेंगे:डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति मादुरो को दिया अल्टीमेटम

    अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को एक फोन कॉल में साफ शब्दों में चेतावनी दी है—“अब देश छोड़ दो, वरना हालात और बिगड़ेंगे।”

    जानकारी के मुताबिक यह बातचीत हाल ही में हुई, जिसमें ट्रंप ने मादुरो के शासन को “अवैध और दमनकारी” करार दिया। ट्रंप ने कहा कि वेनेज़ुएला की जनता “तानाशाही से मुक्ति चाहती है” और मादुरो को सत्ता छोड़कर देश से बाहर जाना चाहिए ताकि वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल हो सके।

    हालांकि मादुरो सरकार ने इस कथित कॉल को “फर्जी” बताया है और कहा है कि विपक्ष तथा अमेरिकी राजनीति में चल रहे चुनावी माहौल का फायदा उठाने के लिए इस तरह की कहानियां फैलाई जा रही हैं। वेनेज़ुएलाई अधिकारियों ने कहा कि मादुरो “जनता के समर्थन” से चुने गए हैं और किसी भी विदेशी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।

    ट्रंप और मादुरो के बीच संबंध हमेशा तनावपूर्ण रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान भी ट्रंप प्रशासन ने वेनेज़ुएला पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। अब इस नए विवाद से एक बार फिर लैटिन अमेरिका में भू-राजनीतिक उथल-पुथल बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह कॉल वास्तव में हुई है, तो आने वाले दिनों में वेनेज़ुएला में राजनीतिक हलचल और तेज हो सकती है। दूसरी ओर, मादुरो सरकार ने देश में “स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने” का भरोसा दिलाया है।

    शर्तों की वजह से अटका समाधान

    सूत्रों के मुताबिक बातचीत के दौरान मादुरो ने दो प्रमुख मांगें रखीं:

    1. वैश्विक स्तर पर पूर्ण माफी, ताकि उन पर और उनकी टीम पर लगे सभी मौजूदा आरोप हट जाएं।
    2. वेनेज़ुएला की सेना पर उनका नियंत्रण बना रहे, चाहे भविष्य में देश में स्वतंत्र चुनाव ही क्यों न हों।

    अमेरिका ने दोनों शर्तों को प categorically खारिज कर दिया और दोहराया कि मादुरो को “तुरंत पद छोड़ना चाहिए”। इसके बाद मादुरो प्रशासन ने बातचीत बहाल करने की कोशिश की, लेकिन अमेरिकी पक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

    रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मादुरो शासन पर अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक और सैन्य दबाव बनाती है।


    कैरेबियन में बढ़ी हलचल

    बातचीत टूटने के बाद अमेरिका ने न केवल अपने बयान कड़े किए, बल्कि अपनी सैन्य गतिविधियां भी तेज कर दीं। ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिकी सैन्य अभियान कभी भी शुरू हो सकते हैं। इसके बाद कैरेबियन क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों की गतिविधि अचानक बढ़ गई।

    अमेरिका का आरोप है कि वेनेज़ुएला से निकलने वाली ड्रग तस्करी की वजह से अमेरिकी समाज में लगभग 1 लाख मौतें हुई हैं।
    सीनेटर डेव मैकॉरमिक ने इसे “फेंटेनाइल, कोकीन और ओपिऑयड का युद्ध” बताते हुए मादुरो सरकार पर संकट बढ़ाने का आरोप लगाया।

    दूसरी ओर, आलोचकों ने अमेरिकी कार्रवाई को एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल बताया है। कांग्रेस एक विवादित डबल-टैप हमले की जांच भी कर रही है, जिसने बहस को और गरमा दिया है।


    जवाबी कदम और बढ़ता गतिरोध

    अमेरिका द्वारा एयरस्पेस प्रतिबंध लगाने के बाद वेनेज़ुएला ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई विदेशी एयरलाइनों के परिचालन अधिकार रद्द कर दिए। मादुरो सरकार का कहना है कि अमेरिका की मौजूदा नीति “औपनिवेशिक आक्रामकता” जैसी है और वह कैरेबियन में तनाव बढ़ाकर वेनेज़ुएला को झुकाना चाहता है।

    एयरस्पेस बंद होने का असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ा है—

    • कई रूट बदले गए,
    • यात्रियों को घंटों अतिरिक्त समय लगा,
    • और एयरलाइंस को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय उड्डयन संगठनों ने हालात पर चिंता जताई है और स्थिति को “गंभीर और अस्थिर करने वाली” बताया है।


    आगे क्या?

    अमेरिका और वेनेज़ुएला के रिश्ते जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उससे विशेषज्ञों को आशंका है कि कैरेबियन क्षेत्र आने वाले हफ्तों में नई भू-राजनीतिक टकराहट का केंद्र बन सकता है।
    अभी तक न तो कॉल की आधिकारिक पुष्टि हुई है और न ही किसी पक्ष ने पीछे हटने के संकेत दिए हैं।

  • बिहार विधानसभा चुनाव: कल पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान, 3.75 करोड़ मतदाता करेंगे मताधिकार का प्रयोग

    बिहार विधानसभा चुनाव: कल पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान, 3.75 करोड़ मतदाता करेंगे मताधिकार का प्रयोग

    पटना, 5 नवंबर 2025 –
    बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान कल, यानी 6 नवंबर को होगा। कुल 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा। इनमें से 6 विधानसभा क्षेत्रों के 2135 मतदान केंद्रों पर मतदान का समय एक घंटे कम, यानी शाम 5 बजे तक निर्धारित किया गया है।

    चुनाव आयोग के मुताबिक, पहले चरण में 45,341 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। बुधवार को ही सभी मतदान कर्मी डिस्पैच सेंटरों से ईवीएम-वीवीपैट और अन्य सामग्री लेकर बूथों की ओर रवाना हो गए हैं। सभी केंद्रों पर आज रात तक सुरक्षा बलों की तैनाती पूरी कर ली जाएगी। मतदान दिवस पर सुबह 5 बजे मॉक पोल किया जाएगा और इसके बाद सुबह 7 बजे से मतदान शुरू होगा।

    पहले चरण में इन जिलों में मतदान

    पहले चरण का मतदान जिन 18 जिलों में होगा, वे हैं – मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, पटना, भोजपुर और बक्सर।

    इन 121 सीटों के लिए कुल 2,496 नामांकन दाखिल किए गए थे, जिनमें से जांच के बाद 1,939 वैध पाए गए। बाद में 70 उम्मीदवारों ने नामांकन वापस ले लिया। छंटनी के बाद कुल 1,314 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 1,192 पुरुष और 122 महिलाएं शामिल हैं। इनमें से 102 सीटें सामान्य श्रेणी की हैं, जबकि 19 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं।

    मतदाताओं का जनसांख्यिकीय चित्र

    पहले चरण में कुल 3,75,13,302 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे —

    • पुरुष मतदाता: 1,98,35,325
    • महिला मतदाता: 1,76,77,219
    • थर्ड जेंडर मतदाता: 758
    • सर्विस वोटर: 1,00,904

    चुनाव आयोग ने दिव्यांगों और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। इस चरण में 3,22,077 दिव्यांग और 5,31,423 वरिष्ठ नागरिक मतदाता (जिनमें 80 वर्ष से अधिक आयु के 5,24,687 और 100 वर्ष से अधिक आयु के 6,736 मतदाता शामिल हैं) वोट डालेंगे।

    इसके अलावा 7,37,765 प्रथम मतदाता भी इस चरण में लोकतंत्र के महापर्व में भाग लेंगे। इनमें से अधिकांश की आयु 18 से 19 वर्ष के बीच है, जबकि 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 1,96,27,330 युवा मतदाता इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

  • Congress demands Fadnavis’ resignation: डॉ. संपदा मुंडे की मौत संस्थागत हत्या, फडणवीस इस्तीफा दें : वर्षा गायकवाड़

    Congress demands Fadnavis’ resignation: डॉ. संपदा मुंडे की मौत संस्थागत हत्या, फडणवीस इस्तीफा दें : वर्षा गायकवाड़

    नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने महाराष्ट्र की चिकित्सक डॉ. संपदा मुंडे की मौत को “संस्थागत हत्या” करार देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे की मांग की है।
    पार्टी ने इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) या न्यायिक जांच गठित करने की भी मांग की है ताकि सच्चाई सामने आए और दोषियों को सज़ा मिल सके।

    दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद वर्षा गायकवाड़ और महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटील ने कहा कि सतारा जिले के एक अस्पताल में कार्यरत डॉ. संपदा मुंडे को राजनीतिक दबाव, ब्लैकमेलिंग और यौन उत्पीड़न के कारण आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया।

    कांग्रेस नेताओं ने बताया कि डॉ. संपदा पर एक चीनी मिल, जो पूर्व भाजपा सांसद रणजीत सिंह नाईक निम्बालकर की है, के अधिकारियों द्वारा फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेरफेर करने का दबाव डाला जा रहा था।
    जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उन्हें लगातार परेशान और ब्लैकमेल किया गया। शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

    वर्षा गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने बिना किसी जांच के नाईक को क्लीन चिट दी, जो स्पष्ट रूप से सत्ता के दुरुपयोग का मामला है।
    उन्होंने राज्य महिला आयोग के रवैये पर भी नाराज़गी जताई, कहा कि आयोग ने पीड़िता के परिवार से मुलाकात तक नहीं की और उल्टे चरित्र हनन में शामिल हो गया।

    अतुल लोंढे पाटील ने कहा कि यह घटना आरएसएस की मानसिकता को दर्शाती है, जो दलितों और आदिवासियों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया रखती है और अपराधियों को संरक्षण देती है।
    उन्होंने मांग की कि फडणवीस को मुख्यमंत्री और गृह मंत्री दोनों पदों से तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

    लोंढे ने यह भी बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने डॉ. संपदा मुंडे के परिवार से बात कर न्याय की इस लड़ाई में कांग्रेस का पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया है।

  • HIGH ALERT! चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ ने पकड़ी रफ्तार, 35 से ज्यादा उड़ानें रद्द, आंध्र प्रदेश के 19 जिलों में रेड अलर्ट

    HIGH ALERT! चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ ने पकड़ी रफ्तार, 35 से ज्यादा उड़ानें रद्द, आंध्र प्रदेश के 19 जिलों में रेड अलर्ट

    नई दिल्ली। पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में तेजी से सक्रिय हो रहा भीषण चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ अब बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, यह तूफान वर्तमान में मछलीपट्टनम से लगभग 100 किलोमीटर और काकीनाडा से करीब 180 किलोमीटर की दूरी पर है। आईएमडी ने चेतावनी जारी करते हुए आंध्र प्रदेश के 19 जिलों में रेड अलर्ट घोषित किया है और अगले 24 घंटे में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है।

    35 से अधिक उड़ानें रद्द

    तूफान के असर से हवाई सेवाओं पर भी बड़ा प्रभाव पड़ा है। तेलंगाना के शमशाबाद हवाई अड्डे और आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और राजमुंद्री हवाई अड्डों से संचालित होने वाली 35 से अधिक उड़ानें रद्द की गई हैं। इनमें इंडिगो की 30, एयर इंडिया की 2 और एयर इंडिया एक्सप्रेस की 5 उड़ानें शामिल हैं।

    110 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं

    आईएमडी ने चेताया है कि विशाखापत्तनम के तटीय इलाकों में हवा की रफ्तार 90 से 100 किमी/घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर यह 110 किमी/घंटे तक भी जा सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, ‘मोंथा’ उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए आज शाम से रात के बीच मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच काकीनाडा के तट को पार कर सकता है।

    रेलवे ने बनाई विशेष रणनीति

    रेल मंत्रालय ने भी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सभी जोन को सतर्क कर दिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और गुंटूर मंडलों में ‘वॉर रूम’ सक्रिय कर यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेन संचालन पर नजर रखी जाए। मशीनरी, राहत सामग्री और तकनीकी स्टाफ को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

    पड़ोसी राज्यों में भी असर

    ‘मोंथा’ का प्रभाव केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। आईएमडी के मुताबिक, तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल और कर्नाटक के कई जिलों में भी भारी बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान है। तटीय क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, ‘मोंथा’ की गति और दिशा पर अगले 12 घंटे बेहद निर्णायक रहेंगे। यदि इसकी रफ्तार और तीव्रता बढ़ती है, तो आंध्र प्रदेश और आसपास के राज्यों में बड़े पैमाने पर बिजली, संचार और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

  • Kojagiri Purnima: शरद पूर्णिमा अमृत बरसाने वाली रात, स्वास्थ्य और समृद्धि से जुड़ी परंपराएं

    Kojagiri Purnima: शरद पूर्णिमा अमृत बरसाने वाली रात, स्वास्थ्य और समृद्धि से जुड़ी परंपराएं

    नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में हर पर्व के पीछे गहन वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टि निहित होती है। उनमें से एक है शरद पूर्णिमा, जिसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। आश्विन मास की यह पूर्णिमा स्वास्थ्य, आरोग्य और समृद्धि से जुड़ी मानी जाती है।

    मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं के साथ धरती पर अमृतमयी किरणें बरसाता है, जो शरीर और मन दोनों को सशक्त बनाती हैं। शास्त्रों के अनुसार, चंद्रमा की रश्मियों में औषधीय गुण सक्रिय हो जाते हैं।

    परंपरा है कि शरद पूर्णिमा की रात गाय के दूध, चावल, केसर और किशमिश से बनी खीर को चांदनी में रखकर प्रातः सेवन किया जाए। आयुर्वेद के अनुसार यह खीर मानसिक स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है, खासकर बच्चों के लिए अत्यंत लाभकारी।

    कथाओं के अनुसार, इस रात वृंदावन में श्रीकृष्ण ने महारास रचा था, इसलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। साथ ही, मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात लक्ष्मी सूक्त का पाठ करने से जीवन में धन-धान्य की वृद्धि होती है।

    विज्ञान भी मानता है कि चंद्रमा का जल और मानसिक संतुलन पर प्रभाव होता है। समुद्र में ज्वार-भाटा से लेकर हमारे मानसिक स्वास्थ्य तक, चंद्रमा की गतियां जीवन को गहराई से प्रभावित करती हैं।