India Issues Blunt Warning: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत ने पाकिस्तान और चीन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में सामने आए बयानों में भारत की ओर से संकेत दिया गया कि पाकिस्तान को किसी भी तरह की बाहरी मदद क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकती है।
भारतीय पक्ष की ओर से कहा गया कि “सोचना चाहिए…” जैसे शब्दों के जरिए स्पष्ट संदेश दिया गया है कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मामलों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। माना जा रहा है कि यह टिप्पणी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को कथित तौर पर मिली चीन की रणनीतिक और तकनीकी सहायता के संदर्भ में की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच भारत लगातार अपनी सुरक्षा नीति को मजबूत करने में जुटा है। चीन और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियों को भारत गंभीरता से देख रहा है।
राजनयिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भारत का यह संदेश सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में सक्रिय अन्य देशों के लिए भी एक संकेत है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भारत का रुख बेहद स्पष्ट और सख्त रहेगा।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर चीन और पाकिस्तान की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। लेकिन बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय और रणनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
Pakistan Murree Brewery Resumes Alcohol : कराची से आई खबर के अनुसार, पाकिस्तान की मशहूर बियर ‘मरी ब्रुअरी’ ने अप्रैल 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने मादक उत्पादों की सप्लाई फिर से शुरू कर दी है. हालांकि, पाकिस्तान के भीतर मुस्लिम आबादी के लिए शराब पर प्रतिबंध अभी भी बरकरार है.
नीति में बड़ा बदलाव Pakistan ने अपनी निर्यात नीति में अहम बदलाव करते हुए शराब के अंतरराष्ट्रीय कारोबार को फिर से अनुमति दी है। जानकारी के मुताबिक, पहली खेप United Kingdom और Japan भेजी गई है, जो इस नई पहल की शुरुआत को दर्शाती है।
विदेशी मुद्रा पर फोकस सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और निर्यात के नए रास्ते खोलने के लिए लिया गया है। लंबे समय से प्रतिबंधों के चलते यह क्षेत्र सीमित रहा था, लेकिन अब सरकार इसे एक संभावित राजस्व स्रोत के रूप में देख रही है।
आर्थिक विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से पाकिस्तान को वैश्विक व्यापार में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका मिल सकता है। हालांकि, देश के भीतर इस फैसले को लेकर सामाजिक और धार्मिक स्तर पर बहस भी तेज होने की संभावना है।
आगे क्या? फिलहाल, यह देखना अहम होगा कि यह नई नीति Pakistan की अर्थव्यवस्था को कितनी मजबूती देती है और क्या आने वाले समय में अन्य देशों के साथ भी ऐसे व्यापारिक संबंध विकसित होते हैं।
पाकिस्तान में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। संगठन के सरगना मसूद अजहर के बड़े भाई ताहिर अनवर की सोमवार (30 मार्च 2026) शाम बहावलपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
62 वर्षीय ताहिर अनवर, जैश-ए-मोहम्मद में सैन्य मामलों का प्रमुख माना जाता था। वह साल 2001 से संगठन के ट्रेनिंग कैंप, आतंकियों की ट्रेनिंग और हथियारों की व्यवस्था जैसी गतिविधियों की जिम्मेदारी संभाल रहा था। जानकारी के मुताबिक, वह हाल ही में संगठन के नए मुख्यालय मरकज उस्मान ओ अली में अपने परिवार के साथ रह रहा था।
सूत्रों के अनुसार, ताहिर अनवर पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान मरकज सुभानल्लाह पर हुई भारतीय वायुसेना की कार्रवाई में घायल हुआ था, लेकिन उस समय उसकी जान बच गई थी। हालांकि, सोमवार शाम करीब 6 बजे उसने अज्ञात कारणों से दम तोड़ दिया।बताया जा रहा है कि उसका नमाज़-ए-जनाज़ा रात करीब 11:30 बजे मरकज उस्मान ओ अली में ही अदा किया गया, जिसमें मसूद अजहर समेत संगठन के कई अन्य सदस्य मौजूद थे।ताहिर अनवर की मौत की खबर पाकिस्तान के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रही है। एक पोस्ट में लिखा गया, “अल्लाह की मर्जी से मौलाना मसूद अजहर के बड़े भाई हकीम मोहम्मद ताहिर अनवर का इंतकाल हो गया है।”
नई दिल्ली/मुंबई: यूएस-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है, जिससे एलपीजी (LPG Cylinder) की सप्लाई पर भी असर पड़ा। भारत सरकार ने एलपीजी की घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने दावा किया है कि घरेलू डिलीवरी सामान्य समय पर ही जारी रहेगी।
लेकिन वास्तविक स्थिति जनता के लिए भयावह बनी हुई है। कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की कालाबाजारी और ऊँचे होलसेल दाम आम जनता को परेशान कर रहे हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार बड़े कारोबारी और डीलर एलपीजी की उपलब्धता को नियंत्रित कर उसके दाम बढ़ा रहे हैं। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को सिलेंडर खरीदने में मुश्किल हो रही है, और सरकारी राहत की योजनाएं प्रभावी रूप से जमीन पर नहीं पहुंच पा रही हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने एलपीजी की सुरक्षित सप्लाई और नए LNG कार्गो की व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि घरेलू सेक्टर को प्राथमिकता दी जा रही है और नॉन-डोमेस्टिक सेक्टर जैसे हॉस्पिटल और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को भी जरूरत के अनुसार आवंटन किया जा रहा है। वहीं एलपीजी बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतराल को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।
सरकार का दावा है कि घरेलू डिलीवरी सामान्य रूप से 2.5 दिन में होगी, लेकिन जनता का कहना है कि होलसेल दामों और कालाबाजारी के कारण सिलेंडर आसानी से नहीं मिल रहा। BPCL, IOC और HPCL की संयुक्त समिति मांग और आवंटन की समीक्षा कर रही है, लेकिन कई क्षेत्रों में लोग निजी डीलरों के बढ़ते दाम और काले बाजारी आपूर्ति से परेशान हैं।
केंद्रीय गृह सचिव ने राज्यों के डीजीपी और सचिवों से कहा है कि कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएँ। हालांकि जनता का अनुभव बताता है कि इस दिशा में कार्रवाई पर्याप्त नहीं हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के उपायों और अतिरिक्त LNG आयात के बावजूद स्थानीय डीलरों द्वारा किए जा रहे मनमाने दामों और कालाबाजारी पर नजर रखना बेहद जरूरी है, वरना आम जनता की परेशानी और बढ़ सकती है।
सरकार का दावा और जनता का अनुभव फिलहाल आमने-सामने हैं, और एलपीजी संकट को लेकर वास्तविक राहत जनता तक पहुँचने में देरी हो रही है।
काबुल/तोरखम: पाकिस्तान और अफगानिस्तान(Pakistan-Afganistan) के बीच सीमा पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार तड़के अफगानिस्तान के तोरखम इलाके में स्थित एक कमर्शियल मार्केट पर कथित गोलाबारी के बाद भीषण आग लग गई, जिसमें 150 से अधिक दुकानें जलकर खाक हो गईं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस घटना में व्यापार और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है।
स्थानीय समाचार एजेंसियों के हवाले से बताया गया कि तोरखम के मेयर मावलवी अब्दुल्ला मुस्तफा ने कहा कि रविवार सुबह करीब 4 बजे शहर की ओर कई गोले दागे गए, जिनमें से कुछ एक व्यस्त बाजार में गिर गए। इसके बाद बाजार में आग लग गई, जो तेजी से आसपास की दुकानों में फैलती चली गई।
आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उसे काबू में करने के लिए चार फायर ब्रिगेड ट्रक, नगर पालिका के पानी के टैंकर और स्थानीय लोगों की मदद लेनी पड़ी। कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
300 मिलियन तक के नुकसान का अनुमान
मार्केट कॉम्प्लेक्स के मालिक के मुताबिक आग में 150 से ज्यादा दुकानें पूरी तरह जल गईं। शुरुआती आकलन के अनुसार इस घटना से अफगानिस्तान को करीब 300 मिलियन (स्थानीय मुद्रा) का आर्थिक नुकसान हुआ है।
तोरखम बॉर्डर क्रॉसिंग अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। इस मार्ग से दोनों देशों के बीच रोजाना बड़ी मात्रा में सामान और लोगों की आवाजाही होती है।
सीमा पर बढ़ रही झड़पें
हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सीमा पर झड़पों और गोलीबारी की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे द्विपक्षीय रिश्तों में तनाव बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने सरकार से रिहायशी इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
व्यापारियों का कहना है कि लगातार हो रही हिंसा और अस्थिरता से पहले से ही संघर्ष कर रहे सीमा क्षेत्र के कारोबार और लोगों की रोजी-रोटी पर गंभीर असर पड़ रहा है।
30 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा
इससे पहले शुक्रवार को अफगान अधिकारियों ने दावा किया था कि डूरंड लाइन सीमा पर हुई झड़पों में तालिबान सेनाओं ने 30 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। यह झड़प कंधार प्रांत के शोराबक जिले में हुई बताई जा रही है।
तालिबान रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह ख्वारजमी के अनुसार, तालिबान लड़ाकों ने एक पाकिस्तानी सैन्य चौकी पर कब्जा कर लिया और बाद में उसे विस्फोटकों से उड़ा दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि पक्तिया प्रांत के दंड पाटन इलाके में पांच पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर भी तालिबान का कब्जा हो गया।
कैसे शुरू हुआ मौजूदा संघर्ष
बताया जा रहा है कि मौजूदा तनाव की शुरुआत तब हुई जब 21 फरवरी को पाकिस्तान ने अफगान क्षेत्र में आतंकवादियों को निशाना बनाने के लिए कार्रवाई की थी। इसके जवाब में 27 फरवरी को तालिबान के नेतृत्व वाली अफगान सेना ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले शुरू किए।
इसके बाद पाकिस्तान ने कई बॉर्डर सेक्टरों में अफगान सेना की गोलीबारी के जवाब में “ऑपरेशन गजब लिल-हक” शुरू किया, जिससे सीमा पर हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।
नई दिल्ली। भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है। देश के प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंक Axis Bank ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह दुनिया की अग्रणी इलेक्ट्रिक कार कंपनी Tesla के लिए भारत में ‘पसंदीदा फाइनेंसर’ बन गया है।
इस साझेदारी का सीधा मतलब है कि अब भारतीय ग्राहकों के लिए टेस्ला कार खरीदना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा। बैंक ग्राहकों को लचीले और लंबे समय के लोन विकल्प उपलब्ध कराएगा, जिससे प्रीमियम इलेक्ट्रिक कार खरीदने का सपना पूरा करना सरल हो सकेगा।
ग्राहकों को मिलेंगे कई खास फायदे
एक्सिस बैंक और टेस्ला के बीच हुआ यह करार पूरी तरह से ग्राहक-केंद्रित बताया जा रहा है। बैंक ने प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए कई खास सुविधाएं पेश की हैं।
सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि टेस्ला कार के लिए 10 साल तक का लंबा लोन कार्यकाल उपलब्ध कराया जाएगा। आमतौर पर कार लोन 5 से 7 साल के लिए मिलता है, लेकिन इस योजना में लंबी अवधि के कारण मासिक किस्त (EMI) काफी कम हो सकती है।
इसके अलावा, कार बुकिंग से लेकर लोन मंजूरी तक की पूरी प्रक्रिया 100 प्रतिशत डिजिटल होगी। यानी ग्राहकों को बैंक शाखा के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और सभी औपचारिकताएं ऑनलाइन पूरी की जा सकेंगी।
बैंक ग्राहकों की आय और नकदी प्रवाह को ध्यान में रखते हुए कस्टमाइज्ड पेमेंट प्लान भी तैयार करेगा। इससे हर ग्राहक को अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार पुनर्भुगतान की सुविधा मिल सकेगी।
तुरंत लोन मंजूरी का दावा
बैंक का कहना है कि पात्र ग्राहकों को ऑनबोर्डिंग के दौरान इंस्टेंट लोन अप्रूवल भी मिल सकता है। इससे वाहन खरीदने की प्रक्रिया काफी तेज और आसान हो जाएगी।
इस साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए एक्सिस बैंक के कार्यकारी निदेशक Munish Sharda ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तेजी से बढ़ रही है और टेस्ला के साथ यह साझेदारी वैश्विक स्तर की इलेक्ट्रिक कारों को भारतीय ग्राहकों के लिए ज्यादा सुलभ बनाएगी।
उन्होंने कहा कि बैंक भविष्य को ध्यान में रखते हुए आधुनिक और जिम्मेदार बैंकिंग समाधानों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
देशभर में मिलेगा लाभ
यह पहल केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश के उभरते हुए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हब में भी लागू की जाएगी। इस साझेदारी का उद्देश्य वाहन खरीदने की शुरुआती वित्तीय बाधाओं को कम करना और प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहनों के अनुभव को अधिक से अधिक ग्राहकों तक पहुंचाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टेस्ला और एक्सिस बैंक की यह साझेदारी भारत में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार को नई गति दे सकती है और प्रीमियम ईवी सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ा सकती है।
तेहरान/वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इज़रायल को कड़ी चेतावनी दी है। तेहरान का कहना है कि यदि उसकी सरकार को अस्थिर करने या शासन परिवर्तन की कोई भी कोशिश की गई तो उसका जवाब बेहद खौफनाक होगा। हाल के दिनों में अमेरिका और इज़रायल द्वारा किए गए अचानक सैन्य हमलों के बाद ईरान की नई नेतृत्व व्यवस्था ने संकेत दिया है कि हालात बिगड़ने पर परमाणु हथियारों (Atomic Attack) के इस्तेमाल तक की नौबत आ सकती है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हालिया संघर्ष में ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों के बाद देश में भारी जनहानि हुई है और हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन के बाद देश अभी शोक से उबर भी नहीं पाया था कि युद्ध की स्थिति और गंभीर हो गई।
सत्ता परिवर्तन की आशंका पर सख्त चेतावनी
ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका और इज़रायल अगर वहां की मौजूदा व्यवस्था को गिराने की कोशिश करेंगे तो इसका अंजाम पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी हो सकता है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर वह इज़रायल के परमाणु ठिकानों को सीधे निशाना बनाने से भी पीछे नहीं हटेगा।
ईरान का कहना है कि यह उसके आंतरिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप है और वह किसी भी कीमत पर अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।
अमेरिका और इज़रायल की रणनीति
इज़रायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया बयानों ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। इन नेताओं का मानना है कि सैन्य दबाव बढ़ाकर ईरान में ऐसी स्थिति पैदा की जा सकती है, जिससे वहां की जनता खुद शासन के खिलाफ खड़ी हो जाए।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी और इज़रायली हमले अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहे हैं। पुलिस चौकियों, अर्धसैनिक संगठनों और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया जा रहा है। तेहरान में कई पुलिस स्टेशनों पर हुए हमलों ने ईरान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर भारी दबाव डाल दिया है।
प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर करने की कोशिश
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन हमलों का मकसद केवल सैन्य ताकत को कमजोर करना नहीं है, बल्कि ईरान के प्रशासनिक नियंत्रण को भी कमजोर करना है। मिडिल लेवल कमांडरों और फील्ड यूनिट्स को निशाना बनाकर शासन तंत्र को पंगु बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है।
यदि ऐसा होता है तो ईरान की सरकार के लिए देश के भीतर संभावित जनविद्रोह को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो सकता है।
‘डूम्सडे’ मिसाइल परीक्षण और तीसरे विश्व युद्ध की आशंका
इसी बीच अमेरिका ने कैलिफोर्निया के पास अपनी ‘डूम्सडे’ मिसाइल का परीक्षण किया है, जिसे अत्यधिक विनाशकारी माना जाता है। इस परीक्षण और मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध ने पूरी दुनिया को चिंतित कर दिया है। कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ा तो दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर पहुंच सकती है।
आम लोगों पर भी पड़ रहा असर
युद्ध की आशंका का असर आम नागरिकों के जीवन पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कई देशों ने मध्य पूर्व के ऊपर से उड़ान भरने वाली फ्लाइट्स को रद्द कर दिया है। केवल भारत में ही सुरक्षा कारणों से करीब 180 उड़ानों को रद्द किया गया है, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है।
उधर, अमेरिकी हमले में एक ईरानी युद्धपोत के डूबने और उसमें सवार 80 से अधिक लोगों की मौत की खबरों ने इस संघर्ष को और दर्दनाक बना दिया है।
शांति की अपील
इस खतरनाक स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए तो यह संघर्ष पूरे विश्व की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में भड़की जंग की आंच अब सीधे समुद्र की लहरों तक पहुंच चुकी है। अमेरिका और इजराइल की आक्रामक रणनीतियों के बीच ईरान के साथ बढ़ते टकराव ने पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। लेकिन इस बार भारत ने साफ संकेत दे दिया है—उसके नागरिकों और उसके समुद्री हितों को कोई आंख उठाकर नहीं देख सकता।
ओमान की खाड़ी में भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक युद्धपोत INS Surat तैनात है। यह महज एक जहाज नहीं, बल्कि हिंद महासागर में भारत की बढ़ती सामरिक ताकत का ऐलान है। हालात बिगड़ते ही यह पोत सीधे राहत और निकासी अभियान में कूद सकता है—और जरूरत पड़ी तो जवाबी ताकत दिखाने में भी सक्षम है।
करीब 163 मीटर लंबा और 7400 टन वजनी आईएनएस सूरत 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से समुद्र चीर सकता है। इसमें 32 मीडियम रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और 16 ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइलें तैनात हैं। आधुनिक रडार, पनडुब्बी रोधी रॉकेट और टॉरपीडो सिस्टम इसे किसी भी चुनौती के लिए तैयार रखते हैं।
भारतीय नौसेना की ‘मिशन डेप्लॉयमेंट’ रणनीति के तहत Strait of Hormuz, Gulf of Aden और Suez Canal से जुड़े अहम समुद्री मार्गों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ये वही रास्ते हैं जिनसे भारत का बड़ा समुद्री व्यापार गुजरता है। अगर इन पर खतरा(tension) मंडराया, तो उसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
साफ है—भारत इस बार मूकदर्शक नहीं है। अगर क्षेत्रीय तनाव की आड़ में कोई ताकत भारतीय हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करती है, तो जवाब सिर्फ कूटनीतिक नहीं, सामरिक भी हो सकता है। संदेश स्पष्ट है: भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार से समझौता नहीं होगा।
मध्य-पूर्व में बढ़ती सियासी और सैन्य हलचल के बीच हिंद महासागर में भारत की मौजूदगी अब सिर्फ रणनीति नहीं, बल्कि एक स्पष्ट चेतावनी भी है।
नई दिल्ली। 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसके दौरान चांद लालिमा लिए दिखाई देगा। इसी वजह से इसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है। खगोल विज्ञान के अनुसार, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया पूरी तरह चंद्रमा को ढक लेती है, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है।
भारत में कब लगेगा चंद्र ग्रहण?
भारतीय समय (IST) के अनुसार अनुमानित समय इस प्रकार है:
🌒 आंशिक ग्रहण शुरू: देर रात लगभग 3:20 बजे
🔴 पूर्ण ग्रहण (Blood Moon) शुरू: सुबह करीब 4:30 बजे
🌕 पूर्ण ग्रहण समाप्त: लगभग 5:40 बजे
🌑 ग्रहण समाप्त: सुबह लगभग 6:50 बजे
(सटीक समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।)
कितनी देर दिखेगा ‘ब्लड मून’?
पूर्ण चंद्र ग्रहण की अवस्था लगभग 1 घंटा 10 मिनट तक रहने की संभावना है। इस दौरान चंद्रमा गहरे लाल या तांबे रंग का दिखाई देगा।
हालांकि भारत के कई हिस्सों में सूर्योदय के कारण पूरा चरण स्पष्ट रूप से देखने में कठिनाई हो सकती है। पश्चिमी और मध्य भारत में दृश्यता अपेक्षाकृत बेहतर रहने की संभावना है।
क्यों लाल दिखता है चांद?
जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तो सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती हैं। वायुमंडल नीली रोशनी को अधिक बिखेर देता है और लाल रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है। इसी कारण चांद लालिमा लिए दिखाई देता है।
क्या रखें सावधानी?
चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना सुरक्षित होता है।
दूरबीन या टेलीस्कोप से देखने पर दृश्य और भी आकर्षक दिखता है।
किसी विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं होती (यह सूर्य ग्रहण से अलग है)।
धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं
भारत में चंद्र ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं। कई लोग ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करते और मंत्र जाप या पूजा-पाठ करते हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है।
3 मार्च 2026 की यह खगोलीय घटना आसमान में दुर्लभ नजारा पेश करेगी। मौसम साफ रहा तो देशभर में लाखों लोग ‘ब्लड मून’ का अद्भुत दृश्य देख सकेंगे।
तेहरान/दोहा/दुबई। ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते टकराव के बीच सुरक्षा कारणों से हजारों अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद या सीमित कर दिया है।
एयरलाइंस कंपनियों ने यात्रियों को एडवाइजरी जारी कर वैकल्पिक रूट अपनाने की जानकारी दी है। दुबई, दोहा, अबू धाबी और रियाद जैसे प्रमुख एयर हब पर भारी भीड़ और अफरातफरी का माहौल देखा गया।
किन-किन देशों पर असर?
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ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने के बाद कतर, सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात ने सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ हमलों के कारण हवाई यातायात प्रभावित हुआ है। खाड़ी देशों के एयरस्पेस से गुजरने वाली यूरोप-एशिया उड़ानों को भी वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़े हैं, जिससे उड़ानों में देरी और लागत बढ़ गई है।
सैन्य टकराव और बढ़ी अनिश्चितता
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तनाव के बीच अमेरिकी युद्धपोत पहले से ही फारस की खाड़ी में तैनात हैं। इस बीच Islamic Revolutionary Guard Corps ने ब्रिगेडियर जनरल Ahmad Vahidi को नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि ईरान सैन्य रूप से पीछे हटने के मूड में नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं संभले तो क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, शेयर बाजार और अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर पड़ेगा।