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  • आसमान में अफरातफरी, ज़मीन पर गुस्सा: इंडिगो संकट में टिकट 70 हज़ार पार, जनता पूछ रही है  “मोदी सरकार और DGCA चुप क्यों?”

    आसमान में अफरातफरी, ज़मीन पर गुस्सा: इंडिगो संकट में टिकट 70 हज़ार पार, जनता पूछ रही है “मोदी सरकार और DGCA चुप क्यों?”

    इंडिगो संकट के बाद हवाई टिकट 70 हजार तक पहुंचे। दिल्ली-बेंगलुरु- मुंबई से पटना फ्लाइट दाम 5-7 गुना। जनता नाराज़, सरकार और DGCA से कार्रवाई की मांग।

    इंडिगो एयरलाइंस में तकनीकी खराबी और पायलट-क्रू की कमी के कारण देशभर में सैकड़ों फ्लाइटें रद्द होने के बाद हवाई यात्रा में अफरातफरी मच गई है। सबसे बड़ा झटका टिकट दामों में आया, जो सामान्य दिनों की तुलना में 5 से 7 गुना तक बढ़ गए।इंडिगो संकट से पैदा विचित्र हालात में स्पाइसजेट, एयर इंडिया एक्सप्रेस, एयर इंडिया और अकासा एयरलाइंस कूटकर किराया वसूल रही है। पटना का टिकट दिल्ली से 40 हजार, मुंबई से 36 हजार और बेंगलुरु से 70 हजार पार हो गया है।इंडिगो संकट के बाद हवाई टिकट 70 हजार तक पहुंचे। दिल्ली-बेंगलुरु- मुंबई से पटना फ्लाइट दाम 5-7 गुना। जनता नाराज़, सरकार और DGCA से कार्रवाई की मांग।

    बेंगलुरु- पटना का टिकट 70,000 रुपये

    साधारण दिनों में 8–10 हजार में मिलने वाला टिकट 70,000 रुपये से ऊपर बिका। कई वेबसाइटों पर लगातार कीमत बढ़ती दिखी।


    जनता का सीधा सवाल: मंत्रालय और DGCA चुप क्यों?

    सोशल मीडिया पर यात्रियों का आरोप है कि:

    • हजारों फ्लाइटें रद्द हुईं
    • करोड़ों रुपये टिकट में फंस गए
    • रिफंड धीमा है
    • बाकी एयरलाइंस ने किराये बढ़ा दिए

    लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA की ओर से सख्त दखल नहीं दिखा।

    लोग कह रहे हैं —

    “संकट में राहत देने के बजाय किराये आसमान भेज दिए, कोई रोक नहीं।”


    मंत्रालय पर निगरानी ढीली रखने के आरोप

    वर्तमान नागरिक उड्डयन मंत्री Kinjarapu Ram Mohan Naidu हैं।
    यात्रियों की शिकायत है कि:

    • टिकट प्राइस की कोई सीमा तय नहीं
    • रिफंड की गैर–साफ़ व्यवस्था
    • वैकल्पिक उड़ानों का कड़ाई से प्रबंध नहीं
    • एयरलाइंस पर कठोर निर्देश जारी नहीं किए गए

    इसलिए गुस्सा उमड़ा है कि:

    “संकट में भी आम जनता को बचाने के बजाय बाजार अपने आप चल रहा है।”

    सरकार की ओर से अभी तक मूल्य नियंत्रण या राहत पैकेज का कोई ऐलान नहीं हुआ।


    कई शहरों में दाम रिकॉर्ड स्तर पर

    दिल्ली – पटना

    • कई टिकट 40,000+
    • 5-6 दिसंबर में सिर्फ दो फ्लाइट दिखीं, दोनों महंगी

    मुंबई – पटना

    • सीधी फ्लाइट नहीं
    • एक-स्टॉप टिकट 80,000 रुपये तक

    बेंगलुरु – पटना

    • टिकट 72,000 रुपये पार

    दरभंगा, गया, पूर्णिया

    • किराये में 2–6 गुना बढ़ोतरी
    • कुछ तारीखों पर फ्लाइट ही नहीं

    नागरिकों का आरोप: संकट में बाजार को खुली छूट

    यात्रियों का कहना है:

    • “इंडिगो की उड़ानें बंद, बाकी कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं”
    • “मंत्रालय और DGCA केवल देख रहे हैं”
    • “कोई प्राइस कैप क्यों नहीं?”

    विशेषज्ञों का कहना है कि DGCA के पास आपातकालीन मूल्य-नियंत्रण के अधिकार हैं, लेकिन उपयोग नहीं किए गए।


    राजनीतिक सवाल तेज

    विपक्ष और यात्री पूछ रहे हैं:

    • इंडिगो संकट के समय अमल में क्या प्लान था?
    • यात्रियों के लिए राहत मैकेनिज्म कहाँ है?
    • टिकट कीमत इतनी तेज़ कैसे बढ़ी?

    मोदी सरकार की आलोचना हो रही है कि:

    “हर क्षेत्र में महंगाई बढ़ी, अब हवाई यात्रा भी आम आदमी की पहुंच से बाहर।”


    इंडिगो संकट ने दिखाया कि:

    • एयरलाइंस एक-दूसरे पर निर्भर हैं
    • कीमतें नियंत्रण में नहीं
    • यात्री सुरक्षा और सुविधा पर गंभीर सवाल खड़े हैं

    जब तक सख्त निगरानी और पारदर्शी प्राइस-रूल नहीं आते,
    यात्रियों का गुस्सा कम होने वाला नहीं।

  • मदरसों और मस्जिदों में भी लगाए जाएं सीसीटीवी कैमरे: अरुण गोविल ने संसद में जोरदार अपील की

    मदरसों और मस्जिदों में भी लगाए जाएं सीसीटीवी कैमरे: अरुण गोविल ने संसद में जोरदार अपील की

    नई दिल्ली: सांसद और टीवी के सुपरहिट सीरियल रामायण में भगवान राम का किरदार निभा चुके अरुण गोविल ने संसद में सुरक्षा और सार्वजनिक निगरानी को लेकर अहम सुझाव पेश किया। उन्होंने कहा कि देशभर के मंदिर, गुरुद्वारे, चर्च, स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों में जहां पहले से ही सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते हैं, वहीं मदरसों और मस्जिदों में भी आधुनिक सुरक्षा मानकों के तहत कैमरे लगाना अत्यंत आवश्यक है।

    अरुण गोविल ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि मस्जिदें भी सार्वजनिक स्थल हैं, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से इन धार्मिक स्थलों पर निगरानी प्रणाली अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देशों में धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से लागू की जाती है।

    गोविल ने कहा, “जब सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए अनिवार्य हैं, तो मदरसों और मस्जिदों को इस दिशा में पीछे क्यों रहना चाहिए? सुरक्षा, पारदर्शिता और निगरानी हर सार्वजनिक स्थल का मूलभूत अधिकार होना चाहिए।”

    सांसद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह देशव्यापी सुरक्षा नीति के तहत सभी सार्वजनिक धार्मिक स्थलों पर आधुनिक सुरक्षा मानक लागू करने के लिए कदम उठाए। उनका मानना है कि ऐसा करने से न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि किसी भी अप्रिय घटना या आपराधिक गतिविधि की जांच और रोकथाम भी तेज होगी।

    गोविल ने यह भी सुझाव दिया कि सभी धर्मों के सार्वजनिक स्थलों पर समान सुरक्षा मानक लागू किए जाएं, ताकि कोई भेदभाव न हो और देशवासियों का विश्वास बढ़े। उनके अनुसार, यह कदम न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले लोगों की सुरक्षा और मन की शांति सुनिश्चित करेगा।

  • कफ सिरप कांड: 2000 करोड़ का अवैध कारोबार, ईडी की जांच से हिल गया नेटवर्क; कई सफेदपोश निगरानी में

    कफ सिरप कांड: 2000 करोड़ का अवैध कारोबार, ईडी की जांच से हिल गया नेटवर्क; कई सफेदपोश निगरानी में

    आशुतोष मिश्रा

    लखनऊ। नशीले कफ सिरप की तस्करी करने वाला यूपी आधारित एक बड़ा सिंडीकेट करीब 2000 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार कर चुका है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क की जड़ें इतनी गहरी हैं कि अधिकारी भी हैरान हैं। अब ईडी इस पूरे रैकेट को जोड़कर उन बाहुबलियों और सफेदपोश चेहरों को बेनकाब करने की तैयारी में है, जिनके संरक्षण में यह अवैध धंधा फलता-फूलता रहा।


    तीन राज्यों और विदेश तक फैला नेटवर्क

    सूत्रों की मानें तो ईडी ने एसटीएफ, एसआईटी, जिला पुलिस और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की अब तक की कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड जुटा लिया है। जांच में सामने आया कि इस सिंडीकेट ने तीन राज्यों और विदेश में करीब 2000 करोड़ रुपये की नशीली कफ सिरप की तस्करी की है।

    जांच एजेंसियां फर्जी फर्मों, शेल कंपनियों और आरोपियों की संपत्तियों की पड़ताल में जुटी हैं। कई संदिग्ध बैंक खातों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ मिली हैं, जिनका लिंक इस अवैध कारोबार से जोड़ा जा रहा है।


    बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की तलाश, लुकआउट नोटिस जारी

    कफ सिरप रैकेट में आरोपी बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ ने लुकआउट नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है। लगातार छापेमारी के बावजूद एसटीएफ अब तक उसके किसी ठिकाने तक नहीं पहुंच सकी है।

    सूत्रों के मुताबिक आलोक सिंह ने चार दिन पहले राजधानी की एक अदालत में आत्मसमर्पण की अर्जी भी दी है। वह गाजियाबाद की एफआईआर में नामजद है, जबकि लखनऊ में दर्ज केस की विवेचना में उसका नाम बढ़ाया गया है।


    माफिया की भूमिका पर सवाल, एसटीएफ की जांच भी कटघरे में

    इस रैकेट को संरक्षण देने वाले एक बाहुबली माफिया से भी अब तक पूछताछ न होने पर एसटीएफ की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि आरोपी माफिया की आरोपियों से गहरी सांठगांठ है, लेकिन फिर भी उसे तलब नहीं किया गया।


    दुबई कनेक्शन: विशाल सिंह की तलाश तेज

    जांच एजेंसियां उन कड़ियों को भी जोड़ रही हैं, जिनके जरिए आरोपी अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह को दुबई ले जाया गया था। इस कड़ी में जौनपुर निवासी विशाल सिंह की तलाश की जा रही है। बताया जाता है कि विशाल सिंह एक पूर्व आईएएस अधिकारी का करीबी है और लखनऊ में रियल एस्टेट का बड़ा कारोबार करता है।

    सूत्रों के अनुसार, वह बाहुबली नेटवर्क की मदद से सुल्तानपुर रोड पर जमीनों की खरीद-फरोख्त करता है। ईडी और एसटीएफ को उससे दुबई कनेक्शन से जुड़ी अहम जानकारियों की उम्मीद है।


    जांच तेज, कई बड़े चेहरे बेनकाब होने की संभावना

    ईडी की लखनऊ और प्रयागराज टीमें इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही कई बड़े नाम—राजनीति, पुलिस और कारोबार जगत—इस जांच की आंच में आ सकते हैं।

    कफ सिरप कांड सिर्फ एक अवैध दवा कारोबार नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित अपराध की ओर इशारा करता है, जिसके पीछे ताकतवर संरक्षण और करोड़ों की समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हुई है।

  • Trump Maduro ultimatum Venezuela-US tension: अब देश छोड़ दो, वरना हालात और बिगड़ेंगे:डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति मादुरो को दिया अल्टीमेटम

    Trump Maduro ultimatum Venezuela-US tension: अब देश छोड़ दो, वरना हालात और बिगड़ेंगे:डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति मादुरो को दिया अल्टीमेटम

    अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को एक फोन कॉल में साफ शब्दों में चेतावनी दी है—“अब देश छोड़ दो, वरना हालात और बिगड़ेंगे।”

    जानकारी के मुताबिक यह बातचीत हाल ही में हुई, जिसमें ट्रंप ने मादुरो के शासन को “अवैध और दमनकारी” करार दिया। ट्रंप ने कहा कि वेनेज़ुएला की जनता “तानाशाही से मुक्ति चाहती है” और मादुरो को सत्ता छोड़कर देश से बाहर जाना चाहिए ताकि वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल हो सके।

    हालांकि मादुरो सरकार ने इस कथित कॉल को “फर्जी” बताया है और कहा है कि विपक्ष तथा अमेरिकी राजनीति में चल रहे चुनावी माहौल का फायदा उठाने के लिए इस तरह की कहानियां फैलाई जा रही हैं। वेनेज़ुएलाई अधिकारियों ने कहा कि मादुरो “जनता के समर्थन” से चुने गए हैं और किसी भी विदेशी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।

    ट्रंप और मादुरो के बीच संबंध हमेशा तनावपूर्ण रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान भी ट्रंप प्रशासन ने वेनेज़ुएला पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। अब इस नए विवाद से एक बार फिर लैटिन अमेरिका में भू-राजनीतिक उथल-पुथल बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह कॉल वास्तव में हुई है, तो आने वाले दिनों में वेनेज़ुएला में राजनीतिक हलचल और तेज हो सकती है। दूसरी ओर, मादुरो सरकार ने देश में “स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने” का भरोसा दिलाया है।

    शर्तों की वजह से अटका समाधान

    सूत्रों के मुताबिक बातचीत के दौरान मादुरो ने दो प्रमुख मांगें रखीं:

    1. वैश्विक स्तर पर पूर्ण माफी, ताकि उन पर और उनकी टीम पर लगे सभी मौजूदा आरोप हट जाएं।
    2. वेनेज़ुएला की सेना पर उनका नियंत्रण बना रहे, चाहे भविष्य में देश में स्वतंत्र चुनाव ही क्यों न हों।

    अमेरिका ने दोनों शर्तों को प categorically खारिज कर दिया और दोहराया कि मादुरो को “तुरंत पद छोड़ना चाहिए”। इसके बाद मादुरो प्रशासन ने बातचीत बहाल करने की कोशिश की, लेकिन अमेरिकी पक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

    रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मादुरो शासन पर अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक और सैन्य दबाव बनाती है।


    कैरेबियन में बढ़ी हलचल

    बातचीत टूटने के बाद अमेरिका ने न केवल अपने बयान कड़े किए, बल्कि अपनी सैन्य गतिविधियां भी तेज कर दीं। ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिकी सैन्य अभियान कभी भी शुरू हो सकते हैं। इसके बाद कैरेबियन क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों की गतिविधि अचानक बढ़ गई।

    अमेरिका का आरोप है कि वेनेज़ुएला से निकलने वाली ड्रग तस्करी की वजह से अमेरिकी समाज में लगभग 1 लाख मौतें हुई हैं।
    सीनेटर डेव मैकॉरमिक ने इसे “फेंटेनाइल, कोकीन और ओपिऑयड का युद्ध” बताते हुए मादुरो सरकार पर संकट बढ़ाने का आरोप लगाया।

    दूसरी ओर, आलोचकों ने अमेरिकी कार्रवाई को एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल बताया है। कांग्रेस एक विवादित डबल-टैप हमले की जांच भी कर रही है, जिसने बहस को और गरमा दिया है।


    जवाबी कदम और बढ़ता गतिरोध

    अमेरिका द्वारा एयरस्पेस प्रतिबंध लगाने के बाद वेनेज़ुएला ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई विदेशी एयरलाइनों के परिचालन अधिकार रद्द कर दिए। मादुरो सरकार का कहना है कि अमेरिका की मौजूदा नीति “औपनिवेशिक आक्रामकता” जैसी है और वह कैरेबियन में तनाव बढ़ाकर वेनेज़ुएला को झुकाना चाहता है।

    एयरस्पेस बंद होने का असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ा है—

    • कई रूट बदले गए,
    • यात्रियों को घंटों अतिरिक्त समय लगा,
    • और एयरलाइंस को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय उड्डयन संगठनों ने हालात पर चिंता जताई है और स्थिति को “गंभीर और अस्थिर करने वाली” बताया है।


    आगे क्या?

    अमेरिका और वेनेज़ुएला के रिश्ते जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उससे विशेषज्ञों को आशंका है कि कैरेबियन क्षेत्र आने वाले हफ्तों में नई भू-राजनीतिक टकराहट का केंद्र बन सकता है।
    अभी तक न तो कॉल की आधिकारिक पुष्टि हुई है और न ही किसी पक्ष ने पीछे हटने के संकेत दिए हैं।

  • Congress demands Fadnavis’ resignation: डॉ. संपदा मुंडे की मौत संस्थागत हत्या, फडणवीस इस्तीफा दें : वर्षा गायकवाड़

    Congress demands Fadnavis’ resignation: डॉ. संपदा मुंडे की मौत संस्थागत हत्या, फडणवीस इस्तीफा दें : वर्षा गायकवाड़

    नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने महाराष्ट्र की चिकित्सक डॉ. संपदा मुंडे की मौत को “संस्थागत हत्या” करार देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे की मांग की है।
    पार्टी ने इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) या न्यायिक जांच गठित करने की भी मांग की है ताकि सच्चाई सामने आए और दोषियों को सज़ा मिल सके।

    दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद वर्षा गायकवाड़ और महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटील ने कहा कि सतारा जिले के एक अस्पताल में कार्यरत डॉ. संपदा मुंडे को राजनीतिक दबाव, ब्लैकमेलिंग और यौन उत्पीड़न के कारण आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया।

    कांग्रेस नेताओं ने बताया कि डॉ. संपदा पर एक चीनी मिल, जो पूर्व भाजपा सांसद रणजीत सिंह नाईक निम्बालकर की है, के अधिकारियों द्वारा फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेरफेर करने का दबाव डाला जा रहा था।
    जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उन्हें लगातार परेशान और ब्लैकमेल किया गया। शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

    वर्षा गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने बिना किसी जांच के नाईक को क्लीन चिट दी, जो स्पष्ट रूप से सत्ता के दुरुपयोग का मामला है।
    उन्होंने राज्य महिला आयोग के रवैये पर भी नाराज़गी जताई, कहा कि आयोग ने पीड़िता के परिवार से मुलाकात तक नहीं की और उल्टे चरित्र हनन में शामिल हो गया।

    अतुल लोंढे पाटील ने कहा कि यह घटना आरएसएस की मानसिकता को दर्शाती है, जो दलितों और आदिवासियों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया रखती है और अपराधियों को संरक्षण देती है।
    उन्होंने मांग की कि फडणवीस को मुख्यमंत्री और गृह मंत्री दोनों पदों से तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

    लोंढे ने यह भी बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने डॉ. संपदा मुंडे के परिवार से बात कर न्याय की इस लड़ाई में कांग्रेस का पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया है।

  • HIGH ALERT! चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ ने पकड़ी रफ्तार, 35 से ज्यादा उड़ानें रद्द, आंध्र प्रदेश के 19 जिलों में रेड अलर्ट

    HIGH ALERT! चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ ने पकड़ी रफ्तार, 35 से ज्यादा उड़ानें रद्द, आंध्र प्रदेश के 19 जिलों में रेड अलर्ट

    नई दिल्ली। पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में तेजी से सक्रिय हो रहा भीषण चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ अब बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, यह तूफान वर्तमान में मछलीपट्टनम से लगभग 100 किलोमीटर और काकीनाडा से करीब 180 किलोमीटर की दूरी पर है। आईएमडी ने चेतावनी जारी करते हुए आंध्र प्रदेश के 19 जिलों में रेड अलर्ट घोषित किया है और अगले 24 घंटे में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है।

    35 से अधिक उड़ानें रद्द

    तूफान के असर से हवाई सेवाओं पर भी बड़ा प्रभाव पड़ा है। तेलंगाना के शमशाबाद हवाई अड्डे और आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और राजमुंद्री हवाई अड्डों से संचालित होने वाली 35 से अधिक उड़ानें रद्द की गई हैं। इनमें इंडिगो की 30, एयर इंडिया की 2 और एयर इंडिया एक्सप्रेस की 5 उड़ानें शामिल हैं।

    110 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं

    आईएमडी ने चेताया है कि विशाखापत्तनम के तटीय इलाकों में हवा की रफ्तार 90 से 100 किमी/घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर यह 110 किमी/घंटे तक भी जा सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, ‘मोंथा’ उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए आज शाम से रात के बीच मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच काकीनाडा के तट को पार कर सकता है।

    रेलवे ने बनाई विशेष रणनीति

    रेल मंत्रालय ने भी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सभी जोन को सतर्क कर दिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और गुंटूर मंडलों में ‘वॉर रूम’ सक्रिय कर यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेन संचालन पर नजर रखी जाए। मशीनरी, राहत सामग्री और तकनीकी स्टाफ को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

    पड़ोसी राज्यों में भी असर

    ‘मोंथा’ का प्रभाव केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। आईएमडी के मुताबिक, तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल और कर्नाटक के कई जिलों में भी भारी बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान है। तटीय क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, ‘मोंथा’ की गति और दिशा पर अगले 12 घंटे बेहद निर्णायक रहेंगे। यदि इसकी रफ्तार और तीव्रता बढ़ती है, तो आंध्र प्रदेश और आसपास के राज्यों में बड़े पैमाने पर बिजली, संचार और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

  • White House Clarification on H-1B Visa:H-1B वीज़ा पर 88 लाख रुपये शुल्क की अफवाह पर व्हाइट हाउस का स्पष्टीकरण- मौजूदा धारकों को नहीं देना होगा शुल्क

    White House Clarification on H-1B Visa:H-1B वीज़ा पर 88 लाख रुपये शुल्क की अफवाह पर व्हाइट हाउस का स्पष्टीकरण- मौजूदा धारकों को नहीं देना होगा शुल्क

    नई दिल्ली। अमेरिका में H-1B वीज़ा को लेकर एक नई नीति ने दुनियाभर में हलचल मचा दी है। डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने इस वीज़ा पर शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसके तहत नए आवेदकों को अब H-1B वीज़ा के लिए 1 लाख अमेरिकी डॉलर यानी लगभग ₹88 लाख चुकाने होंगे। इस फैसले से अमेरिका में काम करने के इच्छुक हजारों भारतीय तकनीकी पेशेवरों को सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
    कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यह शुल्क हर साल देना होगा और मौजूदा वीज़ा धारकों को भी वीज़ा रिन्यूअल के समय यही राशि चुकानी पड़ेगी, अन्यथा उन्हें अमेरिका छोड़कर अपने देश लौटना होगा। इन खबरों से लोगों में भ्रम और चिंता का माहौल बन गया।
    इस गड़बड़ी को देखते हुए व्हाइट हाउस ने शनिवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर सभी अफवाहों का खंडन किया। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क केवल नए आवेदकों पर लागू होगा। मौजूदा H-1B वीज़ा धारकों को न तो अमेरिका छोड़ना पड़ेगा और न ही वीज़ा रिन्यूअल के लिए इतनी बड़ी राशि देनी होगी।


    व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए कहा, “जो H-1B वीज़ा धारक फिलहाल देश के बाहर हैं, उन्हें अमेरिका लौटने के लिए 1 लाख डॉलर का शुल्क नहीं देना होगा। सरकार की नई नीति केवल नए आवेदकों के लिए है, मौजूदा वीज़ा धारकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।”
    गौरतलब है कि अमेरिका में H-1B वीज़ा पर रहने वाले लोगों में करीब 70% भारतीय हैं, जो मुख्य रूप से आईटी सेक्टर में कार्यरत हैं। ट्रम्प प्रशासन के इस नए निर्णय से अमेरिका जाने की योजना बना रहे भारतीयों के लिए रास्ता कठिन हो सकता है। कई लोगों का मानना है कि इससे उनका अमेरिका में काम करने का सपना टूट सकता है।

  • Election Newdelhi: हमने EVM हैक किया तो राहुल गांधी को क्यों बुरा लग रहा है: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

    Election Newdelhi: हमने EVM हैक किया तो राहुल गांधी को क्यों बुरा लग रहा है: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

    नई दिल्ली। देश में EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कई बार EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि EVM के जरिए चुनावी प्रक्रिया में छेड़छाड़ की जा सकती है और इससे चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने और कई विपक्षी दलों ने मांग की है कि चुनाव मतपत्रों के जरिए कराए जाएं।
    इस बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक मीडिया बातचीत में ऐसा बयान दिया है जिससे विवाद और गहराया है। जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि विपक्ष का आरोप है कि भाजपा और उसके सहयोगी दल EVM की मदद से चुनाव जीतते हैं और चुनाव आयोग भी उनके पक्ष में है, तो रेखा गुप्ता ने जवाब दिया, “70 साल तक वो लोग (कांग्रेस) EVM हैक करते रहे तो उन्हें फर्क नहीं पड़ा, अब हमने किया तो उन्हें बुरा लग रहा है, ये अच्छा है।”
    रेखा गुप्ता के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। आम आदमी पार्टी ने भी इस वीडियो को शेयर किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वीडियो साझा करते हुए लिखा, “दिल्ली की मुख्यमंत्री क्या कह रही हैं, एक बार देखिए।”


    इस बयान पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। एक एक्स यूजर ने लिखा, “रेखा गुप्ता कह रही हैं कि कांग्रेस 70 साल से EVM हैक कर रही थी, जबकि भारत में EVM से चुनाव 2004 के बाद ही शुरू हुए हैं।” भारत में अब तक पांच लोकसभा चुनाव EVM से हुए हैं, जिनमें से तीन भाजपा ने जीते हैं। 2004 से पहले देश में चुनाव मतपत्रों के जरिए होते थे।
    रेखा गुप्ता के इस बयान को लेकर विपक्ष का कहना है कि यह राहुल गांधी के आरोपों की अप्रत्यक्ष पुष्टि है। इससे EVM की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर फिर से सवाल उठने लगे हैं।

  • Trump’s Tariffs on India-Russia Trade:भारत-रूस व्यापार पर ट्रंप की टैरिफ सही है- जेलेंस्की का बड़ा बयान

    Trump’s Tariffs on India-Russia Trade:भारत-रूस व्यापार पर ट्रंप की टैरिफ सही है- जेलेंस्की का बड़ा बयान

    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। अब इस मसले पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भी खुलकर सामने आ गए हैं। जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस नीति का समर्थन किया है जिसके तहत रूस से व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा रहा है। उनका कहना है कि यह कदम सही दिशा में है और रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए ज़रूरी है।

    “रूस से व्यापार करने वालों पर टैरिफ सही” – जेलेंस्की

    एक इंटरव्यू में जेलेंस्की से सवाल पूछा गया कि क्या ट्रंप की टैरिफ योजना उलटी पड़ रही है? इस पर उन्होंने साफ कहा –

    “मैं समझता हूं कि रूस के साथ सौदे जारी रखने वाले देशों पर टैरिफ लगाना बिल्कुल सही है।”

    उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है जब भारत पर 25% अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ लगाया गया है क्योंकि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदता है। ट्रंप ने हाल ही में यूरोपीय देशों को भी रूस से तेल खरीदने पर धमकी दी थी।

    पीएम मोदी का भी जिक्र

    इंटरव्यू के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भी जिक्र हुआ। हाल ही में ये तीनों नेता शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में मिले थे और इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। मोदी-पुतिन बैठक को लेकर पूरी दुनिया की नज़रें टिकी रहीं।

    भारत पर ट्रंप के आरोप

    ट्रंप ने भारत पर सीधा आरोप लगाया कि रूस से तेल खरीदकर भारत भारी मुनाफा कमा रहा है। उन्होंने कहा –

    “भारत को यूक्रेन में मर रहे लोगों की परवाह नहीं है। भारत की खरीद से रूस को आर्थिक मदद मिल रही है और वह युद्ध को और तेज कर रहा है।”

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यहां तक कहा कि यूरोपीय देशों पर भी इसी तरह के दबाव बनाए जाएंगे ताकि रूस की कमाई के रास्ते बंद हों।

    “आग में घी” डालने जैसा बयान

    भारत और अमेरिका के बीच पहले से तनावपूर्ण टैरिफ विवाद के बीच जेलेंस्की का यह बयान माहौल को और गर्म कर सकता है। रूस के खिलाफ अमेरिका की सख्त रणनीति का यूक्रेन समर्थन कर रहा है, लेकिन भारत और यूरोप जैसे देशों के लिए यह सीधा दबाव बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।