मुंबई: राज्य सरकार के पवित्र पोर्टल के सही ढंग से संचालन न होने और इसके चलते शिक्षकों की नियुक्तियों को रद्द किए जाने पर शनिवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को कड़ी फटकार लगाई। न्यायालय ने यह भी नाराजगी जताई कि सीधे नियुक्त किए गए शिक्षकों की नियुक्तियों को नियमित करने के लिए 100 से अधिक आदेश दिए गए, लेकिन उनका कोई ठोस असर नहीं हुआ।
न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति अश्विन भोबे की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि राज्य के महाधिवक्ता ने स्वयं विभिन्न परिसंवादों में पवित्र पोर्टल के उपयोग की जानकारी दी थी, फिर भी शिक्षा अधिकारी इस प्रणाली को समझने में असफल रहे हैं। इस संदर्भ में एक शिक्षिका और दो संस्थाओं ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं, जिनमें उन आदेशों को रद्द करने की मांग की गई थी, जिनमें शिक्षकों की नियुक्तियों को मान्यता देने से इनकार किया गया था।
पवित्र पोर्टल राज्य के शालेय शिक्षण व क्रीड़ा विभाग का एक ऑनलाइन मंच है, जिसे जिला परिषद और महानगरपालिका की शालाओं में शिक्षक भर्ती के लिए शुरू किया गया था। लेकिन याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि यह पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा है और इसी आधार पर शिक्षकों की नियुक्तियों को खारिज किया जा रहा है।
न्यायालय ने सवाल उठाया कि हर शिक्षक को अपनी नियुक्ति की मंजूरी के लिए कोर्ट क्यों आना पड़ता है। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि अब तक कितने शिक्षकों की नियुक्तियां पवित्र पोर्टल के माध्यम से की गई हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी दी जाए। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि इस मामले को पूर्णपीठ के समक्ष भेजा जा सकता है।
खंडपीठ ने याचिकाकर्ता शिक्षकों के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि शिक्षा अधिकारियों को आदेश देकर और कार्रवाई करके हम थक चुके हैं। इसलिए अब पवित्र पोर्टल के उपयोग को लेकर स्पष्ट मार्गदर्शक सिद्धांत जारी करने की आवश्यकता है।
इस बीच, अतिरिक्त सरकारी वकील मनीष पाबळे ने न्यायालय से राज्य का पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की है।
Bombay High Court: पवित्र पोर्टल की खामियों पर हाईकोर्ट सख्त, शिक्षा विभाग को लगाई फटकार

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